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निजी सुरक्षा एजेंसियों को प्रशिक्षण देने के लिए हाइब्रिड मॉडल बनाए सीआईएसएफ : शाह

गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश).  गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को एक ऐसे हाइब्रिड सुरक्षा मॉडल के विकास की वकालत की, जिसके तहत सीआईएसएफ निजी सुरक्षा एजेंसियों को प्रशिक्षित एवं प्रमाणित कर सके, ताकि वे देश की विभिन्न औद्योगिक और विनिर्माण इकाइयों की हिफाजत की जिम्मेदारी प्रभावी रूप से संभाल पाएं। उन्होंने कहा कि भारत जब 25 अरब डॉलर की मजबूत अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ा, तब 1969 में गठित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने देश में औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने के लिए एक मूक ‘कर्मयोगी' की तरह काम किया और निजी विनिर्माण इकाइयों की रक्षा की। गृहमंत्री ने कहा कि 25 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था से 50 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा में विनिर्माण क्षेत्र में कई इकाइयां स्थापित की जाएंगी और सीआईएसएफ को नए परिदृश्यों का सामना करना पड़ेगा। कोई ब्योरा दिए बिना शाह ने कहा कि लगभग 1.64 लाख सुरक्षाकर्मियों से लैस सीआईएसएफ की भूमिका जल्द बढ़ सकती है। गृहमंत्री यहां सीआईएसएफ के 53वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया, “निजी सुरक्षा एजेंसियों का काम तेजी से बढ़ रहा है। हम उनकी कार्य प्रणाली निर्धारित करने के लिए नियम-कायदे लेकर आए हैं। क्या सीआईएसएफ निजी सुरक्षा एजेंसियों के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी ले सकती है?” शाह ने कहा, “क्या हम ऐसी निजी विनिर्माण इकाइयों के लिए कोई सुरक्षा मॉडल तैयार कर सकते हैं, जिनमें 1,000 से 5,000 कर्मचारी कार्यरत हैं? हमें निजी सुरक्षा एजेंसियों की दक्षता बढ़ानी होगी, क्योंकि देश की सभी औद्योगिक और विनिर्माण इकाइयों की सुरक्षा का दायित्व अकेले सीआईएसएफ नहीं पूरा कर सकती है।” गृहमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि औद्योगिक सुरक्षा में शामिल सभी एजेंसियां ​​​​इस क्षेत्र की हिफाजत में उसके जितनी कुशल हों, यह सुनिश्चित करना सीआईएसएफ की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा हाइब्रिड सुरक्षा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसमें सीआईएसएफ रणनीति तैयार करेगी और जहां निजी एजेंसियों और सीआईएसएफ, दोनों के सुरक्षाकर्मी साथ काम कर पाएंगे, ताकि अर्धसैनिक बल इस जिम्मेदारी से धीरे-धीरे बाहर आकर अपने कार्यों को निजी सुरक्षा एजेंसियों को सौंप सके। सीआईएसएफ मौजूदा समय में तेल, बिजली, सूचना प्रौद्योगिकी, नागरिक उड्डयन, दिल्ली मेट्रो, एयरोस्पेस और परमाणु ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों के कुल 354 सरकारी व निजी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही है। शाह ने अर्धसैनिक बल को निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर अपने दृष्टिकोण को ‘आक्रामक रूप से' बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ फिलहाल 11 निजी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रही है और यह संख्या काफी कम है। मौजूदा समय में मैसूर, बेंगलुरु और पुणे में इंफोसिस परिसर, हरिद्वार में पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क तथा गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी उन निजी प्रतिष्ठानों में शामिल है, जो सीआईएसएफ की सुरक्षा निगरानी के दायरे में आते हैं। उन्होंने सीआईएसएफ को 25 साल का खाका भी तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि भारत जब अपनी आजादी के 100वें वर्ष में प्रवेश करे, तब तक यह एक ‘परिणाम-उन्मुख' सुरक्षा एजेंसी के रूप में उभर सके। सीमाओं और बंदरगाहों के पास स्थित औद्योगिक इकाइयों पर ड्रोन के बढ़ते खतरे के मद्देनजर गृहमंत्री ने सीआईएसएफ से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर इसके खिलाफ एक प्रभावी प्रौद्योगिकी तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि विभिन्न हवाईअड्डों पर तैनात सीआईएसएफ जवान भी ‘ऑपरेशन गंगा' का हिस्सा हैं, जिसके तहत भारतीयों को विशेष उड़ानों के जरिये युद्ध प्रभावित यूक्रेन से निकाला जा रहा है। शाह ने कहा, “मैं सीआईएसएफ कर्मियों को बहुत विनम्र और अच्छे व्यवहार के साथ भारतीयों की अगवानी करते हुए देखता हूं।” उन्होंने सीआईएसएफ से ऐसे उपाय तलाशने का भी आग्रह किया, जिससे बल में महिला कर्मियों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके। कार्यक्रम में सीआईएसएफ के महानिदेशक शील वर्धन सिंह ने कहा कि सीआईएसएफ भारत में निजी सुरक्षा एजेंसियों के प्रशिक्षण और प्रमाणन में बेहद अहम भूमिका निभा सकता है, जो फिलहाल असंगठित तरीके से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ हवाई अड्डों और बंदरगाहों के अलावा ड्रोन विरोधी अभियान और समुद्री एवं त्वरित परिवहन प्रणाली में एक ‘विशेष ‍एवं एकीकृत' सुरक्षा एजेंसी की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। लगभग 1.64 लाख सुरक्षाकर्मियों से लैस सीआईएसएफ मौजूदा समय में देश के 65 नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहा है। सरकारी और निजी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की हिफाजत की जिम्मेदारी भी उस पर है। सीआईएसएफ केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है।
 

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