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- 0- छात्रावासों की सभी मूलभूत व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के दिए निर्देश0- बस्तर मुन्ने कार्यक्रम की समीक्षा, 41 हितग्राहीमूलक योजनाओं से लाभान्वित करने के दिए निर्देश0- धान खरीदी पंजीयन और विभागीय योजनाओं की प्रगति की कलेक्टर ने की समीक्षामोहला। कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं, लंबित प्रकरणों एवं विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि लंबित शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निराकरण किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को नियमित मॉनिटरिंग कर प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने आदिवासी विकास विभाग की समीक्षा के दौरान जिले के छात्रावासों एवं आश्रमों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए नए शैक्षणिक सत्र में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छता, पेयजल, भोजन, विद्युत तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया।उन्होंने राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान धान खरीदी पंजीयन के लिए बेहतर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के सभी पात्र किसानों का समय पर पंजीयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें शासन की योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने बस्तर मुन्ने कार्यक्रम अंतर्गत संचालित हितग्राहीमूलक एवं परिवारमूलक योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सर्वे कार्य में पूर्ण पारदर्शिता बरतने तथा पात्र हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि कार्यक्रम के अंतर्गत आधार कार्ड, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, जनधन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, वनाधिकार पट्टा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित कुल 41 हितग्राहीमूलक एवं परिवारमूलक योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए सर्वे एवं सत्यापन कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वे सूची का समयबद्ध सत्यापन कर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से लाभान्वित किया जाए।उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करें। इस दौरान समाज कल्याण, मत्स्य पालन, पशुपालन, शिक्षा सहित अन्य विभागों की योजनाओं एवं विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई।बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्रीमती भारती चंद्राकर, अपर कलेक्टर श्री जी.आर. मरकाम, अपर कलेक्टर श्री मिथलेश डोंडे, एसडीएम मोहला श्री हेमेंद्र भुआर्य, एसडीएम मानपुर श्री अमित नाथ योगी, डिप्टी कलेक्टर श्री डी.आर. ध्रुव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
- 0- दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे गोल्डन ऑवर के भीतर घायल व्यक्ति को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर मिलेगा सम्मान और पुरस्कारमोहला। सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने और आमजन को मानवता के इस कार्य के लिए प्रेरित करने हेतु भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राह-वीर योजना संचालित की जा रही है। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे यानी गोल्डन ऑवर के भीतर घायल व्यक्ति को त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके, जिससे उसकी जान बचाई जा सके।योजना के तहत यदि कोई नागरिक सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाने, एंबुलेंस बुलाने या प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद करता है, तो ऐसे व्यक्ति को राह-वीर के रूप में सम्मानित किया जाएगा। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाने में सहयोग करने वाले व्यक्ति को प्रति घटना 25 हजार रुपए तक की पुरस्कार राशि प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। राह-वीर अवॉर्ड के लिए एक्रॉलेजमेंट फॉर्म संबंधित पुलिस स्टेशन द्वारा दिया जाएगा। जिला सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष द्वारा मूल्यांकन समिति सिफारिशों पर राह-वीर योजना के लाभार्थी का विवरण एवं अन्य जानकारी ई-डीएआर प्लेटफार्म पर अपलोड करेगे। जिसके पश्चात राज्य सरकार पीएफएमएस के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ऑनलाइन पुरस्कार राशि जमा करेंगी।सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अक्सर लोग कानूनी प्रक्रिया या अन्य आशंकाओं के कारण मदद करने से पीछे हट जाते हैं, जबकि गुड सेमेरिटन संबंधी प्रावधानों के तहत सहायता करने वाले नागरिकों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से संरक्षण दिया गया है। सरकार की यह पहल लोगों में संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में घायलों की सहायता के लिए आगे आएं और जरूरतमंदों की जान बचाने में अपनी सहभागिता निभाएं। समय पर की गई छोटी-सी मदद किसी व्यक्ति को नया जीवन दे सकती है। योजना 31 मार्च 2028 तक प्रभावशील रहेगी।
- 0- डिप्टी कलेक्टर श्री डीआर ध्रुव ने जिले में संचालित विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण संस्थानों का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजामोहला। कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देशन में डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी सहायक संचालक जिला कौशल विकास प्राधिकरण श्री डीआर ध्रुव ने जिले में संचालित विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण संस्थानों का निरीक्षण कर प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों तथा प्रशिक्षणार्थियों को दी जा रही सुविधाओं का अवलोकन करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।श्री ध्रुव ने कहा कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना एवं अन्य कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से जिले के युवाओं को निःशुल्क रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इन योजनाओं से युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा उन्हें उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप दक्ष बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में जिला कौशल विकास प्राधिकरण, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के माध्यम से विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में सोलर पीवी इंस्टॉलर, असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, मशरूम ग्रोवर, सिलाई मशीन ऑपरेटर, राजमिस्त्री, फील्ड टेक्नीशियन एंड होम एप्लायंस, जनरल ड्यूटी असिस्टेंट तथा जल वितरक संचालक सहित अनेक रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षार्थियों को अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा गुणवत्तापूर्ण सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाता है तथा उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्लेसमेंट सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एवं जिला कौशल विकास प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण संस्थानों का निरीक्षण कर प्रशिक्षण की गुणवत्ता की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि युवाओं को बेहतर कौशल प्रशिक्षण का लाभ मिल सके।जिले के 14 से 45 वर्ष आयु वर्ग के इच्छुक युवक-युवतियों से इन निःशुल्क कौशल विकास योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए जिला कौशल विकास प्राधिकरण कार्यालय अथवा निकटतम अधिकृत प्रशिक्षण केंद्र से संपर्क किया जा सकता है।
- 0- नियमों के पालन के लिए वाहन चालकों को दी गई समझाइश0- 05 वाहनों से 14,900 रुपये समन शुल्क वसूलमहासमुंद. जिला परिवहन अधिकारी श्री प्रतीक शुक्ला एवं यातायात पुलिस महासमुंद द्वारा बुधवार को संयुक्त रूप से केन्द्रीय विद्यालय महासमुंद में अध्ययनरत विद्यार्थियों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की सघन जांच की गई। जांच के दौरान कई विद्यार्थी निजी एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) वाहनों से स्कूल आते-जाते पाए गए। ऐसे वाहन स्वामियों एवं चालकों को नियमानुसार वाहन को टैक्सी श्रेणी में परिवर्तित कर संचालन करने तथा मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने हेतु समझाइश दी गई। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कोई भी विद्यार्थी दुपहिया वाहन से विद्यालय आते या जाते नहीं मिला।इसके अलावा जिला परिवहन अधिकारी श्री शुक्ला द्वारा बागबाहरा रोड पर संचालित निजी यात्री बसों की भी जांच की गई। जांच के दौरान बिना फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट, निर्धारित वर्दी तथा प्रदूषण प्रमाण-पत्र के संचालन करते पाए गए 05 वाहनों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए कुल 14 हजार 900 रुपए का समन शुल्क वसूल किया गया।जिला परिवहन अधिकारी श्री प्रतीक शुक्ला ने वाहन स्वामियों एवं चालकों से सभी आवश्यक दस्तावेज अद्यतन रखने तथा यातायात एवं परिवहन संबंधी नियमों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले में इस प्रकार की जांच एवं प्रवर्तन कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
- 0- कुरकुट नदी से हो रहा था अवैध उत्खनन, जंगल में बनाए गए गुप्त रास्ते का खुलासारायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में रायगढ़ जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने रेत की अवैध तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए रेत से लदे 12 ट्रैक्टर जब्त किए हैं। वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बैहामुड़ा के पास स्थित कुरकुट नदी से लंबे समय से अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा था। तस्करों ने वन क्षेत्र के भीतर घने जंगल से होकर एक गुप्त रास्ता तैयार कर लिया था, जिससे वे मुख्य सड़क और जांच चौकियों से बचते हुए रेत का परिवहन कर रहे थे। सूचना मिलते ही वनमंडलाधिकारी श्री अरविंद पी. एम. के निर्देशन, उप वनमंडलाधिकारी श्री आशुतोष मांडवा के मार्गदर्शन तथा वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री विक्रांत कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने विशेष अभियान चलाया। वन अमले ने जंगल के विभिन्न हिस्सों में घेराबंदी कर बिना वैध अनुमति और बिना परिवहन पास के रेत का परिवहन कर रहे 12 ट्रैक्टरों को मौके पर ही जब्त कर लिया।कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम को देखकर कई तस्कर मौके से भाग निकले, लेकिन विभाग ने रेत से लदे सभी ट्रैक्टर अपने कब्जे में ले लिए। जब्त वाहनों को घरघोड़ा वन परिक्षेत्र कार्यालय लाकर आवश्यक जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। वन विभाग ने इस मामले में भारतीय वन अधिनियम के तहत वन अपराध का प्रकरण दर्ज कर लिया है। मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन क्षेत्र में अवैध खनन, रेत तस्करी और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार के निर्देशानुसार वन संपदा की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा तथा अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की इस प्रभावी कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय रेत तस्करों में हड़कंप का माहौल है।
- रायपुर। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने बुधवार को बस्तर प्रवास के दौरान कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कुरूद का भ्रमण कर महाविद्यालय में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान कार्यों तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने आधुनिक कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान को राज्य के कृषि विकास की मजबूत आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को नवाचार और तकनीक आधारित कृषि की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।महाविद्यालय पहुंचने पर अधिष्ठाता डॉ. नवनीत राणा ने मंत्री श्री नेताम का स्वागत किया तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री श्री नेताम ने महाविद्यालय की आधुनिक प्रयोगशालाओं, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और कॉम्पिटिटिव फोरम का निरीक्षण किया तथा छात्र-छात्राओं से संवाद कर महाविद्यालय एवं छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें अध्ययन एवं आवास से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। भ्रमण के दौरान मंत्री श्री नेताम ने कृषि संग्रहालय में छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार कृषि मॉडल, प्रदर्शनी और मशरूम प्रसंस्कृत उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों की नवाचारी सोच और महाविद्यालय में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा की तथा छात्र-छात्राओं के साथ कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कृषि स्नातक पाठ्यक्रम में किए गए नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की। भ्रमण कार्यक्रम में धमतरी कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुरूद, महाविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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महासमुंद / महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम लभरा के समीप बिना वैधानिक अनुमति के बोर खनन किए जाने की सूचना पर तहसीलदार श्री जुगल किशोर एवं पटवारी श्री केशव शर्मा द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई।
जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित स्थल पर बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बोर खनन कार्य किया जा रहा था। नियमानुसार आवश्यक दस्तावेज एवं अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने पर राजस्व विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए बोर खनन में संलग्न बोर मशीन को जप्त कर थाना महासमुंद की अभिरक्षा में रखा गया है।
जिला प्रशासन ने निर्देशित किया है कि भूजल संरक्षण एवं शासन के निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने आम नागरिकों एवं किसानों से अपील की है कि बोर खनन कार्य प्रारंभ करने से पूर्व आवश्यक अनुमति अवश्य प्राप्त करें तथा नियमों का पालन करें। -
राजनांदगांव । प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत जिले में गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक माह की 9 एवं 24 तारीख को विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता है। शिविर में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क जांच, उपचार एवं परामर्श प्रदान करना है। अभियान अंतर्गत पहला प्रसव ऑपरेशन से हुआ हो, पहले गर्भपात या मृत शिशु का जन्म हुआ हो, जिनका वजन या ऊंचाई कम हो, कम उम्र में गर्भधारण किया हो, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या अन्य बीमारी से ग्रसित महिलाओं की जांच की जाती है।
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की सूची बनाकर प्रत्येक सप्ताह फोन कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एवं सलाह दी जा रही है। प्रसव के 15 दिन पूर्व गर्भवती माताओं के घर प्रतिदिवस मितानिनों द्वारा भ्रमण किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि वर्तमान में 1958 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में 1786 का प्रथम सोनोग्राफी तथा 1380 महिलाओं का द्वितीय बार सोनोग्राफी किया जा चुका है। इस सप्ताह कुल 104 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का सोनोग्राफी किया गया। जिसमें इंडियन मेडिकल कांउसिल राजनांदगांव शाखा का तथा प्राइवेट सोनोग्राफी सेन्टर का विशेष योगदान रहा। मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं से सोनोग्राफी हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आकर जांच उपरांत डॉक्टर से पर्ची बनवाकर नि:शुल्क सोनोग्राफी करवाने की अपील की गई है। -
राजनांदगांव । राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति के निर्देशानुसार शिक्षण सत्र 2026-27 अंतर्गत एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में रिक्त 7 पदों पर अतिथि शिक्षकों की भर्ती हेतु 16 जुलाई 2026 तक आवेदन पत्र आमंत्रित की गई है। भर्ती के लिए इच्छुक एवं योग्य अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक पंजीकृत डाक के माध्यम से कार्यालय प्राचार्य एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पेन्ड्री राजनांदगांव में प्रस्तुत कर सकते है। इसके अंतर्गत पीजीटी (अंग्रेजी), पीजीटी (कामर्स), पीजीटी (इकोनॉमिक्स), पीजीटी (राजनीति विज्ञान), पीईटी (महिला), टीजीटी (संगीत) एवं टीजीटी (कला) के 1-1 रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इस संबंध में विस्तृत जानकारी राजनांदगांव जिले की वेबसाईट एवं emrspendri.org.in से प्राप्त की जा सकती है।
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राजनांदगांव । जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र (मॉडल कैरियर सेंटर) द्वारा 8 जुलाई 2026 को सुबह 10.30 बजे से दोपहर 3 बजे तक शासकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोंगरगढ़ परिसर में रोजगार मेला का आयोजन किया गया है। रोजगार मेला में नियोक्ताओं द्वारा लगभग 313 पदों पर भर्ती की जाएगी। प्रथम एज्यूकेशन फाउंडेशन द्वारा वेयर हाऊस हेल्पर (महिला) के 50 पद, पुस्कल एग्रोटेक लिमिटेड द्वारा एकाउंटेंट के 4 (पुरूष) पद, एग्रीकल्चर ऑफिसर के 4 (पुरूष) पद, सेल्स ऑफिसर के 20 (पुरूष) पद एवं सेल्स रिप्रेसेंटेटिव के 20 (पुरूष) पद, लाईफ इंश्योरेंश कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ द्वारा इंश्योरेंश एडवाईजर (महिला) के 50 पद, शिवालिक इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीस लिमिटेड द्वारा आईटीआई ट्रेनी के 50 पद, ह्युमिलिटी फाइनेंश सॉलूशन द्वारा इंश्योरेंश एडवाईजर के 15 पद, शरमिन टेंलेंट प्राईवेट लिमिटेड द्वारा इलेक्ट्रीक मीटर (पुरूष) के 50 पद तथा प्रगति फिनसर्व प्राईवेट लिमिटेड द्वारा असिस्टेंट के 50 पद पर भर्ती की जाएगी। रोजगार मेला में शामिल होने वाले इच्छुक आवेदकों को ई-रोजगार पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन करना अनिवार्य है। आवेदकों को अपने शैक्षणिक योग्यता के सम्पूर्ण प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, 2 पासपोर्ट साईज फोटो के साथ निर्धारित तिथि, समय एवं स्थान पर उपस्थित होकर रोजगार मेला में शामिल हो सकते है।
- - ग्रामीण रोजगार, जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहलराजनांदगांव । भारत सरकार द्वारा ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी-राम-जी) योजना का शुभारंभ आज 2 जुलाई को किया जाएगा। यह योजना पूर्व में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का उन्नत एवं विस्तारित स्वरूप है। जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, स्थायी आजीविका एवं मजबूत आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना है।विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी-राम-जी) योजना अंतर्गत पहले की तुलना में अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिवस के स्थान पर 125 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। जिससे ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में वृद्धि होगी तथा उन्हें आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत आधार प्राप्त होगा। यह निर्णय ग्रामीण गरीब, मजदूर, किसान एवं युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में प्रति श्रमिक दैनिक मजदूरी दर में भी वृद्धि की गई है, जो पूर्व में 261 रूपए प्रति दिवस थी। उसे बढ़ाकर अब 300 रूपए प्रति दिवस कर दिया गया है। इससे श्रमिकों की आय में प्रत्यक्ष बढ़ोतरी होगी तथा ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक संबल प्राप्त होगा। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना हेतु 95692 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया गया है। जबकि राज्यों की सहभागिता के साथ कुल बजट 1.51 लाख करोड़ रूपए से अधिक का अनुमानित है।छत्तीसगढ़ राज्य के लिए इस योजना के अंतर्गत कुल 3810 करोड़ 29 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया गया है। जिसमें 2286 करोड़ 18 लाख रूपए केद्रांश एवं 1524 करोड़ 11 लाख रूपए राज्यांश शामिल है। इस राशि में मजदूरी मद हेतु 1900 करोड़ रूपए, सामग्री मद हेतु 1593 करोड़ 28 लाख रूपए, प्रशासनिक व्यय हेतु 297 करोड़ 1 लाख रूपए तथा सामाजिक अंकेक्षण हेतु 20 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार राजनांदगांव जिले के लिए लगभग 43 लाख मानव दिवस का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिससे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से जिले में जल संरक्षण, तालाब निर्माण, डबरी निर्माण, सिंचाई सुविधा विस्तार, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़क निर्माण एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे स्थायी विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना, कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना तथा ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करना है। विशेष रूप से जल संरक्षण आधारित कार्यों से भविष्य में जल संकट की समस्या को कम करने में सहायता मिलेगी और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के लिए यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे गांवों में रोजगार के साथ-साथ समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण पलायन में कमी आएगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा।
- बलौदाबाजा । जिले के 14 ग्राम पंचायतों में आधार पंजीयन कार्य संचालन हेतु इच्छुक आधार ऑपरेटर, सेवा सेतु केन्द्र संचालक, सीएससी संचालक सहित अन्य इच्छुक व्यक्तियों से 17 जुलाई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किया गया है। इच्छुक ऑपरेटर कक्ष क्र. 78, प्रथम तल, ई-गवर्नेस कार्यालय बलौदाबाजार में आवेदन जमा कर सकते हैं। प्राप्त जानकारी के. अनुसार जनपद पंचायत बलौदाबाजार अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसदा, अर्जुनी, रसेड़ा, लाहोद, जनपद पंचायत भाटापारा अंतर्गत ग्राम पंचायत खोखली, तरेंगा, निपनिया, जनपद पंचायत कसडोल अंतर्गत ग्राम पंचायत मटिया, पुटपुरा, चांदन, जनपद पंचायत पलारी अंतर्गत ग्राम पंचायत अमेरा, तेलासी, जनपद पंचायत सिमगा अंतर्गत ग्राम पंचायत चंदेरी एवं रानीजरौद में आधार ऑपरेटर की आवश्यकता है। इच्छुक ऑपरेटर का कोई भी पेनाल्टी राशि भुगतान हेतु लंबित ना हो। यदि पेनाल्टी है तो उस राशि का संलग्न बैंक खाता में भुगतान कर रसीद आवेदन के साथ जमा करेंगे। चिप्स कार्यालय के अनुसार1 लाख 50 हजार रुपये का राशि सुरक्षा जमा के रुप में डिमांड ड्राफ्ट जिला ई-गवर्नेस सोसायटी को चयन होने के 10 दिन बाद अनिवार्य रुप से जमा करना होगा। ऑपरेटर का पुलिस वेरीफिकेशन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है।ऑपरेटर 18 वर्ष से अधिक होना चाहिए। ऑपरेटर 12 वी उत्तीर्ण या 2 वर्ष आई.टी.आई. या 3 वर्ष डिप्लोमा धारक हो। ऑपरेटर बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का निवासी हो। एक ऑपरेटर एक लोकेशन के लिए ही आवेदन कर सकता है। अधिक जानकारी के लिये जिले की वेबसाईट https://balodabazar.gov.in का अवलोकन कर सकते हैं।
- -हितग्राही ने जताया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभारजांजगीर-चांपा । जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम सेमरा निवासी श्री रवि कुमार बर्मन के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 उम्मीद की किरण साबित हुई। राशन कार्ड में तकनीकी त्रुटि के कारण वे लंबे समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन से वंचित थे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद उनकी समस्या का त्वरित समाधान हुआ और संशोधित राशन कार्ड जारी होने से उन्हें फिर से राशन मिलने लगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नागरिकों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आमजन और शासन के बीच एक प्रभावी सेतु बनकर उभरी है, जहां शिकायतों का गंभीरता से निराकरण किया जा रहा है। जनपद पंचायत नवागढ़ ग्राम सेमरा निवासी श्री रवि कुमार बर्मन ने 15 जून को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से अपनी समस्या दर्ज कराई थी। शिकायत मिलते ही संबंधित विभाग ने मामले की जांच की। जांच के दौरान राशन कार्ड में त्रुटि पाए जाने पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए उसका संशोधन किया गया। इसके बाद उनका राशन कार्ड पुनः सक्रिय हुआ और अब उन्हें खाद्यान्न सहित अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा। समस्या के त्वरित समाधान से प्रसन्न श्री रवि कुमार बर्मन ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
- -बिहान योजना से साकार हुआ आत्मनिर्भरता का सपना, मेला चंद्रा बनीं प्रेरणा स्रोतसक्ती । राज्य शासन की महत्वाकांक्षी बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है। इस योजना से जुड़कर अनेक महिलाओं ने अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जैजैपुर विकासखंड के ग्राम ठठारी निवासी श्रीमती मेला चंद्रा की, जिन्होंने संघर्षों से निकलकर सफलता की नई पहचान बनाई और आज एक सफल उद्यमी तथा "लखपति दीदी" के रूप में जानी जाती हैं। श्रीमती मेला चंद्रा बताती हैं कि कुछ वर्ष पहले तक उनके परिवार की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन होता था। गृहणी होने के कारण उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था, जिससे आर्थिक परेशानियां बनी रहती थीं। इसी दौरान वे बिहान योजना के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, वित्तीय प्रबंधन और स्वरोजगार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। योजना के तहत उन्हें आरएफ राशि और ऋण सुविधा का लाभ मिला, जिसने उनके आत्मनिर्भर बनने के सपने को नई दिशा दी। शासन की सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने फर्नीचर व्यवसाय शुरू किया। धीरे-धीरे उनका व्यवसाय आगे बढ़ने लगा और आय में लगातार वृद्धि होने लगी। बेहतर आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया। आज उनका फर्नीचर व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं। श्रीमती मेला चंद्रा कहती हैं कि बिहान योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया। इसी का परिणाम है कि आज वे "लखपति दीदी" की श्रेणी में शामिल होकर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने तथा शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि यदि महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ें और उपलब्ध अवसरों का लाभ लें, तो वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। श्रीमती मेला चंद्रा ने अपनी सफलता के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने का नया अवसर दिया है।
- -सीमावर्ती क्षेत्र में संयुक्त अभियान की सफलता, न्यायालय ने भेजा न्यायिक हिरासत में’रायपुर। वन विभाग की बड़ी कार्रवाई : दो बाघ की खाल के साथ दो तस्कर गिरफ्तारवन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के निर्देशन में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग की संयुक्त टीम ने दो बाघों की खाल के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर स्थित बांदे परिक्षेत्र में छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के निवासी ब्येश्वर और बाबूराव के रूप में हुई है। दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव बाघ की दो खालों की अवैध तस्करी कर रहे थे। संयुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।इस कार्रवाई में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के उत्तरी एवं मध्य क्षेत्र, राज्य उड़नदस्ता दल (छत्तीसगढ़ वन विभाग), एंटी पोचिंग यूनिट (यूएसटीआर) तथा स्थानीय वन अमले ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया।वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है तथा जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किए जाने की संभावना है।छत्तीसगढ़ सरकार वन्यजीव संरक्षण और वन्यजीव की अवैध तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है। वन विभाग द्वारा विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर नियमित निगरानी और संयुक्त अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिससे वन्यजीवों के संरक्षण को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वन विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।
- -शासन की अनुदान सहायता बनी संबल, पशुधन की गुणवत्ता बढ़ी और वार्षिक आय पहुंची लगभग एक लाख रुपये तकरायपुर ।छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रही हैं। पशुधन विकास विभाग द्वारा संचालित अनुदान पर नर बकरा वितरण योजना ऐसे ही प्रयासों में शामिल है, जो पशुपालकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। सूरजपुर जिले के ग्राम कारवाँ निवासी श्री निखिल की कहानी इस परिवर्तन की जीवंत मिसाल है।कुछ वर्ष पहले तक श्री निखिल के लिए बकरी पालन पारंपरिक आजीविका का एक सीमित साधन भर था। संसाधनों की कमी और बेहतर नस्ल के पशुधन के अभाव में आय बढ़ाने की संभावनाएं सीमित थीं। वर्ष 2024-25 में उन्हें पशुधन विकास विभाग की अनुदान पर नर बकरा वितरण योजना का लाभ मिला और यहीं से उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई।योजना के तहत प्राप्त 3,500 रुपये की अनुदान सहायता से उन्होंने उन्नत नस्ल का नर बकरा खरीदा। उस समय उनके पास केवल छह बकरियां थीं, लेकिन उन्नत नस्ल के बकरे के उपयोग से पशुधन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। बेहतर प्रजनन क्षमता के कारण पशुधन की संख्या बढ़ी और आज उनके पास 11 बकरे-बकरियां हैं।निखिल अब प्रतिवर्ष 8 से 10 बकरे-बकरियों का विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें लगभग एक लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस आय ने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास और स्थायित्व भी लेकर आया है। पशुपालन आज उनके लिए परंपरागत कार्य नहीं, बल्कि सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका का सशक्त माध्यम बन चुका है।श्री निखिल बताते हैं कि शासन की समय पर मिली सहायता ने उन्हें उन्नत नस्ल के पशुधन अपनाने का अवसर दिया। इससे पशुधन की गुणवत्ता बढ़ी, उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ और आय के नए रास्ते खुले। वे मानते हैं कि यदि ग्रामीण पशुपालकों को तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ समय पर मिले तो पशुपालन ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है।
- -बकरी पालन और सब्जी उत्पादन से बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिला संबल, अब अन्य महिलाओं को भी दे रहीं स्वरोजगार का संदेशरायपुर ।छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के ग्राम लुरघुट्टा की श्रीमती पूनम कुशवाहा ने मात्र 25 हजार रुपये के छोटे से ऋण को आजीविका के बड़े अवसर में बदलकर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।जिला प्रशासन के मार्गदर्शन से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का ही परिणाम है कि श्रीमती पूनम कुशवाहा आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।एक समय ऐसा था जब परिवार की आजीविका केवल उनके पति की सीमित आय पर निर्भर थी, जिससे घरेलू जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। परिवार की आय बढ़ाने की इच्छा तो थी, लेकिन संसाधनों और पूंजी की कमी रास्ते में बाधा बनी हुई थी। इसी दौरान पूनम राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत पार्वती महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत, प्रशिक्षण और बैंक लिंकेज जैसी सुविधाएं मिलीं तथा 25 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ।श्रीमती पूनम ने इस राशि का उपयोग उन्नत नस्ल की बकरियां खरीदने में किया और वैज्ञानिक पद्धति से बकरी पालन शुरू किया। बकरियों से प्राप्त जैविक खाद का उपयोग करते हुए उन्होंने अपनी बाड़ी में टमाटर, मिर्च, बैंगन सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी प्रारंभ किया। आज स्थानीय बाजार में सब्जियों की बिक्री और बकरियों के विक्रय से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है।इस अतिरिक्त आय से बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करना आसान हुआ है। साथ ही वे स्व-सहायता समूह से लिए गए ऋण का समय पर भुगतान भी कर रही हैं।श्रीमती पूनम कहती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई दिशा मिली है। उनका मानना है कि छोटा सा आर्थिक सहयोग भी यदि सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो वह जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
- -एक वर्ष में 5 लाख की कमाई, खरीदने दूर-दूर से पहुंचते हैं ग्रामीण-सुकमा के मीठे झींगे ने रायपुर के मंच पर दिलाया सम्मानसुकमा ।भारत जैसे कृषि प्रधान देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सहायक व्यवसायों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में सुकमा जिले में “नीली क्रांति“ ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक नया और सशक्त आधार बनकर उभरी है। कम लागत, कम समय में बेहतर मुनाफे और बाजार में बढ़ती मांग के कारण मत्स्य व मीठे पानी में झींगा पालन की लोकप्रियता ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के खेती को सिर्फ धान तक सीमित न रखकर उद्यानिकी, दुग्ध और मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक क्षेत्रों से जुड़ने के आह्वान का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है।शासन की कल्याणकारी योजनाएं आज ग्रामीण युवाओं और पारंपरिक किसानों के लिए संबल साबित हो रही हैं। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण सुकमा जिले के दुब्बाटोटा निवासी श्री मड़कम देवा हैं, जिन्होंने शासकीय योजनाओं का लाभ उठाकर झींगा और मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया। मत्स्य पालन विभाग द्वारा उन्हें तालाब निर्माण के लिए 7.20 लाख रूपये का लोन स्वीकृत किया गया, जिसमें 4.20 लाख रूपये का भारी अनुदान शामिल था। इसके साथ ही, 24 घंटे पानी की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए क्रेड़ा विभाग द्वारा उन्हें सब्सिडी पर सोलर पंप की अनमोल सुविधा भी दी गई, जिसने उनकी राह बेहद आसान कर दी।मड़कम देवा ने न सिर्फ वित्तीय सहायता का लाभ लिया, बल्कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से समय-समय पर आधुनिक मत्स्य पालन का तकनीकी प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इसी वैज्ञानिक पद्धति और कड़ी मेहनत का नतीजा है कि इस वर्ष अकेले जून माह में ही उन्होंने लगभग 2.50 क्विंटल झींगा और 15 क्विंटल मछली की बंपर बिक्री की। इस उत्पादन से उन्हें करीब 5 लाख रूपये की शानदार आय अर्जित हुई है। झींगा पालन के क्षेत्र में सुकमा का नाम रोशन करने के लिए विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के हाथों मड़कम देवा को सम्मानित भी किया जा चुका है। दूर दूर से लोग दुब्बा टोटा मछली और झींगा खरीदने के लिए आते हैं।कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि सुकमा जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और यहाँ मीठे पानी के झींगा पालन की अपार संभावनाएँ हैं। मड़कम देवा जैसे प्रगतिशील किसान आज हमारे ग्रामीण युवाओं के लिए रोल मॉडल बन रहे हैं। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य शासन की मंशानुसार अंतिम छोर के व्यक्ति तक इन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। हम सुकमा के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य और झींगा पालन जैसे उन्नत सहायक व्यवसायों से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, ताकि जिला आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छू सके।सीमित भूमि और कम पूंजी में शुरू होने वाला यह व्यवसाय आज मत्स्य बीज उत्पादन, चारा निर्माण, परिवहन और मार्केटिंग जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोल रहा है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण बाजार में मछली और झींगे की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे किसानों को निरंतर आय होती है। विभाग का कहना है कि जो भी इच्छुक ग्रामीण या युवा इन योजनाओं के जरिए अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं, वे अपने नजदीकी मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं। निश्चित रूप से, यह पहल आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
- सक्ती । छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर परिवार की जिम्मेदारियों में सहभागी बनने का अवसर दे रही है। सक्ती जिले के ग्राम पंचायत जेठा निवासी श्रीमती लक्ष्मीन सिदार भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार का अनुभव कर रही हैं। श्रीमती लक्ष्मीन सिदार बताती हैं कि पहले घरेलू खर्चों और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि ने उनके परिवार को आर्थिक राहत प्रदान की है। योजना की राशि नियमित रूप से उनके बैंक खाते में जमा हो रही है और अब तक उन्हें 28वीं किस्त प्राप्त हो चुकी है। वे प्राप्त राशि का उपयोग बच्चों की पालन पोषण तथा घर की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। इससे परिवार का आर्थिक बोझ कम हुआ है और बच्चों की पढ़ाई भी सुचारु रूप से जारी है। श्रीमती लक्ष्मीन सिदार का कहना है कि इस योजना ने उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए एक सशक्त सहारा बनकर उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
- - शिक्षा गुणवत्ता सुधारने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के दिए निर्देशरायपुर। शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने आज बुधवार को बस्तर कलेक्टोरेट के प्रेरणा सभाकक्ष में शिक्षा विभाग की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के बेहतर एवं प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि बस्तर के समग्र विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अंदरूनी क्षेत्रों के स्कूलों को पुनर्जीवित करने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया।उन्होंने प्राथमिक स्तर पर गणित, हिंदी और अंग्रेजी की मजबूत आधारशिला तैयार करने के लिए कैलेंडरवार, शालावार एवं विषयवार समय-सारणी के अनुसार पढ़ाई कराने तथा नियमित रिवीजन टेस्ट आयोजित करने के निर्देश दिए।बैठक में शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक श्री ऋतुराज रघुवंशी, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, जिला पंचायत सीईओ श्री प्रतीक जैन, संभागीय संयुक्त संचालक श्री एच.आर. सोम सहित सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, डीएमसी, बीईओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समीक्षा के दौरान आधार बेस ऐप के माध्यम से कार्यालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति तथा वीएसके ऐप में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की जानकारी ली गई। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा नेटवर्क विहीन स्कूलों की सूची कलेक्टर के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। शिक्षा मंत्री ने अन्य विभागों में पदस्थ शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर वापस भेजने संबंधी निर्देशों के पालन की भी समीक्षा की।श्री यादव ने बसाहटवार प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति, नए विद्यालयों की आवश्यकता, बंद स्कूलों को पुनः प्रारंभ करने की कार्ययोजना, बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए पोटा केबिनों में अंतरजिला विद्यार्थियों को प्रवेश देने के निर्देश दिए। उन्होंने वार्षिक परीक्षा में बेहतर परिणाम के लिए पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर विषयवार यूनिट टेस्ट एवं तिमाही परीक्षाएं आयोजित करने तथा कमजोर विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक लेकर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जिला एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को दिए।बैठक में विद्यार्थियों के नामांकन, उपस्थिति, ड्रॉपआउट की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त एवं युक्तियुक्तकरण किए गए पदों, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की कार्ययोजना एवं गैप एनालिसिस की प्रगति की भी समीक्षा की गई। छात्रवृत्ति, गणवेश, पाठ्यपुस्तक वितरण, सरस्वती सायकल योजना, मध्यान्ह एवं न्यौता भोजन, निर्माण कार्यों तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। शिक्षा मंत्री श्री यादव ने स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों को पीएम श्री स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने, जर्जर विद्यालय भवनों को नियमानुसार ध्वस्त कराने, विद्यालयों की आवश्यक मरम्मत एवं छोटे कार्यों में उपलब्ध बजट का उपयोग करने तथा पाठ्यपुस्तकों का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अवितरित पुस्तकों का संकुल एवं विद्यालय स्तर पर व्यवस्थित रिकॉर्ड संधारित करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बैठक में संभाग में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों एवं योजनाओं की प्रगति से मंत्री को विस्तारपूर्वक अवगत कराया।बैठक से पूर्व शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कलेक्टोरेट परिसर में सरस्वती सायकल योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को निःशुल्क सायकल एवं उपहार वितरित किए तथा उन्हें मेहनत, लगन और नियमित अध्ययन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
- -वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी और सर्कुलर इकोनॉमी पर विशेषज्ञों ने किया मंथन-250 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, बल्क वेस्ट जेनरेटरों की जवाबदेही और जीरो वेस्ट स्टेट के लक्ष्य पर दिया गया जोररायपुर / छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।क्षेत्रीय अधिकारी श्री पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।कार्यशाला में राज्य सलाहकार श्रीमती मोनिका सिंह एवं श्री पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता श्री योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ श्रीमती नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, सहकारिता को नई दिशा देने जुटेंगे प्रदेशभर के प्रतिनिधिरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में 3 और 4 जुलाई को राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकार संकल्प दौड़ का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप करेंगे।इस आयोजन का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाना, किसानों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त करना तथा "सहकार से समृद्धि" के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। सम्मेलन में प्रदेशभर से सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, किसान और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे।3 जुलाई को होगी सहकार संकल्प दौड़सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत 3 जुलाई को सुबह 6 बजे रायपुर के मरीन ड्राइव, तेलीबांधा में सहकार संकल्प दौड़ आयोजित की जाएगी। इस दौड़ का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सहकारिता के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है।दो दिवसीय राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन3 और 4 जुलाई को सुबह 11 बजे से कृषि मंडपम ऑडिटोरियम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन में सहकारी नीतियों, कृषि विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।प्रदेशभर के सहकारिता प्रतिनिधि होंगे शामिलसम्मेलन में अपेक्स बैंक, राज्य सहकारी संघ, मार्कफेड, लघु वनोपज सहकारी संघ, हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ, अन्त्यावसायी वित्त एवं विकास निगम सहित विभिन्न जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के अध्यक्ष, सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि अपनी सहभागिता देंगे।सहकार से समृद्धि का मिलेगा संदेशसहकारिता विभाग और अपेक्स बैंक ने प्रदेश के किसानों, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, युवाओं और आम नागरिकों से इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है। यह आयोजन सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण विकास, किसान सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई मजबूती प्रदान करेगा।
- -वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद श्री महेश कश्यप ने नवप्रवेशी बच्चों का किया आत्मीय स्वागत, नए स्कूल भवन का किया लोकार्पणरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बस्तर जिले के भानपुरी में शाला प्रवेश उत्सव उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर क्षेत्र के सांसद श्री महेश कश्यप भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम में दोनों अतिथियों ने नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर, माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया। बच्चों को स्कूल बैग और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई।शिक्षा से ही बनेगा उज्ज्वल भविष्यवनमंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि शिक्षा एक मजबूत और विकसित समाज की सबसे बड़ी आधारशिला है। राज्य सरकार का उद्देश्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना और विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने सभी बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें, ताकि वे शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को साकार कर सकें।सांसद श्री महेश कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत और लगन से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक का लाभ उठाकर वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।बनियागांव में नए स्कूल भवन का लोकार्पणशाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर ग्राम बनियागांव में 1 करोड़ 12 लाख 80 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नए भवन का लोकार्पण किया गया। नए भवन से क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर और सुविधायुक्त वातावरण में अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।स्मार्ट टीवी और मेधावी विद्यार्थियों का सम्मानकार्यक्रम में विद्यालयों को डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट टीवी प्रदान किए गए। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया तथा सभी बच्चों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई।बच्चों के साथ किया सहभोजकार्यक्रम के अंत में वन मंत्री श्री केदार कश्यप और सांसद श्री महेश कश्यप ने बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मीय बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। शाला प्रवेश उत्सव ने क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता और उत्साह का नया संदेश दिया।
- -कभी बंद पड़े स्कूलों में फिर लौटी रौनक, बदलते बस्तर की नई तस्वीररायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है।प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागतपीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया।बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाईमाओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालनजिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्यकलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।बदलते बस्तर की नई पहचानपीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- -बिहान की दीदी के परिवार को समय पर मिली सहायता, मुश्किल दौर में बनी सरकार की जनकल्याणकारी योजना का सहारारायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुदूर वनांचल तक पहुंच रहा है। सुकमा जिले में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने एक जरूरतमंद परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा देकर संवेदनशील शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया है।दुख की घड़ी में मिला आर्थिक संबलसुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के ग्राम आरलमपल्ली की दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़ी बिहान की दीदी दुधी सन्नी का 8 अप्रैल 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल गई।दो महीने में मिला दो लाख रुपये का बीमा दावाजिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में बिहान योजना की टीम ने तुरंत बीमा दावा तैयार कर भारतीय स्टेट बैंक की दोरनापाल शाखा को भेजा। बैंक ने भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं प्राथमिकता से पूरी कीं।संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मृतिका के पति एवं नामिनी दुधी सोमा के बैंक खाते में 27 मई 2026 को मात्र दो महीने के भीतर 2 लाख रुपये की बीमा दावा राशि जमा हो गई। यह सहायता राशि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा नायक द्वारा हितग्राही को प्रदान की गई।टीमवर्क से मिली समय पर राहतइस कार्य में भारतीय स्टेट बैंक दोरनापाल के शाखा प्रबंधक श्री आनंद सिंह, बिहान की पीआरपी श्रीमती रूकमणी कर्मा तथा एफएलसीआरपी कुमारी शालिनी ओडला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार को बिना अनावश्यक विलंब के आर्थिक सहायता मिल सकी।गरीब परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बन रही योजनाप्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन रही है। परिवार के कमाने वाले सदस्य के असामयिक निधन की स्थिति में मिलने वाली बीमा राशि संकट की घड़ी में बड़ा सहारा साबित होती है।दुधी सन्नी के परिवार की यह कहानी बताती है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचता है, तो वह न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में परिवार को नया संबल और विश्वास भी प्रदान करता है।








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