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 रेलवे मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार को मजबूत करने के लिए करेगा पांच मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल

 नयी दिल्ली।  रेलवे मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार को काफी हद तक मजबूत करने के लिए सरकार से आवंटित पांच मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है ताकि ट्रेनों की सुरक्षा को बढ़ाया जा सके और रेलगाड़ियों की आवाजाही में सुधार किया जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि स्पेक्ट्रम ‘लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन' (एलटीई) के आधार पर ट्रेन के चालक, गार्ड, स्टेशन मास्टर और ट्रेन यातायात नियंत्रकों एवं रखरखाव कर्मचारियों के बीच निर्बाध संचार मुहैया कराएगा। उन्होंने कहा कि यह रेलवे के नेटवर्क में सुरक्षा में इजाफा करेगा। रेलवे बोर्ड में अवसंरचना सदस्य संजीव मित्तल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि परियोजना ट्रेनों की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ साथ-साथ उनकी आवाजाही को भी काफी बढ़ाएगी और यह पांच साल में पूरी होगी तथा इसमें 25,000 करोड़ रुपये निवेश किए जाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन स्टेशनों और ट्रेनों में सार्वजनिक सुरक्षा सेवा के लिए है। यह रेलवे के संचालन और रखरखाव के तरीके में रणनीतिक बदलाव लाएगा। मित्तल ने कहा, “ यह मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके अधिक ट्रेनों को समायोजित करने के लिए सुरक्षा में सुधार और लाइन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। आधुनिक रेल नेटवर्क में कम परिवहन लागत और उच्च दक्षता होगी।” उन्होंने कहा कि यह विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए बहुराष्ट्रीय उद्योगों को भी आकर्षित करेगा जिससे 'मेक इन इंडिया' मिशन पूरा किया सकेगा और रोजगार के मौके पैदा हो सकेंगे। मित्तल ने कहा कि भारतीय रेलवे के लिए एलटीई का उद्देश्य सुरक्षित और विश्वसनीय आवाज, वीडियो और डेटा संचार सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि प्रणाली आधुनिक ‘कैब आधारित सिग्नलिंग प्रणाली' को तैनात करने में मदद करेगी, जो कोहरे के दौरान भी मदद करेगी। रेलवे ने एक बयान में कहा कि इसका इस्तेमाल ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरों के जरिए समिति वीडियो निगरानी (लाइव फीड) के लिए भी किया जाएगा जिससे यात्रियों की सुरक्षा में इजाफा होगा। मित्तल ने कहा कि रेलवे ने सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण का काम शुरू कर दिया है। इसमें 'इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग' (ईआई) का प्रावधान शामिल है। 30 अप्रैल तक 2,221 स्टेशनों को यह प्रणाली उपलब्ध कराई जा चुकी है। मित्तल ने कहा कि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग उपलब्ध कराने के लिए भी नीतिगत निर्णय लिया गया है और अगले तीन वर्षों में 1,550 ईआई प्रदान करने की योजना है।

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