सिकलसेल एनीमिया : जांच होगी सस्ती और आसान
-भोपाल के होम्योपैथी कॉलेज के प्रोफेसर ने विकसित की तकनीक
नई दिल्ली। भोपाल के होम्योपैथी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. निशांत नाम्बीसन ने सिकल सेल एनीमिया के रक्त परीक्षण के लिए एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो वर्तमान में उपयोग किए जा रहे परीक्षण तकनीक की लागत से दस गुणा सस्ता और दस गुणा कम समय लेता है।
इस पद्धति के प्रमुख शोधकर्ता और आविष्कारक डॉ. निशांत नाम्बीसन शासकीय होम्योपैथी कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि यह उपकरण पांच मिनट से भी कम समय में परीक्षण के परिणाम बता देता है। इस उपकरण को बनाने में डॉ. निशांत नाम्बीसन एवं उनके साथियों, इंस्टीट्यूट ऑफ इंस्ट्रूमेंटेशन एंड एप्लाइड फिजिक्स और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर के शोधकर्ताओं का हाथ है।
क्या है सिकल सेल एनीमिया
सिकल सेल एनीमिया लाल रक्त कोशिकाओं का जन्मतजात रक्त विकार है इसमें रोगी को विभिन्न अंगों में असहनीय दर्द की शिकायत रहती है। रोगी बार-बार बीमार होता है और अस्पताल में भर्ती होता रहता है। इस बीमारी में असामान्य हीमोग्लोबिन के वजह से लाल रक्त कोशिकाएं सिकल यानि हंसुए के आकार की हो जाती हैं। यह उनकी ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम और रक्त प्रवाह को धीमा करता है। इससे खून की कमी हो जाती है, जिससे एनीमिया हो जाता है।
डॉ. निशांत नाम्बीसन के अनुसार वर्तमान में भारत में दस लाख से अधिक लोगों को सिकल सेल की बीमारी है। हर साल लगभग दो लाख बच्चे इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एनीमिया के एक जन्मजात और पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली आनुवंशिक बीमारी होने के कारण, भारत में इसके मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। भारत में पूरी दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक सिकल सेल एनीमिया के रोगी मौजूद हैं। दक्षिण-पूर्वी गुजरात से दक्षिण-पश्चिमी ओडिशा तक फैली सिकल सेल बेल्ट के कारण यह बीमारी मध्य भारत में सबसे अधिक है। भारत में मध्य प्रदेश में इसके सबसे ज्यादा मरीज हैं।
यह एक नई जैव-रासायनिक परीक्षण तकनीक है, जो स्वदेशी रूप से विकसित पोर्टेबल पामटॉप रिचार्जेबल डिवाइस के साथ काम करती है। इसमें रक्त की एक बूंद (पांच माइक्रोलिटर) का उपयोग होता है और इसे परीक्षण के लिए दूर-दराज के गांवों में भी आसानी से ले जाया जा सकता है। इससे जांच की प्रक्रिया और निदान तक पहुंचने में कम समय तो लगता ही है साथ ही, परिवहन में होने वाले खर्च में भी कमी आती है। अब तक अमेरिका से आयात किए गए भारी भरकम एचपीएलसी मशीनों के कारण इस बीमारी की जांच प्रक्रिया बहुत जटिल थी लेकिन मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत बनाए गए इस उपकरण से भारत ही नहीं पूरी दुनिया के मरीजों के लिए सिकल सेल एनीमिया की जांच प्रक्रिया आसान हो जाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी सहायता से रोगी के घर पर ही परीक्षण किया जा सकता है और इसका संचालन बहुत ही आसान है।
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