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 फैटी लिवर ग्रेड 1, 2 और 3 में क्या अंतर है?

 फैटी लिवर की गंभीरता के अनुसार इसे तीन ग्रेड में बांटा गया है। इसमें फैटी लिवर ग्रेड 1 शुरुआती दौर होता है, जिसका समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह बढ़कर फैटी लिवर ग्रेड 2 से लेकर 3 तक चला जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 3 सबसे गंभीर अवस्था है।   लिवर पर थोड़ा फैट होना नॉर्मल है, क्योंकि लिवर को इसकी जरूरत एनर्जी के लिए पड़ती है, लेकिन जैसे ही फैट का लेवल 5% से ज्यादा होने लगता है, उसे फैटी लिवर कहा जाता है। इससे लिवर में सूजन होने का रिस्क बढ़ जाता है। इसे ही फैटी लिवर की शुरुआत कहा जाता है।  
फैटी लिवर ग्रेड 1 के लक्षण
  फैटी लिवर के शुरुआती स्टेज पर लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे साइलेंट बीमारी कहा जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 1 में लिवर पर इतना कम फैट जमा होता है कि इसके लक्षणों में कई बार रोगी को थकान या पेट के ऊपरी दाहिने भाग में थोड़ा बहुत दर्द हो सकता है। इन लक्षणों को आमतौर पर मरीज इग्नोर कर देते हैं क्योंकि ये लक्षण किसी भी खास तरह की बीमारी का इशारा नहीं करते। अगर किसी भी व्यक्ति को बार-बार ऐसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
-मोटापा - कमर का साइज बहुत ज्यादा होना
टाइप 2 डायबिटीज
-ब्लड में HDL कोलेस्ट्रॉल लेवल बहुत कम होना
-हाई ब्लड प्रेशर होना
-जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उनमें अल्कोहल के कारण लिवर पर फैट जमा हो जाता है।
-तेजी से वजन कम होना
-HIV का इलाज कराना
-किसी कैंसर का इलाज कराना
-कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाइयां लेना
-फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर कुछ टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
-अल्ट्रासाउंड - अगर फैटी लिवर की शुरुआत होती है, तो इसे अल्ट्रासाउंड के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है।
-लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)- इस टेस्ट के जरिए यह पता चलता है कि लिवर कितने बेहतर तरीके से काम कर रहा है। अगर SGPT और SGOT एंजाइम बढ़े हुए आते हैं, तो लिवर में सूजन हो सकती है।
लिपिड प्रोफाइल - अगर ब्लड में ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो फैटी लिवर होने की संभावना हो सकती है।
ब्लड शुगर - फैटी लिवर की समस्या डायबिटीज रोगियों को होने का खतरा रहता है, इसलिए डॉक्टर HbA1c टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।
ग्रेड 1 फैटी लिवर का इलाज
 ग्रेड 1 फैटी लिवर शुरुआती स्टेज होती है, जबकि ग्रेड 3 ज्यादा गंभीर मानी जाती है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर मरीज में बीमारी एक ही तरह से आगे नहीं बढ़ती। कई लोगों में यह लंबे समय तक स्थिर रहती है और सही जीवनशैली, वजन घटाने, व्यायाम, शुगर व लिपिड कंट्रोल तथा डॉक्टर की सलाह से इसमें सुधार भी हो सकता है।  
 ग्रेड 2 फैटी लिवर
  “ग्रेड 2 फैटी लिवर मोडरेट कंडीशन है। Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार के मुताबिक, लिवर के सेल्स में 34% से लेकर 66% तक फैट जमा हो जाए, तो इसे ग्रेड 2 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज के लिवर के फंक्शन पर असर पड़ने लगता है।”
 फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण
 जैसे-जैसे लिवर में फैट बढ़ने लगता है, वैसे-वैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। हालांकि ग्रेड 1 फैटी लिवर में लक्षण काफी हद तक नजर नहीं आते, लेकिन लिवर में फैट बढ़ने के साथ लक्षणों की पहचान होने लगती है। ग्रेड 2 फैटी लिवर के लक्षणों में भूख कम लगना, पेट में सूजन और खाना न पचना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। मैंने कई मरीजों की स्किन में पीलापन और अचानक वजन बढ़ना भी देखा है। वैसे ग्रेड 2 फैटी लिवर में पेट में सूजन जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।”  बहुत ज्यादा प्यास लगना, ब्लोटिंग, पेट के ऊपरी भाग में दर्द और नींद खराब होना भी फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण हो सकते हैं।
 ग्रेड 2 फैटी लिवर के कारण
-बैलेंस्ड डाइट न खाना
बहुत ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाना
-मोटापा
-फिजिकल एक्टिविटी की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने वाला लाइफस्टाइल अपनाना
-बहुत ज्यादा शराब पीना
-परिवार में लिवर से जुड़ी बीमारियों की हिस्ट्री
-फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच करने के लिए डॉक्टर मरीज को ये टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
लिवर फंक्शन टेस्ट - लिवर की हेल्थ को जानने के लिए एंजाइम और प्रोटीन चेक किए जाते हैं।
फाइब्रो स्कैन - लिवर कितना हार्ड हो गया है, इसे जानने के लिए फाइब्रो स्कैन की सलाह दी जा सकती है।
सीटी स्कैन - लिवर के ग्रेड को विस्तार से जांचने के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन भी कराया जा सकता है। फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज
 आमतौर पर ग्रेड 2 फैटी लिवर में मरीजों को वजन कम करने की सलाह दी जाती है ताकि फैटी लिवर की बीमारी का इलाज किया जा सके। जैसे ही मरीज का वजन कम होता है, इससे लिवर का फैट और सूजन कम होती है। इसके अलावा, मरीज को हेल्दी फूड, डाइट का पोर्शन साइज और फिजिकल एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। 
 फैटी लिवर ग्रेड 3
Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अगर लिवर के सेल्स में 67 फीसदी से ज्यादा फैट जमा हो जाए, तो उसे ग्रेड 3 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्टेज में लिवर के आसपास के टिश्यू में गंभीर सूजन आ जाती है, इस वजह से ग्रेड 3 को बहुत ही गंभीर स्थिति माना जाता है। अगर फैटी लिवर ग्रेड 3 का समय पर इलाज न हो, तो लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में कई बार लिवर ट्रांसप्लांट की भी जरूरत पड़ सकती है, इसलिए लिवर से जुड़े लक्षणों की पहचान करके समय पर इलाज कराने की जरूरत होती है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 के लक्षण
-पेट के ऊपर दाईं तरफ दर्द या पेट भरा हुआ महसूस होना
-बहुत ज्यादा थकान लगना
-बिना वजह वजन तेजी से कम होना
-मतली महसूस होना
-हाथ, पैर और टांगों में सूजन दिखाई देना
-फैटी लिवर ग्रेड 3 की जांच कैसे की जाती है?
इस स्टेज पर डॉक्टर मरीज को अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है।  अगर डॉक्टर को लिवर में गंभीर रूप से सूजन महसूस होती है, तो लिवर बायोप्सी की सलाह भी दी जा सकती है। इसमें लिवर के टिश्यू के छोटे से हिस्से को लेकर लैब में टेस्ट किया जाता है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 का इलाज
 "अगर मरीज का वजन ज्यादा होता है, तो उसे वजन कम करने की सलाह दी जाती है।   इसके अलावा मरीज को अपनी डाइट और खानपान पर पूरा ध्यान देना चाहिए। इसके साथ, मरीज को किसी भी तरह के सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।”
फैटी लिवर ग्रेड 1 से 3 तक बढ़ने के कारण क्या है?
 फैटी लिवर के गंभीर होने में कई रिस्क फैक्टर्स जैसे अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, अल्कोहल, स्मोकिंग, हाई कोलेस्ट्रॉल, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी न करना कंट्रोल न हो, तो फैटी लिवर गंभीर हो सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में डायग्नोसिस नहीं होता है, तो यह फैटी लिवर के ग्रेड बढ़ते जाते हैं। इसलिए समय रहते लक्षणों की पहचान करके डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।”
 
 

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