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नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से उनके देश के व्यवसायों को नई गति मिलेगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए पीएम लक्सन ने लिखा, “हमारे व्यापार समझौते से न्यूजीलैंड के बिजनेस में तेजी आने वाली है और हम भारत को जो कुछ भी निर्यात करते हैं, उसका 57 प्रतिशत पहले दिन से ही टैरिफ मुक्त होगा।”यह महत्वपूर्ण टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी न्यूजीलैंड यात्रा से ठीक पहले आई है।
ज्ञात हो, प्रधानमंत्री मोदी 10-11 जुलाई को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर न्यूजीलैंड जाएंगे। यह लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। यह दौरा पीएम लक्सन के निमंत्रण पर हो रहा है।पीएम मोदी ने कहा कि मार्च 2025 में लक्सन की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों में जो गति आई है, इस दौरे से उसे और मजबूती मिलेगी। उन्होंने आर्थिक, व्यापारिक और वाणिज्यिक संबंधों को और बढ़ाने पर चर्चा करने का संकल्प व्यक्त किया।इस साल 27 अप्रैल को भारत और न्यूजीलैंड ने FTA को अंतिम रूप दिया था। पीएम लक्सन ने इसे “पीढ़ी में एक बार मिलने वाला मौका” बताया और भारतीय बाजार के विशाल स्केल व पोटेंशियल पर जोर दिया। लक्सन ने कहा कि यह समझौता न्यूजीलैंड को भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की राह पर करीब से जोड़ देगा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रवासी भारतीयों की सराहना की और कहा कि वे न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए उत्सुक हैं, जिन्होंने जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। यह FTA दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान इस समझौते को और गति देने पर चर्चा होने की उम्मीद है। ( -
नई दिल्ली। जहां कश्मीर यूनिवर्सिटी ने पहले ही उन किताबों और रिसर्च मटीरियल की समीक्षा शुरू कर दी है जिनमें आपत्तिजनक सामग्री हो सकती है। वहीं, स्कूल शिक्षा निदेशालय कश्मीर (डीएसईके) ने गुरुवार को सरकारी और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की सभी किताबों की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया।
कश्मीर यूनिवर्सिटी ने अपनी सेंट्रल लाइब्रेरी और सभी डिपार्टमेंटल लाइब्रेरी में मौजूद किताबों, मैगजीन, जर्नल्स, रिसर्च मटीरियल और दूसरी चीजों की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि उनमें कोई आपत्तिजनक कंटेंट न हो। इस बीच, कश्मीर के स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सरकारी और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग सेंटरों में मौजूद सभी किताबों की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि वहां परिसर में कोई आपत्तिजनक कंटेंट वाली सामग्री मौजूद न हो।आदेश के अनुसार, सभी संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे ऑफिस, क्लासरूम, स्टाफ रूम और स्कूल लाइब्रेरी में मौजूद किताबों की जांच करें, जिसमें हाल ही में खरीदी गई और पुरानी किताबें भी शामिल हैं। सर्कुलर में कहा गया है कि इसका मकसद यह पक्का करना है कि किसी भी किताब में ऐसा कंटेंट न हो जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए, छात्रों के लिए अनुपयुक्त सामग्री हो, मौजूदा कानूनों के खिलाफ हो, राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचाए, या शैक्षिक मूल्यों और स्थापित मानदंडों पर असर डाले।सभी सामग्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आयु-उपयुक्त दिशानिर्देशों के अनुरूप भी होना चाहिए। यदि कोई आपत्तिजनक कंटेंट मिलता है, तो संस्थान के प्रमुख को एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी जिसमें किताब का शीर्षक, प्रकाशन का वर्ष, लेखक और प्रकाशक का नाम और किताबों की संख्या का उल्लेख हो। संस्थानों से कहा गया है कि वे इस प्रक्रिया को पूरी सावधानी से पूरा करें और 13 जुलाई तक रिपोर्ट जमा करें।प्रमाण पत्र में यह बताना होगा कि सभी किताबों की अच्छी तरह से समीक्षा की गई है, जानकारी के अनुसार कोई आपत्तिजनक सामग्री मौजूद नहीं है, और लाइब्रेरी की किताबें शिक्षा नीति-2020 के दिशानिर्देशों और संबंधित कानूनों के अनुरूप हैं। जहां आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान की जाती है, वहां उसी समय सीमा के भीतर सीईओ/जेएडईओ को एक सारांश और रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।जोनल शिक्षा अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की रिपोर्ट की जांच और संकलन करेंगे और 15 जुलाई तक संबंधित सीईओ को एक समेकित रिपोर्ट जमा करेंगे। कश्मीर डिवीजन के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 17 जुलाई तक निदेशालय को प्रमाण पत्र और रिपोर्ट जमा करें। सीईओ से यह भी कहा गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस प्रक्रिया की निगरानी करें और जमा करने से पहले प्रमाण पत्रों पर प्रति-हस्ताक्षर करें। डीएसईके के जॉइंट डायरेक्टर, एडिशनल सेक्रेटरी (लॉ) और ओएसडी (सीईडब्ल्यू) की एक कमिटी जिलों से सर्टिफिकेशन रिपोर्ट इकट्ठा करेगी और 19 जुलाई तक डायरेक्टरेट को एक कंबाइंड रिपोर्ट सौंपेगी। डायरेक्टरेट ने चेतावनी दी है कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की कोताही को गंभीरता से लिया जाएगा और नियमों के तहत दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। -
नई दिल्ली। एआई डेटा सेंटर की दौड़ में भारत एक प्रमुख दावेदार बनकर उभरा है। ये सेंटर अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग को पावर देंगे। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियां और देश के बड़े बिजनेस ग्रुप, भारत में एआई के लिए डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
‘द सिटीजन’ की रिपोर्ट में बताया गया कि इसमें से ज्यादातर निवेश मुंबई और चेन्नई के आसपास केंद्रित है, जो कि अंडरसी (समुद्र के नीचे) केबल नेटवर्क के करीब मौजूद हैं और यह हाइपर स्केल डेटा सेंटर्स के लिए सबसे अच्छी जगह हैं। वहीं, देश के पूर्वीतट पर आंध्र प्रदेश का विशाखापट्टनम हब के रूप में उभर रहा है।इन सुविधाओं के लिए बहुत अधिक बिजली और पानी की जरूरत होती है, ताकि खास तरह के और बहुत अधिक गर्मी पैदा करने वाले कंप्यूटिंग हार्डवेयर को ठंडा रखा जा सके। ये मजबूत पावर ग्रिड, ज्यादा क्षमता वाली फाइबर-ऑप्टिक कनेक्टिविटी और रिन्यूएबल एनर्जी तक बढ़ती पहुंच पर भी निर्भर करते हैं। तेजी से उभरते हुए हब में विशाखापत्तनम भी शामिल है, जो दक्षिणी तटीय राज्य आंध्र प्रदेश का आर्थिक केंद्र है।गूगल ने इस क्षेत्र में 15 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है, जबकि अदाणी ग्रुप ने भी 2035 तक 5गीगावाट का एआई प्लेटफॉर्म बनाने के लिए 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना की घोषणा की है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि हैदराबाद और पुणे जैसे अंदरूनी इलाकों के टेक्नोलॉजी सेंटर तेजी से अपने क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारत की डिजिटल पहुंच तटीय इलाकों से आगे बढ़ रही है।सरकार की सहयोगी पॉलिसी इन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है। इसके तहत डेवलपर्स को रियायती दरों पर लंबे समय के लिए फाइनेंसिंग और टैक्स में बड़ी छूट दी जा रही है, जिसमें ग्रीन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे भी शामिल है। हाइपर स्केल एआई प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश के कारण, अनुमान है कि इस दशक के आखिर तक भारत की ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर लगभग 6.5 गीगावाट हो जाएगी।रिपोर्ट के अनुसार, भारी निवेश, सरकार की सहयोगी पॉलिसी और तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम की बदौलत, देश दुनिया की प्रमुख एआई ताकतों में से एक बनने की राह पर है और ग्लोबल एआई कॉम्पिटिटिवनेस में सिर्फ अमेरिका और चीन से पीछे है। - नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में गुरुवार को भारतीय समुदाय के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा चलाया, श्रीलंका में साइकलोन की तबाही हुई तो वहां हमने ऑपरेशन सागरबंधु चलाया था। उन्होंने कहा, “कोरोना काल की याद भी हमारे मन में ताजा है। हमने दुनियाभर से भारत को ही नहीं बल्कि अन्य देशों के नागरिकों को भी उनके घर पहुंचाया था। हमने जरूरतमंदों तक दवाइयां पहुंचाई थीं। पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत मदद करता है तब पासपोर्ट नहीं देखता है इसलिए दुनिया भी भारत पर इतना विश्वास करती है।भारतीय समुदाय के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मेलबर्न में भारतीय समुदाय के बीच आकर बहुत उत्साहित हूँ। उनका जोश और उत्साह वाकई बेमिसाल है। वे भारत-ऑस्ट्रेलिया दोस्ती के सबसे मज़बूत स्तंभों में से एक हैं।”पीएम मोदी ने भारतीयों को दूध में घुलने वाली चीनी की तरह बताया, जो उसे और भी मीठा बना देती है। उन्होंने कहा कि हम भारतीय दुनिया में अपने प्यार की मिठास घोलते रहते हैं। घर में दूध भले ही ऑस्ट्रेलिया का हो लेकिन उससे बनी चाय भारतीय होती है। दाल और सब्जियां ऑस्ट्रेलिया की होती हैं, फिर भी उनमें असली भारतीय मसालों का तड़का लगाया जाता है।उन्होंने कहा, “आपमें से कई लोग ऐसे होंगे जो अपने घरों में कम से कम दो टाइम ज़ोन को मैनेज करते हैं। यहां बच्चे ऑस्ट्रेलियाई समय के अनुसार स्कूल से लौटते हैं, जबकि भारत में दादा-दादी वीडियो कॉल के ज़रिए जुड़ने का इंतज़ार कर रहे होते हैं। हो सकता है कि यहां वीकेंड हो, फिर भी भारत में हो रही किसी शादी की लाइव स्ट्रीमिंग चल रही हो। दूसरे शब्दों में, भले ही हज़ारों किलोमीटर की भौतिक दूरी हो, आपकी दिनचर्या भारत से गहराई से जुड़ी हुई है। इस दिनचर्या के साथ-साथ, आप सभी ऑस्ट्रेलिया के विकास में पूरे जोश के साथ योगदान दे रहे हैं। मुझे आप सभी पर गर्व है।”वहीं, पीएम मोदी के मार्वल स्टेडियम में भारतीय समुदाय को संबोधित करने से पहले मेलबर्न में 30,000 से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए। यह ऑस्ट्रेलिया में किसी भी वर्ल्ड लीडर के लिए अब तक की सबसे बड़ी सभा बन गई है। “मेलबर्न मीट्स मोदी” नामक इस कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग जोर-जोर से ‘मोदी, मोदी’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। मेलबर्न का प्रतिष्ठित मार्वल स्टेडियम जबरदस्त उत्साह से गूंज रहा था, जहां भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय का विशाल जनसमूह प्रवासी भारतीय कार्यक्रम के समर्थन में उमड़ पड़ा है। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संगीत और जोशीले नारों से पूरा स्टेडियम ऊर्जा से भर गया है। पूरे वेन्यू में भारतीय तिरंगे और ऑस्ट्रेलियाई झंडे लहरा रहे थे, जो दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंधों को दिखा रहे थे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने के लिए मेलबर्न के प्रसिद्ध मार्वल स्टेडियम में हजारों भारतीय प्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। स्टेडियम पूरी तरह हाउसफुल रहा और लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। पीएम मोदी अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज़ के साथ स्टेडियम पहुंचे। वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री के सम्मान में फ्लैश लाइट जलाकर पूरा स्टेडियम जगमगा दिया।
इस दृश्य से भावुक हुए पीएम मोदी ने कहा,“ये शो हाउसफुल और ब्लॉकबस्टर है।”प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत मार्वल स्टेडियम की भूमि के पारंपरिक मालिकों (फर्स्ट नेशंस) को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि मेलबर्न एक दिन में चार मौसम दिखा देता है, लेकिन यहां के भारतीय समुदाय ने अपने सांस्कृतिक रंग से इस शहर को और ज्यादा जीवंत बना दिया है। पीएम मोदी ने मेलबर्न के भारतीय बाजारों का जिक्र करते हुए कहा, “कोई इसे लिटिल इंडिया कहता है, कोई मिनी इंडिया… नाम कोई भी हो, लेकिन रंग भारतीयता से भरे हुए हैं।”उन्होंने 2014 की अपनी पहली ऑस्ट्रेलिया यात्रा को याद करते हुए कहा कि उस समय 28 वर्षों बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री यहां आया था। उन्होंने तब कहा था कि अगली बार लोगों को 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पीएम मोदी ने गर्व के साथ बताया, “पिछले 12 वर्षों में यह मेरी ऑस्ट्रेलिया की तीसरी यात्रा है। यह एक तरह से ‘हैट्रिक’ है।”इससे दोनों देशों के बीच संबंधों में आए तेज बदलाव का पता चलता है।इससे पहले विक्टोरिया की प्रीमियर जेसिंटा ने पीएम मोदी का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “विक्टोरिया भारतीयों का सम्मान करता है। हमारे लिए भारत ट्रेड का नहीं, बल्कि ट्रस्ट का प्रतीक है।” कार्यक्रम में भारत का राष्ट्रगान गूंजा और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ भी पूरे समय मौजूद रहे। यह सामुदायिक कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव, मजबूत होते रणनीतिक संबंधों और प्रवासी भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका की झलक पेश करता है। ( -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल्स (स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड) और स्मार्ट टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान से बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) हटा दी है। यह छूट 31 मार्च, 2029 तक लागू रहेगी, जो गुरुवार से प्रभावी हो गई है। वित्त मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले इन तीन प्रमुख कलपुर्जों के विनिर्माण में उपयोग होने वाले सामान पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) छूट लागू करने के लिए तीन अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं।
अधिसूचना के मुताबिक सरकार ने देश में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता कम करने के लिए डिस्प्ले असेंबली, लिथियम-आयन सेल और इंडक्टर कॉयल मॉड्यूल के निर्माण में उपयोग होने वाले सामान पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) माफ कर दिया है। मंत्रालय के मुताबिक सरकार ने यह कदम स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल्स और स्मार्ट टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। यह छूट उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है। बीसीडी में शुल्क में ये छूट आयात पर निर्भरता कम करेगी और स्थानीय विनिर्माण के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स परिवेश को मजबूत करेगी। -
नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन (ई20) को लेकर उठ रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि ई20 पेट्रोल पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से परीक्षण किया गया, सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित ईंधन है। उन्होंने आरोप लगाया कि ई85 ईंधन के अनुकूल वाहनों की शुरुआत के बाद एथेनॉल मिश्रित ईंधन के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने का अभियान तेज हो गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में मंत्री ने कहा कि भारत में अप्रैल 2023 से ई15, अप्रैल 2024 से ई19 और अप्रैल 2025 से ई20 ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतने बड़े स्तर पर इसके उपयोग के बावजूद कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 20 लाख से ज्यादा चारपहिया वाहन कई वर्षों से सफलतापूर्वक ई20 ईंधन पर चल रहे हैं। इसके बावजूद, अचानक एथेनॉल मिश्रण के खिलाफ अभियान तेज हो गया है।”उन्होंने दावा किया कि 5 जून को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई85 ईंधन लॉन्च किए जाने के बाद इस तरह की आलोचनाएं बढ़ने लगीं। उन्होंने इसे भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। मंत्री ने कहा, “अगर समय और घटनाक्रम को ध्यान से देखें तो यह पैटर्न नजरअंदाज करना मुश्किल है। ई85 अनुकूल वाहनों की शुरुआत के तुरंत बाद एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर डर फैलाने की कोशिशें शुरू हो गईं।”केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और वैश्विक तेल मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है। ऐसे में देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक घरेलू ईंधनों का विस्तार बेहद जरूरी है। उन्होंने आगे कहा, “पेट्रोल में मिलाया जाने वाला प्रति लीटर एथेनॉल कच्चे तेल के आयात को कम करता है, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाता है, वायु प्रदूषण घटाने में मदद करता है, किसानों की आय बढ़ाता है और विदेशी मुद्रा की बचत करता है।”केंद्रीय मंत्री ने ई20 को व्यापक रूप से परीक्षण किया गया, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य और पूरी तरह सुरक्षित ईंधन बताया। उन्होंने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने देश के ‘अन्नदाता’ किसानों को ‘ऊर्जादाता’ बनाने का काम किया है, क्योंकि इससे किसानों को आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी। ऐसे में अब इसके तेजी से विस्तार का विरोध राजनीतिक कारणों से प्रेरित प्रतीत होता है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, यह कार्यक्रम न केवल भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करता है, बल्कि देश को भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिमों के प्रति भी अधिक मजबूत बनाता है। -
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक विरासत संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। ऑस्ट्रेलिया तमिलनाडु की तीन महत्वपूर्ण प्राचीन धरोहरों — भद्रकाली का त्रिशूल, पवित्र नंदी की पाषाण प्रतिमा और भगवान कार्तिकेय (षण्मुख) की छह मुख वाली पत्थर की प्रतिमा — को भारत को स्वेच्छा से लौटाने जा रहा है। यह घोषणा मेलबर्न में चल रहे तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की बैठक के बाद की गई।
सांस्कृतिक विरासत का आदान-प्रदानये तीनों कलाकृतियां तमिलनाडु की मूल हैं और वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया की विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के संग्रह में सुरक्षित हैं। निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें भारत वापस भेज दिया जाएगा। दोनों प्रधानमंत्रियों ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के सम्मान को द्विपक्षीय संबंधों का मजबूत आधार बताया। इस फैसले को आपसी विश्वास और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक करार दिया गया है।शिखर सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियांप्रधानमंत्री मोदी और अल्बानीज़ के बीच हुई एकांत वार्ता और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में दोनों देशों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने पर संतोष व्यक्त किया।बैठक में निम्नलिखित क्षेत्रों पर जोर दिया गया:– व्यापार एवं निवेश– रक्षा एवं सुरक्षा– महत्वपूर्ण खनिज– साइबर सुरक्षा– उभरती प्रौद्योगिकियां– स्वच्छ ऊर्जा और असैन्य परमाणु ऊर्जा– शिक्षा एवं कौशल विकासदोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, CEO फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप के सकारात्मक परिणामों का स्वागत किया। शिखर सम्मेलन के दौरान समुद्री सुरक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक संपदाओं की वापसी समेत कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।हिंद-प्रशांत पर साझा दृष्टिवार्ता के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्वतंत्र, खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई और क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया सरकार और पीएम अल्बानीज़ द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। यह फैसला भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में एक नया और यादगार अध्याय जोड़ने वाला माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। ऑस्ट्रेलिया के ‘फर्स्ट नेशंस’ (आदिवासी) समुदाय के पूर्वजों के अवशेष भारत से वापस लौटाए जाएंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया भी भारत की कई महत्वपूर्ण कलात्मक और ऐतिहासिक वस्तुएं स्वेच्छा से भारत को सौंपेगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने गुरुवार को इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक समझौते की घोषणा की।
मुख्य बातें:– चेन्नई के गवर्नमेंट म्यूजियम में संरक्षित ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस समुदाय के एक पूर्वज के अवशेष भारत सरकार स्वेच्छा से और बिना किसी शर्त के ऑस्ट्रेलिया को लौटा रही है।– ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में रखी भारत की कई कलात्मक एवं ऐतिहासिक वस्तुएं भारत को वापस लौटाई जाएंगी।ऑस्ट्रेलियाई पीएमओ ने इस विकास को “ऐतिहासिक न्याय और मेल-मिलाप की दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया।दोनों देशों की प्रतिक्रियाएंप्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस निर्णय की सराहना की और कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास लोगों को जोड़ता है तथा सांस्कृतिक सहयोग इन संबंधों को और गहरा बना रहा है। ऑस्ट्रेलिया के कला मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि यह आदान-प्रदान दोनों देशों के साझा मूल्यों और आपसी सम्मान का प्रतीक है। स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई मामलों की मंत्री मलांडिरी मैक्कार्थी ने इसे “अतीत की गलतियों को सुधारने” की दिशा में बड़ा कदम बताया और भारत के सहयोग की प्रशंसा की।दोनों पक्षों का बयानऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि फर्स्ट नेशंस पूर्वजों की वापसी उनके समुदायों के लिए अत्यंत सम्मानजनक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। साथ ही, भारत की सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी नैतिक संग्रह और संग्रहालय प्रबंधन के उच्चतम मानकों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अल्बानीज़ की मौजूदगी में हो रहे तीसरे ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक लीडर्स समिट के दौरान हुआ है, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे रहा है। -
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन क्षेत्रों में हुए बड़े ऐलानों को लेकर एक बयान जारी किया। दोनों ने ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसीआईटीआई) साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इस पहल के माध्यम से कनाडा के साथ मिलकर महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वास पर आधारित साझेदारी के साथ भविष्य की तकनीकों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने गगनयान मिशन में सहयोग को दोनों देशों के मजबूत अंतरिक्ष संबंधों का प्रतीक बताया।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों ने एक अहम कदम उठाया है। ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप समूह में भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र गगनयान कार्यक्रम के शुरुआती चार प्रमुख मिशनों की निगरानी और ट्रैकिंग में सहायता करेगा। इससे भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग मिलेगा।शिक्षा और कौशल विकास को भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताते हुए, दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। वर्तमान में, भारत, ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। पिछले वर्ष, 1.40 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में अध्ययन किया।जिसे लेकर ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने कहा कि शिक्षा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सबसे मजबूत पुल है। उन्होंने कहा कि अब केवल भारतीय छात्र ही ऑस्ट्रेलिया नहीं आ रहे, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय वहीं, भारत में विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। पीएम अल्बनीज ने फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को भारत में अपना परिसर स्थापित करने की मंजूरी मिलने का स्वागत किया। इसके साथ ही भारत में परिसर खोलने वाले ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। इससे भारतीय छात्रों को अपने देश में ही विश्वस्तरीय ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, वहीं शोध, नवाचार और दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा सामाजिक संबंध भी और मजबूत होंगे।व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में भी नई पहल की गई है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के टीएएफई और भारत के बीच खनन तथा माइनिंग उपकरण, प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग स्थापित करने पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को आधुनिक औद्योगिक कौशल से लैस करना है। इस पर विज्ञान मंत्री टिम एयर्स ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के दौर में भारत जैसे समान विचार वाले साझेदारों के साथ विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों की औद्योगिक क्षमता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। दोनों पक्षों ने मैत्री ग्रांट्स कार्यक्रम की भी सराहना की, जिसके माध्यम से आर्थिक, सांस्कृतिक और शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2026 में सेंटर फॉर ऑस्ट्रेलिया-इंडिया रिलेशंस के जरिए 41 परियोजनाओं को 1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (10 मिलियन डॉलर) की वित्तीय सहायता दी जाएगी। - नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को ऊर्जा सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम का शांति उद्देश्यों के लिए भारत में आयात करने का रास्ता खुल गया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह अहम समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूत करेगा और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और गहरा करेगा।एनुअल लीडर्स समिट में ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज के साथ इस समझौते का ऐलान करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश ने न्यूक्लियर क्षेत्र में एक अहम समझौते को पूरा किया है। पीएम मोदी ने कहा, “आज हमने न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में एक अहम समझौता किया है। इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का रास्ता खुलेगा और हमारे स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को नई मजबूती मिलेगी।”संयुक्त बयान के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौता (2015)’ के तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के निर्यात के लिए जरूरी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। यूरेनियम का निर्यात सिर्फ शांतिपूर्ण कामों के लिए होगा और यह इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा नियमों के दायरे में होगा।इसके अलावा, दोनों देशों ने पश्चिम एशिया के हालात और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन व कमोडिटी की कीमतों पर इसके असर को लेकर चिंता जताई। साथ ही, उन्होंने खुले बाजार और नियमों पर आधारित व्यापार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) आपूर्ति करने में ऑस्ट्रेलिया की अहम भूमिका और ऑस्ट्रेलिया को लिक्विड फ्यूल व डाउनस्ट्रीम पेट्रोलियम प्रोडक्ट सप्लाई करने में भारत की अहम भूमिका को मानते हुए, दोनों पक्षों ने एनर्जी की सप्लाई को बिना रुकावट जारी रखने और दोनों देशों के बीच एनर्जी व्यापार व निवेश को बढ़ाने का संकल्प लिया।इसके अलावा, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करके, ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव की गति बढ़ाकर, रिन्यूएबल एनर्जी और कम-कार्बन वाले ईंधन को बढ़ावा देकर और पूरी एनर्जी वैल्यू चेन में ज्यादा निवेश को प्रोत्साहित करके एनर्जी सप्लाई चेन को और मजबूत करने का संकल्प लिया। व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर जोर देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया, जीवंत लोकतंत्र और महत्वपूर्ण इंडो-पैसिफिक साझेदार होने के नाते, एक जैसी सोच और गहरे आपसी भरोसे को साझा करते हैं।
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नयी दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट का एक महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण मंगलवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर में हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) ड्रॉप जोन में किया गया। इसरो ने बुधवार को एक बयान में कहा, ''इस परीक्षण का मकसद पहले मानवरहित गगनयान जी1 मिशन के दौरान, ज़्यादा से ज़्यादा संभावित भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट की मज़बूती और डिज़ाइन को परखना था।'' परीक्षण के दौरान एक मुख्य पैराशूट और 'डमी' भार से युक्त एक सिम्युलेटेड असेंबली को भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया। अलग होने पर, एक ड्रोग पैराशूट खोला गया। इस तरह के पैराशूट क्रू मॉड्यूल को स्थिर करने और उसकी गति को काफी कम करने के लिए जाने जाते हैं। इसके बाद, मुख्य पैराशूट खोला गया, जिससे पेलोड की गति धीमी होकर सुरक्षित टर्मिनल गति पर आ गई। इसरो ने कहा, ''गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण मुख्य पैराशूट प्रणाली के प्रमाणीकरण के उद्देश्य से आयोजित एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप परीक्षण (आईमैट) शृंखला का यह पांचवां परीक्षण था। आईमैट-05 के सफल परीक्षण से यह विश्वास बढ़ा है कि गगनयान के पहले मानव रहित मिशन (जी-1) में मुख्य पैराशूट प्रणाली प्रभावी ढंग से काम करेगी।'' गगनयान के क्रू मॉड्यूल में चार अलग-अलग तरह के 10 पैराशूट लगे हैं।
इस प्रणाली में दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट होते हैं, जो नीचे उतर रहे यान से एपेक्स कवर को अलग करते हैं। यह एपेक्स कवर पुनः प्रवेश के दौरान उत्पन्न अत्यधिक गर्मी से पैराशूट कंपार्टमेंट की सुरक्षा करता है। इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट और तीन पायलट पैराशूट होते हैं, जो स्वतंत्र रूप से तीन मुख्य पैराशूट को बाहर निकालने और तैनात करने का कार्य करते हैं। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना, 'इस्लामोफोबिया का विमर्श' फैलाने वाले विपक्ष के लिए "जोरदार तमाचा" है। पार्टी ने कहा कि यह हालिया सम्मान मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीति की मजबूत पुष्टि है।
'इस्लामोफोबिया' एक ऐसी विचारधारा है, जो इस्लाम धर्म और मुस्लिम समुदाय के प्रति अत्यधिक भय, पूर्वाग्रह, घृणा या भेदभाव को दर्शाती है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह हालिया पहचान मोदी के नेतृत्व में बढ़ते वैश्विक भरोसे और विश्व मंच पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाती है। उन्होंने एक वीडियो बयान में कहा, "आज का दिन मोदी के आलोचकों, कूटनीति पर शक करने वालों और इस्लाम-विरोधी नफरत फैलाने वालों के लिए मुश्किल भरा है।" सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन आरोपों को भी गलत साबित करता है कि मोदी और उनकी सरकार "मुस्लिम-विरोधी" है। उन्होंने कहा, "लेकिन उन्हें मिले इस राष्ट्रीय नागरिक सम्मान का एक और अहम पहलू है। यह सम्मान इंडोनेशिया ने दिया है, जहां सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी है।" पूनावाला ने कहा, "और यह पहला मौका नहीं है जब उन्हें किसी मुस्लिम देश से सम्मान मिला हो। सऊदी अरब, फलस्तीन, मालदीव, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मिस्र और ओमान - ये सभी मुस्लिम देश - प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दे चुके हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम-बहुल देशों द्वारा दिए गए सम्मान विपक्ष के 'इस्लामोफोबिया विमर्श' की पोल खोलते हैं। उन्होंने कहा, '' इस्लामोफोबिया का विमर्श पूरी तरह ध्वस्त हो गया। क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार मुस्लिम-विरोधी हैं? और इसके बावजूद, ये सरकारें उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान दे रही हैं? ज़ाहिर है, ऐसा नहीं है। पूनावाला ने कहा, "तो आज, जो लोग हमारी कूटनीति पर शक कर रहे थे और जो लोग इस्लामफोबिया के विमर्श को बढ़ावा दे रहे थे, उन्हें प्रधानमंत्री मोदी को मिले इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से करारा तमाचा लगा है।" भाजपा नेता ने दावा किया कि मोदी को 30 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय नागरिक सम्मान मिले हैं, जो उनसे पहले के सभी प्रधानमंत्रियों को मिले सम्मानों के कुल योग से भी ज़्यादा हैं। उन्होंने कहा, "उन्हें ऐसे 30 से ज्यादा नागरिक सम्मान मिले हैं। अगर आप बाकी सभी प्रधानमंत्रियों – नेहरू जी, इंदिरा जी, राजीव जी, मनमोहन सिंह जी और अन्य – को एक साथ रखें, तो भी उनकी कुल संख्या इसके आधे के बराबर भी नहीं होगी। यह अपने आप में इस बात का सबूत है कि दुनिया प्रधानमंत्री मोदी पर कितना भरोसा करती है।" -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि वे ऐसी एक भी कार का नाम बताएं जिसमें इस ईंधन के कारण कोई समस्या आई हो। ई20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथनॉल-मिश्रित ईंधन बिक्री की अनिवार्यता को लेकर आलोचना और गाड़ियों की माइलेज कम होने की शिकायतों के बीच उन्होंने यह बात कही। गडकरी ने यहां 'विकसित भारत' सम्मेलन को संबोधित करते कहा कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल आदि) पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है। इसके कारण ईंधन आयात पर सालाना 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए भी खतरा है, इसलिए देश की प्रगति के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, ''ई20 पेट्रोल के कारण किसी कार में समस्या आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। क्या देश में कोई ऐसी कार है जिसमें ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई समस्या आई हो? बस एक का नाम बताइए।'' गडकरी ने कहा, ''...ज़्यादा एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही हैं। पैसा देकर यह अभियान चलाया जा रहा है।'' भारत ने पहले ही 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। एथनॉल गन्ना, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बनता है। भारत में वाहन मालिकों के पास पेट्रोल पंप पर अलग-अलग तरह के ईंधन चुनने का विकल्प नहीं होता, जबकि ब्राजील में ग्राहकों को अलग-अलग कीमतों वाले ईंधन चुनने का विकल्प मिलता है। ब्राजील के कानून के तहत, अधिक एथनॉल वाले मिश्रण के लिए कीमत में छूट देनी होती है। इस आरोप पर कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथनॉल बनाने के काम में शामिल हैं और इसीलिए वह अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल को लाने पर जोर दे रहे हैं, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें हैं और उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल की अधिकता है इसलिए मक्के से एथनॉल बनाने के कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। गडकरी ने कहा, ''जब हमने मक्के से एथनॉल बनाने का फैसला किया, तो मक्के की बाजार कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी और न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इस फैसले के बाद, मक्के की कीमत बढ़कर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।'' उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये आए।''सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अधिक एथनॉल मिश्रित और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने के लिए वाहन उत्सर्जन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है ताकि सभी तरह के वाहनों के लिए 'फ्लेक्स-फ्यूल' और पूरी तरह से जैव ईंधन से चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ हो सके। केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में प्रस्तावित बदलावों का मकसद ई85 (पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत एथनॉल) और ई100 (जिससे वाहन लगभग शुद्ध एथनॉल पर चल सकेंगे) जैसे ईंधनों के साथ-साथ बी100 बायो-डीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रण के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.
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नयी दिल्ली. भारत 11-12 जुलाई को नागपुर में तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। भारत के पास ब्रिक्स की अध्यक्षता है। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के परिवहन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसमें परिवहन क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं, बुनियादी ढांचे में स्थिरता और बेहतर परिवहन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बयान के अनुसार, यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 'मजबूत, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण' (ब्रिक्स) विषय पर आयोजित की जा रही है।
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नयी दिल्ली. भारत चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में एक पसंदीदा साझेदार के तौर पर उभर रहा है, जो सहयोगी देशों के साथ अपनी प्रौद्योगिकी, संस्थागत अनुभव और शानदार पद्धतियां साझा कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह बात कही। सूत्रों ने बताया कि भारत और इंडोनेशिया चुनाव प्रबंधन और विशिष्ट रूप से निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के निर्यात को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े लोकतंत्र इंडोनेशिया की आबादी लगभग 28.8 करोड़ है। उसने अपनी चुनाव प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए चुनाव प्रौद्योगिकी, प्रबंधन विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग के वास्ते भारत से संपर्क किया है। एक अधिकारी ने कहा कि जब दुनियाभर के लोकतांत्रिक देश चुनाव से जुड़ी भरोसेमंद विशेषज्ञता की तलाश कर रहे हैं, तो भारत उनकी पहली पसंद बनकर उभरा है। उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर भारत से ईवीएम हासिल करने की इंडोनेशिया की इच्छा का जिक्र किया। अधिकारी के मुताबिक, भारत का चुनाव मॉडल भूटान, नेपाल और नामीबिया से लेकर इंडोनेशिया तक एक वैश्विक मानक बन गया है। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली, फिजी, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका समेत 28 देशों की चुनाव प्रबंधन संस्थाओं और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग समझौते किए हैं। अधिकारी के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच होने वाला समझौता चुनाव प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन विकास, क्षमता निर्माण और शानदार पद्धतियों के आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के अधिकारियों ने भारतीय ईवीएम की डिजाइन, चुनाव निगरानी प्रणाली, मतदाता जागरूकता पहलों और लोकतांत्रिक शासन संबंधी डिजिटल टूल के अध्ययन के लिए पहले ही एक-दूसरे के देश का दौरा किया है। अधिकारियों ने कहा कि आज भारत की विशेषज्ञता केवल चुनाव कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह दुनियाभर में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में भी मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ईवीएम ने अपनी विश्वसनीयता, सुरक्षा और इतने बड़े पैमाने पर चुनावों को कुशलतापूर्वक आयोजित करने की क्षमता के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल की है। अधिकारियों के मुताबिक, भूटान, भारत की तकनीकी मदद से अपनी विशिष्ट जरूरतों को पूरी करने के लिए निर्मित भारतीय ईवीएम को अपनाने वाला पहला देश था। उन्होंने बताया कि नेपाल को भी प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल के लिए विशिष्ट रूप से निर्मित ईवीएम और संस्थागत सहयोग प्रदान किया गया। अधिकारियों के अनुसार, नामीबिया में नयी दिल्ली ने पहली व्यावसायिक सफलता हासिल की, जहां आम चुनावों में भारत में बनी ईवीएम का इस्तेमाल किया गया और बाद में भारतीय वीवीपैट प्रणाली को भी अपनाया गया। अधिकारी ने बताया कि भारत का योगदान सिर्फ ईवीएम तक सीमित नहीं है, क्योंकि ईसीआई ने मेडागास्कर, म्यांमा, कंबोडिया, फिजी, भूटान, सिएरा लियोन और मंगोलिया जैसे देशों में चुनावों के लिए अमिट स्याही उपलब्ध कराई है, जिससे चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने में एक भरोसेमंद साथी के तौर पर देश की साख और मजबूत हुई है।
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नयी दिल्ली. रेल मंत्रालय ने देश भर के विभिन्न रेलवे जोन में संरक्षा को मजबूत करने और कार्य कुशलता को बेहतर बनाने के लिए 4,098 तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती को मंजूरी दी है। अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय ने 35 तकनीकी श्रेणियों में रिक्तियों को भरने का फैसला किया है। इनमें से कई पद संचालन संरक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं, जैसे कनिष्ठ अभियंता, डिपो सामग्री अधीक्षक और रसायन व धातुकर्म सहायक। हाल ही में मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को एक परिपत्र भेजा। इसमें कहा गया कि जोन की ओर से आतंरिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) के जरिए इंगित की गई रिक्तियों का आकलन किया गया है और इसी आकलन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। जोन की ओर से पहचानी गई सबसे अधिक रिक्तियां 'परमानेंट वे'(पटरी के रखरखाव) श्रेणी में 845 हैं, इसके बाद कार्यशाला में 470 और 'कैरेज एंड वैगन' में 450 रिक्तियां हैं। मंत्रालय ने रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बेंगलुरु के अध्यक्ष के साथ सलाह-मशविरा करके एक समय-सीमा तय की है, जिसके अनुसार नोडल आरआरबी 21 जुलाई, 2026 से केंद्रीयकृत रोजगार अधिसूचना (सीईएन) जारी करेंगे। इससे पहले, मंत्रालय की मंजूरी के बाद 6,565 तकनीकी पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी थी। इसमें सिग्नल तकनीशियन ग्रेड-1 के लिए 323 पद और तकनीशियन ग्रेड-3I के लिए 6,242 पद शामिल थे। रेलवे के कई कर्मचारी संघों ने संरक्षा से जुड़ी अहम श्रेणी में रिक्तियों को भरने के मंत्रालय के निर्णय पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि इससे कार्य कुशलता बेहतर होगी और मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ कम होगा।
- मुंबई/पुणे. महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे सहित कई हिस्सों में सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश से जनजीवन और यातायात व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। पुणे जिले में सोमवार को हुई भारी बारिश के कारण भूस्खलन और दीवार गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों सहित चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग बारिश से संबंधित अलग-अलग घटनाओं में बह गए। वहीं, 500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। मुंबई-पुणे क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण दोनों शहरों के बीच 94 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे सहित रेल और सड़क यातायात ठप हो गया। महानगर और उसके आसपास के इलाकों में हुई इस भारी बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं और भारी संख्या में पेड़ उखड़ गए। इसके साथ ही, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हाल ही में शुरू हुए 'मिसिंग लिंक' खंड पर भी वाहनों की रफ्तार थम गई।भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' बाइपास खंड के मुंबई की ओर जाने वाले मार्ग को 18 घंटे से अधिक समय तक बंद रहने के बाद सोमवार रात यातायात के लिए फिर से खोल दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। महाराष्ट्र राज्य पथ विकास निगम (एमएसआरडीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का सुरक्षा निरीक्षण पूरा होने के बाद रात 10 बजकर 10 मिनट पर यातायात बहाल कर दिया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी 'रेड अलर्ट' के बाद एहतियात के तौर पर सोमवार को मुंबई के सभी स्कूल और कॉलेज बंद रहे। महाराष्ट्र सरकार ने निजी प्रतिष्ठानों को भी सलाह दी है कि वे जहां तक संभव हो कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें। इसके साथ ही, गैर-आवश्यक सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों के लिए आधे दिन के अवकाश की घोषणा की गई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह आठ बजे से शाम छह बजे के बीच शहर में औसतन 28.2 मिलीमीटर (मिमी) बारिश हुई, जबकि पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों में क्रमशः 61.75 मिमी और 65.45 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन की वजह से अधिकारियों को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को बंद करना पड़ा और कुछ खंडों पर रेलवे परिचालन को निलंबित करना पड़ा। सड़क और रेल यातायात बाधित होने के बाद जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर जलभराव वाले इलाकों से 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और 270 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया।पुणे जिला प्रशासन के अनुसार, जिले के 27 राजस्व क्षेत्रों में 65 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिसमें मावल में सबसे अधिक 237.3 मिमी बारिश हुई। अधिकारियों ने बताया कि मावल के तलेगांव इलाके में दमकल विभाग ने एक कंपनी की बस में फंसे 30 कर्मचारियों को बचाया, जबकि एहतियात के तौर पर ताजे गांव के 250 निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। इसके अलावा, हवेली तहसील के भवादी गांव से पांच परिवारों के करीब दो दर्जन लोगों को निकाला गया।अधिकारियों ने बताया कि पुणे जिले की मावल तहसील के पाटन गांव में भूस्खलन के कारण एक घर के मलबे में दब जाने से दो लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पुणे की खेड़ तहसील में बाढ़ की चपेट में आने से एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि पिछले तीन से चार दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश का 'रेड' अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि ठाणे शहर में उखड़े हुए एक विशाल पेड़ को हटाने के दौरान एक दमकलकर्मी घायल हो गया, जबकि अलग-अलग घटनाओं में एक बड़ा होर्डिंग और दो दीवारें गिर गईं।मुंबई में सोमवार को हवा की रफ्तार करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जो मंगलवार के अनुमानित 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे से काफी अधिक थी। तेज हवाओं और बारिश के कारण शहर में पेड़ और उनकी शाखाएं गिरने की 291 घटनाएं दर्ज की गईं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मुंबई और पड़ोसी ठाणे तथा रायगढ़ जिलों के लिए 'रेड' अलर्ट जारी किया है, जिसमें तेज हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान किया गया है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा गया है। अधिकारियों ने बताया कि कर्जत-लोनावला भोर घाट खंड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद सोमवार तड़के व्यस्त मुंबई-पुणे मार्ग पर ट्रेन सेवाएं स्थगित कर दी गईं। उन्होंने बताया कि मध्य रेलवे ने रायगढ़ जिले में कर्जत और खोपोली के बीच भी लोकल ट्रेन सेवाओं को परिचालन निलंबित कर दिया, क्योंकि भारी बारिश के कारण लौजी और दोलावली स्टेशनों के बीच पटरियों के नीचे की गिट्टी बह गई थी। पालघर जिले के कुछ हिस्सों में सुबह नौ बजे तक महज दो घंटे में करीब 300 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे स्थिति और खराब हो गई। अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश और गंभीर जलभराव ने पश्चिम रेलवे (डब्ल्यूआर) के परिचालन को भी ठप कर दिया, जिससे मुंबई और दक्षिण गुजरात के विभिन्न स्टेशनों पर 20 से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें फंसी रहीं। पश्चिम रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन के कारण 40 से अधिक सेवाएं प्रभावित हुईं, जिनमें से कम से कम आठ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया, 10 को रद्द कर दिया गया और कई अन्य के मार्ग बदल दिए गए या उनकी यात्रा गंतव्य से पहले ही समाप्त कर दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महानगर में खराब मौसम के चलते सोमवार को दोपहर 3:30 बजे तक मुंबई हवाई अड्डे पर आने वाली पांच उड़ानों का मार्ग परिवर्तित कर उन्हें अन्य हवाई अड्डों पर भेजा गया। देश की वित्तीय राजधानी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।भारी बारिश के मद्देनजर राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई, जबकि मुंबई उच्च न्यायालय ने आश्वासन दिया कि यदि वकील अदालत पहुंचने में असमर्थ रहते हैं, तो कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और विधानसभा में भी बयान दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि भारी बारिश का यह संकट आठ जुलाई तक जारी रह सकता है, जिसके कारण पूरे सरकारी तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने मंगलवार को नासिक के कुछ हिस्सों में बादल फटने जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई। फडणवीस ने कहा कि अत्यधिक बारिश एक 'प्राकृतिक आपदा' जैसी स्थिति है, जो मानवीय नियंत्रण से बाहर है, लेकिन जनता के सहयोग से ऐसी आपातकालीन स्थितियों से अधिक प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा, "पूरा आपदा प्रबंधन तंत्र, नगर निगम, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें पूरी तरह मुस्तैद (हाई अलर्ट पर) हैं।" मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताते हुए कहा कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर इस तरह का भीषण भूस्खलन पहले कभी नहीं हुआ था; वहां करीब 100 टन मलबा सड़क पर आ गिरा।उन्होंने कहा कि इसमें से 70 टन मलबा हटाकर पुणे की ओर जाने वाली तीन लेन खोल दी गई हैं और मुंबई की ओर का रास्ता साफ किया जा रहा है। इस बीच, विपक्षी विधायकों ने मुंबई में विधान भवन की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया और "इन्फ्रा-मैन लापता हैं" के नारे लगाते हुए सरकार पर बुनियादी ढांचे की नाकामी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में बुनियादी ढांचे की खस्ताहाल व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कनेक्टिंग लिंक पर कोई संरचनात्मक विफलता नहीं हुई है, बल्कि मलबा आसपास की पहाड़ियों के खिसकने से गिरा है। इस बीच, कांग्रेस प्रवक्ता अनंत गाडगिल ने भी मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे 'मिसिंग लिंक' परियोजना की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने परियोजना के निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की किसी स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराने की मांग की।--
- भुवनेश्वर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-भुवनेश्वर ने सोमवार को कहा कि एक हालिया सर्वेक्षण में उसे देश के शीर्ष 10 चिकित्सा महाविद्यालयों में स्थान मिला है। संस्थान ने यह भी कहा कि देश के "सर्वाधिक सुधार करने वाले पांच चिकित्सा महाविद्यालयों" की श्रेणी में उसे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। एम्स भुवनेश्वर ने एक बयान में कहा, ''यह उपलब्धि शैक्षणिक उत्कृष्टता, अत्याधुनिक अनुसंधान और मरीजों की संवेदनशील देखभाल के प्रति संस्थान की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।'' बयान के अनुसार, सर्वेक्षण में संस्थानों का मूल्यांकन प्रवेश गुणवत्ता एवं प्रशासन, शैक्षणिक उत्कृष्टता, बुनियादी ढांचा एवं परिसर जीवन, व्यक्तित्व एवं नेतृत्व विकास तथा प्लेसमेंट एवं करियर प्रगति सहित पांच प्रमुख मानकों पर किया गया। राज्य के इस प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान ने बताया कि उसे 'इंडिया टुडे-एमडीआरए बेस्ट मेडिकल कॉलेज सर्वे 2026' में देश के शीर्ष 10 चिकित्सा महाविद्यालयों में स्थान मिला है।एम्स-भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष विश्वास ने कहा, ''यह सम्मान उत्कृष्टता की दिशा में हमारे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। एम्स-भुवनेश्वर स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में विश्वास, नवाचार और ईमानदारी का प्रतीक बनकर उभरा है। राष्ट्रीय रैंकिंग में हमारी लगातार प्रगति भावी चिकित्सकों को तैयार करने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रति हमारी समग्र सोच को दर्शाती है।'' उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में 25वें स्थान पर रहा संस्थान वर्ष 2026 में देश के 10 सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा महाविद्यालयों में शामिल हो गया है।
- नागपुर. भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) नागपुर अगले पांच साल में अपनी विस्तार योजना पर काम कर रहा है और दुनिया के शीर्ष 100 बिजनेस स्कूलों में स्थान बनाने का लक्ष्य रखता है। संस्थान के निदेशक भीमराय मेट्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। डॉ मेट्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने आईआईएम नागपुर के पूर्ण विकसित परिसर की स्थापना के लिए पुणे जिले के मोशी क्षेत्र में 70 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। यह जमीन नाममात्र के एक रुपये के पट्टे पर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पुणे परिसर संस्थान के विस्तार का पहला चरण है और आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर इसकी मौजूदगी बढ़ाने की योजना है। उन्होंने बताया कि यह परिसर विकसित होने के बाद आईआईएम नागपुर देश का ऐसा संस्थान होगा जिसके पास दो पूर्ण विकसित परिसर होंगे। संस्थान गोवा में विस्तार की संभावना भी देख रहा है और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने पर काम कर रहा है। आईआईएम नागपुर वर्तमान में फ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ लिले के साथ शैक्षणिक सहयोग कर रहा है और अगले पांच वर्षों में 20 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी का लक्ष्य है।
- नयी दिल्ली. भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के पाठ की कानूनी समीक्षा अगले 15-20 दिन में पूरा होने की उम्मीद है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। कानूनी समीक्षा के बाद समझौते पर इस वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर होने और अगले वर्ष इसके लागू होने की संभावना है। गोयल ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि वह 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स जाएंगे, जहां व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की बैठक में भाग लेंगे और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष तथा विभिन्न क्षेत्रों के अपने समकक्षों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही अपने उत्पादों, वस्तुओं और सेवाओं के प्रचार के लिए यूरोप में कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भेजना शुरू कर चुका है, ताकि समझौते का अधिकतम लाभ उठाया जा सके। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि इस एफटीए को 2027 की पहली तिमाही तक लागू करने का प्रयास है ताकि 27 विकसित देशों के बाजार भारतीय कारोबार के लिए खुलें और निर्यात को बढ़ावा मिले। गोयल ने बताया कि भारत का चमड़ा और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात 4-4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और एफटीए से विकसित देशों में इस क्षेत्र के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। उन्होंने उद्योग से अगले 5-6 साल में 15 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखने को कहा।
- अयोध्या. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन की जांच जारी रहने के बीच सोमवार को यहां एक बैठक के दौरान अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिये। ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नामित किया गया है। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हमने न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रदीप कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे (श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष) की तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की। यह समिति उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेगी और हमें चुनने के लिए तीन नाम देगी।''गिरि ने मंदिर की दान पेटियों से कथित चोरी को ट्रस्ट के लिए ''गहरे दर्द और शर्मिंदगी'' का विषय बताते हुए कहा कि इस विवाद ने सदियों के लंबे संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद बने मंदिर पर ग्रहण लगा दिया है। गिरि ने कहा कि चंपत राय ने स्वेच्छा से पद छोड़ दिया है क्योंकि उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता तब तक महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट के पास इस मामले में कोई विवेकाधिकार नहीं है क्योंकि वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के तहत एक बार इस्तीफा देने के बाद यह प्रभावी हो जाता है, जिससे ट्रस्ट के पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। के. परासरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस बैठक में शामिल हुए।गिरि ने इन आरोपों को खारिज किया कि नकदी के अलावा अन्य चढ़ावा भी गायब हो गया है।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट मंदिर को दान की गई सभी वस्तुओं की जानकारी वाला एक रजिस्टर रखता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी प्रत्येक वस्तु सुरक्षित है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट सत्यापन चाहने वाले किसी भी व्यक्ति को रिकॉर्ड और दान की गई वस्तुएं दिखाने के लिए तैयार है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरिम महासचिव बनाये गये कृष्ण मोहन अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे जो पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।बैठक के बाद जारी एक बयान में ट्रस्ट ने कहा कि वह न केवल विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिशों को लागू करेगा, बल्कि मंदिर के प्रबंधन और संचालन प्रणालियों में कमजोरियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से स्वतंत्र सलाह भी लेगा। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य एक अधिक मजबूत, कुशल और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचा स्थापित करना था जो मंदिर प्रबंधन के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सके। ट्रस्ट ने कहा कि उसने कथित अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय एसआईटी जांच की मांग की थी। इसमें कहा गया है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में आठ लोगों की पहचान की गई, जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत पाए गए, जिसके कारण पुलिस मामले दर्ज किए गए और गिरफ्तारियां की गईं। ट्रस्ट ने राय और मिश्रा के इस्तीफे के बाद विशेष रूप से आमंत्रित सदस्यों की सूची से गोपाल नागरकट्टे को हटाने की भी घोषणा की, जबकि यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना अनुचित होगा। ट्रस्ट ने कहा कि भक्तों द्वारा दान की गई चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार के टकसाल में पिघलाया गया था, जिसमें रिकॉर्ड, तस्वीरें, वजन विवरण और शुद्धता प्रमाण पत्र संरक्षित किए गए थे। इसने व्यक्तियों, संगठनों और पत्रकारों से अपील की कि जिनके पास मंदिर से जुड़े किसी भी अनियमितता के सबूत हैं, वे इसे एसआईटी या उचित जांच एजेंसी को सौंपें। ट्रस्टियों ने यह भी कहा कि विवाद के बावजूद राम मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और उन्होंने इसे कथित गबन के बारे में गलत सूचना बताया है।नवनियुक्त अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मंदिर की प्रबंधन प्रणाली में खामियों को दूर करना और इसकी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने मीडिया से केवल सत्यापित तथ्यों को रिपोर्ट करने की अपील करते हुए कहा कि जब जांच चल रही हो तो जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सटीक जानकारी आवश्यक है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट चाहता है कि बड़े साजिशकर्ताओं समेत कथित चोरी में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए और उन्हें दंडित किया जाए। उन्होंने इस विवाद का इस्तेमाल मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने और भक्तों के बीच विभाजन पैदा करने के प्रयासों के प्रति आगाह किया। उन्होंने भक्तों से "झूठे प्रचार" से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा कि अगर किसी को दान की गई वस्तुओं के बारे में संदेह है तो वह सत्यापन के लिए ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क कर सकता है। आज की बैठक शाम में समाप्त हुई, जिसके बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कार्यक्रम स्थल से चले गए। उन्होंने कहा कि कृष्ण मोहन, जिन्हें अंतरिम महासचिव के रूप में अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे और पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेंगे। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। अंतरिम महासचिव मोहन ने बैठक के बाद कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसे उचित सजा मिलेगी।उन्होंने कहा कि सभी ट्रस्टी लोगों के विश्वास को बहाल करने और राम मंदिर ट्रस्ट के उद्देश्यों के अनुसार भक्तों द्वारा किए जाने वाले चढ़ावे का प्रबंधन करने के लिए काम करेंगे। यह बैठक राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के अंदर अपराह्न करीब सवा तीन बजे शुरू हुई जिसमें ट्रस्ट के नौ स्थायी सदस्यों में से सात ने भाग लिया। यह बैठक शाम करीब साढ़े छह बजे खत्म हुई। मंदिर के चढ़ावे के गबन के आरोपों के बाद राय और मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे पर विचार-विमर्श करने, मामले की एसआईटी जांच की प्रगति की समीक्षा करने और इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर ट्रस्ट में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। बैठक से पहले, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कहा था कि वह रामलला मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से ''बहुत दुखी'' हैं। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि कथित अपराध से जुड़े सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।राम मंदिर परिसर के आसपास व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, संपर्क मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। मीडियाकर्मियों एवं अन्य लोगों के निजी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बैठक स्थल को मणिराम दास छावनी से मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने पिछले महीने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं ने हटाए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं, जिसमें कुछ आरोपी मंदिर परिसर से बाहर जाते समय कथित तौर पर नोटों को छिपाते हुए नजर आ रहे हैं।
- महराजगंज. उत्तर प्रदेश के महराजगंज की एक अदालत ने नेपाल से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में सोमवार को 62 वर्षीय एक चीनी नागरिक को 11 महीने के कारावास की सजा सुनाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 10 अगस्त, 2025 का है, जब भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली में पुलिस ने नेपाल से भारत में प्रवेश कर रहे एक संदिग्ध विदेशी नागरिक को पकड़ा था।पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम झांग यंग बताया और पुलिस को कहा कि वह नेपाल गया था तथा वहां से बिना वैध वीजा के भारत में प्रवेश कर गया। पुलिस ने उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने चीन के निंग्शिया प्रांत के शानशिया निवासी झांग यंग को दोषी करार दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा ने सोमवार को दोषी को 11 महीने के कारावास की सजा सुनाई और उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ ने बताया कि जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
- जम्मू. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को कहा कि ''कश्मीर घाटी में भी कमल खिलेगा'' और वह दिन दूर नहीं जब जम्मू कश्मीर में भाजपा अपने दम पर सरकार बनाएगी। दो दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचे नवीन ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकारी योजनाओं का लाभ हर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''वह दिन दूर नहीं जब भारतीय जनता पार्टी जम्मू कश्मीर में अपनी सरकार बनाएगी।''नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाए जाने से क्षेत्र के लोगों को वास्तविक आज़ादी मिली, जिससे श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना साकार हुआ। उन्होंने कांग्रेस पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ''लोग अक्सर पूछते हैं कि जम्मू कश्मीर में क्या बदला है। मेरा जवाब है कि बहुत कुछ बदला है। केवल वही लोग आज के भारत में आए इस परिवर्तन को नहीं देख पा रहे हैं, जिन्होंने खुले मन से देखने की क्षमता खो दी है।'' इस बीच, कांग्रेस की जम्मू कश्मीर इकाई ने नितिन नवीन से सवाल किया कि वह लोगों को यह बताएं कि मोदी सरकार की नाक के नीचे राम मंदिर में कथित ''लूट'' कैसे हो गई। कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष से जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा की गई ''देरी और विश्वासघात'' का स्पष्टीकरण देने को भी कहा।
- नयी दिल्ली. सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों सहित उन्नत हथियारों तथा अत्याधुनिक सेंसर प्रणाली से लैस स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' को 11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (डब्ल्यूडीबी) द्वारा डिजाइन किए गए और मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में निर्मित 'महेंद्रगिरि' में वायु रोधी, सतह रोधी और पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि यह समुद्री सुरक्षा, शक्ति प्रदर्शन, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर), खोज एवं बचाव तथा समुद्र में लंबे समय तक तैनाती जैसे अभियानों के लिए भी उपयुक्त है।अधिकारी ने कहा, ''यह युद्धपोत स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियारों एवं सेंसरों से लैस है। इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता, व्यापक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली तथा एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली शामिल है।'' उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक स्टील्थ विशेषताओं, बेहतर मजबूती, कम रडार पहचान क्षमता और उच्च स्तर की स्वचालन तकनीक से युक्त इस युद्धपोत में आधुनिक 'कम्बाइंड डीजल ऑर गैस' (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली लगी है, जिससे यह समुद्री अभियानों की पूरी श्रृंखला में उच्च गति और लंबी परिचालन क्षमता प्रदान करता है। नौसेना ने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित 'महेंद्रगिरि' केंद्र सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का उत्कृष्ट उदाहरण है।



























