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‘विकसित भारत G RAM G’ योजना पूरे देश में लागू,  केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया ऐतिहासिक दिन

 नई दिल्ली। ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम 2025’ एक जुलाई से पूरे ग्रामीण भारत में लागू हो गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि यह अधिनियम, जो हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-युक्त रोजगार की गारंटी देता है, ग्रामीण भारत को सशक्त बनाएगा। जानकारी के मुताबिक देशभर में इस नए ढांचे को लागू करने के लिए चालू वित्त वर्ष में 95,692 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

 VB-G RAM G अधिनियम, बीस साल पुराने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005’ की जगह लेगा। इस नए अधिनियम का उद्देश्य एक वित्तीय वर्ष में कानूनी रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करना है। रोजगार की इस बढ़ी हुई गारंटी का मकसद ग्रामीण विकास की गति को तेज करना, आय की बेहतर सुरक्षा प्रदान करना और ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाना है। यह अधिनियम समय पर, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से वेतन भुगतान पर ज़ोर देता है। नए अधिनियम में तय समय के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। ‘विकसित भारत-GRAM G अधिनियम’ एक व्यापक कानूनी ढांचा है जिसे ग्रामीण रोजगार सृजन को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप बनाने के लिए तैयार किया गया है।
 केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025’ (VB-G RAM G) के लागू होने को एक “ऐतिहासिक दिन” बताया। आज से पूरे देश में इस नए ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 की जगह ले ली है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि यह नया ढांचा पहले के रोजगार गारंटी कार्यक्रम की तुलना में एक बड़ा सुधार है।नई योजना के तहत रोजगार गारंटी के विस्तार और इसकी शुरुआत के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “आज एक ऐतिहासिक दिन है। कल MGNREGA का समापन हुआ। आज से MGNREGA से बेहतर एक योजना लागू हो गई है, जिसमें 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान है: VB-G RAM G।”
रोजगार की बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण आजीविका को मजबूत करेगी
इसे लागू करने के बारे में बात करते हुए, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक दिन के लिए भी काम से वंचित नहीं रहना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर नए ढांचे में सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंत्री ने कहा कि पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, कार्यान्वयन प्रणालियां पूरी तरह से तैयार हैं और चल रहे काम बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि 125 दिनों के वेतन-युक्त रोजगार की बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण आजीविका को मजबूत करेगी, टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियां बनाएगी और ‘विकसित भारत’ के विज़न को गति देगी।
सभी राज्यों ने इसके लिए बजट का प्रावधान
ग्राम पंचायतों के माध्यम से वित्तीय आवंटन और विकेंद्रीकृत योजना पर जोर देते हुए उन्होंने आगे कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सभी राज्यों ने इसके लिए बजट का प्रावधान किया है और केंद्र सरकार ने इस साल VB-G RAM G के लिए ₹95,600 करोड़ से ज़्यादा की राशि आवंटित की है। ग्राम पंचायतें प्रभावी योजनाएं बनाएंगी; गांव के भाई-बहन मिलकर तय करेंगे कि उनके गांव में कौन से काम किए जाने हैं। विकसित भारत का रास्ता बनाने के लिए विकसित गांव बनाए जाएंगे।”
नया अधिनियम लागू होने के साथ ही MGNREGA रद्द
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पहले जारी एक अधिसूचना में नए कानून के देशव्यापी कार्यान्वयन की पुष्टि की थी। इसके लागू होने के साथ ही MGNREGA को रद्द कर दिया गया है। सरकार ने इसे ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप “एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार और उत्पादकता-उन्मुख ग्रामीण बदलाव” की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव बताया है। केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए ₹95,600 करोड़ से ज्यादा आवंटित किए हैं।
रिलीज में कहा गया है, “VB-G RAM G एक्ट के लागू होने के साथ ही, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 को उसी तारीख से रद्द कर दिया गया है। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव है और ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार और उत्पादकता-उन्मुख ग्रामीण बदलाव के एक नए युग की शुरुआत करता है।” ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी
अधिनियम’ 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। यह अधिनियम 100 दिन की रोजगार गारंटी की जगह 125 दिन की गारंटी देता है। हालांकि, विपक्ष ने इस कानून की आलोचना की है क्योंकि इसमें योजना से महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया है और केंद्र व राज्यों के बीच फंड के 60:40 के हिस्से में बदलाव किया गया है।

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