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नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर धातु के दुर्घटनारोधी बैरियर लगाने के लिए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश ठेकेदारों को दिए हैं। सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा कि दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रैश टेस्ट रिपोर्ट के अनुरूप सामग्री की आपूर्ति ठेकेदारों द्वारा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इन बैरियरों को निर्माताओं द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थापित किया जाना चाहिए। ठेकेदार को निर्धारित डिज़ाइन, मानकों और विशिष्टताओं के अनुसार लगाए गए दुर्घटनारोधी बैरियर के लिए निर्माताओं से प्रमाणपत्र भी प्राप्त करना होगा।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुवैत के अमिर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबा के निमंत्रण पर 21 और 22 दिसंबर को कुवैत यात्रा पर रहेंगे। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पिछले 43 वर्षों में पहली कुवैत यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री कुवैत नेतृत्व के साथ चर्चा करेंगे। श्री मोदी कुवैत में भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।
- - नियोक्ताओं से 15 जनवरी 2025 तक 4.66 लाख मामलों में जवाब प्रस्तुत करने/सूचना अपडेट करने का भी अनुरोध किया गया, जहां ईपीएफओ द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया हैनई दिल्ली। ईपीएफओ द्वारा उच्च वेतन पर पेंशन के लिए विकल्पों/संयुक्त विकल्पों के सत्यापन हेतु आवेदन जमा करने के लिए एक ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। यह सुविधा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 04.11.2022 के आदेश के अनुपालन में पात्र पेंशनभोगियों/सदस्यों के लिए थी। यह सुविधा 26.02.2023 को शुरू की गई थी और इसे 03.05.2023 तक उपलब्ध रहना था। हालांकि, कर्मचारियों के निवेदन पर विचार करते हुए, पात्र पेंशनभोगियों/सदस्यों को आवेदन दाखिल करने के लिए फिर पूरे चार महीने का समय दिया गया और इसे 26.06.2023 तक बढ़ा दिया गया था।इस संदर्भ में उल्लेनीय है कि पात्र पेंशनभोगियों/सदस्यों को होने वाली किसी भी कठिनाई को दूर करने के लिए फिर 15 दिनों का समय दिया गया। तदनुसार, कर्मचारियों द्वारा विकल्प/संयुक्त विकल्प के सत्यापन हेतु आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 11.07.2023 तक बढ़ा दी गई और पेंशनभोगियों/सदस्यों से विकल्प/संयुक्त विकल्प के सत्यापन हेतु कुल 17.49 लाख आवेदन प्राप्त हुए।नियोक्ताओं एवं नियोक्ता संघों से प्राप्त निवेदन के मद्देनजर, जिनमें आवेदक पेंशनभोगियों/सदस्यों के वेतन विवरण अपलोड करने की समयावधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, नियोक्ताओं को वेतन विवरण आदि ऑनलाइन जमा करने के लिए 30.09.2023 तक पुनः 31.12.2023 तक तथा उसके बाद भी 31.05.2024 तक कई अवसर दिए गए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियोक्ता आवेदनों पर कार्रवाई करने में सक्षम हों।आवेदनों की तिथियों को इतना बढ़ाने के बावजूद यह देखा गया कि विकल्पों/संयुक्त विकल्पों के सत्यापन के लिए 3.1 लाख से अधिक आवेदन अभी भी नियोक्ताओं के पास लंबित हैं। नियोक्ताओं और नियोक्ता संघों से भी कई निवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें आवेदक पेंशनभोगियों/सदस्यों के वेतन विवरण अपलोड करने के लिए आगे की समय अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।इसलिए, नियोक्ताओं को 31.01.2025 तक अंतिम अवसर दिया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियोक्ता विकल्प/संयुक्त विकल्पों के सत्यापन के लिए इन लंबित आवेदनों को संशोधित करके अपलोड करें।नियोक्ताओं से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे 15.01.2025 तक 4.66 लाख से अधिक मामलों में जवाब प्रस्तुत करें/सूचना को अद्यतन करें, जहां ईपीएफओ ने उन आवेदनों के संबंध में अतिरिक्त जानकारी/स्पष्टीकरण मांगा है जो ईपीएफओ द्वारा प्राप्त और जांचे जा चुके हैं।
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नई दिल्ली। भारत एक ऐसा देश है जहां हर धर्म, जाति, और संस्कृति के लोग अपने त्योहारों को धूमधाम से मनाते हैं.। 2025 में भी भारत में विभिन्न धर्मों के त्योहारों और सरकारी छुट्टियों के कारण लोगों को लम्बे अवकाश का अवसर मिलेगा।. इस साल कुल छुट्टियों में से एक चौथाई छुट्टियां सप्ताहांत पर आएंगी, जिससे लोग अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिता सकेंगे।
2025 में आने वाली प्रमुख छुट्टियांगणतंत्र दिवस – रविवार, 26 जनवरीराम नवमी – रविवार, 6 अप्रैलमोहर्रम – रविवार, 6 जुलाईबकरीद – शनिवार, 7 जूनरक्षाबंधन – शनिवार, 9 अगस्तजन्माष्टमी – शनिवार, 16 अगस्तईद-उल-फितर – सोमवार, 31 मार्चडॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती – सोमवार, 14 अप्रैलबुद्ध पूर्णिमा – सोमवार, 12 मईस्वतंत्रता दिवस – शुक्रवार, 15 अगस्तदीवाली – सोमवार, 20 अक्टूबरलम्बे वीकेंड्स की संभावनाकुछ छुट्टियां कर्मचारियों के लिए चार दिन का अवकाश भी बन जाएंगीहोली (गुरुवार, 13 मार्च) और होली दहन (शुक्रवार, 14 मार्च) के साथ वीकेंड के कारण चार दिन की छुट्टी मिलेगी.स्वतंत्रता दिवस (शुक्रवार, 15 अगस्त) और जन्माष्टमी (शनिवार, 16 अगस्त) के कारण एक लम्बा वीकेंड मिलेगा.दशहरा महानवमी (बुधवार, 1 अक्टूबर), उसके बाद गांधी जयंती (गुरुवार, 2 अक्टूबर) और विजयदशमी के कारण एक extended छुट्टी मिलेगी.दीवाली सप्ताह में 20 अक्टूबर (दीवाली), 22 अक्टूबर (गोवर्धन पूजा) और 23 अक्टूबर (भैया दूज/चित्रगुप्त जयंती) के कारण केवल 21 अक्टूबर को कामकाजी दिन होगा।अन्य महत्वपूर्ण छुट्टियांहजरत अली का जन्मदिन – मंगलवार, 14 जनवरीमहाशिवरात्रि – बुधवार, 26 फरवरीमहावीर जयंती – गुरुवार, 10 अप्रैलगुरु नानक जयंती/कार्तिक पूर्णिमा – बुधवार, 5 नवंबरक्रिसमस – गुरुवार, 25 दिसंबरप्रतिबंधित छुट्टियां2025 में 31 प्रतिबंधित छुट्टियाँ रहेंगी, जिनमें पाँच शुक्रवार, चार शनिवार और चार रविवार को छुट्टियाँ होंगी. - गया (बिहार)। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायक ने मंगलवार को बोधगया का दौरा किया और बौद्ध धर्म में सबसे पवित्र स्थल माने जाने वाले महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की। श्रीलंका के राष्ट्रपति गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के तुरंत बाद सीधे 1,500 साल पुराने महाबोधि मंदिर गए। महाबोधि मंदिर, भगवान बुद्ध के जीवन और विशेष रूप से उनके ज्ञान प्राप्ति से संबंधित चार पवित्र स्थलों में से एक है। हवाई अड्डे पर बिहार के मंत्री प्रेम कुमार और संतोष कुमार सुमन तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने श्रीलंका के राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस अवसर पर दिसानायक के साथ गया के जिलाधिकारी एवं महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) के अध्यक्ष त्यागराजन एसएम और सचिव महाश्वेता महारथी एवं बीटीएमसी के सदस्य अरविंद कुमार सिंह भी मौजूद थे। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने महाबोधि मंदिर के समीप स्थित पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे प्रार्थना की और फूल भी चढ़ाए। उन्होंने बाद में बोधगया में श्रीलंका के बौद्ध मंदिर का दौरा किया। श्रीलंका के राष्ट्रपति के मीडिया प्रभाग ने बाद में ‘एक्स' पर लिखा, "राष्ट्रपति ने बोधगया का दौरा किया... महाबोधि मंदिर और पवित्र श्री महाबोधि वृक्ष पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने अनागारिक धर्मपाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की और ‘महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया' के महासचिव आदरणीय पेलवट्टे सीवाले थेरो और सारनाथ केंद्र के प्रमुख आदरणीय रथमलवाला सुमितनाथनंद थेरो से आशीर्वाद प्राप्त किया।" इस अवसर पर बीटीएमसी सचिव महाश्वेता महारथी ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति ने मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना की और पवित्र बोधि वृक्ष के दर्शन किये। उन्होंने मंदिर परिसर के अंदर स्थित भगवान बुद्ध से जुड़े कई अन्य स्थानों को भी देखा। राष्ट्रपति की यात्रा के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है, जहां बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने परियोजना लागत में कमी लाने के लिए बुनियादी ढांचा उद्योग के हितधारकों से 'मेड इन इंडिया' मशीनरी का इस्तेमाल बढ़ाने का मंगलवार को अनुरोध किया। गडकरी ने उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ढांचागत परियोजनाओं की गुणवत्ता पर कोई समझौता किए बगैर इनकी लागत घटाने के प्रयास किए जाने चाहिए क्योंकि पुल एवं सुरंग परियोजनाएं बेहद अहम हैं। गडकरी ने ढांचागत क्षेत्र के कंपनी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, "हमारे पास अच्छी प्रौद्योगिकी होनी चाहिए। लेकिन उसी के साथ हमें लागत कम करने पर भी ध्यान देना चाहिए। उसके लिए आप सभी लोगों से मेरा अनुरोध है कि 'मेड इन इंडिया' मशीनरी किस तरह संभव हो सकती है। यह हमारा सपना है और हम सबके लिए मिशन भी है।" ढांचागत परियोजनाओं में भारी मशीनों का इस्तेमाल होता है जिनका एक बड़ा हिस्सा आयातित होता है। देश में भारी ढांचागत मशीनों का निर्माण अभी सीमित स्तर पर ही होता है। इस अवसर पर गडकरी ने कहा कि जोजिला सुरंग परियोजना का 55 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।यह प्रस्तावित सुरंग श्रीनगर-करगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर 11,578 फीट की ऊंचाई पर जोजिला दर्रे से होकर गुजरने वाली है। भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में राजमार्ग बंद हो जाता है जिससे लद्दाख क्षेत्र का संपर्क कश्मीर से कट जाता है।
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नयी दिल्ली,। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को घोषणा की कि अगले साल से कुछ कक्षाओं के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पाठ्यपुस्तकों की कीमतें घटाई जाएंगी। प्रधान ने कहा कि एनसीईआरटी मौजूदा समय में हर साल पांच करोड़ पाठ्यपुस्तकें छापती है और अगले वर्ष से इस क्षमता को बढ़ाकर 15 करोड़ करने की दिशा में काम किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए अद्यतन पाठ्यक्रम के अनुसार नयी पाठ्यपुस्तकें 2026-27 शैक्षणिक सत्र से उपलब्ध होंगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एनसीईआरटी अगले शैक्षणिक वर्ष में 15 करोड़ गुणवत्तापूर्ण और किफायती किताबें प्रकाशित करेगी... फिलहाल वह करीब पांच करोड़ पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित करती है। पाठ्यपुस्तकों की मांग और आपूर्ति के संबंध में पहले कई चिंताएं रही हैं, लेकिन अब इनका समाधान किया जाएगा।''
प्रधान ने कहा, ‘‘चूंकि, छपने वाली किताबों की संख्या अधिक होगी, तो कुछ कक्षाओं के लिए पाठ्यपुस्तकों की कीमतें कम की जाएंगी। किसी भी कक्षा की पाठ्यपुस्तकों की कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अभिभावकों पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े।'' उन्होंने बताया कि नये राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (एनसीएफ) के अनुसार, पाठ्यपुस्तकों को अद्यतन करने की प्रक्रिया जारी है। प्रधान ने कहा, ‘‘प्रक्रिया जारी है और नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए पाठ्यपुस्तकें शैक्षणिक सत्र 2026-27 तक तैयार हो जाएंगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘15 में से सात ग्रेड के लिए नयी पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं और अगले शैक्षणिक वर्ष में चार और ग्रेड के लिए पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी। कला, शारीरिक शिक्षा और कल्याण (कक्षा 3-8) तथा व्यावसायिक शिक्षा (कक्षा 6-8) के लिए पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं। सभी अनुसूचित भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं और ऑनलाइन मंचों के माध्यम से सुलभ बनाई जा रही हैं।'' प्रधान ने बताया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों की संख्या 2014 में 14,974 से बढ़कर 2024 में 30,415 हो गई है। उन्होंने कहा, ‘‘दाखिला, स्थानांतरण और सीबीएसई से संबद्धता की प्रक्रिया अब पूरी तरह से ऑनलाइन है। केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सीबीएसई शत प्रतिशत ई-ऑफिस मंच पर काम कर रहे हैं। व्यावसायिक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाले स्कूल 2014 में 960 से बढ़कर 2024 में 29,342 हो गए हैं। कौशल शिक्षा में छात्रों का नामांकन 2014 में 58,720 से बढ़कर 2024 में 30.8 लाख से अधिक हो गया है।'' एक अलग संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान शिक्षा के बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘...जिसके कारण सात भारतीय संस्थान-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी कानपुर, आईआईटी मुंबई और आईआईटी मद्रास, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु तथा दिल्ली विश्वविद्यालय को प्रतिष्ठित क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में जगह मिली है।''
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नयी दिल्ली .भारतीय जनता पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष जे पी नड्डा का स्थान लेने वाले पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव फरवरी के अंत तक होने की संभावना है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। पार्टी सूत्रों ने बताया कि जारी संगठनात्मक चुनाव के तहत पार्टी की आधे से अधिक राज्य इकाइयों में मतदान प्रक्रिया जनवरी के मध्य तक पूरी होने की संभावना है। इस प्रक्रिया के बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा की राज्य इकाइयों के लगभग 60 प्रतिशत अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उनके स्थान पर अगले महीने के मध्य तक नए अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है। भाजपा के संविधान में यह प्रावधान है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कम से कम आधी राज्य इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो जाने चाहिए। पदाधिकारी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि नया भाजपा अध्यक्ष फरवरी के अंत तक कार्यभार संभाल लेगा।''
यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा का नया अध्यक्ष कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो वर्तमान में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य कर रहा हो, उन्होंने कहा कि वह सरकार या संगठन, किसी से हो सकता है और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। संयोग से उन्होंने भी 2020 में फरवरी में ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था। पार्टी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है लेकिन 2024 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नड्डा के कार्यकाल को विस्तार दिया गया था। इस चुनाव के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सत्ता में वापसी की। -
कटक. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) और उत्कर्ष ओडिशा सम्मेलन-2025 में शामिल होने के लिए अगले साल जनवरी में ओडिशा का दो बार दौरा करेंगे। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सोमवार शाम यहां ओडिशा पुलिस हवलदार-कांस्टेबल-सिपाही एसोसिएशन के वार्षिक समारोह में यह बात कही। प्रवासी भारतीय दिवस का 18वां संस्करण आठ से 10 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा और उत्कर्ष ओडिशा सम्मेलन 2025 का आयोजन 28 और 29 जनवरी को होगा। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए 30 नवंबर से एक दिसंबर तक ओडिशा का दौरा किया था।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीड़ितों या सही दावेदारों को 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी हैं और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ लड़ाई निरंतर जारी रहेगी। सीतारमण ने वर्ष 2024-25 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के पहले बैच पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भगोड़े विजय माल्या की 14,131.6 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी मामले में 1,052.58 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी बैंकों को वापस कर दी गई है। वित्त मंत्री के जवाब के अनुसार, मेहुल चोकसी मामले में 2,565.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उन्हें नीलाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) मामले में, धोखाधड़ी के शिकार वास्तविक निवेशकों को 17.47 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी गईं। उन्होंने कहा, ‘‘पीएमएलए के मामले में, ईडी ने प्रमुख मामलों में कम से कम 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां सफलतापूर्वक वापस हासिल की हैं... हमने किसी को नहीं छोड़ा है, भले ही वे देश छोड़कर भाग गए हों, हम उनके पीछे पड़े हैं। ईडी ने यह पैसा इकट्ठा किया है और बैंकों को वापस दे दिया है।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि हमने आर्थिक अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा है। हम उनके पीछे पड़े हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जो पैसा बैंकों में वापस जाना है, वह वापस आ जाए।'' विदेशों में जमा काले धन के संबंध में कुछ सांसदों के सवालों पर वित्त मंत्री ने कहा कि 2015 का काला धन अधिनियम वास्तव में बहुत से करदाताओं पर निवारक प्रभाव डाल रहा है और वे अपनी विदेशी संपत्ति का खुलासा करने के लिए स्वयं आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी संपत्ति का खुलासा करने वाले करदाताओं की संख्या 2021-22 में 60,467 से बढ़कर 2024-25 में दो लाख हो गई है।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 5.4 प्रतिशत की उम्मीद से कम वृद्धि अस्थायी स्थिति है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाली तिमाहियों में वृद्धि की रफ्तार बढ़ेगी। सीतारमण ने लोकसभा में वर्ष 2024-25 के लिए अनुदान की पहली अनुपूरक मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भारत ने ‘मजबूत और सतत' वृद्धि देखी है। पिछले तीन वर्षों में जीडीपी वृद्धि दर औसतन 8.3 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा, ‘‘ चालू वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में वास्तविक वृद्धि दर क्रमशः 6.7 प्रतिशत और 5.4 प्रतिशत रही है। दूसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत वृद्धि की दर उम्मीद से कम है...वास्तव में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही न केवल भारत के लिए बल्कि अन्य देशों के लिए भी चुनौतीपूर्ण रही है।'' सीतारमण ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इसका श्रेय देश के लोगों को जाता है जो अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उसे पूरा कर रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में योगदान मिल रहा है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘दूसरी तिमाही की उम्मीद से कम वृद्धि दर ‘अस्थायी' मामला है और आने वाली तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार अच्छी रहेगी।'' उन्होंने यह भी कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में कोई व्यापक नरमी की स्थिति नहीं है। विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े आधे क्षेत्र मजबूत बने हुए हैं। सीतारमण ने कहा, ‘‘विनिर्माण क्षेत्र में कुल मिलाकर सुस्ती की आशंका नहीं है, क्योंकि यह कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित है...औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 23 विनिर्माण क्षेत्रों में से लगभग आधे अब भी मजबूत बने हुए हैं।'' उन्होंने कहा कि इसके अलावा, जुलाई और अक्टूबर, 2024 के बीच केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 6.4 प्रतिशत बढ़ा है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का निर्धारण किया है।
सीतारमण ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और वृद्धि को बनाये रखने के लिए हम जो कदम उठा रहे हैं, उसमें प्रमुख पूंजीगत व्यय है। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इसके जरिये अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़े और उसे अधिक गति मिले।'' उन्होंने कहा, ‘‘पूंजी खाते पर खर्च किए गए प्रत्येक रुपये के लिए ‘गुणक' प्रभाव कभी-कभी 4.3 तक पहुंच जाता है। वहीं यदि आप राजस्व खाते पर खर्च करते हैं, तो प्रत्येक एक रुपये के लिए आपको केवल 0.98 मिलते हैं।'' सीतारमण ने महंगाई के बारे में कहा कि राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) शासन में इसे बेहतर ढंग से काबू में रखा गया है, जबकि संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार में यह दहाई अंक तक पहुंच गई थी उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति 4.8 प्रतिशत रही। यह कोविड महामारी के बाद से सबसे कम है। सीतारमण ने कहा कि मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति दशक के निचले स्तर 3.6 प्रतिशत पर बनी हुई है। मुख्य मुद्रास्फीति में उतार-चढ़ाव वाले खाद्यान्न और ऊर्जा के दाम शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी दर 2017-18 में छह प्रतिशत थी, जो अब घटकर 3.2 प्रतिशत पर आ गयी है। वित्त मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने अनुदान की अनुपूरक मांगों को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
वित्त वर्ष 2024-25 की अनुदान की पहली अनुपूरक मांग के तहत 87,762.56 करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय की मंजूरी मांगी गई है। इसमें से, शुद्ध नकद व्यय से जुड़ा प्रस्ताव कुल मिलाकर 44,142.87 करोड़ रुपये और सकल अतिरिक्त व्यय कुल मिलाकर 43,618.43 करोड़ रुपये हैं। अतिरिक्त खर्च में उर्वरक सब्सिडी योजना के लिए 6,593.73 करोड़ रुपये, कृषि और किसान कल्याण के लिए लगभग 9,000 करोड़ रुपये और रक्षा खर्च के लिए 8,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसमें विदेश मंत्रालय के खर्च के लिए 3,000 करोड़ रुपये और गृह मंत्रालय के खर्च को लेकर 4,800 करोड़ रुपये शामिल है। - नयी दिल्ली,। महज सात साल की उम्र में जाकिर हुसैन ने अपना पहला संगीत कार्यक्रम किया था और छह दशकों से भी ज्यादा समय तक अपनी शानदार प्रतिभा एवं जोश से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते रहे। बावजूद इसके, जाकिर हुसैन मंच पर जाने से पहले घबरा जाया करते थे और कार्यक्रम की सफलता के लिए वह अपनी ‘‘किस्मत'' का शुक्रिया अदा किया करते थे। । इस साल की शुरुआत में साक्षात्कार में हुसैन ने सितारवादक रवि शंकर के हवाले से कहा कि अगर उन्हें घबराहट नहीं होगी तो कार्यक्रम को लेकर उन्हें काफी चिंता रहेगी। हुसैन ने कहा, ‘‘इसका मतलब था कि उनका ध्यान 100 प्रतिशत उस पर नहीं था, इसका मतलब यह था कि वे इसे हल्के में ले रहे थे और आप जानते हैं कि यह सच है। इतने वर्षों में, आप एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच जाते हैं जहां आपने एक प्रतिष्ठा बना ली है, आपने अपने लिए एक तरह का दर्जा बना लिया है और जितना अधिक आप ऐसा करते हैं उतनी ही अधिक जिम्मेदारी आपके कंधों पर आ जाती है क्योंकि आपको उस पर खरा उतरना होता है।''हुसैन ने तबले को पश्चिमी श्रोताओं के बीच अधिक लोकप्रिय बनाया और उसे पहचान दिलाई। वह ‘फ्यूजन ग्रुप' ‘शक्ति' के संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में प्रदर्शन के दबाव की तुलना भारत में खेल रही भारतीय क्रिकेट टीम से की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘दिन-ब-दिन घबराहट या थोड़ा तनाव बढ़ता जा रहा है। मेरा मतलब है, भारत में खेल रही भारतीय क्रिकेट टीम को देखें, उन पर दबाव मेहमान टीम पर दबाव से 100 गुना अधिक होता है। मैं सच में अपनी किस्मत का शुक्रगुजार हूं कि कॉन्सर्ट में जाने से पहले मुझे अब भी थोड़ा तनाव या घबराहट महसूस होती है।'' तालवादक ने महज 12 साल की उम्र में ही संगीत कार्यक्रमों को लेकर दौरा करना शुरू कर दिया था। उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में ग्रैमी अवार्ड्स के 66वें संस्करण में तीन ग्रैमी अवार्ड जीते। उन्हें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ काम करने, शैलियों को चुनौती देने और ‘‘प्लैनेट ड्रम'' जैसी उत्कृष्ट कृतियां बनाने के लिए जाना जाता है। ‘‘प्लैनेट ड्रम'' अमेरिकी तालवादक मिकी हार्ट के साथ एक विश्व संगीत एल्बम था जिसे 1992 में सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत एल्बम के लिए पहला ग्रैमी पुरस्कार दिया गया था। उस्ताद अल्लाह रक्खा के बेटे हुसैन ने कहा कि ‘‘सर्व समावेशी संगीत की रचनात्मकता'' उनमें स्वाभाविक रूप से आई, क्योंकि उन्होंने एक महान तबला वादक अल्लाह रक्खा से संगीत सीखा और उनके साथ काम किया, जिन्होंने कुछ फिल्मों के लिए भी संगीत तैयार किया था। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे याद है, जब सात या आठ बरस की उम्र से ही मैं उनके (अपने पिता के) साथ आशा जी या लता जी या रफी के साथ उनके सभी रिकॉर्डिंग सेशन में जाता था और ऑर्केस्ट्रा का हिस्सा होता था... वे मुझे खंजरी या तंबूरा या कुछ और बजाने के लिए देते थे। मैं ऐसे हालात में बड़ा हुआ, जहां संगीत की रचनात्मकता में रहना स्वाभाविक था, जो एकल प्रक्रिया के विपरीत एक सर्व समावेशी प्रक्रिया थी।'' हुसैन ने कहा, ‘‘इसलिए जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा था, मेरी मानसिकता इस विचार के अनुकूल होती गई कि संगीत, सिर्फ संगीत है, यह न तो भारतीय संगीत है या न ही कोई और संगीत है। इसलिए जब मैंने वास्तव में गैर-भारतीय संगीतकारों के साथ काम करना शुरू किया तो यह एक स्वाभाविक हाथ मिलाने जैसा लगा।'' तबले को लंबे समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक संगत वाद्ययंत्र के रूप में देखा जाता रहा लेकिन समय के साथ यह अपनी उस छवि से बाहर निकलकर संगीत संसार का केंद्र बिंदु बन गया है। उन्होंने कहा कि यह पंडित रविशंकर, उस्ताद विलायत खान, उस्ताद अली अकबर खान, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और पंडित बिरजू महाराज जैसे लोगों के साथ उनका काम था, जिससे दर्शकों ने वास्तव में यह नोटिस करना शुरू किया कि ‘‘यह दूसरा व्यक्ति इतना बुरा नहीं है, बल्कि यह भी उतना ही अच्छा है। इस तरह चीजें आगे बढ़ने लगीं''। हुसैन ने कहा, ‘‘इसकी वजह से अगली पीढ़ी के तबला वादकों को एक ‘लॉन्चिंग पैड' मिल गया। क्योंकि चीजें पहले से ही तैयार थीं, लेकिन हमें इसका सबसे बेहतर उपयोग करना था और किस्मत से हम वह ‘ताल' बैठाने में सक्षम रहे।''
- नयी दिल्ली । सरकार ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय आवासन एवं शहरी शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएम स्वनिधि योजना के तहत आठ दिसंबर तक फेरी लगाने वाले विक्रेताओं को 13,422 करोड़ रूपये के 94.31 लाख ऋण वितरित किए गए। आवासन एवं शहरी शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन 94.31 लाख ऋणों में फेरी लगाने वाले लाभार्थियों ने 40.36 लाख ऋण चुका दिये हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2020 में कोविड महामारी के दौरान शहरों में फेरी लगाने वाले लोगों को 50 हजार रूपये तक का गिरवी रहित ऋण देने की योजना शुरू की थी। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सड़कों पर फेरी लगाने वाले विक्रेता आत्मनिर्भर निधि (स्वनिधि) योजना के तहत ऋण वितरित करने वाली किसी एजेंसी या कंपनियों में से किसी के विरुद्ध धोखाधड़ी का कोई आरोप नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि 8 दिसंबर 2024 तक पीएम स्वनिधि योजना के तहत 13,422.16 करोड़ रूपये के 94.13 लाख ऋण वितरित किए गये। उन्होंने कहा कि इनमें से 40.36 लाख ऋणों को चुका दिया गया है।
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पुणे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि व्यक्ति को अहंकार को दूर रखना चाहिए, अन्यथा वह गड्ढे में गिर सकता है। भारत विकास परिषद के विकलांग केंद्र के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने अहंकार के बारे में अपनी बात रखने के लिए रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में एक ‘सर्वशक्तिमान ईश्वर' होता है, जो समाज की सेवा करने की प्रेरणा देता है, लेकिन साथ ही अहंकार भी होता है। भागवत ने यह भी कहा कि भारत के विकास को सुनिश्चित करने के लिए समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति केवल सेवा तक सीमित नहीं है। संघ प्रमुख ने कहा कि सेवा का उद्देश्य नागरिकों को विकास में योगदान देने में सक्षम बनाना होना चाहिए।
- मुंबई। तबला उस्ताद जाकिर हुसैन ने आठ साल पहले बताया था कि कैसे उनके पिता अल्ला रक्खा ने दुआ पढ़ने के लिए कहे जाने पर उनके कानों में तबले की ताल सुनाकर उनका इस दुनिया में स्वागत किया था। मुंबई में जन्मे जाकिर हुसैन का सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में फेफड़ों की समस्या ‘इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस' की जटिलताओं के कारण निधन हो गया। उनके परिवार ने सोमवार को यह जानकारी दी। तबले को घर-घर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने वाले जाकिर हुसैन ने बताया था कि उनके पिता ने उन्हें पहली बार अपनी गोद में लिया और कानों में तबले की ताल सुनाई थी। अल्ला रक्खा एक कुशल तबला वादक थे और प्रतिष्ठित सितार वादक पंडित रविशंकर के साथ अक्सर संगत करते थे।हुसैन ने बताया, ‘‘मुझे घर लाया गया। मैं अपने पिता की गोद में था। परंपरा यह थी कि पिता बच्चे के कान में दुआ पढ़कर इस दुनिया में बच्चे का स्वागत करता और कुछ अच्छे शब्द कहता। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठाया, अपने होंठ मेरे कान के पास लाए और मेरे कानों में तबले की ताल सुनाई। मेरी मां गुस्से में थीं। उन्होंने कहा कि आप क्या कर रहे हैं? आपको दुआ पढ़नी चाहिए, ताल नहीं सुनानी चाहिए।'' जाकिर हुसैन ने बताया, ‘‘इस पर मेरे पिता ने कहा, लेकिन ये मेरी दुआएं हैं। मैं इसी तरह दुआ करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं देवी सरस्वती और भगवान गणेश का उपासक हूं। यह एक मुसलमान बोल रहा था। उन्होंने कहा कि यह ज्ञान उन्हें अपने शिक्षकों से मिला है और वे इसे अपने बेटे को देना चाहते हैं।'' नौ मार्च, 1951 को मुंबई में जन्मे उस्ताद जाकिर हुसैन को 1988 में ‘पद्मश्री', 2002 में ‘पद्म भूषण' और 2023 में ‘पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया। जाकिर हुसैन की प्रारंभिक शिक्षा माहिम के सेंट माइकल स्कूल से हुई और उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। दोनों ही संस्थान मुंबई में हैं। अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने खासा संघर्ष किया। वह ट्रेन से यात्रा करते थे और अगर उन्हें सीट नहीं मिलती थी, तो वे फर्श पर अखबार बिछाकर सो जाते थे। ऐसी यात्राओं के दौरान वे संगीत वाद्ययंत्रों को अपनी गोद में रखकर सोते थे ताकि किसी का पैर उनके तबले पर न पड़े। एक अन्य साक्षात्कार में जाकिर हुसैन ने एक घटना को याद कर बताया कि कैसे जब वह 12 साल के थे तो अपने पिता के साथ एक संगीत समारोह में गए थे। उस संगीत समारोह में पंडित रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खान, बिस्मिल्लाह खान, पंडित शांता प्रसाद और पंडित किशन महाराज जैसे दिग्गज भी मौजूद थे। जाकिर हुसैन अपने पिता के साथ मंच पर गए और अपनी कला के प्रदर्शन के लिए उन्हें पांच रुपये मिले।तबला वादक ने कहा था, ‘‘मैंने अपने जीवन में बहुत पैसा कमाया है, लेकिन वे पांच रुपये सर्वाधिक कीमती थे।'
- प्रयागराज (उप्र) । छोटे कद काठी की ‘पुंगनूर' गाय के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक वीडियो से प्रेरणा लेते हुए जयपुर के उद्यमी राहुल शर्मा ने महाकुंभ मेले में देशी गोवंश की नस्लों को प्रदर्शित करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित हुआ था।‘नमामि गौ मातरम फाउंडेशन' के संस्थापक राहुल शर्मा ने ‘ बताया, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी को पुंगनूर गाय को दुलारते देख मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना विश्व के सबसे बड़े समागम में देशी गोवंश की प्रदर्शनी लगाई जाए ताकि लोग भारतीय नस्ल की गायों को देख और उनके बारे में जान सकें।'' यहां प्रयागराज मेला प्राधिकरण में मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि अब भी पूरे भारत में देसी गोवंश की करीब 37 नस्लें बची हैं, जिनमें कई नस्लें लुप्त होने की कगार पर हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए एक ही स्थान पर इनका प्रदर्शन करने से लोगों को इस अनूठी विरासत पर गर्व होगा क्योंकि आज अधिक दूध के लालच में अधिकतर लोग जर्सी गायों का दूध पी रहे हैं जोकि गुणवत्ता के लिहाज से देशी गायों के सामने कहीं नहीं टिकता। शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रयागराज मेला प्राधिकरण में जमीन आवंटन के लिए आवेदन कर रखा है और आवंटित जमीन के आकार के आधार पर प्रदर्शित होने वाली गायों की संख्या तय की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने देशी गायों की तस्वीर के साथ एक कैलेंडर और एक लघु पुस्तिका बनाई है जिसका अनावरण उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हाल में किया है। उन्होंने बताया कि उनकी योजना महाकुंभ मेले में बैल चालित कोल्हू लगाने, किफायती गोबर गैस प्लांट, हवन में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री ‘गो समिधा' और अन्य उपक्रमों को भी प्रदर्शित करने की है जिससे ग्रामीण लोग देशी गोवंश को पालने के लिए प्रोत्साहित हों। शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री के साथ पुंगनूर गाय की फोटो और वीडियो प्रसारित होने के बाद से पुंगनूर की मांग जबरदस्त ढंग से बढ़ी है और हर रसूखदार व्यक्ति इस गाय को पालने की चाहत रखता है। अगर प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री अपने राज्य के लुप्त हो रहे देशी गोवंश का स्वयं प्रचार करना शुरू कर दें तो निश्चित तौर पर यह एक बड़ी पहल होगी। उन्होंने कहा कि उदाहरण के रूप में उत्तर प्रदेश की गंगातीरी गाय, बिहार की बछौर गाय, उत्तराखंड की बद्री गाय, राजस्थान की राठी गाय, मध्य प्रदेश की निमारी गाय को इन प्रदेशों के मुख्यमंत्री स्वयं बढ़ावा देने लगें तो देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति होगी।
- नयी दिल्ली । रागों की ताल और लय के साथ तबले पर कभी थिरकती, कभी तैरती और कभी उड़ती हुई जाकिर हुसैन की उंगलियां संगीत का एक जादू सा पैदा करती थीं। वह केवल तबला वादक ही नहीं, तालवादक, संगीतकार और यहां तक कि अभिनेता भी थे। वह एक किंवदंती थे जो भारत के तो अपने थे ही, लेकिन पूरी दुनिया के भी थे। हुसैन का फेफड़े से संबंधी ‘‘इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस'' बीमारी के कारण अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। भारत और विदेश में जाना-माना नाम हुसैन अपने पीछे 60 साल से ज्यादा का संगीत अनुभव छोड़ गए हैं। उन्होंने कुछ महानतम भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ मंच पर तबला बजाया तथा भारतीय शास्त्रीय एवं विश्व संगीत का ‘फ्यूजन' रचा, जिससे तबले को एक नयी पहचान मिली। महान तालवादक ने विभिन्न विधाओं और शैलियों में संगीत की रचना की। उनके प्रदर्शनों की सूची में ‘जैज' और ‘कंसर्ट' भी शामिल हैं। अपने पिता एवं प्रसिद्ध तबला वादक अल्ला रक्खा के संरक्षण में तबला सीखने और बजाने के बाद स्वाभाविक रूप से उनमें ‘‘सर्व-समावेशी संगीत रचनात्मकता'' का विकास हुआ।हुसैन ने लगभग एक वर्ष पहले गोवा में एक कार्यक्रम से पहले कहा था, ‘‘जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा था, मेरी सोच इस विचार के अनुकूल होती गई कि संगीत सिर्फ संगीत है, यह न तो भारतीय संगीत नहीं है, न कोई और संगीत। इसलिए जब मैंने गैर-भारतीय संगीतकारों के साथ काम करना शुरू किया तो यह एक स्वाभाविक तालमेल जैसा लगा।'' अपने समय के महानतम तबला वादकों में से एक अल्ला रक्खा के पुत्र के रूप में हुसैन संगीत के लिए जन्मे थे। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही संगीत की शुरुआत कर दी थी। इस प्रतिभाशाली बालक ने सात साल की उम्र में अपना पहला संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया और 12 साल की उम्र में ही संगीत कार्यक्रम करने लगे। मुंबई में जन्मे हुसैन अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद 1970 में अमेरिका चले गए। जब बात उनके संगीत की आती थी तो सीमाएं मायने नहीं रखती थीं।फरवरी में, हुसैन 66वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत एल्बम, सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत प्रदर्शन और सर्वश्रेष्ठ समकालीन वाद्य एल्बम के लिए तीन ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारत के पहले संगीतकार बने। हुसैन ने 2024 के ग्रैमी में ‘फ्यूजन म्युजिक ग्रुप' ‘शक्ति' के तहत ‘‘दिस मोमेंट'' के लिए सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत एल्बम का अपना पहला खिताब हासिल किया, जिसमें संस्थापक सदस्य ब्रिटिश गिटारवादक जॉन मैकलॉघलिन, साथ ही गायक शंकर महादेवन, वायलिन वादक गणेश राजगोपालन और तालवादक सेल्वागणेश विनायकराम शामिल हैं। बाद में उन्होंने बांसुरी वादक राकेश चौरसिया, अमेरिकी बैंजो वादक बेला फ्लेक और अमेरिकी बास वादक एडगर मेयर के साथ ‘‘पश्तो'' के लिए सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत प्रदर्शन और ‘‘एज वी स्पीक'' के लिए सर्वश्रेष्ठ समकालीन वाद्य एल्बम के लिए दो अन्य पुरस्कार जीते। पिछले वर्ष जनवरी में विश्व भ्रमण के तहत भारत आए ‘शक्ति' के कलाकार एक बार फिर जुटे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशंसकों में काफी उत्साह देखा गया। ‘शक्ति' के अलावा, हुसैन ने कई अभूतपूर्व कार्यक्रमों में भी योगदान दिया, जिनमें ‘मास्टर्स ऑफ पर्क्यूशन', ‘प्लैनेट ड्रम' ‘ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट विथ मिकी हार्ट', ‘तबला बीट साइंस' ‘संगम विथ चार्ल्स लॉयड' और ‘एरिक हारलैंड' और हाल में हर्बी हैनकॉक के साथ कार्यक्रम शामिल हैं।
- नयी दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि भारत विश्वसनीय साझेदार के रूप में श्रीलंका के सतत आर्थिक विकास को समर्थन देना जारी रखेगा। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायक और उनके प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में स्वागत करते हुए मुर्मू ने हाल में हुए राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव में दिसानायक की जीत के लिए उन्हें बधाई दी। मुर्मू ने उनके सम्मान में भोज का भी आयोजन किया। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, मुर्मू ने कहा कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम' की नीति के तहत श्रीलंका का एक महत्वपूर्ण स्थान है। मुर्मू ने कहा कि एक करीबी और भरोसेमंद साझेदार के रूप में भारत पड़ोसी देश के सतत आर्थिक विकास के लिए श्रीलंका सरकार के प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेगा। भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए दिसानायक ने दिन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ व्यापक वार्ता की।
- प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अगले वर्ष जनवरी में होने वाले महाकुंभ मेले के दौरान नैनी रेलवे स्टेशन पर बंदरों से लोगों की सुरक्षा के लिए लंगूरों के ‘कटआउट' लगाये गये हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। हाल के दिनों में इस स्टेशन पर बंदरों की गतिविधियां बढ़ीं हैं।उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे और आम लोगों को कई बार बंदरों से असुविधा होती रही है और इस दिशा में यह तरीका पहले से काफी कारगर है। उन्होंने बताया कि स्टेशन परिसर में लंगूर का ‘कटआउट' लगाने से बंदर उस परिसर से दूर हो जाते हैं और सभी को पता है कि महाकुंभ का आयोजन नजदीक है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु आएंगे। अधिकारी ने बताया कि लंगूरों का ‘कटआउट' लगाने से ना तो श्रद्धालुओं को (बंदरों से) कोई असुविधा होगी और साथ ही रेलवे की संपत्तियों को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा। त्रिपाठी ने बताया कि यह बहुत सुरक्षित तरीका है, जिसमें बंदरों को पकड़ने और उन्हें कहीं दूर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि साथ ही यह पशुओं के प्रति हमारे प्रेम को भी दर्शाता है कि हम उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते।
- नयी दिल्ली । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को संसद में बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान ‘विकल्प' योजना के तहत 57,200 से अधिक यात्रियों के लिए दूसरी ट्रेन में वैकल्पिक सीट की व्यवस्था की गई। राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में वैष्णव ने कहा, ‘‘प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को कन्फर्म सीट प्रदान करने और उपलब्ध सीटों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक ट्रेन में सीट उपलब्ध कराने के लिए 'विकल्प' योजना 2016 में शुरू की गई थी।'' उन्होंने कहा, ‘‘विकल्प योजना के तहत वैकल्पिक ट्रेन में उन पात्र यात्रियों को कंफर्म सीट प्रदान की जाती है, जिन्होंने इसका विकल्प चुना है। यह योजना अखिल भारतीय आधार पर भारतीय रेलवे में पहले से ही उपलब्ध है।'' उन्होंने कहा, ‘‘वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान लगभग 57,209 यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेन में सीट आवंटित की गई।'' वैष्णव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सदस्य फौजिया खान की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने विकल्प योजना की सफलता दर के बारे में सरकार से सवाल किए थे और साथ ही पूछा था कि उच्च मांग वाले मार्गों में इस योजना के विस्तार की क्या योजना है।रेल मंत्री ने कहा कि आरक्षित श्रेणियों में प्रतीक्षा सूची के टिकट जारी किए जाते हैं ताकि कंफर्म सीट रद्द करने के एवज में खाली होने वाली सीट का उपयोग किया जा सके और रेलवे को मांग पैटर्न का आकलन करने में मदद मिल सके। वैष्णव के अनुसार, भारतीय रेलवे पर चलने वाली सभी ट्रेन की प्रतीक्षा सूची की स्थिति की नियमित आधार पर निगरानी की जाती है। उन्होंने कहा कि यात्रियों को अतिरिक्त स्थान प्रदान करने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत भारतीय रेलवे, विभिन्न प्रकार की नियमित ट्रेन के अलावा, यात्रियों की अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करने के लिए त्योहारों और छुट्टियों के दौरान विशेष ट्रेन सेवाएं भी संचालित करती है। उन्होंने कहा, ‘‘तदनुसार, 2024 के दौरान, होली और गर्मी की छुट्टी के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ के मद्देनजर 13,523 विशेष ट्रेन यात्राएं संचालित की गईं। दुर्गा पूजा/दीपावली/छठ के दौरान मांग को पूरी करने के लिए लगभग 1.8 करोड़ यात्रियों की सेवा के लिए एक अक्टूबर, 2024 से 30 नवंबर, 2024 की अवधि के दौरान विशेष ट्रेन के जरिये 7,990 यात्राएं संचालित की गईं।'' रेल मंत्री ने कहा, "ट्रेन सेवाओं के संचालन के लिए वर्तमान में उपयोग किए जा रहे कुल डिब्बों में से दो-तिहाई गैर-एसी और एक-तिहाई एसी हैं।
- नयी दिल्ली । कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को आगामी आम बजट के संबंध में सुझाव लेने के लिए किसानों और कृषि क्षेत्र के हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। कृषि भवन में आयोजित बजट पूर्व बैठक में कृषि संगठनों, कृषि उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने क्षेत्र की चुनौतियों और संभावित सुधारों पर चर्चा की। चौहान ने प्रतिभागियों से कहा कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय वित्त मंत्रालय के लिए बजट प्रस्ताव तैयार करने के लिए आंतरिक समीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी सुझावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करेंगे और कृषि क्षेत्र के हितधारकों के साथ लगातार संवाद सुनिश्चित करेंगे।'' मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा 109 नई फसल किस्मों के विकास सहित सरकार अन्य प्रयासों के बारे में भी बताया। इन किस्मों को हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जारी किया था। बैठक में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी के साथ ही नाबार्ड, सीआईआई, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स, एसोचैम, भारतीय स्टेट बैंक और भारतीय सोयाबीन प्रसंस्करण संघ के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
- महाकुंभनगर (उप्र)। महाकुंभ-2025 दुनिया भर के लोगों को एक अनूठा डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा। डिजिटल महाकुंभ विजन के हिस्से के तौर पर पहली बार एआई (कृत्रिम बुद्धिमता) जेनरेटिव चैटबॉट तकनीक पेश की गयी है। उपयोगकर्ता केवल क्यूआर कोड को स्कैन करके अपनी तस्वीर के साथ एक व्यक्तिगत महाकुंभ प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। उसे डिजिटल रूप से सहेजा या प्रिंट भी किया जा सकता है। एआई चैटबॉट महाकुंभ के हर आयोजन और प्रमुख कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी भी देता है।क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में महाकुंभ को भव्य, आध्यात्मिक रूप से उत्थानशील और हाईटेक आयोजन बनाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं। इस विजन के अनुरूप पर्यटन विभाग के अधिकारी, मेला आयोजकों और महाकुंभ नगर पुलिस के साथ मिलकर डिजिटल महाकुंभ पहल पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है कि डिजिटलीकरण पर इतना व्यापक ध्यान दिया जा रहा है। इस तक पहुंचने के लिए यूजर लिंक पर जा सकते हैं या अपनी तस्वीर के साथ एक व्यक्तिगत महाकुंभ प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड को स्कैन कर सकते हैं। एआई चैटबॉट को 11 भाषाओं, हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, पंजाबी, बंगाली और उर्दू में उपयोगकर्ताओं की सहायता के लिए डिजाइन किया गया है। कोई भी उपयोगकर्ता अपनी पसंदीदा भाषा में उत्तर प्राप्त कर सकता है।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशिया कप खिताब जीतने पर भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस सफलता से विशेषकर युवाओं में हॉकी के प्रति बढ़ते जुनून का पता चलता है। मस्कट में रविवार को खेले गए फाइनल में गोलकीपर निधि ने पेनल्टी शूटआउट में तीन बचाव किए जिससे भारत ने तीन बार के चैंपियन चीन को 3-2 (1-1) से हराकर लगातार दूसरा महिला जूनियर एशिया कप हॉकी खिताब जीता। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एशिया कप खिताब जीतने के लिए भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम को बधाई। टीम ने बहुत धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। इस सफलता से विशेषकर युवाओं में हॉकी के प्रति बढ़ते जुनून का भी पता चलता है। टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाएं।''
- नयी दिल्ली। नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन के रूप में अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। उन्हें यह जिम्मेदारी लगभग एक महीने पहले दी गयी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बिबेक देबरॉय का स्थान लिया। देबरॉय का एक नवंबर को निधन हो गया था। प्रधानमंत्री के एक प्रमुख आर्थिक सलाहकार रहे देबरॉय को 31 अक्टूबर को एम्स में भर्ती कराया गया था। अधिकारी ने कहा, ‘‘लगभग एक महीने पहले बेरी को ईएसी-पीएम के चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।'' ईएसी-पीएम भारत सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री को आर्थिक और संबंधित मुद्दों पर सलाह देने के लिए गठित एक स्वतंत्र निकाय है। वर्तमान में, ईएसी-पीएम में संजीव सान्याल (सदस्य), शमिका रवि (सदस्य), राकेश मोहन (अंशकालिक सदस्य), साजिद चिनॉय (अंशकालिक सदस्य), नीलकंठ मिश्रा (अंशकालिक सदस्य), नीलेश शाह (अंशकालिक सदस्य), टी टी राम मोहन (अंशकालिक सदस्य) और पूनम गुप्ता (अंशकालिक सदस्य) शामिल हैं।
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नयी दिल्ली.सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि भारत में 1,065 बड़े बांध हैं जो 50 से 100 साल पुराने हैं जबकि 224 बांध ऐसे हैं जो एक सदी से अधिक पुराने हैं। सरकार के मुताबिक, देश में कुल 6,138 निर्मित और 143 निर्माणाधीन बांध हैं। राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में जल शक्ति मंत्रालय में राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा कि सरकार ने पुराने बांधों से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने और बांध की विफलताओं से उत्पन्न होने वाली आपदाओं को रोकने के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 लागू किया है। उन्होंने कहा कि बांध, सिंचाई और बिजली उत्पादन उद्देश्यों के अलावा बाढ़ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा संयुक्त रूप से संकलित बड़े बांधों के राष्ट्रीय रजिस्टर (2023 संस्करण) के अनुसार, 6,138 निर्मित और 143 निर्माणाधीन बांध हैं, जो कुल मिलाकर 6,281 होते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इनमें से केवल 224 बांध 100 वर्ष से अधिक पुराने हैं और 1065 बड़े बांध हैं जो 50 से 100 वर्ष पुराने हैं। चौधरी ने कहा कि सरकार ने बांध सुरक्षा कानून लागू किया है और बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के दूसरे और तीसरे चरण को भी लागू किया जा रहा है जिसका मकसद 19 राज्यों और तीन केंद्रीय एजेंसियों के 736 बांधों का पुनर्वास करना है।



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