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तांदुला जलाशय में सुबह 10 बजे से आयोजित होगा माॅक ड्रिल
बालोद/ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्राधिकरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जिला बालोद के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार 20 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे ग्राम सिवनी (आदमाबाद) स्थित तांदुला जलाशय में बाढ़ आपदा के संबंध में मॉक ड्रिल आयोजन किया जाएगा। अपर कलेक्टर एवं राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा प्रभारी अधिकारी श्री अजय किशोर लकरा ने बताया कि यह मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने तथा आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि यह केवल एक पूर्वाभ्यास (प्रशिक्षण प्रक्रिया) है, इसलिए अभ्यास के दौरान किसी भी प्रकार की घबराहट से बचें और पूरी तरह शांति बनाए रखें। साथ ही, किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें और दूसरों को भी सही जानकारी दें। इस महत्वपूर्ण मॉक ड्रिल को सफल बनाने में जिला प्रशासन ने समस्त नागरिकों से पूर्ण सहयोग करने का अनुरोध किया है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए विभागीय सतर्कता और सुरक्षा इंतजामों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 18 एवं 20 अगस्त को सुबह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से टेबल टाॅप एवं माॅक एक्सरसाईज का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। - -समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ली संयुक्त बैठकरायपुर / दिव्यांगजनों, उभयलिंगी समुदाय तथा अन्य अंतर्विभागीय विषयों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को महानदी भवन, मंत्रालय, अटल नगर में समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।बैठक में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से संबंधित प्रकरणों की जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य मेडिकल बोर्ड अथवा संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से कराए जाने पर चर्चा हुई। संबंधित व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर परीक्षण कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने तथा निर्धारित समयान्तराल में दिव्यांगता की भौतिक जांच के लिए उपस्थित होने वाले व्यक्तियों के प्रकरणों की समीक्षा किए जाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।अधिकारियों ने बताया कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों की जांच के लिए राज्य मेडिकल एवं संभागीय मेडिकल बोर्ड में परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।बैठक में दिव्यांगजनों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने, मेडिकल बोर्ड में विषय- विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड एवं दिव्यांगता परीक्षण शिविर आयोजित करने पर चर्चा की गई। पात्र दिव्यांगजनों को समयबद्ध रूप से प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप अस्थायी एवं स्थायी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी की स्थिति में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने पर भी सहमति बनी।बैठक में उभयलिंगी समुदाय के व्यक्तियों के लिए राज्य की सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) संबंधी सहायता तथा समय-सीमा में पात्र हितग्राहियों को लाभ प्रदान करने पर चर्चा हुई। SRS के लिए सहायता अनुदान संबंधी दिशा-निर्देशों में आवश्यक सर्जरी को शामिल किए जाने तथा निर्धारित दरों में वर्तमान बाजार दर के अनुरूप संशोधन की कार्यवाही पर विचार किया गया।राज्य के शासकीय अस्पतालों में उभयलिंगी व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पृथक ट्रांसजेंडर क्लीनिक/वार्ड की व्यवस्था किए जाने पर भी चर्चा हुई।बैठक में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्रों की समीक्षा की गई। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुरूप राज्य में संचालित नशामुक्ति केंद्रों के पंजीयन तथा मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण से संबंधित प्रक्रिया की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नशामुक्ति केंद्रों में उपचाररत व्यक्तियों को दी जा रही दवाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा केंद्रों के विस्तार एवं बेहतर संचालन पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, भिक्षुक, उभयलिंगी एवं नशा पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं संस्थागत संरक्षण के लिए संचालित शासकीय एवं अनुदान प्राप्त संस्थाओं में निवासरत हितग्राहियों के स्वास्थ्य परीक्षण की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालक श्री संजीव झा, समाज कल्याण विभाग के संचालक श्री रणवीर शर्मा सहित दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -स्वतंत्रता दिवस पर 'जय गढ़िया बाबा दल' ने बिखेरा छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति का जादू-सरईटोला के कलाकारों ने दिल्ली के सेंट्रल हॉल में जमाया रंग; मांदरी नृत्य से गुंजायमान हुआ राष्ट्रीय मंचरायपुर ।छत्तीसगढ़ की सोंधी माटी की महक और उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति की गूंज इस स्वतंत्रता दिवस पर देश की राजधानी के सबसे गरिमामयी मंच तक जा पहुंची। अवसर था 15 अगस्त का और गवाह बना राष्ट्रपति भवन का प्रतिष्ठित सेंट्रल हॉल, जहां धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के सुदूर गांव सरईटोला (गुडरापार) के कलाकारों ने अपनी मांदरी नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति से समां बांध दिया। ‘जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल’ के इस प्रदर्शन ने न केवल राष्ट्रपति भवन में मौजूद गणमान्य अतिथियों का दिल जीता, बल्कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ की लोककला का परचम राष्ट्रीय पटल पर लहरा दिया।पारंपरिक वेशभूषा, रंग-बिरंगे आभूषणों और गुट्टा मांदर की थाप के साथ जब सरईटोला के कलाकारों ने मंच संभाला, तो पूरा वातावरण छत्तीसगढ़ी लोक-आत्मा के रंगों में सराबोर हो गया। फसल कटाई के उल्लास, सामाजिक सरोकारों और पीढ़ियों से संजोई जनजातीय जीवन शैली को दर्शाती इस प्रस्तुति ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह नृत्य केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि लोक-स्मृतियों और सामुदायिक पहचान का जीवंत प्रदर्शन बन गया।दल के सचिव श्री रूपराय नेताम ने इस ऐतिहासिक पल को साझा करते हुए बताया कि दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (नागपुर) द्वारा दल की मौलिकता और कला-साधना को परखते हुए स्वतंत्रता दिवस के इस विशेष कार्यक्रम के लिए चयन किया गया था। राष्ट्रीय मंच पर राज्य की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख कलाकारों में श्री रतन लाल निषाद एवं श्री सुरेंद्र सोरी,श्री हेमंत सोरी,कु. सुलोचना सोरी एवं कु. मधु नेताम शामिल रहे।कलाकारों की इस अप्रतिम सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धमतरी कलेक्टर श्री मिश्रा ने पूरे दल और समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि धमतरी की पहचान सिर्फ उसकी प्राकृतिक सुंदरता और कृषि समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की जनजातीय परंपराएं और लोकसंगीत हमारी वास्तविक धरोहर हैं। सरईटोला के कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देकर जिले को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोककला को आगे बढ़ाने की सशक्त प्रेरणा देगी।ग्रामीण अंचल की पगडंडियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के मंच तक पहुंची यह सांस्कृतिक यात्रा इस बात की साक्षी है कि लोककला की मौलिकता आज भी अमर है। मांदर की यह राष्ट्रीय गूंज यह संदेश दे गई कि जब गांव की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलता है, तो वह केवल कलाकारों का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर देती है।
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अंबिकापुर. सरगुजा जिले में पति-पत्नी की हत्या कर शव को बोरियों में भरकर रख दिया गया। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि परसापारा गांव में हुई इस भयावह घटना का पता उस समय चला, जब दंपति के छोटे बेटे मोहन ने सोमवार को खून से सनी बोरियां देखीं और पुलिस को सूचना दी। छोटा बेटा परिवार से अलग रहता था। उन्होंने बताया कि हीराधर यादव (55) और उनकी पत्नी गुलाबी यादव (52) के शवों को बोरी में भरकर घर के अंदर एक कमरे में बंद कर दिया गया था। पुलिस ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि मृतकों के सिर पर कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियार के गहरे घाव थे।
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- -शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अधोसंरचना विकास को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के निर्देशरायपुर । छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों के जरिए 'सुशासन से समृद्धि' की एक नई मिसाल पेश कर रहा है। जिले के दूरदराज इलाकों में सड़क, बिजली, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं, जिससे नागरिकों का जीवन बदल रहा है।सुकमा जिले को शांति, सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दे रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ शासन के खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सचिव एवं जिले के प्रभारी सचिव श्री राजेश सिंह राणा की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शासन की प्रमुख योजनाओं और सुशासन तिहार के आवेदनों की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर श्री अमित कुमार भी बैठक में उपस्थित रहे।प्रभारी सचिव श्री राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासकीय योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचे। उन्होंने सभी विभागों को टीम भावना के साथ मिशन मोड में काम करने और कार्यों में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।बैठक में कुपोषण को दूर करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया। मलेरिया और मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा गर्भवती महिलाओं की होम डिलीवरी कम करने के लिए पहले से प्रभावी रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए।शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान समय-सीमा में पाठ्यक्रम पूरा करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने और परीक्षा परिणाम बेहतर करने के निर्देश दिए गए। सभी शिक्षकों की 100 प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। युवाओं को रोजगारमूलक प्रशिक्षण से जोड़ने और स्थानीय संसाधनों से रोजगार के नए अवसर विकसित करने के निर्देश दिए गए। रेशम पालन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक प्रसंस्करण एवं वैल्यू एडिशन यूनिट की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ग्रामीण रोजगार और मानव दिवस बढ़ाने तथा पीएम सूर्यघर योजना में भी तेजी से प्रगति लाने के निर्देश दिए गए।प्रभारी सचिव ने हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा राजस्व प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। सभी शासकीय फाइलों को ई-ऑफिस के माध्यम से संचालित करने और प्रत्येक विभाग को अपनी प्राथमिकताएं तय कर परिणाम आधारित कार्य करने को कहा गया।श्री राणा ने कृषि, उद्यानिकी, शिक्षा, आजीविका तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुकमा का विकास विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देगा। शासन की कल्याणकारी योजनाओं और नक्सल पुनर्वास नीति को विकास कार्यों से जोड़कर जिले में स्थायी शांति, विश्वास और आत्मनिर्भरता का वातावरण तैयार किया जा रहा है।कलेक्टर सुकमा ने प्रभारी सचिव को आश्वस्त किया कि बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करते हुए सभी विभाग आपसी समन्वय से विकास कार्यों को गति देंगे। प्रशासन के इस मिशन मोड प्रयास से सुकमा में शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जिले की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में नई गति मिलेगी।
- -वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से RBI महाप्रबंधक ने की मुलाकातरायपुर । वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी से आज रायपुर स्थित उनके निवास पर भारतीय रिज़र्व बैंक, रायपुर कार्यालय के महाप्रबंधक श्री मनीष पराशर ने शिष्टाचार भेंट की। प्रभारी अधिकारी का कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात हुई इस मुलाकात में छत्तीसगढ़ में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं के विस्तार, मुद्रा प्रबंधन तथा भारतीय रिज़र्व बैंक से संबंधित विभिन्न विषयों पर सकारात्मक एवं सार्थक चर्चा हुई।बैठक के दौरान वर्तमान में नागपुर से होने वाले करेंसी डिस्ट्रीब्यूशन को नवा रायपुर में स्थापित करने की दिशा में की जा रही महत्वपूर्ण पहल पर भी चर्चा हुई। नवा रायपुर में करेंसी डिस्ट्रीब्यूशन की व्यवस्था विकसित होने से राज्य में मुद्रा प्रबंधन और बैंकिंग सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने में मदद मिलेगी।श्री पराशर ने वित्त मंत्री को राज्य में बैंकिंग सेवाओं तथा मुद्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान भारतीय रिज़र्व बैंक, रायपुर कार्यालय में हाल ही में प्रारंभ की गई सॉइल्ड नोट्स के स्थानीय प्रसंस्करण की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी साझा की गई। इस सुविधा से प्रचलन से वापस प्राप्त अनुपयोगी एवं खराब हो चुके नोटों का प्रसंस्करण अब स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा।मुलाकात के दौरान भारतीय रिज़र्व बैंक की प्रस्तावित नवीन आवासीय परियोजना तथा इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इन पहलों की जानकारी प्राप्त करते हुए राज्य शासन की बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी अपेक्षाओं को साझा किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक एवं राज्य शासन के बीच निरंतर सहयोग और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर श्री प्रदीप गोंधुले, श्री अमरेन्द्र गुप्ता एवं श्री अमितेश सिंह उपस्थित रहे।
- -*कोंटा की 14 महिला स्व-सहायता समूहों को मिला 39.50 लाख रूपए का बैंक लिंकेज ऋण*रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की 'बिहान' योजना महिलाओं के जीवन में बड़ा आर्थिक बदलाव लाई है। स्व-सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आजीविका के नए साधन दिए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है। दक्षिण बस्तर के सुकमा जिले के दूरस्थ वनांचल में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में जनपद पंचायत कोंटा की 14 महिला स्व-सहायता समूहों को कुल 39.50 लाख रुपये का बैंक लिंकेज ऋण प्रदान किया गया है। यह ऋण महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर है। ऋण की राशि मिलने से महिला समूहों की दीदियों में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं इस राशि का उपयोग कृषि, पशुपालन, सिलाई और स्थानीय छोटे व्यवसायों को बढ़ाने में करेंगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि आजीविका के साधन मजबूत होने से वे अपने बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतों और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए अधिक मजबूती से योगदान दे सकेंगी। ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाएं बचत, समूह संचालन और बैंकिंग गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। ऋण वितरण के दौरान प्रशासन और बैंक अधिकारियों ने महिलाओं से संवाद कर ऋण राशि का उपयोग आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में करने की समझाइश दी। उन्हें समय पर ऋण की किश्त जमा करने, नियमित बचत करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जानकारी भी दी गई। इससे महिलाओं की बैंकिंग व्यवस्था में विश्वसनीयता और आर्थिक आत्मविश्वास दोनों मजबूत होंगे।सुकमा जैसे वनांचल जिले में ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को समूह से जोड़कर उन्हें बचत, बैंक लिंकेज, स्वरोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रहा है। अब महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी मेहनत और समूह की ताकत से आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।इस पहल में जनपद पंचायत कोंटा के विकास विस्तार अधिकारी श्री गोपाल नेताम, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक कोंटा के शाखा प्रबंधक श्री रामाकृष्णा, प्रभारी बीपीएम श्री अरविंद कुमार, संकुल समन्वयक श्रीमती रुकमणी कर्मा और श्रीमती आरती बघेल उपस्थित रहीं।सुकमा जिले की इन महिलाओं की सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजना, बैंकिंग सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार के साथ पूरे गांव की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं। ‘बिहान’ की यह पहल वनांचल की महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को नई दिशा दे रही है।
- -स्व-सहायता समूह की दीदियों ने प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार कीं इको-फ्रेंडली राखियां-जगदलपुर कलेक्टोरेट में लगी प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला बढ़ावारायपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बस्तर की ग्रामीण महिलाओं के हुनर, स्वावलंबन और स्थानीय संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। जगदलपुर कलेक्टोरेट परिसर में विकासखंड जगदलपुर, बकावंड और बस्तर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हस्तनिर्मित एवं पर्यावरण-अनुकूल राखियों की विशेष प्रदर्शनी-सह- बिक्री लगाई गई। प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार इन राखियों ने न केवल लोगों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि बस्तर की ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान दी। कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं सहायक कलेक्टर ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार राखियों और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए स्वयं राखियां खरीदकर उनका उत्साहवर्धन किया।प्रदर्शनी में ग्रामीण महिलाओं ने धान, चावल, लालभाजी एवं खीरे के बीज, मयूर पंख, बांस, प्राकृतिक धागों और कौड़ियों जैसी स्थानीय एवं प्राकृतिक सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार की थीं। इन राखियों में बस्तर की लोककला, प्रकृति और पारंपरिक संस्कृति की सुंदर झलक दिखाई दी। कलेक्टोरेट पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी और आम नागरिक भी इन राखियों को खरीदने के लिए उत्साहित नजर आए। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हुई।ग्रामीण महिलाओं को राखी निर्माण में दक्ष बनाने के लिए जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, आड़ावाल द्वारा 21 से 26 जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। इसमें जिले के सातों जनपदों से आई 30 महिला प्रतिभागियों ने राखी निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को डिजाइन चयन, रंग संयोजन, गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से आकर्षक राखियां तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों की अन्य महिलाओं को भी जोड़ते हुए बड़े पैमाने पर राखियों का निर्माण किया। कलेक्टोरेट परिसर में लगी यह प्रदर्शनी केवल राखियों की बिक्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनी। बिचौलियों से मुक्त सीधी बिक्री के कारण महिलाओं को अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिला। इससे उनकी आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित हुए।हस्तनिर्मित राखियों की यह प्रदर्शनी पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को एक साथ मजबूती प्रदान कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों से तैयार इन राखियों के माध्यम से बस्तर की ग्रामीण महिलाओं ने यह संदेश दिया कि स्थानीय हुनर और संसाधनों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।
- -*प्रभारी सचिव श्री राजेश सिंह राणा ने लाइवलीहुड कॉलेज में कौशल प्रशिक्षण का किया शुभारंभ*-*पुनर्वासित युवाओं को मोबाइल फोन वितरित किए, जमीन पर बैठकर उनके साथ किया भोजन*रायपुर। निर्वासित युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाकर विकास की नई राह प्रदान करना किसी भी प्रगतिशील समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न कारणों से समाज के हाशिए पर चले गए युवाओं को पुनः सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। सुकमा जिले में पुनर्वासित युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सचिव एवं जिले के प्रभारी सचिव श्री राजेश सिंह राणा ने मंगलवार को जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न विकास और पुनर्वास योजनाओं का जमीनी निरीक्षण किया। इस दौरान कलेक्टर श्री अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री मयंक गुर्जर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर भी मौजूद रहे। प्रभारी सचिव श्री राणा ने लाइवलीहुड कॉलेज पहुंचकर पुनर्वासित युवाओं के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दो माह के इस प्रशिक्षण में 20 युवाओं को कोसा से रेशम निकालने, उन्नत हथकरघा से साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है, ताकि वे अपने हुनर का उपयोग कर सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। प्रभारी सचिव ने पुनर्वास केंद्र पहुंचकर युवाओं से सीधे संवाद किया और उनके अनुभवों तथा जरूरतों की जानकारी ली। डिजिटल तकनीक से जोड़ने के लिए 20 पुनर्वासित युवाओं को मोबाइल फोन वितरित किए गए। मोबाइल मिलने से युवाओं को ऑनलाइन जानकारी, प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।श्री राणा ने पुनर्वासित युवाओं के साथ आत्मीयता और सहजता से संवाद किया। इस दौरान युवाओं द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए भोजन को उन्होंने उनके साथ जमीन पर बैठकर ग्रहण किया। उनके इस आत्मीय व्यवहार से युवाओं में उत्साह और विश्वास बढ़ा। उन्होंने युवाओं को मेहनत और कौशल के साथ आगे बढ़कर अपने परिवार और समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।प्रवास के दौरान श्री राणा ने प्रसिद्ध तुंगल डैम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए कलेक्टर श्री अमित कुमार को तुंगल डैम को सुव्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। तुंगल डैम में भ्रमण के लिए पहुंचे स्कूली बच्चों से प्रभारी सचिव ने आत्मीयता से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और उन्हें मेहनत के साथ पढ़ाई कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। सुकमा जिले में पुनर्वास, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और पर्यटन विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रहा प्रशासन का यह प्रयास युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर तैयार कर रहा है। शासन की योजनाओं का यह जमीनी क्रियान्वयन सुकमा में शांति के साथ विकास और विश्वास की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।
- -बिहान समूह की महिलाओं ने केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू को भेंट किया विष्णुभोग चावल और धान से बनी राखी-स्थानीय उत्पादों से रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने की पहल को केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने सराहारायपुर ।गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें जिले की पहचान विष्णुभोग चावल तथा विष्णुभोग धान से तैयार की गई विशेष राखी भेंट की।स्थानीय संसाधनों से तैयार इन उत्पादों को देखकर श्री साहू ने बिहान समूह की महिलाओं की रचनात्मकता, मेहनत और आत्मनिर्भरता की भावना की सराहना की। उन्होंने महिलाओं द्वारा स्थानीय उत्पादों को नए रूप में प्रस्तुत कर आजीविका के अवसर तैयार करने की पहल को प्रेरणादायी बताया।बिहान समूह की महिलाओं द्वारा विष्णुभोग धान से तैयार की गई विशेष राखी स्थानीय संस्कृति, रचनात्मकता और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम है। पारंपरिक पर्व रक्षाबंधन को जिले के स्थानीय कृषि उत्पाद से जोड़ते हुए तैयार की गई यह राखी न केवल एक हस्तनिर्मित उत्पाद है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।विष्णुभोग धान जिले की विशिष्ट पहचान से जुड़ा उत्पाद है। महिलाओं ने इसी स्थानीय पहचान को अपनी रचनात्मकता से जोड़कर एक ऐसा उत्पाद तैयार किया है, जो स्थानीय संस्कृति और आजीविका दोनों को एक साथ बढ़ावा देता है।बिहान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं तथा वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।विष्णुभोग चावल और उससे जुड़े स्थानीय उत्पादों को आकर्षक स्वरूप देकर बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महिला समूहों की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की क्षमता रखती है। ऐसी गतिविधियां महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विष्णुभोग धान से तैयार विशेष राखी यह संदेश देती है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक पहचान को रचनात्मकता से जोड़कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। बिहान समूह की महिलाओं की यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
- -स्वस्थ डिम्ब समूह योजना से हितग्राहियों को मिला 1.40 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ-10 हजार स्वस्थ तसर डिम्ब समूह वितरित, वैज्ञानिक तकनीक से उत्पादन बढ़ाने पर जोररायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में तसर (कोसा) पालन को बढ़ावा देने के लिए भैरमगढ़ के कोसा बीज केंद्र में ग्रामीणों और हितग्राहियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस पहल के तहत अर्जुन और साजा के 5,000 पौधे तैयार किए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए साधन बनेंगे।बीजापुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तसर पालन को बढ़ावा देने और हितग्राहियों की आय बढ़ाने के लिए शासन की स्वस्थ डिम्ब समूह वितरण योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के तहत मिन्कापल्ली, कोत्तापल्ली, गुदमा और भैरमगढ़ क्षेत्र के रेशम हितग्राहियों को 10 हजार स्वस्थ तसर डिम्ब समूह वितरित किए गए हैं। इस पहल से ग्रामीण परिवारों को तसर पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय और रोजगार का अवसर मिलेगा। योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को लगभग 1.40 लाख रुपये की शासकीय सब्सिडी का लाभ मिला है। स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण डिम्ब समूह मिलने से हितग्राही बेहतर तरीके से तसर पालन कर सकेंगे। इससे कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन प्राप्त करने की संभावना बढ़ेगी।स्वस्थ डिम्ब समूह एसएमटीसी, चेन्नूर (तेलंगाना) से प्राप्त कर हितग्राहियों को उपलब्ध कराए गए हैं। रेशम विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ हितग्राहियों को तसर पालन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं। उन्हें डिम्ब समूहों की देखभाल, कीट प्रबंधन, पौधों की सुरक्षा और तसर पालन के विभिन्न चरणों के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।विभाग द्वारा हितग्राहियों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, ताकि स्वस्थ डिम्ब समूहों का बेहतर पालन कर अधिक से अधिक कोसा उत्पादन किया जा सके। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की अतिरिक्त आय में वृद्धि होगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार का साधन भी मिलेगा।स्वस्थ डिम्ब समूह वितरण योजना बीजापुर के ग्रामीण हितग्राहियों को पारंपरिक तसर पालन को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर दे रही है। गुणवत्तापूर्ण डिम्ब समूह, शासकीय सब्सिडी और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से तसर उत्पादकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।यह पहल न केवल जिले में तसर उत्पादन और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी तैयार करेगी।
- -*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से प्रभावित परिवारों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन का संबल*रायपुर ।छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ उन्हें सम्मानजनक जीवन और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और छत्तीसगढ़ नक्सलवाद, आत्मसमर्पण, पीड़ित, राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत नक्सल पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की अनुशंसा पर बीजापुर जिले के नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्य श्री राजेश कुमार आलम को शासकीय सेवा में अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई है।कलेक्टर एवं आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, जिला बीजापुर के निर्देशानुसार श्री राजेश कुमार आलम को नियमित चतुर्थ श्रेणी (अर्दली) के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। उन्हें जिला कार्यालय, बीजापुर में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है।यह नियुक्ति नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। शासकीय सेवा मिलने से श्री आलम और उनके परिवार को स्थायी आजीविका का सहारा मिलेगा तथा वे आत्मनिर्भर होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। राज्य सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को राहत और सहायता देने के साथ उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। ऐसे प्रयासों से प्रभावित परिवारों में शासन के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है और शांति, पुनर्वास तथा विकास की राह को नई मजबूती मिल रही है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ राहत, पुनर्वास, रोजगार और विकास को प्राथमिकता दे रही है। बीजापुर में दी गई यह अनुकम्पा नियुक्ति इसी संवेदनशील और जनकल्याणकारी सोच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
- -’45 गांवों के 50 हितग्राहियों को लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज का वितरण’-जल संरक्षण संरचनाएं अब बन रहीं आय और रोजगार का माध्यम’रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए शासन की योजनाओं का प्रभावी अभिसरण किया जा रहा है। इसी कड़ी में सरगुजा जिले में वीबी-जी राम जी योजना के तहत निर्मित आजीविका डबरी एवं नवा तरिया को मत्स्य पालन से जोड़कर ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। जिले के अम्बिकापुर विकासखंड में 28 ग्राम पंचायतों की 35 आजीविका डबरियों और 2 नवा तरिया में लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज का संचयन किया गया है।मत्स्य विभाग द्वारा शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, दरिमा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर फिंगरलिंग मछली बीज उपलब्ध कराया गया। इस पहल के तहत 45 गांवों से जुड़े 50 हितग्राहियों को मछली बीज प्रदान किया गया, जिसे उनके गांवों में निर्मित आजीविका डबरी एवं नवा तरिया में संचयित किया जाएगा।आजीविका डबरी एवं नवा तरिया का निर्माण केवल जल संरक्षण और ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। इन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का माध्यम बनाया जा रहा है। मत्स्य पालन शुरू होने से उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और ग्रामीणों को अपने गांव में ही आर्थिक गतिविधि का अवसर मिलेगा।मत्स्य बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान से हितग्राहियों पर शुरुआती लागत का भार कम हुआ है। इसके साथ ही मत्स्य विभाग द्वारा मछली बीज संचयन, मछलियों की देखभाल, पोषण, प्रबंधन एवं उत्पादन से संबंधित आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, ताकि जल संरचनाओं से बेहतर मत्स्य उत्पादन प्राप्त किया जा सके।जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को विभिन्न विभागों की गतिविधियों से जोड़कर उनके प्रभाव को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। वीबी-जी राम जी योजना के तहत निर्मित जल संरचनाओं में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने से एक ही परिसंपत्ति का उपयोग जल संरक्षण के साथ-साथ आय संवर्धन के लिए भी किया जा रहा है।इन संरचनाओं में मत्स्य पालन से उत्पादन बढ़ने पर आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज के संचयन से अम्बिकापुर विकासखंड की आजीविका डबरियों एवं नवा तरिया में मत्स्य पालन गतिविधियों को व्यापक आधार मिला है। यह पहल दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं का योजनाबद्ध उपयोग कर जल संरक्षण, रोजगार, मत्स्य उत्पादन और आय संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।जिला प्रशासन के प्रयासों से आजीविका डबरी एवं नवा तरिया अब ग्रामीण विकास की ऐसी परिसंपत्तियों के रूप में विकसित हो रही हैं, जो जल संसाधन संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूत आधार प्रदान करेंगी।
- -’कच्चे खपरैल मकान से पक्के आशियाने तक पहुंचा परिवार, मिला सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन’रायपुर । प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव ला रही है। योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुरक्षित और पक्का आवास उपलब्ध कराकर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने का कार्य किया जा रहा है। जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत पामगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत धरदेई निवासी श्री भूपेन्द्र कुमार कर्ष की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है।श्री भूपेन्द्र कुमार कर्ष, पिता श्री अलग राम, उम्र 48 वर्ष, कृषि एवं मजदूरी का कार्य कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे लंबे समय तक अपनी पत्नी, एक पुत्री और एक पुत्र के साथ मिट्टी एवं खपरैल से बने कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने और मकान की जर्जर स्थिति के कारण परिवार को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में परिवार के लिए एक पक्का और सुरक्षित घर बनाना उनके लिए वर्षों पुराना सपना था।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पात्रता के आधार पर ग्राम पंचायत धरदेई द्वारा वर्ष 2024-25 में श्री भूपेन्द्र कुमार कर्ष के आवास का अनुमोदन किया गया। आवास स्वीकृत होने के बाद शासन से प्राप्त किस्तों के माध्यम से उन्होंने निर्माण कार्य शुरू किया। ग्राम पंचायत में संचालित स्व-सहायता समूहों ने सेंटरिंग सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग किया। वहीं अटल डिजिटल सुविधा केंद्र तथा ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक ने भी आवास निर्माण में आवश्यक सहयोग प्रदान किया।आवास निर्माण के दौरान श्री कर्ष को 90 दिवस की मजदूरी की सहायता राशि भी प्राप्त हुई, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक संबल मिला। शासन की सहायता, स्थानीय स्तर पर मिले सहयोग और स्वयं की मेहनत से उनका पक्का मकान तैयार हुआ। आज श्री भूपेन्द्र कुमार कर्ष अपने परिवार के साथ सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।कच्चे और खपरैल मकान से पक्के आवास तक का यह सफर श्री कर्ष के परिवार के लिए केवल एक घर मिलने की उपलब्धि नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और सम्मानपूर्ण जीवन की नई शुरुआत है। पक्की छत मिलने से जहां परिवार को मौसम की परेशानियों से राहत मिली है, वहीं उनके भीतर अपने भविष्य को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा है। श्री भूपेन्द्र कुमार कर्ष ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद वे अपने परिवार के लिए पक्का घर बना पाएंगे। शासन की सहायता से उनका वर्षों पुराना सपना आज हकीकत बन चुका है।
- -’18 अगस्त से 24 सितंबर तक चलेगा अभियान, जशपुर जिले में 2766 सत्रों के माध्यम से 78,370 बच्चों को पिलाई जाएगी विटामिन-ए की खुराक’रायपुर। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और उत्तरजीविता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में शिशु संरक्षण माह का शुभारंभ किया गया। जिला चिकित्सालय जशपुर में आयोजित कार्यक्रम में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गौरव सिंह एवं डॉ. गीतांजलि तिवारी ने बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाकर अभियान की शुरुआत की। अभियान 18 अगस्त से 24 सितंबर 2026 तक संचालित होगा।जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि शिशु संरक्षण माह के दौरान प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को वी.एच.एन.डी. सत्र आयोजित किए जाएंगे। अभियान में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए तथा 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को आई.एफ.ए. सिरप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिशु संरक्षण माह केवल विटामिन-ए अनुपूरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बच्चों की उत्तरजीविता बढ़ाने तथा उनके समग्र स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार के लिए विभिन्न स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने का अभियान है।अभियान के दौरान निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक के साथ आई.एफ.ए. सिरप की एक बोतल प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही ड्यू बच्चों का टीकाकरण, वजन जांच, पोषण संबंधी परामर्श तथा बच्चों की आयु के अनुरूप संतुलित एवं पौष्टिक आहार की जानकारी दी जाएगी।आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित सत्रों के माध्यम से पात्र बच्चों को पूरक पोषण आहार की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार एवं पोषण पुनर्वास के लिए पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराया जाएगा।शिशु संरक्षण माह के अंतर्गत अगस्त में 18, 21, 25 एवं 29 अगस्त तथा सितंबर में 1, 5, 8, 11, 16, 18, 21 एवं 24 सितंबर को निर्धारित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में बच्चों को विटामिन-ए एवं आयरन सिरप देने के साथ उनका वजन भी लिया जाएगा।बच्चों की आयु एवं लंबाई के आधार पर कम वजन वाले बच्चों की पहचान कर आवश्यकतानुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों में 14 दिनों के लिए भर्ती कर उपचार एवं पोषण पुनर्वास की सुविधा दी जाएगी। केंद्र में बच्चे के भर्ती होने पर उसकी मां को कार्य क्षतिपूर्ति राशि भी प्रदान की जाएगी। जिले में कुल 2766 सत्र आयोजित होंगे। इनमें पत्थलगांव में 485, फरसाबहार में 360, कांसाबेल में 288, बगीचा में 630, कुनकुरी में 320, दुलदुला में 129, लोदाम में 324 तथा मनोरा में 230 सत्र शामिल हैं।अभियान के तहत जिले में कुल 78,370 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विकासखंडवार लक्ष्य में पत्थलगांव के 19,571, फरसाबहार के 8,456, कांसाबेल के 5,982, बगीचा के 15,848, कुनकुरी के 9,294, दुलदुला के 3,420, जशपुर के 9,580 तथा मनोरा के 6,219 बच्चे शामिल हैं।डॉ. गीतांजलि तिवारी ने बताया कि विटामिन-ए अनुपूरण एवं एनीमिया नियंत्रण से बाल मृत्यु में कमी लाने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है। इसी तरह कुपोषण की रोकथाम, शीघ्र एवं पूर्ण स्तनपान तथा समय पर ऊपरी आहार शुरू करना बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उत्तरजीविता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों पर अपने पात्र बच्चों को निकटतम वी.एच.एन.डी. सत्र में लेकर जाएं और विटामिन-ए, आयरन सिरप, टीकाकरण, वजन जांच तथा पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ अवश्य उठाएं।
- -विद्या साहू ने सीजी पीएससी परीक्षा में चयनित होकर सपनों को दी नई उड़ान-दिव्यांग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत मिली एक लाख रूपए की प्रोत्साहन राशिरायपुर। जब हौसले मजबूत हों और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो सामाजिक, आर्थिक और दिव्यांगता जैसी चुनौतियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। दिव्यांगता शरीर की सीमा हो सकती है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और बुलंद हौसलों के सामने सपनों की कोई सीमा नहीं होती। मुंगेली जिले के लोरमी विकासखण्ड के ग्राम तेलीखाम्ही की दिव्यांग विद्या साहू ने अपनी मेहनत, लगन, दृढ़ संकल्प और मजबूत हौसलों के साथ अपने सपनों का नई उड़ान दी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा-2024 में अधीनस्थ लेखा सेवा अधिकारी के पद पर चयनित होकर जिले का गौरव बढ़ाया है। एक हाथ से 70 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा में छठे प्रयास में अधीनस्थ लेखा सेवा अधिकारी के पद पर चयनित होकर सफलता का इतिहास रचा है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता के बाद शासन की ओर से समाज कल्याण विभाग की क्षितिज अपार संभावनाएं अंतर्गत दिव्यांग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत उन्हें 01 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।इस अवसर पर कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल और जिला पंचायत सीईओ श्री गोकुल रावटे ने विद्या को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। साथ ही बेटी की सफलता पर विद्या के माता-पिता को बधाई देते हुए कहा कि स्वयं निरक्षर होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और बेटी को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उनका यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक और सकारात्मक संदेश है। कलेक्टर ने कहा कि विद्या की सफलता उनकी मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का परिणाम है। शासन द्वारा प्रदान की गई प्रोत्साहन राशि उनकी उपलब्धि को सम्मान देने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बनेगी। उन्होंने विद्या को निरंतर प्रयास कर और ऊंचा मुकाम हासिल करने प्रोत्साहित किया।एसएसपी ने कहा कि विद्या की उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि जिले के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपने भविष्य को नई दिशा देने का सपना देख रहे हैं। विद्या ने अपनी मेहनत से यह साबित किया है कि लक्ष्य के प्रति समर्पण और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से सफलता हासिल कर सकता है।विद्या साहू ने कहा कि शासन की क्षितिज अपार संभावनाएं अंतर्गत दिव्यांग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि “सीजी पीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में चयन मेरा सपना था, जिसे मैंने कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प के साथ पूरा किया। यह मेरा छठा प्रयास था। इससे पहले भी मैं साक्षात्कार तक पहुंच चुकी थी, लेकिन इस बार सफलता हासिल करने में सफल रही। चयन के बाद शासन द्वारा प्रदान की गई 01 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मेरे लिए बेहद उत्साहवर्धक है।” उन्होंने कहा कि “दिव्यांगता कभी भी लक्ष्य प्राप्ति की राह में अंतिम बाधा नहीं बन सकती। जीवन में चुनौतियां आती हैं, लेकिन हर चुनौती के साथ समाधान का रास्ता भी होता है। आवश्यकता है कि हम अपने लक्ष्य पर विश्वास रखें, निरंतर प्रयास करें और कभी हार न मानें।” उन्होंने इस प्रोत्साहन एवं सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।विद्या ने बताया कि वे लोरमी क्षेत्र के ग्राम तेलीखाम्ही की निवासी हैं और किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता श्री सुदर्शन साहू किसान हैं तथा माता श्रीमती सरोजनी साहू हैं। परिवार में उनके दो भाई जितेन्द्र एवं भोलाराम भी हैं। उन्होंने बताया कि परिवार की परिस्थितियां सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने हमेशा शिक्षा के महत्व को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार के सहयोग, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत ने उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने की ताकत दी। इस अवसर पर उप संचालक समाज कल्याण श्री नदीम काजी उपस्थित रहे।
- -विधायक लता उसेण्डी ने 7.50 लाख रूपए के निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजनरायपुर । सरस्वती साइकिल वितरण योजना के तहत मंगलवार को कोंडागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी ने कोण्डागांव जिले में विभिन्न शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को निःशुल्क साइकिलों का वितरण किया। इस दौरान शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मोहलई में 42 छात्राओं को साइकिलें प्रदान की गईं।कार्यक्रम के दौरान विधायक लता उसेंडी ने ग्राम मोहलई में कुम्हार समाज भवन के पास 2.50 लाख रुपये की लागत से रंगमंच निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इसके साथ ही डीएमएफ मद से हाईस्कूल मोहलई में 5 लाख रुपये की लागत से प्रयोगशाला के लिए अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक लता उसेंडी ने कहा कि राज्य सरकार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरस्वती साइकिल योजना के माध्यम से छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध करा रही है। साइकिल मिलने से छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी और वे नियमित रूप से स्कूल पहुंच सकेंगी। उन्होंने पालकों से बच्चों को समय पर विद्यालय भेजने और उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की अपील की। साथ ही विद्यार्थियों से अपने निर्धारित लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने का आह्वान किया।इस अवसर पर जनपद पंचायत कोण्डागांव के उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रामदई नाग, जनपद सदस्य श्रीमती कल्पना कोर्राम, सरपंच मोहलई श्री मालतु राम सोढ़ी, सरपंच मुनगापदर श्रीमती फूलमती कश्यप, सरपंच करणपुर सुश्री महादई कश्यप, श्री दीपेश अरोरा, श्री संतोष पात्रे, श्री हितेन्द्र झा, पूर्व जनपद सदस्य श्रीमती सुनीता नाग, श्री महेंद्र पारख, श्री प्रेमसिंग नाग, पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री बालसिंह बघेल, विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री जगमोहन भोयर सहित प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विभिन्न ग्रामों के सरपंच, जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन तथा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
- -क्विज के जरिए छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों से रूबरू हुए स्कूली बच्चे एआई कैमरे ने बढ़ाया प्रदर्शनी का आकर्षण-टाउन हॉल की छायाचित्र प्रदर्शनी के चौथे दिन विद्यार्थियों ने मंच पर आत्मविश्वास के साथ दिए सवालों के जवाब- 21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनीरायपुर । राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी के चौथे दिन विद्यार्थियों और आम नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। स्वतंत्रता संग्राम, छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों एवं जनजातीय नायकों के संघर्ष, ‘वंदे मातरम‘ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और राज्य की विकास यात्रा को तस्वीरों के माध्यम से जानने के साथ ही विद्यार्थियों ने ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। मंच पर आकर सवालों के जवाब देने की गतिविधि ने विद्यार्थियों के ज्ञान के साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया।प्रदर्शनी में आयोजित प्रश्नोत्तरी की खास बात यह रही कि इसे केवल सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विद्यार्थियों को खेल-खेल में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और जनजातीय नायकों के जीवन, संघर्ष और योगदान से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने किताबों में स्वतंत्रता संग्राम के बारे में पढ़ा है, लेकिन इस तरह प्रश्नोत्तरी के माध्यम से अपने प्रदेश के नायकों के बारे में जानना उनके लिए नया और बेहद रोचक अनुभव रहा। प्रदर्शनी में कंप्यूटर के माध्यम से विशेष रूप से तैयार की गई प्रश्नोत्तरी विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण बनी रही। इसमें तीन टीमों को छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पहचानने की चुनौती दी गई। विद्यार्थियों को संबंधित सेनानी के नाम का एक क्लू दिया जाता था और इसके बाद टीमों को बारी-बारी से एक-एक अक्षर बताने का अवसर दिया जाता था। जैसे-जैसे सही अक्षर सामने आते जाते, नाम पूरा होने लगता था।जो टीम सबसे अधिक सही अक्षर बताकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम सबसे पहले पहचान लेती, उसे विजेता घोषित किया जाता। इस पूरी प्रक्रिया में विद्यार्थियों में उत्सुकता, प्रतिस्पर्धा और सीखने की ललक साफ दिखाई दी। सही उत्तर मिलने पर विद्यार्थियों और दर्शकों ने तालियों के साथ प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।प्रदर्शनी परिसर में आयोजित छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच-बीच में उद्घोषक द्वारा छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति, परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम और पर्यटन से जुड़े सवाल पूछे गए। सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों का दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच इस तरह की प्रश्नोत्तरी ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। एक ओर मंच पर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और लोक कला की मनोहारी प्रस्तुतियां हो रही थीं, वहीं दूसरी ओर दर्शक और विद्यार्थी सवालों के जवाब देकर अपने ज्ञान को परख रहे थे। इस अभिनव संयोजन ने प्रदर्शनी में आने वाले लोगों के अनुभव को और अधिक रोचक एवं ज्ञानवर्धक बना दिया।प्रदर्शनी में एआई तकनीक से लैस स्वचालित कैमरा भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस सुविधा के माध्यम से आगंतुक अपनी तस्वीर खिंचवाकर उसे छत्तीसगढ़ के विभिन्न पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि में देख सकते हैं। विशेष बात यह है कि तैयार तस्वीर इतनी स्वाभाविक दिखाई देती है कि मानो संबंधित व्यक्ति वास्तव में उसी पर्यटन स्थल पर मौजूद हो।इसके अलावा अलग-अलग पारंपरिक वेशभूषाओं के साथ तस्वीरें खिंचवाने की सुविधा भी उपलब्ध है। बच्चों, विद्यार्थियों और युवाओं में इसे लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। आधुनिक एआई तकनीक के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने का यह प्रयोग प्रदर्शनी को अन्य आयोजनों से अलग पहचान दे रहा है।प्रश्नोत्तरी में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि मंच पर आकर सवालों के जवाब देना उनके लिए बेहद अच्छा अनुभव रहा। एक छात्र ने कहा कि पहले मंच पर आकर जवाब देने में झिझक होती थी, लेकिन प्रश्नोत्तरी में भाग लेने से आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने कहा कि इस गतिविधि के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में ऐसी कई जानकारियां मिलीं, जिनसे वे पहले परिचित नहीं थे।एक छात्रा ने कहा कि प्रदर्शनी में आकर उसे छत्तीसगढ़ के उन वीरों और जनजातीय नायकों के बारे में जानने का अवसर मिला, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। उसने कहा कि यदि वे इस प्रदर्शनी में नहीं आते तो बहुत कुछ महत्वपूर्ण सीखने से वंचित रह जाते। विद्यार्थियों ने कहा कि प्रश्नोत्तरी के कारण इतिहास पढ़ना और उसे याद रखना भी आसान और रोचक लगा।विद्यार्थियों के साथ पहुंचे शिक्षकों ने भी प्रदर्शनी की सराहना की। शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए इतिहास को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे चित्रों, प्रश्नोत्तरी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से समझाना अधिक प्रभावी है। इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जनजातीय नायकों और राज्य की सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने का अवसर मिल रहा है।एक शिक्षक ने कहा कि प्रश्नोत्तरी में बच्चों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि जब सीखने की प्रक्रिया को मनोरंजक और सहभागितापूर्ण बनाया जाता है तो विद्यार्थी उसमें अधिक रुचि लेते हैं। मंच पर आकर जवाब देने से उनमें आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता भी विकसित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी मिट्टी, इतिहास और विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, वीर सेनानियों और जनजातीय नायकों के संघर्ष एवं बलिदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र और ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित की गई है। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े प्रसंग भी प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके साथ ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम‘ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को भी छायाचित्रों और जानकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रभावना जागृत करने में ‘वंदे मातरम‘ की भूमिका से विद्यार्थियों और आम नागरिकों को परिचित कराया जा रहा है।प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा के साथ वर्तमान छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन, शिक्षा, आवास, कृषि, महिला सशक्तिकरण, अधोसंरचना, रोजगार और विकास से जुड़ी उपलब्धियों की जानकारी भी छायाचित्रों के माध्यम से दी जा रही है।प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को जनसंपर्क विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी प्रदर्शनी में प्रदर्शित विभिन्न विषयों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। आगंतुकों को स्वतंत्रता संग्राम, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन, विकास और शासन की विभिन्न योजनाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।आगंतुकों को छत्तीसगढ़ राज्य की विकास यात्रा पर आधारित ’जनमन’ पत्रिका’ तथा बुकलेट का भी वितरण किया जा रहा है। इससे प्रदर्शनी देखने के बाद भी लोग राज्य की उपलब्धियों और विकास योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी अपने साथ ले जा रहे हैं।कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10ः30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा, छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों और जनजातीय नायकों का संघर्ष, ‘वंदे मातरम‘ की 150 वर्षों की यात्रा, राज्य की विकास यात्रा, छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी और एआई तकनीक से पर्यटन एवं विरासत का अभिनव अनुभव, इन सभी का एक ही मंच पर समावेश प्रदर्शनी को विशेष और आकर्षक बना रहा है।
- -छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की समस्त योजनाओं की पात्र आबंटित संपत्तियों पर लागू होगी छूट–अध्यक्ष अनुराग सिंह देवरायपुर/ छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (CGHB) द्वारा आवंटियों को विलंब अवधि की ब्याज राशि और बकाया जल प्रभार (Water Charges) के सरचार्ज पर 50 प्रतिशत की विशेष छूट एकमुश्त भुगतान (One-Time Settlement) योजना के तहत दी गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित थी।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपने हितग्राहियों को बड़ी सौगात दी है। मंडल मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बकायादार हितग्राहियों को दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की।यह छूट मंडल की समस्त योजनाओं में निर्मित एवं निर्माणाधीन आबंटित संपत्तियों पर लागू होगी। हालांकि, विशेष आवासीय योजना के अंतर्गत OTS-1 एवं OTS-2 में आबंटित संपत्तियां इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगी। पात्र हितग्राही अपनी आबंटित संपत्ति की संपूर्ण बकाया राशि एकमुश्त जमा कर दाण्डिक ब्याज अर्थात विलंबित अवधि के ब्याज में 50 प्रतिशत छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि मंडल द्वारा पूर्व में भी निर्मित भवनों के विरुद्ध बकाया राशि एकमुश्त जमा करने पर दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट का लाभ 31 मार्च 2026 तक दिया गया था। इस योजना को हितग्राहियों से अच्छा प्रतिसाद मिला। मंडल की निधि में तरलता बनाए रखने तथा हितग्राहियों को बकाया राशि एकमुश्त जमा करने की सुविधा देने के उद्देश्य से पुनः यह योजना लागू की गई है।अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि कई हितग्राहियों द्वारा जलप्रदाय शुल्क (वाटर चार्जेस) समय पर जमा नहीं किए जाने के कारण लंबित राशि पर सरचार्ज भारित हो रहा था। हितग्राहियों द्वारा लगातार सरचार्ज में छूट देने का अनुरोध किया जा रहा था। हितग्राहियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंडल ने अपनी आबंटित संपत्तियों पर लंबित जलप्रदाय शुल्क का एकमुश्त भुगतान करने पर भारित सरचार्ज में भी 50 प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया है। इससे हितग्राहियों को बकाया राशि के निपटारे में राहत मिलेगी और वे सरचार्ज में छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में मंडल द्वारा संबंधित इकाइयों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने हितग्राहियों से इस सुविधा का लाभ उठाते हुए अपनी बकाया राशि का शीघ्र एकमुश्त भुगतान करने की अपील की।
- -मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों को दिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक निर्देशरायपुर । स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर में आज स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली । बैठक में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, साफ-सफाई की व्यवस्था तथा मरीजों को दी जा रही अन्य सुविधाओं की बारीकी से समीक्षा की गई। अधिकारियों से जिलेवार जानकारी लेते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक भी जरूरी दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं समय पर पहुंचें, जिससे आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।स्वास्थ्य मंत्री ने समीक्षा बैठक मे सेवाओं को और अधिक बेहतर एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था को हर हाल में दुरुस्त रखने, आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले, इसके लिए कार्ययोजना के अनुसार अमल करने को कहा गया। इसके साथ ही चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव, स्टाफ की उपस्थिति और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से हिदायत दी गई कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी।
- -केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने चार दिवसीय प्रतियोगिता का किया उद्घाटन, पांचों संभागों के 540 खिलाड़ियों ने किया आकर्षक मार्चपास्ट-स्कूली छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतिरायपुर / रिमझिम फुहारों के बीच खुशनुमा और उत्साहपूर्ण माहौल में मंगलवार को पेण्ड्रा के फिजिकल कॉलेज मैदान में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने ध्वजारोहण कर 18 से 21 अगस्त तक चलने वाली चार दिवसीय प्रतियोगिता के विधिवत शुभारंभ की घोषणा की। उद्घाटन समारोह में खेल प्रतिभाओं के उत्साह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक मार्चपास्ट ने पूरे वातावरण को खेलमय बना दिया।प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा से 14 से 19 वर्ष आयु वर्ग के कुल 540 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभागी अपनी खेल प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगे।उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को खेल नियमों का पूर्ण पालन करते हुए सच्चे अनुशासन, निष्ठा और खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने की शपथ दिलाई। उन्होंने खिलाड़ियों से अपने खेल के गौरव, राज्य के सम्मान और खेल भावना की उच्च परंपराओं को अक्षुण्ण रखने का आह्वान किया।उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों एवं अतिथियों का जीपीएम की धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि अब खेल को देखने का नजरिया बदल गया है। खेल में हम या तो जीतते हैं या सीखते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल को ऐसे खेलें कि वह पढ़ाई बन जाए और पढ़ाई को ऐसे पढ़ें कि वह खेल बन जाए।श्री साहू ने खिलाड़ियों को तनाव और अवसाद से मुक्त होकर पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और खेल भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता में जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और संघर्ष की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।चार दिवसीय राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जिम्नास्टिक, कबड्डी, क्रिकेट और ताइक्वांडो की स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। जिम्नास्टिक में बालक एवं बालिका, कबड्डी में बालिका, क्रिकेट में बालक तथा ताइक्वांडो में बालक एवं बालिका खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।प्रतियोगिता के अंतर्गत जिम्नास्टिक की स्पर्धाएं जिम्नास्टिक हॉल, गुरुकुल गौरेला, क्रिकेट की स्पर्धाएं फिजिकल कॉलेज मैदान, गुरुकुल पेण्ड्रा, ताइक्वांडो की स्पर्धाएं जनपद सभागार पेण्ड्रा तथा कबड्डी की स्पर्धाएं कबड्डी प्रशिक्षण केन्द्र पेण्ड्रा में आयोजित की जा रही हैं।उद्घाटन समारोह का सबसे आकर्षक दृश्य पांचों संभागों से आए खिलाड़ियों का मार्चपास्ट रहा। केसरिया, पीला, नीला, हरा, लाल और सफेद रंग की आकर्षक पोशाकों में सजे खिलाड़ियों की टुकड़ियों ने पूरे अनुशासन और उत्साह के साथ मार्चपास्ट किया। खिलाड़ियों के जोश और उमंग से पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।इस अवसर पर स्कूली छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति देकर समारोह में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और विद्यार्थियों की प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया।कार्यक्रम के दौरान कोटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रतियोगिता की सफलता की कामना की।फिजिकल कॉलेज मैदान पेण्ड्रा में भविष्य में आयोजित होने वाले खेल एवं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सुंदर, सुसज्जित और बड़े मंच के निर्माण की घोषणा भी की गई। सांसद सह केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने 10 लाख रुपये तथा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने 5 लाख रुपये, इस प्रकार कुल 15 लाख रुपये देने की घोषणा की। इस घोषणा का उपस्थित लोगों ने स्वागत किया।कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रतियोगिता की सफलता की कामना की। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों की सुविधा, सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रतियोगिता से संबंधित खेल प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। आयोजक मंडल की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए स्कूली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रही है। चार दिनों तक चलने वाली विभिन्न खेल स्पर्धाओं में खिलाड़ी न केवल अपनी खेल क्षमता का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि अनुशासन, टीम भावना, प्रतिस्पर्धा और खेल भावना की सीख भी प्राप्त करेंगे।उद्घाटन समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा श्री राकेश जालान, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गौरेला श्री मुकेश दुबे, जनपद पंचायत गौरेला अध्यक्ष श्री शिवनाथ बघेल, जनपद पंचायत मरवाही अध्यक्ष श्रीमती जानकी कुशरो, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खिलारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री रजनीश तिवारी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि एवं प्रतिभागी खिलाड़ी उपस्थित रहे।
- -मुख्य सचिव श्री विकासशील ने दिए सड़क सुरक्षा उपायों के बेहतर क्रियान्वयन के निर्देशरायपुर / मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।दुर्घटना में घायलों का इलाज प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 108 एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता की सख्त मॉनिटरिंग और ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिकों (गुड सेमेरिटन) को यथाशीघ्र प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए।अधिक दुर्घटना वाले 8 जिलों पर विशेष फोकस किया गया, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा और जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं विश्लेषण के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट्स में समय-सीमा के भीतर सुधार करने और सुधार के बाद दुर्घटनाओं में आई कमी का विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने जोर दिया कि बाद में सुधार करने से बेहतर है कि सड़कों की शुरुआती डिजाइन ही सही हो। सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों में रोड क्लब गठित करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सुगम यातायात प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बनी रहे। सभी जिलों के कलेक्टरों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए।बैठक की शुरुआत में परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) श्री प्रदीप गुप्ता सहित लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य, जनसंपर्क और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- बिलासपुर /जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा के अंतर्गत जिले के 10 पीएमश्री विद्यालयों में अंशकालिक संगीत प्रशिक्षक की सेवाएं ली जाएंगी। इन पदों पर नियुक्ति अधिकतम 31 मार्च 2027 तक के लिए की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को न्यूनतम 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय प्रदान किया जाएगा। अंशकालिक संगीत प्रशिक्षक के पद के लिए आवेदक के पास संगीत विषय में स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। इस पद के लिए इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन 27 अगस्त 2026 तक जिला परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा, द्वितीय तल, जिला पंचायत भवन,बिलासपुर-495001, छत्तीसगढ़ के पते पर भेज सकते हैं।आवेदन केवल डाक, स्पीड पोस्ट अथवा कोरियर के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। कार्यालय में सीधे आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्धारित अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदन पत्र अमान्य माने जाएंगे। एक आवेदक बिलासपुर जिले में संचालित पीएमश्री विद्यालयों में से केवल एक विद्यालय के लिए आवेदन कर सकेगा। एक से अधिक विद्यालयों के लिए आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में समिति द्वारा अंतिम प्राप्त आवेदन पर ही विचार किया जाएगा। पद से संबंधित आवश्यक योग्यता, नियम एवं शर्तें तथा आवेदन पत्र का प्रारूप जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा के द्वितीय तल, जिला पंचायत भवन में चस्पा किया गया है। इसके अलावा विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रारूप www.bilaspur.gov.in पर भी उपलब्ध है।
- -डूमरतराई थोक मार्केट से मिठाइयों के तीन और हाईवे किंग रेस्टोरेंट से पनीर-ग्रेवी के नमूने लिए गएरायपुर / नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन श्री दीपक कुमार अग्रवाल (आईएएस) के निर्देशानुसार ‘बने खाबो-बने रहिबो 2.0’ प्रवर्तन कार्यवाही एवं जागरूकता अभियान के तहत खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार जांच एवं नमूना संकलन की कार्रवाई की जा रही है।अभियान के अंतर्गत सरदार वल्लभभाई पटेल थोक मार्केट, डूमरतराई, रायपुर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिए पैक्ड मिठाइयों के रसगुल्ला, गुलाब जामुन एवं सोन केक के तीन लीगल सैंपल लिए गए। इन नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।इसी क्रम में हाईवे किंग रेस्टोरेंट से पनीर एवं वेज ग्रेवी के नमूने भी जांच के लिए लिए गए। निरीक्षण के दौरान रेस्टोरेंट के किचन में वेज एवं नॉन-वेज सेक्शन अलग-अलग पाए गए। हालांकि, खाद्य सामग्रियों का रख-रखाव उचित एवं व्यवस्थित नहीं पाया गया। इस पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा तत्काल किचन को बंद कर खाद्य सामग्रियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थित तरीके से रखने के निर्देश दिए गए।खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता, सुरक्षित खाद्य भंडारण एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण एवं प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। लिए गए सभी नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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