स्मारकों पर फिल्म शूटिंग के लिए 20 दिन में मिलेगी अनुमति, फीस घटाकर की 50 हजार रुपए : पटेल
नयी दिल्ली । सरकार ने मंगलवार को कहा कि देश के विभिन्न स्मारकों पर शूटिंग के लिए अब फिल्म निर्माताओं को ऑनलाइन आवेदन पर 20 दिनों में अनुमति प्रदान की जाएगी तथा इसके लिए फीस को एक लाख रूपये से घटाकर 50 हजार रुपए कर दिया गया है। संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि अब सरकार ने यह निर्णय लिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित जिन स्मारकों पर लाइट एंड साउंड शो होता है, उन्हें रात नौ बजे तक खोला जाए। उन्होंने बताया कि जिन जगहों पर जिला प्रशासन अनुमति देगा वहां ऐसे लाइट एंड साउंड शो वाले स्मारकों को रात दस बजे तक खोला जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जो फिल्म निर्माता स्मारकों पर शूटिंग करते थे, उसके लिए अनुमति देने में एक साल तक लग जाता था। उन्होंने कहा कि अब इस प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है और अनुमति बीस दिन में प्रदान कर दी जाती है। पटेल ने कहा कि इन जगहों पर शूटिंग के लिए एक लाख रूपये की फीस को घटाकर 50 हजार रूपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि विश्व धरोहरों और कुछ अन्य धरोहरों को छोड़कर अन्य सभी स्मारकों पर पत्रकार सहित कोई भी आम पर्यटक फोटो खींच सकेंगे और वीडियोग्राफी भी कर पाएंगे। स्मारकों पर लगाये जाने वाले टिकट की राशि के बारे में उन्होंने कहा कि जिन स्मारकों पर जितने लोग आते हैं, उनका आकलन कर टिकट राशि तय होगी। पटेल ने कहा कि सरकार का मानना है कि सभी स्मारकों के लिए एक समान टिकट रााशि नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मनोनीत सदस्य सोनल मान सिंह के एक अन्य पूरक सवाल के जवाब में कहा कि कलाकारों की पेंशन एक बड़ी समस्या थी जो पिछले दो साल से थी लेकिन कोरोना काल के बीच में भी उनकी पेंशन पहुंचायी गयी। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ गुरु-शिष्य परंपरा की एक राशि होती है, वह भी दी गई है। कुछ नियमों को लेकर कलाकारों के मन में मतभेद था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह मानना है कि यह सब ऑनलाइन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी जिन कलाकारों ने जो भी गतिविधियां कीं, सरकार ने उनका पैसा दिया है। उन्होंने कहा कि पहले भौतिक उपस्थिति की जरूरत होती थी, लेकिन उस नियम को शिथिल कर कलाकारों को पैसे दिए गए। पटेल ने कहा कि हमारे पास इतना ज्यादा सामान है कि हम संग्रहालयों में छह-सात प्रतिशत से ज्यादा का प्रदर्शन नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि यह समस्या है और इस संबंध में संग्रहालयों में नए सिरे से गैलरी बनाने का काम शुरू किया गया है।






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