प्रधानमंत्री ने जन औषधि केंद्र के मालिकों और लाभार्थियों से किया संवाद
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार देश में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के लाभार्थियों और जनऔषधि केंद्रों के संचालकों से आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत में श्री मोदी ने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी देश में केवल एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान- एम्स था, लेकिन अब 22 एम्स काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि साढ़े आठ हजार से अधिक जन औषधि केंद्र आम आदमी के लिए समाधान केंद्र बनते जा रहे है। श्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में जन औषधि केंद्रों के माध्यम से 800 करोड़ रुपये से अधिक की दवाएं बेची गई हैं। जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की लगभग पांच हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने कैंसर, तपेदिक, मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों के इलाज के लिए आवश्यक 800 से अधिक दवाओं की कीमतों को भी नियंत्रित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह भी सुनिश्चित किया गया है कि स्टेंट लगाने और घुटने के प्रतिरोपण की लागत नियंत्रण में रहे।
श्री मोदी ने कहा कि केंद्र ने तय किया है कि निजी मेडिकल कॉलेजों में आधी सीटों पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर शुल्क लिया जाये, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को फायदा होगा।
बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने एक जन औषधि योजना के लाभार्थी से पूछा कि योजना से उन्हें आर्थिक रूप से कैसे मदद मिली है। उन्होंने कहा कि पहले दवाओं की कीमत एक हजार पांच सौ से एक हजार छह सौ रुपये थी लेकिन अब इस योजना में दवाइयों पर खर्च घटकर केवल 250 से तीन सौ रुपये रह गया है ।
जनऔषधि दिवस के अवसर पर आज स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि जनऔषधि योजना ने देश में क्रांति ला दी है।
जेनेरिक दवाओं के उपयोग और जन औषधि परियोजना के लाभ के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए पहली मार्च से पूरे देश में जन औषधि सप्ताह भी मनाया जा रहा है। सप्ताह के दौरान जन औषधि संकल्प यात्रा, मातृ शक्ति सम्मान, जन औषधि बाल मित्र, जन औषधि जन जागरण अभियान, आओ जन औषधि मित्र बनाएं और जन औषधि-जन आरोग्य मेला जैसे विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, देश में अभी 8,600 से अधिक जन औषधि स्टोर हैं। इसका उद्देश्य लोगों को वहनीय मूल्य पर दवाइयां उपलब्ध कराना है।






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