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- जम्मू. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को तकनीकी रूप से मजबूत और मानवीय संवेदनाओं से युक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत चुनौतियों से जूझ रही दुनिया का मार्गदर्शन करने में अपना स्थान फिर से हासिल करे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बौद्धिक और नैतिक चेतना को भी समृद्ध करें। सिन्हा यहां केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में महाराजा रणबीर सिंह की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "मानव कल्याण से प्रेरित भारत विश्व शांति और साझा समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। समय आ गया है कि भारत चुनौतियों से जूझ रही इस दुनिया का मार्गदर्शन करते हुए अपना स्थान पुनः प्राप्त करे।" इस अवसर पर उपराज्यपाल ने विश्वविद्यालय के जम्मू परिसर का नाम बदलकर श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, "हमें अपने युवाओं को एक सशक्त भारत के निर्माण के लिए तैयार करना होगा, जो देशों को अटूट एकता में जोड़ सके और उनमें विश्व शांति तथा मानव कल्याण की भावना को प्रज्वलित करे।" उन्होंने क्षेत्र में गुरुकुल, संस्कृत पाठशालाओं और वेद पाठशालाओं की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता देने का भी आश्वासन दिया।
- गांधीनगर. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को यहां आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत रक्षा और सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। सिंह ने कहा कि भारत आज अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है, जिससे रक्षा समाधानों की परिकल्पना और विकास के तरीके में बदलाव आ रहा है। उन्होंने गुजरात के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में रक्षा अताशे के लिए आयोजित दो-दिवसीय गोलमेज सम्मेलन को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत मानता है कि प्रौद्योगिकी प्रगति अलग-थलग रहकर नहीं हो सकती। 'वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी परिदृश्य में आत्मनिर्भर भारत: नवाचार, निर्यात और संयुक्त प्रौद्योगिकी साझेदारी को गति देना' विषय पर आयोजित दो-दिवसीय सम्मेलन में अफ्रीका, एशिया, प्रशांत और कैरेबियन सहित 24 देशों के राजनयिक और रक्षा प्रतिनिधि शामिल हुए। सिंह ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ''पिछले एक दशक में, भारत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में नवाचार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से प्रेरित होकर, हमारा दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर जुड़े रहते हुए आत्मनिर्भरता का निर्माण करना है।''उन्होंने कहा, ''भारत आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवरहित प्रणालियों से लेकर अंतरिक्ष और उन्नत डिजिटल क्षमताओं तक, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है, जिससे रक्षा समाधानों की परिकल्पना और विकास के तरीके में बदलाव आ रहा है।'' रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी प्रगति अलग-थलग रहकर नहीं हो सकती और साइबर जगत से लेकर हाइब्रिड खतरों तक, युद्ध के बदलते स्वरूप से गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि साझेदारी, सह-विकास, ज्ञान साझाकरण, प्रशिक्षण और सहयोगात्मक क्षमता निर्माण के माध्यम से ही स्थायी सुरक्षा का निर्माण होता है। सिंह ने कहा, ''विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा संबंधी गतिविधियों का भारत का बढ़ता नेटवर्क इसी विश्वास को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा कि भारत एक सुरक्षित, खुले और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए साझेदारों के साथ संवाद, संयुक्त अभ्यास और औद्योगिक सहयोग कर रहा है। सिंह ने कहा, ''यह मंच उन रणनीतिक विशेषज्ञों और भरोसेमंद साझेदारों को एक साथ लाता है जो रक्षा सहयोग के माध्यम से शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं। उनकी उपस्थिति विश्वास और मित्रता की भावना को दर्शाती है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के जुड़ाव का मूल आधार है।'' रक्षामंत्री ने कहा कि यह गोलमेज सम्मेलन रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में संवाद, नवाचार और साझेदारी के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव और सामने आर रही सुरक्षा चुनौतियों के इस युग में सहयोग न केवल वांछनीय, बल्कि आवश्यक हो गया है। सिंह ने रक्षा अताशे की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये सैन्य, सरकार और रक्षा उद्योग के बीच एक सेतु का काम करते हैं और वैश्विक सुरक्षा सहयोग की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, भारत दुनिया का 'विश्व मित्र', एक भरोसेमंद दोस्त और भागीदार बनने की आकांक्षा रखता है।''
- नयी दिल्ली. दिल्ली सरकार तीन धार्मिक स्थलों जम्मू-कश्मीर के कटरा (वैष्णो देवी), राजस्थान के खाटू श्याम और उत्तर प्रदेश के अयोध्या के लिए अंतरराज्यीय राजकीय बस सेवाएं शुरू करने की योजना बना रही है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) जल्द ही अंतरराज्यीय परिचालन के लिए 17 मार्गों पर 50 वातानुकूलित बसों के बेड़े को शामिल करेगा और अंतरराज्यीय संपर्क बढ़ाएगा। सिंह ने कहा, ''सरकार अंतरराज्यीय संपर्क को मजबूत करने और नागरिकों के लिए आरामदायक और किफायती यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, हम महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के लिए बस सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं ताकि दिल्ली से श्रद्धालु देश भर के धार्मिक स्थलों तक आसानी से यात्रा कर सकें।''अधिकारियों के अनुसार, ये बसें राज्य सड़क परिवहन उपक्रम संघ द्वारा निर्धारित मानक दरों के आधार पर संचालित होंगी। यहां जारी एक बयान के मुताबिक, ''नानकसर दिल्ली-गाजियाबाद बस टर्मिनल, दिल्ली-रेवाड़ी, दिल्ली-करनाल, दिल्ली-रोहतक, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-जेवर सहित कई अतिरिक्त अंतरराज्यीय मार्गों पर भी बस सेवा का विस्तार करने की योजना है। इससे दैनिक यात्रियों और क्षेत्रीय यात्रियों को सहूलियत होने की उम्मीद है।'' सिंह ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी संख्या में रहने वाले पूर्वांचल के लोगों को सहूलियत देने के लिए दिल्ली और बिहार के बीच अंतरराज्यीय बस सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, ''इन सेवाओं को शुरू करने और दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत करने के लिए जल्द ही एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।'' अंतरराज्यीय परिवहन सेवाओं के विस्तार के तहत डीटीसी पहले ही दिल्ली-बड़ौत (उत्तर प्रदेश), दिल्ली-सोनीपत (हरियाणा), दिल्ली-धारूहेड़ा (हरियाणा) और दिल्ली-पानीपत (हरियाणा) सहित प्रमुख मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू कर रहा है।
- पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने द्विवार्षिक चुनाव में बिहार की पांचों सीटों पर जीत हासिल करते हुए क्लीन स्वीप किया। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार और राज्य विधानसभा के सदस्य नितिन नवीन के अलावा जिन अन्य उम्मीदवारों ने राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज की उनमें केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर जद(यू), भाजपा के शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। रामनाथ ठाकुर राज्यसभा में लगातार तीसरी बार निर्वाचित हुए हैं, जबकि भाजपा के शिवेश कुमार के राज्यसभा पहुंचने से राज्य से संसद में पार्टी को दलित चेहरा मिलेगा। उपेंद्र कुशवाहा लगातार दूसरी बार संसद के उच्च सदन के लिए चुने गए हैं।जद(यू) के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा परिसर में 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, "पांचों उम्मीदवार जीत गए हैं। इनमें से चार उम्मीदवार पहली वरीयता के मतों के आधार पर निर्वाचित हुए, जबकि एक उम्मीदवार दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर विजयी घोषित किया गया।" हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पांचों में से किस उम्मीदवार को दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर जीत मिली। जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार ने नामांकन पत्र दाखिल कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने कहा था कि राज्य की विधानसभा और विधान परिषद तथा लोकसभा के सदस्य रहने के बाद राज्यसभा का सदस्य बनने की उनकी इच्छा रही है। उनके इस अचानक फैसले से संकेत मिल रहा है कि लंबे समय से मुख्यमंत्री पद पर आसीन कुमार के पद छोड़ने के बाद नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। लगातार पांचवीं बार बैंकिपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल करने वाले नितिन नवीन को अब राज्यसभा जाने के बाद इस सीट को छोड़ना होगा। परिणाम घोषित होने के बाद वह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत पार्टी के अन्य नेताओं के साथ विधानसभा पहुंचे।नवीन ने संवाददाताओं से कहा, "हमारी जीत राजग की एकजुटता का परिणाम है। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभारी हूं जिन्होंने मुझे अपने गृह राज्य का संसद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया।" इन पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे, जिसके कारण एक दशक से अधिक समय बाद राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान कराना पड़ा। वर्ष 2014 के बाद से बिहार में सभी राज्यसभा सदस्य निर्विरोध चुने जाते रहे हैं। दूसरी बार राज्यसभा पहुंचने की उम्मीद कर रहे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी के कारण पराजित हो गए। उन्हें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक विधायक का समर्थन मिलने की उम्मीद थी, हालांकि ये दोनों दल महागठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। सिंह को जीत के लिए कम से कम 41 विधायकों के मतों की आवश्यकता थी, लेकिन मतदान के दिन कम से कम चार विधायक-कांग्रेस के तीन और राजद का एक विधायक अनुपस्थित रहे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम ने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि हमारे तीन विधायकों को 13 मार्च से भाजपा के इशारे पर नजरबंद रखा गया था। हम अनुपस्थित विधायकों से स्पष्टीकरण मांगेंगे और पार्टी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।" बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के कुल छह विधायक हैं। इनमें से मनोज विश्वास, सुरेंद्र प्रसाद और मनोहर प्रसाद मतदान के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे।कांग्रेस ने यह भी घोषणा की कि वह मंगलवार को अपने ऐतिहासिक सदाकत आश्रम स्थित कार्यालय के बाहर 'वोट चोर, विधायक चोर' की नीति के विरोध में प्रदर्शन करेगी। राजद के एकमात्र अनुपस्थित विधायक फैसल रहमान ने एक निजी समाचार चैनल से कहा, "मैं अचानक बीमार पड़ गया था और इलाज के लिए दिल्ली में हूं। मैंने अपनी स्थिति के बारे में कल ही नेता प्रतिपक्ष और हमारी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को जानकारी दे दी थी।" तेजस्वी यादव मतगणना पूरी होने के समय के आसपास देर शाम विधानसभा पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "यदि हमारे कुछ विधायकों ने विश्वासघात नहीं किया होता तो हमारा उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव जीत जाता। अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, इस पर बाद में फैसला किया जाएगा। यह भाजपा द्वारा धनबल और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है, जिसने कई राज्यों में इस तरह के हथकंडे अपनाए हैं।" उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया, "यह परिणाम तेजस्वी यादव के लिए करारा तमाचा है, जिन्होंने अपने विधायकों को मनाने के बजाय उन्हें एक होटल में कैद कर रखा।"--
- लखनऊ. रक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय द्वारा आयोजित 'नेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रेटजिक स्टडी' कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय सशस्त्र बलों, विभिन्न देशों की सेनाओं तथा भारत सरकार की सिविल सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद किया। राज्य सरकार द्वारा यहां जारी एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि 'ट्रस्ट और टेक्नोलॉजी' उत्तर प्रदेश के परिवर्तन के दो प्रमुख आधार बने हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारे का तेजी से विकास हो रहा है और लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई स्थापित है, जो एक एंकर यूनिट के रूप में अनेक छोटे उद्यमों को अवसर प्रदान करेगी।बयान के अनुसार संवाद के दौरान अधिकारियों ने यह प्रश्न किया कि भारत में अनेक अच्छी नीतियां बनती हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन अक्सर नहीं हो पाता। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की नियमित निगरानी, क्षेत्र का निरीक्षण और जवाबदेही तय करने से ही परिणाम प्राप्त होते हैं। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नयी दिल्ली के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता ने किया।
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारतीय और विदेशी एयरलाइंस ने हजारों उड़ानें रद्द कर दी हैं। यह जानकारी सोमवार को केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापू राममोहन नायडू ने लोकसभा में दी। संसद के चल रहे बजट सत्र के छठे दिन बोलते हुए मंत्री ने बताया कि भारतीय एयरलाइंस ने 4,335 से ज्यादा उड़ानें रद्द की हैं, जबकि विदेशी एयरलाइंस ने करीब 1,187 उड़ानें रद्द की हैं।
मंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सरकार और एयरलाइंस की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जब किसी संघर्ष प्रभावित क्षेत्र का एयरस्पेस बंद हो जाता है, तो वहां उड़ानें संचालित करना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा, “भारतीय एयरलाइंस ने 4,335 उड़ानें और विदेशी एयरलाइंस ने 1,187 तक उड़ानें रद्द की हैं। हमें सबसे पहले सुरक्षा का ध्यान रखना होता है। अगर किसी क्षेत्र का एयरस्पेस बंद है तो वहां उड़ानें चलाने का कोई सवाल ही नहीं है।”हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति से उड़ानों पर असर पड़ा है, फिर भी इस दौरान काफी संख्या में यात्रियों ने यात्रा की है। मंत्री के अनुसार, तनाव के दौरान भी लगभग 2,19,780 यात्रियों ने हवाई सफर किया। राममोहन नायडू ने बताया कि भारत का विमानन नियामक ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए)’ और नागर विमानन मंत्रालय प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके।उन्होंने कहा कि जब उन क्षेत्रों का एयरस्पेस फिर से खुल जाएगा, तभी उड़ान सेवाएं सामान्य रूप से शुरू हो पाएंगी, क्योंकि अभी कई इलाकों में प्रतिबंध लागू हैं। इस बीच पिछले सप्ताह नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया था कि भारत में इस समय प्रमुख घरेलू एयरलाइंस में 11,000 से अधिक पायलट काम कर रहे हैं, जिनमें करीब 1,900 महिला पायलट भी शामिल हैं।उन्होंने 12 मार्च को लोकसभा में लिखित जवाब में बताया था कि भारतीय एयरलाइंस में कुल 11,394 पायलट कार्यरत हैं, जिनमें 1,871 महिला पायलट हैं। -
नई दिल्ली। भारत सरकार के जलमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय झंडे वाले 22 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में मौजूद हैं जिन पर 611 नाविक सवार हैं और पिछले 24 घंटे में किसी भी तरह के हादसे की खबर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी भी यूएई से 14 मार्च को रवाना हो चुका है। प्रेस ब्रीफिंग में ये जानकारी दी गई।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया, “शिवालिक एलपीजी कैरियर, जो फारस की खाड़ी से रवाना हुआ था, होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर आ चुका है। ” उन्होंने बताया कि जहाज के पहुंचने से पहले ही बंदरगाह पर सभी जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया, प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग और बाकी व्यवस्थाएं कर दी गई हैं, ताकि इस जहाज से माल उतारने में कोई विलंब न हो।राजेश कुमार सिन्हा ने विश्वास दिलाया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा,” पिछले 24 घंटों में किसी तरह की घटना की सूचना नहीं मिली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर जहाज और उसके क्रू मेंबर के साथ संपर्क बना हुआ है। फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में अभी भी भारत के झंडे वाले 22 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं।”सिन्हा ने बताया कि यूएई से चली शिप 17 मार्च तक क्रूड लेकर भारत पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा, “भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी’ ने 14 मार्च को यूएई से रवाना होकर करीब 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत की ओर यात्रा शुरू की है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह जहाज कल मुंद्रा बंदरगाह पहुंच जाएगा।”ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संघर्ष में फंसे नागरिकों को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमारे करीब 90 नागरिक ईरान से जमीन के रास्ते अजरबैजान पहुंचे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने मदद की। दूतावास ने उन्हें वीजा दिलाने और जरूरी इमिग्रेशन औपचारिकताएं पूरी कराने में सहयोग किया।”उन्होंने कहा, “जिन 550 लोगों के ईरान से आर्मेनिया पहुंचने की बात हमने पहले बताई थी, उनमें 284 लोग ऐसे हैं जो ईरान तीर्थ यात्रा पर गए थे। ये लोग फिलहाल इन दोनों देशों में मौजूद हैं। इनमें से कुछ भारत लौट चुके हैं और बाकी लोग अगले कुछ दिनों में लौट आएंगे।” जायसवाल ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास सभी कठिन हालात के बावजूद पूरी तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा,” पिछले कुछ दिनों में दूतावास ने तेहरान के बाहर मौजूद भारतीय छात्रों को भी ज्यादा सुरक्षित शहरों में पहुंचाने में मदद की है।” -
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारतीय जहाज शिवालिक एलपीजी कैरियर गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट पहुंच चुका है। यह कतर से गैस लेकर भारत पहुंचा है। यह जहाज सोमवार शाम 5 बजे गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा, जिसकी जानकारी पहले ही शिपिंग मंत्रालय ने प्रेस से साझा कर दी थी।
शिवालिक करीब 45 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर पहुंचा है, जो लगभग 32 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर बताई जा रही है। यह जहाज 14 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर रवाना हुआ था। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच यह भारत पहुंचने वाला पहला एलपीजी जहाज है।सोमवार को भारत सरकार के मंत्रालयों की प्रेस ब्रीफिंग में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया, “शिवालिक एलपीजी कैरियर, जो फारस की खाड़ी से रवाना हुआ था, होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचा।” इसके साथ ही सिन्हा ने विश्वास दिलाया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, “पिछले 24 घंटों में किसी तरह की घटना की सूचना नहीं मिली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर जहाज और उसके क्रू मेंबर के साथ संपर्क बना हुआ है। फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में अभी भी भारत के झंडे वाले 22 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं।” सिन्हा ने बताया कि यूएई से चली शिप 17 मार्च तक क्रूड लेकर भारत पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा, “भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी’ ने 14 मार्च को यूएई से रवाना होकर करीब 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत की ओर यात्रा शुरू की है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह जहाज कल मुंद्रा बंदरगाह पहुंच जाएगा।” - नयी दिल्ली. पांच राज्यों की सत्ता की दौड़ में भाजपा के लिए चुनौती बड़ी है, लेकिन असली कसौटी पश्चिम बंगाल में है जहां पार्टी ममता बनर्जी की मजबूत तृणमूल मशीनरी से भिड़ने के लिए तैयार है। पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2021 के चुनावों में भाजपा ने प्रमुख विपक्षी दल के रूप में अपनी पकड़ मजबूत की और 294 सदस्यीय विधानसभा में उसकी सीट की संख्या 2016 में मात्र तीन से बढ़कर 77 हो गई। चुनावी रणनीति में नए बदलाव के साथ, भाजपा इस बार ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ फैली जनविरोधी लहर का लाभ उठाकर तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में आश्वस्त है। पार्टी राज्य में भ्रष्टाचार और घुसपैठ के मुद्दों को उठाकर जनता की भावनाओं को अपने पक्ष में करने की भी कोशिश कर रही है। तृणमूल पश्चिम बंगाल में लगातार 15 वर्षों से सत्ता में है।हालांकि, भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में किसी स्थानीय करिश्माई नेता की कमी है। जहां भाजपा लड़ाई जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कर रही है, वहीं ममता बनर्जी राज्य में एक मजबूत और चुनौतीपूर्ण राजनीतिक चेहरा बनी हुई हैं। असम में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में अपनी शासन व्यवस्था और संगठनात्मक शक्ति का भरोसा लेकर लगातार तीसरी जीत हासिल करने को आश्वस्त है। लेकिन कांग्रेस नीत विपक्ष सत्ता विरोधी लहर और स्थानीय शिकायतों का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा को अल्पसंख्यक मतदाताओं, विशेषकर बांग्ला भाषी मुसलमानों के प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। साथ ही छह समुदायों के लंबे समय से लंबित अनुसूचित जनजाति दर्जा देने की मांग जैसे मुद्दे भी चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं। दक्षिण में भाजपा केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केरल में पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी, लेकिन हाल के नगर निकाय चुनावों में मिली सफलता से इस बार कुछ बढ़त की उम्मीद है। राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नीत यूडीएफ और माकपा नीत एलडीएफ के बीच रहेगा।
- नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग (ईसी) ने केंद्रीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों को पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान काले धन, मादक पदार्थों और अन्य अवैध प्रलोभनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने और "सक्रिय" उपाय करने का निर्देश दिया है। निर्वाचन आयोग ने रविवार को यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल राज्यों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। संवाददाता सम्मेलन के तुरंत बाद, निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आयकर विभाग के लिए), प्रवर्तन निदेशालय, वित्तीय आसूचना इकाई, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो और राजस्व आसूचना निदेशालय सहित अन्य विभागों को अलग-अलग सूचनाएं जारी कीं। इसने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) जैसी बलों को पत्र भेजकर उनसे सतर्कता बढ़ाने और विशेष टीमें तैनात करने को भी कहा ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से, अवैध नकदी और अन्य प्रलोभनों के इस्तेमाल के बिना आयोजित किए जा सकें। आयोग ने सीबीडीटी से इन चुनावी राज्यों में आयकर जांच ईकाई को निर्देश देने को कहा कि वे हवाई अड्डों, प्रमुख रेलवे स्टेशन, होटल, फार्म हाउस, हवाला एजेंट और दलालों पर नजर रखने के लिये टीम तैनात करें ताकि "बेहिसाब" नकदी की जांच की जा सके। इसने आयकर विभाग से इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हवाई अड्डों पर अपनी हवाई खुफिया इकाइयों (एआईयू) का उपयोग करके निजी जेट या वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से नकदी की आवाजाही की जांच करने को कहा। निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया, "यदि आयकर विभाग को 10 लाख रुपये से अधिक की कोई भी नकदी प्राप्त होती है, तो वे आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कदम उठाएंगे...।" आयोग ने वित्तीय आसूचना इकाई को संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) साझा करने और नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवारों द्वारा की गई घोषणाओं के संबंध में उनकी संपत्ति के बारे में जानकारी भेजने का निर्देश दिया। इसने एनसीबी और डीआरआई को मादक पदार्थों और नकली मुद्रा पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया, जिनका इस्तेमाल इन चुनावों के दौरान प्रलोभन के रूप में किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने ईडी को "धन शोधन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने" का निर्देश दिया।
- भवानीपटना (ओडिशा). कालाहांडी जिले में रविवार को एक संभागीय समिति सदस्य सहित ग्यारह माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि कालाहांडी जिला मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया और अपने हथियार ओडिशा के डीजीपी वाई बी खुरानिया, एडीजी (नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिए। संभागीय समिति सदस्य (डीसीएम) नकुल सहित 11 माओवादी प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के बीजीएन (बंसधारा, घुमसर, नागावली) संभाग से संबंधित हैं। महाराष्ट्र के मूल निवासी नकुल पर ओडिशा राज्य समिति के डीसीएम के रूप में 22 लाख रुपये का इनाम था, वहीं अन्य 10 माओवादी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। माओवादी समूह के 11 सदस्यों में एक डीसीएम, पांच क्षेत्रीय समिति सदस्य (एसीएम) और पांच पार्टी सदस्य (पीएम) शामिल थे। इन सभी पर कुल मिलाकर 63 लाख रुपये से अधिक का इनाम था। सभा को संबोधित करते हुए डीजीपी खुरानिया ने कहा कि माओवादियों का आत्मसमर्पण इस क्षेत्र में वामपंथी उग्रवादी विचारधारा के लगातार कमजोर होते प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के निरंतर अभियान के कारण इस क्षेत्र में माओवादियों का आधार कमजोर हुआ है। डीजीपी ने कहा, "आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाएंगे, जिनमें वित्तीय सहायता और व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं, ताकि वे सम्मान के साथ समाज में फिर से जुड़ सकें।"
- पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में रविवार को एक कार के गहरी खाई में गिरने से वाहन में सवार तीन लोगों की मौत हो गयी और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि हादसा जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर बंगापानी के पास तड़के उस समय हुआ, जब मुनस्यारी जाते समय कार अनियंत्रित होकर 20 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे मुनस्यारी थानाध्यक्ष अनिल आर्य ने बताया कि हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि एक अन्य व्यक्ति ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ा। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान अंकित पांडेय (28), आयुष पंत (29) और लक्ष्मण सिंह नेगी (35) के रूप में हुई है। आर्य के अनुसार, कार में सवार एक अन्य व्यक्ति देवेंद्र भट्ट दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) का कनेक्शन रखने वाले वाले परिवारों के लिए सब्सिडी वाला एलपीजी कनेक्शन रखने या लेने पर रोक लगा दी है। इस बीच, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में संकट के चलते क्षेत्र के नियामक ने शहर गैस वितरण कंपनियों से अपने पीएनजी ढांचे का विस्तार तेजी से करने को कहा है, जिससे रसोई गैस की आपूर्ति पर दबाव कम किया जा सके। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 14 मार्च को जारी एक अधिसूचना में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति एवं वितरण नियमन) आदेश-2000 में बदलाव किया है। इसके तहत अब पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए अपने घरेलू एलपीजी कनेक्शन को 'सरेंडर' करना जरूरी हो गया है। संशोधित आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां और वितरक उन उपभोक्ताओं को भरा गैस सिलेंडर नहीं देंगे, जिनके पास पहले से एलपीजी कनेक्शन हैं। आदेश में कहा गया, ''कोई भी व्यक्ति जिसके पास पीएनजी कनेक्शन है और जिसके पास घरेलू एलपीजी कनेक्शन भी है, वह घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं रखेगा, या किसी भी सरकारी पेट्रोलियम कंपनी से या उनके वितरक के जरिये भरा हुआ एलपीजी सिलेंडर नहीं लेगा। ऐसे लोगों को तुरंत अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन 'सरेंडर' करना होगा।'' सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां संशोधित आदेश के तहत पीएनजी कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं को खाली एलपीजी सिलेंडर के बदले भरा हुआ सिलेंडर नहीं देंगी। इस कदम का मकसद उन घरों के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देना है जिनके पास पाइप के जरिये गैस की आपूर्ति की सुविधा नहीं है। भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी की जरूरत को आयात से पूरा करता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले और जवाबी ईरानी कार्रवाई से पहले भारत का आधे से ज़्यादा कच्चे तेल का आयात, लगभग 30 प्रतिशत गैस और 85-90 एलपीजी आयात सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था। इस युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जो खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से कच्चा तेल मंगाकर आपूर्ति में व्यवधान को कुछ हद तक ठीक किया है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति कम कर दी गई है और होटल और रेस्तरांओं को भी एलपीजी की उपलब्धता कम हो गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने शहर गैस वितरण कंपनियों से घरों को घरेलू पीएनजी कनेक्शन देने के काम में तेजी लाने और उन इलाकों में उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने को कहा है जहां पाइपलाइन का ढांचा पहले ही बिछाया जा चुका है।
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नयी दिल्ली. तेल टर्मिनल पर हमले के बावजूद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के फुजैराह से तेल भरने के बाद भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का एक टैंकर सुरक्षित निकल गया है। सरकार ने रविवार एक अद्यतन सूचना में कहा कि वह पश्चिम एशिया में स्थिति पर करीब से नज़र रख रही है और स्थिर ईंधन आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। 'जग लाडकी' नाम का यह जहाज, जिसमें लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल है, फुजैराह से भारतीय समय के अनुसार 10.30 बजे निकला और इस पर सवार सभी सदस्य सुरक्षित हैं, और अब यह भारत के लिए रवाना हो गया है। 'जग लाडकी' चौथा भारतीय ध्वजवाहक जहाज है जो युद्ध क्षेत्र से बिना किसी नुकसान के बाहर निकला है।
तैयारी के उपायों पर एक अद्यतन सूचना में सरकार ने कहा कि इसके अलावा, सुरक्षित रास्ता भारतीय कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पोत परिवहन की दिक्कतों ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है। इसमें कहा गया, ''14 मार्च, 2026 को, जब भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी फुजैराह सिंगल पॉइंट मूरिंग पर कच्चा तेल भर रहा था, तो तेल टर्मिनल पर हमला हुआ। जहाज़ आज (रविवार) 10.30 बजे फुजैराह से लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हुआ।'' इसमें कहा गया है कि जहाज और उसमें सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। शनिवार को, दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' - लगभग 92,712 टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए। सूचना के अनुसार, शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचेगा, और नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर लंगर डालेगा। ये दोनों जहाज़ उन 24 जहाजों में शामिल थे जो इस क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। पश्चिमी इलाके पर 24 के अलावा, पूर्वी क्षेत्र में चार और जहाज फंसे हुए थे। पूर्वी इलाके में पर चार में से भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग प्रकाश, जो ओमान से अफ्रीका पेट्रोल ले जा रहा था, शुक्रवार को युद्ध प्रभावित इलाके को पार कर गया। जग प्रकाश ने ओमान के सोहर बंदरगाह से पेट्रोल लिया था और अब यह तंजानिया के टांगा जा रहा है। यह 21 मार्च को टांगा पहुंचने वाला है। सरकार ने कहा कि इस इलाके में काम कर रहे भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं, और समुद्री परिचालन पर करीब से नजर रखी जा रही है। अभी, फारस की खाड़ी इलाके के पश्चिम की ओर 22 भारतीय ध्वजवाहक जहाज हैं जिन पर 611 नाविक हैं। भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी ज़रूरतें आयात से पूरी करता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले और जवाबी ईरानी कार्रवाई से पहले भारत का आधे से ज़्यादा कच्चा तेल आयात, लगभग 30 प्रतिशत गैस और 85-90 प्रतिशत एलपीजी आयात सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था। इस लड़ाई की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्यम बंद हो गया है, जो खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल मंगाकर कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार किया है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति कम कर दी गई है। होटल और रेस्तरांओं के लिए भी एलपीजी में कमी की गई है। सरकार ने कहा है कि पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरएसपीएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर स्थिति पर नज़र रख रहा है। - श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को आतंकवादियों द्वारा पीड़ित सभी लोगों को न्याय दिलाने का संकल्प लिया और यहां आतंकी हमलों के 27 परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे। सिन्हा ने कहा, "मैं आतंकी हमले के हर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दृढ़ संकल्पित हूं और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए लंबित मामलों की जांच की जाएगी।" सिन्हा ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद से प्रभावित परिवारों से जबरन छीनी गई जमीनें या घर मुक्त कराए जाएंगे और वापस कर दिए जाएंगे और जिन मामलों की अभी जांच होनी बाकी है, उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन अन्याय को दूर करने और आतंकी हमलों के पीड़ितों के परिवारों के दरवाजे पर न्याय का द्वार खोलने में सफल रहा है। उन्होंने कहा, "अब तक लगभग 400 परिजनों को रोजगार मिल चुका है, और हम तब तक अथक प्रयास करते रहेंगे जब तक कि हम न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अंतिम परिवार तक नहीं पहुंच जाते।" उपराज्यपाल ने कहा कि आतंकी हमलों के पीड़ितों के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पिछले साल बारामूला से शुरू किए गए इस अभियान ने उन्हें समर्थन तथा साहस प्रदान किया है और उनके भविष्य को संवारने में मदद की है।
- नयी दिल्ली । कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों से कहा है कि वे अपने-अपने कार्यालयों द्वारा किए जाने वाले प्रमुख सुधारों के बारे में संक्षिप्त नोट जमा कराएं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों और विभागों को ये नोट या टिप्पणियां 17 मार्च तक सचिवालय में जमा करानी होंगी। उन्होंने कहा, ''सभी सचिवों से लागू किए गए और किए जाने वाले बड़े सुधारों पर नोट जमा करने का अनुरोध किया गया है।'' सरकार ने देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और नागरिकों के लिए जीवन को सुगम बनाने को कई कदम उठा रही है। पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि सरकार की 'सुधार एक्सप्रेस' से आम नागरिकों को बड़ा फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगले दशक के लिए उनकी तीन सुधार प्राथमिकताएं लगातार संरचनात्मक सुधार, नवोन्मेषण को बढ़ाना और कामकाज के संचालन को आसान बनाना हैं।
- नयी दिल्ली। लगभग 75 प्रतिशत कंपनियों को उम्मीद है कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद निश्चित अवधि वाले रोजगार में वृद्धि होगी। एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह बदलाव कार्यबल के औपचारिककरण की दिशा में एक बड़ा संकेत है। मानव संसाधन समाधान प्रदाता जीनियस एचआरटेक की रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यबल के औपचारिककरण की ओर झुकाव स्पष्ट रूप से बढ़ रहा है। लगभग 75 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि नई श्रम संहिताओं के बाद कंपनियां रणनीतिक रूप से निश्चित अवधि वाले रोजगार को अपनाएंगी। यह अधिक संगठित, अनुपालन वाले और दस्तावेजी रोजगार व्यवस्था की ओर एक निर्णायक कदम है। उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2025 में सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह चार व्यापक संहिताओं - मजदूरी, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा - को लागू किया था। इसका मकसद अनुपालन को सरल बनाना, नियमों को आधुनिक बनाना और श्रमिकों के कल्याण को बढ़ाना है। जीनियस एचआरटेक की यह रिपोर्ट जनवरी, 2026 के दौरान पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों की 1,459 कंपनियों से मिली प्रतिक्रिया पर आधारित है। रिपोर्ट से पता चला कि समग्र तैयारी के बारे में पूछे जाने पर 40 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके संगठन इन चार श्रम संहिताओं को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, 22 प्रतिशत कंपनियों ने आंशिक रूप से तैयार होने की बात कही, जबकि 17 प्रतिशत अभी तैयारी के शुरुआती चरण में हैं और 21 प्रतिशत ने अब तक कोई प्रयास शुरू नहीं किया है।
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में आज रविवार तड़के गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हुई है। बूंदाबांदी से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली। मौसम में अचानक आए बदलाव से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों के लिए सुबह का मौसम ठंडा और सुहावना हो गया।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें लोगों को दिन के दौरान मध्यम वर्षा, बिजली गिरने और तेज हवाओं की आशंका के बारे में चेतावनी दी गई है। हालांकि, नोएडा और गुरुग्राम जैसे पड़ोसी शहरों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश की आशंका है।रविवार की सुबह की बारिश मार्च के पहले पखवाड़े में राजधानी को जकड़े हुए भीषण गर्मी से राहत लेकर आई। शहर पर काले बादल छा गए, साथ ही गरज और तेज हवाएं चलीं, जिससे तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया। आईएमडी के अनुसार, मौसम में ये बदलाव पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में वायुमंडलीय गतिविधि की वजह से है।मौसम एजेंसी ने इससे पहले रविवार और सोमवार के लिए पश्चिमी हिमालय के कुछ हिस्सों और आसपास के मैदानी इलाकों में गरज, बिजली गिरने और तेज हवाओं का पूर्वानुमान लगाया था। इस तरह के मौसम आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ से होता है, जो अक्सर उत्तरी भारत में बारिश, तूफान और तापमान में उतार-चढ़ाव लाता है।आईएमडी ने दिल्ली में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि निवासियों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि दिन भर मध्यम बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि बारिश के दौरान सतह पर हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है, और हवा के झोंके 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं।नोएडा और गुरुग्राम सहित आसपास के एनसीआर शहरों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जो हल्की बारिश और बादल छाए रहने की संभावना को दर्शाता है, हालांकि जोखिम का स्तर अपेक्षाकृत कम है। अधिकारियों ने निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं के दौरान। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, बादल छाए रहने और लगातार बारिश के कारण दिल्ली का अधिकतम तापमान लगभग 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। -
नई दिल्ली। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट के कई देशों में 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया गया है। सीबीएसई का यह फैसला बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सीबीएसई के सभी स्कूलों पर लागू होगा। इस संबंध में बोर्ड ने 15 मार्च को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है। बोर्ड का कहना है कि क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि भारत के अलावा विदेशों में भी सीबीएसई बोर्ड के लाखों छात्र हैं। यही कारण है कि दुनियाभर के 26 देशों में ये बोर्ड परीक्षाएं एक साथ आयोजित की जा रही थी। लेकिन ईरान इजरायल संघर्ष के बाद मिडिल ईस्ट ये कई देशों में यह परीक्षाएं नहीं हो सकीं। रविवार को बोर्ड द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सीबीएसई से संबद्ध सभी विद्यालयों के विद्यार्थियों की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं अब आयोजित नहीं की जाएंगी।बोर्ड ने इन देशों में परीक्षाएं आयोजित करने की संभावना का कई बार पुन आकलन किया। लेकिन इन देशों से प्राप्त सूचनाओं, स्थानीय विद्यालयों के अनुरोधों तथा स्थानीय प्रशासन की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा रद्द का का निर्णय लिया गया है। इससे पहले 1 मार्च, 3 मार्च, 5 मार्च, 7 मार्च और 9 मार्च 2026 को भी इस विषय पर सर्कुलर जारी किए गए थे। पहले कुछ परीक्षाओं को स्थगित किया गया था। हालांकि अब इन सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया जा चुका है।रविवार को सीबीएसई बोर्ड द्वारा लिए गए नवीनतम निर्णय के अनुसार 16 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित होने वाली कक्षा 12 की सभी बोर्ड परीक्षाएं इन देशों के विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं। साथ ही पहले जिन परीक्षाओं को स्थगित किया गया था, उन्हें भी अब रद्द मान लिया जाएगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन देशों के विद्यार्थियों के परिणाम किस आधार पर घोषित किए जाएंगे, इस पर विचार करने के उपरांत यह जानकारी अलग से जारी की जाएगी।परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया और मूल्यांकन पद्धति के बारे में सीबीएसई जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर संयम भारद्वाज द्वारा जारी इस सर्कुलर के बाद मध्य पूर्व के इन देशों में पढ़ने वाले हजारों भारतीय विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच नई स्थिति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बोर्ड परिणाम घोषित करने के लिए कौन-सा तरीका अपनाता है। परीक्षा रद्द करने की आधिकारिक सूचना दूतावासों को भी दी गई है।इस संबंध में भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को सूचना भेजी गई है। जिन देशों में स्थित दूतावासों को आधिकारिक सूचना दी गई है उनमें अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास, रियाद स्थित भारतीय दूतावास, मस्कट में भारतीय दूतावास, दोहा के भारतीय दूतावास, मनामा में भारतीय दूतावास, कुवैत सिटी स्थित भारतीय दूतावास, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास, दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास और दुबई स्थित केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय शामिल है। -
नई दिल्ली। फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज – शिवालिक और नंदा देवी – लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए। यह जहाज 16 और 17 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह और कांदला बंदरगाह पर पहुँचेगा। शिवालिक और नंदा देवी के अलावा, भारत आने वाले कई अन्य जहाज खाड़ी क्षेत्र में स्टैंडबाय पर हैं और सुरक्षित तथा निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
कल शनिवार को नई दिल्ली में चौथे अंतर-मंत्रालय संवाददाता सम्मेलन में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा समुद्री परिस्थितियों और इस क्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों तथा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में मीडिया को जानकारी दी। इस दौरान, बताया गया कि पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई नई समुद्री दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।वर्तमान में फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज हैं जिनमें 611 नाविक सवार हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। पिछले 24 घंटों में, पोत परिवहन महानिदेशालय के नियंत्रण कक्ष ने नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों से लगभग 312 कॉल और 460 ईमेल का जवाब दिया। पिछले 15 दिनों में, इसने 2,737 कॉल और 4,900 से अधिक ईमेल का जवाब दिया है।पोत परिवहन महानिदेशालय की त्वरित प्रतिक्रिया टीम चौबीसों घंटे सातों दिन कार्यरत है और पोत परिवहन कंपनियों, दूतावासों, विदेश मंत्रालय और पी एंड आई क्लब के बीमाकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर रही है। लगभग 1,300 नाविकों और उनके परिवारों की चिंताओं का समाधान किया जा चुका है। वहीं, पिछले 24 घंटों में, खाड़ी क्षेत्र के हवाई अड्डों और क्षेत्रीय स्थानों से 30 नाविकों को स्वदेश वापस लाया गया है, जिससे स्वदेश वापसी करने वालों की कुल संख्या 253 हो गई है।सरकार समुद्री व्यापार पर परिचालन संबंधी प्रभाव को कम करने के लिए बंदरगाहों, पोत परिवहन लाइनों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है। बंदरगाहों को लंगरगाह, बर्थ किराया और भंडारण शुल्क में छूट जैसे राहत उपाय प्रदान करने का परामर्श दिया गया है। कुछ मामलों में पट्टे की अवधि भी बढ़ाई गई है, जिसमें कामराज बंदरगाह पर 25,000 मीट्रिक टन बैराइट्स कार्गो का पट्टा भी शामिल है।वहीं, ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख बंदरगाह एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में छह एलपीजी जहाजों को प्रमुख बंदरगाहों पर जगह मिली है। बंदरगाह उन मालवाहक जहाजों के लिए सुरक्षित लंगरगाह क्षेत्र भी उपलब्ध करा रहे हैं जो खाड़ी की ओर जा रहे हैं और वर्तमान में वहां से गुजरने में असमर्थ हैं।मंत्रालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य समुद्री हितधारकों के समन्वय से स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। मंत्रालय ने कहा- संघर्ष शुरू होने के बाद से, भारत लगातार तनाव कम करने और संवाद के माध्यम से मुद्दों के समाधान का आह्वान करता रहा है। भारत ने माल और ईंधन के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करने और ऊर्जा सुविधाओं सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों से बचने के महत्व पर जोर दिया है।भारत ने खाडी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों, ईरान, अमेरिका और इज़राइल सहित प्रमुख हितधारकों के साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर घनिष्ठ संपर्क बनाए रखा है। प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और भारतीय मिशन ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री आवागमन सहित भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करने के लिए अपने समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं।इसके साथ ही, संघर्ष के कारण उड़ानों में व्यवधान के मद्देनज़र, ईरानी अधिकारियों ने फंसे हुए ईरानी नागरिकों को वापस लाने के लिए कल रात कोच्चि से एक चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की। इस उड़ान में 107 चालक दल के सदस्य, 35 ईरानी पर्यटक, 3 राजनयिक और जहाज आईरिस लावन के गैर-आवश्यक चालक दल के सदस्य सवार थे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राज्य में अपने 15 साल के कार्यकाल के दौरान असम के स्वास्थ्य बजट से हर साल लगभग 150 करोड़ रुपए का गबन किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बुरी तरह से कमजोर कर दिया है।
गुवाहाटी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि एक दशक पहले असम में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस शासन के दौरान हुए कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान, स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आवंटित धन को कथित तौर पर नेताओं और उनके परिवारों के फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे अस्पताल और चिकित्सा बुनियादी ढांचा कमजोर स्थिति में पहुंच गया।अमित शाह ने कहा कि लगभग 10 साल पहले, असम में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। कांग्रेस सरकार लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बजाय अपने नेताओं के परिवारों की आर्थिक भलाई को लेकर अधिक चिंतित थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें समाज के सभी वर्गों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की प्रशंसा करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि असम की चिकित्सा सुविधाएं अब तेजी से गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अधिक विकसित राज्यों के मानकों के बराबर पहुंच रही हैं।गृह मंत्री शाह के अनुसार, रविवार को शुरू की गई परियोजनाएं राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी को और मजबूत करेंगी और लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वालों के लिए गुणवत्तापूर्ण इलाज तक पहुंच को बेहतर बनाएंगी।गृह मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र और असम सरकार मिलकर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने, नई सुविधाएं स्थापित करने और मौजूदा अस्पतालों को अपग्रेड करने पर काम कर रहे हैं, ताकि लोगों को अब बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार एक मजबूत हेल्थकेयर सिस्टम बनाने पर लगातार ध्यान दे रही है, जो हर नागरिक के लिए इलाज को किफायती और सुलभ बनाना सुनिश्चित करे। -
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी है। इन राज्यों के किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, भीड़ और अव्यवस्था को रोकने के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता न हों। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के बूथ मतदान केंद्र से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर स्थापित किए जा सकेंगे। मतदाता सूचना पर्ची पर मतदान केंद्र का स्पष्ट नाम, संख्या, भाग संख्या और मतदाता का क्रमांक भी अंकित होगा।मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पिछले 12 महीनों के दौरान चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मतदाताओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से 13 से अधिक नई पहलें शुरू की गई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पहल मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है, जो संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुरूप यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर शत-प्रतिशत वेब प्रसारण की व्यवस्था की जाएगी।प्रत्येक मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी हर दो घंटे में डाले गए मतों की संख्या दर्ज करेंगे, जिससे मीडिया और जनता को प्राप्त होने वाला मतदान प्रतिशत लगभग सटीक रहेगा। मतदान समाप्त होने के बाद, अंतिम आंकड़ों के अनुसार मतदान प्रतिशत तुरंत प्रदर्शित किया जाएगा। एक नई व्यवस्था के तहत मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मतदाता अपने मोबाइल फोन जमा कर सकेंगे। मतदान कर बाहर आने के बाद वे अपना मोबाइल वापस प्राप्त कर सकेंगे। इससे मतदान केंद्र के भीतर अनुशासन और गोपनीयता सुनिश्चित होगी। मतदाताओं की सुविधा के लिए इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों पर सभी उम्मीदवारों के रंगीन चित्र भी प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि मतदाता आसानी से अपनी पसंद के उम्मीदवार की पहचान कर सकें।चुनाव आयोग ने एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में सभी डिजिटल सेवाओं को एक ही मोबाइल अनुप्रयोग में एकीकृत किया है, जिसे ‘ईसीआई नेट’ नाम दिया गया है। इस एकीकृत अनुप्रयोग में लगभग 40 विभिन्न सेवाएं शामिल हैं। इसके माध्यम से मतदाता अपने पहचान पत्र, मतदान केंद्र की जानकारी, उम्मीदवारों का विवरण, उम्मीदवारों के शपथपत्र, मतदान की प्रगति और मतगणना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।आयोग ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों के बारे में जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अभियान में 35 लाख से अधिक लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक मतदाता मतदान प्रक्रिया को समझ सके और बिना किसी कठिनाई के अपना मत दे सके। मतदान केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर पेयजल, शौचालय, स्पष्ट संकेत पट्ट, रैंप, व्हीलचेयर, वॉलेंटियर्स, सहायता काउंटर, मतदाता सहायता केंद्र और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाएगी।मतदान कक्ष के अंदर भी पर्याप्त रोशनी और बाहर छाया की व्यवस्था की जाएगी ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। चुनाव के लिए वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। मतदान केंद्र भूतल पर बनाए जाएंगे, और वहां रैंप की सुविधा उपलब्ध होगी। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं को मतदान में प्राथमिकता दी जाएगी। उनके बैठने के लिए विशेष रूप से बेंच लगाए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर वे घर से मतदान करने के लिए भी आवेदन कर सकेंगे, तथा उनके लिए परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।मतदाता पहचान और सुविधा के लिए सभी बूथस्तर अधिकारियों को पहचान पत्र भी प्रदान किए गए हैं, ताकि नागरिक उन्हें आसानी से पहचान सकें। इसके साथ ही चुनावी कर्मचारियों के कठिन परिश्रम को देखते हुए उनके मानदेय में भी वृद्धि की गई है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि डाक मतपत्रों की गणना इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की गणना से दो चरण पहले की जाएगी। इसके अतिरिक्त चुनाव से संबंधित सभी सांख्यिकीय आंकड़े मतगणना समाप्त होने के 72 घंटे के भीतर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के प्रत्येक मतदाता को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण में मतदान करने का अवसर मिले और लोकतंत्र का यह महोत्सव पूरी गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हो। ( - जम्मू. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वैश्विक पहुंच ने भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने में मदद की। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति के कारण कई देशों को एलपीजी और गैस की आपूर्ति या तो कम कर दी गई या पूरी तरह रोक दी गई, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। सिंह ने कहा, "यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे प्रधानमंत्री की विश्व भर में इतनी प्रतिष्ठा और सम्मान है कि कोई भी उनकी बात को अनसुना नहीं करता।" उन्होंने कहा, "आज भी, जब कई अन्य देशों को गैस की आपूर्ति रोक दी गई है, तो मोदी के सिर्फ एक फोन के बाद ही हमारे जहाज वहां (होर्मुज जलडमरूमध्य) से रवाना हो चुके हैं।" सिंह ने यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी के हस्तक्षेप के बाद वहां फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने में मदद मिली थी। खाड़ी देशों से शनिवार तड़के एलपीजी लेकर आ रहे दो भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे, जिससे युद्धग्रस्त और संकरे जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में शेष 22 जहाज प्रतीक्षा में हैं क्योंकि भारत सरकार क्षेत्र की सरकारों के साथ उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बातचीत कर रही है।
- नयी दिल्ली. भारत ने अफगान क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमलों की शनिवार को निंदा की और कहा कि अफगानिस्तान की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत अफगानिस्तान के क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा करता है, जिनके कारण कई नागरिकों की मौत हुई है और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है।" उन्होंने कहा, "यह पाकिस्तानी सेना की ओर से की गई उकसावे की एक और कार्रवाई है, जो अफगानिस्तान की संप्रभुता के विचार के खिलाफ रही है।" जायसवाल ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमले के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही।उन्होंने कहा, "भारत एक बार फिर यह दोहराता है कि अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए।" पाकिस्तानी सेना ने हालिया कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान में हवाई हमले किए हैं।
- नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर, भारत ने शनिवार को कहा कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खाड़ी सहयोग परिषद, ईरान, अमेरिका और इजराइल सहित सभी प्रमुख पक्षों के साथ संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संवाद और कूटनीति की वकालत करने के साथ ही भारत ने लगातार इस क्षेत्र से माल और ऊर्जा आपूर्ति के निर्बाध पारगमन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि मौजूदा संघर्ष में पांच भारतीय नागरिकों की जान चली गई है और एक लापता है। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से लगभग 1,72,000 भारतीय भारत लौट चुके हैं। जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, ''हमने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से बचने का भी आह्वान किया है। हमारा मानना है कि ये वैश्विक समुदाय के एक बड़े हिस्से की प्राथमिकताएं हैं क्योंकि संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।'' ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। वैश्विक तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा, ''हम खाड़ी सहयोग परिषद के सभी सदस्यों के अलावा ईरान, अमेरिका और इजराइल सहित सभी महत्वपूर्ण वार्ताकारों के साथ विभिन्न राजनीतिक एवं राजनयिक स्तरों पर संपर्क में हैं, ताकि उनके साथ अपनी प्राथमिकताओं, विशेष रूप से हमारी ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कर सकें।''










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