खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग अधिनियम में संशोधन को मंजूरी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और खादी एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने के उद्देश्य से खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) अधिनियम, 1956 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य अधिनियम को वर्तमान नीतिगत ढांचे के अनुरूप बनाना, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना तथा ग्रामीण उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।
सरकार के अनुसार संशोधन के जरिए केवीआईसी अधिनियम को समकालीन आर्थिक और ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य समावेशी और सतत ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, ग्रामीण उद्यमों को औपचारिक स्वरूप देना तथा घरेलू और वैश्विक बाजारों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत ‘ग्रामीण क्षेत्र’ की परिभाषा को विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित होगा और अधिक क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकेगा। सरकार ने प्रत्येक कारीगर या श्रमिक के लिए निर्धारित पूंजी निवेश की सीमा को भी बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम के तहत सूक्ष्म उद्यमों के लिए निर्धारित निवेश सीमा के अनुरूप किया जाएगा। इससे ग्राम उद्योगों को एमएसएमई क्षेत्र के विभिन्न लाभों तक पहुंच आसान होगी।
संशोधनों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए ब्रांडिंग, निर्यात, नवाचार, मानकीकरण, डिजिटलीकरण और भौगोलिक संकेतक (जीआई) संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे देश और विदेश दोनों बाजारों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की पहचान और पहुंच मजबूत होगी। प्रस्ताव के तहत आयोग की संरचना को अधिक समावेशी बनाया जाएगा। इसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, केंद्र सरकार और महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान (एमजीआईआरआई) के प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार को नए ग्राम उद्योगों को अधिसूचित करने का अधिकार भी दिया जाएगा, ताकि उभरते आर्थिक अवसरों और नई तकनीकों को समय पर शामिल किया जा सके।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय संशोधित प्रावधानों को केवीआईसी के क्षेत्रीय कार्यालयों, राज्य खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्डों (केवीआईबी), खादी संस्थानों, ग्राम उद्योग संस्थानों और उद्यमियों के मौजूदा नेटवर्क के माध्यम से लागू करेगा। अधिनियम लागू होने के बाद मंत्रालय कार्यशालाओं, सेमिनारों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए संशोधित प्रावधानों की जानकारी भी देगा।
सरकार के अनुसार इन संशोधनों से खादी एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र को वित्त, प्रौद्योगिकी और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही नवाचार, मूल्यवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। इससे विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्रों में ग्राम उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी तथा समावेशी ग्रामीण आर्थिक विकास को गति मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधनों के क्रियान्वयन से जुड़ी जागरूकता और संचार गतिविधियां मंत्रालय के मौजूदा बजटीय प्रावधानों के भीतर ही संचालित की जाएंगी। इसके लिए कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रस्ताव किसी नई योजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि केवीआईसी अधिनियम, 1956 के वैधानिक ढांचे को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने का प्रयास है।










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