सावन मनभावन आया है...
- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
सावन मनभावन आया है, याद तुम्हारी आई प्रियतम।
पुलकित हर्षित है वसुंधरा, मैं ही हूँ मुरझाई प्रियतम ।।
ताल दे रहीं बूँदें छम-छम, मौन हुई है मेरी पायल।
प्रेमी युगल प्रणय क्रीड़ा रत, देख हुआ है अंतस् घायल।
छवि-दर्शन कर तस्वीरों में, आती मुझे रुलाई प्रियतम ।।
सावन मनभावन आया है, याद तुम्हारी आई प्रियतम।।
नेह-मेह स्वस्त्ययन कर रहे, उमड़-घुमड़ गरजें बादल।
झड़ी लगी चक्षुज-बूँदों की, अस्त-व्यस्त नयनों का काजल ।
खिलकर मधुमालती बुलाती, मन को नहीं लुभाई प्रियतम।।
सावन मनभावन आया है, याद तुम्हारी आई प्रियतम।।
प्रेम रंग में मन अनुरंजित, रंग नहीं अब देखे दूजा ।
शिव भक्तों पर करें अनुग्रह, करती रहती मन से पूजा।
निविड़ तमस कारा पीड़ा की, दिवस लगें दुखदाई प्रियतम।।
सावन मनभावन आया है, याद तुम्हारी आई प्रियतम।।








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