अनियमित बरसात के कारण खरीफ बुवाई पिछले साल से एक प्रतिशत कम रह सकती है: रिपोर्ट
मुंबई। मानसून की वर्षा के असमान वितरण से खरीफ बुवाई प्रभावित होने की संभावना है, जो पिछले साल की तुलना में एक प्रतिशत कम रह सकती है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। क्रिसिल रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘हमारे विचार में, कुल खरीफ बुवाई साल- दर- साल आधार पर एक प्रतिशत कम रहने की उम्मीद है।'' इसमें कहा गया है, ‘‘आठ अगस्त तक संचयी बुवाई साल- दर- साल दो प्रतिशत कम थी,जो पिछले साल बुवाई बढ़ने और पिछले पांच वर्षों के औसत से तीन प्रतिशत अधिक होने के कारण हुई थी।''
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने जून के अंत से जुलाई के मध्य तक रुकने के बाद 12 जुलाई को वर्षा के दीर्घावधि औसत (एलपीए) में सात प्रतिशत की कमी को और घटाकर आठ अगस्त तक केवल चार प्रतिशत कर दिया। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि शेष मौसम में मानसून सामान्य रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कृषि काफी हद तक वर्षा पर निर्भर है, इस साल कभी-बंद कभी मानसून ठीक रहने की वजह से, खरीफ के लिए बहुप्रतीक्षित तिलहन (मूंगफली और सोयाबीन) की जगह किसान मक्का और धान की बुवाई की ओर गये हैं।


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