महात्मा गांधी ने शासन के आदर्श मॉडल की कल्पना 'राम राज्य' के रूप में की थी : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने नौंवी कक्षा की सामाजिक विज्ञान विषय की नयी पाठ्यपुस्तक तैयार की है, जिसके अनुसार महात्मा गांधी ने 'राम राज्य' की कल्पना सुशासन के एक आदर्श मॉडल के रूप में की थी। पाठ्यपुस्तक के मुताबिक महात्मा गांधी का सुशासन का यह आदर्श मॉडल ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित था। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' नामक यह पुस्तक मंगलवार को जारी की गई। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह महीने बाद इसे जारी किया गया है। इस पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था। पुस्तक के 'गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी' (शासन और सार्वजनिक नीति) नामक अध्याय में संस्कृत के एक श्लोक ''प्रजासुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम्'' का उल्लेख किया गया है, जिसका अर्थ है, ''प्रजा की खुशी में राजा की खुशी है और प्रजा के हित में ही राजा का हित है।'' पाठ्यपुस्तक में कहा गया है, ''महात्मा गांधी ने 'राम राज्य' की कल्पना शासन और सार्वजनिक नीति में ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा, कल्याण और जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित शासन के एक आदर्श मॉडल के रूप में की थी। राम राज्य पर गांधी के विचार प्राचीन अतीत से लेकर वर्तमान समय तक भारतीयों की सामूहिक कल्पना को प्रतिबिंबित करते हैं।'' इसमें रामायण और 16वीं सदी के रामचरितमानस में वर्णित राम राज्य को ''सुशासन और अच्छे सामूहिक जीवन के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक'' बताया गया है। पुस्तक में शासन की अवधारणा को समझाने के लिए महाभारत और वैदिक परंपरा का भी सहारा लिया गया है। इसमें बताया गया है कि शासन केवल सत्ता के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रति जिम्मेदारियां भी शामिल हैं। पुस्तक के इस अध्याय में कहा गया है, ''वैदिक काल से लेकर रामायण और महाभारत तक, भारतीय परंपरा ने लगातार शासन को केवल सत्ता के इस्तेमाल के साधन के बजाय एक पवित्र जिम्मेदारी के रूप में देखा है।'' इसमें कहा गया है, ''सुशासन का आकलन केवल शासक की शक्ति से नहीं, बल्कि समाज में शांति, समृद्धि, न्याय और कल्याण की स्थिति से किया जाता था।'' अध्याय में इन संदर्भों का इस्तेमाल राजधर्म की व्यापक अवधारणा को समझाने के लिए किया गया है, जो न्यायपूर्ण शासन से जुड़े कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को दर्शाता है। इसके अलावा नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, आयुष्मान भारत योजना और खेलो भारत नीति का भी उल्लेख किया गया है। पुस्तक के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत शुरू की गई यह नीतियां ''नीति निर्माण के उत्कृष्ट उदाहरण'' हैं। पुस्तक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को ''इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण'' बताया गया है कि किस तरह परामर्श, विशेषज्ञों की सलाह और जन भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक नीति तैयार की जाती है। खेलो भारत नीति 2025 के संदर्भ में पुस्तक ने नीति निर्माण से ध्यान हटाकर उसके क्रियान्वयन पर जोर दिया है। इसमें कहा गया है कि इसकी सफलता ''राज्यों, जिलों, स्थानीय निकायों, स्कूलों, प्रशिक्षकों, परिवारों और खिलाड़ियों'' के बीच समन्वय पर निर्भर करती है। पुस्तक में ''नीति समन्वय : सुशासन की कुंजी'' शीर्षक वाले खंड में इस नीति का उल्लेख किया गया है।
स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को पुस्तक में कम आय वाले परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के उदाहरण के रूप में बताया गया है। पुस्तक में एक अन्य प्रमुख योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का भी उल्लेख किया गया है और विद्यार्थियों से इसके लाभों का अध्ययन करने को कहा गया है।











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