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सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था का प्रतीक, सूर्य और चंद्रमा की तरह सनातन धर्म शाश्वत: अमित शाह

अहमदाबाद. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और लोगों की आस्था को मिटाना आसान नहीं है, क्योंकि ये सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर हैं। सदियों से सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने के बार-बार प्रयासों के बावजूद इसके पुनर्निर्माण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर पर हमला करने वाले लोग अंततः मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी शान से खड़ा है। गांधीनगर जिले के मानसा में 267 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद शाह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्घाटन किया था। महमूद गजनी ने 1,000 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर पर पहला हमला किया था।
 शाह ने कहा कि 1000 साल बाद और कई बार नष्ट होने के बावजूद, सोमनाथ मंदिर अब भी शान से खड़ा है और उसका ध्वज आसमान में लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां एक भव्य सोमनाथ कॉरिडोर का निर्माण भी किया जा रहा है। शाह ने कहा, ‘‘यह पूरी दुनिया को संदेश है कि भारत के सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और भारतीय लोगों की आस्था को मिटाना इतना आसान नहीं है। यह सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर है। यह सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, विश्वास और गौरव का प्रतीक है।'' शाह ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरे एक वर्ष तक मनाया जाएगा। इस दौरान देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य भारत की आत्मा को झकझोरना, उसकी चेतना को जागृत करना और सनातन धर्म की जड़ों को समाज के सबसे गहरे स्तर तक मजबूत करना है। उन्होंने कहा, ‘‘लगभग एक हजार वर्ष पहले हमारे भव्य सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनी ने ध्वस्त किया था। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब जैसे अन्य आक्रमणकारियों ने भी इस पर बार-बार हमले किए। लेकिन हर बार इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘विनाश करने वालों की सोच विनाश में विश्वास रखने वाली थी, जबकि निर्माण करने वालों की आस्था सृजन में थी। आज एक हजार वर्ष बाद वे विनाशक इतिहास में विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी समुद्र के सामने गर्व से खड़ा है।'' शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल, के एम मुंशी, जामनगर के महाराज और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से किया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्स्थापन का संकल्प लिया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘उस संकल्प के पीछे भावना यह थी कि सोमनाथ पर हुआ हमला केवल मंदिर पर हमला नहीं था, बल्कि वह हमारी आस्था, हमारे धर्म और हमारे आत्मसम्मान पर प्रहार था। इसका उत्तर किसी और हमले में नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने में निहित है।'' अन्य परियोजनाओं के तहत शाह ने अपने गृह नगर मानसा में एक खेल परिसर का उद्घाटन किया। गांधीनगर से सांसद शाह ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों को ध्यान में रखते हुए इस खेल परिसर में कुछ और सुविधाएं जोड़े जाने की आवश्यकता है। शाह ने कहा, ‘‘इसलिए मैंने इस परिसर में सभी आवश्यक सुविधाएं जोड़ने के लिए सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व) कोष के माध्यम से 15 करोड़ रुपये एकत्र करने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी होगी कि आसपास के इलाकों के बच्चे इन सुविधाओं का उपयोग करें।'' शाह ने कहा कि गुजरात सरकार अहमदाबाद को ‘स्पोर्ट्स हब सिटी' के रूप में विकसित कर रही है, जो पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 में राष्ट्रमंडल खेल में भाग लेने के लिए कई देशों के खिलाड़ी अहमदाबाद आएंगे और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के अधिकार हासिल करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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