एआई आधारित शिक्षा मॉडल पर सरकार का जोर, आईआईटी दिल्ली को 430 करोड़ रुपए की नई सौगात
नई दिव्वी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी दिल्ली में 10 नए जमाने के एडटेक स्टार्टअप्स के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) राउंडटेबल बैठक की। इस दौरान शिक्षा में एआई के प्रभावी उपयोग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार और जयंत चौधरी भी मौजूद रहे। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस चर्चा में अरिविहान, फर्मी एआई, खरे एआई, सीखो, स्पीकएक्स, सुपरकलाम, सुपरनोवा, वेदांतु, कंवेजीनियस और विरोहन जैसे स्टार्टअप्स शामिल हुए। ये कंपनियां स्कूल शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्किल डेवलपमेंट और भाषा सीखने के क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित कर रही हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल विशेष रूप से दूरदराज और संसाधन-वंचित क्षेत्रों के छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगी। बैठक आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले आयोजित की गई।
शिक्षा मंत्री ने आईआईटी दिल्ली में दो प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया, जिनकी कुल लागत करीब 430 करोड़ रुपए है। पहली परियोजना अकादमिक ब्लॉक-103 की है, जो लगभग 5 लाख वर्ग फुट में बनेगा। यह संस्थान की पहली 10 मंजिला अकादमिक इमारत होगी।
इस भवन में 31 क्लासरूम, 150 रिसर्च लैब, 150 फैकल्टी ऑफिस, कॉन्फ्रेंस रूम, कैफेटेरिया और बैंकिंग सुविधाएं होंगी।
दूसरी परियोजना गर्ल्स हॉस्टल-50 की है, जो करीब 3.9 लाख वर्ग फुट में विकसित होगा। इसमें 1400 छात्राओं के रहने की व्यवस्था होगी। कमरों में अलमारी, पढ़ाई की टेबल और चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाएं होंगी, जबकि भवन में डाइनिंग हॉल भी होगा।
दोनों इमारतें पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी। परिसर में सोलर पैनल, वर्षा जल संचयन और हरियाली संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी। निर्माण के दौरान एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।
कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी, शिक्षक और छात्र भी उपस्थित रहे। मंत्रालय के अनुसार, सरकार एआई और मजबूत बुनियादी ढांचे के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।










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