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नई दिल्ली। चीन ने इम्यूनोथेरेपी में एक बड़ी सफलता हासिल की है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने दुनिया का सबसे शक्तिशाली वैक्सीन बूस्टर विकसित किया है। यह तकनीक ट्यूमर और संक्रमणों के खिलाफ इम्यून रेस्पॉन्स को 150 गुना तक बढ़ा सकती है। इससे कैंसर के इलाज में काफी सुधार हो सकता है और तेजी से बदलते वायरस जैसे कोविड-19 के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावशीलता बढ़ सकती है।यह रिसर्च सन यात-सेन यूनिवर्सिटी, फुदान यूनिवर्सिटी और लियाओनिंग यूनिवर्सिटी ने मिलकर किया था। यह 27 मार्च को नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ।
नया वैक्सीन बूस्टर कैसे काम करता है?इस सिस्टम का केंद्र है एक डिलीवरी सिस्टम, जिसे SABER कहा जाता है। इसका पूरा नाम है ‘STING Agonist-Based ER-Targeting Molecules’। पारंपरिक वैक्सीन इम्यून सिस्टम को उत्तेजित करके काम करती हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे एंटीजन – जो इम्यून रेस्पॉन्स को ट्रिगर करते हैं – को इम्यून सेल्स के सही हिस्सों तक कितनी अच्छी तरह पहुंचा पाती हैं।वैक्सीन के प्रभावी होने के लिए, एंटीजन को CD8+ T सेल्स तक पहुंचना जरूरी है। ये एक प्रकार के इम्यून सेल्स हैं जो कैंसर सेल्स और संक्रमणों पर हमला करते हैं। इसमें तीन मुख्य चरण होते हैं:एंटीजन को एंटीजन-प्रेजेंटिंग सेल्स (APCs) के अंदर पहुंचाना, जो इम्यून सिस्टम को खतरे की पहचान करने में मदद करते हैं।APCs को सक्रिय करना ताकि वे अन्य इम्यून सेल्स को सतर्क कर सकें।एंटीजन को एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम (ER) तक ले जाना, जो सेल के अंदर एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां इम्यून रेस्पॉन्स को ठीक किया जाता है।ER सेल के अंदर एक संचार केंद्र की तरह काम करता है, जो न्यूक्लियस और साइटोप्लाज्म को जोड़ता है। पारंपरिक वैक्सीन डिलीवरी में एंटीजन इस महत्वपूर्ण क्षेत्र तक पहुंचने में संघर्ष करते हैं, जिससे उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। SABER एक आणविक “एलिवेटर” की तरह काम करता है, जो सेल की बाधाओं को पार करके एंटीजन को ER तक सटीक रूप से पहुंचाता है। यह तरीका इम्यून रेस्पॉन्स को बहुत बढ़ाता है और वैज्ञानिकों द्वारा “लास्ट-माइल” डिलीवरी समस्या को हल करता है।स्टडी से क्या पता चला?जानवरों पर किए गए अध्ययनों में SABER ने इम्यून रेस्पॉन्स में सुधार दिखाया। ट्यूमर वाले चूहों पर परीक्षण में, इस तकनीक ने मेलेनोमा के मामलों में बीमारी की प्रगति को पूरी तरह रोक दिया। जहां कंट्रोल ग्रुप में ट्यूमर की बढ़त थोड़ी धीमी हुई और 90 प्रतिशत चूहे पांच हफ्तों में मर गए, वहीं SABER से इलाज किए गए ग्रुप में सभी चूहे बच गए।संक्रामक बीमारियों के लिए भी यह तकनीक बहुत प्रभावी साबित हुई। कोविड-19 पेप्टाइड वैक्सीन के ट्रायल में, SABER से इलाज किए गए ग्रुप में T-सेल रेस्पॉन्स कंट्रोल ग्रुप की तुलना में 150 गुना मजबूत था। इसके अलावा, वायरल-संक्रमण के अध्ययनों में, SABER से इलाज किए गए चूहों के फेफड़ों और दिमाग में वायरल लोड 99 प्रतिशत कम था, जबकि इलाज न किए गए चूहों से तुलना की गई।यह सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?SABER की खासियत न केवल T-सेल रेस्पॉन्स को बढ़ाने में है, बल्कि यह ह्यूमरल इम्यून रेस्पॉन्स – शरीर की एंटीबॉडी बनाने वाली रक्षा प्रणाली – पर भी असर डालती है। SABER ने 30 प्रतिशत सर्कुलेटिंग CD8+ T सेल्स को एंटीजन-विशिष्ट सेल्स में बदल दिया, जो मौजूदा उत्प्रेरकों से कहीं बेहतर है, जो शायद ही कभी 5 प्रतिशत से अधिक कर पाते हैं।यह दोहरा फायदा SABER को कैंसर इम्यूनोथेरेपी और वैक्सीन डेवलपमेंट में गेम-चेंजर बना सकता है। शरीर की लक्षित इम्यून रेस्पॉन्स उत्पन्न करने की क्षमता को बढ़ाकर, यह कैंसर के बेहतर इलाज और अगली पीढ़ी की वैक्सीन्स का रास्ता खोल सकता है।अब आगे क्या?इस सफलता के बाद, रिसर्चर्स अब SABER को उन कैंसर्स पर लागू करने पर ध्यान दे रहे हैं जिनके एंटीजन अच्छी तरह परिभाषित हैं, जैसे लिवर कैंसर । अगला चरण इसके उपयोग को क्रॉनिक वायरल संक्रमणों और रोकथाम वैक्सीन्स में भी देखेगा। हालांकि इसका पूरा क्लिनिकल उपयोग में समय लग सकता है, SABER का सफल विकास कैंसर और संक्रामक बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। -
नई दिल्ली। भारतीय सेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 3 और 4 अप्रैल को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड पर किया गया।
मिसाइल के चार उड़ान परीक्षण किए गए, जिनमें इसने अपने सभी लक्ष्यों को सटीक रूप से नष्ट कर दिया। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने लंबी और छोटी दूरी के साथ-साथ ऊंचाई पर और नीचे उड़ रहे हवाई लक्ष्यों को भी निशाना बनाया। यह हथियार प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है।इन परीक्षणों के दौरान रडार और इन्फ्रारेड ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से उड़ान डेटा को रिकॉर्ड और सत्यापित किया गया। डीआरडीओ ने इस मिसाइल को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के सहयोग से भारतीय सेना के लिए विकसित किया है। यह मिसाइल प्रणाली मल्टी-फंक्शन रडार, कमांड पोस्ट और मोबाइल लॉन्चर से लैस है, जिससे यह किसी भी स्थिति में तेज और सटीक हमले करने में सक्षम है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और भारतीय सेना की सफलता पर दी बधाईरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ, भारतीय सेना और रक्षा उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह हथियार प्रणाली सेना की क्षमताओं को और मजबूत करेगी। डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने भी इस उपलब्धि को काफी अहम बताया और परीक्षण में शामिल वैज्ञानिकों और सेना अधिकारियों की सराहना की। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय समुद्री दिवस के मौके पर कहा कि भारत की प्रगति और समृद्धि में समुद्री क्षेत्र की अहम भूमिका है और सरकार इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत का समुद्री इतिहास बहुत समृद्ध रहा है और आजादी के बाद इसे उतनी प्राथमिकता नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी। लेकिन पिछले 10 वर्षों में देश ने समुद्री क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने बताया कि प्रमुख बंदरगाहों की कार्गो संभालने की क्षमता अब दोगुनी हो चुकी है और बंदरगाहों से जोड़ने के लिए हजारों किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार “समृद्धि के लिए बंदरगाह” और “प्रगति के लिए बंदरगाह” जैसे मंत्रों को अपनाकर समुद्री ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने “उत्पादकता के लिए बंदरगाह” मंत्र का भी जिक्र किया, जिससे बंदरगाहों की क्षमता और उपयोगिता बढ़ाई जा रही है।प्रधानमंत्री ने ‘कोस्टल शिपिंग’ को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही। हाल ही में लोकसभा में ‘कोस्टल शिपिंग बिल’ पारित हुआ है, जिसका उद्देश्य तटीय व्यापार को बढ़ाना और भारतीय जहाजों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।इस बिल से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत के पास अपनी सुरक्षा और व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने नागरिकों के स्वामित्व वाला मजबूत समुद्री बेड़ा हो। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि सरकार भारत के अंदर चलने वाले जलमार्गों (इंटरनल वॉटरवेज) को भी विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि जब भी भारत का समुद्री क्षेत्र मजबूत हुआ है, देश और दुनिया को इसका फायदा मिला है, और अब भी उसी दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम जारी है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को श्रीलंका में तमिल समुदाय के नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा के दौरान शुरू की गई अनेक परियोजनाएं तमिल समुदाय के विकास में मददगार साबित होंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के वरिष्ठ तमिल नेताओं थिरु आर. संपंथन और थिरु मावई सेनाथिराजा के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि भारत, एक संयुक्त श्रीलंका में तमिल समुदाय को समानता, सम्मान और न्यायपूर्ण जीवन देने की दिशा में हमेशा प्रतिबद्ध है।
पीएम मोदी ने श्रीलंका के विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा से की मुलाकातइससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत-श्रीलंका संबंधों को मजबूत करने में प्रेमदासा के योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच जो विशेष साझेदारी है, उसे श्रीलंका की सभी राजनीतिक पार्टियों का समर्थन प्राप्त है और यह दोनों देशों के नागरिकों के हितों से प्रेरित है।गौरतलब है कि यह प्रधानमंत्री मोदी की 2014 के बाद चौथी श्रीलंका यात्रा है, जबकि राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के कार्यभार संभालने के बाद उनकी पहली भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय बैठक रही। पिछले वर्ष दिसंबर में राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को श्रीलंका आने का निमंत्रण दिया था, जिसके जवाब में यह दौरा हुआ। श्रीलंका सरकार ने उस भारत यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में “एक ऐतिहासिक क्षण” बताया था।इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को श्रीलंका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘श्रीलंका मित्र विभूषण’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति दिसानायके ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। यह किसी विदेशी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया 22वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच बहुस्तरीय सहयोग को नई दिशा देने वाली रही। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘श्रीलंका मित्र विभूषण’ आज शनिवार को कोलंबो में प्रदान किया गया। यह सम्मान श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने एक भव्य समारोह में उन्हें सौंपा। यह सम्मान केवल उन राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाता है जिन्होंने श्रीलंका के साथ मित्रता और सहयोग को विशेष रूप से आगे बढ़ाया हो। राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान के वास्तविक हकदार हैं।” वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताया और कहा कि यह दोनों देशों की साझी विरासत और साझा भविष्य का प्रतीक है।
यह खास तौर पर डिजाइन किया गया सम्मान धर्म चक्र, पुण्य कलश और नवरत्नों से सजे कमल के प्रतीक के रूप में भारत-श्रीलंका की साझा सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत को दर्शाता है। यह प्रधानमंत्री मोदी को किसी विदेशी देश से मिला 22वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।समारोह के दौरान दोनों नेताओं ने संपूर सौर ऊर्जा परियोजना और डांबुला कृषि भंडारण केंद्र समेत कई द्विपक्षीय विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। साथ ही ऊर्जा, डिजिटल बदलाव और त्रिपक्षीय सहयोग पर कई अहम समझौते हुए। वहीं भारत, श्रीलंका और यूएई मिलकर त्रिंकोमाली को एक ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करेंगे।भारत अब तक श्रीलंका को करीब 7 अरब डॉलर की सहायता दे चुका है, जिसमें 780 मिलियन डॉलर अनुदान के रूप में शामिल हैं। बीते दशक में भारत ने 265 मिलियन डॉलर से अधिक की 40 से अधिक परियोजनाएं पूरी की हैं। भारत का 2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है।राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत-श्रीलंका संबंधों को “इतिहास, धर्म और संस्कृति से बंधा विशेष रिश्ता” बताया और कहा कि यह साझेदारी दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास का उदाहरण बन रही है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें रक्षा सहयोग, ऊर्जा विकास और सांस्कृतिक सहयोग प्रमुख रहे। भारत और श्रीलंका ने त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने, एचवीडीसी इंटरकनेक्शन परियोजना के माध्यम से बिजली के आयात-निर्यात की व्यवस्था, और डिजिटल, स्वास्थ्य तथा फार्मा क्षेत्रों में सहयोग को लेकर समझौते किए। इसके अलावा भारत ने पूर्वी श्रीलंका के विकास के लिए बहु-क्षेत्रीय अनुदान सहायता देने का भी निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंकाई युवाओं के लिए हर साल 700 लोगों को प्रशिक्षण देने की योजना की घोषणा की। साथ ही भारत ने श्रीलंका के धार्मिक स्थलों जैसे त्रिंकोमाली में थिरुकोनेश्वरम मंदिर, नुवारा एलिया में सीता एलिया मंदिर और अनुराधापुरा के पवित्र क्षेत्र के विकास के लिए अनुदान सहायता देने का वादा किया। ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मिलकर दांबुला में 5000 टन क्षमता वाले पहले तापमान नियंत्रित गोदाम का उद्घाटन किया और श्रीलंका के 25 जिलों में 5000 सौर रूफटॉप यूनिट लगाने की योजना शुरू की। इसके अलावा 120 मेगावाट की सामपुर सौर परियोजना की भी आधारशिला रखी गई।इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रीलंका सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “श्रीलंका मित्र विभूषण” से सम्मानित किया। राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि मोदी इस सम्मान के हकदार हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का है और यह भारत-श्रीलंका की ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली साबित हुई है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 अप्रैल को दोपहर करीब 12 बजे रामनवमी के अवसर पर तमिलनाडु के पंबन में देश के पहले वर्टिकल लिफ्ट रेलवे पुल का उद्घाटन करेंगे। यह पुल पंबन और रामेश्वरम के बीच स्थित है और इसे भारतीय रेलवे की एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
इसके पश्चात पीएम मोदी दोपहर करीब 12:45 बजे रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे। रामेश्वरम में दोपहर करीब 1:30 बजे वह तमिलनाडु में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।रामेश्वरम भारत का एक महत्वपूर्ण द्वीप, इस स्थान का हिंदू धर्म में विशेष महत्वरेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि रामेश्वरम भारत का एक महत्वपूर्ण द्वीप है, जो सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस स्थान का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, क्योंकि यह भगवान श्रीराम से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए पंबन रेल पुल की आधारशिला रखी थी, जिसे अब महज पांच वर्षों में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेनों को सुचारू रूप से संचालित करने में होगा सक्षमयह नया पुल 2,078 मीटर लंबा और पुराने पुल की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और मजबूत बनाया गया है। यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है, जो समुद्री यातायात को सुगम बनाने के लिए ऊपर उठ सकता है। इसका निर्माण बेहतर सुरक्षा और अधिक भार सहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे यह भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेनों को भी सुचारू रूप से संचालित करने में सक्षम होगा।कनेक्टिविटी के नए युग की करेगा शुरुआतइससे पहले केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, “1914 में निर्मित पुराने पंबन रेल पुल ने 105 वर्षों तक मुख्य भूमि को रामेश्वरम से जोड़ा। दिसंबर 2022 में जंग लगने के कारण इसे बंद कर दिया गया, जिसने आधुनिक नए पंबन पुल के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जो कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत करेगा!”रामेश्वरम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मिलेगी बड़ी सुविधाइस पुल के चालू होने से रामेश्वरम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी। साथ ही, यह पुल दक्षिण भारत के रेलवे नेटवर्क को और अधिक मजबूत करेगा। इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन राम नवमी जैसे शुभ दिन पर किया जाना इसे और भी खास बना देता है। -
खंडवा . मध्यप्रदेश में खंडवा जिले के छैगांव माखन इलाके में बृहस्पतिवार को कुएं (बावड़ी) में संदिग्ध जहरीली गैस की चपेट में आने से आठ लोगों की मौत हो गई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। खंडवा के जिलाधिकारी ऋषव गुप्ता और पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनोज कुमार राय ने संवाददाताओं को बताया कि यह घटना तब हुई जब आठ लोग गणगौर माता उत्सव के अवसर पर पारंपरिक कुएं में उतरे और उसमें फंस गए। गुप्ता ने बताया कि ये लोग गणगौर उत्सव के दौरान विसर्जन के उद्देश्य से कुएं में उतरे थे।
उन्होंने बताया कि बचाव अभियान के बाद शवों को बाहर निकाल लिया गया है। गुप्ता के अनुसार सभी आठ लोगों की मौत कुएं के अंदर ही हो गई थी। एसपी ने बताया कि स्थानीय पुलिस, एसडीईआरएफ और ग्रामीणों ने करीब चार घंटे तक चले बचाव अभियान में मदद की। उनका कहना है कि शुरू में पांच लोग कुएं की सफाई के लिए उसमें उतरे लेकिन जब वे उसमें फंस गए तो तीन और लोग अंदर चले गए और सभी की मौत हो गई। जिलाधिकारी ने बताया कि घटना खंडवा जिले के छैगांव माखन क्षेत्र के कोंडावत गांव में शाम करीब चार बजे हुई। शुरुआती खबरों में कहा गया है कि कुआं साल भर खाली रहता था और इसका इस्तेमाल गणगौर माता उत्सव के दौरान विसर्जन के लिए किया जाता था। गुप्ता ने बताया कि लंबे समय से इसका इस्तेमाल नहीं होने के कारण इसमें जहरीली गैस बन गई।उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।एक अधिकारी ने बताया कि मृतकों की पहचान मोहन (55), अनिल पटेल (30), शरण सुखराम (30), अर्जुन (35), गजानंद (25), बलिराम (36), राकेश (22) और अजय (25) के रूप में हुई है। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की पीएफसी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने छत्तीसगढ़ में ईस्ट रेल कॉरिडोर परियोजना को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईआरएल) को 3,517 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया है। पीएफसी ने बयान में कहा कि सीईआरएल, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), इरकॉन और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (सीएसआईडीसीएल) का एक संयुक्त उद्यम है। पीएफसी ने कहा कि 3,516.68 करोड़ रुपये के सावधि ऋण के लिए ऋण दस्तावेज 28 मार्च, 2025 को निष्पादित किए गए। निर्माणाधीन रेल परियोजना को मुख्य रूप से आसपास के कई कोयला खदानों से कोयले के परिवहन और उन्हें ताप बिजली संयंत्र से जोड़ने के लिए विकसित किया जा रहा है। बिजली मंत्रालय के तहत आने वाली पीएफसी, एकीकृत विद्युत विकास योजना, अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए एक नोडल एजेंसी है।
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बैंकाक. भारत और थाईलैंड ने अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का बृहस्पतिवार को फैसला किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, समावेशी एवं नियम आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं तथा विस्तारवाद के बजाय विकास की नीति में विश्वास करते हैं। मोदी ने यह टिप्पणी थाईलैंड की अपनी समकक्ष पैतोंगतार्न शिनावात्रा के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की। इस वार्ता के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की। मोदी ने शिनावात्रा के साथ हुई बातचीत के बारे में कहा, "हमने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर जोर दिया है। हमने आपसी व्यापार, निवेश और व्यवसायों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर चर्चा की।" उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्य उद्योग (एमएसएमई), हथकरघा और हस्तशिल्प में सहयोग के लिए भी समझौते किए गए हैं। भारत और थाईलैंड ने रणनीतिक साझेदारी की स्थापना को लेकर एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और डिजिटल प्रौद्योगिकियों से लेकर संस्कृति तक के क्षेत्रों में पांच सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए। द्विपक्षीय वार्ता में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे। वार्ता के दौरान दोनों देशों की एजेंसियों ने मानव तस्करी और अवैध प्रवास से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई। थाईलैंड ने हाल ही में म्यांमा में फर्जी नौकरी गिरोह के चंगुल में फंसे 549 भारतीय नागरिकों को वापस लाने में भारत की मदद की थी। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने साइबर अपराध के शिकार भारतीयों की वापसी में सहयोग देने के लिए थाईलैंड सरकार का आभार व्यक्त किया। हमने इस बात पर सहमति जताई कि हमारी एजेंसियां मानव तस्करी और अवैध प्रवास से निपटने के लिए मिलकर काम करेंगी।” मोदी ने कहा कि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण में थाईलैंड का विशेष स्थान है।
उन्होंने कहा, "आज हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। सुरक्षा एजेंसियों के बीच 'रणनीतिक वार्ता' स्थापित करने पर भी चर्चा हुई।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आसियान में एकता और केंद्रीयता का पूर्ण समर्थन करता है।मोदी ने कहा, "हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हम दोनों एक मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं। हम विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति में विश्वास करते हैं।" उन्होंने स्पष्ट रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए यह बात कही, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा रहा है और दक्षिण चीन सागर (एससीएस) तथा पूर्वी चीन सागर (ईसीएस) दोनों में ही क्षेत्रीय विवादों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं अपनी यात्रा के अवसर पर 18वीं शताब्दी के 'रामायण' भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक टिकट जारी करने के लिए थाईलैंड सरकार का आभारी हूं।" मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री शिनावात्रा ने उन्हें ‘त्रिपिटक' भेंट किया।त्रिपिटक भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का एक प्रतिष्ठित संकलन है, जिसमें 108 खंड हैं। इसे प्रमुख बौद्ध धर्मग्रंथ माना जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा, "बुद्ध की भूमि भारत की ओर से, मैंने इसे हाथ जोड़कर स्वीकार किया।"उन्होंने कहा कि भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने संबंध गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक डोर से बंधे हुए हैं। मोदी ने कहा कि बौद्ध धर्म के प्रसार ने हमारे देश के लोगों को हर स्तर पर जोड़ा है।उन्होंने कहा, "अयुत्या से नालंदा तक विद्वानों का आना-जाना हुआ है। रामायण कथा थाईलैंड के लोक जीवन में गहराई से समाई हुई है। और, संस्कृत-पाली का प्रभाव आज भी भाषाओं और परंपराओं में परिलक्षित होता है।" मोदी ने 28 मार्च को आए भूकंप के कारण हुई जानमाल की हानि पर भारतीयों की ओर से संवेदना भी व्यक्त की।उन्होंने कहा, "हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।"छठे बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे मोदी को पहले ‘गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। उन्होंने रामकियेन (थाई रामायण) की मंत्रमुग्ध प्रस्तुति भी देखी। प्रधानमंत्री बाद में बिम्सटेक में शामिल थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमा और भूटान के नेताओं से मिलेंगे। थाईलैंड की यात्रा समाप्त करने के बाद, वह श्रीलंका की यात्रा करेंगे।बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में मोदी के अलावा नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और म्यांमा की सैन्य सरकार के प्रमुख मिन आंग हलिंग समेत विभिन्न नेता शिरकत कर रहे हैं। -
नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल से बीते सात महीनों में 55 लाख से अधिक नए ग्राहक जुड़े हैं, जिससे कंपनी के कुल सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर 9.1 करोड़ हो गई है। यह जानकारी सरकार द्वारा संसद में दी गई।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि जून 2024 से इस साल फरवरी तक बीएसएनएल के ग्राहकों की संख्या 8.55 करोड़ से बढ़कर 9.1 करोड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी 18 साल बाद अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान मुनाफे में आ गई है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने आगे कहा कि बीएसएनएल देश भर के उन गांवों में 4जी मोबाइल सेवाओं को पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण परियोजना पर काम कर रहा है, जहां मोबाइल सेवाएं नहीं पहुंच पाई हैं। इस परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इसकी कुल लागत 26,316 करोड़ रुपये है। इसमें मौजूदा 2जी बीटीएस को 4जी में अपग्रेड करना भी शामिल है।इसके अलावा, बीएसएनएल एलडब्ल्यूई चरण-I योजना के तहत स्थापित मौजूदा 2,343 2जी बीटीएस को 2जी से 4जी में अपग्रेड करने का कार्य भी कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 1,884.59 करोड़ रुपये है।दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत 4जी नेटवर्क उपकरण बनाने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। सिंधिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशानिर्देशों के अनुरूप बीएसएनएल अपना 5जी नेटवर्क शुरू करने के लिए केवल “स्वदेशी” उपकरणों का उपयोग करेगा।उन्होंने कहा कि बीएसएनएल एक लाख टावर लगाने का 4जी लक्ष्य पूरा करने के बाद 5जी का क्रियान्वयन शुरू करेगा। करीब 73,326 4जी टावर लग चुके हैं, जो कुल काम का करीब 73 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि बाकी काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने आगे कहा कि भारत में 5जी का क्रियान्वयन दुनिया में सबसे तेज रहा है और पिछले एक साल में 99 प्रतिशत जिलों और 82 प्रतिशत आबादी को कवर किया गया है। -
नई दिल्ली। अभिनेता मनोज कुमार के निधन की खबर से हिंदी सिने जगत गमजदा है। अभिनेता आमिर खान से लेकर कंगना रनौत, फरहान अख्तर समेत कई सितारों ने शोक व्यक्त कर इंडस्ट्री में दिए उनके योगदान को याद किया। मधुर भंडारकर, सांसद कंगना रनौत समेत तमाम सितारों ने मनोज कुमार को श्रद्धांजलि दी।
मनोज कुमार अपनी फिल्मों के जरिए भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाईभाजपा सांसद-अभिनेत्री कंगना रनौत ने भारतीय अभिनेता और फिल्म निर्देशक मनोज कुमार के निधन पर कहा, “मनोज कुमार एक दिग्गज अभिनेता थे, जिन्हें भारत कुमार के नाम से जाना जाता था। वह एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए हर भारतीय में देशभक्ति की भावना जगाई। उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री शोकमय है और हम भी अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”भारतीय फिल्म निर्माता हमेशा उनके योगदान को याद रखेंगेफिल्म निर्माता-निर्देशक मधुर भंडारकर ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “मनोज जी एक ऐसे कलाकार थे, जिनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। हिंदुस्तान ने एक ऐसे दौर को जिया है, जिसे मनोज कुमार ने दिया था। भारतीय फिल्म निर्माता हमेशा उनके योगदान को याद रखेंगे। उनकी फिल्म ‘क्रांति’ हो या ‘पूरब और पश्चिम’, इन फिल्मों के माध्यम से उन्होंने देश को बहुत कुछ दिया है।“मनोज कुमार के साथ अपने संबंध को लेकर उन्होंने कहा, “उनके साथ मेरे संबंध खास थे। हम फोन पर घंटों गप्पे मारा करते थे। मैं हर त्योहार पर उन्हें फोन करता था और जब भी मिलने का मन होता, तो कहता था, ‘मनोज जी, आज मिलते हैं।’आमिर खान ने कहा -मैंने उनकी फिल्में देखकर बहुत कुछ सीखा हैअभिनेत्री करीना कपूर खान ने इंस्टाग्राम के स्टोरीज सेक्शन पर मनोज कुमार की तस्वीर शेयर की। अभिनेता आमिर खान ने अभिनेता मनोज कुमार के निधन पर दुख व्यक्त किया और अपने जीवन पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव के बारे में बात की। आमिर ने कहा, “मनोज कुमार सिर्फ एक अभिनेता और फिल्म निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वह एक संस्थान थे। मैंने उनकी फिल्में देखकर बहुत कुछ सीखा है। उनकी फिल्में अक्सर महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर आधारित होती थीं, जो उन्हें आम आदमी के बहुत करीब लाती थीं। उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना।”मनोज कुमार भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास का सदैव हिस्सा बने रहेंगेअजय देवगन ने बताया कि कैसे मनोज कुमार ने उनके पिता वीरू देवगन को फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में एक्शन निर्देशक के रूप में पहला मौका दिया, जो उनके सफल करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। अभिनेता ने लिखा, “मनोज कुमार जी सिर्फ एक सिनेमाई आइकन नहीं थे – वे मेरे परिवार की यात्रा में एक व्यक्तिगत मील का पत्थर थे। उन्होंने मेरे पिता वीरू देवगन को ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में एक्शन निर्देशक के रूप में पहला मौका दिया। वहां से, उनका सहयोग ‘क्रांति’ तक जारी रहा, जिसने ऐसे पल बनाए जो अब भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास का हिस्सा हैं।”मनोज सर अच्छे इंसान के साथ हमारी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी संपत्तिअक्षय कुमार ने मनोज कुमार के अपने ऊपर पड़े गहरे प्रभाव के बारे में बात की। अभिनेता ने कहा, “मैं उनसे यह सीखते हुए बड़ा हुआ कि हमारे देश के लिए प्यार और गर्व जैसी कोई भावना नहीं है और अगर हम कलाकार होकर इस भावना को दिखाने के लिए आगे नहीं आएंगे, तो कौन आएगा? इतने अच्छे इंसान और हमारी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी संपत्ति में से एक। मनोज सर।“मनोज कुमार साहब के निधन से हिंदी सिनेमा का एक स्तंभ ढह गयाअभिनेता मनोज बाजपेयी ने लिखा, “मनोज कुमार साहब के निधन से हिंदी सिनेमा का एक स्तंभ विदा हो गया। उनकी कला ने भारत की भावना को अद्वितीय तरीके से व्यक्त किया। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना।“ फरहान अख्तर ने लिखा, “वो कौन थी, गुमनाम, शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, क्रांति… सूची बहुत लंबी है… मनोरंजन के लिए और आपके बाद आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए धन्यवाद।“मेरे देशभक्त होने में मनोज साहब की फिल्मों का बहुत बड़ा हाथअभिनेता-निर्देशक अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर लिखा, “मनोज कुमार जी का मेरे जीवन में बहुत बड़ा योगदान रहा है और रहेगा। उनकी फिल्में, उनकी फिल्मों के गाने ना केवल हमारा मनोरंजन करते थे बल्कि हमारे अंदर देशभक्ति का बहुत खूबसूरत जज़्बा भी जगाते थे। मेरे देशभक्त होने में उनकी फिल्मों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। मनोज जी, आप वाकई महान थे!” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हिन्दी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार (87) के निधन पर शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि देश हमेशा उन्हें उनकी देशभक्ति के लिए याद करेगा।
पीएम मोदी ने एक्स पर मनोज कुमार संग खींची गई तस्वीर साझा कर लिखा- ‘वो पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे’पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मनोज कुमार संग खींची गई तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “महान अभिनेता और फिल्मकार मनोज कुमार के निधन से बहुत दुख हुआ। वे भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें खास तौर पर उनकी देशभक्ति और उनके जोश के लिए याद किया जाता था, जो उनकी फिल्मों में भी झलकता था। मनोज जी के कामों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जगाया और वे पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”
मनोज कुमार का 87 साल की उम्र में हो गया निधनबता दें कि मनोज कुमार का 87 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार सुबह मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। उन्होंने बॉलीवुड को उपकार, पूरब-पश्चिम, क्रांति, रोटी-कपड़ा और मकान सहित ढेर सारी कामयाब फिल्में दीं। इन फिल्मों की वजह से उन्हें दर्शक ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जानते थे।मनोज कुमार के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहरमनोज कुमार के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर है। मनोज कुमार के निधन पर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा कि यह फिल्म उद्योग के लिए बहुत दुखद दिन है कि हमने भारतीय फिल्म उद्योग के एक दिग्गज को खो दिया है। सुबह 3:30 बजे उनका निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार थे। वह बिस्तर पर थे, लेकिन उनका मनोबल काफी ऊंचा था। हम अक्सर उनके घर पर उनसे मिलते थे। वह सिनेमा और संगीत के बारे में बात करते थे, और यह उद्योग के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह एक राष्ट्रवादी फिल्म निर्माता थे जो जानते थे कि भारत क्या है।मनोज कुमार ने हिन्दी सिनेमा को ‘उपकार’, ‘पत्थर के सनम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘संन्यासी’ और ‘क्रांति’ जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। दिग्गज अभिनेता की फिल्मों में उनका नाम ज्यादातर मनोज कुमार ही रहता था। -
नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 राज्यसभा में पारित हो गया है। इससे पहले ही गुरुवार को इस विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिल गई थी। ऊपरी सदन में गुरुवार को पेश होने के बाद 11 घंटे चली चर्चा के उपरांत शुक्रवार तड़के विधेयक पारित हुआ। इसके पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े।
विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना हैइस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना है। विधेयक को पारित करने के लिए राज्यसभा की बैठक (शुक्रवार) रात 2:30 बजे के बाद तक चली। विपक्ष के सभी संशोधन गिर गए। तमिलनाडु से डीएमके सांसद तिरुचि शिवा के एक संशोधन पर मत विभाजन हुआ, हालांकि यह संशोधन भी गिर गया।मुसलमानों को डराने और गुमराह करने का काम विपक्ष कर रहा हैअल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि सरकार अल्पसंख्यकों को डराने के लिए यह विधेयक लाई है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को डराने और गुमराह करने का काम विपक्ष कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधेयक से मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं होगा।प्रधानमंत्री मोदी ने जो फैसला लिया है, वह अल्पसंख्यक समाज के हित मेंविपक्षी सांसदों से मुसलमानों को गुमराह न करने की अपील करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है, वह बहुत सोच-समझकर किया है। वे (विपक्षी सदस्य) बार-बार कह रहे हैं कि हम मुसलमानों को डरा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हम नहीं, बल्कि आप मुसलमानों को डराने का काम कर रहे हैं। जिन लोगों ने कहा था कि सीएए पारित होने के बाद मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आप इस बिल को लेकर मुसलमानों को गुमराह नहीं कीजिए।”वक्फ बिल के मूल ड्राफ्ट और मौजूदा ड्राफ्ट में कई बदलाव नहींमंत्री ने कहा कि जब यह बिल ड्राफ्ट हुआ तो उसमें सभी के सुझाव को ध्यान में रखा गया। वक्फ बिल के मूल ड्राफ्ट और मौजूदा ड्राफ्ट को देखें तो उसमें हमने कई बदलाव किए हैं। ये बदलाव सबके सुझाव से ही हुए हैं। जेपीसी में ज्यादातर लोगों के सुझाव स्वीकार हुए हैं। सारे सुझाव स्वीकार नहीं हो सकते। जेपीसी में शामिल दलों के सांसदों ने आरोप लगाया कि उनके सुझाव को नहीं सुना गया। लेकिन ऐसी स्थिति में हमने बहुमत से फैसला किया। लोकतंत्र में ऐसा ही होता है।वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में तीन से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं होंगेमंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में तीन से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं होंगे, इसका प्रावधान किया गया है, ताकि मुसलमानों के हितों के साथ समझौता न हो। साथ ही उन्होंने कहा कि जेपीसी में विपक्ष की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया गया है।उन्होंने कहा कि हर जिले में जो भी जमीनी विवाद होता है, उसे कलेक्टर देखता है। आपको वक्फ में कलेक्टर को रखने पर आपत्ति थी, इसलिए हमने उससे ऊपर के अफसर को रखा है। वे बार-बार बोलते हैं कि मुसलमानों के बारे में भाजपा क्यों चिंता करती है। लोगों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया, तो क्या उन्हें मुसलमानों की चिंता नहीं करनी चाहिए?वक्फ संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा हैउन्होंने कहा, “हमने बार-बार कहा कि वक्फ संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। विपक्ष ने बहुत से मंदिरों की बात की है। वहां की काउंसिल में गैर-धार्मिक व्यक्ति सदस्य नहीं होता है। वक्फ बोर्ड का कोई विवाद हिंदू-मुस्लिम के बीच होगा, तो उसे कैसे निपटाया जाएगा?”विपक्ष के नेताओं ने बिल को संविधान के खिलाफ बतायारिजिजू ने कहा, “आप कहते हैं कि मुसलमानों में बहुत गरीबी है और गरीबों के बारे में सरकार को सोचना चाहिए। आजादी के बाद कांग्रेस दशकों तक सरकार में थी। तो ऐसे में कांग्रेस ने इसके लिए काम क्यों नहीं किया? अब हमें गरीबों के बारे में सोचना पड़ रहा है। हमने बार-बार कहा है कि वक्फ की संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। अगर हिंदू और मुसलमान के बीच वक्फ की जमीन को लेकर विवाद होता है, तो उसका निर्णय कैसे होगा?” इससे पहले, चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसके फायदे गिनाए और विपक्ष पर देश के मुसलमानों को गुमराह करने के आरोप लगाए। दूसरी ओर, विपक्ष के नेताओं ने इसे संविधान के खिलाफ बताया।आज 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैंकिरेन रिजिजू ने बिल पेश करते हुए बताया था कि वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में छोटे-बड़े एक करोड़ सुझाव मिले हैं। संयुक्त संसदीय समिति ने 10 शहरों में जाकर विधेयक को लेकर लोगों की राय जानी और 284 संगठनों से बातचीत की गई। आज 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं।वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना हैकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है। उन्होंने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों का पालन करके आगे बढ़ रही है। वक्फ संपत्तियों के सही रखरखाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 70 साल तक किसने मुस्लिम समुदाय को डर में रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक इस नीति को अपनाया, लेकिन अब जनता ने इसका परिणाम देख लिया है।मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वक्फ विधेयक को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा हैनेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह वक्फ विधेयक कोई सामान्य कानून नहीं है। इस कानून को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा है। यह देश की विविधता को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने के लिए मोदी सरकार द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। लोकसभा में देर रात यह विधेयक पारित हुआ तो इसके पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि विभिन्न दलों के विरोध के बाद भी मनमानी से यह विधेयक लाया गया।अल्पसंख्यक विभाग के बजट आवंटन में कमीभाजपा सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण की काफी बात कर रही है। सशक्तिकरण की बातें हो रही हैं। लेकिन सच्चाई सरकार के पांच साल के अल्पसंख्यक विभाग के बजट आवंटन से साफ है। वित्त वर्ष 2019-20 में इस विभाग का बजट आवंटन 4,700 करोड़ रुपये था जो घटकर 2023-24 में 2,608 करोड़ रह गया। वित्त वर्ष 2022-23 में बजट आवंटन 2,612 करोड़ रुपये था, जिसमें से 1,775 करोड़ रुपये का खर्च मंत्रालय नहीं कर पाया। कुल मिलाकर पांच साल में बजट मिला 18,274 करोड़ रुपये, जिसमें से 3,574 करोड़ खर्च नहीं हो पाए। -
नई दिल्ली। नई दिल्ली में गुरुवार को तीन दिवसीय ‘स्टार्टअप महाकुंभ 2025’ का भव्य आगाज हुआ। यह आयोजन भारत मंडपम में हो रहा है और इसे देश के सबसे बड़े स्टार्टअप इवेंट के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक देशों के 3,000 से ज्यादा स्टार्टअप अपनी नई तकनीक, उत्पाद और सेवाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा, 1,000 से अधिक निवेशक और इनक्यूबेटर भी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं, जिससे स्टार्टअप्स को फंडिंग और नेटवर्किंग का बड़ा मौका मिल रहा है।
इस महाकुंभ में एआई, डीप टेक, साइबर सिक्योरिटी, हेल्थ टेक, बायोटेक, एग्री टेक, एनर्जी और क्लाइमेट टेक, डी2सी, फिनटेक, गेमिंग, डिफेंस, स्पेस टेक और मोबिलिटी जैसे 10 प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को निवेश, वैश्विक कनेक्शन और नए अवसरों तक पहुंच दिलाना है।कार्यक्रम के उद्घाटन में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, “भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे पास टैलेंट, स्किल और एक मजबूत सरकार है, जो स्टार्टअप्स के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रही है।”वहीं उत्तर प्रदेश के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा, “प्रयागराज का महाकुंभ दुनिया के लिए ऐतिहासिक रहा है, और अब स्टार्टअप महाकुंभ भारत के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। यह इवेंट देश की नई प्रतिभाओं को आगे लाने में मदद करेगा और भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्टार्टअप हब बनाएगा।” - -मणिपुर हिंसा में जिनकी मृत्यु हुई है, इस सदन का उनके प्रति सम्मान, संवेदना और मन में दर्द है-मणिपुर उच्च न्यायालय के एक फैसले के कारण मणिपुर के दो समुदायों के बीच आरक्षण संबंधी विवाद के कारण शुरू हुई जातीय हिंसा-विगत 4 महीनों से मणिपुर में शांति है, हिंसा नहीं हुई-सरकार राहत शिविरों में खाने-पीने, दवाइयों, चिकित्सा सुविधाओं आदि सभी सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है-टेक्निकल एजुकेशन, मेडिकल एजुकेशन की वहाँ पर ऑनलाइन व्यवस्था की जा चुकी है-प्राइमरी एजुकेशन के लिए कैंपों के अंदर ही छात्रों के पढ़ने की व्यवस्था की गई है-गृह मंत्री ने कहा कि हिंसा होनी ही नहीं चाहिए और जातीय हिंसा को किसी पार्टी के साथ नहीं जोड़ना चाहिए-मणिपुर में हिंसा का पुराना इतिहास मगर विपक्ष इस प्रकार की तस्वीर पेश कर रहा है जैसे मणिपुर में ये पहली हिंसा हो-पिछली सरकार के शासन में मणिपुर में 1993 के बाद हुईं तीन बड़ी जातीय हिंसाएं 10 साल, 3 साल और 6 माह तक चलीं, इन हिंसाओं के बाद तत्कालीन सरकार से गृह मंत्री समेत वहां कोई नहीं गया-पिछली सरकार के शासन में जातीय हिंसा के बिना भी 5 साल में औसतन एक साल में 212 दिन मणिपुर बंद रहा-उच्च न्यायालय के आदेश से पहले, हमारे शासन में मणिपुर में एक भी दिन बंद और ब्लॉकेड नहीं रहा और न ही हिंसा हुई-जिस दिन हाई कोर्ट का आदेश आया था, उसी दिन सुरक्षाबलों की कंपनियां वायु सेना के विमान से वहां रवाना कर दी गईं थीं-गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि सरकार मणिपुर में शांति स्थापित करने का हर हरसंभव प्रयास कर रही है-मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद दोनों समुदायों से चर्चा हुई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों के साथ अलग-अलग दो बैठकें भी हुई हैं,-गृह मंत्रालय द्वारा जल्द ही एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी-सरकार मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल करने, पुनर्वास और जख्मों पर मरहम लगाने का काम कर रही हैनई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोक सभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव रखा। बाद में सदन ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि उच्च न्यायालय के एक फैसले के कारण मणिपुर के दो समुदायों के बीच आरक्षण संबंधी विवाद के कारण जातीय हिंसा शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि न तो यह दंगे हैं और न ही आतंकवाद है, बल्कि हाई कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या के कारण दो समुदायों के बीच जातीय हिंसा है। श्री शाह ने कहा कि दिसंबर 2024 से लेकर अबतक पिछले 4 महीनों से मणिपुर में हिंसा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिविरों में पहले से ही खाने-पीने, दवाइयों, चिकित्सा सुविधाओं आदि को सुनिश्चित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी और मेडिकल शिक्षा की ऑनलाइन व्यवस्था हो चुकी है और प्राइमरी एजुकेशन के लिए कैंपों के अंदर ही छात्रों के पढ़ने की व्यवस्था की गई है।श्री अमित शाह ने कहा कि कहा कि हिंसा होनी ही नहीं चाहिए और जातीय हिंसा को किसी पार्टी के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा इस प्रकार की तस्वीर पेश करने का प्रयास किया गया कि हमारे शासन में ही जातीय हिंसा हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि मणिपुर में 1993 में जातीय हिंसा हुई, 1993 से 1998 तक नागा-कुकी संघर्ष हुआ, जिसमें 750 मौतें हुईं और छिटपुट घटनाएं एक दशक तक चलती रहीं। श्री शाह ने कहा कि हम मानते हे कि हमारे समय में ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला आया, जिसके कारण हिंसा हुई और उसे तत्काल नियंत्रण में लाया गया। उन्होंने कहा कि हिंसा में जो 260 मौतें हुई हैं उनमें से 80 प्रतिशत पहले एक महीने के अंदर हुईं जबकि बाकी मौतें बाद के महीनों में हुईं। उन्होंने कहा कि 1997-98 में कुकी-पाइते संघर्ष हुआ, जिसमें 50 से अधिक गांव नष्ट हुए, 40 हज़ार लोग विस्थापित हुए, 352 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और 5 हज़ार घर जलाए गए। उन्होंने कहा कि 1993 में 6 माह तक चले मैतेई-पंगल संघर्ष में 100 से अधिक मृत्यु हुईं थीं।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष इस प्रकार की तस्वीर पेश कर रहा है जैसे मणिपुर में ये पहली हिंसा हो और हमारा शासन विफल हो गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के शासन में 1993 के बाद मणिपुर में हुईं तीन बड़ी जातीय हिंसाएं हुई जो 10 साल, 3 साल और 6 माह तक चलीं और इनमें सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि इन हिंसाओं के बाद तत्कालीन सरकार से गृह मंत्री समेत वहां कोई नहीं गया।श्री अमित शाह ने कहा कि 2017 में हमारी सरकार आई और उससे पहले पिछली सरकार के शासन में जातीय हिंसा के बिना भी 5 साल में औसतन एक साल में 212 दिन मणिपुर बंद रहा। उन्होंने कहा कि लगभग 1 हज़ार से अधिक एनकाउंटर हुए, जिनका संज्ञान सुप्रीम कोर्ट को लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश से पहले, हमारे 6 साल के शासन में मणिपुर में एक भी दिन बंद और ब्लॉकेड नहीं रहा और न ही हिंसा हुई। श्री शाह ने कहा कि एक विशिष्ट परिस्थिति में जब हाई कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या को दोनों समुदायों ने अपने खिलाफ समझा तो दो ही दिन में हिंसा भड़क गई।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि विपक्ष का यह भी आरोप लगाया कि मणिपुर की हिंसा को नज़रअंदाज़ किया गया। उन्होंने सदन को बताया कि जिस दिन हाई कोर्ट का आदेश आया था, उसी दिन सुरक्षाबलों की कंपनियां वायु सेना के विमान से वहां रवाना कर दी गईं थीं। श्री शाह ने कहा कि इस विषय पर हम सबकी संवेदनाएं बराबर हैं। गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि सरकार मणिपुर में शांति स्थापित के लिए हरसंभव उच्चतम प्रयास कर रही है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मणिपुर हिंसा में जिनकी भी मृत्यु हुई है, इस सदन को उनके प्रति सम्मान, संवेदना और मन में दर्द रखना चाहिए।श्री अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन आने के बाद दोनों समुदायों से चर्चा हुई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों के साथ अलग-अलग दो बैठकें भी हुई हैं और जल्द ही गृह मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हिंसा का रास्ता ढूंढने का प्रयास कर रही है लेकिन पहली प्राथमिकता शांति स्थापित करने की है। श्री शाह ने कहा कि 4 माह से मणिपुर में एक भी मौत नहीं हुई है, सिर्फ 2 लोग घायल हुए हैं और कुल मिलकर परिस्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि स्थिति संतोषजनक तब तक नहीं होगी जब तक विस्थापित लोग शिविरों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के लिए एक पुनर्वास पैकेज पर भी चर्चा चल रही है ।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और फिर राज्यपाल ने भाजपा के 37, एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5, जद (यू) के 1 और कांग्रेस के 5 सदस्यों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब अधिकतर सदस्यों ने कहा कि हम सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं, तब कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की, जिसे राष्ट्रपति महोदया ने स्वीकार किया। श्री शाह ने कहा कि सरकार चाहती है कि मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल हो, पुनर्वास हो और जख्मों पर मरहम भी लगाया जाए। गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अनुमोदन करने का अनुरोध किया।
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नई दिल्ली। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका की शुल्क बढ़ोतरी और देश पर इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने यहां पीएफआरडीए द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि (अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप के लिए यह अमेरिका को पहले रखने जैसा है.. लेकिन (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी भारत को पहले रखते हैं…‘‘हम अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्क के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं।’’
भारत पर इसके प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसका आकलन जारी है। अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी वस्तुओं पर भारत उच्च आयात शुल्क वसूलता है, ऐसे में अब देश के व्यापार घाटे को कम करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। इस कदम से अमेरिका को भारत के निर्यात पर असर पड़ने के आसार हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, जिन्हें हमसे अधिक शुल्क का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए उच्च शुल्कों का मुकाबला करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। -
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु माता के कात्यायनी स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना भी कर रहे हैं। इस दौरान मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से नारियल चढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, जो हर साल नवरात्रि के दौरान लागू किया जाता है।
चैत्र नवरात्रि के चलते मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिर के मुख्य द्वार पर सुरक्षा कर्मियों द्वारा नारियल एकत्र कर लिया जाता है और किसी को भी मंदिर के अंदर नारियल ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती। माता के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को निकासी द्वार के बाहर नारियल प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। यह व्यवस्था न केवल सुरक्षा को सुनिश्चित करती है, बल्कि मंदिर में दर्शन की प्रक्रिया को भी सुचारू बनाए रखती है।मंदिर के पुजारी तरुणेश शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के दौरान हर साल नारियल और कड़ा प्रसाद चढ़ाने पर रोक लगाई जाती है। उन्होंने कहा, “यह निर्णय कानून-व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं को निर्बाध रूप से दर्शन का लाभ प्रदान करने के लिए लिया जाता है। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसका कड़ाई से पालन किया जाता है।”वहीं, एक श्रद्धालु ने बताया, “हर बार की तरह इस बार भी नवरात्रि के दौरान नारियल गेट पर ही जमा कर लिए गए। मंदिर प्रशासन इस नियम का सख्ती से पालन करता है, और हमें दर्शन के बाद प्रसाद मिल जाता है। यह व्यवस्था हमारे लिए भी सुविधाजनक है और इससे मंदिर में भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलती है।”श्री नैना देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। -
नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को आज गुरुवार को राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया। विधेयक पेश करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विधेयक को हितधारकों के साथ-साथ संयुक्त संसदीय समिति के साथ विस्तृत परामर्श के बाद लाया गया है।
विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने का किया आग्रहउन्होंने विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने का आग्रह किया। किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वक्फ का लाभ सिर्फ मुस्लिमों को ही मिल सकता है और यह सही नहीं है कि कोई गैर-मुस्लिम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में हस्तक्षेप करे।लोकसभा ने कल रात वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पारित कर दियाउन्होंने इस बात पर बल दिया कि विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है, न कि मुसलमानों के धार्मिक व्यवहार में हस्तक्षेप करना। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि वक्फ बोर्ड में मुस्लिमों के सभी विभिन्न संप्रदायों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा ताकि इसे समावेशी बनाया जा सके। लोकसभा ने कल रात वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पारित कर दिया है।क्या है इस विधेयक का उद्देश्य ?इस विधेयक का उद्देश्य विरासत स्थलों की सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के प्रावधानों के साथ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना है।इस कानून का उद्देश्य संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाकर, वक्फ बोर्डों और स्थानीय अधिकारियों के बीच समन्वय को सुव्यवस्थित करना और हितधारकों के अधिकारों की रक्षा कर शासन में सुधार करना है। यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं, विशेष रूप से विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार करेगा। विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्ड को अधिक समावेशी बनाना है, जिसमें बेहतर वक्फ शासन और निर्णय लेने के लिए विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों का प्रतिनिधित्व हो। - बैंकॉक । ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बैंकॉक पहुंचने पर रामायण के थाई संस्करण ‘रामकियेन’ को देखा। ‘रामकियेन’ भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।पीएम मोदी ने थाई रामायण की आकर्षक तस्वीरों को सोशल मीडिया पर किया पोस्टपीएम मोदी ने एक पोस्ट में लिखा, ‘एक अद्वितीय सांस्कृतिक जुड़ाव! थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।’ उन्होंने लिखा, “रामायण एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ता है।”इससे पहले आज दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने उनका स्वागत ‘मोदी मोदी’ और ‘वंदे मातरम’ के जोशीले नारों से किया। थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री सूर्या जुंगरुंगरेंगकिट ने कई शीर्ष अधिकारियों के साथ हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।होटल पहुंचने पर उनका स्वागत गुजरात के पारंपरिक गरबा नृत्य के साथ किया गया। पारंपरिक परिधान पहने हुए भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में उनके स्वागत के लिए एकत्र हुए। सिख, गढ़वाली और गुजराती समुदाय के लोग प्रमुख रूप से मौजूद थे।छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थाईलैंड में हैं पीएम मोदीप्रधानमंत्री मोदी छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए थाईलैंड में हैं। वह 4 अप्रैल को क्षेत्रीय नेताओं के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे।भारत-थाईलैंड संबंधों को मजबूत करने के लिए थाई नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे पीएम मोदीपीएम मोदी भारत-थाईलैंड संबंधों को मजबूत करने के लिए थाई नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। बैंकॉक में आगमन के बाद, प्रधानमंत्री का भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत करने का कार्यक्रम है, जिसमें वह भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक, आर्थिक संबंधों को रेखांकित करेंगे।इससे पहले, अपने प्रस्थान वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा के निमंत्रण पर, मैं आज थाईलैंड की आधिकारिक यात्रा और छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हो रहा हूं।”उन्होंने कहा, “पिछले दशक में, बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास, संपर्क, आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बिम्सटेक के केंद्र में है।”प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक नेताओं के साथ बातचीत के प्रति उत्साह किया व्यक्तप्रधानमंत्री ने बिम्सटेक नेताओं के साथ बातचीत के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “मैं बिम्सटेक देशों के नेताओं से मिलने और हमारे सहयोग को और मजबूत करने के लिए रचनात्मक रूप से बातचीत करने के लिए उत्सुक हूं।”बिम्सटेक एक क्षेत्रीय समूह है जिसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सात सदस्य देश शामिल हैं। दक्षिण एशिया से पांच (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका) और दक्षिण पूर्व एशिया से दो (म्यांमार और थाईलैंड)। यह समूह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण पुल के रूप में कार्य करता है। भारत इसका सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली सदस्य है, जो इसके एजेंडे को आकार देता है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
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मुजफ्फरनगर . मुजफ्फरनगर जिले में बरला-बसेड़ा मार्ग पर एक तेज रफ्तार कार के ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी जिससे एक परिवार के दो बच्चों समेत चार लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि घटना मंगलवार रात की है जिसमें मेरठ जिले की निवासी खुशनुमा (35), सानिया (15), तैयबा (3) और मिरहा (2) की मौत हो गई। ये सभी कार में सवार थे। उसने बताया कि तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना उस समय हुई जब जुनेद के परिवार के सदस्य ईद के मौके पर रिश्तेदारों से मिलने के लिए कमालपुर (मेरठ) से सहारनपुर के गोपाली गांव जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है।
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बुलढाणा (महाराष्ट्र) .महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में बुधवार सुबह एक बस और स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की टक्कर में पांच लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि खामगाव-शेगाव राजमार्ग पर महाराष्ट्र राजकीय परिवहन निगम की एक बस, एक एसयूवी से टकरा गई। उन्होंने बताया कि इसके तुरंत बाद एक निजी बस ने दोनों वाहनों को टक्कर मार दी। अधिकारी ने बताया कि निजी बस का आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है और उसमें फंसे चालक को निकालने के प्रयास जारी हैं।
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बैंकॉक. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बृहस्पतिवार को दो दिवसीय यात्रा पर थाईलैंड पहुंचेंगे। इस दौरान वह थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा के साथ वार्ता करेंगे और छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। मोदी का थाईलैंड में भारतीय समुदाय द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। वह ‘गवर्नमेंट हाउस' में शिनावात्रा से मिलेंगे, जहां उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा। बृहस्पतिवार की शाम को प्रधानमंत्री मोदी समुद्री सहयोग पर समझौते के लिए बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) नेताओं के साथ शामिल होंगे। इस सम्मेलन में थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमा और भूटान के नेता शिरकत करेंगे। बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में मोदी की भेंट नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस सहित अन्य नेताओं से होगी। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि म्यांमा के सैन्य जुंटा नेता मिन आंग ह्लाइंग शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे या नहीं। म्यांमा में पिछले सप्ताह आए भीषण भूकंप से देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले और अन्य हिस्सों में भीषण तबाही हुई। यह 2018 में नेपाल के काठमांडू में चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के बाद बिम्सटेक नेताओं की प्रत्यक्ष रूप से पहली बैठक होगी। पिछला शिखर सम्मेलन मार्च 2022 में कोलंबो में वीडियो कॉन्फ्रेंस प्रारूप में आयोजित किया गया था। मोदी शुक्रवार को थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न (जिन्हें रामा दसवें के नाम से भी जाना जाता है) और रानी सुथिदा से भी मुलाकात करेंगे। मोदी और थाईलैंड की प्रधानमंत्री शिनावात्रा वाट फो का दौरा करेंगे जो थाईलैंड के शीर्ष छह मंदिरों में से एक है। यह जगह लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा के अलावा, यह मंदिर अपने चारों ओर मौजूद बुद्ध की असंख्य प्रतिमाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यह थाईलैंड में सार्वजनिक शिक्षा के लिए पहला केंद्र था, जहां विज्ञान, धर्म और साहित्य के पाठ्यक्रम उपलब्ध थे। प्रधानमंत्री शुक्रवार सुबह बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां समूह द्वारा ‘बैंकॉक विजन 2030' को स्वीकार किए जाने की संभावना है।
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नई दिल्ली। सरकार ने पूनम गुप्ता को भारतीय रिजर्व बैंक का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। वह माइकल देवव्रत पात्रा की जगह लेंगी, जिन्होंने इस साल जनवरी में पद छोड़ा था। ये फैसला इस महीने की 7 से 9 तारीख तक होने वाली रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले लिया गया है।
एक आधिकारिक नोट के अनुसार, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने सुश्री गुप्ता की नियुक्ति को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि या अगले आदेश तक के लिए मंजूरी दे दी है।वर्तमान में, सुश्री गुप्ता नई दिल्ली स्थित नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य और 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद की संयोजक भी हैं। सुश्री गुप्ता ने अमरीका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और पीएचडी की है। -
नई दिल्ली। म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। इस संकट की घड़ी में भारतीय राहत दल की त्वरित कार्रवाई से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। वहीं भारतीय नौसेना और वायुसेना भी राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस मदद के लिए म्यांमार के स्थानीय लोगों ने भारत के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है, और भारतीय नेतृत्व के लिए आशीर्वाद की कामना कर रहे हैं।
एनडीआरएफ टीम की सदस्य कविता सिंह ने बताया कि गर्मी और समय बीतने के कारण जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना कम हो गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं और जोखिमों के बावजूद एनडीआरएफ टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ राहत अभियान चला रही है।एक अन्य एनडीआरएफ सदस्य ने बताया कि 57 कर्मियों की टीम म्यांमार में बचाव कार्य में लगी हुई है और उन्हें 13 स्थानों पर काम सौंपा गया है। भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत म्यांमार को 625 मीट्रिक टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। एनडीआरएफ की 80 सदस्यीय शहरी खोज और बचाव (USAR) टीम को भारतीय वायुसेना (IAF) के C-130 हर्क्यूलिस विमान से दो दौर में भेजा गया।इसके अलावा भारत ने चिकित्सा सहायता भी प्रदान की है। भारतीय सर्जनों ने म्यांमार में दो जीवनरक्षक सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। राहत कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे मांडले डिवीजन के लेफ्टिनेंट जनरल म्यो मो आंग ने भारत के प्रयासों की सराहना की।भारतीय नौसेना के आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सवित्री ने 40 टन राहत सामग्री लेकर 29 मार्च को यांगून के लिए प्रस्थान किया, जिसे 1 अप्रैल को सौंपा गया। इसके बाद आईएनएस करमुक और एलसीयू 52 ने 30 टन अतिरिक्त राहत सामग्री पहुंचाई गई।वहीं विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत जरूरत के अनुसार और सहायता भेजने के लिए तैयार है। ऑपरेशन ब्रह्मा भारत की “पहला मददगार” की भूमिका को दर्शाता है, जिससे यह साबित होता है कि भारत अपने पड़ोस में प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।









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