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देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं, उसका विवेकपूर्ण उपयोग करें : सरकार

नयी दिल्ली। केन्द्र सरकार ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 मरीजों को दिये जा रहे ऑक्सीजन का, विशेष रूप से अस्पतालों में ‘विवेकपूर्ण तरीके' से उपयोग किया जाए और दावा किया कि देश में जीवन रक्षक गैस की कोई ‘कमी' नहीं है। कोविड-19 संकट से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर गृह मंत्रालय के अवर सचिव पीयूष गोयल ने संवाददाताओं को बताया कि अस्पतालों और मरीजों तक जल्दी ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए उसके त्वरित उत्पादन और परिवहन की व्यवस्था के दिशा में काम हो रहा है। गोयल ने कहा, ‘‘सभी अस्पतालों के लिए बहुत आवश्यक है कि वे केन्द्र स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ऑक्सीजन का विवेकपूर्ण उपयोग करें। इस दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं और हमें उसका परिणाम भी मिल रहा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसकी लगातार निगरानी करने की जरुरत है, ताकि ऑक्सीजन का विवेकपूर्ण उपयोग हो।'' उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ‘‘देश में ऑक्सीजन की कमी को लेकर परेशान ना हों।'' उन्होंने कहा, ‘‘देश में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध है और कम से कम समय में उसे अस्पतालों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।'' अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर हम साथ मिलकर यह लड़ाई लडें तो, हमारी जीत को लेकर मुझे कोई संदेह नहीं है।'' गोयल स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल और एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया की उपस्थिति में पत्रकारों से बात कर रहे थे। गोयल ने लोगों से अनुरोध किया और सहयोग मांगते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करें कि ऑक्सीजन की कोई ‘जमाखोरी या कालाबाजारी' ना हो ताकि वे उन मरीजों तक पहुंच सकें जो कोविड-19 के कारण सांस लेने के लिए जूझ रहें हैं। अधिकारी ने कहा कि देश में चिकित्सकीय ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ गया है। उन्होंने आंकड़ों के संदर्भ में कहा कि पिछले साल एक अगस्त को कुल उत्पादन 5,700 मीट्रिक टन था जो फिलहाल 9,000 मीट्रिक टन है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उत्पादन क्षमता में 125 प्रतिशत की वृद्धि है।'' उन्होंने दोहराया कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण चिकित्सकीय ऑक्सीजन की मांग बढ़ रही है, लेकिन देश में ऑक्सीजन ‘पर्याप्त' मात्रा में है और सरकार भविष्य की जररुतों को ध्यान में रखते हुए इसका आयात भी कर रही है। अधिकारी ने कहा कि तरल ऑक्सीजन के उत्पादन और आपूर्ति के लिए परंपरागत और गैर-परंपरागत दोनों स्रोतों को खंगाला जा रहा है।

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