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नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच चीन ने एक बार फिर नापाक हरकत की है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदले हैं, जिस पर भारत की ओर से आपत्ति जताई गई है। भारत ने कहा कि नए नाम गढ़ने से यह सच्चाई नहीं बदलेगी कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की खबरों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने देखा है कि चीन ने भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश में स्थानों का नाम बदलने के अपने व्यर्थ और बेतुके प्रयासों को जारी रखा है। हमारी सैद्धांतिक स्थिति के अनुरूप हम ऐसी कोशिशों को पूरी तरह खारिज करते हैं। नए नाम गढ़ने से यह सच्चाई नहीं बदलेगी कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा।”चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के नाम बदलने का निर्णय ऐसे समय में किया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ दिनों तक चले तनाव के बाद युद्धविराम की घोषणा की गई थी। चीन, भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता है।इससे पहले भी चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नामों को बदला है, जिस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी हैं। -
नई दिल्ली। भारत सरकार ने बुधवार को चीन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और डिजिटल कदम उठाया। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और पाकिस्तानी दुष्प्रचार फैलाने के आरोप में चीन के सरकारी मीडिया आउटलेट्स ग्लोबल टाइम्स और सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के एक्स अकाउंट को भारत सरकार ने ब्लॉक कर दिया है।
भारत सरकार ने चीन की सरकारी मीडिया एक्स हैंडल को ब्लॉक करने का फैसला ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ चलाई जा रही गलत और फर्जी खबरों को बढ़ावा देने की वजह से लिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था की चिंताओं का हवाला देते हुए यह कदम उठाया।भारत सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े ग्लोबल टाइम्स और सिन्हुआ दोनों ही झूठी खबरों और पाकिस्तान के फर्जी दावों को बढ़ावा दे रहे थे। इसमें बहावलपुर के पास एक भारतीय राफेल लड़ाकू विमान को गिराए जाने को लेकर गलत सूचना भी शामिल थी। ब्लॉक करने से पहले चीन में भारतीय दूतावास ने ग्लोबल टाइम्स को एक्स पर एक सख्त चेतावनी जारी की थी, जिसमें किसी पोस्ट को साझा करने से पहले ‘तथ्यों को सत्यापित करने और स्रोतों की जांच करने’ की सलाह दी गई थी।भारतीय दूतावास ने भ्रामक पोस्टों में से एक पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था, “प्रिय ग्लोबल टाइम्स न्यूज, हम आपको सलाह देंगे कि आप इस तरह की गलत सूचना को आगे बढ़ाने से पहले अपने तथ्यों को सत्यापित करें और अपने स्रोतों की जांच करें। कई पाकिस्तान समर्थक एक्स हैंडल ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में गलत दावे फैला रहे हैं और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। जब मीडिया आउटलेट स्रोतों की पुष्टि किए बिना ऐसी जानकारी साझा करते हैं, तो यह जिम्मेदारी और पत्रकारिता नैतिकता में गंभीर चूक को दर्शाता है।”दूतावास ने बताया कि प्रकाशित तथ्य झूठे थे जिसे पीआईबी के फैक्ट चेक विभाग ने बेनकाब किया। उन्हें चेतावनी भरे अंदाज में सच का प्रमाण दिया गया। कहा गया कि झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। ग्लोबल टाइम्स की ओर से सर्कुलेट की गई तस्वीर 2021 में हुए एक हादसे की थी। यह मिग 21 था जो पंजाब के मोगा में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थक आतंकियों ने हमला किया था जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने के साथ-साथ पाकिस्तान की सैन्य ताकत को भी नुकसान पहुंचाया।इसके बाद पाकिस्तान समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स पर भारत विरोधी और फर्जी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट की जा रही हैं जिसका समर्थन कहीं न कहीं चीन भी कर रहा है। इसी वजह से चीनी सरकारी एक्स हैंडल्स को ब्लॉक किया गया है। ( -
नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) व तीनों सेनाध्यक्ष बुधवार को राष्ट्रपति भवन पहुंचे। यहां सीडीएस और तीनों सेनाध्यक्षों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी जानकारी साझा की गई। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की सुप्रीम कमांडर हैं।
इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया को सफल बनाने में सशस्त्र बलों के साहस और समर्पण की सराहना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने सैन्य बलों के इस अभियान को एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव बताए व इससे विस्तृत जुड़ी जानकारी दी।22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या की थी। इसके बाद भारतीय सेनाओं ने आतंकवादियों के खात्मे के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान और पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए गए। सेना के मुताबिक इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। सेना द्वारा किए गए इस ऑपरेशन की जानकारी राष्ट्रपति को दी गई है।भारतीय सेना ने केवल आतंकवादियों और आतंकवादी ठिकानों को अपना निशाना बनाया था। इस दौरान पाकिस्तान के किसी भी सैन्य या नागरिक ठिकाने पर हमले नहीं किए गए। लेकिन पाकिस्तान आतंकवादियों के समर्थन में खड़ा हुआ और पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों को टारगेट करने की कोशिश की। हालांकि भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान के सभी हमलों को विफल कर दिया। इतना ही नहीं भारतीय सेना के जवाबी हमले में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा, उसकी एयर डिफेंस प्रणाली को भारतीय सेनाओं ने ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तानी सेना अपने कई एयरबेस की भी रक्षा नहीं कर सकी।माना जा रहा है कि सैन्य ऑपरेशन से जुड़ी अब इन सभी कार्रवाइयों की पूरी जानकारी राष्ट्रपति को दी गई है। इससे पहले मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की थी। यह मुलाकात नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एनक्लेव में हुई थी। -
नई दिल्ली। भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित की गई नई ड्रोन रोधी प्रणाली भार्गवस्त्र का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। यह कम लागत वाली ‘हार्ड किल मोड’ में काम करने वाली प्रणाली है, जिसे सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने डिजाइन और विकसित किया है। इसका उद्देश्य ड्रोन झुंडों (Swarm Drones) से उत्पन्न बढ़ते खतरे को कुशलता से समाप्त करना है। 13 मई को ओडिशा के गोपालपुर स्थित सीवर्ड फायरिंग रेंज में इसका परीक्षण किया गया, जिसमें भारतीय थल सेना की वायु रक्षा (AAD) शाखा के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। तीन परीक्षणों के दौरान कुल चार माइक्रो रॉकेट दागे गए- पहले दो परीक्षणों में एक-एक रॉकेट और तीसरे में दो रॉकेटों को मात्र दो सेकंड में सल्वो मोड में दागा गया। सभी रॉकेटों ने अपने लक्ष्य हासिल किए और अपेक्षित प्रदर्शन किया।
भार्गवस्त्र में दो परतों वाली सुरक्षा प्रणाली है, पहले में अनगाइडेड माइक्रो रॉकेट होते हैं जो 20 मीटर के घातक दायरे में झुंड रूपी ड्रोन को समाप्त कर सकते हैं और दूसरे में पहले से परीक्षण किए गए गाइडेड माइक्रो-मिसाइल हैं जो सटीक हमले में सक्षम हैं। यह प्रणाली छोटे ड्रोन को 2.5 किलोमीटर दूर से पहचान और समाप्त कर सकती है। इसकी खास बात यह है कि इसे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों (5000 मीटर से अधिक ऊंचाई) समेत किसी भी इलाके में आसानी से तैनात किया जा सकता है।यह प्रणाली मॉड्यूलर है, यानी इसमें अतिरिक्त सॉफ्ट किल तकनीक जैसे जैमिंग और स्पूफिंग को भी जोड़ा जा सकता है। इसका रडार, ईओ (Electro-Optical) और आरएफ रिसीवर सेंसर उपयोगकर्ता की जरूरत के अनुसार कॉन्फिगर किए जा सकते हैं। यह प्रणाली मौजूदा नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर ढांचे में भी आसानी से एकीकृत की जा सकती है। इसमें एक अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी है, जो C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) तकनीक से लैस है। खास बात यह है कि इसका रडार 6 से 10 किलोमीटर दूर तक के सूक्ष्म हवाई खतरों को पहचान सकता है और EO/IR सेंसर के माध्यम से कम रडार क्रॉस-सेक्शन (LRCS) वाले लक्ष्यों को सटीकता से ट्रैक किया जा सकता है। इससे ऑपरेटर को झुंड या व्यक्तिगत ड्रोन को पहचानने और नष्ट करने में आसानी होगी।SDAL के अनुसार भार्गवस्त्र वैश्विक स्तर पर एक उल्लेखनीय नवाचार है। इसकी ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर इसे अद्वितीय बनाती है क्योंकि दुनिया के कई विकसित देश इस प्रकार की माइक्रो-मिसाइल तकनीक पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई भी बहु-स्तरीय और लागत-प्रभावी प्रणाली, जो ड्रोन झुंड को नष्ट कर सके, तैनात नहीं की गई है। यह “मेक इन इंडिया” मिशन के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है और भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।- - -; 21 दिन बाद घर वापसी-प्रधानमंत्री मोदी हैं तो सब कुछ संभव है- जवान पूर्णम की पत्नी रजनी शॉनई दिल्ली। पाकिस्तान ने बुधवार को सीमा सुरक्षा बल (BSF) जवान पूर्णम कुमार शॉ को भारत के हवाले कर दिया। कुमार को 23 अप्रैल को पाकिस्तानी रेंजर्स में पकड़ लिया था। यह प्रक्रिया पंजाब स्थित अटारी-वाघा सीमा चौकी पर सुबह 10:30 बजे हुई।बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तान रेंजर्स की तरफ से जवान को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को सौंपा गया और यह पूरा ट्रांसफर शांतिपूर्वक और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पूरा किया गया।बता दें कि पूर्णम कुमार शॉ को पाकिस्तान रेंजर्स ने 23 अप्रैल को भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फिरोजपुर जिले से पकड़ लिया था। यह पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद की घटना थी। बीएसएफ की तरफ से जारी बयान में कहा गया, आज बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ को संयुक्त चेक पोस्ट अटारी, अमृतसर के जरिये लगभग 10:30 बजे भारत को सौंप दिया गया। वह 23 अप्रैल 2025 से पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में थे। यह ट्रांसफर शांतिपूर्ण तरीके से और स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया।”प्रधानमंत्री मोदी हैं तो सब कुछ संभव है- जवान पूर्णम की पत्नी रजनी शॉजवान पूर्णम कुमार शॉ की पत्नी रजनी शॉ ने कहा, "आज सुबह जब हमें फोन आया कि चिंता मत कीजिए, आपके पति भारत आ गए हैं और वह बिल्कुल ठीक हैं, तो हम बहुत खुश हुए। मैंने अपने पति से भी बात की और वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। उन्होंने (ममता बनर्जी) मुझसे कहा था कि चिंता मत कीजिए, आपके पति इस सप्ताह वापस आ जाएंगे। उन्होंने भी हमारी बहुत मदद की, वह लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर रही थीं। पूरा देश मेरे साथ खड़ा था। प्रधानमंत्री मोदी हैं तो सब कुछ संभव है। 22 तारीख को पहलगाम हमला हुआ लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के जरिए उन्होंने बदला लिया, मेरे पति को भी वापस ले आए। मैं उनका बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं।"
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नई दिल्ली। न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार को देश के 52वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। न्यायमूर्ति गवई को राष्ट्रपति भवन में एक संक्षिप्त समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली। उन्होंने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की जगह ली है, जो 65 वर्ष की आयु होने पर मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए। न्यायमूर्ति गवई को 24 मई, 2019 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। उनका कार्यकाल 6 महीने से अधिक समय का होगा और वह 23 नवंबर तक पद पर रहेंगे।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद, राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्यों ने मुख्य न्यायाधीश गावई को बधाई दी। पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना भी उपस्थित थे और उन्होंने अपने उत्तराधिकारी को शुभकामनाएं दीं।मुख्य न्यायाधीश गवई की कानूनी यात्रा 1985 में शुरू हुई जब उन्होंने बार में रजिस्ट्रेशन किया और बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष प्रैक्टिस करना शुरू किया। उन्हें 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2005 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया।कई अहम फैसलों में रही भूमिकासुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, मुख्य न्यायाधीश गवई ने कई महत्वपूर्ण फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे उस पीठ का हिस्सा थे जिसने केंद्र सरकार के 2016 के नोटबंदी के कदम को बरकरार रखा और उन्होंने हाल ही में चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाले फैसले में भी योगदान दिया। उन्होंने लगभग 300 फैसले लिखे हैं, जिनमें से कई संविधान पीठों के मौलिक अधिकारों के महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित हैं।जस्टिस गवई, जस्टिस केजी बालकृष्णन के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले केवल दूसरे दलित हैं। वे सार्वजनिक सेवा की पृष्ठभूमि से आते है- उनके पिता, आरएस गवई, एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) के संस्थापक और तीन भारतीय राज्यों के पूर्व राज्यपाल थे। आरएस गवई ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में भी सेवाएं दीं। - नयी दिल्ली. भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता को चिह्नित करने और लोगों को आतंकवाद के खिलाफ प्रेरित करने के लिए भाजपा ने देश के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्रा निकाली। केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और जे पी नड्डा सहित शीर्ष भाजपा नेताओं द्वारा रविवार को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के बाद 11 दिवसीय राष्ट्रव्यापी तिरंगा यात्रा शुरू की गई। नड्डा ने सोमवार को इस कवायद को अंतिम रूप देने के लिए तरुण चुग, विनोद तावड़े और दुष्यंत गौतम समेत भाजपा महासचिवों के साथ बैठक की। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा कि तिरंगा महज एक झंडा नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा को दर्शाता है। राष्ट्रीय राजधानी में तिरंगा यात्रा में शामिल होने के दौरान चुग ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भारत बदल गया है। नया भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए किसी भी हद तक जाएगा।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत दिल्ली सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' के लिए सशस्त्र बलों की सराहना करने के लिए कर्तव्य पथ पर मंगलवार को रैली निकाली। 'शौर्य सम्मान यात्रा' नाम से आयोजित इस रैली में लोगों ने पाकिस्तान के ‘पूर्ण संहार' का आह्वान किया और देशभक्ति के गीत बजाए। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ यात्रा में हिस्सा लिया।भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा रैली में स्कूली बच्चे, राष्ट्रीय कैडिट कोर (एनसीसी) के कैडेट और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक भी शामिल हुए। भाजपा की दिल्ली इकाई ने तिरंगा यात्रा की तस्वीर पोस्ट करते हुए ‘एक्स' पर कहा, ‘‘सेना के सम्मान में, देश का हर नागरिक मैदान में।'' हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में ‘तिरंगा यात्रा' का नेतृत्व किया, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित हजारों लोगों ने भाग लिया। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय सशस्त्र बलों की सफलता को चिह्नित करने के लिए अंजॉ जिले के वालोंग में तिरंगा यात्रा का नेतृत्व किया। खांडू ने अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों, स्थानीय नेताओं, सेना के जवानों और उत्साही लोगों के साथ इस अभियान में शामिल भारतीय बलों के साहस और दृढ़ संकल्प की सराहना की। खांडू ने ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘ऐतिहासिक ‘कैबिनेट आपके द्वार' से पहले, मैंने अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों, स्थानीय नेताओं, सेना के जवानों और उत्साही स्थानीय लोगों के साथ वालोंग में तिरंगा यात्रा का नेतृत्व किया। इस सुदूर पूर्वी सीमा पर देशभक्ति के जोश ने राष्ट्र के प्रति हमारे प्रेम को फिर से जगा दिया और हमारे बहादुर रक्षा बलों के लिए अटूट समर्थन में खड़े होने के हमारे सामूहिक संकल्प को मजबूत किया।'' भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता का जश्न मनाने के लिए प्रदेश इकाई बुधवार को राज्यव्यापी ‘तिरंगा यात्रा' शुरू करेगी। जायसवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बृहस्पतिवार को यह कार्यक्रम राज्य के सभी संभागों में आयोजित किया जाएगा और शुक्रवार से इसे प्रखंड स्तर पर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी के सभी सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष और प्रखंड अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों और निर्वाचन क्षेत्रों में ‘तिरंगा यात्रा' का समन्वय करेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता 23 मई तक पूरे राज्य में जुलूस का नेतृत्व करेंगे।'' गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए भारत ने संदेश दिया है कि वह आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की अपनी नीति से समझौता नहीं करेगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता का जश्न मनाने के लिए निकाली गई ‘तिरंगा यात्रा' के दौरान उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान ने राष्ट्रवाद की भावना को जगाया है। मुख्यमंत्री ने शहर के वडाज इलाके से शुरू हुए पैदल मार्च में हिस्सा लिया, जो करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए आरटीओ सर्कल स्थित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर समाप्त हुआ।
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नयी दिल्ली । भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) मानदंडों के तहत अमेरिका के इस्पात और एल्युमीनियम पर लगाये गये शुल्क को लेकर कुछ अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने के अपने अधिकार को सुरक्षित रखा है और वह दोनों देशों के बीच चल रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए वार्ता के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने का विकल्प चुन सकता है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इससे पहले भी भारत ने यूरोपीय संघ के 2019 और 2021 के इस्पात को लेकर रक्षोपाय शुल्क पर विश्व व्यापार संगठन को इसी तरह की अधिसूचना जारी की थी, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया। अधिकारी ने कहा, ‘‘इसके अनुसार, अमेरिका के इस्पात और एल्युमीनियम शुल्क के खिलाफ वस्तु व्यापार की डब्ल्यूटीओ परिषद को दी गयी भारत की वर्तमान अधिसूचना केवल रक्षोपाय कदमों पर समझौते के तहत भविष्य में किसी भी समय जवाबी कार्रवाई करने के अधिकार को सुरक्षित रखती है। हालांकि, यह भारत को तय करना है कि अधिसूचना के 30 दिन के बाद या बाद में इन प्रस्तावित जवाबी शुल्क को प्रभावी करना है या इसे चल रही बीटीए वार्ता के हिस्से के रूप में हल करना है।'' वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अगुवाई में अधिकारियों का एक दल 17 मई से अमेरिका की यात्रा पर है। वहां वे प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ चर्चा करेंगे। दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार 19-22 मई तक बैठकें करेंगे। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करने के लिए समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का जवाबी कदम उठाने का अधिकार प्रस्तावित व्यापार समझौते में सौदेबाजी के रूप में काम कर सकता है। अगर, भारत जवाबी शुल्क लगाता है तो यह कोई पहला मामला नहीं होगा।
भारत ने जून, 2019 में 28 अमेरिकी उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाए थे। यह शुल्क उस समय लगाया गया जब अमेरिका ने भारत को अपनी सामान्य तरजीही व्यवस्था (जीएसपी) से हटा दिया और कुछ इस्पात तथा एल्युमीनियम उत्पादों पर 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत शुल्क जारी रखा। हालांकि, दोनों देशों के डब्ल्यूटीओ में लंबित विवादों को हल करने के निर्णय के बाद सितंबर, 2023 में शुल्क वापस ले लिए गए थे। भारत ने इस बारे में 12 मई को नोटिस जारी किया। इसमें डब्ल्यूटीओ के रक्षोपाय समझौते के प्रावधान के तहत अपने अधिकारों के उपयोग की बात कही गयी है। यह कानूनी प्रावधान उस स्थिति में किसी देश को जवाबी कार्रवाई करने की अनुमति देता है जब कोई अन्य सदस्य देश बिना उचित सूचना या परामर्श के रक्षोपाय कदम उठाता है। भारत ने अप्रैल में अमेरिका से परामर्श मांगा था। लेकिन अमेरिका ने कहा कि शुल्क राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाये गये हैं और उन्हें रक्षोपाय कदम नहीं माना जाना चाहिए। डब्ल्यूटीओ अधिसूचना के अनुसार, अमेरिकी रक्षोपाय शुल्क से लगभग 7.6 अरब डॉलर मूल्य का भारतीय निर्यात प्रभावित होगा। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका द्वारा लगभग 1.91 अरब डॉलर का अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने की संभावना है। भारत चुनिंदा अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी शुल्क लगाकर इस राशि को वसूल करना चाहता है। -
नई दिल्ली। जस्टिस बी.आर. गवई कल यानी बुधवार को देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ लेंगे। वे इस पद तक पहुंचने वाले पहले बौद्ध न्यायाधीश होंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें शपथ दिलाएंगी। वे मौजूदा मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल अब समाप्त हो रहा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत राष्ट्रपति ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी थी, जिसके बाद कानून और न्याय मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी की। जस्टिस गवई को 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वे इस समय सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं।
पिछले छह वर्षों में, जस्टिस गवई लगभग 700 पीठों (Benches) का हिस्सा रहे हैं और उन्होंने संवैधानिक, प्रशासनिक, दीवानी, आपराधिक, वाणिज्यिक विवादों, मध्यस्थता, विद्युत, शिक्षा और पर्यावरण कानून जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े मामलों की सुनवाई की है। उन्होंने करीब 300 फैसले लिखे हैं, जिनमें संविधान पीठों के महत्वपूर्ण निर्णय भी शामिल हैं। उनके फैसलों में कानून के राज और मौलिक, मानव तथा कानूनी अधिकारों की रक्षा को प्रमुखता दी गई है।जस्टिस गवई 12 नवंबर 2005 को बॉम्बे हाई कोर्ट के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मुंबई के प्रधान पीठ के अलावा नागपुर, औरंगाबाद और पणजी पीठों पर भी महत्वपूर्ण न्यायिक कार्य किया। उनकी नियुक्ति भारत की न्यायिक व्यवस्था में विविधता और समावेशिता को भी दर्शाती है, और न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि अब हर वर्ष 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा। यह बदलाव 27 मार्च 2025 को जारी गजट अधिसूचना के माध्यम से किया गया है। पहले यह धनतेरस के दिन मनाया जाता था, जो हर साल हिंदू पंचांग के अनुसार बदलता रहता है और अक्टूबर या नवंबर में आता है। इस वजह से हर वर्ष आयुर्वेद दिवस की तारीख निश्चित नहीं होती थी, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजन करने में परेशानी होती थी। मंत्रालय ने बताया कि आने वाले दशक में धनतेरस की तारीख 15 अक्टूबर से 12 नवंबर के बीच अलग-अलग रहेगी, जिससे और भी अस्थिरता होगी।
इस समस्या के समाधान के लिए आयुष मंत्रालय ने एक समिति गठित की, जिसने चार संभावित तारीखों का सुझाव दिया। इनमें से 23 सितंबर को अंतिम रूप दिया गया। यह तारीख शरद विषुव (Autumnal Equinox) के साथ मेल खाती है, यह वह दिन होता है जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। यह संतुलन आयुर्वेद के मूल सिद्धांत से मेल खाता है जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन पर आधारित है। इस खगोलीय घटना को प्राकृतिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है और यही आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य भी है -प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना।आयुष मंत्रालय ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थाओं, आम नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से अपील की है कि वे इस नए तय किए गए दिन-23 सितंबर को अपनाएं और आयुर्वेद दिवस को उत्साह के साथ मनाएं। मंत्रालय का मानना है कि यह बदलाव आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य विमर्श में और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा और इसे एक वैज्ञानिक, सबूत-आधारित और सतत स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में प्रोत्साहित करेगा, जो रोगों की रोकथाम और संपूर्ण कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। - नयी दिल्ली ।दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मंगलवार को बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी भाग, अंडमान सागर के दक्षिणी भाग, निकोबार द्वीप समूह और अंडमान सागर के उत्तरी भाग के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। मौसम विभाग ने कहा कि पिछले दो दिनों में निकोबार द्वीपसमूह में मध्यम से भारी वर्षा हुई।इस अवधि में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण, निकोबार द्वीप समूह और अंडमान सागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं के प्रभाव में वृद्धि हुई है। आईएमडी ने बताया कि ‘आउटगोइंग लांगवेव रेडिएशन' (ओएलआर) भी इस क्षेत्र में कम हुआ है जो बादल छाए रहने का सूचक है। ओएलआर से तात्पर्य पृथ्वी की सतह, वातावरण और बादलों द्वारा उत्सर्जित इंफ्रारेड विकिरण से होता है जो बाद में अंतरिक्ष में जाकर खो जाता है। मौसम विभाग ने कहा कि ये स्थितियां इस क्षेत्र में मॉनसून के आगमन के लिए अनुकूल मानकों को पूरा करती हैं। मौसम विभाग ने कहा कि अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण अरब सागर, मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र के अधिकतर भाग, दक्षिण बंगाल की खाड़ी के अधिकतर क्षेत्रों, संपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अंडमान सागर के शेष भागों और मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। प्राथमिक वर्षा प्रणाली के एक जून की सामान्य तिथि से पहले 27 मई को केरल पहुंचने की संभावना है।आईएमडी के आंकड़े के अनुसार, अगर मॉनसून उम्मीद के अनुरूप केरल पहुंचता है तो 2009 के बाद से भारतीय भूमि पर इसका समय से पूर्व आगमन होगा। 2009 में मॉनसून 23 मई को शुरू हुआ था। आम तौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून एक जून तक केरल में प्रवेश करता है और आठ जुलाई तक पूरे देश में छा जाता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से लौटना शुरू हो जाता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है। अप्रैल में आईएमडी ने 2025 के मॉनसून के मौसम में सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान जताया था और ‘अल नीनो' की स्थिति की संभावना को खारिज कर दिया था जो भारतीय उप महाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा का कारण बनता है। ‘अल नीनो' एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो तब होती है जब पूर्वी प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के पास समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह गर्म पानी वायुमंडल को गर्म करता है, जिससे नमी युक्त हवा ऊपर उठती है और तूफान में बदल जाती है। ‘अल नीनो' की स्थिति भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा का कारण बनती है। मॉनसून भारत के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जो लगभग 42 प्रतिशत आबादी की आजीविका का आधार है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देता है। यह देश भर में पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में आज मंगलवार को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया। मारे गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ऑपरेशनल चीफ कमांडर शाहिद कुट्टे भी शामिल है। यह मुठभेड़ शुकरू केलर क्षेत्र में हुई, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) चलाया था। पुलिस के मुताबिक शाहिद कुट्टे शोपियां के छोटीपोरा हीरपोरा गांव का निवासी था और 8 मार्च 2023 को आतंकी संगठन से जुड़ा था। वह कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा था, जिनमें 8 अप्रैल 2024 को डैनिश रिसॉर्ट पर हमला शामिल है, जिसमें दो जर्मन पर्यटक और उनका ड्राइवर घायल हुए थे। इसके अलावा वह कुलगाम के बेजबाग में बीजेपी सरपंच और टेरिटोरियल आर्मी के जवान की हत्या में भी शामिल था।
दूसरे मारे गए आतंकी की पहचान अदनान शफी डार के रूप में हुई है, जो वंदुना मेलहोरा का रहने वाला था। तीसरे आतंकी की पहचान अभी नहीं हो सकी है। आईजीपी कश्मीर वी. के. बर्डी ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों को मार गिराया गया है और ऑपरेशन अभी भी जारी है। भारतीय सेना ने कहा कि शुकरू केलर क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की सटीक सूचना के बाद ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय’ ऑपरेशन शुरू किया गया था। आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर भारी गोलीबारी की, जिसके जवाब में जोरदार मुठभेड़ हुई और तीन कट्टर आतंकी ढेर कर दिए गए।यह मुठभेड़ ऐसे समय हुई जब 11 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच सभी तरह की शत्रुता रोकने पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद यह जम्मू-कश्मीर में दूसरी आतंकी घटना है। 11 मई की शाम को संदिग्ध आतंकियों ने जम्मू के नागरोटा कॉर्प्स मुख्यालय के गेट पर फायरिंग की थी, जिसमें एक जवान घायल हुआ और हमलावर फरार हो गए। इसके अलावा पाकिस्तान सेना ने 11 मई को संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन करते हुए सीमा पार से गोलीबारी की, जिससे जम्मू-कश्मीर के कई सीमावर्ती गांवों में तनाव बढ़ गया। पुलिस ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास के गांवों के निवासियों को सलाह दी है कि वे जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य न हो जाए, तब तक घर न लौटें।- -
नई दिल्ली। अप्रैल 2025 में देश की खुदरा महंगाई दर घटकर 3.16% हो गई, जो पिछले छह वर्षों में सबसे कम है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 में यह दर 3.34% थी जबकि अप्रैल 2024 में 4.83% थी। यानी मार्च से अप्रैल के बीच 18 बेसिस पॉइंट की गिरावट हुई है। महंगाई में यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी के कारण हुई है। उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) आधारित खाद्य महंगाई अप्रैल में घटकर 1.78% रह गई, जो मार्च में 2.69% थी। यह अक्टूबर 2021 के बाद सबसे कम खाद्य महंगाई दर है। सब्जियों, दालों, फलों, अनाज, मांस-मछली और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों की कीमतों में कमी ने महंगाई कम करने में मदद की।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुल महंगाई दर अप्रैल में घटकर 2.92% रह गई, जो मार्च में 3.25% थी। वहीं, ग्रामीण खाद्य महंगाई भी घटकर 1.85% हो गई, जो मार्च में 2.82% थी। वहीं शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर में मामूली गिरावट हुई मार्च के 3.43% से घटकर अप्रैल में 3.36% पर आ गई। हालांकि, शहरी खाद्य महंगाई में तेज गिरावट देखी गई, जो मार्च में 2.48% थी और अप्रैल में घटकर 1.64% रह गई। खास श्रेणियों की बात करें तो, शहरी क्षेत्रों में आवास महंगाई 3.00% पर स्थिर रही। शिक्षा क्षेत्र में महंगाई दर मार्च के 3.98% से बढ़कर अप्रैल में 4.13% हो गई। स्वास्थ्य क्षेत्र की महंगाई दर 4.25% पर लगभग स्थिर रही। परिवहन और संचार की लागत अप्रैल में बढ़कर 3.73% हो गई, जो मार्च में 3.36% थी। ईंधन और बिजली (फ्यूल एंड लाइट) श्रेणी में महंगाई तेजी से बढ़कर अप्रैल में 2.92% हो गई, जो मार्च में सिर्फ 1.42% थी।मासिक आधार पर देखा जाए तो, अप्रैल में संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) 0.31% बढ़ा, जबकि खाद्य मूल्य सूचकांक में 0.15% की गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख खाद्य वस्तुओं में, सब्जियों की कीमतों में साल-दर-साल आधार पर 10.98% की गिरावट आई, जबकि दालों की कीमतें भी घटीं। वहीं, फलों की कीमतों में 13.8% और तेल-घी की कीमतों में 17.4% की तेज बढ़ोतरी हुई।राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने अप्रैल के लिए आंकड़े 1,114 शहरी बाजारों और 1,181 गांवों से एकत्र किए। ग्रामीण क्षेत्रों में 89.4% और शहरी क्षेत्रों में 92.3% उपयोगी डेटा मिला, जिससे लगभग पूर्ण कवरेज सुनिश्चित हो सका।वहीं अगले महीने की खुदरा महंगाई दर (मई 2025) के आंकड़े 12 जून 2025 को जारी किए जाएंगे।- -
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आज मंगलवार को कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए। इस साल कुल 93.66 फीसदी छात्र परीक्षा में पास हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.06 फीसदी अधिक है। लड़कियों ने एक बार फिर लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। 95 फीसदी लड़कियां पास हुईं, जो लड़कों से 2.37 फीसदी अधिक है। इस बार कुल 22,38,827 छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया, जिनमें से 20,95,467 छात्र सफल हुए। क्षेत्रीय स्तर पर त्रिवेंद्रम ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया, जहां 99.70% छात्र पास हुए। दूसरी ओर, असम के गुवाहाटी क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जहां केवल 84.14% छात्र पास हो सके।
गौरतलब है कि CBSE कक्षा 10वीं की परीक्षाएं 15 फरवरी से 18 मार्च 2025 के बीच आयोजित की गईं। ये परीक्षाएं देशभर के 7,837 केंद्रों और 26 विदेशी केंद्रों सहित कुल 26,675 स्कूलों में हुईं। CBSE ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। नियमित छात्रों को स्कूल की यूनिफॉर्म पहननी थी, जबकि निजी छात्रों को हल्के रंग के कपड़े पहनने के निर्देश दिए गए थे। छात्रों को परीक्षा केंद्र पर परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले पहुंचना अनिवार्य था।परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन, स्मार्टवॉच, कैमरा, किताबें, पर्स, हैंडबैग, चश्मा और पाउच जैसी वस्तुएं प्रतिबंधित थीं। खाने-पीने की चीजें भी अनुमति नहीं थीं, केवल मधुमेह से ग्रस्त छात्रों को विशेष अनुमति के बाद इसकी छूट दी गई थी। इससे पहले CBSE ने कक्षा 12वीं के नतीजे भी घोषित किए थे, जिसमें 88.39% छात्र पास हुए थे, जो पिछले साल से 0.41% अधिक था। 12वीं में 91% लड़कियों ने सफलता पाई, जो लड़कों से 5.94% अधिक है। इस परीक्षा में 16 लाख से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया था, जिनमें से 14 लाख से अधिक पास हुए। वहीं क्षेत्रीय स्तर पर 12वीं में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा ने 99.60% पास प्रतिशत के साथ टॉप किया, जबकि प्रयागराज क्षेत्र में सबसे कम, लगभग 80% छात्र पास हुए।- -
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा की परीक्षा रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार का रिजल्ट 88.39 प्रतिशत रहा। पिछली बार का रिजल्ट 87.98 प्रतिशत था। इस बार 12वीं के रिजल्ट में 0.41 अंकों की वृद्धि हुई है।
इस साल परीक्षा के लिए 17,04,367 छात्रों ने कराया था पंजीकरणकेंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने कक्षा 12 के रिजल्ट की घोषणा करते हुए बताया कि इस साल परीक्षा के लिए कुल 17,04,367 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 16,92,794 उपस्थित हुए और उनमें से 14,96,307 पास हुए हैं।इस साल पास होने वाली लड़कियों का प्रतिशत 91.64 रहाउन्होंने बताया कि सीबीएसई 12वीं कक्षा की परीक्षा का इस बार का रिजल्ट 88.39 प्रतिशत रहा है। पिछले वर्ष का उत्तीर्ण प्रतिशत 87.98 प्रतिशत था। पिछले साल की तुलना में कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में 0.41 अंकों की मामूली वृद्धि हुई है। साथ ही पिछले साल की तरह इस साल भी लड़कियों का पास प्रतिशत ज्यादा है। इस साल पास होने वाली लड़कियों का प्रतिशत 91.64 रहा है, तो वहीं लड़कों का पास प्रतिशत 85.70 रहा है।सीबीएसई के जिलेवार नतीजों में विजयवाड़ा ने मारी बाजीसीबीएसई के जिलेवार नतीजों पर नजर डालें तो विजयवाड़ा ने बाजी मारी है। विजयवाड़ा में 99.60 प्रतिशत छात्र-छात्राएं पास हुई हैं। इसके बाद, त्रिवेंद्रम का रिजल्ट 99.32 प्रतिशत रहा है। इसके अलावा, चेन्नई का 97.39 प्रतिशत, बेंगलुरु का 95.95 प्रतिशत, दिल्ली पश्चिम का 95.37 प्रतिशत, दिल्ली पूर्व का 95.06 प्रतिशत, चंडीगढ़ का 91.61 प्रतिशत, पंचकूला का 91.17 प्रतिशत, पुणे का 90.93 प्रतिशत, अजमेर का 90.40 प्रतिशत, भुवनेश्वर का 83.64 प्रतिशत, गुवाहाटी का 83.62 प्रतिशत, देहरादून का 83.45 प्रतिशत, पटना का 82.86 प्रतिशत, भोपाल का 82.46 प्रतिशत और नोएडा का 81.29 प्रतिशत तथा प्रयागराज का 79.53 प्रतिशत रिजल्ट रहा।यहां देखें रिजल्टसीबीएसई ने बताया कि कक्षा 12 2024-2025 का परिणाम आज घोषित कर दिया गया है। जानकारी दी जाती है कि कक्षा 12वीं के परिणाम सीबीएसई डॉट जीओवी डॉट इन, रिजल्ट डॉट एनआईसी डॉट इन या फिर डिजी लॉकर डॉट इन पर जाकर देख सकते हैं। -
जवानों के बीच पीएम मोदी, जवानों ने जय हिंद के नारे लगाए
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह पंजाब के आदमपुर एयरबेस पहुंचे। उन्होंने यहां ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जवानों से बातचीत की और सफल एयर स्ट्राइक को लेकर बधाई भी दी। पीएम मोदी आदमपुर एयरबेस पर करीब एक घंटे तक रहे। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें पोस्ट की। इससे पहले सोमवार शाम को प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों सेनाओं के जवानों की तारीफ की थी। जवानों के बीच पी मोदी पहुंचे, तो जवानों ने जय हिंद के नारे लगाए।
- नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना आज मंगलवार को सेवानिवृत्त होंगे। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। उन्होंने 10 नवंबर, 2024 को पदभार ग्रहण किया और छह महीने तक सर्वोच्च पद पर रहने के बाद सेवानिवृत्त होंगे।न्यायिक परंपरा के अनुसार, न्यायमूर्ति खन्ना अपने उत्तराधिकारी के साथ औपचारिक बेंच पर बैठेंगे। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन एक औपचारिक समारोह में निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश को विदाई देने के लिए तैयार है, जिसके दौरान न्यायमूर्ति खन्ना द्वारा विदाई भाषण देने की उम्मीद है।न्यायमूर्ति बी आर गवई लेंगे अगले मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथन्यायमूर्ति खन्ना ने औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई को अपने उत्तराधिकारी के रूप में अनुशंसित किया है। यह अनुशंसा केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को की गई थी और राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद न्यायमूर्ति गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।23 नवंबर, 2025 तक होगा न्यायमूर्ति बी आर गवई का कार्यकालन्यायमूर्ति गवई को 24 मई, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था। 64 वर्ष की आयु में, वे 23 नवंबर, 2025 तक शीर्ष न्यायिक पद पर बने रहेंगे, जब वे 65 वर्ष के हो जाएंगे, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु है।न्यायमूर्ति गवई ने 1985 में अपना कानूनी करियर किया था शुरूमहाराष्ट्र के अमरावती के मूल निवासी न्यायमूर्ति गवई ने 16 मार्च, 1985 को अपना कानूनी करियर शुरू किया। उन्होंने पूर्व महाधिवक्ता और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजा एस. भोंसले से प्रशिक्षण प्राप्त किया। 1990 के बाद, उन्होंने संवैधानिक और प्रशासनिक कानून पर विशेष जोर देते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में अपनी कानूनी प्रैक्टिस पर ध्यान केंद्रित किया।कई प्रमुख सार्वजनिक कानूनी पदों पर कार्य कर चुके हैं बी आर गवईउन्होंने सहायक सरकारी वकील, अतिरिक्त लोक अभियोजक और बाद में नागपुर पीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक सहित कई प्रमुख सार्वजनिक कानूनी पदों पर कार्य किया है। न्यायमूर्ति गवई की पदोन्नति न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा, न केवल उनके अनुभव के लिए बल्कि अनुसूचित जाति की पृष्ठभूमि से आने वाले कुछ मुख्य न्यायाधीशों में से एक के रूप में भी, जो भारतीय न्यायपालिका के भीतर बढ़ती समावेशिता को दर्शाता है।
- नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता समाप्त करने पर सहमति बनने के बाद जम्मू-कश्मीर के रियासी में जनजीवन सामान्य हो गया है। मंगलवार सुबह की तस्वीरों में छात्र स्कूलों में लौटते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, सांबा जिले के एक सीमावर्ती गांव के स्थानीय निवासियों में पाकिस्तानी सेना के प्रति भय व्याप्त है क्योंकि सोमवार रात को विस्फोटों की आवाज सुनी गई और एक घर में छर्रे लगे।पाकिस्तान की गोलाबारी के कारण प्रभावित घर की छत और रसोई क्षतिग्रस्त हो गई है। स्थानीय निवासी दलबीर सिंह ने बताया कि पाकिस्तान की गोलाबारी के कारण हमेशा डर बना रहता है। कल रात हमें कुछ पता नहीं था, लेकिन हमने शोर सुना। सुबह हमने देखा कि यह हुआ है। हालांकि, ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ है। जब विस्फोट हुआ तो हम सब घर पर थे। बाद में पुलिस आई और स्थिति का जायजा लिया। डर का माहौल है।एक अन्य स्थानीय व्यक्ति कृष्ण चंद ने बताया कि जब विस्फोट हुआ तब वह बाहर बैठे थे। उन्होंने कहा, “कल रात हमें कुछ पता नहीं था, लेकिन हमने शोर सुना। सुबह हमने देखा कि यह घटना हुई है। हालांकि, ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। विस्फोट के समय हम सभी घर पर थे। बाद में पुलिस आई और स्थिति का जायजा लिया। वहां डर का माहौल है।”एक अन्य सीमावर्ती गांव के स्थानीय निवासी प्रखर सिंह ने कहा, “जब ड्रोन से गोलीबारी हुई, तो मैं अपने बच्चों को शांत करने की कोशिश कर रहा था। पाकिस्तान मानने को तैयार नहीं है।”सोमवार शाम को सांबा में ब्लैकआउट के बीच भारतीय वायु रक्षा बलों ने पाकिस्तानी ड्रोनों को रोका, जिसके बाद लाल धारियाँ देखी गईं और विस्फोटों की आवाज़ सुनी गई।
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नोएडा/ ग्रेटर नोएडा पुलिस ने ऑटो रिक्शा में रस्सी से बांधकर कुत्ते को घसीटने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर एक व्यक्ति को सोमवार को गिरफ्तार किया। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि रविवार को सोशल मीडिया पर पांच सेकंड का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक ऑटो रिक्शा के पीछे कुत्ते को रस्सी से बांधकर घसीटते देखा जा सकता है और ऑटो रिक्शा की पिछली नंबर प्लेट नहीं है। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि घटना कासना थाना क्षेत्र में गांव डाढा के पास की है।
थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि बीती रात को इस मामले में पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। -
कुशीनगर . उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की निवासी अर्चना शाही के लिए अब 'सिंदूर' एक शब्द नहीं बल्कि एक भावना है, जिसके चलते उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने अपनी बेटी का नाम 'सिंदूर' रखने का फैसला किया। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता से प्रेरित होकर और देशभक्ति की भावना के साथ, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में 17 नवजात लड़कियों का नाम उनके परिजन ने 'सिंदूर' रखा है। बेटी को जन्म देने वाली अर्चना शाही ने कहा, "पहलगाम हमले में कई महिलाओं ने अपने पति खो दिए। उसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। हम सभी को इस पर गर्व है। अब 'सिंदूर' एक शब्द नहीं बल्कि एक भावना है। इसीलिए हमने अपनी बेटी का नाम 'सिंदूर' रखने का फैसला किया।'' दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में लोकप्रिय पर्यटन शहर पहलगाम के पास बैंसरन में मंगलवार 22 अप्रैल की दोपहर को आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में 26 लोग मारे गए। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में सात मई को तड़के ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया था। पाकिस्तानी हमलों का जवाब देने के लिए उसके बाद की सभी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके शाही ने बताया, ''कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में दो दिनों के अंतराल में जन्मी 17 नवजात लड़कियों का नाम उनके परिजन ने 'सिंदूर' रखा है।" शाही ने बताया कि कुशीनगर जिले के पडरौना क्षेत्र के मदन गुप्ता की बहू काजल गुप्ता ने बेटी को जन्म दिया और उसका नाम 'सिंदूर' रखा है। मदन गुप्ता ने बताया कि जब से सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया और पहलगाम में मारे गए लोगों की मौत का बदला लिया, तब से उनकी बहू की इच्छा नवजात बच्ची का नाम 'सिंदूर' रखने की थी। मदन गुप्ता ने बताया, "हमने नवजात बच्ची का नाम 'सिंदूर' रखा, ताकि हम न सिर्फ सेना के इस ऑपरेशन को याद रखें, बल्कि इस दिन को उत्साह के साथ मनाएं।" कुशीनगर जिले के भेड़िहारी गांव की निवासी अर्चना शाही के पति अजीत शाही ने बताया, "अर्चना और मैंने बेटी के जन्म से पहले ही उसका नाम 'सिंदूर' सोच लिया था। यह शब्द हमारे लिए प्रेरणा है।" कुशीनगर जिले के भठही बाबू गांव के व्यासमुनि की पत्नी ने भी बेटी को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी में साहस भरने के लिए उसका नाम 'सिंदूर' रखेंगी। उनके अनुसार, जब बेटी बड़ी होगी तो वह इस शब्द का सही मतलब समझेगी और खुद को भारत माता के लिए कर्तव्य परायण नागरिक के रूप में पेश करेगी। मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने यह भी बताया कि कुशीनगर जिले के पडरौना क्षेत्र की प्रियंका देवी ने भी बेटी को जन्म दिया है। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के प्रति इस दंपत्ति के मन में बहुत सम्मान है और उन्होंने कहा है कि इसीलिए वे अपनी बेटी का नाम 'सिंदूर' रखेंगे।
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, "...निश्चित तौर पर यह युग युद्ध का नहीं है लेकिन यह युग आतंकवाद का भी नहीं है। आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस', यह एक बेहतर दुनिया की गारंटी है।"
पढ़ें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम पूरा संबोधन
प्रिय देशवासियों,
नमस्कार!
हम सभी ने बीते दिनों में देश का सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा है। मैं सबसे पहले भारत की पराक्रमी सेनाओं को, सशस्त्र बलों को, हमारी खुफिया एजेंसियों को, हमारे वैज्ञानिकों को, हर भारतवासी की तरफ से सैल्यूट करता हूं। हमारे वीर सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया। मैं उनकी वीरता को, उनके साहस को, उनके पराक्रम को, आज समर्पित करता हूं- हमारे देश की हर माता को, देश की हर बहन को, और देश की हर बेटी को, ये पराक्रम समर्पित करता हूं।
साथियों,
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने जो बर्बरता दिखाई थी, उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था। छुट्टियां मना रहे निर्दोष-मासूम नागरिकों को धर्म पूछकर, उनके परिवार के सामने, उनके बच्चों के सामने, बेरहमी से मार डालना, ये आतंक का बहुत विभत्स चेहरा था, क्रूरता थी। ये देश के सद्भाव को तोड़ने की घिनौनी कोशिश भी थी। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से ये पीड़ा बहुत बड़ी थी। इस आतंकी हमले के बाद सारा राष्ट्र, हर नागरिक, हर समाज, हर वर्ग, हर राजनीतिक दल, एक स्वर में, आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उठ खड़ा हुआ। हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनाओं को पूरी छूट दे दी। और आज हर आतंकी, आतंक का हर संगठन जान चुका है कि हमारी बहनों-बेटियों के माथे से सिंदूर हटाने का अंजाम क्या होता है।
साथियों,
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ये सिर्फ नाम नहीं है, ये देश के कोटि-कोटि लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है। 6 मई की देर रात, 7 मई की सुबह, पूरी दुनिया ने इस प्रतिज्ञा को परिणाम में बदलते देखा है। भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर, उनके ट्रेनिंग सेंटर्स पर सटीक प्रहार किया। आतंकियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इतना बड़ा फैसला ले सकता है। लेकिन जब देश एकजुट होता है, Nation First की भावना से भरा होता है, राष्ट्र सर्वोपरि होता है, तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं, परिणाम लाकर दिखाए जाते हैं।
जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमला बोला, भारत के ड्रोन्स ने हमला बोला, तो आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं, बल्कि उनका हौसला भी थर्रा गया। बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकाने, एक प्रकार से ग्लोबल टैररिज्म की यूनिवर्सटीज रही हैं। दुनिया में कहीं पर भी जो बड़े आतंकी हमले हुए हैं, चाहे नाइन इलेवन हो, चाहे लंदन ट्यूब बॉम्बिंग्स हो, या फिर भारत में दशकों में जो बड़े-बड़े आतंकी हमले हुए हैं, उनके तार कहीं ना कहीं आतंक के इन्हीं ठिकानों से जुड़ते रहे हैं। आतंकियों ने हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा था, इसलिए भारत ने आतंक के ये हेडक्वार्ट्स उजाड़ दिए। भारत के इन हमलों में 100 से अधिक खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा गया है। आतंक के बहुत सारे आका, बीते ढाई-तीन दशकों से खुलेआम पाकिस्तान में घूम रहे थे, जो भारत के खिलाफ साजिशें करते थे, उन्हें भारत ने एक झटके में खत्म कर दिया।
साथियों,
भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान घोर निराशा में घिर गया था, हताशा में घिर गया था, बौखला गया था, और इसी बौखलाहट में उसने एक और दुस्साहस किया। आतंक पर भारत की कार्रवाई का साथ देने के बजाय पाकिस्तान ने भारत पर ही हमला करना शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने हमारे स्कूलों-कॉलेजों को, गुरुद्वारों को, मंदिरों को, सामान्य नागरिकों के घरों को निशाना बनाया, पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन इसमें भी पाकिस्तान खुद बेनकाब हो गया।दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन्स और पाकिस्तान की मिसाइलें, भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के सशक्त एयर डिफेंस सिस्टम ने, उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोन्स, भारत की मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के उन एयरबेस को नुकसान पहुंचाया, जिस पर पाकिस्तान को बहुत घमंड था। भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था।इसलिए, भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा। पाकिस्तान, दुनिया भर में तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था। और बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे DGMO को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था, पाकिस्तान के सीने में बसाए गए आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था, इसलिए, जब पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई, पाकिस्तान की तरफ से जब ये कहा गया, कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा। तो भारत ने भी उस पर विचार किया। और मैं फिर दोहरा रहा हूं, हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है। आने वाले दिनों में, हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे, कि वो क्या रवैया अपनाता है।
साथियों,
भारत की तीनों सेनाएं, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी, और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सेक्योरिटी फोर्स- BSF, भारत के अर्धसैनिक बल, लगातार अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।
पहला- भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्यवाही करेंगे, जहां से आतंक की जड़ें निकलती हैं। दूसरा- कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।
तीसरा- हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, दुनिया ने, पाकिस्तान का वो घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सरड टेरेरिज्म का ये बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।
साथियों,
युद्ध के मैदान पर हमने हर बार पाकिस्तान को धूल चटाई है। और इस बार ऑपरेशन सिंदूर ने नया आयाम जोड़ा है। हमने रेगिस्तानों और पहाड़ों में अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, और साथ ही, न्यू एज वॉरफेयर में भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इस ऑपरेशन के दौरान, हमारे मेड इन इंडिया हथियारों की प्रमाणिकता सिद्ध हुई। आज दुनिया देख रही है, 21वीं सदी के वॉरफेयर में मेड इन इंडिया डिफेंस इक्विपमेंट्स, इसका समय आ चुका है।
साथियों,
हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ हम सभी का एकजुट रहना, हमारी एकता, हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। निश्चित तौर पर ये युग युद्ध का नहीं है, लेकिन ये युग आतंकवाद का भी नहीं है। टैररिज्म के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, ये एक बेहतर दुनिया की गारंटी है।
साथियों,
पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार, जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रहे है, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा। पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टैरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है। भारत का मत एकदम स्पष्ट है, टैरर और टॉक, एक साथ नहीं हो सकते, टैरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते। और, पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।
मैं आज विश्व समुदाय को भी कहूंगा, हमारी घोषित नीति रही है, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, PoK उस पर ही होगी।
प्रिय देशवासियों,
आज बुद्ध पूर्णिमा है। भगवान बुद्ध ने हमें शांति का रास्ता दिखाया है। शांति का मार्ग भी शक्ति से होकर जाता है। मानवता, शांति और समृद्धि की तरफ बढ़े, हर भारतीय शांति से जी सके, विकसित भारत के सपने को पूरा कर सके, इसके लिए भारत का शक्तिशाली होना बहुत जरूरी है, और आवश्यकता पड़ने पर इस शक्ति का इस्तेमाल भी जरूरी है। और पिछले कुछ दिनों में, भारत ने यही किया है।
मैं एक बार फिर भारत की सेना और सशस्त्र बलों को सैल्यूट करता हूं। हम भारतवासी के हौसले, हर भारतवासी की एकजुटता का शपथ, संकल्प, मैं उसे नमन करता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
भारत माता की जय !!!
भारत माता की जय !!!
भारत माता की जय !!!
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लखनऊ/नयी दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने न केवल सीमा के पास पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, बल्कि उनकी ताकत पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय की मौजूदगी वाले रावलपिंडी में भी महसूस की गई। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकी हमले के जरिए कई महिलाओं की मांग का सिंदूर मिटाने वाली भारत विरोधी ताकतों और आतंकवादियों को दंडित किया है। रक्षा मंत्री ने लखनऊ के ‘उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' में ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटिग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी' का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
रक्षा मंत्री ने ब्रह्मोस मिसाल विनिर्माण इकाई को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक फैक्ट्री का उद्घाटन नहीं है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 300 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह विनिर्माण इकाई ‘उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह विनिर्माण इकाई अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सामग्रियों का उत्पादन करेगी, जिनका उपयोग चंद्रयान मिशन और लड़ाकू विमानों में किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक, सामाजिक और रणनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में सात मई को तड़के पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया गया था। पाकिस्तानी हमलों के बाद की सभी जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई। भारत और पाकिस्तान ने शनिवार को जमीन, वायु और समुद्री क्षेत्र में सभी प्रकार की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोकने के लिए सहमति बनने की घोषणा की थी। सिंह ने कहा कि पूरा देश ‘‘इस ऑपरेशन की सफलता के लिए भारतीय सेना को बधाई दे रहा है।''उन्होंने कहा, ‘‘यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा सैन्य शक्ति की क्षमता और संकल्प का प्रदर्शन है।''
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमने दिखा दिया है कि जब भी भारत आतंकवाद के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा, तो सीमा पार की जमीन भी आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए सुरक्षित नहीं होगी।'' रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आम नागरिकों को कभी निशाना नहीं बनाया, लेकिन पड़ोसी देश ने भारत के असैन्य क्षेत्रों तथा मंदिरों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों को निशाना बनाया। भारतीय सेना ने साहस एवं संयम का परिचय दिया तथा पाकिस्तान के कई सैन्य अड्डों पर हमला करके उसे मुंहतोड़ जवाब दिया।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमने न केवल सीमा के निकट सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की, बल्कि भारतीय सेना की ताकत रावलपिंडी में भी महसूस की गई, जहां पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय स्थित है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया ने भारत में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के परिणामों को देख लिया है। राजनाथ ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि नया भारत सीमा के दोनों ओर आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करेगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘उरी की घटना के बाद हमारी सेना ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की, पुलवामा हमले के बाद हमने बालाकोट हवाई हमले किए और अब दुनिया देख रही है कि पहलगाम हमले के बाद कैसे भारत ने पाकिस्तान में घुसकर कई हमले किए।''
रक्षा मंत्री ने ब्रह्मोस मिसाल विनिर्माण इकाई को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, ''यह सिर्फ एक फैक्ट्री का उद्घाटन नहीं है, बल्कि मेरा मानना है कि यह रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।'' उन्होंने ब्रह्मोस को भारत और रूस की सर्वोच्च रक्षा तकनीक का संगम बताते हुए कहा, ''ब्रह्मोस भारत और रूस की सर्वोच्च रक्षा तकनीक का संगम है। जिस तरह हमारा उत्तर प्रदेश प्रयाग में संगम के लिए दुनिया भर में जाना जाता है उसी तरह आने वाले समय में लखनऊ भी इस तकनीक के संगम के लिए जाना जाएगा। यह संगम अपने आप में कई विशेषताएं समेटे हुए है। आने वाले समय में यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा करेगा। मुझे यह भी विश्वास है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र विकास की धुरी बनकर उभरेगा।'' सिंह ने कहा, ''भारत के मिसाइल मैन कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि जब तक भारत दुनिया के सामने खड़ा नहीं होगा तब तक कोई भी हमारा सम्मान नहीं करेगा। इस दुनिया में डर का कोई स्थान नहीं है। केवल ताकत ही ताकत का सम्मान करती है।''रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत की गिनती दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में की जाती है और यह ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री भारत की शक्ति को और मजबूत करने में मदद करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटिग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी' दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक का निर्माण करेगी, जिसकी मारक क्षमता 290 से 400 किलोमीटर तक होगी। राज्य सरकार ने बयान में कहा कि साढ़े तीन साल में बनकर तैयार हुई लखनऊ स्थित ब्रह्मोस विनिर्माण इकाई 80 हेक्टेयर में फैली है। इसके लिए जमीन उत्तर प्रदेश सरकार ने निशुल्क उपलब्ध कराई है। तमिलनाडु के बाद ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' स्थापित करने वाला उत्तर प्रदेश दूसरा राज्य है। सिंह ने कहा, ''जैसा कि आप सभी जानते हैं कि चाहे राज्य सरकार हो या केंद्र की सरकार, हमारी नीति बहुत स्पष्ट है। मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ल्ड। हमारे लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बहुत व्यापक अर्थ है। हम इस विचार के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि हमें अपने लिए हथियार और उपकरण बनाने के साथ-साथ उन्हें पूरी दुनिया में निर्यात भी करना है।'' रक्षा मंत्री ने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ''इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 में विश्व सैन्य व्यय बढ़कर 2,718 अरब डॉलर हो गया है। हथियारों और उपकरणों के लिए एक बड़ा बाजार हमारा इंतजार कर रहा है इसलिए हमें भारत को दुनिया के लिए एक आकर्षक रक्षा उत्पाद केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी मजबूती के साथ आगे बढ़ना है। आज उस विचार की दिशा में एक और ठोस कदम बढ़ाया गया है।'' उन्होंने कहा, ''आज हम जिस ब्रह्मोस विनिर्माण इकाई का उद्घाटन कर रहे हैं उसने अपनी शुरुआत से अब तक लगभग 500 प्रत्यक्ष और एक हजार अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं।'' सिंह ने कहा कि यह भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा यहां विकसित किये गये माहौल की वजह से संभव हुआ है। उन्होंने कहा, ''यूपीडीआईसी में अब तक 34,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के साथ कुल 180 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं और चार हजार करोड़ रुपये का निवेश पहले ही हो चुका है।''
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नयी दिल्ली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष में भारत की वैज्ञानिक क्षमता और प्रौद्योगिकी में उन्नति तथा पिछले 11 वर्षों में इन क्षेत्रों में हुई प्रगति दुनिया के सामने प्रदर्शित हुई। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाने के लिए आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि पिछले चार दिनों में संघर्ष में इस्तेमाल की गई कई प्रौद्योगिकियां और हथियार- ड्रोन से लेकर मिसाइल तक-, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समर्थित आत्मनिर्भरता की अवधारणा पर आधारित थे। भारत हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है। यह 1998 में पोकरण में किए गए परमाणु परीक्षणों की वर्षगांठ के अवसर पर मनाया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में, भारत के पास दुनिया के बाकी हिस्सों के सामने अपनी वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन करने का भरपूर अवसर रहा। आजकल कोई भी सशस्त्र संघर्ष प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित होता है।'' सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘इसलिए, यह इस बात का प्रमाण है कि भारत ने रक्षा सहित वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी के हर क्षेत्र में सर्वोच्चता हासिल कर ली है।'' सिंह ने कहा, ‘‘आपने टेलीविजन स्क्रीन पर जो कुछ भी देखा, वह कमोबेश स्वदेशी था। आत्मनिर्भर भारत में इसका निर्माण हुआ और इससे यह भी संकेत मिला कि विकसित भारत कैसा होने जा रहा है।'' उन्होंने एक पाकिस्तानी मंत्री की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘पहली बार दुनिया को एहसास हुआ है कि आज का भारत अतीत का भारत नहीं है।'' सिंह ने याद दिलाया कि टीडीबी ड्रोन परियोजना को वित्तपोषित करने वाला पहला संगठन था, जिसका प्रदर्शन कुछ वर्ष पहले गणतंत्र दिवस समारोह के समापन के अवसर पर आयोजित बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान किया गया था। सिंह ने कहा, ‘‘जिस तरह से उन्होंने आसमान को रंगीन बनाया, उस दिन के जश्न में आप ड्रोन के आकर्षण से अभिभूत थे। ड्रोन वास्तव में क्या कर सकते हैं, यह आपने पिछले चार दिनों में देखा।'' विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ सैन्य टकराव के मद्देनजर सरकार ने देशभर में वैज्ञानिक प्रतिष्ठानों, विशेषकर पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने देश भर में वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की तथा विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा तैयारियों को उन्नत करने के निर्देश जारी किए। मंत्री ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि श्रीनगर और लेह में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के केंद्रों और जम्मू में भारतीय समवेत औषध संस्थान की सुरक्षा भी बढ़ाई जाएगी। एक विज्ञप्ति के अनुसार, सभी वैज्ञानिक संस्थानों को मौजूदा स्थिति के मद्देनजर अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने और उन्हें बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। निर्बाध समन्वय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों को संबंधित जिला प्रशासन को तुरंत सूचित करना चाहिए।
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गुवाहाटी। सिक्किम में मेली से डेंटम तक जोरथांग और लेगशिप के रास्ते नयी रेलवे लाइन बिछाने के लिए अंतिम सर्वेक्षण को रेल मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। इस सर्वेक्षण को पूर्वोत्तर सीमा रेलवे द्वारा 2.25 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। यह निर्णय सिक्किम के दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में रेल संपर्क का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। प्रस्तावित मार्ग का उद्देश्य एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की कमी को पूरा करना है जो भारत-नेपाल सीमा के पास चिवाभंजयांग में स्थित डेंटम जैसे दूरदराज के शहरों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ता है। शुरुआती सर्वेक्षण के तहत नए रेल मार्ग की लंबाई 75 किलोमीटर होगी और यह निर्माणाधीन सिवोक-रंगपो रेलवे परियोजना का विस्तार कर बिछाई जाएगी। सिवोक-रंगपो रेलवे परियोजना के 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। दक्षिणी और पश्चिमी सिक्किम के लिए एक प्रमुख केंद्र मेली प्रस्तावित विस्तार के लिए जंक्शन के रूप में काम करेगा। जारी बयान में कहा गया कि सर्वेक्षण को लेकर संबंधित कार्य निविदाएं जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।
- नागपुर,। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में अपने राजनीतिक सफर की पुरानी बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने राजनीति की शुरुआत की थी, तब कुछ लोग उनके घर पर रोज़ पत्थर फेंकते थे, लेकिन समय बदला और आज वही लोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए हैं। गडकरी स्थानीय भाजपा नेता रामदास आंबटकर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कठिन समय में भी भाजपा कार्यकर्ताओं की निष्ठा और मेहनत पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक बालासाहेब देवरस के एक भाषण का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था, "दुर्लभ कार्यकर्ता ही संगठन की सबसे बड़ी शक्ति होता है।'' गडकरी ने कहा कि आरएसएस में बड़ी संख्या में ऐसे समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिनकी बदौलत संगठन ने सफलतापूर्वक लगभग 100 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि ये कार्यकर्ता हमेशा अपनी विचारधारा और राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हैं।गडकरी ने राजनीति में अपने शुरुआती दिनों को भी याद किया।उन्होंने कहा कि 1975 में जब मैं नागपुर क्षेत्र में भाजपा के लिए काम कर रहा था, तो मेरे इलाके के कुछ लोग अक्सर मेरे घर पर पत्थर फेंकते थे। गडकरी ने कहा कि समय के साथ वही लोग आरएसएस मुख्यालय, डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर और उनके घर आने लगे तथा उनमें से एक तो बाद में भाजपा का वार्ड अध्यक्ष भी बना। गडकरी ने भाजपा और आरएसएस में योगदान के लिए दिवंगत आंबटकर और उनके परिवार की सराहना की।











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