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- -मुख्यमंत्री के नेतृत्व में धान खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित : किसान मोहम्मद अजीज ने पारदर्शी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभाररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पारदर्शिता के साथ धान खरीदी सुव्यवस्थित तरीके से चल रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में भी धान खरीदी पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु जिले के विभिन्न खरीदी केंद्रों में निरंतर धान की आवक हो रही है।जिले के धान उपार्जन केंद्र महुआ टोली, कुनकुरी में अपनी उपज विक्रय करने पहुंचे ग्राम लोधमा के कृषक श्री मोहम्मद अजीज ने बताया कि केंद्र में धान विक्रय की प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सुविधाजनक रही। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली के माध्यम से उन्हें बिना किसी परेशानी के समय पर टोकन प्राप्त हुआ। पर्ची कटने से लेकर तौल प्रक्रिया तक सभी कार्य सुचारू एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए। केंद्र पर स्वच्छ एवं पर्याप्त बारदाना उपलब्ध कराया गया तथा वजन कार्य पूर्णतः पारदर्शी तरीके से किया गया।कृषक श्री अजीज ने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को अब काफी सहूलियत मिल रही है, जिससे समय की बचत हो रही है और अनावश्यक प्रतीक्षा से भी राहत मिली है। उन्होंने शासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा भी मिला है।
- -रीवा उत्खनन के परिणाम उत्साहजनक : संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल-रीवांगढ़ पुरातात्विक उत्खनन स्थल में मिले उत्तर वैदिक काल से पूर्व मानव सभ्यता के अवशेष-छत्तीसगढ़ में 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी मानव सभ्यता-छत्तीसगढ़ में उत्तर वैदिक काल में ही लौह युगीन संस्कृति हो चुकी थी विकसित-उत्खनन में मौर्य, शुंग, सातवाहन, शक-क्षत्रप, कुषाण और स्थानीय शासकों के सिक्के मिलेरायपुर ।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन स्थल का दौरा किया। यहां आयोजित “छत्तीसगढ़ के प्राचीन सिक्के एवं मुद्रा प्रणाली” विषयक द्वि-दिवसीय संगोष्ठी के समापन समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री छत्तीसगढ़ शासन श्री राजेश अग्रवाल ने देशभर से पधारे विद्वानों, विषय विशेषज्ञों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा की रीवां उत्खनन के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक हैं। उन्होंने कहा कि यहां आहत सिक्कों से लेकर कल्चुरी कालीन सिक्कों तक की एक अविच्छिन्न श्रृंखला प्राप्त हुई है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता को प्रमाणित करती है। श्री अग्रवाल ने बताया कि हालिया उत्खनन में प्राप्त लौह प्रगलन केंद्र तथा रेडियोकार्बन तिथि निर्धारण के आधार पर रीवां की प्राचीनता 9 वीं सदी ईसा पूर्व (उत्तर वैदिक काल) तक निर्धारित की गई है, जो छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास और तकनीकी परंपरा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ की धरती एक अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और गौरवशाली सभ्यता की साक्षी रही है। हमारी संस्कृति और इतिहास की जड़ें अत्यंत गहरी हैं, जिन्हें वैज्ञानिक दृष्टि से उजागर करना हम सभी का दायित्व है। यह खोज छत्तीसगढ़ की प्राचीन तकनीकी दक्षता, आर्थिक व्यवस्था और सांस्कृतिक निरंतरता को सशक्त रूप से प्रमाणित करती है।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन ने प्रदेश के प्राचीन इतिहास को लेकर नई और महत्वपूर्ण जानकारी सामने रखी है। संस्कृति विभाग के पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा कराए जा रहे इस उत्खनन में वैज्ञानिक ए.एम.एस. रेडियोकार्बन (कार्बन-14) डेटिंग के माध्यम से यह प्रमाणित हुआ है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता उत्तर वैदिक काल यानी 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थीरीवां का यह प्राचीन स्थल कोलहान नाला और बंधवा तालाब के बीच स्थित है। स्थानीय जनमानस में यहां लोरिक-चंदा की लोककथा पीढ़ियों से प्रचलित रही है। क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक बनावट के कारण इसे मृत्तिकागढ़ या मडफोर्ट भी कहा जाता है। चंडी मंदिर के समीप लगभग 75 एकड़ में फैले मृत्तिकागढ़, उसके चारों ओर खाई और परकोटे के अवशेष आज भी इसकी प्राचीनता के साक्ष्य देते हैंइस क्षेत्र से पहले भी ऐतिहासिक सामग्री मिलने के संकेत मिले थे। वर्ष 1975 में 35 स्वर्ण सिक्के प्राप्त हुए थे, जबकि नेशनल हाईवे के किनारे स्थित एक बड़े टीले को इतिहासकारों ने स्तूप होने की संभावना से जोड़ा था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर वर्ष 2019 में व्यवस्थित उत्खनन शुरू किया गया। वर्तमान में यह कार्य संचालनालय के उप संचालक डॉ. पी.सी. पारख के निर्देशन और डॉ. वृषोत्तम साहू के सह-निर्देशन में किया जा रहा है। दो प्रमुख टीलों पर लगभग 7 मीटर गहराई तक खुदाई में विभिन्न कालों के सांस्कृतिक स्तर सामने आए हैं।काल निर्धारण की जटिलता को सुलझाने के लिए उत्खननकर्ताओं ने अलग-अलग सांस्कृतिक स्तरों से चारकोल के तीन सैंपल लेकर अमेरिका की फ्लोरिडा स्थित विश्व प्रसिद्ध और आएसओ प्रमाणित प्रयोगशाला बीटा एनालिटिक्स भेजे। रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।पहला सैंपल: 650 - 543 ईसा पूर्व, बुद्ध के समकालीन महाजनपद कालदूसरा सैंपल: 806 - 748 ईसा पूर्व, बुद्ध के जन्म से लगभग 200 वर्ष पूर्व (उत्तर वैदिक/लौह युग)तीसरा सैंपल: 541 - 392 ईसा पूर्व, महाजनपद से मौर्य काल तकइन निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि छत्तीसगढ़ में उत्तर वैदिक काल में ही लौह युगीन संस्कृति विकसित हो चुकी थी और यहां मानव बसावट की निरंतरता सदियों तक बनी रहीउत्खनन में मौर्य, शुंग, सातवाहन, शक-क्षत्रप, कुषाण और स्थानीय शासकों के सिक्के मिले हैं, जो प्राचीन व्यापारिक गतिविधियों की पुष्टि करते हैं। हाल ही में यहां से 2606 ताम्र सिक्कों की एक विशाल मुद्रा निधि प्राप्त हुई है, जिससे रीवां भारत के उन चुनिंदा स्थलों में शामिल हो गया है, जहां सर्वाधिक सिक्का निधि मिली है। ये सिक्के पहली-दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच प्रचलित गज-देवी प्रकार के स्थानीय ताम्र सिक्के हैंइसके साथ ही, उत्खनन में लोहे के उपकरण बनाने की कार्यशाला के भी साक्ष्य मिले हैं, जो छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक इतिहास में पहली बार दर्ज किए गए हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार, 800 से 400 ईसा पूर्व के बीच रीवां में सुदृढ़ मानव बस्ती थी, जिसकी निरंतरता लगभग 700 ईस्वी तक रही। इस आधार पर रीवां की तुलना देश के प्राचीन नगरों जैसे कौशांबी और अहिछत्र से की जा सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह उत्खनन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि मध्य भारत के लौह युगीन सांस्कृतिक इतिहास को समझने में एक मील का पत्थर साबित होगा। रेडियोकार्बन परीक्षण से तैयार होने वाली यह कालक्रमिक रूपरेखा भविष्य में होने वाले अन्य उत्खननों के लिए भी मार्गदर्शक बनेगी। रीवांगढ़ क्षेत्र में और विस्तृत खुदाई कराई जाएगी। छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग द्वारा रींवागढ़ के अलावा अब तक गढ़धनौरा, पचराही, ताला, भोंगापाल, सिरपुर महेशपुर, पचराही, तरीघाट, डमरू, मदकूद्धीप, राजिम, देवरी, जमराव आदि स्थलो पर खुदाई कराई जा चुकी है।इस अवसर पर विषय विशेषज्ञों में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्र, श्री जी. एल. रायकवार, मुद्राशास्त्री डॉ. जी. एस. ख्वाजा (नागपुर), प्रो. सुष्मिता बसु मजूमदार (कोलकाता), प्रो. आलोक श्रोतरीय (अमरकंटक), डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह (अमरकंटक), डॉ. विशि उपाध्याय (पटना) तथा डॉ. राजीव मिंज की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पुरातत्त्व संचालनालय के अधिकारी एवं कर्मचारी, न्यूमिस्मेटिक एंड फिलेटली सोसाइटी ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी श्री कमल बैद, रीवा के सरपंच श्री घसिया राम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. पी. सी. पारख, उप संचालक द्वारा किया गया तथा संचालन प्रभात कुमार सिंह, पुरातत्ववेत्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। उल्लेखनीय है कि संगोष्ठी के अंतर्गत अध्येताओं ने रीवा उत्खनन स्थल एवं वहां प्राप्त पुरावशेषों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। शोध परिभ्रमण कार्य में डॉ. वृषोत्तम साहू, श्री प्रवीण तिर्की एवं अमर भरतद्वाज ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। संगोष्ठी का समापन शैक्षणिक विमर्श, शोध निष्कर्षों और भावी अनुसंधान की संभावनाओं पर सार्थक संवाद के साथ हुआ।
- -ग्राम पंचायत चकेरी में 1.99 लाख रुपये की लागत से हुआ डबरी निर्माणरायपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) के अंतर्गत सरगुजा जिले में विभिन्न हितग्राही मूलक कार्य कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जनपद पंचायत उदयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चकेरी में हितग्राही श्री ननकू के खेत में आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है।इस कार्य के लिए शासन द्वारा 1.99 लाख रुपये की स्वीकृत राशि प्रदान की गई है, जिसमें से अब तक 1.82568 लाख रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। आजीविका डबरी निर्माण कार्य का प्रारंभ दिनांक 17 दिसंबर 2025 प्रारंभ हुआ था जिसका कार्य प्रगति पर है और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है।आजीविका डबरी के निर्माण से हितग्राही को वर्षा जल संचयन की सुविधा मिलेगी, जिससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी तथा मछली पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही, वीबी जी राम जी के तहत स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि हो रही है।हितग्राही श्री ननकू ने बताया कि डबरी निर्माण से खेत में पानी की समस्या का स्थायी समाधान होगा और इससे कृषि के साथ-साथ अन्य आजीविका गतिविधियां भी संभव हो सकेंगी। उन्होंने शासन की इस योजना को ग्रामीणों के लिए उपयोगी बताते हुए इसके लिए आभार व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन एवं जनपद पंचायत उदयपुर द्वारा वीबी जी राम जी के माध्यम से जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और गांवों में सतत विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
- -प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के संवर्धन में जनजातीय समाज की ऐतिहासिक भूमिका-‘जनजातीय गौरव पथ’ के निर्माण और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा-गौरा पूजा एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय की सहभागितारायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज कोरबा जिले के महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने गौरा-गौरी पूजन तथा बैगा पुजारी सम्मेलन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज का अपना गौरवशाली इतिहास, विशिष्ट संस्कृति और समृद्ध परंपराएं हैं। बैगा और पुजेरी समाज आज भी इन परंपराओं के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर आईटीआई चौक से बालको रोड का नाम ‘जनजातीय गौरव पथ’ रखने तथा इस मार्ग के प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण इसलिए किया था ताकि यहां की सर्वाधिक जनसंख्या वाले आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए 15 नवंबर शहीद बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित करते हुए धरती आबा उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इसके साथ ही पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास के दायरे में लाने का कार्य किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी एक साधारण किसान परिवार से आने वाला आदिवासी समाज का बेटा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपये तथा पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6,691 गांव लाभान्वित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य पीवीटीजी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी अंचलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके लिए राज्य में प्राधिकरण का गठन कर आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति दी जा रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं भी वनवासी कल्याण आश्रम में कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आदिकाल से भगवान गौरागौरी के रूप में शिव-पार्वती के उपासक रहे हैं।उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के महापुरुषों के योगदान को स्मरणीय बनाने, उनकी स्मृतियों को सहेजने और नई पीढ़ी को उनके बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से नवा रायपुर में विशाल डिजिटल जनजातीय संग्रहालय स्थापित किया गया है, जिसमें महापुरुषों की जीवन-गाथाओं का सचित्र वर्णन किया गया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को प्रोत्साहित करने हेतु बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि प्रदान की जा रही है। साथ ही सरना स्थलों का संरक्षण किया जाएगा, जो न केवल सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करेगा बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं, उसी प्रकार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।उन्होंने कहा कि जिले में अनेक प्राचीन देवी-देवताओं के स्थल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में विकसित कर पर्यटन के रूप में नई पहचान दी जा रही है।कार्यक्रम में कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी श्री पनतराम भगत एवं श्री बीरबल सिंह ने भी संबोधन दिया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, पूर्व मंत्री श्री ननकी राम कंवर, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- रायपुर ।जहाँ चाह वहां राह इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है,कोंडागांव जिले के विकासखंड फरसगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत बानगांव की रहने वाली श्रीमती राशोबाई मरकाम ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत स्व सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की है। राशोबाई आज विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरूकर 01 लाख रूपए से अधिक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं।जय माता दी स्व सहायता समूह की सदस्य राशोबाई स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं और घर के कार्यों तक ही सीमित थी। आय के सीमित साधन होने के कारण परिवार की वार्षिक आय केवल 48 हजार रुपये थी, जिससे दैनिक जरूरतों को पूरा करना काफी मुश्किल होता था और परिवार का पालन पोषण बेहतर ढंग से नहीं हो पाता था।स्व सहायता समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें समूह के माध्यम से आरएफ अनुदान राशि 15 हजार रुपये और सीआईएफ ऋण राशि 60 हजार रुपये प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने कृषि कार्य के साथ-साथ किराना दुकान संचालन एवं मछली पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। जिला प्रशासन की एनआरएलएम टीम के मार्गदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उक्त आजीविका गतिविधियों के सफल संचालन से आज श्रीमती राशोबाई मरकाम की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 67 हजार रुपये हो गई है। वर्तमान में वे पूर्व की तुलना में दोगुना आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है तथा जीवन स्तर में सुखद बदलाव आया है। आज श्रीमती राशोबाई मरकाम ने अपनी मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा भी बनी है। उन्होंने शासन की योजनाओं से मिली सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि एनआरएलएम ‘बिहान’ योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूहों एवं टीम के सतत प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें।
- -राम नारायण बिजली उपभोक्ता से बने ऊर्जादातारायपुर, / शासन की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना न केवल बढ़ते बिजली बिल से राहत दे रही है, बल्कि लोगों को स्वच्छ, सस्ती और हरित ऊर्जा से भी जोड़ रही है। योजना का लाभ लेकर आम उपभोक्ता अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं और बिजली उपभोग के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी सहभागी बन रहे हैं।इस योजना की सफलता का जीवंत उदाहरण अंबिकापुर नगर के भिट्ठी कला निवासी राम नारायण गुप्ता हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप पैनल स्थापित किया और महज एक माह के भीतर उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया। पहले जहां अधिक बिजली खपत के कारण हर माह भारी-भरकम बिल आता था, वहीं अब सौर ऊर्जा के उपयोग से उन्हें राहत मिली है।श्री राम नारायण गुप्ता ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तुरंत इसका लाभ लेने का निर्णय लिया। योजना के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कुल 1 लाख 8 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे सोलर रूफटॉप पैनल लगाना आम नागरिकों के लिए सरल और किफायती हो गया है। सब्सिडी मिलने से प्रारंभिक लागत में काफी कमी आई और उनका निर्णय और भी आसान हो गया।उन्होंने बताया कि सोलर पैनल लगाए अभी एक ही महीना हुआ है और इस अवधि में बिजली बिल पूरी तरह से शून्य आ गया है। इतना ही नहीं, यह योजना उन्हें केवल बिजली उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बना रही है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत विद्युत विभाग के साथ एक एग्रीमेंट किया जाता है, जिसके अनुसार सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली पहले घर की जरूरतों में उपयोग होती है। इसके बाद जो अतिरिक्त बिजली बचती है, वह ग्रिड के माध्यम से विद्युत विभाग को भेज दी जाती है, जिसका भुगतान वित्तीय वर्ष के अंत में उपभोक्ता को किया जाता है।राम नारायण ने कहा कि यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। सौर ऊर्जा के उपयोग से ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिल रहा है और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है। साथ ही सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी आम नागरिकों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को जनहितकारी बताते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाकर न केवल अपने बिजली बिल को कम करें, बल्कि स्वच्छ और सतत ऊर्जा अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दें।
- -युवा संसद में डॉ. रमन सिंह बने अध्यक्ष और बच्चे बने सांसद, लोकहित के मुद्दों पर हुई चर्चा-यूथ पार्लियामेंट में दिखी भविष्य के नेतृत्व की सशक्त झलकरायपुर / नेशनल रोवर - रेंजर जंबूरी का आयोजन पूरे उत्साह, अनुशासन और जीवंत सहभागिता के साथ बालोद जिले के ग्राम दुधली में सम्पन्न किया रहा है। आयोजन के तीसरे दिन जंबूरी परिसर लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र बन गया, जब रोवर–रेंजरों एवं उपस्थित नागरिकों को लोकसभा की वास्तविक कार्यवाही का प्रत्यक्ष और व्यावहारिक अनुभव कराया गया। यूथ पार्लियामेंट के मंच पर रोवर–रेंजरों ने सांसदों की भूमिका निभाई वहीं विधानसभा के अध्यक्ष संसद के अध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन किया। युवाओं ने जिस आत्मविश्वास, विषयगत समझ और मर्यादित संवाद शैली का प्रदर्शन किया, वह दर्शनीय था। यह मंच भावी जनप्रतिनिधियों को गढ़ने का सशक्त माध्यम गया था।अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल बने रोवर–रेंजरविधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की आयोजित युवा संसद की सराहना करते हुए कहा कि यूथ पार्लियामेंट के दौरान रोवर–रेंजरों जिस प्रकार आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ अपनी भूमिका को निभाया है, उससे देश के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना साकार नजर आती है। आज के युवा कल के हमारे समाज के प्रतिनिधि हैं। इनके कंधों पर हमारी विरासतों को आगे ले जाने का जिम्मा है, जिसे वे बखूबी निभाएंगे इसका हम सभी को भरोसा है। उन्होंने सभी की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और जिम्मेदार नागरिकता की मजबूत नींव पड़ती है।इस अवसर पर स्कूली शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज के रोवर - रेंजर देश का आने वाला भविष्य है।भारतीय स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. के. के. खंडेलवाल, राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंद्रजीत सिंह खालसा, जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, रोवर–रेंजर, स्काउट–गाइड्स एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।सीख, सेवा और साहस से भरा रहा तीसरा दिनजंबूरी का तृतीय दिवस प्रतिभागियों के लिए विविध और प्रेरक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जागरण और शारीरिक जांच के साथ फ्लैग सेरेमनी के साथ अनुशासन और एकता का संदेश दिया जाएगा। डॉग शो में कुत्तों की बेहतरीन कलात्मक प्रदर्शन के साथ मार्च पास्ट प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी प्रतियोगिताओं में भी युवाओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लेते हुए सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया।आज जम्बूरी में आदिवासी संस्कृति परंपरा के साथ आधुनिकता की अनूठी प्रस्तुति दी गयी। आदिवासी वेशभूषा में पारंपरिक व्यंजनों के निर्माण के साथ लोकवाद्यों की भी प्रस्तुति की गई। आदिवासी नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पारंपरिक भोजन के साथ ही हॉर्स राइडिंग, बाइक रेस और वाटर एक्टिविटी जैसी साहसिक गतिविधियां का भी प्रदर्शन किया गया।युवाओं को आपदा प्रबंधन और ग्लोबल डेवलपमेंट विलेज से जुड़ी प्रतियोगिताओं के साथ वृक्षारोपण भी किया गया। कंटीजेंट लीडर मीटिंग, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, एच डब्लू बी रीयूनियन, नाइट हाईक तथा पायोनियरिंग प्रोजेक्ट प्रतियोगिताओं के भी आयोजित की जाएगी। एरिना में आयोजित इंटरनेशनल नाइट कार्यक्रम में विभिन्न संस्कृतियों की रंगारंग प्रस्तुतियां जंबूरी को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
- -विद्यालयों–महाविद्यालयों में जागरूकता, ऑनलाइन शपथ और डिजिटल प्रमाण पत्र के माध्यम से जनभागीदारीरायपुर ।छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा “बाल विवाह मुक्त भारत” एवं “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाइयों के माध्यम से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में लगातार जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।अभियान के तहत विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा इसकी रोकथाम में समाज की भूमिका के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कार्यक्रमों के दौरान ऑनलाइन लिंक एवं क्यूआर कोड के माध्यम से लोगों को “बाल विवाह मुक्त” रहने की शपथ दिलाई जा रही है तथा सहभागियों को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक इस अभियान में सहभागिता निभाई है।जागरूकता सत्रों में बताया गया कि वर्तमान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। कम उम्र में विवाह कराने पर दो वर्ष तक का कठोर कारावास एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। शासन द्वारा 17 जनवरी 2025 से ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है तथा पंचायतों में विवाह पंजीयन को अनिवार्य किया गया है।कार्यक्रमों में यह भी स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह कराना कानूनन अपराध है और इसे क्रूरता की श्रेणी में रखा गया है, जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय में स्पष्ट किया है। यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले, तो इसकी तत्काल जानकारी पंचायत सचिव, संबंधित विभाग अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 एवं 181 पर देने की अपील की गई।राज्य सरकार का लक्ष्य सभी ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करना है। इस दिशा में निरंतर चल रहे जागरूकता अभियानों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है और बाल विवाह के विरुद्ध सामूहिक संकल्प मजबूत हो रहा है।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वामी विवेकानंद जयंती (12 जनवरी) ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के अवसर पर प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति के अमर प्रेरणास्रोत हैं। उनके ओजस्वी विचारों, मानवता से परिपूर्ण दर्शन ने न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को आत्मविश्वास, सेवा और आध्यात्मिक जागरण की नई दिशा दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं को यह सिखाता है कि आत्मबल, चरित्र और सेवा-भाव से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। उनके विचार आज भी युवाओं को आत्मनिर्भर, कर्तव्यनिष्ठ और राष्ट्रहित में समर्पित बनने के लिए प्रेरित करते हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गौरव का विषय है कि स्वामी विवेकानंद जी के जीवनकाल का एक महत्वपूर्ण समय राजधानी रायपुर में व्यतीत हुआ। उनसे जुड़ी स्मृतियाँ न केवल रायपुर की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करती हैं, बल्कि प्रदेशवासियों को निरंतर प्रेरणा भी प्रदान करती हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी विवेकानंद जी के दार्शनिक और वैचारिक मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनते रहेंगे और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की युवा शक्ति को राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। file photo
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महर्षि महेश योगी की जयंती (12 जनवरी) के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि वे विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक एवं योगाचार्य थे, जिन्होंने भावातीत ध्यान (ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन) के माध्यम से भारत की प्राचीन वैदिक चेतना को वैश्विक पहचान दिलाई।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि राजिम के समीप पांडुका ग्राम में जन्मे महर्षि महेश योगी ने भारतीय अध्यात्म को आधुनिक विज्ञान और वैश्विक संवाद से जोड़ते हुए मानव कल्याण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। उनका संपूर्ण जीवन साधना, अनुशासन और मानवता की सेवा को समर्पित रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि महेश योगी का यह संदेश कि मनुष्य के भीतर असीम ऊर्जा, ज्ञान एवं संभावनाएँ निहित हैं, आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक युग में अत्यंत प्रासंगिक है। उनकी शिक्षाएँ आत्मबोध, मानसिक शांति और संतुलित जीवनशैली के लिए समाज को निरंतर प्रेरित करती हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महर्षि महेश योगी द्वारा स्थापित संस्थाएँ, वैदिक विश्वविद्यालय, ध्यान केंद्र और आयुर्वेदिक परंपराएँ शिक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। उनके विचारों से प्रेरित होकर विश्वभर में लाखों लोग मानवता, शांति और समरसता के लिए कार्य कर रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि महर्षि महेश योगी की दिव्य शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों को आत्मविकास, आंतरिक शांति और वैश्विक सद्भाव के मार्ग पर निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करती रहेंगी।
- -अतिरिक्त अनुदान से किसानों की आय बढ़ाने की पहल-खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता और कृषकों की दीर्घकालीन आय वृद्धि की दिशा में बड़ा कदमरायपुर ।खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने तथा किसानों की आय में दीर्घकालीन और स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत ऑयल पाम की खेती को प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र सरकार के अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा विभिन्न घटकों में टॉप-अप अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक संबल मिल सके।सहायक संचालक उद्यानिकी मुंगेली ने बताया कि ऑयल पाम की खेती में प्रारंभिक लागत अधिक होने तथा 03 से 04 वर्षों की गेस्टेशन अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा देय न्यूनतम 1.30 लाख प्रति हेक्टेयर अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन किसानों को टॉप-अप अनुदान प्रदान कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक कृषक इस फसल की ओर आकर्षित हों।ऑयल पाम एक दीर्घकालीन, कम श्रम वाली और उच्च उत्पादकता वाली फसल है। इसमें रोग प्रकोप की संभावना अत्यंत कम होती है। एक बार रोपण के पश्चात चौथे वर्ष से उत्पादन प्रारंभ हो जाता है और यह फसल 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उपज देती है। पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में ऑयल पाम प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन क्षमता रखती है, जिससे किसानों को स्थायी एवं सुनिश्चित आय का लाभ प्राप्त होता है।राज्य शासन द्वारा ऑयल पाम रोपण करने वाले पात्र किसानों को निम्नानुसार अतिरिक्त अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, इनमें रखरखाव मद में पूर्व निर्धारित 05 हजार 250 प्रति हेक्टेयर की 01 हजार 500 रूपए की वृद्धि कर कुल 06 हजार 750 रूपए प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्तीय फसलों हेतु वृद्धि के साथ कुल 10 हजार 250 रूपए प्रति हेक्टेयर, ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाले किसानों को 08 हजार 635 रूपए की अतिरिक्त सहायता सहित कुल 22 हजार 765 रूपए प्रति हेक्टेयर, रोपित पौधों एवं अंतरवर्तीय फसलों को जानवरों से बचाने हेतु फेंसिंग के लिए 54 हजार 485 रूपए प्रति हेक्टेयर का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रकार राज्य शासन द्वारा रखरखाव, फेंसिंग, अंतरवर्तीय फसल एवं ड्रिप सिंचाई मद में कुल 69 हजार 620 रूपए तक का अतिरिक्त अनुदान ऑयल पाम रोपण करने वाले किसानों को प्रदान किया जा रहा है।यह अनुदान केवल उन्हीं कृषकों को देय होगा, जो योजना के अंतर्गत ऑयल पाम का रोपण करेंगे। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों अथवा अधिकृत प्रतिनिधि कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं। ऑयल पाम की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाएगी, बल्कि देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगी।
- -सोलर ऊर्जा से रोशन हो रहा पूरा घररायपुर । आम नागरिकों को स्वच्छ, सस्ती एवं टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला रही है। इस योजना के माध्यम से जिले के अनेक घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग बिजली खर्च से मुक्त होकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह योजना न केवल नागरिकों को आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है।इसी क्रम में मुंगेली शहर के शिक्षक नगर निवासी श्री जितेन्द्र शर्मा ने अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कर योजना का लाभ लिया है। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनका घर पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित हो रहा है, जिससे बिजली की खपत लगभग शून्य हो गई है। परिणामस्वरूप उन्हें अब मासिक बिजली बिल की चिंता नहीं करनी पड़ रही है। श्री शर्मा बताते हैं कि पहले हर महीने बिजली बिल एक बड़ा खर्च होता था, लेकिन सोलर सिस्टम लगने के बाद यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल आर्थिक राहत दे रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रही है। उन्होंने इस जनहितकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सहित शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने पर योजना के तहत उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। 01 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम पर केंद्र से 30 हजार एवं राज्य से 15 हजार मिलाकर 45 हजार रुपए की सब्सिडी, वहीं 02 किलोवाट पर कुल 90 हजार और 03 से 04 किलोवाट तक की क्षमता पर 01 लाख 08 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही कम ब्याज दर पर आसान किश्तों में बैंक फायनेंस की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे मध्यम वर्ग और आम नागरिकों के लिए यह योजना और अधिक सुलभ बन गई है।
- रायपुर ।रायपुर प्रेस क्लब की निर्वाचन प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन दिनांक 01 जनवरी 2026 को किया गया था। मतदाता सूची पर दावा–आपत्ति प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 03 जनवरी 2026 निर्धारित थी। इस अवधि में कुल 114 सदस्यों से दावा–आपत्ति प्राप्त हुई, जिनका विधिवत निराकरण कर दिनांक 05 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया।निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 06 जनवरी से 08 जनवरी 2026 तक नाम निर्देशन पत्र प्राप्त किए गए। विभिन्न पदों के लिए प्राप्त नाम निर्देशन पत्रों का विवरण इस प्रकार है :- अध्यक्ष पद हेतु – 06, उपाध्यक्ष पद हेतु – 08, कोषाध्यक्ष पद हेतु – 06, महासचिव पद हेतु – 08, संयुक्त सचिव पद हेतु – 10 इस प्रकार कुल 38 नाम निर्देशन पत्र प्राप्त हुए।दिनांक 09 जनवरी 2026 को नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा की गई, जिसमें सभी नाम निर्देशन पत्र वैध पाए गए। इसके पश्चात दिनांक 10 जनवरी 2026 को नाम वापसी की प्रक्रिया में संयुक्त सचिव पद हेतु 01 नाम निर्देशन पत्र वापस लिया गया। नाम वापसी उपरांत अब कुल 37 प्रत्याशी, 05 पदों के लिए निर्वाचन मैदान में शेष हैं।मतदान 13 जनवरी 2026 को प्रातः 8 बजे से शाम 4 बजे तक प्रेस क्लब रायपुर में संपन्न होगा। मतदान समाप्ति के तत्काल पश्चात् उसी दिन मतगणना भी प्रेस क्लब रायपुर में की जाएगी।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई जोन-1 अंतर्गत उद्यान एवं एस.एल.आर.एम. सेंटर का निरीक्षण आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय द्वारा किया गया।निगम आयुक्त नेहरू नगर स्थित योगा उद्यान का निरीक्षण उद्यान अधिकारी तिलेश्वर साहू के साथ किये। उद्यान के साफ-सफाई व्यवस्था को देखे साथ ही उपस्थित कर्मचारियों से चर्चा कर रोपित पौधो में पर्याप्त सिंचाई और बेहतर करने कहा गया। नेहरू नगर पूर्व में एस.एल.आर.एम. सेंटर निर्मित है, जिसका अवलोकन आयुक्त द्वारा किया गया। एसएलआरएम सेंटर में कार्यरत महिलाओं द्वारा वेस्ट से बेस्ट और ब्यूटीफिकेशन करने का कार्य किया गया है, जो बहुत ही आकर्षक है। साथ ही वहां फौव्वारा का भी निर्माण किया गया है, जो संचालित है। नागरिको द्वारा अपने घरो से कपड़ा दिया जाता है, जिससे सेंटर की महिलाएं झोला एवं अन्य सामग्री बनाने का कार्य कर रही हैं। वर्टिकल रूप में एस एल आर एम सेंटर लिखा हुआ है जो महिलाओं द्वारा मिटटी के दिये से आकर्षक सजावट किया गया है।सेंटर परिसर में कचरे की छटाई हेतु नया मशीन स्थापित किया गया है। ठोस अपशिष्ट पृथक्करण हेतु निर्माण एवं मशीनों का स्थापना कार्य जारी है, जिससे आगामी समय में पृथक्करण हेतु सुविधा होगी। शौचालय का निरीक्षण किए साफ सुथरा और व्यवस्थित मिला। संपूर्ण व्यवस्था में सुधार देखकर आयुक्त ने महिलाओं को प्रोत्साहित किये, और बेहतर कार्य करने को कहा गया है। निरीक्षण के दौरान जोन स्वास्थ्य अधिकारी अंकित सक्सेना, क्रिस्टोफर पॉल एवं समूह की महिलाएं उपस्थित रहे।
- बालोद। बालोद राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रचार प्रसार हेतु तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी एक्शन प्लान के अनुसार प्रधान जिला न्यायाधीश श्री श्यामलाल नवरत्न जी, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के निर्देशन में भारती कुलदीप जी के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद द्वारा ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के अवसर पर दिनांक 09.01.2026 से 13.01.2026 तक नालसा द्वारा संचालित योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु विधिक जागरूकता स्टॉल लगाया गया है। उक्त स्टॉल में राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी में आने वाले व्यक्ति को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित योजनाएं जागृति योजना 2025, डॉन योजना 2025, आशा योजना 2025, संवाद योजना 2025, आपदा पीड़ितों को विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से विधिक सेवाएं योजना 2010, तस्करी एवं वाणिज्यिक यौन शोषण पीड़ितों के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015, बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015, मानसिक रूप से बीमार और मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015 , गरीबी उन्मूलन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015, आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण और प्रवर्तन के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015, नशा पीड़ितों को विधिक सेवाएं एवं नशा उन्मूलन के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवाएं योजना 2016 तथा एसिड हमले के पीड़ितों के लिए विधिक सेवा योजना 2016, पीडित क्षतिपूर्ति योजना 2011 एवं पीडित क्षतिपूर्ति योजना 2018, महिला हेल्पलाईन की जानकारी, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम 2005, साइबर क्राईम से बचाव, निःशुल्क विधिक सहायता के संबंध में बैनर एवं पाम्पलेट के माध्यम से पैरालीगल वालिंटियर के द्वारा जानकारी प्रदान की जावेगी।
- -विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने साहसिक एवं बौद्धिक गतिविधियों के अलावा सुमधुर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से किया भाव विभोरबालोद,। बालोद जिले के ग्राम दुधली में शनिवार 10 जनवरी को आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के द्वितीय दिवस का आयोजन एथेनिक फैशन शो, एडवेंचर एरिया, वाटर स्पोटर््स, कलर पार्टी एवं बौद्धिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक संध्या से सराबोर रहा। इस अवसर पर जंबूरी में शामिल विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने अपने साहसिक एवं बौद्धिक गतिविधियों के अलावा सुमधुर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से भाव विभोर किया। आयोजन के द्वितीय दिवस के सांध्य कालीन बेला पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत स्काउट गाइड के राज्य आयुक्त श्री इन्दरजीत सिंह खालसा, जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव, नगर पंचायत डौण्डीलोहारा के अध्यक्ष श्री लाल निवेन्द्र सिंह टेकाम, लोक कलाकार पद्मश्री डोमार सिंह कंुवर, भारत स्काउट गाइड के कोषाध्यक्ष श्री हेमंत देवांगन, ग्राम पंचायत दुधली के उप सरपंच श्री मोहित देशमुख सहित अन्य अतिथिगण उपस्थित थे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय मुख्य आयुक्त डॉ. के के खण्डेलवाल ने ग्राम दुधली में आयोजित इस भव्य एवं विशाल कार्यक्रम की भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि जंबूरी देश के विभिन्न राज्यों के निवासियों वहाँ की संस्कृति एवं आचार विचार को जोड़कर प्रतिभागियों में आपसी भाईचारा, देश प्रेम की भावना एवं सामाजिक सौहार्द्र के वातावरण को विकसित करने का कार्य करता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त श्री इन्दरजीत सिंह खालसा ने इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में नेशनल राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के आयोजन को अपने आप में अभिनव एवं महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध लोक कलाकार पद्मश्री डोमार सिंह कंुवर ने जंबूरी के आयोजन की सराहना करते हुए इसे समुचे छत्तीसगढ़ राज्य सहित बालोद जिले के लिए अत्यंत गौरव का विषय बताया। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन करते हुए जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव ने बालोद एवं छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर देश के विभिन्न राज्यों से पधारे प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सांध्य कालीन बेला पर आज आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के रोवर रेंजरों के द्वारा बस्तर रेला नृत्य, इंदिरा गांधी संगीत विश्वविद्यालय के प्रतिभागियों के द्वारा सुमधुर सुआ गीत की प्रस्तुति एवं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग के प्रतिभागियों के द्वारा मनमोहक छत्तीसगढ़ी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा आज देश के अलग-अलग राज्यों के प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों के सुमधुर एवं उत्कृष्ट लोक कला की प्रस्तुति से आयोजन में अपनी अमिट छाप छोड़ी। पूरे आयोजन के अंत तक प्रतिभागी रोवर रेंजरों, स्काउट गाइड एवं आम नागरिकगण कार्यक्रम में उपस्थित रहकर बेहतरीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया।
- -हिमाचल, बिहार, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों एवं स्थानीय लोगों ने जनसंपर्क विभाग के स्टाल में पहुंचकर प्रदर्शनी का किया अवलोकनबालोद। जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दूधली में आयोजित पांच दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी में भारत स्काउट गाइड द्वारा विभिन्न राज्यों तथा बालोद जिला प्रशासन द्वारा राज्य एवं जिले के विकास कार्य एवं उपलब्धियों पर आधारित विभिन्न विभागों के प्रदर्शनियों को अवलोकन करने हेतु प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है। जंबूरी स्थल में जनसंपर्क विभाग द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी भी लोगों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जनसंपर्क विभाग के प्रदर्शनी में राज्य सरकार के साथ साथ बालोद जिला प्रशासन के विकास कार्यों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों एवं रोवर रेंजर, स्काउट गाइड के साथ साथ राज्य के विभिन्न जिलों एवं स्थानीय ग्रामीणों ने प्रदर्शनियों का अवलोकन कर भूरी भूरी सराहना की। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों के रोवर रेंजर, स्काउट गाइड एवं आम नागरिकों ने जनसंपर्क विभाग के स्टाल में पहुंचकर प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी के दूसरे दिन आज हिमाचल प्रदेश, झारखंड, बिहार, राजस्थान एवं अन्य राज्यों के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं स्थानीय लोगों ने जनसंपर्क विभाग के प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों के रोवर रेंजर एवं स्काउट गाइडस ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के जनता के हित में संचालित किए जा रहे विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं को जानकारी ली। इस मौके पर जनसंपर्क अधिकारी श्री चंद्रेश ठाकुर ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं तथा राज्य सरकार एवं बालोद जिला प्रशासन के उपलब्धियों के संबंध में भी जानकारी दी। जनसंपर्क अधिकारी श्री ठाकुर ने विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों एवं प्रदर्शनी का अवलोकन हेतु पहुंचे विद्यार्थियों को जनसंपर्क विभाग के कार्य प्रणाली के संबंध में जानकारी दी। इस दौरान जनसंपर्क विभाग के कर्मचारी श्री मनीष यादव, श्री कृष्ण शरण साहू एवं श्री सुरेन्द्र साहू उपस्थित थे।
- -विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह होंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि-सांध्य कालीन बेला पर शाम 07 बजे आयोजित समारोह में शामिल होंगे वन मंत्री श्री केदार कश्यप, भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. खण्डेलवाल एवं अन्य अतिथिबालोद, । जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के अंतर्गत रविवार 11 जनवरी को आयोजित समारोह जंबूरी में शामिल सभी प्रतिभागियों एवं अन्य आगंतुकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। जंबूरी के तीसरे दिन दोपहर 12 बजे आयोजित समारोह में प्रतिभागियो एवं आगंतुकों को विधानसभा के वास्तविक कार्यवाही का दृश्य दिखाया जाएगा। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह स्वयं विधानसभा अध्यक्ष के आसंदी पर विराजमान होकर उपस्थित लोगों को विधानसभा की कार्यवाही से रूबरू कराएंगे। इस दौरान भाग लेने वाले प्रतिनिधि रोवर रेंजर प्रतिभागी के रूप में जंबूरी में शामिल होंगे। इसके अलावा कार्यक्रम के तीसरे दिन आयोजित समारोह के सांध्य कालीन बेला पर शाम 07 बजे आयोजित समारोह में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में वन मंत्री श्री केदार कश्यप उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल, पूर्व सांसद श्री मोहन मण्डावी, भारत स्काउट गाइड के जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रभा नायक, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री सौरभ लुनिया, श्रीमती भुनेश्वरी ठाकुर एव श्रीमती कुसुम शर्मा उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम के तीसरे दिन भी जंबूरी में शामिल रोवर रेंजर विभिन्न प्रकार के गतिविधियों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा तीसरे दिन भी रात्रि कालीन बेला के अवसर पर प्रतिदिन की भांति देश के विभिन्न राज्यों से पधारे प्रतिभागी रोवर रेंजरों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।
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- युवाओं को अंडमान यात्रा करवाने की पुरानी मांग का भी किया समर्थन
रायपुर। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह महाराष्ट्र मंडल के कैलेंडर से खासे प्रभावित हुए। मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने देर शाम स्पीकर हाउस में उन्हें कैंलेडर के कवर पेज से लेकर हर एक पेज को इत्मीनान से दिखाया और पेज के संदर्भ को समझाया भी। डॉ. रमन ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल की 90वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित वर्ष 2026 के विशेष कैलेंडर में गत वर्ष के आयोजनों की समग्र जानकारी है, जो आकर्षक है और भावी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए लुभाने वाली भी।
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष ने डॉ. रमन को मंडल की ओर से पहले सौंपे गए ज्ञापन का स्मरण कराया कि प्रति वर्ष छत्तीसगढ़ शासन कम से कम सौ युवाओं को अंडमान की उद्देश्यपूर्ण सैर कराए और सेल्यूलर जेल दिखाकर स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के संदर्भ में सारगर्भित जानकारी दे। महाराष्ट्र मंडल की इस मांग पर विधानसभाध्यक्ष ने सहमति जताई और कहा कि वे इस विषय पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से चर्चा करेंगे। साथ ही छत्तीसगढ सरकार की तीर्थयात्रा योजना में अंडमान को भी जोड़ने का प्रयास करेंगे। इस अवसर पर सचिव चेतन गोविंद दंडवते, संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के प्रभारी परितोष डोनगांवकर और सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी उपस्थित रहे। -
She-Box पोर्टल पर शत-प्रतिशत प्रविष्टि पर जोर
बिलासपुर/कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बनाए गए कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (PoSH Act) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा शिकायत निवारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज संभाग स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रार्थना सभा कक्ष में आयोजित कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, आंतरिक शिकायत समितियों के पदाधिकारी तथा संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
राज्य स्तरीय संसाधन केन्द्र, महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक श्री एस. के. चौबे ने अपने उद्बोधन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि PoSH अधिनियम के अंतर्गत सभी शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों में प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। उन्होंने She-Box पोर्टल पर सभी संस्थानों की ऑनबोर्डिंग तथा आंतरिक शिकायत समिति (Internal Committee – IC) की प्रविष्टि अनिवार्य रूप से कराने पर जोर दिया, ताकि महिलाओं की शिकायतों का त्वरित, निष्पक्ष और सुरक्षित समाधान सुनिश्चित हो सके।
जिला कार्यक्रम अधिकारी बिलासपुर श्री सुरेश सिंह ने कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा का आधार है। PoSH अधिनियम न केवल शिकायत निवारण का मंच प्रदान करता है, बल्कि संस्थानों में संवेदनशीलता, जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी विभागों से अधिनियम के प्रावधानों का नियमित अनुपालन करने और कर्मचारियों को जागरूक करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर श्री सरवत नकवी ने प्रतिभागियों को अधिनियम की प्रमुख धाराओं की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि PoSH अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत किसी भी शासकीय/अशासकीय संस्था में जहाँ 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हों, वहाँ आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन न होने की स्थिति में कार्यालय प्रमुख पर ₹50,000/- तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने समिति की संरचना, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समय-सीमा, गोपनीयता तथा पीड़िता के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
द्वितीय सत्र में राज्य स्तरीय संसाधन केन्द्र, रायपुर के सहायक संचालक श्री अतुल दांडेकर ने She-Box पोर्टल के संचालन एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने पोर्टल पर पंजीकरण, शिकायत अपलोड करने की प्रक्रिया, प्रगति ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग से जुड़े फीचर्स का लाइव डेमो देते हुए बताया कि यह प्लेटफॉर्म शिकायतों के निस्तारण को समयबद्ध, पारदर्शी और मॉनिटर करने योग्य बनाता है।
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला पंचायत, शिक्षा विभाग, नगर पालिका निगम, उच्च शिक्षा विभाग तथा जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अलावा संभाग के सभी जिलों की आंतरिक एवं स्थानीय शिकायत समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे विभिन्न संस्थानों में एकरूपता के साथ अधिनियम के पालन को गति मिलने की उम्मीद जताई गई। कार्यक्रम का संचालन परियोजना अधिकारी श्री मिलिन्द द्विवेदी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला-जीपीएम श्री अमित सिन्हा द्वारा किया गया। -
बिलासपुर। समाज कल्याण विभाग एवं जिला पुर्नवास केन्द्र बिलासपुर, प्रधानमंत्री दिव्याशा केन्द्र बिलासपुर, एलिम्को अधिकृत विक्रेता विक्रय केन्द्र कोरबा छ.ग. के संयुक्त प्रयास से दिव्यांगजनों हेतु मोटराइज्ड ट्राइसायकल एवं कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण वितरण शा. दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय तिफरा बिलासपुर में आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि श्री तोखन साहू सांसद बिलासपुर एवं केन्द्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री भारत सरकार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक विधायक बिल्हा, विशिष्ट अतिथि श्री राजेश सूर्यवंशी अध्यक्ष जिला पंचायत बिलासपुर, श्रीमति पूजा विधानी महापौर बिलासपुर की गरिमामय उपस्थिति में वितरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। मुख्यअतिथि एवं जनप्रतिनिधयों का श्री टी. पी. भावे संयुक्त संचालक समाज कल्याण द्वारा स्वागत करते हुये अपने स्वागत भाषण में वितरण काग्रकम के बारे में जानकारी देते हुआ बताया कि आज 56 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसायकल एवं अन्य सहायक उपकरण वितरण उनके पूर्व चिन्हाकन अनुसार किया गया है। आगे भी दिव्यांगजनों को उनके आवश्यकता अनुरूप चिन्हाकन कर सामग्री प्रदाय की जावेगी। मुख्य अतिथि श्री तोखन साहू ने अपने उदबोधन में दिव्यांगजनों को बधाई देते हुये प्रधानमंत्री दिव्याशा केन्द्र बिलासपुर में खुलने पर प्रसन्न्ता व्यक्त की और कहा कि आपको शासन द्वारा आज दी गई इस मोटराइज्ड ट्राइसायकल एवं अन्य सहायक उपकरण से आपका रोजगार एवं स्वरोजगार का मार्ग प्रशस्त करेगा। आप स्वयं आत्मनिर्भर बनोगे और आपके जीवकोपार्जन में सहायक होगा। कार्यकम के अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक विधायक बिल्हा ने अपने उदबोधन में कहा कि दिव्यांगजनों के वितरण कार्यकम हेतु समाज कल्याण विभाग को बधाई देते हुये कहा कि अब दिव्यांगजन यह सुविधा पाकर अपने शिक्षण प्रशिक्षण एवं आत्मनिर्भर बन सकते है। कार्यक्रम में अतिथियों हेतु सरस्वती वंदनां एवं स्वागत गीत की प्रस्तुति विद्यालय के दृष्टिबाधित छात्रों द्वारा दी गई। इस अवसर पर सभापति श्रीमती राधा खिलावन पटेल, श्रीमती अरूणा चंद्रप्रकाश सूर्या, अरूण सिंह चौहान, हरीश साहू, श्याम कार्तिक वर्मा, श्रीमती बैजंती जोशी, श्रीमती सरोज साहू, राजू मानिकपूरी, अजय कश्यप, अशोक प्रजापति, श्री रामू साहू, ईश्वर साहू, मंजू दुबे, सुभाष सिंह, ममता सोनी, राघवेन्द्र झा, मोहित सिंह, सुकृता साहू, प्रेमलता ठाकुर के साथ सांथ विभागिय अधिकारीयों में सहायक सांख्यिकी अधिकारी प्रशांत मोकासे, श्री उत्तम राव माथनकर, श्रीमती सरस्वती रामेश्वरी, सुश्री बीना दीक्षित, श्रीमती राजकुमारी सोनी, श्रीमती सरस्वती जायसवाल, रजनी डोंगरे, स्नेहलता वैष्णव, दीक्षांत पटेल, अनिश मानिकपुरी, संतोष सामंत, बसंत श्रीवास, संतोष कुमार, रमाशंकर शुक्ला, वी. के. सिंह, निरंकार तिवारी उपस्थित थे। इस वितरण कार्यक्रम में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी का सहयोग सराहनीय रहा। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रशांत मोकासे ने किया।
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कर्मा भवन में शेड निर्माण के लिए 25 लाख रुपए देने की घोषणा की
बिलासपुर/ उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव आज महासमुंद जिला एवं तहसील साहू संघ के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने महासमुंद के बीटीआई रोड स्थित कर्मा भवन में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि साहू समाज एक संगठित और अनुशासित समाज के रूप में जाना जाता है। समाज का इतिहास अत्यंत वैभवशाली रहा है। इसे और अधिक सशक्त एवं समृद्ध बनाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने युवाओं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने, समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच बनाने तथा सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर जोर दिया।
श्री साव ने कार्यक्रम में कहा कि सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चुनाव अच्छी परंपरा है। यह समाज के लिए शुभ संकेत भी है। महासमुंद जिला कृषि, रोजगार और संसाधनों के मामले में समृद्ध है। यहां किए जा रहे कार्यों का संदेश अन्य जिलों तक जाना चाहिए। उन्होंने कर्मा भवन में शेड निर्माण के लिए 25 लाख रुपए देने की घोषणा की। विधायकगण सर्वश्री मोतीलाल साहू, संदीप साहू और योगेश्वर राजू सिन्हा भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
शपथ ग्रहण समारोह को अति विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने सामाजिक संगठन को मजबूत बनाने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पदाधिकारी अपने व्यवहार में नम्रता रखें तथा नशा, दिखावा एवं अन्य सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने की दिशा में पहल करें। साहू समाज के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू ने समाज के संगठन की मजबूती पर बल देते हुए बुराइयों को रोकने प्रत्येक व्यक्ति को आगे आने को कहा।
महासमुंद जिला साहू समाज के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री ढालूराम साहू ने मां कर्मा एवं राजिम भक्तिन माता का स्मरण करते हुए कहा कि वे शिक्षा को बढ़ावा देने, संगठन में पारदर्शिता लाने तथा सामाजिक समरसता स्थापित करने के तीन संकल्पों के साथ कार्य करेंगे। राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्री चंदूलाल साहू, श्री चुन्नीलाल साहू, साहू समाज के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष श्री विपिन साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री निखिलकांत साहू और श्री येतराम साहू सहित साहू समाज के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक समारोह में बड़ी संख्या में मौजूद थे। -
-प्रदेश में अब तक 16 लाख से अधिक किसानों को धान खरीदी के एवज में एमएसपी के तहत् 20 हजार 753 करोड़ रूपए का भुगतान
-पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था से वास्तविक किसानों के हितों की हो रही है रक्षा, हर पात्र किसान तक लाभ पहुँचाने का संकल्प सार्थकरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 14 नवम्बर 2025 से प्रारंभ हुआ छत्तीसगढ़ का धान खरीदी महाअभियान पारदर्शिता, गति और किसान-हितैषी व्यवस्था का उदाहरण बनता जा रहा है।प्रदेश में अब तक 16.95 लाख पंजीकृत किसानों से 93.12 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है।किसानों को उनके पसीने की पूरी कीमत समय पर मिल सके, इसके लिए शासन द्वारा समर्थन मूल्य के तहत अब तक लगभग 20 हजार 753 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा चुका है। यह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है, बल्कि किसानों के आर्थिक आत्मविश्वास को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है।प्रदेशभर में संचालित 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित, डिजिटल निगरानीयुक्त और पूर्णतः पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे।किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने टोकन व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाया है। खाद्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब टोकन सहकारी समितियों के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं।खरीदी के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के प्रमुख धान उत्पादक जिलों में तेज गति से उपार्जन हुआ है।उल्लेखनीय है कि 8 जनवरी तक महासमुंद जिले में 6 लाख 33 हजार 291 क्विंटल, बेमेतरा जिले में 5 लाख 33 हजार 482 क्विंटल, बलौदाबाजार-भाठापारा जिले में 5 लाख 15 हजार 071 क्विंटल, बालोद जिले में 4 लाख 99 हजार 074 क्विंटल, रायपुर जिले में 4 लाख 66 हजार 249 क्विंटल, धमतरी जिले में 4 लाख 43 हजार 308 क्विंटल, राजनांदगांव जिले में 4 लाख 42 हजार 473 क्विंटल, बिलासपुर जिले में 4 लाख 21 हजार 142 क्विंटल, जांजगीर-चांपा जिले में 4 लाख 18 हजार 429 क्विंटल, कवर्घा जिले में 4 लाख 12 हजार 003 क्विंटल, दुर्ग जिले में 3 लाख 60 हजार 605 क्विंटल, गरियाबंद जिले में 3 लाख 60 हजार 612 क्विंटल, मुंगेली जिले में 3 लाख 58 हजार 072 क्विंटल, रायगढ़ जिले में 3 लाख 42 हजार 528 क्विंटल, कांकेर जिले में 3 लाख 25 हजार 960 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 3 लाख 14 हजार 758 क्विंटल, धान की खरीदी हुई है।इसी प्रकार बस्तर जिले में 1 लाख 79 हजार 964 क्विंटल, बीजापुर में 59 हजार 583 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 10 हजार 238 क्विंटल, कोंडागांव 1 लाख 97 हजार 106 क्विंटल, नारायणपुर में 24 हजार 022 क्विंटल, सुकमा 47 हजार 617 क्विंटल, गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही में 87 हजार 870 क्विंटल, कोरबा में 1 लाख 56 हजार 983 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में 2 लाख 77 हजार 071 क्विंटल, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1 लाख 41 हजार 353 क्विंटल, बलरामपुर जिले में 1 लाख 57 हजार 708 क्विंटल, जशपुर जिले में 1 लाख 68 हजार 264 क्विंटल, कोरिया जिले में 76 हजार 648 क्विंटल, सरगुजा जिले में 2 लाख 2 हजार 951 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 2 लाख 29 हजार 359 क्विंटल, सक्ती जिले में 2 लाख 70 हजार 468 क्विंटल और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में 56 हजार 855 क्विंटल धान की खरीदी हुई है।छत्तीसगढ़ की धान खरीदी प्रणाली आज केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसान सम्मान, पारदर्शिता और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का यह संकल्प स्पष्ट है कि हर पात्र किसान को समय पर, पूरा और पारदर्शी लाभ मिलेगा — और यही राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। - महासमुंद / राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा के निर्देशानुसार जिला मिशन संचालक एवं कलेक्टर श्री विनय कुमार लगेह एवं जिला परियोजना संचालक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हेमंत नंदनवार के मार्गदर्शन में जिले में संचालित पीएमश्री स्कूल सहित अन्य विद्यालय के 24 विद्यार्थी एवं 9 गाइड शिक्षक पड़ोसी राज्य के शैक्षणिक भ्रमण पर रवाना हुए।बच्चो के बसना पहुंचने पर महासमुंद लोकसभा के सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने बच्चो को ट्रैकशूट, एक्सपोजर विजिट फ्लैप, फोल्डर प्रदान कर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सांसद ने कहा कि बच्चों के संपूर्ण ज्ञान विस्तार के लिए केंद्र शासन के शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत एक्सपोजर विजिट का प्रावधान किया है, जिसमें चयनित मेघावी विद्यार्थियों को राज्य के बाहर अन्य राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक विरासतों एवं ऐतिहासिक महत्व के विषय में जानकारी प्राप्त हो सकेगी। बच्चे भारत की विविधता में एकता के स्वरूप को स्वयं समझ सकेंगे। उन्होंने सभी छात्रों और उनके शिक्षकों को यात्रा अध्ययन के रिकॉर्ड संधारण के लिए प्रेरित करते हुए यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी। जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरें एवं जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने बताया कि छात्रों को ओडिशा के राजधानी में स्थापित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भुवनेश्वर के विज्ञान संकाय, जूलॉजिकल पार्क, साइंस सेंटर, सहित राज्य के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा।
- -अतिरिक्त आय से मिल रही राहत-समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से किसानों को राहतरायपुर। शासन की धान खरीदी नीति ने किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। समर्थन मूल्य पर समयबद्ध भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था के कारण किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। बलरामपुर.रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड बलरामपुर के ग्राम कोटपाली के किसान श्री मोहन यादव भी इसी का लाभ ले रहे हैं।श्री मोहन यादव ने उपार्जन केंद्र महाराजगंज में इस वर्ष 165 क्विंटल धान का विक्रय किया। वे बताते हैं कि धान विक्रय करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। ऑनलाइन माध्यम से टोकन कटवाने के बाद निर्धारित तिथि पर केंद्र पहुँचकर सुगम तरीके से धान विक्रय किया। वे कहते हैं कि शासन द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदने की सीमा तय किए जाने से किसानों की चिंता दूर हुई है। अब किसानों को अपनी पूरी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और भुगतान भी सीधे खाते में समय पर प्राप्त हो रहा है।मोहन यादव बताते है कि समय पर भुगतान मिलने से नई फसल के लिए उन्नत बीज, खाद और कृषि कार्यों में बेहतर निवेश कर पा रहे हैं, जिससे उनकी खेती की उत्पादकता में निरंतर वृद्धि हो रही है। श्री मोहन यादव कहते हैं कि सरकार की धान खरीदी नीति से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि भरोसा भी बढ़ा है। उन्होंने किसान हितैषी नीतियों के लिए शासन प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया।



























