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नई दिल्ली। देश का पहला एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट ‘अर्णाला’ बुधवार को भारत के समुद्री बेड़े में शामिल किया गया। महाराष्ट्र के वसई के ऐतिहासिक ‘अर्णाला’ किले के नाम पर बना यह युद्धपोत भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को दर्शाता है। यह पोत भारत की नौसैनिक क्षमताओं में बड़ा बदलाव लाने के साथ ही तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर समुद्री शक्ति के रूप में उभरेगा।
सीडीएस अनिल चौहान की अध्यक्षता में जहाज को नौसेना के बेड़े में शामिल कियाविशाखापट्टनम के नौसेना डॉकयार्ड में आज चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान की अध्यक्षता में कमीशनिंग समारोह में जहाज को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित 16 पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जल पोत (एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट) में से यह पहला पोत है। इस युद्धपोत में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), एलएंडटी, महिंद्रा डिफेंस और एमईआईएल सहित प्रमुख भारतीय रक्षा फर्मों की उन्नत प्रणालियां शामिल हैं। इस परियोजना में 55 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) ने सहयोग दिया है।युद्धपोत निगरानी टीमों की देखरेख में निर्मित ‘अर्णाला’ को 08 मई को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। विभिन्न खतरों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे ‘अर्णाला’ किले की तरह इस जहाज को समुद्र में मजबूत उपस्थिति के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मजबूत निर्माण और उन्नत क्षमताएं सुनिश्चित करती हैं कि यह जहाज समुद्री क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करके उभरते खतरों से भारत के जल की रक्षा कर सकता है। नौसेना के अनुसार ‘अर्णाला’ जहाज को पानी के नीचे निगरानी रखने, तलाश और बचाव कार्यों और कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन (एलआईएमओ) के लिए तैयार किया गया है।एंटी-सबमरीन वारफेयर संचालन में सक्षम है ‘अर्णाला’यह जहाज तटीय जल में एंटी-सबमरीन वारफेयर संचालन में सक्षम है। साथ ही यह माइन बिछाने की उन्नत क्षमता से युक्त है। एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट पोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना की उथले पानी की पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता में बढ़ोतरी होगी। यह भारतीय नौसेना का 1490 टन से अधिक सकल भार वाला 77 मीटर लंबा डीजल इंजन-वाटर जेट से संचालित होने वाला सबसे बड़ा युद्धपोत है। जहाज का बख्तरबंद पतवार किले की स्थायी पत्थर की दीवारों को दर्शाता है, जबकि इसके अत्याधुनिक हथियार और सेंसर उन तोपों की जगह लेते हैं, जो कभी आक्रमणकारियों से बचाव करते थे।गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में निर्मित ये जहाज पुराने हो चुके अभय श्रेणी के कोरवेट की जगह लेंगे। 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ ये जहाज जहाज निर्माण और रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं। जहाज के शिखर के नीचे एक रिबन खूबसूरती से फहराया गया है, जिस पर गर्व से जहाज का आदर्श वाक्य ‘अर्णवे शौर्यम्’ (अर्नावे शौर्यम्) प्रदर्शित किया गया है, जिसका अर्थ है ‘महासागर में वीरता’। यह शिलालेख जहाज के अटूट साहस, दुर्जेय शक्ति और विशाल समुद्र पर प्रभुत्व को दर्शाता है।हिंद महासागर क्षेत्र में आत्मनिर्भर समुद्री शक्ति के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगीस्वदेशी जहाज निर्माण न केवल घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करता है, बल्कि विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को भी कम करता है। तटीय और उथले पानी वाले क्षेत्रों में इन जहाजों की प्राथमिक भूमिका दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें ट्रैक करना है। पानी के नीचे के खतरों को बेअसर करने के लिए इनमें हल्के टॉरपीडो, एएसडब्ल्यू रॉकेट, एंटी-टॉरपीडो डिकॉय और उन्नत माइन-लेइंग क्षमताओं सहित अत्याधुनिक हथियार सूट की सुविधा है। ये जहाज भारत के विशाल समुद्र तट और महत्वपूर्ण अपतटीय संपत्तियों को पनडुब्बी खतरों से निरंतर और प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेंगे, जिससे भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते भूमिगत खतरे का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 जून से 21 जून तक उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह देहरादून और नैनीताल में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगी। खास बात यह है कि इस दौरे के दौरान 20 जून को राष्ट्रपति मुर्मु का जन्मदिन भी है, जिसे वह उत्तराखंड में खास आयोजनों के साथ मनाएंगी। दौरे की शुरुआत 19 जून को होगी, जब राष्ट्रपति देहरादून स्थित राष्ट्रपति निकेतन में एक एम्फीथियेटर का उद्घाटन करेंगी। साथ ही वह स्टाफ क्वार्टर, अस्तबल और बैरकों का शिलान्यास भी करेंगी।
वहीं 20 जून को, अपने जन्मदिन के दिन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति निकेतन को आम जनता के लिए खोले जाने के समारोह में शामिल होंगी। इस अवसर पर वह आगंतुक सुविधा केंद्र, कैफेटेरिया और स्मारिका दुकान जैसी नई सार्वजनिक सुविधाओं का उद्घाटन करेंगी। साथ ही वह राष्ट्रपति तपोवन का उद्घाटन और राष्ट्रपति उद्यान का शिलान्यास करेंगी। यह जानकारी दी गई है कि राष्ट्रपति निकेतन और राष्ट्रपति तपोवन 24 जून 2025 से आम जनता के दर्शन के लिए खुले रहेंगे।इसी दिन, 20 जून को, राष्ट्रपति देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (NIEPVD) का दौरा भी करेंगी। वह यहां मॉडल स्कूल की विज्ञान प्रयोगशाला और एक प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी और दिव्यांग विद्यार्थियों से संवाद करेंगी। शाम को, राष्ट्रपति नैनीताल स्थित राजभवन के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष डाक टिकट भी जारी करेंगी।दौरे के अंतिम दिन 21 जून को, राष्ट्रपति मुर्मू अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य पुलिस लाइन मैदान, देहरादून में आयोजित सामूहिक योग प्रदर्शन में भाग लेंगी। यह दौरा उत्तराखंड के विकास और राष्ट्रपति संस्थानों को आम जनता से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी ने बुधवार को कहा कि सरकार ने सभी कानूनी, वाणिज्यिक, डिजिटल और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए भारतीय मानक समय (आईएसटी) के उपयोग को अनिवार्य बनाने का फैसला किया है। इस पहल से डिजिटल लेनदेन अधिक सुरक्षित होंगे, उपयोगिताओं में सटीक बिलिंग होगी, साइबर अपराध का जोखिम कम होगा और परिवहन और संचार में समय का समन्वय होगा।
वर्तमान में, कई प्रणालियां समय के विदेशी स्रोतों पर निर्भर हैं। भारतीय मानक समय (आईएसटी) को अनिवार्य बनाने के लिए, सरकार जल्द ही कानूनी माप विज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2025 को अधिसूचित करेगी।अंशधारकों की प्रतिक्रिया के लिए जनवरी, 2025 में नियमों का मसौदा जारी किया गया था। बुधवार को उपभोक्ता मामले विभाग ने यहां समय प्रसार पर एक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया। जोशी ने सीएसआईआर-एनपीएल और इसरो के सहयोग से विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही टाइम डिसेमिनेशन परियोजना के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि आगामी नियम सभी कानूनी, वाणिज्यिक, डिजिटल और प्रशासनिक गतिविधियों को आईएसटी के साथ समन्वयित करने को अनिवार्य करेंगे, ‘जब तक स्पष्ट रूप से अधिकृत न किया जाए, वैकल्पिक समय संदर्भों के उपयोग पर रोक लगाएंगे।’ जोशी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम नियमों को अधिसूचित कर रहे हैं। इसमें, अब हम एक राष्ट्र एक समय हैं… ये नियम बहुत जल्द ही अनिवार्य हो जाएंगे। सटीक तिथि बाद में तय की जाएगी।’ -
नई दिल्ली। एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) में शामिल सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी अब पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत मिलने वाले सेवानिवृत्ति एवं मृत्यु ग्रैच्युटी लाभ के लिए पात्र होंगे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को यह जानकारी दी। सरकारी कर्मचारियों के एक बड़े तबके की इस बहुप्रतीक्षित मांग के संदर्भ में कार्मिक राज्यमंत्री सिंह ने कहा कि यह कदम सरकारी कर्मचारियों की एक महत्त्वपूर्ण मांग को पूरा करता है और सेवानिवृत्ति लाभ में समानता लेकर आता है। उन्होंने कहा कि नया प्रावधान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सिंह ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के पिछले 11 वर्षों के सफर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शासन को सरल बनाने, नागरिकों को सशक्त बनाने और प्रशासन को मानवीय बनाने के उद्देश्य से कई सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यूपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारी अब केंद्रीय सिविल सेवा (एनपीएस के तहत ग्रैच्युटी का भुगतान) नियम, 2021 के प्रावधानों के अनुरूप सेवानिवृत्ति और मृत्यु ग्रैच्युटी लाभ के लिए पात्र होंगे।कार्मिक मंत्रालय के पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) ने बुधवार को यूपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सेवा के दौरान सरकारी कर्मचारी की मृत्यु या अक्षमता या विकलांगता के कारण सरकारी सेवा से उनकी बर्खास्तगी पर ओपीएस के तहत लाभ मिलने के विकल्पों पर एक आदेश जारी किया। डीओपीपीडब्ल्यू के सचिव वी श्रीनिवास ने कहा, ‘यह आदेश किसी कर्मचारी को यह चुनने का विकल्प देता है कि सेवाकाल में ही उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसे फिर से ओपीएस के दायरे में ले लिया जाए। यह प्रकृति में प्रगतिशील है और कर्मचारियों द्वारा मांगे जा रहे स्पष्टीकरणों को संबोधित करता है।’अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने इस सरकारी आदेश का स्वागत करते हुए इसे सरकार का ऐतिहासिक और बेहद जरूरी कदम बताया। पटेल ने कहा कि यूपीएस में मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रैच्युटी को शामिल करने से कर्मचारियों की सभी गलतफहमियां दूर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अब बहुत सारे कर्मचारी यूपीएस का विकल्प चुनेंगे।डीओपीपीडब्ल्यू ने एनपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के सेवा-संबंधी मामलों के नियमन के लिए केंद्रीय सिविल सेवा (एनपीएस कार्यान्वयन) नियम, 2021 को अधिसूचित किया था। इसके नियम 10 में एनपीएस में शामिल कर्मचारी को सेवा के दौरान मृत्यु या अमान्यता या विकलांगता के आधार पर सेवामुक्ति की स्थिति में एनपीएस या ओपीएस के तहत लाभ पाने के लिए विकल्प का प्रयोग करने का प्रावधान है।वित्त मंत्रालय ने 24 जनवरी को जारी अधिसूचना में कहा था कि एक अप्रैल, 2025 से केंद्र सरकार की सिविल सेवा में भर्ती होने वाले कर्मचारियों के लिए एनपीएस के तहत एक विकल्प के रूप में यूपीएस की शुरुआत होगी। डीओपीपीडब्ल्यू ने बुधवार को एक और आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि यूपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारी भी केंद्रीय सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत ग्रैच्युटी का भुगतान) नियम, 2021 के प्रावधानों के तहत सेवानिवृत्ति ग्रैच्युटी और मृत्यु ग्रैच्युटी के लाभ के लिए पात्र होंगे। श्रीनिवास ने कहा कि यह आदेश ‘एनपीएस और यूपीएस पेंशनभोगियों के बीच समानता लाता है और वे 25 लाख रुपये की ग्रैच्युटी के लिए भी पात्र होंगे।’ -
नई दिल्ली। पंचायती राज मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत नेशनल लैंग्वेज ट्रांसलेशन मिशन, भाषिणी के साथ एक समझौता ज्ञापन के जरिए एक महत्वपूर्ण सहयोग को औपचारिक रूप देगा। इसका उद्देश्य पंचायती राज शासन में अधिक समावेशिता और बेहतर पहुंच के लिए कटिंग-एज एआई-पावर्ड लैंग्वेज टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना है।
राष्ट्रीय राजधानी में 19 जून, 2025 को केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह पहल पंचायती राज मंत्रालय के डिजिटल प्लेटफॉर्म और आउटरीच प्रयासों में बहुभाषी पहुंच का विस्तार करने के लिए एक रणनीतिक सहयोग है।इस पहल के साथ पंचायती राज पहलों, कार्यक्रमों, संवादों और लाइव कार्यक्रमों में एडवांस्ड ट्रांसलेशन टेक्नोलॉजी के जरिए सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ाया जा सकेगा।यह मंत्रालय के प्लेटफार्मों को निर्बाध रूप से बहुभाषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे हितधारकों विशेषकर निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और ग्रामीण भारत के नागरिकों को अपनी मूल भाषाओं में योजना और शासन प्रणालियों तक पहुंच बनाने में सशक्त बनाया जा सके। -
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) 2025 के प्रमुख कार्यक्रम योग संगम के लिए पंजीकरण ऐतिहासिक 4 लाख के आंकड़े को पार कर गया है। देश में किसी भी कार्यक्रम ने कभी भी इतने बड़े पैमाने पर सुनिश्चित भागीदारी हासिल नहीं की है। एक लाख से ज्यादा योग स्थानों के साथ राजस्थान सबसे आगे है। वहीं, आंध्र प्रदेश 1 लाख से ज्यादा कार्यक्रमों के साथ दूसरे स्थान पर है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
देश भर में 21 जून को लाखों जगहों पर एक साथ ऐतिहासिक योग प्रदर्शन होगा, जो भारत की स्वास्थ्य यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण होगा। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का सबसे शानदार प्रदर्शन विशाखापत्तनम में होगा, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, 5 लाख से अधिक योग प्रेमियों के साथ सामान्य योग का प्रदर्शन करेंगे।21 जून, 2025 को सुबह 6:30 बजे से 7:45 बजे तक आयोजित होने वाला योग संगम अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक योग कार्यक्रम बनने जा रहा है, जिसमें लाखों संस्थान, संगठन और समुदाय एक साथ हिस्सा लेंगे। राजस्थान इस अभियान में सबसे आगे है, जहां 1,38,033 संगठनों ने पंजीकरण कराया है, उसके बाद हैं:-आंध्र प्रदेश: 1,38,033उत्तर प्रदेश: 1,01,767मध्य प्रदेश: 26,159गुजरात: 19,951हिमाचल प्रदेश: 12,000दरअसल, भागीदारी में यह वृद्धि इस वर्ष की थीम – ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग’ के प्रति व्यापक उत्साह को दर्शाता है – एक संदेश जो योग को वैश्विक और व्यक्तिगत कल्याण के साथ जोड़ता है। आईआईटी और आईआईएम से लेकर जमीनी स्तर के गैर-सरकारी संगठनों और अग्रणी कॉरपोरेट तक, सभी क्षेत्रों के संस्थान इस आह्वान को अपना रहे हैं। योग संगम पोर्टल (https://yoga.ayush.gov.in/yoga-sangam) राष्ट्रव्यापी समन्वय के केंद्र के रूप में उभरा है।योग संगम में शामिल होने के लिए संबंधित पोर्टल https://yoga.ayush.gov.in/yoga-sangam पर जाकर अपना समूह/संगठन पंजीकृत कर सकते है। इसके अलावा संगठन प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को सुबह 6:30 से 7:00 बजे तक सीधा प्रसारण करें और सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक योग सत्र आयोजित करें। साथ ही अपने कार्यक्रम का विवरण अपलोड करके आधिकारिक प्रशंसा प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं ।उल्लेखनीय है, आयुष मंत्रालय ने नागरिकों को चार लाख से अधिक संगठनों के साथ सभी को इस परिवर्तनकारी क्षण का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी अपील के बाद देशभर की ग्राम पंचायतों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2025 को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने ग्राम प्रधानों को एक पत्र लिखकर उन्हें समुदाय स्तर पर योग को बढ़ावा देने और इसे जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया, जिससे यह आयोजन अब एक जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में लिखा, “योग ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से बदला है।” इस वर्ष योग दिवस की थीम “योगा फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” रखी गई है, जो व्यक्ति, समाज और पर्यावरण की आपसी जुड़ाव और संतुलन को दर्शाती है। इस बार का आयोजन इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर योग दिवस की 10वीं वर्षगांठ भी है।
प्रधानमंत्री के इस भावनात्मक संदेश के बाद गांवों में नियमित योग सत्र, स्कूलों और आंगनवाड़ियों में जागरूकता कार्यक्रम, और सार्वजनिक स्थलों पर कॉमन योगा प्रोटोकॉल का अभ्यास शुरू हो गया है। यह प्रयास योग को जन-जन तक पहुं सेचाने और IDY 2025 को एक वास्तविक ‘जन आंदोलन’ बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार में आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने प्रधानमंत्री के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के भावपूर्ण आह्वान ने योग दिवस को जन आंदोलन बना दिया है। देश के गांवों में लोग अब योग को ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा बना रहे हैं।”उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के परियार गांव के प्रधान ओम प्रकाश यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री के पत्र से प्रेरित होकर गांव में हर सप्ताह पंचायत भवन में योग सत्र शुरू किए गए हैं। बच्चों के लिए योग प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं और एक विशेष ‘योग यात्रा’ का आयोजन कर गांव में जागरूकता फैलाई गई है। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के बंदकपुर गांव के ग्राम प्रधान सुनील कुमार डब्ल्यू ने इसे ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने बताया कि गांव में बड़े पैमाने पर सामूहिक योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं और हर घर तक जागरूकता पहुंचाने के लिए प्रचार अभियान शुरू किया गया है।उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के खेरा कुरसी गांव की सरपंच पावनी मिश्रा ने बताया कि उनके गांव ने पहाड़ी इलाके में एक खुला योग स्थल विकसित किया है, जहां रोजाना योग सत्र होते हैं। महिलाओं के समूहों ने “स्वास्थ्य ही संपत्ति है” अभियान चलाया है, और बच्चों के लिए “योग से समृद्धि” विषय पर चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं करवाई गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में ग्राम प्रधानों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि योग दिवस के आयोजन में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हों। उन्होंने भरोसा जताया कि यह जमीनी स्तर की पहल योग को घर-घर तक पहुंचाएगी और IDY 2025 को एक गहराई से जुड़ा हुआ राष्ट्रीय उत्सव बना देगी। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्रोएशिया की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान एक अनमोल उपहार मिला। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच ने उन्हें एक विशेष ग्रंथ भेंट किया। यह ग्रंथ 1790 में छपा था और यह पहली बार लैटिन भाषा में लिखी गई संस्कृत व्याकरण की पुस्तक थी। इसे क्रोएशियाई वैज्ञानिक और मिशनरी फिलिप वेजडिन (Ivan Filip Vezdin) ने भारत में रहते हुए लिखा था। यह उपहार भारत और क्रोएशिया के बीच पुराने सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री प्लेंकोविच ने कहा कि यह किताब वेजडिन ने मलाबार (केरल) के ब्राह्मणों और स्थानीय पांडुलिपियों के अध्ययन के आधार पर तैयार की थी। वेजडिन 1774 में भारत आए थे और बाद में मलाबार तट पर वाइसर-जनरल बने। वे यूरोप के पहले वैज्ञानिकों में से एक थे जिन्होंने भारतीय भाषाओं और संस्कृति का गंभीर अध्ययन किया।
प्रधानमंत्री मोदी को क्रोएशियाई राजनयिक सिनीशा ग्रगिका द्वारा लिखित एक और पुस्तक भी भेंट की गई। इस पुस्तक का नाम है “Croatia and India: Bilateral Navigator for Diplomats and Business”। इसमें दोनों देशों के बीच संबंधों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है और भविष्य में सहयोग के नए रास्तों को उजागर किया गया है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को क्रोएशिया की राजधानी जाग्रेब पहुंचे। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली आधिकारिक यात्रा है। यह यात्रा साइप्रस और कनाडा (जहां G7 सम्मेलन हुआ) के बाद उनकी तीन देशों की यात्रा का अंतिम चरण है। फ्रांजो तुजमान एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री प्लेंकोविच ने मोदी का औपचारिक स्वागत किया। पीएम मोदी के स्वागत के लिए भारतीय समुदाय के सैकड़ों लोग सड़कों पर उमड़े। उनका काफिला जैसे ही शहर से गुज़रा, “मोदी-मोदी”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से वातावरण गूंज उठा। होटल पहुंचने पर भी उन्हें भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ स्वागत मिला। प्रधानमंत्री ने लोगों से बातचीत की और स्थानीय लोगों के साथ वैदिक श्लोकों का उच्चारण भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जाग्रेब में भारतीय संस्कृति को बहुत सम्मान मिला है। भारतीय समुदाय ने क्रोएशिया की तरक्की में योगदान दिया है और अपनी जड़ों से जुड़े रहे हैं। उनसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई।” उन्होंने कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।बाद में प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री प्लेंकोविच के बीच सेंट मार्क्स स्क्वायर में मुलाकात हुई। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय बातचीत हुई। प्रधानमंत्री प्लेंकोविच ने कहा कि यह यात्रा एक खास समय पर हो रही है और भारत-क्रोएशिया संबंधों में एक नया अध्याय शुरू कर रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से भारत और क्रोएशिया के राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही व्यापार, नवाचार, रक्षा, बंदरगाह, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और कामगार आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। - नयी दिल्ली.। साहित्य अकादमी द्वारा बुधवार को हिंदी कहानी संग्रह ‘एक बटे बारह' के लिए वरिष्ठ रचनाकार सुशील शुक्ल को प्रतिष्ठित बाल साहित्य पुरस्कार दिए जाने की घोषणा किए जाने के बाद शुक्ल ने इस पर प्रसन्नता जाहिर करने के साथ ही कहा कि आज के समय में बच्चों को बचकाने नहीं समृद्ध और गहरे साहित्य की जरूरत है। पुरस्कार की घोषणा किए जाने के बाद सुशील शुक्ल ने कहा,‘‘हमें प्रयास करना चाहिए कि बच्चों का साहित्य, कहानी, कविताएं केवल बच्चों की होकर न रह जाएं। उसका विषय ऐसा हो कि हर उम्र का व्यक्ति उनसे संवाद स्थापित कर सकें।'' उनका कहना था कि बाल साहित्य की विषय वस्तु समृद्ध होनी चाहिए।शुक्ल ने कहा कि उनका कहानी संग्रह ‘एक बटे बारह' इसी तरह से लिखा गया है कि बच्चों के साथ ही हर उम्र का पाठक उससे जुड़ाव महसूस करता है और अपने लिए भिन्न भिन्न अर्थ लेकर लौटता है। उन्होंने पुरस्कार की घोषणा पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा, ‘‘ बहुत अच्छा लग रहा है, सुखद है कि साहित्य अकादमी ने बाल साहित्य जैसे कुछ नजरअंदाज इलाके में भी पुरस्कार स्थापित किया और इस इलाके में हो रहे काम को सराहा।'' उन्होंने कहा कि यह इस सोच को पुरस्कार मिला है कि बच्चों के लिए बचकाना साहित्य नहीं बल्कि समृद्ध एवं गहरा साहित्य जरूरी है। पिछले 18 वर्षों से बाल साहित्य के क्षेत्र से जुड़े सुशील शुक्ल तक्षशिला के बाल साहित्य एवं कला केंद्र, एकतारा के निदेशक पद के साथ ही, बच्चों की दो पत्रिकाओं- प्लूटो और साइकिल के संपादक भी हैं। वह चकमक के संपादक भी रहे हैं। लेखक ने बाल साहित्य पुरस्कार को अपनी मां को समर्पित किया जिन्होंने उन्हें देखना सिखाया। सुशील शुक्ल को उनकी पुस्तक "एक बटे बारह" के लिए वर्ष 2024 का "हरिकृष्ण देवसरे बालसाहित्य पुरस्कार" भी प्रदान किया जा चुका है।संवाद का सम्मान हुआ ; पार्वतीसाहित्य अकादमी युवा पुरस्कार के लिए चयनित आदिवासी कवयित्री पार्वती तिर्की का कहना था कि काव्य कर्म वास्तव में कविताओं के माध्यम से संवाद की कोशिश है और उन्हें इस बात की खुशी है कि इस संवाद का सम्मान हुआ है। झारखंड के कुडुख आदिवासी समुदाय से आने वाली कवयित्री पार्वती तिर्की को उनके कविता-संग्रह ‘फिर उगना' के लिए साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार 2025 से सम्मानित किए जाने की बुधवार को घोषणा हुई है। सोलह जनवरी 1994 को झारखंड के गुमला जिले में जन्मीं पार्वती तिर्की ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से हिन्दी साहित्य में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद वहीं के हिन्दी विभाग से ‘कुडुख आदिवासी गीत : जीवन राग और जीवन संघर्ष' विषय पर पी-एच.डी. की डिग्री हासिल की। उन्होंने बताया कि उनकी विशेष अभिरुचि कविताओं और लोकगीतों में है। वे कहानियाँ भी लिखती हैं।‘फिर उगना' पार्वती तिर्की की पहली काव्य-कृति है जो वर्ष 2023 में राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित हुई थी। इस संग्रह की कविताएँ सरल, सच्ची और संवेदनशील भाषा में लिखी गई हैं, जो पाठक को सीधे संवाद की तरह महसूस होती हैं। इन कविताओं में धरती, पेड़, चिड़ियाँ, चाँद-सितारे और जंगल सिर्फ़ प्रतीक नहीं हैं—वे कविता के भीतर एक जीवंत दुनिया की तरह मौजूद हैं। पार्वती तिर्की अपनी कविताओं में बिना किसी कृत्रिम सजावट के आदिवासी जीवन के अनुभवों को कविता का हिस्सा बनाती हैं। वे आधुनिक सभ्यता के दबाव और आदिवासी संस्कृति की जिजीविषा के बीच चल रहे तनाव को भी गहराई से रेखांकित करती हैं। उनका यह संग्रह एक नई भाषा, एक नई संवेदना और एक नए दृष्टिकोण की उपस्थिति दर्ज़ कराता है।
- नयी दिल्ली.। निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कहा कि मतदाता पहचान पत्र अब 15 दिनों के भीतर मतदाताओं तक पहुंचा दिये जायेंगे। अधिकारियों ने बताया कि अब तक मतदाताओं तक मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) पहुंचाने में एक महीने से थोड़ा अधिक समय लगता है। आयोग ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) शुरू की गई है कि मतदाता के नए नामांकन या मौजूदा मतदाता के विवरण में बदलाव के 15 दिनों के भीतर मतदाता कार्ड वितरित किए जाएं। चुनाव निकाय ने कहा कि नई प्रणाली निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा ईपीआईसी बनाने से लेकर डाक विभाग (डीओपी) के माध्यम से मतदाता को कार्ड मुहैया कराने तक प्रत्येक चरण की वास्तविक समय पर 'ट्रैकिंग' सुनिश्चित करेगी। आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि मतदाताओं को प्रत्येक चरण में एसएमएस के माध्यम से सूचनाएं भी प्राप्त होंगी, जिससे उन्हें अपने ईपीआईसी की स्थिति के बारे में जानकारी मिलती रहेगी। इस उद्देश्य के लिए आयोग ने अपने हाल ही में शुरू किए गए ‘ईसीआई नेट' मंच पर एक समर्पित आईटी मॉड्यूल पेश किया है। आयोग ने हाल के दिनों में मतदाताओं और अन्य हितधारकों के लाभ के लिए विभिन्न पहल की हैं।
- हमीरपुर (हिप्र)। .राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने यहां संगठन के प्रथम वर्ष के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा ले रहे युवा स्वयंसेवकों को जनता की भलाई और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए काम करने की सलाह दी। आरएसएस के एक प्रवक्ता ने बुधवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि भागवत ने हमीरपुर जिले के बरसर के टिप्पर में चार दिन बिताए और आरएसएस के 21 दिवसीय प्रथम वर्ष प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया और प्रशिक्षुओं से बातचीत की। वह बुधवार को ऊना के रास्ते दिल्ली के लिए रवाना हुए। उन्होंने कहा कि भागवत ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए आरएसएस के दर्शन को रेखांकित किया, जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी और इस साल यह अपना 100वां स्थापना दिवस मना रहा है। प्रवक्ता ने बताया कि शताब्दी समारोह दो अक्टूबर को दशहरा (विजयादशमी) पर मनाया जाएगा।उन्होंने बताया कि 30 मई से शुरू हुए इस शिविर में 212 युवा भाग ले रहे हैं, जो 19 जून तक चलेगा। आरएसएस मीडिया इकाई के अखिल भारतीय संयुक्त सचिव प्रदीप जोशी समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।
- नयी दिल्ली.।केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि सरकार अब भी ‘लेटरल एंट्री' भर्ती के लिए तैयार है और इस योजना को अब तक छोड़ा नहीं गया है। ‘लेटरल एंट्री' का मतलब सरकारी विभागों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की नियुक्ति है।मंत्री ने यहां ‘सेवा और परिवर्तनकारी शासन के 11 वर्ष' पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहा, ‘‘हम अब भी इसके (लेटरल एंट्री भर्ती) लिए तैयार हैं। इसे छोड़ा नहीं गया है।'' कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बहुत नेक इरादे से इस पहल की शुरुआत की है। उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, हमने इसे (लेटरल एंट्री) स्थगित नहीं किया है।''संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पिछले साल अगस्त में सरकारी विभागों में प्रमुख पदों को ‘लेटरल एंट्री' के माध्यम से भरने के लिए अपने विज्ञापन को रद्द कर दिया था, क्योंकि उन पदों के लिए आरक्षण प्रावधान की कमी को लेकर राजनीतिक विवाद था। आयोग ने 17 अगस्त, 2024 को ‘लेटरल एंट्री' के जरिए 10 संयुक्त सचिवों और 35 निदेशकों या उप सचिवों के 45 पदों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, इस फैसले की विपक्षी दलों ने आलोचना की थी और दावा किया था कि इस प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण अधिकारों की अनदेखी की गई है। सिंह ने कहा कि ‘लेटरल एंट्री' मोदी सरकार के आने से पहले हुई थी।मंत्री ने कहा, ‘‘1947 के बाद से भारत सरकार में सबसे महत्वपूर्ण, सबसे प्रसिद्ध ‘लेटरल एंट्री' डॉ. मनमोहन सिंह की रही है, जो एक पद से दूसरे पद पर गए और अंततः प्रधानमंत्री बने। मोंटेक सिंह अहलूवालिया (तत्कालीन योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष) और कई अन्य लोगों की ‘लेटरल एंट्री' हुई हैं।'' उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे यूपीएससी के माध्यम से संस्थागत बनाने की कोशिश की।सम्मेलन के दौरान सिंह ने कहा, ‘‘इसलिए, मैंने कहा कि हम इसके लिए तैयार हैं।'' कार्यक्रम को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) तथा पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संबोधित किया। ये सभी विभाग केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के अधीन हैं।सरकारी कर्मचारियों द्वारा ओबीसी और दिव्यांगता कोटा लाभ के दुरुपयोग के मामलों की केंद्र द्वारा जांच किए जाने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में डीओपीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ऐसा एक मामला है। डीओपीटी के अतिरिक्त सचिव ए पी दास जोशी ने कहा, ‘‘पूजा खेडकर (मामले के बाद) हमने पीडब्ल्यूबीडी (बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्ति) के साथ-साथ ओबीसी और ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) उम्मीदवारों के लिए कई तंत्र स्थापित किए हैं... हमें सोशल मीडिया पर भी बहुत सारी शिकायतें मिलीं, जिनकी हमने गहन जांच की और गहन पूछताछ की। और ज्यादातर मामलों में हमें कुछ भी नकारात्मक नहीं मिला।
- नयी दिल्ली।. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि सरकार निजी वाहनों के लिए ‘फास्टैग' आधारित वार्षिक ‘पास' पेश करेगी, जिसकी कीमत 3,000 रुपये होगी। उन्होंने कहा कि यह 15 अगस्त से प्रभावी होगा जिससे राजमार्गों पर बिना किसी परेशानी के यात्रा करना संभव हो पाएगा। गडकरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर जानकारी दी कि यह ‘पास' चालू होने की तारीख से एक साल या 200 यात्रा के लिए (जो भी पहले हो) वैध होगा। इसे खास तौर पर गैर-वाणिज्यिक निजी वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए तैयार किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि वार्षिक ‘पास' से देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्बाध एवं लागत प्रभावी यात्रा संभव हो सकेगी। इसके लिए एक लिंक जल्द ही राजमार्ग यात्रा ऐप के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। गडकरी ने कहा कि यह नीति 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित ‘टोल प्लाजा' के बारे में लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करती है और एकल, किफायती लेनदेन के माध्यम से टोल भुगतान को सरल बनाती है। मंत्री ने कहा, ‘‘ प्रतीक्षा समय, भीड़भाड़ को कम करके तथा टोल प्लाजा पर विवादों को न्यूनतम करके इस वार्षिक ‘पास' का उद्देश्य लाखों निजी वाहन मालिकों को तीव्र एवं सुगम यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।'' गडकरी की इस घोषणा के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जिनके पास पहले से ही ‘फास्टैग' है, उन्हें नया फास्टैग खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी। मंत्रालय ने कहा, ‘‘ वार्षिक ‘पास' को आपके मौजूदा ‘फास्टैग' पर सक्रिय किया जा सकता है, बशर्ते कि यह पात्रता मानदंडों को पूरा करता हो (अर्थात, यह वाहन के विंडशील्ड पर ठीक से चिपका हुआ हो, वैध वाहन पंजीकरण संख्या से जुड़ा हो, ब्लैकलिस्टेड न हो आदि)।'' वार्षिक ‘पास' केवल राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (एनई) टोल प्लाजा पर ही मान्य है। राज्य सरकारों या स्थानीय निकायों द्वारा प्रबंधित एक्सप्रेसवे, राज्य राजमार्गों (एसएच), आदि टोल प्लाजा पर फास्टैग एक नियमित फास्टैग के रूप में काम करेगा और लागू उपयोगकर्ता शुल्क लागू हो सकते हैं। राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि वार्षिक ‘पास' केवल निजी गैर-वाणिज्यिक कार/जीप/वैन के लिए ही लागू है। किसी भी वाणिज्यिक वाहन के लिए इस्तेमाल किए जाने पर बिना किसी सूचना के इसे तत्काल निष्क्रिय कर दिया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्षिक ‘पास' अनिवार्य नहीं है और मौजूदा फास्टैग प्रणाली हमेशा की तरह काम करती रहेगी, ‘‘जो उपयोगकर्ता वार्षिक ‘पास' का विकल्प नहीं चुनते हैं, वे टोल प्लाजा पर लागू उपयोगकर्ता शुल्क दरों के अनुसार नियमित लेनदेन के लिए अपने फास्टैग का इस्तेमाल करना जारी रख सकते हैं।'' मंत्रालय ने कहा कि राजमार्ग उपयोगकर्ता 200 यात्रा की सीमा समाप्त होने के बाद वार्षिक ‘पास' फिर से खरीद सकते हैं, भले ही एक साल की वैधता अवधि समाप्त नहीं हुई हो।
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दुकान मालिक ने 20 रुपए में दिया आभूषण
जालना (महाराष्ट्र). महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में पारंपरिक सफेद ‘धोती-कुर्ता' और टोपी पहने 93 वर्षीय एक ग्रामीण जब आभूषण की दुकान में दाखिल हुआ तो दुकान के कर्मचारियों को लगा कि वह आर्थिक मदद मांगने आया है। लेकिन जब बुजुर्ग व्यक्ति ने 1,120 रुपए देकर अपने साथ आई अपनी पत्नी के लिए मंगलसूत्र खरीदने की इच्छा व्यक्त की, तो दुकान मालिक ने उनके इस प्रेम भाव से अभिभूत होकर उन्हें मात्र 20 रुपये में यह आभूषण दे दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आया है, जिसे दो करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है। सोशल मीडिया पर लोगों ने बुजुर्ग व्यक्ति के अपनी पत्नी के प्रति प्रेम की प्रशंसा की है। जालना जिले के अंभोरा जहांगीर गांव के एक साधारण किसान परिवार से संबंध रखने वाले निवृत्ति शिंदे और उनकी पत्नी शांताबाई आषाढ़ी एकादशी उत्सव के लिए पंढरपुर की पैदल तीर्थयात्रा पर हैं। वे हाल में छत्रपति संभाजीनगर स्थित आभूषण की दुकान पर गए थे। वे जब दुकान में दाखिल हुए, तो कर्मचारियों ने शुरू में सोचा कि वे मदद या भीख मांगने आए हैं लेकिन जब बुजुर्ग पुरुष ने विनम्रतापूर्वक बताया कि वह अपनी पत्नी के लिए मंगलसूत्र खरीदना चाहता है तो वे भावुक हो गए। शिंदे के सरल लेकिन गहरे प्रेम से प्रभावित होकर दुकान के मालिक ने दंपति को केवल 20 रुपये में मंगलसूत्र दे दिया। दुकान मालिक ने कहा, ‘‘दंपति दुकान में दाखिल हुआ और बुजुर्ग पुरुष ने मुझे 1,120 रुपये दिए और कहा कि वह अपनी पत्नी के लिए मंगलसूत्र खरीदना चाहते हैं। मैं उनके इस भाव से अभिभूत हो गया। मैंने आशीर्वाद के तौर पर उनसे केवल 20 रुपये लिए और दंपति को मंगलसूत्र दे दिया।'' स्थानीय लोगों के अनुसार, यह दंपति हमेशा साथ-साथ यात्रा करता है। उनका एक बेटा भी है, लेकिन वे ज्यादातर स्वयं ही अपनी देखभाल करते हैं। -
नयी दिल्ली, साहित्य अकादमी ने हिंदी में सुशील शुक्ल, अंग्रेजी में नितिन कुशलप्पा एमपी और उर्दू में गज़नफर इकबाल समेत 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को 2025 के प्रतिष्ठित बाल साहित्य पुरस्कार से नवाज़ने का बुधवार को ऐलान किया। अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव के हवाले से जारी एक बयान में बताया गया है कि इसके अध्यक्ष माधव कौशिक की अध्यक्षता में अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में 24 भाषाओं के लेखकों को उनकी रचनाओं के लिए बाल साहित्य पुरस्कार 2025 के लिए अनुमोदित किया गया है। बयान के मुताबिक, इनमें हिंदी में शुक्ल को उनकी कहानी ‘एक बटे बारह' के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार देने का फैसला किया गया है। बयान में कहा गया है कि इसके अलावा अंग्रेजी में नितिन कुशलप्पा एमपी को ‘दक्षिण, साउथ इंडियन मिथ्स एंड फैब्लस रीटोल्ड' (कहानी), उर्दू में इकबाल को ‘कौमी सितारे' (लेख) व मैथिली में मुन्नी कामत को ‘चुक्का' (कहानी) के लिए बाल साहित्य पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा। इसके मुताबिक, बांग्ला में त्रिदिब कुमार चट्टोपाध्याय को ‘एखोनो गाये कांटा देय' (कहानी), गुजराती में कीर्तिदा ब्रह्मभट्ट को ‘टिंचक' (कविता), मराठी में सुरेश सावंत को ‘आभालमाया' (कविता) और पंजाबी में पाली खादिम (अमृत पाल सिंह) को ‘जादू पत्ता' (उपन्यास) के लिए पुरस्कृत किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि अकादमी राजस्थानी में भोगीलाल पाटीदार को ‘पंखेरुवं नी पीड़ा' (नाटक), संस्कृत में प्रीति पुजारा को ‘बाल विश्र्वम्' (कविता), संथाली में हरलाल मुर्मू को ‘सोना मिरु-अग संदेश' (कविता) और नेपाली में साड़्मु लेप्चा को ‘शांति वन' (उपन्यास) के लिए पुरस्कार से नवाज़ने का फैसला किया है। बयान के मुताबिक, असमिया में सुरेंद्र मोहन दास को ‘मैनाहंतर पद्द' (कविता), बोडो में बिनय कुमार ब्रह्मा को ‘खान्थि बोसोन आरो आखु दानाय' (कहानी), डोगरी में पी.एल. परिहार ‘शौक' को ‘नन्हीं टोर' (कविता), कोंकणी में नयना आडारकार को ‘बेलाबायचो शंकर आनी हेर काणयो' (कहानी) तथा मणिपुरी में शांतो एम. को ‘अंगंगशिंगगी शन्नाबुंगसिदा' (नाटक) के लिए बाल साहित्य पुरस्कार मिलेगा। इसमें कहा गया है कि तेलुगु में गंगिसेट्टी शिवकुमार को ‘काबुरला देवता' (कहानी), तमिल में विष्णुपुरम सरवणन को ‘ओत्तराई सिरगू ओविया (उपन्यास), सिंधी में हीना अगनानी ‘हीर' को ‘असमानी परी' (कविता), ओड़िया में राजकिशोर परही को ‘केते फूला फुटिची' (कविता), मलयालम में श्रीजित मुतेडत को ‘पेंग्विनुकालुडे वंकारायिल' (उपन्यास), कन्नड में के. शिवलिंगप्पा हण्दिहल को ‘नोटबुक' (कहानी) और कश्मीरी में इजहार मुबाशिर को ‘शुर्य त् चुर्यगिश्य' (कहानी) के लिए पुरस्कृत किया जाएगा। बयान के अनुसार, 24 भाषाओं के लेखकों की पुस्तकों को त्रिसदस्यीय निर्णायक मंडल ने निर्धारित चयन प्रक्रिया का पालन करते हुए पुरस्कार के लिए चुना तथा कार्यकारी मंडल ने बहुमत या सर्वसम्मति के आधार पर इन पुस्तकों को पुरस्कार के लिए स्वीकृत किया। सचिव ने बताया कि एक जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2023 के बीच पहली बार प्रकाशित हुई किताबों के लेखकों को यह पुरस्कार दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विजेता लेखकों को पुरस्कार स्वरूप एक उत्कीर्ण ताम्रफलक तथा 50 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। -
कनैनिस्किस (कनाडा). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष रोकने में मध्यस्थता की भूमिका निभाने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए उन्हें बताया कि भारत और पाकिस्तान ने बिना किसी मध्यस्थता के अपनी सेनाओं के बीच सीधी बातचीत के बाद पिछले महीने सैन्य कार्रवाई रोकी थी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि ट्रंप के साथ मंगलवार को फोन पर करीब 35 मिनट तक हुई बातचीत में मोदी ने साफ तौर पर कहा कि भारत मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता है और ‘न कभी स्वीकार' करेगा। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद के अनुरोध पर सैन्य कार्रवाई रोकने पर भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच बातचीत शुरू हुई थी। मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत अब आतंकवाद को ‘‘छद्म युद्ध के रूप में नहीं, बल्कि एक युद्ध के ही रूप में देखता है'' और भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर' अब भी जारी है। भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की सबसे पहले घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने 10 मई को की थी। इसके बाद से ट्रंप दावा करते आ रहे हैं कि उन्होंने संघर्ष रोकने पर सहमत न होने पर दोनों देशों के साथ व्यापार रोकने की धमकी देकर संघर्ष विराम समझौते में मध्यस्थता की। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘‘पूर्व प्रतिबद्धताओं'' का हवाला देते हुए कनाडा से लौटते वक्त अमेरिका आने के ट्रंप के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। मोदी और ट्रंप का जी7 शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात का कार्यक्रम था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के शिखर सम्मेलन से समय से पहले विदा लेने के कारण यह बैठक नहीं हो पायी। इसके कारण दोनों नेताओं ने फोन पर बातचीत की, जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई के बीच हुए सैन्य संघर्ष पर प्रमुखता से बात की गयी। मिसरी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी स्तर पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते या भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका द्वारा मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई।'' मोदी-ट्रंप बातचीत की अहम बातें साझा करते हुए उन्होंने बताया, ‘‘सैन्य कार्रवाई रोकने पर चर्चा भारत और पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के मौजूदा संचार चैनलों के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से हुई और इसे पाकिस्तान के अनुरोध पर किया गया।'' विदेश सचिव ने कहा कि मोदी ने ‘‘साफ तौर पर कहा कि भारत मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता है और कभी नहीं करेगा'' और इस मामले पर भारत में पूरी तरह से राजनीतिक सर्वसम्मति है। मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से स्पष्ट शब्दों में कहा कि 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के अपने दृढ़ संकल्प से पूरी दुनिया को अवगत करा दिया है। विदेश सचिव के अनुसार मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया कि भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान में केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। उन्होंने कहा कि भारत की कार्रवाई नपी-तुली, सटीक तथा तनाव को और बढ़ावा नहीं देने वाली थी। विदेश सचिव ने कहा, ‘‘भारत ने यह भी साफ कर दिया था कि पाकिस्तान की ओर से हमले की किसी भी कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी।'' मिसरी ने कहा, ‘‘नौ मई की रात को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया था। उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया था कि पाकिस्तान भारत पर एक बड़ा हमला कर सकता है।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें साफ-साफ कहा था कि अगर ऐसा कोई हमला होता है तो भारत और कड़ा जवाब देगा।'' मोदी ने फोन पर बातचीत में कहा, ‘‘भारत ने 9-10 मई की रात को पाकिस्तान के हमले का कड़ा जवाब दिया, जिससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचा।'' उन्होंने कहा, ‘‘उनके हवाई अड्डों को निष्क्रिय कर दिया गया। भारत की कड़ी कार्रवाई के कारण पाकिस्तान को सैन्य अभियान रोकने का अनुरोध करना पड़ा था।'' मिसरी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी कनाडा से लौटते वक्त अमेरिका आ सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा करने में असमर्थता जतायी। दोनों नेताओं ने निकट भविष्य में मुलाकात करने का प्रयास करने पर सहमति जतायी।'' दोनों नेताओं ने फोन पर इजराइल तथा ईरान के बीच जारी संघर्ष के बारे में भी चर्चा की। मिसरी ने कहा, ‘‘दोनों नेता इस पर सहमत हुए कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में शांति के लिए दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत आवश्यक है और इस दिशा में प्रयास जारी रहने चाहिए।'' उन्होंने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र के संबंध में दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए और क्षेत्र में क्वाड की अहम भूमिका के प्रति अपना समर्थन जताया।'' मिसरी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को अगले क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का न्यौता दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने न्यौता स्वीकार कर लिया और कहा कि वह भारत आने के लिए उत्सुक हैं।'' भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए छह मई की रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इन हमलों के कारण चार दिन तक सैन्य संघर्ष हुआ, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुआ। भारत का कहना है कि उसकी कड़ी प्रतिक्रिया के कारण ही पाकिस्तान को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए अनुरोध करना पड़ा।
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जगरेब. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को क्रोएशिया पहुंचे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा है। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविक ने विशेष सम्मान प्रदर्शित करते हुए हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। प्लेंकोविक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर कहा, ‘‘हमने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जगरेब में स्वागत किया! यह दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देश भारत के प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है - जो एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक क्षण में हो रही है।'' उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने संबंधों में एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए चीजों को सुगम बना रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स' पर कहा, ‘‘भारत-क्रोएशिया संबंधों में ऐतिहासिक मील का पत्थर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्रोएशिया के जगरेब पहुंचे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली यात्रा है। विशेष सम्मान के तौर पर प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविक ने हवाई अड्डे पर उनका औपचारिक स्वागत किया।'' मोदी इस यात्रा के दौरान पारस्परिक हित के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए देश के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री तीन देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में कनाडा से यहां पहुंचे। कनाडा में प्रधानमंत्री ने जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और विश्व के कई नेताओं से बातचीत की। इससे पहले उन्होंने अपनी यात्रा के तहत साइप्रस का दौरा किया था। मोदी ने रविवार को नयी दिल्ली में अपने प्रस्थान से पहले एक बयान में कहा, ‘‘मैं क्रोएशिया गणराज्य की अपनी यात्रा और राष्ट्रपति ज़ोरान मिलनोविक तथा प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के साथ बैठकों को लेकर आशान्वित हूं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंध हैं। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली यात्रा के रूप में, इससे पारस्परिक हित के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।'' विदेश मंत्रालय ने नयी दिल्ली में एक बयान में कहा था, ‘‘क्रोएशिया की यात्रा यूरोपीय संघ में भागीदारों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगी।
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आगरा (उत्तर प्रदेश). आगरा में राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर बुधवार की सुबह एक लोडर वाहन के फ्लाईओवर से नीचे गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत कुमार के अनुसार, दुर्घटना सुबह करीब पांच बजे ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र में हुई। अधिकारी ने बताया, "फिरोजाबाद से आम लेकर जा रहा लोडर वाहन फ्लाईओवर पर चढ़ते समय नियंत्रण खो बैठा। वाहन किनारे से फिसला और ऊंचाई से नीचे गिर गया। फ्लाईओवर के नीचे तीन लोग - राजेश (65), रामेश्वर (60) और हरिबाबू (63) सुबह की सैर के बाद बैठे थे, तभी वाहन उनके ऊपर गिर गया, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।" उन्होंने बताया कि इस घटना में 22 वर्षीय वाहन चालक कृष्ण की भी मौत हो गई।
एसीपी कुमार ने बताया, "प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि चालक को गाड़ी चलाते समय झपकी आ गई होगी, जिससे यह दुर्घटना हुई।" उन्होंने बताया कि लोडर का हेल्पर घायल हो गया है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। - मुरादाबाद. अमरोहा जिले के हैबतपुर गांव के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर ‘रील' बनाने के लिए सांप को चूमने का प्रयास किया जिसके बाद सांप ने उसकी जीभ पर डस लिया। व्यक्ति की हालत गंभीर है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है, जिसकी लोगों ने तीखी आलोचना की है। यह घटना शुक्रवार शाम को अमरोहा जिले के हैबतपुर गांव में हुई, जहां किसान जितेंद्र कुमार (50) ने सांप को बचाने के बाद उसके साथ एक वीडियो बनाने का फैसला किया। लोगों को प्रभावित करने के लिए कुमार ने सांप के साथ फोटो खिंचवाई और रील बनवायी जिसे वहां मौजूद कई लोगों ने रिकॉर्ड किया। स्थानीय लोगों के अनुसार कुमार उस समय नशे में था और धूम्रपान कर रहा था।कथित वीडियो में कुमार को सांप को अपनी गर्दन के चारों ओर लपेटते हुए और धीरे-धीरे उसके सिर को अपने मुंह की ओर लाते हुए देखा जा सकता है। जैसे ही उसने अपनी जीभ सांप की ओर बढ़ाई, सांप ने अचानक हमला किया और सीधे उसकी जीभ पर काट लिया। इससे वहां खड़े लोग भयभीत हो गए। सर्पदंश के बाद कुमार की हालत बिगड़ गई। उसे नजदीक एक अस्पताल में ले जाया गया और बाद में उसे एक अन्य अस्पताल के लिए ‘रेफर' कर दिया गया। गांव के मुखिया जयकीरत सिंह ने बताया कि घटना वाले दिन इलाके में एक दीवार से सांप निकला था, जिससे दहशत फैल गई। घटनास्थल पर पहुंचे कुमार ने सांप को पकड़ लिया था। सिंह ने कहा, "वह सांप को पकड़े हुए था और उसे चूमने का प्रयास कर रहा था। जैसे ही उसकी पकड़ ढीली हुई, सांप ने उसकी जीभ पर काट लिया। जितेंद्र ने सांप को छोड़ दिया, जो फिर (सांप) पास की झाड़ियों में चला गया।"
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नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत देश भर में 11,480 सेवा क्षेत्र के लाभार्थियों को 300 करोड़ रुपए की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की।
केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत’ के विजन को मान्यता मिल रही है और पीएमईजीपी योजना इसका मजबूत स्तंभ बन गई है। उन्होंने दोहराया कि यह योजना केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन भी बन गया है जो लाखों युवाओं, महिलाओं और कारीगरों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ रहा है। मनोज कुमार ने कहा कि हर गांव में रोजगार और आत्मनिर्भरता पैदा करने में इस योजना की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस वितरण कार्यक्रम में देश के सभी छह जोन ने सक्रिय रूप से भाग लिया।सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय मंगलवार को एक बयान में बताया कि सेंट्रल जोन के तहत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में कुल 2,403 परियोजनाओं के लिए 72 करोड़ रुपए की सब्सिडी वितरित की गई, जिसके लिए कुल 218 करोड़ रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया। पूर्वी जोन में बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 996 परियोजनाओं के लिए 22 करोड़ रुपए की सब्सिडी वितरित की गई, जबकि ऋण स्वीकृति लगभग 71 करोड़ रुपए थी।पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए कुल 2,713 परियोजनाओं को 61 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई और इन परियोजनाओं के लिए 184 करोड़ रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया।वहीं, पूर्वोत्तर क्षेत्र की 81 परियोजनाओं को 2 करोड़ रुपए की सब्सिडी मिली, जिसमें असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे राज्य शामिल हैं।आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए 4,565 परियोजनाओं को कवर करते हुए 116 करोड़ रुपए की सब्सिडी वितरित की गई, जबकि इन परियोजनाओं के लिए 343 करोड़ रुपए से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए।महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा जैसे पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों में, कुल 722 परियोजनाओं के लिए 82 करोड़ रुपए के ऋण स्वीकृति के मुकाबले 26 करोड़ रुपए से अधिक की सब्सिडी वितरित की गई। -
नई दिल्ली। एक्सिओम मिशन-4 के प्रक्षेपण (लॉन्चिंग) की नई संभावित सामने आ गई है। संभावित लॉन्च तिथि 22 जून हो सकती है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज बुधवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर यह जानकारी देते हुए कुछ महत्वपूर्ण ब्योरा जारी किया है।
इसरो ने लिखा- लॉन्च टाइमलाइन के बारे में एक्सिओम स्पेस के साथ विस्तृत चर्चा कीइसरो ने लिखा है, ”इसरो, पोलैंड और हंगरी की टीमों ने एक्सिओम मिशन -4 की संभावित लॉन्च टाइमलाइन के बारे में एक्सिओम स्पेस के साथ विस्तृत चर्चा की। इसके बाद, एक्सिओम स्पेस ने कई तत्परता मापदंडों का आकलन करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) और स्पेसएक्स के साथ परामर्श किया।”इसरो ने एक्स पर बताया कि स्पेसएक्स फाल्कन-9 लॉन्च वाहन, ड्रैगन अंतरिक्ष यान की तत्परता की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के ज्वेज्दा मॉड्यूल में मरम्मत, चढ़ाई गलियारे की मौसम की स्थिति और संगरोध में चालक दल के स्वास्थ्य और तैयारियों के आधार पर एक्सिओम स्पेस ने सूचित किया है कि अगली संभावित लॉन्च तिथि 22 जून 2025 है।”एक्सिओम मिशन-4 की खास बातएक्सिओम मिशन-4 की खास बात यह है कि नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री और एक्सिओम स्पेस में मानव अंतरिक्ष उड़ान की निदेशक पैगी व्हिटसन वाणिज्यिक मिशन की कमान संभालेंगी, जबकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला पायलट के रूप में काम करेंगे। दो मिशन विशेषज्ञ पोलैंड के यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी परियोजना अंतरिक्ष यात्री स्लावोज उज्नान्स्की-विस्निएव्स्की और हंगरी के टिबोर कपू हैं। चालक दल फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से फाल्कन-9 पर स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान पर सवार होकर उड़ान भरेगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। आधे घंटे से अधिक समय तक चली बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी और स्पष्ट संदेश दिया कि भारत ने पाकिस्तान के साथ मुद्दों पर मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं किया है और न ही कभी स्वीकार करेगा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्वाड की अगली बैठक के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को भारत आने का निमंत्रण दिया है और राष्ट्रपति ट्रंप ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि वे भारत आने के लिए उत्सुक हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 35 मिनट चली बातचीत में पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत ने कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा।विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहाविदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात तय थी। राष्ट्रपति ट्रंप को जल्दी ही अमेरिका लौटना पड़ा, जिसके कारण यह मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप के अनुरोध पर आज दोनों नेताओं ने फोन पर बात की। उन्होंने करीब 35 मिनट तक बात की। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात कर संवेदना जताई थी और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समर्थन भी जताया था। उसके बाद यह पहली बार था जब वे बात कर रहे थे। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर राष्ट्रपति ट्रंप से विस्तार से बात की।”ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई पहली बातचीतविदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को बताया, “पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में कभी भी और किसी भी स्तर पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील या अमेरिका की ओर से भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता जैसे विषयों पर बात नहीं हुई थी। सैन्य कार्रवाई रोकने की बात सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुई। दोनों सेनाओं की बात मौजूदा चैनल्स के माध्यम से हुई थी। पाकिस्तान के ही आग्रह पर ये बातचीत हुई थी।”9 मई की रात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ही पीएम मोदी को फोन किया थाविदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, 9 मई की रात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ही पीएम मोदी को फोन किया था। उपराष्ट्रपति ने कहा था कि पाकिस्तान भारत पर बड़ा हमला कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें साफ शब्दों में बताया था कि यदि ऐसा होता है तो भारत पाकिस्तान को उससे भी बड़ा जवाब देगा। 9 से10 मई की रात को पाकिस्तान के हमले का भारत ने बहुत सशक्त जवाब दिया। पाकिस्तान की सेना को बहुत नुकसान पहुंचाया।विदेश सचिव के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा कि भारत अब आतंकवाद को प्रॉक्सी वार नहीं, युद्ध के रूप में ही देखता है और “ऑपरेशन सिंदूर” अभी भी जारी है।दोनों नेताओं ने तय किया कि वे निकट भविष्य में मिलने की कोशिश करेंगेविक्रम मिस्री ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि क्या वे कनाडा से लौटते समय अमेरिका में रुकेंगे। पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा करने में असमर्थता जताई। दोनों नेताओं ने तय किया कि वे निकट भविष्य में मिलने की कोशिश करेंगे। -
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द भारत दौरे पर आएंगे। दरअसल, क्वाड समिट के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान न्योते को स्वीकार कर लिया है। बुधवार को भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इसकी जानकारी दी।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्वाड की अहम भूमिकाइस संबंध में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 35 मिनट की बातचीत में कई विषयों पर चर्चा हुई। इस दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के संबंध में दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए। दोनों ने इस क्षेत्र में क्वाड की अहम भूमिका के प्रति समर्थन जताया।राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने के लिए उत्सुकविदेश सचिव के मुताबिक, क्वाड की अगली बैठक के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को भारत यात्रा का निमंत्रण दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि वह भारत आने के लिए उत्सुक हैं।क्या है क्वाड और क्या है इसका मकसद ?क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन का आयोजन इस साल भारत में होना है। क्वाड चार देशों का एक ग्रुप है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत, अमेरिका और जापान शामिल हैं। इस संगठन को चार देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से बनाया। करीब दो दशक पहले क्वाड का विचार हिंद महासागर में आई सुनामी के प्रति साझा प्रतिक्रिया के साथ शुरू हुआ था। आज क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, प्रगति और समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में खड़ा है।विदेश सचिव ने जानकारी दी कि कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात होनी तय थी, लेकिन ट्रंप को जल्दी अमेरिका लौटना पड़ा, जिस कारण मुलाकात नहीं हो पाई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप के आग्रह पर दोनों नेताओं के बीच फोन पर 35 मिनट बात हुई।ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच पहली बातचीतविक्रम मिस्री ने बताया, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों नेताओं की ये पहली बातचीत थी। 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन पर शोक संवेदना प्रकट की थी और आतंक के खिलाफ समर्थन व्यक्त किया था। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से ऑपरेशन सिंदूर के बारे में विस्तार से बात की।”भारतीय विदेश सचिव के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से विस्तार में बताई गई बातों को समझा और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के प्रति समर्थन व्यक्त किया। -
नई दिल्ली। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हरियाणा के मानेसर में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड प्लांट में देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन किया। मारुति सुजुकी के प्लांट में नया गति शक्ति कार्गो टर्मिनल ऑटोमोबाइल परिवहन की लॉजिस्टिक्स दक्षता को काफी हद तक बढ़ाता है। मानेसर प्लांट 10 किलोमीटर के रेल लिंक के माध्यम से पाटली रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है, जो हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचआरआईडीसी) द्वारा विकसित किए जा रहे 121.7 किलोमीटर लंबे हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का हिस्सा है।
रेल मंत्रालय ने कल मंगलवार को एक बयान जारी कर बताया कि इस 10 किलोमीटर के लिंक के निर्माण के लिए 800 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, जिसमें एचआरआईडीसी ने 684 करोड़ रुपए का योगदान दिया और शेष राशि मारुति सुजुकी द्वारा दी गई। इस गति शक्ति कार्गो टर्मिनल की लोडिंग क्षमता 4.5 लाख ऑटोमोबाइल प्रति वर्ष के साथ भारत में सबसे अधिक है।वहीं, उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे में बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले भारतीय रेलवे का वार्षिक बजट 24,000 से 25,000 करोड़ रुपए था, जो कि बढ़कर अब 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने आगे कहा, “पिछले ढाई वर्षों में जनरल कोचों की संख्या बढ़ाने के लिए एक केंद्रित अभियान शुरू किया गया है। पिछले वर्ष ही 1,200 से अधिक जनरल कोच जोड़े गए हैं।”केंद्रीय मंत्री ने बताया, “वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारतीय रेलवे ने लगभग 720 करोड़ यात्रियों और 1,617 मिलियन टन माल का परिवहन किया। इस आंकड़े ने भारतीय रेलवे को वैश्विक स्तर पर दूसरी सबसे अधिक माल ढुलाई वाली रेल सेवा बनने में मदद की, जिससे 2023-24 एक ऐतिहासिक वर्ष बन गया।”इसके अलावा, नमो भारत ट्रेनों की सफल शुरुआत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चल रही दो नमो भारत ट्रेनों के प्रति जनता की मजबूत प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर, हमने बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने के लिए 50 नई नमो भारत ट्रेनें बनाने का फैसला किया है।वहीं, यात्री और माल ढुलाई के प्रदर्शन के मोर्चे पर वैष्णव ने कहा, “वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय रेलवे ने लगभग 720 करोड़ यात्रियों और 1,617 मिलियन टन माल का परिवहन किया। इस प्रदर्शन ने भारतीय रेलवे को विश्व स्तर पर दूसरी सबसे अधिक माल ढुलाई मात्रा हासिल करने में मदद की, जिससे 2023-24 एक ऐतिहासिक वर्ष बन गया।”वैष्णव ने यात्री सुविधा के बारे में बात करते हुए तत्काल टिकट बुकिंग में एक महत्वपूर्ण सुधार की घोषणा की, जिसे 1 जुलाई 2025 से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “नए नियम के अनुसार, केवल आधार-प्रमाणित और केवाईसी-सत्यापित उपयोगकर्ताओं को बुकिंग विंडो के पहले 30 मिनट के दौरान तत्काल टिकट बुक करने की अनुमति होगी। इस उपाय से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि टिकट वास्तविक यात्रियों को ही उपलब्ध हों।“उन्होंने बीकानेर मंडल में चल रही एक पायलट परियोजना के बारे में भी बताया, जहां अब यात्री आरक्षण चार्ट 24 घंटे पहले तैयार किए जा रहे हैं, जबकि पहले यह ट्रेन के रवाना होने से 4 घंटे पहले तैयार किया जाता था। इस पहल को नागरिकों और जन प्रतिनिधियों से काफ़ी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और इससे यात्रा के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।अमृत भारत ट्रेनों की शुरुआत पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “तीन अमृत भारत ट्रेनें वर्तमान में चालू हैं और उन्हें जनता से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। आने वाले दिनों में छह और अमृत भारत ट्रेनें शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, 50 और ट्रेनों का उत्पादन चल रहा है तथा आगे और अधिक बैच आएंगे।”हरियाणा में विकास की चर्चा करते हुए वैष्णव ने कहा कि 2014 से पहले राज्य के लिए वार्षिक रेल बजट आवंटन मात्र 300 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा, “इस वर्ष, हरियाणा को 3,416 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन प्राप्त हुआ है। पिछले 11 वर्षों में, राज्य में 823 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गई हैं और हरियाणा का शत प्रतिशत रेलवे नेटवर्क अब विद्युतीकृत है।”उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में, हरियाणा में 11,800 करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 34 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास प्रगति पर है। इसके अलावा, राज्य के रेलवे नेटवर्क में 540 रोड ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण किया गया है। - नयी दिल्ली. । केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने मंगलवार को कहा कि अंतर-मंत्रालयी प्रयास भारत को दुर्लभ खनिज चुंबक के मामले में आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। दुर्लभ खनिज चुंबक का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों, रक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कुमारस्वामी ने यहां कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ दुर्लभ खनिज चुंबक के मुद्दे पर एक अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता करने के बाद यह बात कही। कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि दुर्लभ खनिज चुंबक के मुद्दे पर किशन रेड्डी के साथ हुई बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय, इस्पात मंत्रालय, खान मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा परमाणु ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने कहा, "यह अंतर-मंत्रालयी प्रयास ईवी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक सामग्रियों में भारत की आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करेगा।" रेड्डी ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बैठक में चर्चा खनन से लेकर रिफाइनिंग और अंतिम उपयोग तक मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर केंद्रित थी। उन्होंने कहा, "नरेन्द्र मोदी सरकार ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को लागू किया है और खनिजों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समग्र दृष्टिकोण को अपना रही है।" प्रमुख धातुओं के निर्यात पर चीन के हाल के प्रतिबंधों ने भारत सहित कई देशों में वाहन और सेमीकंडक्टर चिप के विनिर्माण में व्यापक गतिरोध पैदा किया है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, वाहन उद्योग के 40-50 अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल को अब भी बैठक के लिए चीन से पुष्टि का इंतजार है। यह प्रतिनिधिमंडल भारतीय संस्थाओं को दुर्लभ खनिज चुंबकों के आयात में तेजी लाने के लिए चीन का दौरा करने वाला है।



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