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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को घोषणा की कि सरकार देश में सरदार वल्लभभाई पटेल के उल्लेखनीय योगदान का सम्मान करने के लिए 2024 से 2026 तक दो साल के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के साथ उनकी 150वीं जयंती मनाएगी। शाह ने कहा कि दुनिया के सबसे मजबूत लोकतंत्रों में से एक की स्थापना के दूरदर्शी शिल्पकार के रूप में सरदार पटेल की स्थायी विरासत और कश्मीर से लक्षद्वीप तक भारत को एकजुट करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका अमिट है। उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘उनके उल्लेखनीय योगदान का सम्मान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार 2024 से 2026 तक दो साल के राष्ट्रव्यापी उत्सव के साथ उनकी 150वीं जयंती मनाएगी।'' गृह मंत्री ने कहा कि यह उत्सव सरदार पटेल की उल्लेखनीय उपलब्धियों और एकता की भावना के प्रमाण के रूप में काम करेगा, जिसके वह प्रतीक थे। पटेल का जन्म गुजरात के नडियाद में 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था।
केंद्र सरकार राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को संरक्षित और मजबूत करने में सरदार पटेल के समर्पण को रेखांकित करते हुए 2014 से 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रही है। भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में पटेल को 550 से अधिक रियासतों के भारत संघ में विलय का श्रेय दिया जाता है। -
चेन्नई. एक उपभोक्ता को 50 पैसे न लौटाना भारतीय डाक विभाग को महंगा पड़ गया है। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डाक विभाग को यह पैसा वापस करने और साथ ही मानसिक पीड़ा, अनुचित व्यवहार और सेवा में कमी के लिए उन्हें 10 हजार रुपये का मुआवजा भी देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कांचीपुरम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डाक विभाग (डीओपी) को मुकदमे के खर्च के लिए शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये का भुगतान करने को भी कहा है। शिकायतकर्ता ए. मनशा के अनुसार उन्होंने 13 दिसंबर, 2023 को यहां के निकट पोझिचालुर डाकघर में एक पंजीकृत पत्र के लिए 30 रुपये की नकदी का भुगतान किया लेकिन रसीद पर केवल 29.50 रुपये दिखाये गये। शिकायतकर्ता ने कहा कि हालांकि उन्होंने यूपीआई के माध्यम से सटीक राशि भेजने की पेशकश की लेकिन कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण डाक कर्मियों ने इसे अस्वीकार कर दिया। शिकायत में उन्होंने कहा कि प्रतिदिन लाखों रूपये का लेनदेन होता है और उनका सही हिसाब नहीं रखने से सरकार को नुकसान भी होता है। उन्होंने इसे अवैध करार दिया जिससे उन्हें ‘गंभीर मानसिक पीड़ा' हुई। विभाग ने आयोग के समक्ष कहा कि तकनीकी समस्याओं के कारण उस समय उपभोक्ता से डिजिटल माध्यम से भुगतान स्वीकार नहीं किया जा सका और इसलिए उनसे नकद राशि ली गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने कहा कि सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या के कारण डाकघर द्वारा 50 पैसे अधिक वसूलना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अनुचित है। जिला उपभोक्ता आयोग ने डीओपी को शिकायतकर्ता को 50 पैसे वापस करने और साथ ही मानसिक पीड़ा, अनुचित व्यवहार और सेवा में कमी के लिए मुआवजे के रूप में 10 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, कांचीपुरम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डाक विभाग (डीओपी) को मुकदमे की लागत के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने को कहा है। शिकायतकर्ता ने डीओपी को उसके 50 पैसे लौटाने, ‘मानसिक पीड़ा' के लिए 2.50 लाख रुपये का मुआवजा और मुकदमे की लागत के लिए 10,000 रुपये देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
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कजान . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस-यूक्रेन विवाद का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से करने का स्पष्ट रूप से आह्वान करते हुए बुधवार को यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा कि भारत युद्ध का नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है। अपने संबोधन में मोदी ने युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई और कहा कि ब्रिक्स विश्व को सही रास्ते पर ले जाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम युद्ध का नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति का समर्थन करते हैं। और जिस तरह हम एक साथ मिलकर कोविड जैसी चुनौती से पार पाने में सक्षम हुए, उसी तरह हम भावी पीढ़ियों के वास्ते सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए नए अवसर पैदा करने में निश्चित रूप से सक्षम हैं।'' रूस के कजान शहर में 22 से 24 अक्टूबर तक 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग सहित ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस वैश्विक प्रयासों की भी वकालत की और कहा कि इस खतरे से लड़ने में कोई ‘‘दोहरा मापदंड'' नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘आतंकवाद और इसके वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए, हमें सभी के एकनिष्ठ, दृढ़ समर्थन की आवश्यकता है। इस गंभीर मामले पर दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं है। साथ ही मोदी ने कहा कि समूह के देशों को युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा ‘‘हमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र में व्यापक समझौते के लंबित मुद्दे पर मिलकर काम करना होगा।'' उन्होंने कहा कि इसी तरह ‘‘हमें साइबर सुरक्षा, सुरक्षित और संरक्षित एआई के लिए वैश्विक नियमन के वास्ते काम करने की आवश्यकता है।'' मोदी ने कहा कि भारत भागीदार देशों के रूप में ब्रिक्स में नए देशों का स्वागत करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए।'' मोदी ने कहा, ‘‘जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों, मानकों, मानदंडों और प्रक्रियाओं का सभी सदस्यों और भागीदार देशों द्वारा अनुपालन किया जाना चाहिए।'' प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य वैश्विक निकायों में सुधार की भी वकालत की।
उन्होंने कहा, हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, बहुपक्षीय विकास बैंकों और विश्व व्यापार संगठन जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधारों पर समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए।'' मोदी ने कहा, ‘‘जब हम ब्रिक्स में अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना चाहिए कि इस संगठन की छवि ऐसी न बने कि यह वैश्विक संस्थानों को बदलने की कोशिश कर रहा है, बल्कि यह समझा जाए कि यह संगठन उन्हें सुधारने की इच्छा रखता है।'' मोदी ने यह भी तर्क दिया कि ‘ग्लोबल साउथ' के देशों की आशाओं, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। ‘ग्लोबल साउथ' शब्द 1960 के दशक में चलन में आया। यह शब्द आम तौर पर लैटिन अमेरिका, एशिया, अफ्रीका और ओशिनिया के क्षेत्रों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। खासकर इसका मतलब, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाहर, दक्षिणी गोलार्द्ध और भूमध्यरेखीय क्षेत्र में स्थित ऐसे देशों से है जो ज्यादातर कम आय वाले हैं और राजनीतिक तौर पर भी पिछड़े हैं। ‘ब्रिक्स' संगठन की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे ऐसा संगठन बताया जो समय के अनुसार खुद को बदलने की इच्छाशक्ति रखता है। उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न दृष्टिकोणों और विचारधाराओं के समागम से बना ब्रिक्स समूह दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सकारात्मक सहयोग को बढ़ावा देता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारी विविधता, एक-दूसरे के प्रति सम्मान और आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ने की हमारी परंपरा हमारे सहयोग का आधार है।'' ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के मुख्य सदस्य हैं और यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ब्राजील, रूस, भारत और चीन के नेताओं की सेंट पीटर्सबर्ग में 2006 में हुई बैठक के बाद एक औपचारिक समूह के रूप में ‘ब्रिक' की शुरुआत हुई। ‘ब्रिक' को 2010 में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करते हुए ‘ब्रिक्स' के रूप में विस्तारित करने पर सहमति बनी। पिछले साल समूह का विस्तार किया गया जो 2010 के बाद पहली ऐसी कवायद थी। ब्रिक्स के नए सदस्य देशों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद से लड़ने में सभी के ‘‘एकमत होकर दृढ़ता से सहयोग करने’’ की जोरदार पैरोकारी करते हुए बुधवार को कहा कि इस चुनौती से निपटने में ‘‘दोहरे मापदंडों’’ के लिए कोई जगह नहीं है। मोदी ने यहां 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह भी रेखांकित किया कि युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए हमें ‘‘सक्रिय रूप से कदम’’ उठाने चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के मसूद पेजेशकियन सहित ब्रिक्स के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में यह कहा। मोदी ने कहा, ‘‘आतंकवाद और इसके वित्तपोषण से निपटने के लिए हम सभी को एक मत होकर दृढ़ता से सहयोग करना होगा।’’उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं है। युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए हमें सक्रिय रूप से कदम उठाने चाहिए।’’ मोदी की यह टिप्पणी कि आतंकवाद से निपटने में ‘‘दोहरे मापदंडों’’ के लिए कोई जगह नहीं है, इसलिए मायने रखती है कि चीन ने पाकिस्तानी आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने संबंधी कई प्रस्तावों को संयुक्त राष्ट्र में अवरुद्ध कर दिया था।प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अतंरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सम्मेलन के लंबित मुद्दे पर हमें मिलकर काम करना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसी तरह हमें साइबर सुरक्षा, सुरक्षित एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के लिए वैश्विक नियमनों के वास्ते काम करने की जरूरत है।’’ प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत साझेदार देशों के रूप में ब्रिक्स में नये देशों का स्वागत करने के लिए तैयार है।मोदी ने कहा, ‘‘इस संबंध में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों के विचारों का सम्मान करना चाहिए। जोहानिसबर्ग शिखर सम्मेलन में जिस दिशा-निर्देशक सिद्धांत, मानक, पात्रता और प्रक्रिया को हमने अपनाया था, उनका पालन सभी सदस्य और साझेदार देशों को करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ऐसा संगठन है, जो समय के अनुसार खुद को बदलने की इच्छा-शक्ति रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमें इसका उदाहरण पूरे विश्व के सामने रखते हुए वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए एकमत होकर आवाज उठानी चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिक्स के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए हमें ध्यान रखना चाहिए कि इस संगठन की छवि ऐसी न बने जो वैश्विक संस्थाओं में सुधार के बजाय उनकी जगह लेना चाहता हो।’’ -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और भारत-चीन संबंधों को क्षेत्रीय व वैश्विक शांति तथा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे।
मई 2020 में पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद उत्पन्न होने के बाद दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर यह पहली संरचित बैठक थी। बैठक की तस्वीरें ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘कजान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। भारत-चीन संबंध हमारे देशों के लोगों के लिए और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे।’’यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी सेनाओं द्वारा गश्त करने के समझौते पर सहमति जताई थी। चार साल से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। नवंबर 2022 में, मोदी और शी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति द्वारा जी-20 नेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज में एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत की थी। पिछले वर्ष अगस्त में भी भारतीय प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन के दौरान जोहानिसबर्ग में एक संक्षिप्त और अनौपचारिक बातचीत की थी। - अगरतला । पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रायपुर के नेतृत्व में त्रिपुरा प्रवास के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ की 14 सदस्यीय मीडिया टीम ने 51 शक्तिपीठों में से एक माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर के दर्शन किए ।त्रिपुर सुंदरी मंदिर की स्थापना महाराजा धन्य माणिक्य ने वर्ष 1501 में की थी । ऐसा कहा जाता है कि वास्तव में उन्होंने भगवान विष्णु के लिए मंदिर का निर्माण किया था, लेकिन बाद में उनके सपने में एक रहस्योद्घाटन के कारण, उन्होंने बांग्लादेश के चटगाँव से कस्ती पत्थर से बनी माता त्रिपुर सुंदरी की मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया ।हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पीठस्थान वे स्थान हैं जहाँ देवी सती के शरीर के अंग गिरे हैं। "पीठमाला ग्रंथ" के अनुसार, भगवान शिव के तांडव नृत्य के दौरान सती का दाहिना पैर यहाँ गिरा था । ये सभी जानकारियाँ मंदिर की पांडुलिपियों से एकत्र की गई हैं, लेकिन समय के साथ ये पांडुलिपियाँ नष्ट हो गई हैं।देवी त्रिपुर सुंदरी की मूर्ति कस्ती पत्थर से बनी है जो लाल-काले रंग की है। मूर्ति 1.57 मीटर लंबी और 0.64 मीटर चौड़ी है और एक पत्थर के मंच पर स्थापित है। देवी त्रिपुर सुंदरी के 4 हाथ हैं, चेहरा थोड़ा लम्बा है और आंखें तुलनात्मक रूप से छोटी हैं, भगवान शिव की छाती पर खड़ी हैं, स्वर्ण मुकुट से सुसज्जित हैं और एक ग्रिडलॉक है।इस पीठस्थान को कूर्म पीठ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि मंदिर परिसर का आकार "कूर्म" अर्थात कछुए जैसा है । पहली नज़र में मंदिर की संरचना एक संशोधित बौद्ध स्तूप प्रतीत होती है । मंदिर उदयपुर शहर से लगभग 3 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है । यह त्रिपुरा सुंदरी मंदिर या माताबारी के नाम से प्रसिद्ध है ।त्रिपुर सुंदरी मंदिर त्रिपुरा की अनूठी वास्तुकला से बना है । मंदिर की ऊंचाई 75 फीट है, मंदिर के चारों कोनों में 4 विशाल स्तंभ हैं। जड़ बौद्ध वास्तुकला से बनी है। मंदिर के शीर्ष पर एक ध्वज पकड़े हुए सात घड़े/बर्तन स्थापित हैं। मंदिर की वास्तुकला देश की बहु-संस्कृति और परंपरा का संयोजन है । वर्तमान मंदिर महाराजा राधाकिशोर माणिक्य बहादुर के शासनकाल के दौरान बनाया गया था ।मंदिर का मुख पश्चिम की ओर है और मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार भी पश्चिम में है, हालांकि उत्तर में एक संकीर्ण प्रवेश द्वार है। हालांकि मध्ययुगीन बंगाल "चार चाला" (4 तिरछी छत) मंदिर वास्तुकला का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, लेकिन इस जगह का ऐसा मिश्रण अद्वितीय है और त्रिपुरा इसे अपनी वास्तुकला शैली के रूप में अलग से दावा कर सकता है ।मंदिर में एक शंक्वाकार गुंबद के साथ विशिष्ट बंगाली झोपड़ी प्रकार की संरचना का एक चौकोर प्रकार का गर्भगृह है । इस विरासत को स्वीकार करते हुए सितंबर 2003 में त्रिपुरेश्वरी मंदिर की विशेषता वाला एक डाक टिकट जारी किया गया था । मंदिर के पूर्वी हिस्से में कल्याण सागर (एक झील) है जहाँ बहुत बड़ी मछलियाँ और कछुए बिना किसी बाधा के रहते हैं। मंदिर को विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों के समागम के रूप में जाना जाता है । मंदिर की अनूठी विशेषता यह है कि किसी भी धर्म के लोग श्री श्री माता त्रिपुर सुंदरी की पूजा कर सकते हैं । 18वीं शताब्दी के मध्य में, समसेर गाजी ने उदयपुर पर हमला किया और कब्जा कर लिया । समसेर गाजी की जीवनी ‘गाजीनामा’ में उल्लेख है कि गाजी ने स्वयं देवी त्रिपुर सुंदरी की पूजा की थी । मंदिर प्रबंधन समिति में विभिन्न धर्म, संस्कृति और विभागों के लोग शामिल हैं।यह एक प्रथा है कि उदयपुर के मुसलमान भी अपनी पहली फसल और दूध देवी त्रिपुर सुंदरी को अर्पित करते हैं । देवी त्रिपुर सुंदरी त्रिपुरा के आदिवासी समुदायों में भी लोकप्रिय हैं । मंदिर में दिन में दो बार पूजा की जाती है । रोजाना सुबह और शाम को आरती की जाती है । त्रिपुरेश्वरी मंदिर और आस-पास के क्षेत्र के भविष्य के विकास के लिए त्रिपुरा सरकार ने "माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर ट्रस्ट" का गठन किया है । इस ट्रस्ट के अध्यक्ष त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं ।
- मुंबई. फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2024 की विजेता निकिता पोरवाल का कहना है कि वह एक परंपरावादी परिवार में पली-बढ़ी हैं, जहां उनके माता-पिता नारीवाद और महिला सशक्तिकरण जैसी अवधारणाओं से अपरिचित थे, लेकिन उनके जीवन और कर्म में ये मूल्य समाहित रहे हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पली-बढ़ी पोरवाल को पिछले हफ़्ते सौंदर्य प्रतियोगिता में विजेता घोषित किया गया। अब वह 2025 में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के 72वें संस्करण में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। अभिनेत्री-मॉडल निकिता ने कहा कि उनका पालन पोषण बहुत लाड़-प्यार से किया गया और नारीवाद तथा महिला सशक्तिकरण जैसे शब्दों से अनजान होने के बावजूद उनका परिवार महिलाओं के सम्मान को कितना महत्व देता है, यह इसी बात से पता चलता है कि बेटे की उम्मीद के बावजूद उनके जन्म का जश्न मनाया गया। वह बताती हैं कि माहवारी के दिनों में न केवल घर की महिला सदस्य बल्कि पुरूष सदस्य भी उनके आराम और सुविधा का ख्याल रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उज्जैन के एक बहुत ही विनम्र और साधारण परिवार से आती हूं। मेरे माता-पिता आधुनिक शब्दों जैसे नारीवाद, महिला सशक्तिकरण और न्याय के बारे में अच्छी तरह से परिचित नहीं थे, जिनका हम अक्सर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मैंने हमेशा देखा है कि उनके कार्यों में ये मूल्य समाहित थे।'' पोरवाल के एक बड़े भाई और बहन हैं। उन्होंने कहा कि जब उनकी मां गर्भवती थीं, तो परिवार में हर कोई ‘‘लड़का होने की उम्मीद कर रहा था।'' उन्होंने कहा, ‘‘दो लड़कियों की तुलना में परिवार में दो लड़के होना सही माना जाता है। लेकिन जब मेरा जन्म हुआ, तो सभी को आश्चर्य हुआ। मेरे पिता, मेरे चाचा, मेरे दादा ने मेरे जन्म का जश्न किसी जीत की तरह मनाया, वैसा जश्न उन्होंने मेरे भाई के जन्म के समय भी नहीं किया था।'' पोरवाल ने कहा कि जब उनका मासिक धर्म शुरू हुआ, तो उनसे उम्मीद की जाती थी कि वह रसोई में प्रवेश नहीं करेंगी, तब उनके दादा खुद उन्हें खाना परोसते थे। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे दादा मुझे खाना खिलाते थे। जब मैं स्कूल से लौटती थी, तो मेरे पिता मेरे पैरों की मालिश करते थे। मेरा भाई जो हमेशा मुझसे लड़ता था, वह भी उन दिनों मेरा बहुत ध्यान रखता था...।'' उन्होंने कहा, ‘‘मेरे परिवार में मेरा पालन पोषण बहुत प्यार से किया गया और इसने मुझे एक ऐसा व्यक्ति बना दिया है जो मानता है कि प्यार एक ऐसी चीज है जो सब कुछ संतुलित कर सकती है। भले ही रीति-रिवाज और मूल्यों का एक-दूसरे के साथ तालमेल न हों, लेकिन प्यार सब कुछ बराबर कर सकता है।'' पोरवाल ने कहा कि उनके माता-पिता ने हमेशा उनका साथ दिया। उन्होंने कहा, ‘‘आज, मेरे पास यह खिताब है। मुझे याद है कि जब मैं कुछ भी नहीं थी, तो उन्हें मुझ पर गर्व था और आज भी है। मैं हमेशा किसी न किसी तरह से उन्हें यह सम्मान देना चाहती थी, क्योंकि उज्जैन जैसे साधारण शहर से होने के कारण, अपने बच्चों को उनके सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई जाने देना आसान नहीं है।'' उज्जैन के कार्मेल कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाली और बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाली पोरवाल ने कहा कि वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अपने गृह राज्य का प्रतिनिधित्व करके भी खुश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं मध्य प्रदेश का नाम सुनना चाहती थी, क्योंकि पिछले 60 वर्षों में मेरे राज्य में कभी कोई फेमिना मिस इंडिया नहीं रही। यह पहली बार था जब उज्जैन से किसी ने मिस इंडिया में भाग लिया।'' पोरवाल ने कहा कि वह पूर्व सौंदर्य प्रतियोगिता विजेता और बॉलीवुड स्टार ऐश्वर्या राय बच्चन से प्रेरणा लेती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सुष्मिता सेन, ऐश्वर्या राय बच्चन और प्रियंका चोपड़ा जोनास सहित भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सभी महिलाएं महान प्रेरणादायक शख्सियत रही हैं, लेकिन मुझे सबसे ज्यादा प्रेरणा ऐश्वर्या राय बच्चन से मिलती है।'' उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत सिर्फ एक देश या नाम नहीं है। इसके कई अर्थ हैं और यह (इसका विचार) हर व्यक्ति के लिए अलग है। यह मेरे लिए भी अलग है और इसलिए मैं भारत के अपने विचार का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं।''
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बरहामपुर.ओडिशा में अभी सर्दी का मौसम शुरू नहीं हुआ है, लेकिन देश के सबसे बड़े जलपक्षी आवास चिल्का झील में पक्षियों का आना शुरू हो गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। चिल्का वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अमलान नायक ने मंगलवार को बताया कि प्रवासी पक्षियों ने इस महीने के पहले सप्ताह से ही झील में आना शुरू कर दिया है जो उनके आगमन का सामान्य समय है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन पक्षियों का आना जारी है।
नायक ने बताया कि ‘‘उत्तरी पिनटेल, यूरेशियन विगॉन, गैडवॉल, ब्लैक-टेल्ड गैडवॉल, उत्तरी शॉवेलर, ग्रेटर फ्लेमिंगो, कॉमन सैंडपाइपर, कॉमन कूट, मंगोलियन प्लोवर, कॉमन स्निप, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट'' सहित विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी पहले ही झील में उतर चुके हैं। डीएफओ ने कहा कि झील में प्रवासी पक्षियों का आगमन सामान्य रूप से जारी है हालांकि वर्तमान में झील और इसके आसपास का तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। उन्होंने कहा कि सर्दियों की शुरुआत और उनके मूल स्थानों के कुछ अन्य कारणों से पक्षियों को चिल्का की ओर आने के लिए मजबूर होना पड़ा होगा। नायक ने कहा कि चिल्का के पास कई पक्षी झील में उतरे बिना आसमान में उड़ते भी देखे गए हैं। झील में पानी का स्तर कम होने पर वे उतर सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक उनकी संख्या बढ़ सकती है।"
ये पक्षी मुख्यतः हिमालय पार उत्तरी यूरेशिया, कैस्पियन क्षेत्र, साइबेरिया, कजाख, बैकाल झील तथा रूस और पड़ोसी देशों के दूरदराज के क्षेत्रों से सर्दियों में चिल्का झील आते हैं और गर्मियों के शुरू होने से पहले मार्च के दूसरे सप्ताह में लौट जाते हैं। पिछली सर्दियों में 187 प्रजातियों के कुल 11,37,759 पक्षी चिल्का आए। -
रांची. झारखंड में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण को लेकर अधिसूचना जारी होने के साथ 38 विधानसभा क्षेत्रों में 20 नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हो गई। नामांकन प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक जारी रहेगी तथा पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। झारखंड विधानसभा चुनाव दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को होंगे। मतगणना 23 नवंबर को होगी।
एक निर्वाचन अधिकारी ने बताया, ‘‘20 नवंबर को मतदान के दूसरे चरण के तहत 38 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया आज शुरू हो गई।'' उन्होंने कहा कि नामांकन पत्रों की जांच 30 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवार एक नवंबर तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। दूसरे चरण में सामान्य श्रेणी के तहत जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा उनमें राजमहल, पाकुड़, नाला, जामताड़ा, जरमुंडी, मधुपुर, सारठ, पोड़ैयाहाट, गोड्डा, महगामा, रामगढ़, मांडू, धनवार, बगोदर, गांडेय, गिरिडीह, डुमरी, गोमिया, बेरमो, बोकारो, सिंदरी, निरसा, धनबाद, झरिया, टुंडी, बाघमारा और सिल्ली शामिल हैं। अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों में बोरियो, बरहेट, लिट्टीपारा, महेशपुर, सिकरीपारा, दुमका, जामा और खिजरी शामिल हैं। अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित सीटों में देवघर, जमुआ और चंदनकियारी शामिल हैं। चुनाव में करीब 2.60 करोड़ मतदाताओं के मतदान करने की उम्मीद है, जिनमें 11.84 लाख पहली बार मतदान करने वाले मतदाता होंगे और 1.13 लाख दिव्यांग, तृतीय लिंग के व्यक्ति और 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक होंगे। 2019 के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की कुल संख्या 2.23 करोड़ थी। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत ब्रिक्स के भीतर करीबी सहयोग को महत्व देता है जो वैश्विक विकास एजेंडे से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत और चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। मोदी ने ब्रिक्स समूह के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस के शहर कजान की दो दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले एक बयान में यह बात कही। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के मुख्य सदस्य हैं और यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले साल नए सदस्यों को जोड़ने के साथ ब्रिक्स के विस्तार से वैश्विक बेहतरी के लिए इसकी समावेशिता और एजेंडा बढ़ा है। मोदी ने कहा कि वह शिखर सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा को लेकर आशान्वित हैं।
रूस द्वारा आयोजित इस शिखर सम्मेलन को यूक्रेन में संघर्ष और पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात के बीच गैर-पश्चिमी देशों द्वारा अपनी ताकत दिखाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मोदी ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बैठक सहित कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। पिछले वर्ष जोहानिसबर्ग में हुए शिखर सम्मेलन के बाद समूह का यह पहला शिखर सम्मेलन होगा।
मोदी ने यात्रा के लिए रवाना होने से पहले अपने बयान में कहा, ‘‘भारत ब्रिक्स के भीतर करीबी सहयोग को महत्व देता है जो वैश्विक विकासात्मक एजेंडा, बहुपक्षवाद, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक सहयोग, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण, सांस्कृतिक और लोगों को आपस में जोड़ने आदि से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।'' मोदी ने कहा कि कजान की उनकी यात्रा भारत और रूस के बीच ‘‘विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी'' को और मजबूत करेगी। प्रधानमंत्री ने जुलाई में मॉस्को की यात्रा की थी और इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन के साथ शिखर वार्ता की थी। मोदी ने कहा, ‘‘जुलाई 2024 में मॉस्को में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन के आधार पर कजान की मेरी यात्रा भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।'' बाद में मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस के कजान रवाना हो रहा हूं। भारत ब्रिक्स को बहुत महत्व देता है और मैं विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श की उम्मीद करता हूं।'' उन्होंने कहा कि वह वहां विभिन्न नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हैं।
ब्राजील, रूस, भारत और चीन के नेताओं की सेंट पीटर्सबर्ग में 2006 में हुई बैठक के बाद एक औपचारिक समूह के रूप में ‘ब्रिक' की शुरुआत हुई। ‘ब्रिक' को 2010 में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करते हुए ‘ब्रिक्स' के रूप में विस्तारित करने पर सहमति बनी। पिछले साल समूह का विस्तार किया गया जो 2010 के बाद पहली ऐसी कवायद थी। ब्रिक्स के नए सदस्य देशों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। - भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार में सेना की विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम हुई है तथा स्वदेशी लड़ाकू विमान एवं अन्य उपकरणों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वह नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी की उपस्थिति में पूर्वसैनिकों के सम्मान में यहां थ्री ईएमई केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यादव ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सेना का मनोबल बढ़ा है। उसे नयी प्रौद्योगिकी वाले नवीनतम हथियार मुहैया कराये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विदेशी हथियारों पर सेना की निर्भरता घटायी है तथा स्वदेशी लड़ाकू विमान एवं हथियार निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है।'' उन्होंने सीमापार आतंकी शिविरों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक' का स्पष्ट हवाला देते हुए कहा कि भारत न केवल हमले का जवाब देता है, बल्कि जवाबी हमला करने के लिए दुश्मन की सीमा में भी घुसता है। इस अवसर पर एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश का वीरता और साहस का इतिहास रहा है तथा इस राज्य ने देश को तीन अशोक चक्र विजेता, पांच महावीर चक्र विजेता एवं 23 वीर चक्र विजेता दिए हैं। एडमिरल ने कहा, ‘‘पिछले 25 वर्षों में (मध्यप्रदेश से) 100 से अधिक सैनिकों ने मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। यह समारोह पूर्व सैनिकों के समर्पण, कुशल नेतृत्व और योगदान का परिणाम है।'' इस अवसर पर यादव ने द्वितीय विश्वयुद्ध में वीरतापूर्वक लड़ने वाले पूर्व सैनिकों की पत्नियों एवं भोपाल से शहीदों के रिश्तेदारों को सम्मानित किया।
- नयी दिल्ली. प्रमुख शेयर बाजार बीएसई और एनएसई एक नवंबर को दिवाली के अवसर पर एक घंटे का विशेष ‘मुहूर्त कारोबार' सत्र आयोजित करेंगे। यह नए संवत 2081 की शुरुआत का प्रतीक होगा। शेयर बाजारों ने अलग-अलग परिपत्रों में कहा कि सांकेतिक कारोबार सत्र शाम छह से सात बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। यह सत्र नए संवत (दिवाली से शुरू होने वाला हिंदू कैलेंडर वर्ष) की शुरुआत का भी प्रतीक है। माना जाता है कि ‘मुहूर्त' या ‘शुभ घंटे' के दौरान कारोबार करने से हितधारकों के लिए समृद्धि और वित्तीय वृद्धि होती है। दिवाली पर बाजार नियमित कारोबार के लिए बंद रहेगा, लेकिन शाम को एक घंटे के लिए विशेष कारोबारी खिड़की खुली रहेगी। शेयर बाजारों ने घोषणा की है कि शेयर बाजार खुलने से पूर्व का सत्र शाम 5:45 से 6:00 बजे तक होगा। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि दिवाली को कुछ भी नया शुरू करने के लिए आदर्श समय माना जाता है। मान्यता है कि निवेशकों को पूरे साल इस सत्र के दौरान कारोबार से लाभ मिलता है।
- भुवनेश्वर. बंगाल की खाड़ी में 23 अक्टूबर तक चक्रवाती तूफान आने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को यह जानकारी दी। आईएमडी ने एक विशेष बुलेटिन में कहा कि अगले 24 घंटों के दौरान अंडमान सागर के ऊपर बने एक चक्रवाती परिसंचरण के क्षेत्र के सोमवार तक कम दबाव वाले क्षेत्र में तब्दील होने की आशंका है। इसमें कहा गया कि इस मौसम प्रणाली के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने तथा 22 अक्टूबर की सुबह तक अवदाब में तब्दील होने तथा 23 अक्टूबर तक पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान में बदल जाने की आशंका है। बुलेटिन में कहा गया है, बाद में इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और 24 अक्टूबर की सुबह तक ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के पास बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में पहुंचने की प्रबल आशंका है। आईएमडी ने कहा कि इसके प्रभाव से ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में 23 से 25 अक्टूबर तक भारी वर्षा होने की आशंका है। मछुआरों को 21 अक्टूबर तक तट पर लौटने की सलाह दी गई है।
- गोपेश्वर. उद्योगपति मुकेश अंबानी ने रविवार को भगवान बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन किए और दोनों मंदिरों में कुल पांच करोड़ दो लाख रुपये की भेंट अर्पित की। रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक पहले बदरीनाथ धाम पहुंचे जहां श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष किशोर पंवार एवं मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने उनकी अगवानी की । सुबह नौ बजे मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने भगवान के दर्शन किए तथा पूजा में शामिल हुए । इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में ही स्थित लक्ष्मी मंदिर में मां लक्ष्मी के दर्शन किये जहां समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें भगवान बदरीविशाल का प्रसाद भेंट किया। इसके बाद अंबानी केदारनाथ मंदिर पहुंचे जहां समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने उनका स्वागत किया। उन्होंने मंदिर में भगवान शिव का रूद्राभिषेक किया । इसके बाद अजय ने उद्योगपति को भगवान केदारनाथ का प्रसाद भेंट किया। मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि अंबानी हर साल दर्शन के लिए बदरीनाथ तथा केदारनाथ मंदिर आते हैं । उन्होंने बताया कि इस बार भी उन्होंने बदरीनाथ तथा केदारनाथ धाम के लिए कुल पांच करोड़ दो लाख रुपये की धनराशि का चेक मंदिर समिति को दान स्वरूप भेंट किया है । गौड़ ने कहा कि कोरोना काल में जब यात्रा न्यूनतम थी, तब भी उन्होंने मंदिर समिति को दान स्वरूप बड़ी भेंट दी थी।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया 21 अक्टूबर यानी सोमवार को ‘ईश्रम -वन स्टॉप सॉल्यूशन' का शुभारंभ करेंगे। सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक स्थान पर हर तरह का समाधान देने की घोषणा की थी। इसके तहत ही यह पहल की गई है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बयान में कहा कि ‘ईश्रम - वन स्टॉप सॉल्यूशन' असंगठित श्रमिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करेगा। विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 12 योजनाओं को ईश्रम के साथ जोड़ दिया गया है।
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भोपाल. मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में एक मादा चीता जल्द ही शावकों को जन्म देने वाली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि यह 'चीता परियोजना' के लिए एक बड़ी उपलब्धि का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों (पांच मादा और तीन नर) को कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी)में छोड़ने का कार्य किया। यह लगभग आठ दशकों बाद हुआ, जब भारत में चीते शिकार के कारण विलुप्त हो गए थे। यह दुनिया के पहले अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण का हिस्सा था। फरवरी 2023 में देश में चीतों को फिर से लाने की भारत सरकार की परियोजना के हिस्से के रूप में दक्षिण अफ्रीका से 12 अन्य चीतों को मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया गया। यादव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "कूनो में खुशियां आने वाली हैं। देश के 'चीता स्टेट' मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता जल्द ही नए शावकों को जन्म देने वाली है।" अधिकारियों के अनुसार, भारत में अब तक 17 शावकों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 12 जीवित बचे हैं। इस प्रकार कूनो में शावकों सहित कुल चीतों की संख्या वर्तमान में 24 हो गई है।
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वाराणसी .प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे और यहां आरजे शंकरा नेत्र अस्पताल का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां आरजे शंकरा नेत्र चिकित्सालय में प्रवेश किया जो कांची मठ से संचालित होता है। उन्होंने कांची के शंकराचार्य से मुलाकात की। इसके पहले प्रधानमंत्री ने पूर्व शंकराचार्य की प्रतिमा के समक्ष जाकर दर्शन-पूजन किया जिसके बाद फीता काटकर नेत्र अस्पताल का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने यहां आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार इस नेत्र अस्पताल से पूर्वी उत्तर प्रदेश के 20 जिलों के अलावा बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों के मरीजों को सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है। कांची मठ से संचालित यह देश में 14वां अस्पताल है। संस्था के लोगों के अनुसार यहां प्रतिवर्ष 30 हजार मरीजों की आंखों के नि:शुल्क ऑपरेशन का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले, प्रधानमंत्री यहां लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे पर पहुंचे और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित गणमान्य लोगों ने उनका स्वागत किया। काशीवासियों ने प्रधानमंत्री मोदी का ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा से स्वागत किया। प्रधानमंत्री रविवार को अपने दौरे के दौरान 6,100 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे जिनमें कई हवाई अड्डों से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रनवे के विस्तार, एक नए टर्मिनल भवन के निर्माण और अन्य संबद्ध कार्यों की आधारशिला रखेंगे।
- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि उसे उर्वरक की खेप आने में देरी के बावजूद रबी सत्र 2024-25 में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन होने का भरोसा है। इस उम्मीद की वजह अनुकूल मृदा नमी की स्थिति और जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर का होना बताया गया। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण आयात खेप में देरी के बावजूद यूरिया और डाय अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। चौहान ने कहा, ‘‘आयात खेप में देरी हो रही है... हालांकि, उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। हमने व्यवस्था की हुई है और रबी सत्र के लिए पर्याप्त आपूर्ति है।'' मंत्रालय ने रबी सत्र 2024-25 के लिए 164.55 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसमें 115 लाख टन गेहूं और 18.15 लाख टन दालें शामिल हैं। रबी (सर्दियों) की फसलों की बुवाई शुरू हो गई है और दिवाली के बाद इसमें तेजी आएगी।
उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने कहा कि लाल सागर मार्ग बाधित होने के बाद भारत मोरक्को से दक्षिण अफ्रीका के रास्ते डीएपी शिपमेंट का मार्ग बदल रहा है, जिससे पश्चिमी बंदरगाहों तक आपूर्ति के समय में 21 दिन का इजाफा हो गया है। मिश्रा ने कहा कि भारत रबी सत्र के लिए अपनी 55 लाख टन डीएपी मांग का लगभग 60 प्रतिशत रूस, मोरक्को, सऊदी अरब और चीन से आयात करता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक हिमांशु पाठक ने आगामी सत्र को लेकर आशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘‘जलाशयों में जल स्तर, आईएमडी के पूर्वानुमान और मिट्टी की नमी को देखते हुए, इस साल रबी सत्र में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है।'' पाठक ने जलवायु-अनुकूल और जैव-फोर्टिफाइड बीजों को अपनाने की वकालत की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले साल लगभग 70 प्रतिशत गेहूं की खेती में ऐसी किस्मों का उपयोग किया गया था, जिसने बंपर फसल में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने चने की खेती के तहत क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में उत्पादन कम रहा, जिससे आयात की आवश्यकता पड़ी। अधिकारियों ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में रबी फसलों के तहत औसत क्षेत्र 668 लाख हेक्टेयर था, जिसमें गेहूं का हिस्सा 312 लाख हेक्टेयर था। सरकार ने रोपण को प्रोत्साहित करने के लिए गेहूं और अन्य सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों के लिए उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भगीरथ चौधरी के साथ छह राज्य कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने किसान डेटा पंजीकरण सहित डिजिटल पहलों पर भी चर्चा की, जिसमें दो राज्यों में वर्तमान में चल रहे फसल सर्वेक्षण अगले साल पूरे देश में लागू होने वाले हैं। - नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार इरा झा का राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शुक्रवार को निधन हो गया। यह जानकारी उनके नजदीकी सूत्रों ने दी। उनके परिवार में पति अनन्त मित्तल और बेटा ईशान मित्तल और पुत्रबधू हैं। सूत्रों ने बताया कि इरा झा 62 वर्ष की थीं और पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं।उन्हें पहले राजधानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और तबियत बिगड़ने पर उन्हें गुरुवार को एम्स में स्थानांतरित कराया गया, जहां आज दोपहर में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इरा झा छत्तीसगढ़ के जिला बस्तर जिले से निकलकर पत्रकारिता के लिए दिल्ली आयी थीं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित अखबरों में काम किया। उन्होंने पत्रकारिता के अपने लंबे कार्यकाल में नक्सलवाद से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया। महिला प्रेस क्लब की सक्रिय सदस्य थीं और महिला पत्रकारों के हितों के प्रति सक्रिय थीं।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को कहा कि कार्य-आधारित भुगतान पर काम करने वाले ‘गिग' कामगारों को पेंशन और स्वास्थ्य सेवा जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की नीति प्रक्रियाधीन है। मांडविया ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि नीति आयोग ने देश में गिग गतिविधियों और ऑनलाइन मंचों से जुड़े 65 लाख कामगार होने का अनुमान लगाया है। लेकिन इस खंड में हो रही तीव्र वृद्धि को देखते हुए यह संख्या दो करोड़ से अधिक हो जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि सेवा क्षेत्र उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए ऑनलाइन माध्यम की तरफ तेजी से रुख कर रहा है और अपने परिचालन का विस्तार कर रहा है। इसे देखते हुए सरकार गिग और ऑनलाइन मंचों से जुड़े कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता को तैयार करने में लगी है। श्रम मंत्री ने कहा, ‘‘हम संहिता के कार्यान्वयन तक गिग कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते। हमें उससे पहले एक नीति लानी होगी।'' उन्होंने कहा कि श्रम मंत्रालय जल्द से जल्द यह नीति लाना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अगले बजट से पहले बहुत कुछ करना चाहता हूं।'' इससे पहले मांडविया ने गिग और ऑनलाइन मंचों से जुड़े कामगारों के विभिन्न संगठनों एवं समूहों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। इसमें उन्होंने बताया कि फिलहाल मंत्रालय नई नीति के जरिये इन कामगारों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं या बीमा मुहैया कराने पर काम कर रहा है। मांडविया ने यह भी आश्वासन दिया कि नई नीति पूरे देश में कानूनी रूप से बाध्यकारी होगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभ देने के लिए विशिष्ट पहचान संख्या बनाने जैसे कई सुझाव आए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय सभी सुझावों पर विचार कर रहा है।
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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम को ‘पर्सनल लॉ’ प्रभावित नहीं कर सकते और बचपन में कराए गए विवाह अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने का विकल्प छीन लेते हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने देश में बाल विवाह रोकथाम कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई दिशानिर्देश भी जारी किए.। प्रधान न्यायाधीश ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के कानून को ‘पर्सनल लॉ’ के जरिए प्रभावित नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि इस तरह की शादियां नाबालिगों की जीवन साथी चुनने की स्वतंत्र इच्छा का उल्लंघन हैं।
पीठ ने कहा कि अधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम और नाबालिगों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और उल्लंघनकर्ताओं को अंतिम उपाय के रूप में दंडित करना चाहिए । पीठ ने यह भी कहा कि बाल विवाह निषेध कानून में कुछ खामियां हैं.। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 बाल विवाह को रोकने और इसका उन्मूलन सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया था। इस अधिनियम ने 1929 के बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम का स्थान लिया। पीठ ने कहा, ‘‘निवारक रणनीति अलग-अलग समुदायों के हिसाब से बनाई जानी चाहिए. यह कानून तभी सफल होगा जब बहु-क्षेत्रीय समन्वय होगा. कानून प्रवर्तन अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता है। हम इस बात पर जोर देते हैं कि इस मामले में समुदाय आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। ’’ -
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने व्यवसायी अमनदीप सिंह ढल की उस याचिका पर सुनवाई 25 अक्टूबर तक के लिए शुक्रवार को स्थगित कर दी जिसमें कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा समय मांगे जाने के बाद मामले की सुनवाई को स्थगित कर दिया।न्यायालय ने 17 सितंबर को ढल की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा था।ढल ने उच्च न्यायालय के चार जून के उस फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जिसमें उन्हें मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।सीबीआई ने ढल को इस मामले में पिछले साल अप्रैल में गिरफ्तार किया था।ढल कथित घोटाले से जुड़े उन अलग-अलग मामलों में आरोपी हैं जिनकी जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है।जांच एजेंसियों के अनुसार, ढल ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कथित तौर पर साजिश रची और वह आबकारी नीति तैयार करने तथा आम आदमी पार्टी (आप) को रिश्वत देने एवं विभिन्न माध्यमों से ‘साउथ ग्रुप’ द्वारा इसकी पुनर्प्राप्ति में ‘‘सक्रिय रूप से’’ शामिल थे।सीबीआई और ईडी के अनुसार, आबकारी नीति में संशोधन के दौरान अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को नीति लागू की थी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया था। -
नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आयकर नियमों में संशोधन किए हैं। इनका उद्देश्य स्रोत पर कर-संग्रह और करों की कटौती के लिए क्रेडिट दावा प्रक्रिया को सरल बनाना है। इसमें नाबालिगों के माता-पिता के लिए स्रोत पर कर-संग्रह क्रेडिट का दावा करना भी शामिल है। वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में, कर कटौती के उद्देश्य से स्रोत पर कर-संग्रह अथवा कर कटौती को शामिल किया गया है। संशोधन के अनुसार, स्रोत पर संग्रहित कर का लाभ नाबालिग के माता-पिता को दिया जा सकेगा।
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नयी दिल्ली. केंद्र ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित एक करोड़ रुपये से कम मूल्य की शत्रु संपत्ति और शहरी क्षेत्रों में स्थित पांच करोड़ रुपये से कम मूल्य की शत्रु संपत्ति के निस्तारण के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। पाकिस्तान और चीन की नागरिकता लेने वाले लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति - ज्यादातर 1947 और 1962 के बीच - शत्रु संपत्ति कहलाती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में एक करोड़ रुपये से कम और शहरी क्षेत्र में पांच करोड़ रुपये से कम मूल्य की शत्रु संपत्ति का निस्तारण करते समय संरक्षक को पहले अधिभोगी को खरीद का प्रस्ताव देना होगा और यदि वह खरीद के प्रस्ताव को अस्वीकार कर देता है तो शत्रु संपत्ति का निस्तारण पहले से निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाएगा, अर्थात निविदा आमंत्रित करके या सार्वजनिक कार्रवाई करके। गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘ग्रामीण क्षेत्र' का तात्पर्य राज्य के किसी भी क्षेत्र से है, सिवाय उन क्षेत्रों के जो किसी शहरी स्थानीय निकाय या छावनी बोर्ड के अंतर्गत आते हैं। इसी प्रकार, ‘शहरी क्षेत्र' से तात्पर्य किसी नगर निगम या नगर पालिका की सीमा के भीतर के किसी क्षेत्र से है, अथवा केन्द्रीय सरकार जनसंख्या, उद्योगों के संकेन्द्रण, क्षेत्र की समुचित योजना की आवश्यकता तथा अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा शहरी क्षेत्र घोषित कर सकती है। सरकार ने शत्रु संपत्तियों को भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक, जो कि केन्द्र सरकार के अधीन स्थापित एक कार्यालय है, को सौंप दिया है। शत्रु संपत्ति अधिनियम 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, 1968 में लागू किया गया, जो ऐसी संपत्तियों को विनियमित करता है और संरक्षक की शक्तियों को सूचीबद्ध करता है। अधिकारियों ने बताया कि देश में कुल 12,611 प्रतिष्ठान शत्रु संपत्ति कहलाते हैं, जिनकी अनुमानित कीमत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
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नयी दिल्ली. रेलवे बोर्ड ने रेल यात्रा के लिए अग्रिम आरक्षण अवधि को मौजूदा 120 दिन से घटाकर 60 दिन कर दिया है, तथा लंबे समय पहले आरक्षण कराने पर रद्दीकरण की उच्च दर और बर्थ खाली रहने का हवाला देते हुए अपने निर्णय को उचित ठहराया है। बोर्ड ने 2015 में अग्रिम आरक्षण अवधि को 60 दिन से बढ़ाकर 120 दिन करने का निर्णय लिया था लेकिन बृहस्पतिवार को उसने फैसले को बदल दिया। नयी अवधि एक नवंबर से प्रभाव में आएगी। रेलवे बोर्ड के एक वक्तव्य के अनुसार, ‘‘रेलवे की अग्रिम आरक्षण अवधि में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं। अग्रिम आरक्षण अवधि 30 दिन से लेकर 120 दिन तक रही है। विभिन्न अवधियों के अनुभव के आधार पर, यात्रियों की दृष्टि से 60 दिन की अग्रिम आरक्षण अवधि को इष्टतम अवधि माना गया है।'' बोर्ड ने एक तालिका प्रस्तुत करते हुए यह भी बताया कि अप्रैल 1981 से लेकर एक अप्रैल 2015 तक 12 बार अग्रिम आरक्षण अवधि को 120 दिन तथा 30 दिन के बीच बढ़ाने या घटाने के फैसले लिए गए। बोर्ड ने 60 दिन की आरक्षण अवधि का लाभ गिनाते हुए कहा कि किसी यात्रा की योजना के लिहाज से 120 दिन की अवधि बहुत लंबी है जिसकी वजह से बड़ी संख्या में रद्दीकरण होते हैं और यात्रियों के नहीं आने से सीट या बर्थ खाली रह जाती हैं।






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