व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा, किसी योजना का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल नहीं होगा: जनगणना आयुक्त
नयी दिल्ली. महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को लोगों से जनगणना करने वालों को सही जानकारी देने की अपील करते हुए आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा तथा इसे किसी साक्ष्य या किसी योजना का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दिल्ली समेत देश के कुछ राज्यों में अप्रैल में 16वीं जनगणना का पहला चरण शुरू होने से पहले नारायण ने यहां संवादाता सम्मेलन में कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत सभी व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनगणना का पहला चरण 16 अप्रैल से 15 मई तक होगा।
उन्होंने कहा, "जनगणना के दौरान एकत्र किया गया सभी व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहता है। इसे सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन के साथ साझा नहीं किया सकता है। इसे अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग भी नहीं किया जा सकता है ।" उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय डेटा का उपयोग केवल सारणीबद्ध करने के लिए किया जाएगा।
जाति को जनगणना में शामिल करने और लोगों द्वारा सही जानकारी नहीं दिए जाने की आशंका के बारे में पूछे जाने पर महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने कहा कि जाति से संबंधित डेटा दूसरे चरण में एकत्र किया जाएगा और इसके प्रश्न व्यापक चर्चा के बाद तय किए जाएंगे। उन्होंने कहा, "जाति से संबंधित सूचना कैसे एकत्र किये जाएं, इस बारे में कई सुझाव आए हैं। उन सभी पर विचार किया जाएगा और प्रश्नों को अंतिम रूप देने से पहले सबसे अच्छे सुझाव को सामने रखा जाएगा।" महापंजीयक ने कहा, "व्यक्तिगत जानकारी का किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। केवल समग्र सांख्यिकीय जानकारी ही सार्वजनिक की जाती है।" उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत डेटा का उपयोग किसी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है, इसलिए इसके दुरुपयोग की आशंका निराधार है। जाति आधारित अंतिम व्यापक गणना 1881 और 1931 के बीच की गई थी। स्वतंत्रता के बाद से सभी जनगणनाओं से जाति को बाहर रखा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने पिछले साल 30 अप्रैल को आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया था। नारायण ने कहा कि भारतीय एजेंसियों द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुरूप डिजिटल सुरक्षा के लिए कड़े उपाय किए गए हैं । उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान कोई भी दस्तावेज नहीं लिया जायेगा।
उन्होंने कहा, "इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी की कोई गुंजाइश नहीं है। लोगों के पास स्व गणना करने का विकल्प है; स्व गणना पूरी होने के बाद भी उसकी पुष्टि करने के वास्ते एक गणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेगा। हर छह गणक पर एक पर्यवेक्षक होता है, जिससे किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकने के लिये यह दोहरी सुरक्षा प्रक्रिया बन जाती है।'' नारायण ने बताया कि जनगणना में पहली बार स्व-गणना की व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे लोगों को आवास सूचीकरण और आवास गणना के पहले चरण से पहले, संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित 15 दिनों की अवधि के दौरान डिजिटल रूप से अपनी जानकारी जमा करने की अनुमति मिलेगी। आवास सूचीकरण अभियान (एचएलओ) इस वर्ष एक अप्रैल एवं 30 सितंबर के बीच हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निर्दिष्ट 30 दिनों की अवधि के दौरान होगा। आवास सूचीकरण अभियान शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में स्व-गणना करने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। दिल्ली में, एचएलओ का चरण 30-30 दिनों के दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली छावनी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी, जबकि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र में यह 16 मई से 15 जून तक चलेगी। एनडीएमसी और दिल्ली छावनी क्षेत्रों के लिए स्व-गणना एक अप्रैल से शुरू होगी, जबकि एमसीडी के लिए यह एक मई से 15 मई तक चलेगी। दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अप्रैल में जनगणना का पहला चरण शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी की है, 15 राज्य मई में शुरू करेंगे और 10 राज्य जून या उसके बाद शुरू करेंगे। नारायण ने कहा, "एक बार डेटा का मिलान और प्रमाणीकरण हो जाने पर, प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।"
उन्होंने कहा कि स्व गणना करने वाले व्यक्ति को गणकों के दौरे के दौरान किसी भी गलत डेटा को सुधारने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, "पहले डेटा कागज पर एकत्र किया जाता था, जिससे डिजिटलीकरण में काफी समय लगता था। हम अब शुरु से ही डिजिटल डेटा एकत्र करेंगे, इसलिए हम बहुत जल्दी डेटा जारी कर सकेंगे। कई डेटा सेट 2027 में ही प्रकाशित किए जाएंगे।" नारायण ने कहा कि यह सुविधा केवल देश में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने यह भी बताया कि डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, और एक वेब पोर्टल जनगणना और आवास सूचीकरण की विभिन्न गतिविधियों की निगरानी व प्रबंधन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी को अद्यतन किये जाने के संबंध में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका निर्वाचन आयोग द्वारा किए जा रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई संबंध नहीं है। नारायण ने कहा कि जनगणना के पहले चरण में आवास की स्थिति से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे और इस चरण में जाति या धर्म सहित कोई भी व्यक्तिगत जानकारी एकत्र नहीं की जाएगी। एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, पहले चरण के दौरान अधिकारी परिवार के मुखिया का नाम और लिंग, सर्वेक्षण किए जा रहे मकान के स्वामित्व की स्थिति, परिवार के पास विशेष रूप से मौजूद रहने के कमरों की संख्या, और घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या सहित अन्य कई सवालों के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे। वर्ष 2021 में होने वाली दशकीय जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।
महापंजीयक ने 33 प्रश्नों की सूची जारी की है, जो जनगणना के पहले चरण - परिवार सूचीकरण और आवास गणना - के दौरान नागरिकों से पूछे जाएंगे।










Leave A Comment