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नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को महाराष्ट्र के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में 'चहुंमुखी विकास' सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इससे जीवन जीने की सुगमता को बढ़ावा मिलेगा और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मैं दूरस्थ और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में चहुंमुखी विकास सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के प्रयासों की सराहना करता हूं। यह निश्चित रूप से 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ावा देगा तथा और भी अधिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा। गढ़चिरौली और आसपास के क्षेत्रों के मेरे भाइयों और बहनों को विशेष रूप से बधाई!" प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के एक पोस्ट पर की।
फडणवीस ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि गढ़रिचौली के दूरदराज इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव खत्म हो रहा है। उन्होंने दावा किया था कि नक्सलवाद अपने अंत की तरफ है। - नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में झुग्गी झोपड़ी (जेजे क्लस्टर्स) के निवासियों के लिए 1,675 फ्लैटों और दो शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं समेत कई विकास योजनाओं का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बृहस्पतिवार को एक बयान में यह जानकारी दी।पीएमओ के मुताबिक प्रधानमंत्री दिल्ली विश्वविद्यालय में 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली तीन नई परियोजनाओं की भी आधारशिला रखेंगे। इनमें पूर्वी दिल्ली के सूरजमल विहार के पूर्वी परिसर में एक अकादमिक ब्लॉक, द्वारका के पश्चिमी परिसर में एक अकादमिक ब्लॉक और नजफगढ़ के रोशनपुरा में वीर सावरकर कॉलेज का भवन भी शामिल है। इस कॉलेज में शिक्षा के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। पीएमओ ने कहा कि मोदी दिल्ली के अशोक विहार में स्वाभिमान अपार्टमेंट में झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास परियोजना के तहत झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों के लिए नवनिर्मित फ्लैटों का दौरा करेंगे और पात्र लाभार्थियों को चाबियां सौंपेंगे तथा 1,675 नवनिर्मित फ्लैटों का उद्घाटन करेंगे। पीएमओ ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री की 'सभी के लिए आवास' पहल के अनुरूप है।परियोजना का उद्देश्य दिल्ली में जेजे क्लस्टरों के निवासियों को पर्याप्त सुविधाओं से सुसज्जित बेहतर और स्वस्थ रिहायशी वातावरण प्रदान करना है। केंद्र सरकार द्वारा एक फ्लैट के निर्माण पर 25 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पात्र लाभार्थी कुल राशि का सात प्रतिशत से कम भुगतान करते हैं, जिसमें मामूली योगदान के रूप में 1.42 लाख रुपये और रखरखाव के पांच साल के लिए 30,000 रुपये शामिल हैं। केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से विकास की इन योजनाओं को ऐसे समय में मूर्त रूप दिया जा रहा है जब राष्ट्रीय राजधानी में इसी साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुख्य मुकाबला 2013 से सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी (आप) से है। आप अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। मोदी शुक्रवार को दो शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं- नौरोजी नगर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (डब्ल्यूटीसी) और सरोजिनी नगर में जनरल पूल आवासीय आवास (जीपीआरए) टाइप-2 क्वार्टर का भी उद्घाटन करेंगे। बयान में कहा गया है कि नौरोजी नगर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने 600 से ज़्यादा जीर्ण-शीर्ण क्वार्टरों को अत्याधुनिक वाणिज्यिक टावरों से बदलकर इस क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया है तथा इससे उन्नत सुविधाओं के साथ लगभग 34 लाख वर्ग फ़ीट प्रीमियम वाणिज्यिक स्थल उपलब्ध हुआ है। इस परियोजना में हरित भवन कार्यप्रणालियों को शामिल किया गया है, जिसमें शून्य-निर्वहन अवधारणा, सौर ऊर्जा उत्पादन और वर्षा जल संचयन प्रणाली जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरोजिनी नगर में जीपीआरए टाइप-II क्वार्टर में 28 टावर शामिल हैं, जिनमें 2,500 से अधिक आवासीय इकाइयां हैं और इनमें आधुनिक सुविधाओं और स्थल का कुशल उपयोग किया गया हैं। बयान में कहा गया कि परियोजना के डिजाइन में वर्षा जल संचयन प्रणाली, सीवेज और जल उपचार संयंत्र तथा सौर ऊर्जा से चलने वाले अपशिष्ट कॉम्पैक्टर शामिल हैं जो पर्यावरण के प्रति जागरूक जनजीवन को प्रोत्साहित करते हैं। प्रधानमंत्री दिल्ली के द्वारका में सीबीएसई के एकीकृत कार्यालय परिसर का भी उद्घाटन करेंगे, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें कार्यालय, ऑडिटोरियम, उन्नत डेटा सेंटर, व्यापक जल प्रबंधन प्रणाली आदि शामिल हैं। पीएमओ ने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल इस इमारत का निर्माण उच्च पर्यावरणीय मानकों के अनुसार किया गया है और इसे भारतीय हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) के प्लेटिनम रेटिंग मानकों के अनुसार निर्मित किया गया है।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार किसानों के साथ सुरक्षा कवच की तरह खड़ी है और उसने 2025 के पहले दिन ही यह संकल्प दोहराया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने डीएपी उर्वरक को 1,350 रुपये प्रति बोरी के भाव पर किसानों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त सब्सिडी को 31 दिसंबर, 2024 से आगे बढ़ाने का बुधवार को फैसला किया। इससे सरकारी खजाने पर 3,850 करोड़ रुपये तक का बोझ पड़ेगा। शाह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद यह टिप्पणी की है। शाह ने ‘एक्स' पर कहा, “ मोदी सरकार किसानों के साथ सुरक्षा कवच की तरह खड़ी है और आज वर्ष 2025 के पहले ही दिन अपने इसी संकल्प को पुनः दोहराया है। डीएपी पर अतिरिक्त सब्सिडी के निर्णय से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों में वृद्धि होने पर भी हमारे किसानों को उचित मूल्य पर ही डीएपी उपलब्ध होगा। इस विशेष पैकेज के लिए मोदी जी का आभार।” गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में करोड़ों किसानों को फसलों के नुकसान से चिंतामुक्त रखने वाली ‘पीएम फसल बीमा योजना' को निरंतर जारी रखने के लिए 69,515.71 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। उन्होंने कहा कि साथ ही, 824.77 रुपये करोड़ की लागत से नवाचार और प्रौद्योगिकी कोष (एफआईएटी) को भी मंजूरी दी गई।
- भुवनेश्वर.। ओडिशा सरकार ने बुधवार को 4,222.24 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी। इससे राज्य में 15,497 नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मुख्य सचिव मनोज आहूजा की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय एकल खिड़की मंजूरी प्राधिकरण ने इस महीने के अंत में होने वाले ‘उत्कर्ष ओडिशा - मेक इन ओडिशा कॉन्क्लेव 2025' बिजनेस शिखर सम्मेलन से पहले 25 परियोजनाओं के प्रस्तावों को मंजूरी दी। ये परियोजनाएं हरित ऊर्जा उपकरण, औषधि, कपड़ा, प्लास्टिक, खाद्य प्रसंस्करण आदि जैसे क्षेत्रों में हैं। अधिकारी ने कहा, ग्यारह जिले... अंगुल, गंजाम, खोरधा, नवरंगपुर, कटक, झारसुगुड़ा, बारगढ़, संबलपुर, सुंदरगढ़, पुरी और कंधमाल, इन परियोजनाओं से लाभान्वित होंगे, औद्योगिक आधार मजबूत होगा और निरंतर आर्थिक विकास होगा। स्वीकृत प्रस्तावों में गंजाम में हेट्रो लैब्स लिमिटेड की 700 करोड़ रुपये की औषधि विनिर्माण इकाई, संबलपुर में श्याम मेटलिक्स स्पेशलिटी अलॉय प्राइवेट लि. का 710 करोड़ रुपये का टाइटेनियम स्लैग प्लांट और खुर्दा में शालीमार ग्लास वर्क्स प्राइवेट लि. की 530 करोड़ रुपये की पैकेजिंग कंटेनर ग्लास विनिर्माण इकाई शामिल हैं।
- नयी दिल्ली।. भुवनेश कुमार ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का पदभार संभाल लिया है। एक आधिकारिक बयान में बुधवार को यह जानकारी दी गई। कुमार इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव भी बने रहेंगे।उन्होंने अमित अग्रवाल का स्थान लिया है जिन्हें नया औषधि सचिव नियुक्त किया गया है।एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘भुवनेश कुमार ने बुधवार को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का पदभार संभाल लिया।'' कुमार उत्तर प्रदेश कैडर के 1995 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं।बयान में कहा गया, ‘‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरूक्षेत्र से स्नातक और स्वर्ण पदक विजेता, कुमार ने केंद्र और अपने कैडर राज्य दोनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।'' इससे पहले, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में भी कार्य किया था। उत्तर प्रदेश में, उन्होंने पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन विभाग में प्रमुख सचिव के रूप में कार्य किया। वह उत्तर प्रदेश सरकार में सचिव वित्त, सचिव एमएसएमई, सचिव तकनीकी शिक्षा और भूमि राजस्व विभाग के मंडलायुक्त भी रह चुके हैं।
- मुंबई.। मजबूत आवास मांग रहने से वर्ष 2024 के दौरान मुंबई नगरपालिका क्षेत्र में संपत्तियों का पंजीकरण 11 प्रतिशत बढ़कर 1,41,202 इकाई पर पहुंच गया, जो पिछले 13 साल का उच्चतम स्तर है। रियल एस्टेट सलाहकार नाइट फ्रैंक इंडिया ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मुंबई शहर में दिसंबर के महीने में 12,418 संपत्तियों का पंजीकरण हुआ जिससे सरकार को 1,134 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। दिसंबर, 2023 में 12,285 संपत्तियां पंजीकृत हुई थीं। दिसंबर में हुए कुल संपत्ति पंजीकरण में आवासीय संपत्तियों का हिस्सा 80 प्रतिशत था।बयान के मुताबिक, वर्ष 2024 में संपत्ति पंजीकरण की कुल संख्या 1,41,202 तक पहुंच जाएगी, जबकि पंजीकरण से 12,141 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। ये दोनों आंकड़े ही 13 साल का उच्चस्तर हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, ‘‘जनवरी से दिसंबर, 2024 के लिए संपत्ति पंजीकरण में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे एक दशक में सबसे तेज 12 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि हुई। यह प्रवृत्ति घर खरीदारों के बीच गुणवत्ता और मूल्य को दी जा रही अहमियत को दर्शाती है।'' संपत्ति-प्रौद्योगिकी फर्म रेलॉय के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अखिल सराफ ने कहा कि सभी क्षेत्रों में आवासीय संपत्तियों की मजबूत मांग देखी जा रही है।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जेलों में कैदियों के साथ उनकी जाति के आधार पर भेदभाव और वर्गीकरण की जांच करने के लिए जेल नियमावली में संशोधन किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में कहा है कि कैदियों के साथ किसी भी तरह के जाति आधारित भेदभाव के मुद्दे को सुलझाने के लिए ‘‘आदर्श कारागार नियमावली, 2016'' और ‘‘आदर्श कारागार एवं सुधार सेवा अधिनियम, 2023'' में संशोधन किया गया है। कैदियों के साथ जाति आधारित भेदभाव पर उच्चतम न्यायालय के तीन अक्टूबर, 2024 के आदेश के मद्देनजर ये बदलाव किए गए हैं। कारागार नियमावली में किए गए नए संशोधन के अनुसार, जेल अधिकारियों को सख्ती से यह सुनिश्चित करना होगा कि कैदियों के साथ उनकी जाति के आधार पर कोई भेदभाव, वर्गीकरण या अलगाव न हो। इसमें कहा गया है, ‘‘यह सख्ती से सुनिश्चित किया जाएगा कि जेलों में किसी भी ड्यूटी या काम के आवंटन में कैदियों के साथ उनकी जाति के आधार पर कोई भेदभाव न हो।'' आदर्श कारागार एवं सुधार सेवा अधिनियम, 2023 के ‘विविध' में भी बदलाव किए गए हैं, जिसमें धारा 55(ए) के रूप में नया शीर्षक ‘कारागार एवं सुधार संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव का निषेध' जोड़ा गया है। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि ‘‘हाथ से मैला उठाने वालों के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013'' के प्रावधानों का जेलों एवं सुधार संस्थानों में भी बाध्यकारी प्रभाव होगा। इसमें कहा गया है, ‘‘जेल के अंदर हाथ से मैला उठाने या सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।'' गृह मंत्रालय ने कहा कि चूंकि कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपने अधिकार क्षेत्र में आदतन अपराधी अधिनियम लागू नहीं किया है और विभिन्न राज्यों के उपलब्ध आदतन अपराधी अधिनियमों में आदतन अपराधियों की परिभाषा की पड़ताल करने के बाद आदर्श जेल नियमावली, 2016 और आदर्श जेल एवं सुधार सेवा अधिनियम, 2023 में ‘आदतन अपराधी अधिनियम' की मौजूदा परिभाषा को बदलने का निर्णय लिया गया है। उच्चतम न्यायालय ने भी अपने आदेश में ‘‘आदतन अपराधियों'' के संबंध में निर्देश दिए थे और कहा था कि कारागार नियमावली एवं आदर्श कारागार नियमावली संबंधित राज्य विधानसभाओं द्वारा अधिनियमित कानून में ‘‘आदतन अपराधियों'' की परिभाषा के अनुसार होंगे। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि यदि राज्य में आदतन अपराधी कानून नहीं है, तो केंद्र और राज्य सरकारें तीन महीने की अवधि के भीतर अपने फैसले के अनुरूप नियमावली और नियमों में आवश्यक बदलाव करेंगी।
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हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग में कुएं से एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहे चार लोगों समेत पांच व्यक्तियों की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि चरही पुलिस थाने की सीमा के अंतर्गत सरवाहा गांव में उस दौरान यह घटना हुई, जब सुंदर करमाली (27) नामक व्यक्ति ने पत्नी रूपा देवी के साथ हुए घरेलू विवाद के बाद गुस्से में आकर आपनी बाइक कुएं में फेंक दी थी और फिर वह उसे निकालने के लिए कुएं में गया था। बिष्णुगढ़ के उपविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) बी.एन. प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘गुस्से में आकर करमाली ने पहले अपनी मोटरसाइकिल कुएं में फेंक दी। इसके बाद वह अपनी गाड़ी निकालने के लिए कुएं में उतरा, लेकिन वह वापस नहीं आ सका। रूपा की मदद की आवाज सुनने के बाद चार लोग आए और उन्होंने सुंदर को बचाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी वापस नहीं आ सका और कुएं के अंदर ही सभी की मौत हो गई। अधिकारी ने मृतकों की पहचान राहुल करमाली, विनय करमाली, पंकज करमाली और सूरज भुइयां के रूप में हुई है। सभी की उम्र 25 से 28 के बीच में है। एसडीपीओ ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को निकालने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अधिकारी ने बताया कि कुएं को ढक दिया गया है और उसके आसपास आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
चरही पुलिस थाने के प्रभारी गौतम कुमार ने बताया कि ऐसा संदेह है कि कुएं के अंदर मौजूद जहरीली गैस में सांस लेने के कारण उनकी मौत हुई। उन्होंने बताया, ‘‘मौतों के वास्तविक कारण की जांच की जा रही है। - नयी दिल्ली। देशभर में बुधवार को नये साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग शॉपिंग मॉल, मनोरंजन केंद्रों और पर्यटन स्थलों पर उमड़ पड़े तथा कई लोग धार्मिक स्थलों पर भी गये। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं तथा समृद्धि और सद्भाव की कामना की। राष्ट्रीय राजधानी में, कई सड़कों पर, खासकर इंडिया गेट और कनॉट प्लेस के पास, नये साल के दिन भारी यातायात जाम देखने को मिला और प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर लोगों की लंबी कतारें लग गईं। इसके साथ ही जिन अन्य प्रमुख स्थानों पर लोगों की भीड़ जुटी उनमें बंगला साहिब गुरुद्वारा, कनॉट प्लेस में प्राचीन हनुमान मंदिर, अक्षरधाम मंदिर और झंडेवालान मंदिर शामिल हैं। पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, पुलिस का मुख्य ध्यान इंडिया गेट, अशोक रोड, हनुमान मंदिर और कनॉट प्लेस पर था। नये साल के दिन अपने परिवार के साथ कुतुब मीनार घूमने आई काजल ने प्रवेश टिकट पाने के लिए एक घंटे से ज़्यादा इंतज़ार करने के बाद अपनी निराशा जतायी। उन्होंने कहा, ‘‘इतने लंबे इंतज़ार के बाद, हमारा सारा उत्साह फीका पड़ गया है।'' दिल्ली के मशहूर बाजारों में भी बड़ी संख्या में खरीदारी करने वाले लोग नजर आए।महाराष्ट्र में, मुंबई पुलिस ने नये साल के जश्न के दौरान नियमों का उल्लंघन करने, नशे में गाड़ी चलाने और यातायात में बाधा डालने के लिए 23,000 से अधिक वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया। यातायात पुलिस ने 17,800 वाहनों पर जुर्माना लगाया और ई-चालान के माध्यम से 89,19,750 रुपये का जुर्माना वसूला, वहीं शहर की पुलिस ने 5,670 वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया। गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव और जुहू चौपाटी सहित मुंबई के प्रमुख स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग नये साल का जश्न मनाने के लिए एकत्रित हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बधाई संदेश में देशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और कामना की कि नया साल सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लाए। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘(वर्ष) 2025 की ढेर सारी शुभकामनाएं। यह वर्ष सभी के लिए नए अवसर, सफलता और अंतहीन आनंद लेकर आए। सभी को बेहतर स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिले।" धनखड़ और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नववर्ष की शुभकामनाओं में राष्ट्र को सर्वोपरि रखने के संकल्प के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों का पोषण करने का आग्रह भी किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और उनसे भारत तथा विश्व के लिए अधिक समावेशी, बेहतर और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के वास्ते मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराने पर जोर दिया। मुर्मू ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। वर्ष 2025 सभी के लिए खुशियां, सद्भाव और समृद्धि लेकर आए। इस अवसर पर, आइए हम भारत और विश्व के लिए एक उज्ज्वल, अधिक समावेशी और बेहतर भविष्य बनाने के उद्देश्य से मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएं।'' देश भर में लोग नये साल के दिन भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर उमड़ पड़े। पश्चिम बंगाल में, लोगों ने राज्य भर के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों और धार्मिक स्थलों का दौरा किया। कोलकाता और उसके आसपास के पार्क स्ट्रीट, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल, अलीपुर चिड़ियाघर, निक्को पार्क और इको पार्क में सभी आयु वर्ग के लोग उमड़ पड़े। दिन के समय दक्षिणेश्वर काली मंदिर में भी लाखों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। बीरभूम जिले के तारापीठ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। ओडिशा में, लाखों लोगों ने भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने के लिए पुरी में 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। मार्केट चौक से मंदिर के सिंह द्वार तक मंदिर की ओर जाने वाले ग्रैंड रोड पर श्रद्धालुओं की एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतार देखी गई। पुरी के एसपी विनीत अग्रवाल ने कहा, "पुरी पुलिस सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम अनुभव सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है।" श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने कहा कि लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के द्वार मंगलवार देर रात 1.05 बजे खोले गए और तब से श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर रहे हैं। तेलंगाना में, हैदराबाद और अन्य धार्मिक स्थलों के मंदिरों में भारी भीड़ देखी गई, क्योंकि लोगों ने उम्मीद और उत्साह के साथ नये साल का स्वागत किया। हैदराबाद में जुबली हिल्स, हिमायत नगर और वनस्थलीपुरम और शहर के बाहरी इलाके चिलकुर में बिरला मंदिर और अन्य प्रसिद्ध वेंकटेश्वर मंदिरों में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में दर्शन किए। नये साल का जश्न मनाने के लिए आधी रात के बाद लाखों पर्यटक और स्थानीय निवासी गोवा के समुद्र तटों पर उमड़ पड़े। समुद्र तटों की ओर जाने वाली कई सड़कों पर रात में यातायात का भारी दबाव था, जबकि राज्य पुलिस ने व्यस्त मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया। आधी रात को, लोगों ने आतिशबाजी और कई समुद्र तटों पर आयोजित संगीत कार्यक्रमों के बीच नये साल का स्वागत करने के लिए एक-दूसरे को बधाई दी। ईसाई समुदाय के सदस्य, जो गोवा की आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं, नए साल के अवसर पर राज्य भर के चर्च में आयोजित मध्यरात्रि की प्रार्थना सभा में शामिल हुए। कर्नाटक में केक और पार्टियों, सेल्फी और खरीदारी के साथ नए साल का स्वागत किया गया। मंदिरों में लोगों की भीड़ उमड़ी। पुलिस की चौकसी की बदौलत, बेंगलुरु में मुख्य सड़कों पर लोगों भारी भीड़ के बावजूद नये साल का जश्न शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया।
- अयोध्या/वाराणसी।,उत्तर प्रदेश के अयोध्या, मथुरा, मिर्जापुर और वाराणसी के मंदिरों में बुधवार को नए साल के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। अयोध्या में जहां भगवान राम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गयी तो वहीं वाराणसी में मंगलवार देर रात तीन बजे से ही श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर में जमा होने लगे। अधिकारियों के मुताबिक, नव वर्ष की पूर्व संध्या पर अयोध्या में दो लाख से अधिक भक्त आ चुके थे और बुधवार सुबह लगभग तीन लाख से अधिक लोग राम लला के दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु राम लला के दर्शन के लिए कतार में खड़े थे और भक्तों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शहर को कई सेक्टरों और जोन में विभाजित किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और इस दौरान चौबीसों घंटे वाहनों की जांच की गई। उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ी मंदिर में भी ऐसा ही नजा देखने को मिला, जहां सुबह की आरती से लेकर शाम की शयन आरती तक भीड़ लगी रही। अधिकारियों के मुताबिक, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने राम जन्मभूमि पथ पर 10 अतिरिक्त आगंतुक दीर्घाएं तैयार की थीं, जिससे दर्शन के लिए लाइनों की संख्या 10 से बढ़कर 20 हो गई। पुलिस उपाधीक्षक (अयोध्या) आशुतोष तिवारी ने बताया कि शहर को सात सुरक्षा सेक्टरों और 24 जोन में विभाजित किया गया था, जिसमें प्रत्येक क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए थे। उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया और भीड़भाड़ से बचने व लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यातायात की आवाजाही को सख्ती से नियंत्रित किया गया। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक बयान में बताया कि सर्दियों के मौसम और छुट्टियों के कारण आगंतुकों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि स्कूल, अदालतें और कृषि कार्य बंद होने के कारण लोग छुट्टियां मनाने गोवा, नैनीताल, शिमला या मसूरी जैसे पारंपरिक पर्यटन स्थल जाने के बजाये अयोध्या आना पसंद करते हैं। वहीं वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देर शाम तक बनी रही।मंदिर प्रशासन ने बताया कि शाम चार बजे तक करीब साढ़े तीन लाख भक्त मंदिर में पूजा करने और बाबा काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने के लिए दर्शन कर चुके थे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि रात आठ बजे तक, करीब लाख से अधिक भक्तों ने पूजा-अर्चना की और बाबा श्री काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया। काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की पुष्टि करते हुए कहा कि 28 दिसंबर से ही श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि नव वर्ष के अवसर पर मंदिर प्रशासन ने भारी भीड़ का अनुमान लगाया था और स्थिति को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए कदम उठाए थे। मिश्रा ने बताया, “सुबह से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी और शाम चार बजे तक साढ़े तीन लाख श्रद्धालु आ चुके थे। संख्या लगातार बढ़ रही है और श्रद्धालु अब भी दर्शन के लिए कतार में लगे हुए हैं।” मंदिर प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें 31 दिसंबर और एक जनवरी को बाबा के ‘स्पर्श दर्शन' पर रोक, गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध और तीर्थयात्रियों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मैदागिन से गोदौलिया मार्ग पर वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल हैं। पुलिस उपायुक्त (काशी जोन) गौरव बंसल ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में पांच सेक्टर बनाए गए हैं और 45 ड्यूटी स्थल तैयार किये गए हैं। उन्होंने बताया कि शहर भर के प्रमुख मंदिरों और घाटों पर भी सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, जिसमें बाबा काल भैरव मंदिर व संकट मोचन मंदिर शामिल हैं, जहां क्रमशः 11 और आठ ड्यूटी प्वाइंट बनाए गए हैं। मिश्रा ने बताया कि नव वर्ष के जश्न में भारी भीड़ उमड़ने की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), जल पुलिस और प्रादेशिक सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) समेत विशेष बल विभिन्न घाटों पर तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में 12 त्वरित प्रतिक्रिया दल किसी भी आपदा या दुर्घटना पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार हैं। मथुरा में नववर्ष की पूर्व संध्या एवं साल के पहले दिन मथुरा, वृन्दावन के मंदिरों में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ी। नववर्ष के पहले दिन ही बांकेबिहारी का आशीर्वाद पाने के लिए केंद्रीय मंत्री (सूचना प्रसारण, खेल एवं युवा मामले) अनुराम ठाकुर भी बुधवार को वृन्दावन पहुंचे। जिला पर्यटन अधिकारी ऐहतराम अली ने बताया कि मथुरा के सभी प्रमुख मंदिरों के बाहर सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। उन्होंने बताया कि शीतकालीन अवकाश के चलते भी इन दिनों उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) सहित हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार आदि राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। जिले के गोवर्धन में दानघाटी मंदिर के पुजारी पवन कौशिक ने बताया कि करीब सात से आठ लाख श्रद्धालुओं ने पहाड़ी की परिक्रमा में हिस्सा लिया, जिससे पूरे दिन मंदिर में भीड़ रही। द्वारकाधीश मंदिर में नए साल का जश्न खास तरीके से मनाया गया। मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी राकेश तिवारी ने बताया कि भगवान को खास ‘सूखे मेवों' से सजाया गया। महंत आचार्य बागीश महाराज द्वारा की गई आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। वृंदावन के मदन मोहन मंदिर में भगवान को खास पोशाक पहनाई गई और उन्हें कई तरह के प्रसाद चढ़ाए गए।मिर्जापुर में, मां विंध्यवासिनी धाम में आधी रात के बाद से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई।जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने बताया कि शाम तक 1.5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। उन्होंने कहा कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए 500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। पंड समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बेहतर प्रबंधन के लिए प्रशासन की प्रशंसा की।
- भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी के चालीस वर्ष बाद कल रात यूनियन कॉर्बाइड फैक्ट्री से 377 टन खतरनाक कचरे को हटाने का काम शुरू हुआ। यह जहरीला कचरा सील बंद बारह कंटेनर में भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में पहुंचाया जा रहा है। कंटेनरों का ट्रक कल रात लगभग नौ बजे रवाना हुआ।भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुर्नवास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि इन वाहनों के लिए हरित गलियारा निर्मित किया गया है। उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ कचरा पीथमपुर के कचरा निस्तारण इकाई में जलाया जाएगा और राख में नुकसानदेह तत्वों की मौजूदगी की जांच की जाएगी। भट्टी से निकलने वाला धुआं चार स्तरीय विशेष फिल्टरों के जरिए निकलेगा ताकि आसपास का क्षेत्र प्रदूषित न हो।दो और तीन दिसम्बर 1984 की रात यूनियन कॉर्बाइड कीटनाशक फैक्ट्री से अधिक जहरीले मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इस घटना में लगभग पांच हजार 479 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग गंभीर और दीर्घावधि की स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हुए थे। यह घटना विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में मानी जाती है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ने कचरे को स्थानांतरित करने के लिए चार सप्ताह की समय सीमा तय की है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को ‘फसल बीमा योजना' के लिए आवंटन बढ़ाने सहित केंद्रीय मंत्रिमंडल के कुछ अन्य फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि नये साल में सरकार का पहला फैसला किसानों को समर्पित है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक के बाद एक पोस्ट में यह भी कहा कि उनके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों के कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2021-22 से लेकर वर्ष 2025-26 तक कुल 69,515.71 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी। इस निर्णय से 2025-26 तक देश भर के किसानों को नहीं रोके जा सकने योग्य प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के जोखिम कवरेज में मदद मिलेगी। इस फैसले का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘नए वर्ष का पहला निर्णय हमारे देश के करोड़ों किसान भाई-बहनों को समर्पित है। हमने फसल बीमा के लिए आवंटन बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे जहां अन्नदाताओं की फसलों को और ज्यादा सुरक्षा मिलेगी, वहीं नुकसान की चिंता भी कम होगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार किसानों के कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमें अपने सभी किसान बहनों और भाइयों पर गर्व है जो हमारे राष्ट्र का पेट भरने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। 2025 का पहला, मंत्रिमंडल का फैसला हमारे किसानों की समृद्धि बढ़ाने के लिए समर्पित है। मुझे खुशी है कि इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।'' प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा किसानों को सस्ती दर पर डीएपी उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एकमुश्त विशेष पैकेज को 3,850 करोड़ रुपये तक बढ़ाने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे किसानों को सस्ती कीमतों पर डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मंत्रिमंडल के इस फैसले से किसानों को डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की 50 किलो वजन की एक बोरी 1,350 रुपये में मिल सकेगी।
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गाजियाबाद. देश के जाने माने कार्टूनिस्ट हरीश चंद्र शुक्ला उर्फ ‘काक' का बुधवार को यहां निधन हो गया। उनके पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 85 वर्ष के थे।
हरीश चंद्र शुक्ला का आज यहां हिंडन शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया जहां परिजनों और मित्रों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। हरीश चंद्र शुक्ला का जन्म 16 मार्च 1940 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के एक छोटे से गाँव पुरा में हुआ था। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर रहे काक के पिता शोभा नाथ शुक्ला एक स्वतंत्रता सेनानी थे। काक के कार्टूनों का स्वर्णिम काल 1983 से 1990 के बीच था, जब अखबार पढ़ने वाले ज्यादातर लोग पहले ‘काक' के कार्टून देखते थे और बाद में समाचार पढ़ते थे। उनकी विनोदप्रियता और चुटीली कटाक्ष शैली उनके कार्टूनों को एक खास किस्म की धार देती थी जिसके लिए वह अपने पाठकों के बीच लोकप्रिय थे। उनके कार्टून दैनिक राजनीतिक घटनाओं का सटीक विश्लेषण करते थे। उनका पहला कार्टून 1967 में दैनिक जागरण समाचारपत्र में प्रकाशित हुआ था। उन्होंने 1983 से 1985 तक जनसत्ता (इंडियन एक्सप्रेस समूह) के साथ और जुलाई 1985 से जनवरी 1999 तक नवभारत टाइम्स (टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह) के साथ एक संपादकीय कार्टूनिस्ट के रूप में काम किया। काक को उनके योगदान के लिए 2003 में हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा “काका हाथरसी सम्मान” और एर्नाकुलम (कोच्चि) में उन्हें केरल ललित कला अकादमी और केरल कार्टून अकादमी द्वारा भी सम्मानित किया गया। 2009 में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कार्टूनिस्ट्स, बैंगलोर ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा। 2016 में उन्हें पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और 2017 में भारतीय प्रेस परिषद द्वारा सम्मानित किया गया। -
अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नव वर्ष के मौके पर बुधवार को राम मंदिर में भगवान राम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, नव वर्ष की पूर्व संध्या पर अयोध्या में दो लाख से अधिक भक्त आ चुके थे और बुधवार सुबह लगभग तीन लाख से अधिक लोग राम लला के दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु राम लला के दर्शन के लिए कतार में खड़े थे और भक्तों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शहर को कई सेक्टरों और जोन में विभाजित किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और इस दौरान चौबीसों घंटे वाहनों की जांच की गई। उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ी मंदिर में भी ऐसा ही नजा देखने को मिला, जहांसुबह की आरती से लेकर शाम की शयन आरती तक भीड़ लगी रही। अधिकारियों के मुताबिक, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने राम जन्मभूमि पथ पर 10 अतिरिक्त आगंतुक दीर्घाएं तैयार की थीं, जिससे दर्शन के लिए लाइनों की संख्या 10 से बढ़कर 20 हो गई। पुलिस उपाधीक्षक (अयोध्या) आशुतोष तिवारी ने बताया कि शहर को सात सुरक्षा सेक्टरों और 24 जोन में विभाजित किया गया था, जिसमें प्रत्येक क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए थे। उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया और भीड़भाड़ से बचने व लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यातायात की आवाजाही को सख्ती से नियंत्रित किया गया। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक बयान में बताया कि सर्दियों के मौसम और छुट्टियों के कारण आगंतुकों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि स्कूल, अदालतें और कृषि कार्य बंद होने के कारण लोग छुट्टियां मनाने गोवा, नैनीताल, शिमला या मसूरी जैसे पारंपरिक पर्यटन स्थल जाने के बजाये अयोध्या आना पसंद करते हैं।
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नयी दिल्ली. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि देश के कृषि और संबद्ध क्षेत्र के चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 3.5-4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह 2023-24 में दर्ज 1.4 प्रतिशत की वृद्धि से उल्लेखनीय सुधार होगा। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर नए साल के संदेश में चौहान ने पिछले छह महीनों में लागू की गई विभिन्न ग्रामीण कल्याण पहल पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के विकास पथ पर विश्वास व्यक्त किया। चौहान ने कहा, ‘‘नया साल अच्छी खबर लेकर आया है कि इस साल कृषि और संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 से चार प्रतिशत रहने की संभावना है।'' मंत्री ने किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए जारी प्रयासों पर जोर दिया और गरीबों के लिए आवास, गांव की सड़क संपर्क, कौशल विकास और ग्रामीण आजीविका में सुधार के उद्देश्य से लखपति दीदी अभियान सहित कई ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
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नयी दिल्ली. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को कहा कि पूर्वी, उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य क्षेत्रों के कुछ इलाकों को छोड़कर जनवरी में भारत के अधिकतर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत तथा दक्षिणी प्रायद्वीप के मध्य भागों को छोड़कर देश के अधिकतर भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मध्य भारत के पश्चिमी और उत्तरी भागों में जनवरी के दौरान शीतलहर दिवस सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। आईएमडी ने कहा कि जनवरी से मार्च के दौरान उत्तर भारत में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, जो दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 86 प्रतिशत से भी कम होगी। साल 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर, इस अवधि के दौरान उत्तर भारत में औसत वर्षा का स्तर लगभग 184.3 मिमी है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राज्य सर्दियों (अक्टूबर से दिसंबर) में गेहूं, मटर, चना और जौ सहित रबी फसलों की खेती करते हैं और गर्मियों (अप्रैल से जून) में उनकी कटाई करते हैं। सर्दियों के दौरान पश्चिमी विक्षोभ के कारण होने वाली वर्षा, उनकी खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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प्रौद्योगिकी पर 824.77 करोड़ रुपये का कोष बनाया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक
नयी दिल्ली. केंद्र ने बुधवार को दो फसल बीमा योजनाओं - पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस - को वर्ष 2025-26 तक एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिए 824.77 करोड़ रुपये का एक अलग कोष भी बनाया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) को 15वें वित्त आयोग की अवधि के अनुरूप विस्तारित करने के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘योजनाओं को किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और इसलिए पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस के लिए आवंटन बढ़ाया गया है।'' पंजाब में चल रहे किसान आंदोलन और सरकार उन्हें क्यों नहीं समझा पा रही है, इस बारे में पूछे जाने पर वैष्णव ने कहा, ‘‘अगर आप हरियाणा चुनाव के दौरान घूमे होते, तो किसानों ने ‘आंदोलन' बनाम वास्तविक कल्याण बनाम 'किसानों के लिए अच्छा' पर बहुत बढ़िया प्रतिक्रिया दी थी, आप खुद देख सकते थे।'' पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआई के लिए कुल परिव्यय वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के लिए 69,515.71 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है, जो 2020-21 से 2024-25 के लिए 66,550 करोड़ रुपये से अधिक है। फसल बीमा योजनाओं के कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी के लक्षित समावेश पर मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने नवोन्मेषण और प्रौद्योगिकी (एफआईएटी) के लिए 824.77 करोड़ रुपये का एक अलग कोष बनाने को भी मंजूरी दी है। वैष्णव ने कहा कि यह फसल क्षति के तेजी से आकलन, दावा निपटान और कम विवादों के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग में मदद करेगा। यह आसान नामांकन और अधिक कवरेज के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग करने में भी मदद करेगा। कृषि मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस कोष का उपयोग योजना के तहत तकनीकी पहल जैसे कि यस-टेक, विंड्स आदि के साथ-साथ अनुसंधान और विकास अध्ययनों के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा। तकनीक का उपयोग कर उपज अनुमान प्रणाली (यस-टेक) उपज अनुमान के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करती है, जिसमें तकनीक-आधारित उपज अनुमानों को न्यूनतम 30 प्रतिशत महत्व दिया जाता है। आंध्र प्रदेश, असम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित नौ प्रमुख राज्य वर्तमान में इसे लागू कर रहे हैं। अन्य राज्यों को भी तेजी से इसमें शामिल किया जा रहा है। यस-टेक के व्यापक कार्यान्वयन के साथ, फसल कटाई प्रयोग और संबंधित मुद्दे धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। यस-टेक के तहत, वित्त वर्ष 2023-24 के लिए दावा गणना और निपटान किया गया है। मध्य प्रदेश ने 100 प्रतिशत तकनीक-आधारित उपज अनुमान को अपनाया है। मौसम सूचना और नेटवर्क डेटा सिस्टम (विंड्स) में ब्लॉक स्तर पर स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और पंचायत स्तर पर स्वचालित वर्षा गेज (एआरजी) स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। विंड्स के तहत, हाइपर-लोकल मौसम डेटा विकसित करने के लिए वर्तमान नेटवर्क घनत्व में पांच गुना वृद्धि की परिकल्पना की गई है। इस पहल के तहत, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा केवल डेटा किराया लागत का भुगतान किया जाता है। नौ प्रमुख राज्य विंड्स को लागू करने की प्रक्रिया में हैं, जिनमें केरल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और पुडुचेरी शामिल हैं। अन्य राज्यों ने भी इसे लागू करने की इच्छा व्यक्त की है। निविदा से पहले आवश्यक विभिन्न पृष्ठभूमि तैयारी और नियोजन कार्यों के कारण 2023-24 के दौरान राज्यों द्वारा विंड्स को लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 90:10 के अनुपात में उच्च केंद्रीय निधि साझा करने वाली राज्य सरकारों को लाभ देने के लिए 2023-24 की तुलना में 2024-25 को विंड्स के कार्यान्वयन के पहले वर्ष के रूप में अनुमोदित किया है। मंत्रालय के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों के सभी किसानों को प्राथमिकता के आधार संतुष्ट करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं और आगे भी किए जाते रहेंगे। इस सीमा तक, केंद्र पूर्वोत्तर राज्यों के साथ प्रीमियम सब्सिडी का 90 प्रतिशत साझा करता है। जारी की गई पॉलिसियों के संदर्भ में, पीएमएफबीवाई, देश की सबसे बड़ी बीमा योजना है और कुल प्रीमियम के मामले में तीसरी सबसे बड़ी है। लगभग 23 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे लागू कर रहे हैं। पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस विभिन्न अप्रत्याशित घटनाओं के कारण फसल के नुकसान या क्षति से प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। पीएमएफबीवाई, उपज जोखिम के आधार पर फसल के नुकसान को कवर करता है, जबकि आरडब्ल्यूबीसीआईएस मौसम संबंधी जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करता है। - नयी दिल्ली। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मंगलवार को कहा कि उसने 210 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उसने 2024 में रिकॉर्ड 100 प्रतिशत दोष सिद्धि दर सुनिश्चित की। आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि एनआईए ने वर्ष के दौरान कम से कम 27 फरार अपराधियों को पकड़ा। कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सफल जांच और वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से निपटने पर अधिक जोर देकर संघीय जांच एजेंसी ने इस साल कई मुकाम हासिल किये। बयान में कहा गया है कि 2024 में एनआईए द्वारा दर्ज 80 मामलों में अपराधों की प्रमुख श्रेणियों में कुल 210 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बयान में कहा गया है कि 2024 में एनआईए ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 68 आरोपियों को दोषी ठहरया जाना सुनिश्चित किया (25 मामलों में) और 408 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। विभिन्न आतंकवादी, गैंगस्टर और अन्य आपराधिक गिरोह को खत्म करने के एजेंसी के निरंतर प्रयासों के तहत वर्ष के दौरान 19.57 करोड़ रुपये की कुल 137 संपत्तियां/परिसंपत्तियां कुर्क की गईं। बयान में कहा गया कि आईएसआईएस से जुड़े 11 जिहादियों, जम्मू-कश्मीर के पांच जिहादियों और 24 अन्य जिहादियों की गिरफ्तारी की गई। इसमें कहा गया कि वर्ष के दौरान एनआईए ने कुल 27 फरार अपराधियों को पकड़ा।
- देहरादून। साल 2000 में उत्तराखंड की स्थापना होने के बाद से इसके सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2024 को सबसे महत्वपूर्ण वर्ष कहना गलत नहीं होगा। उत्तराखंड सरकार ने इस साल समान नागरिक संहिता के लिए कानून पारित किया, जिससे यह देश में ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया। समान नागरिक संहिता, एक ऐसा मुद्दा है जिस पर तीखी बहस हुई है और इस पर लोगों की राय अलग-अलग है। वैसे तो भाजपा सरकार के राजनीतिक और विधायी एजेंडे में समान नागरिक संहिता केंद्र में और प्रमुख मुद्दा रहा है, लेकिन इसने संभावित दंगाइयों को रोकने के लिए एक कानून भी बनाया है। इस कानून के तहत, किसी भी उपद्रव के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई सरकार दंगाइयों से करेगी। उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित होने के ठीक एक दिन बाद हल्द्वानी के मुस्लिम बहुल बनभूलपुरा क्षेत्र में आठ फरवरी को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद ही उत्तराखंड सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली अधिनियम को लागू किया गया था। हल्द्वानी में एक अवैध मदरसा और उसके परिसर में नमाज अदा करने के लिए बनाए गए एक छोटे से ढांचे को गिराए जाने से दंगा भड़क गया था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 100 पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे। सुदूर हिमालय में जून 2024 में ट्रैकिंग करते समय बर्फीला तूफान आने के कारण भारत के नौ पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। केदारघाटी में अगले महीने यानी जुलाई में चारधाम यात्रा के दौरान भारी बारिश और कई बार भूस्खलन होने से 17 लोगों की मौत हो गई थी और 25 लोग घायल हो गए थे। लाखों यात्री फंस गए थे, जिसके बाद यात्रा को स्थगित कर दिया गया। उत्तराखंड के लिए नवंबर का महीना घातक साबित हुआ क्योंकि इस दौरान हुई दो दुर्घटनाओं में 45 लोगों की मौत हो गई थी। अल्मोड़ा में चार नवंबर को खचाखच भरी एक बस के गहरी खाई में गिर जाने से 36 लोगों की मौत हो गई थी।अल्मोड़ा में हुई इस घटना के ठीक एक सप्ताह बाद दूसरी दर्दनाक घटना हुई, जिसमें एक पार्टी से लौट रहे युवाओं की इनोवा कार एक ट्रक से टकरा गई, जिससे कार में मौजूद सभी छह लोगों की मौत हो गई। इस वर्ष उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण 240 से अधिक तीर्थयात्रियों की मृत्यु हो गई। समान नागरिक संहिता कई साल तक भाजपा का राष्ट्रीय स्तर का एजेंडा रहा है। लेकिन उत्तराखंड में पार्टी की सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले इसे कानून बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए, जिससे यह ऐसा करने वाली पहली सरकार बन गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गठित और उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने फरवरी में राज्य सरकार को चार खंडों में यूसीसी का एक व्यापक मसौदा प्रस्तुत किया। धामी सरकार ने कुछ दिनों बाद विधानसभा में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया और इसे 7 फरवरी को पारित कर दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 मार्च को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अधिनियम को मंजूरी दे दी, जिससे यह देश का ऐसा पहला राज्य बन गया जहां यूसीसी पारित किया गया है। राज्य सरकार ने कार्यान्वयन के नियम निर्धारित करने के लिए पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है। असम सहित कई भाजपा शासित राज्य पहले ही उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता को मॉडल के रूप में अपनाने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि ऐसी संभावना है कि जनवरी तक राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में संसद में कहा कि भाजपा शासित हर राज्य समान नागरिक संहिता लागू करेगा, जैसा कि उत्तराखंड में किया गया। उत्तराखंड में 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में राज्य में यूसीसी लागू करना धामी का प्रमुख चुनावी वादा था और इसी के बाद भाजपा दोबारा राज्य की सत्ता में लौटी थी। साल 2000 में उत्तराखंड की स्थापना होने के बाद से कोई भी पार्टी लगातार दो बार राज्य में सरकार बनाने की उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई थी, लेकिन भाजपा ने दो साल पहले हुए चुनाव में यह उपलब्धि अपने नाम कर ली। भाजपा ने इस साल हुए लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में अच्छा प्रदर्शन किया तथा लगातार तीसरी बार सभी पांचों सीटों पर कब्जा बरकरार रखा।
- नयी दिल्ली। भारत नए साल में अपने दो उपग्रहों के ‘डॉकिंग' परीक्षण में कामयाबी की उम्मीद कर रहा है। इसके साथ ही, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ तालमेल में सबसे महंगे पृथ्वी अवलोकन अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित करने को लेकर भी देश आशान्वित है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पहला उपग्रह डॉकिंग प्रयोग (स्पेडैक्स) सात जनवरी को होने वाला है, जिससे भारत के इस जटिल तकनीक में महारत हासिल करने वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल होने की संभावना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘यह पहला मिशन छोटे उपग्रहों वाला है। हम इसे भारी उपग्रहों के साथ आगे बढ़ाएंगे और यह डॉकिंग (उपग्रहों के जुड़ने की) प्रौद्योगिकी हमें भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और उसके बाद के मिशन की स्थापना में मदद करेगी।'' सिंह ने कहा, ‘‘इसरो का स्पैडेक्स मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नए युग की शुरुआत है, जो भारत की तकनीकी क्षमता और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। ‘डॉकिंग' क्षमता भविष्य के मिशनों को अंतरिक्ष में पेलोड के स्थानांतरण के माध्यम से अकल्पनीय परिणाम प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी, जो एक तरह का चमत्कार होगा और विकसित भारत का प्रमाण होगा।'' उन्होंने कहा कि नए साल में इसरो मार्च तक नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता है, जिसे अपनी तरह का सबसे महंगा उपग्रह बताया जा रहा है। नए साल में श्रीहरिकोटा से 100वां प्रक्षेपण होगा, जब जनवरी में जीएसएलवी ‘नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन' (नाविक) सेवाओं के लिए एनवीएस-दो उपग्रह प्रक्षेपित करेगा। एचएएल-एलएंडटी उद्योग संघ द्वारा निर्मित ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) में से पहला, पहली तिमाही में उच्च थ्रस्ट इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली को शामिल करते हुए एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह लॉन्च करेगा, जिसके बाद एक अंतरराष्ट्रीय ग्राहक के लिए एलवीएम3 का वाणिज्यिक मिशन होगा। गगनयान के पहले मानवरहित मिशन को भी नए साल की पहली तिमाही में प्रक्षेपित किए जाने की उम्मीद है। इस मिशन में व्योममित्र रोबोट को शामिल किया जाएगा। सिंह ने कहा, ‘‘हमारा मानव युक्त अंतरिक्ष उड़ान गगनयान 2025 के अंत तक या 2026 की शुरुआत में होगा।'' उन्होंने कहा कि यह मिशन मानव रहित मिशन की सफलता पर निर्भर करता है। इसरो ने मार्च से पहले गगनयान मिशन के लिए ‘क्रू एस्केप सिस्टम' का परीक्षण करने की भी योजना बनाई है।
- महाकुम्भ नगर। प्रयागराज में महाकुम्भ को लेकर की जा रही तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं एक साधु पुरुष हैं। वह यहां बार-बार आकर व्यवस्थाओं का अवलोकन कर रहे हैं जिससे धर्मावलंबियों का हौसला और मनोबल प्रबल हो रहा है। ऋषि-मुनियों और साधकों को साधना, यज्ञ और तप करने के लिए अनुकूल माहौल मिल रहा है।'' शंकराचार्य ने इस बात पर भी जोर दिया कि महाकुंभ के दौरान अनुष्ठान और पूजा का पुण्य न केवल राज्य, बल्कि व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी प्राप्त होगा। स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा, ‘‘कालांतर में भारत में विधर्मी शासन रहा जिसमें हमारे धार्मिक अनुष्ठानों को महत्व नहीं मिलता था। आज फिर से भारत भूमि में सनातन को मानने वालों का शासन आया है, जिसका असर यहां प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘तीर्थ क्षेत्र में आने के लिए भक्ति और भक्त होना जरूरी है। कोई अभक्त और अशिष्ट शासक अहंकार से आएगा तो तीर्थ उसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। जितना मुखर और उदार होकर मुख्यमंत्री जी ने साधु संतों के मान-सम्मान की व्यवस्था की है। ऐसे में साधु संत भी राज्य की समृद्धि, कल्याण, आर्थिक उत्थान की विशेष कामना करेंगे।'' स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा कि उनके शिविर में असम से आए केले के पत्तों के बने आसन महाकुम्भ का प्रमुख आकर्षण बनने जा रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘‘सेक्टर 18 में स्थित शिविर में असम से 151 आसन आ चुके हैं। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर से बड़ी संख्या में नारियल और कच्ची सुपारी भी लाई गई है। यह सभी चीजें महाकुम्भ के दौरान यज्ञशाला में हवन में उपयोग में लाई जाएंगी।'' केले के बने आसन के बारे में उन्होंने बताया कि केले के पेड़ को काटकर और खोलकर सुखाया जाता है जिसके बाद इसे जोड़कर तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि पहली बार महाकुम्भ में इस तरह के आसन लाए गए हैं।
- नयी दिल्ली । वर्ष 2023 में समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र में हुई हिंसा की कुल घटनाओं में से लगभग 77 प्रतिशत घटनाएं मणिपुर में हुईं। गृह मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। मणिपुर, बहुसंख्यक मेइती समुदाय और आदिवासी कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से जातीय हिंसा का गवाह रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में मणिपुर में जातीय संघर्ष के कारण हिंसक घटनाओं में वृद्धि देखी गई और इसके परिणामस्वरूप 2022 की तुलना में नागरिकों व सुरक्षा बलों के कर्मियों के हताहत होने की संख्या में वृद्धि हुई। गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पूर्वोत्तर क्षेत्र में हुई कुल हिंसक घटनाओं में से लगभग 77 प्रतिशत घटनाएं मणिपुर में हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वोत्तर में हुई कुल 243 हिंसक घटनाओं में से 187 घटनाएं मणिपुर में हुईं। मणिपुर में आतंकवाद रोधी अभियानों के परिणामस्वरूप 33 उग्रवादी मारे गए और 184 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया, साथ ही 49 हथियार बरामद किए गए। इसके अलावा, उग्रवादी संगठनों के 80 उग्रवादियों ने 31 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। मणिपुर में तीन मई, 2023 को मेइती और कुकी समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा भड़क उठी, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग हताहत हुए, घायल हुए और आगजनी की घटनाएं हुईं। गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए तत्काल और निरंतर कई कदम उठाये। मणिपुर के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, सेना और असम राइफल्स की अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती, हेलीकॉप्टर व ड्रोन तैनात कर और एकीकृत कमांड सिस्टम लागू करके तत्काल कदम उठाये गये। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मई से एक जून 2023 तक यात्रा के दौरान सरकारी अधिकारियों, सुरक्षा बलों के अधिकारियों, नेताओं और नागरिक संगठनों के 100 से अधिक सदस्यों के साथ 15 से अधिक बैठकें कीं। अधिकारियों ने बताया कि मणिपुर में अब तक हिंसा में 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक अनीश दयाल सिंह मंगलवार को पद से सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने कार्यभार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वितुल कुमार को सौंपा जो पद पर स्थायी नियुक्ति होने तक बल के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में काम करेंगे। मणिपुर कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी सिंह ने एक महत्वपूर्ण समय के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का नेतृत्व किया, जब दुनिया के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल ने नक्सलवाद से निपटने के लिए सरकार के अभियान में महत्वपूर्ण प्रगति की। सिंह के नेतृत्व में सीआरपीएफ ने वाम उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों में तीन दर्जन से अधिक अग्रिम परिचालन बेस (एफओबी) स्थापित किए और चार नयी बटालियनों की शुरुआत की, जिससे छत्तीसगढ़ में नक्सल रोधी अभियानों के लिए 4,000 से अधिक कर्मी जुड़े। सिंह के कार्यकाल के दौरान ही 2024 का लोकसभा चुनाव और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में पहला विधानसभा चुनाव हुआ, जब सीआरपीएफ ने पूरे देश में सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। सिंह अपने करियर की शुरुआत मणिपुर से करने के बाद, 2000 के दशक की शुरुआत में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए, जहां उन्होंने गुप्तचर ब्यूरो में विभिन्न प्रमुख भूमिकाएं निभायीं। बाद में उन्होंने पिछले साल दिसंबर में सीआरपीएफ का प्रभार संभालने से पहले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का नेतृत्व किया, जो भारत-चीन सीमा की रक्षा के लिए जिम्मेदार एक अर्धसैनिक बल है। सिंह के करियर की उल्लेखनीय पहलों में देशभर में सीआरपीएफ के 130 से अधिक बटालियन का पुनर्गठन शामिल था। इस कदम का उद्देश्य बल की परिचालन दक्षता में सुधार करना था। बल के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए, सिंह ने कंपनी कमांडरों और सहायक कमांडेंटों के साथ ‘संवाद' सत्र शुरू किए, जिसका उद्देश्य उनकी जरूरतों पर जानकारी जुटाना था। इस कदम की व्यापक सराहना हुई। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सम्मान में सरकार द्वारा घोषित सात दिनों के शोक के कारण, नेतृत्व कार्यभार हस्तांतरण बिना किसी औपचारिक समारोह के किया गया। उत्तर प्रदेश के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी वितुल कुमार अब सीआरपीएफ के कार्यवाहक महानिदेशक की भूमिका में हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सभी लोगों को 2025 की शुभकामनाएं दी हैं।‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा:
“2025 की शुभकामनाएँ!यह वर्ष सभी के लिए नए अवसर, सफलता और अनंत खुशियाँ लेकर आए। सभी को उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिले।” -
नई दिल्ली। सरकार ने आज से वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन-ओएनओएस योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को सिंगल सब्सक्रिप्शन प्लेटफार्म के तहत शोधपत्रों, जरनलों और शैक्षिक सामग्री सहित व्यापक डिजिटल ज्ञान संसाधनों तक निर्बाध पहुंच उपलब्ध कराना है।
इस योजना से अलग-अलग जगह सब्सक्रिप्शन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ज्ञान सबको सुलभ होगा। इससे देश भर के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संस्थानों को लाभ होने की संभावना है।विश्वविद्यालयों और आईआईटी सहित सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों के 1 करोड़ 80 लाख विद्यार्थियों को इस पहल के अंग के रूप में दुनिया भर के शीर्ष जरनल में प्रकाशित शोध पत्रों को देखने की सुविधा मिलेगी।इस पहल के पहले चरण के तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, मेडिसिन, गणित, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान और मानवविज्ञान से संबंधित 13 हजार चार सौ से अधिक अंतरराष्ट्रीय जर्नलों को शोधार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि ओएनओएस के बाद के चरणों में इस सुविधा का विस्तार निजी क्षेत्र के उच्च शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों के लिए भी किया जाएगा ताकि देश के सभी जरूरतमंद लोगों को भी यह सुलभ हो सके। ओएनओएस योजना के तहत तीन वर्ष की अवधि के लिए 6 हजार करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। यह चुनिंदा उत्कृष्ट ओपन एक्सेस जर्नलों में प्रकाशन के वास्ते लाभार्थी लेखकों के लिए सालाना 150 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता भी उपलब्ध कराएगी।

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