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- भावनगर. गुजरात के अमरेली जिले में बुधवार तड़के एक मालगाड़ी के लोको पायलट ने समय रहते आपातकालीन ब्रेक लगाकर पांच शेरों की जान बचाई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पश्चिमी रेलवे के भावनगर मंडल ने एक विज्ञप्ति में बताया कि यह घटना तड़के करीब साढ़े चार बजे गिर वन के पीपावाव-राजुला खंड पर हुई। विज्ञप्ति में कहा गया है कि लोको पायलट भूपेंद्र मीणा को पटरी पर पांच एशियाई शेरों की मौजूदगी होने के बारे में वन विभाग के कर्मियों ने टॉर्च से संकेत देकर सतर्क किया। विज्ञप्ति के अनुसार, लोको पायलट ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर मालगाड़ी रोक दी। शेरों के पटरी से हटने के बाद मालगाड़ी अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गई।
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पटना. बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने बुधवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 14 अधिकारियों का तबादला कर दिया । बिहार सरकार की ओर से बुधवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार 11 आईएएस अधिकारियों को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) में पदस्थापन की प्रतिक्षा में सूची में डाला गया है। बिहार में स्थानांतरित किए गए अधिकांश आईएएस अधिकारी 2019 और 2020 बैच के अधिकारी हैं।
जीएडी द्वारा जारी बुधवार की शाम जारी उक्त अधिसूचना के अनुसार सुमित कुमार (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में सारण के नगर आयुक्त का प्रभार संभाल रहे हैं, को बेतिया का नया उप विकास आयुक्त (डीडीसी) नियुक्त किया गया है। प्रीति (2019 बैच की आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में डीडीसी (खगड़िया) के पद पर तैनात हैं, को भागलपुर का नया नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है जबकि नवीन कुमार (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर के पद पर तैनात हैं को गया का नया डीडीसी नियुक्त किया गया है। अधिसूचना के अनुसार यतेंद्र कुमार पाल (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में नगर आयुक्त रोहतास के पद पर तैनात हैं, को डीडीसी, सारण नियुक्त किया गया है। विक्रम वीरकर (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) डीडीसी, आरा को मुजफ्फरपुर का नया नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसी तरह प्रियंका रानी (2019 बैच की आईएएस अधिकारी) जो कि वर्तमान में डीडीसी, सारण के पद पर तैनात थीं, को नवादा का नया डीडीसी नियुक्त किया गया है। दीपक कुमार मिश्रा (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में डीडीसी, नवादा के पद पर कार्यरत हैं, को नगर आयुक्त, नालंदा नियुक्त किया गया है। श्रेष्ठ अनुपम (2020 बैच के आईएएस अधिकारी) को मुजफ्फरपुर का नया डीडीसी नियुक्त किया गया है।ग्यारह आईएएस अधिकारी, जिन्हें उनके प्रभार से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया है, नई तैनाती का इंतजार करेंगे। - -भारत जल्द ही स्वर्णिम चतुर्भुज के आधार पर औद्योगिक स्मार्ट शहरों की एक भव्य श्रृंखला स्थापित करेगा-सरकार ने भारत के औद्योगिक परिदृश्य में क्रांति लाने के लिए 28,602 करोड़ रुपये की 12 परियोजनाओं को हरी झंडी दी-'प्लग-एन-प्ले' और 'वॉक-टू-वर्क' अवधारणाओं के साथ मांग से पहले विश्व स्तरीय ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों का निर्माण किया जाएगा-निवेश और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए मजबूत, टिकाऊ बुनियादी ढांचा-विकसित भारत के विजन के अनुरूप, ये परियोजनाएं निवेशकों के लिए उपलब्ध भूमि के साथ वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करेंगीनई दिल्ली। भारत जल्द ही औद्योगिक स्मार्ट शहरों की एक भव्य श्रृंखला स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय में, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के तहत 28,602 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 12 नए परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। यह कदम देश के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार है, जिससे औद्योगिक नोड्स और शहरों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार होगा जो आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा।10 राज्यों में फैले और रणनीतिक रूप से नियोजित 6 प्रमुख गलियारों के साथ ये परियोजनाएं भारत की विनिर्माण क्षमताओं और आर्थिक विकास को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग लगाएंगी। ये औद्योगिक क्षेत्र उत्तराखंड में खुरपिया, पंजाब में राजपुरा-पटियाला, महाराष्ट्र में दिघी, केरल में पलक्कड़, उत्तर प्रदेश में आगरा और प्रयागराज, बिहार में गया, तेलंगाना में जहीराबाद, आंध्र प्रदेश में ओरवाकल और कोप्पर्थी और राजस्थान में जोधपुर-पाली में स्थित हैं।मुख्य विशेषताएं:रणनीतिक निवेश: एनआईसीडीपी को बड़े एंकर उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) दोनों से निवेश की सुविधा प्रदान करके एक जीवंत औद्योगिक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। ये औद्योगिक नोड 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेंगे, जो सरकार के आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भारत के विजन को दर्शाता है।स्मार्ट शहर और आधुनिक बुनियादी ढांचा: नए औद्योगिक शहरों को वैश्विक मानकों के ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिन्हें 'प्लग-एन-प्ले' और 'वॉक-टू-वर्क' अवधारणाओं पर "मांग से पहले" बनाया जाएगा। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि शहर उन्नत बुनियादी ढांचे से लैस हों जो टिकाऊ और कुशल औद्योगिक कार्यों का समर्थन करते हैं।पीएम गतिशक्ति पर क्षेत्रीय दृष्टिकोण: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप परियोजनाओं में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचा होगा, जो लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा। औद्योगिक शहरों को पूरे क्षेत्र के परिवर्तन के लिए विकास केन्द्र बनाने की परिकल्पना की गई है।एक 'विकसित भारत' का विजन:इन परियोजनाओं की मंजूरी 'विकसित भारत' - एक विकसित भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक कदम है। वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (जीवीसी) में भारत को एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करके, एनआईसीडीपी आवंटन के लिए तत्काल उपलब्ध उन्नत विकसित भूमि प्रदान करेगा, जिससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करना आसान हो जाएगा। यह एक 'आत्मनिर्भर भारत' या स्वालंबी भारत बनाने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है, जो बढ़े हुए औद्योगिक उत्पादन और रोजगार के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।आर्थिक प्रभाव और रोजगार सृजन:एनआईसीडीपी से महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिसमें अनुमानित 1 मिलियन प्रत्यक्ष नौकरियां और नियोजित औद्योगीकरण के माध्यम से 3 मिलियन तक अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इससे न केवल आजीविका के अवसर उपलब्ध होंगे, बल्कि उन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में भी योगदान मिलेगा जहां ये परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।स्थायी विकास के प्रति प्रतिबद्धता:एनआईसीडीपी के तहत परियोजनाओं को स्थायित्व पर ध्यान केन्द्रित करते हुए तैयार किया गया है, जिसमें पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए आईसीटी-सक्षम उपयोगिताओं और हरित प्रौद्योगिकियों को शामिल किया गया है। गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और टिकाऊ बुनियादी ढांचा प्रदान करके, सरकार का लक्ष्य ऐसे औद्योगिक शहर बनाना है जो न केवल आर्थिक गतिविधि के केंद्र हों, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के मॉडल भी हों।एनआईसीडीपी के तहत 12 नए औद्योगिक नोड्स की स्वीकृति भारत की वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एकीकृत विकास, टिकाऊ बुनियादी ढाँचे और निर्बाध कनेक्टिविटी पर रणनीतिक ध्यान देने के साथ, ये परियोजनाएं भारत के औद्योगिक परिदृश्य को फिर से परिभाषित करने और आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए तैयार हैं।इन नई मंजूरियों के अलावा, एनआईसीडीपी ने पहले ही चार परियोजनाओं को पूरा होते देखा है, और चार अन्य वर्तमान में कार्यान्वयन के अधीन हैं। यह निरंतर प्रगति भारत के औद्योगिक क्षेत्र को बदलने और एक जीवंत, टिकाऊ और समावेशी आर्थिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- -परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग 6,456 करोड़ रुपये है और इसे 2028-29 तक पूरा किया जाएगा-इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान लगभग 114 (एक सौ चौदह) लाख मानव दिवसों का रोजगार पैदा होगानई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने रेल मंत्रालय की लगभग 6,456 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।कैबिनेट ने झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के 7 जिलों को कवर करने वाली रेल मंत्रालय की 3 परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत 6,456 करोड़ रुपये है।इन परियोजनाओं से दूर-दराज़ के इलाकों को आपस में जोड़कर लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार लाने, मौजूदा लाइन क्षमता बढ़ाने और परिवहन नेटवर्क का विस्तार करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा जिससे तेजी से आर्थिक विकास होगा।नई लाइन के प्रस्तावों से सीधी कनेक्टिविटी बनेगी और आवागमन में सुधार होगा, तथा भारतीय रेलवे की दक्षता और सेवा संबंधी विश्वसनीयता बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को आसान बनाएगा और भीड़भाड़ को कम करेगा, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त खंडों पर बेहद जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की नए भारत की परिकल्पना के अनुरूप हैं, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विकास होगा और लोगों को "आत्मनिर्भर" बनाया जा सकेगा और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का परिणाम हैं, जो एकीकृत योजना तैयार किए जाने से संभव हुआ है और यह लोगों, वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे 4 राज्यों के 7 जिलों में लागू की जाने वाली तीन परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 300 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी।इन परियोजनाओं के साथ 14 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे दो आकांक्षी जिलों (नुआपाड़ा और पूर्वी सिंहभूम) को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। नई लाइन परियोजनाओं से लगभग 1,300 गांवों और लगभग 11 लाख लोगों को कनेक्टिविटी मिलेगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 1,300 गांवों और लगभग 19 लाख लोगों को कनेक्टिविटी मिलेगी।ये मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 45 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल एवं ऊर्जा कुशल परिवहन साधन है और इससे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने, तेल आयात (10 करोड़ लीटर) को कम करने और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (240 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद मिलेगी, जो 9.7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘कृषि अवसंरचना कोष’ के अंतर्गत वित्तपोषण सुविधा की केंद्रीय योजना के क्रमिक विस्तार को मंजूरी दी है ताकि इसे और अधिक आकर्षक, प्रभावी एवं समावेशी बनाया जा सके।
देश में कृषि अवसंरचना को बढ़ाने, सुदृढ़ करने और कृषक समुदाय को मदद देने वाले एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना के दायरे का विस्तार करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इन पहलों का उद्देश्य पात्र परियोजनाओं के दायरे का विस्तार करना और एक सुदृढ़ कृषि अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त सहायक उपायों को जोड़ना है।व्यवहार्य कृषि परिसंपत्तियां: योजना के सभी पात्र लाभार्थियों को ‘सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए व्यवहार्य परियोजनाओं’ के अंतर्गत आने वाले बुनियादी ढांचा को बनाने की अनुमति देना। इस कदम से व्यवहार्य परियोजनाओं का विकास सुगम होने की उम्मीद है। ये सामुदायिक कृषि क्षमताओं को बढ़ाएंगी जिससे इस क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता में सुधार होगा।एकीकृत प्रसंस्करण परियोजनाएं: कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के अंतर्गत पात्र गतिविधियों की सूची में एकीकृत प्राथमिक द्वितीयक प्रसंस्करण परियोजनाओं को शामिल करना। हालांकि, सिर्फ द्वितीयक परियोजनाएं पात्र नहीं होंगी और उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की योजनाओं के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।पीएम कुसुम घटक-ए: किसान/किसानों के समूह/किसान उत्पादक संगठनों/सहकारी समितियों/पंचायतों के लिए पीएम-कुसुम के घटक-ए को एआईएफ के साथ मिलाने की अनुमति देना। इन पहलों के मेल का उद्देश्य कृषि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देना है।एनएबी संरक्षण: सीजीटीएमएसई के अलावा, एनएबी संरक्षण ट्रस्टी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए एफपीओ के एआईएफ क्रेडिट गारंटी कवरेज का विस्तार करने का प्रस्ताव है। क्रेडिट गारंटी विकल्पों के इस विस्तार का उद्देश्य एफपीओ की वित्तीय सुरक्षा और ऋण-योग्यता को बढ़ाना है, जिससे कृषि अवसंरचना परियोजनाओं में अधिक निवेश को बढ़ावा मिले।2020 में प्रधानमंत्री द्वारा शुभारंभ किए जाने के बाद से ही एआईएफ 6623 गोदामों, 688 कोल्ड स्टोर और 21 साइलो परियोजनाओं के निर्माण का समर्थन करने में मददगार रहा है, जिसके चलते देश में लगभग 500 एलएमटी की अतिरिक्त भंडारण क्षमता प्राप्त हुई है। इसमें 465 एलएमटी शुष्क भंडारण और 35 एलएमटी कोल्ड स्टोरेज क्षमता शामिल है। इस अतिरिक्त भंडारण क्षमता से सालाना 18.6 एलएमटी खाद्यान्न और 3.44 एलएमटी बागवानी उपज की बचत की जा सकती है। एआईएफ के अंतर्गत अब तक 74,508 परियोजनाओं के लिए 47,575 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन स्वीकृत परियोजनाओं ने कृषि क्षेत्र में 78,596 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है, जिसमें से 78,433 करोड़ रुपये निजी संस्थाओं से जुटाए गए हैं।इसके अलावा, एआईएफ के अंतर्गत स्वीकृत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने कृषि क्षेत्र में 8.19 लाख से अधिक ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद की है। एआईएफ योजना के दायरे में विस्तार से विकास को गति मिलेगी, उत्पादकता में सुधार होगा, कृषि आय बढ़ेगी और देश में कृषि की समग्र स्थिरता में योगदान मिलेगा। ये उपाय देश में कृषि अवसंरचना के समग्र विकास के जरिए कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी दिखलाते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य संस्थाओं और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच संयुक्त उद्यम (जेवी) सहयोग के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए उनकी इक्विटी भागीदारी के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की राज्य सरकारों को केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान करने के विद्युत मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस योजना का परिव्यय 4136 करोड़ रुपये है, जिसे वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2031-32 तक क्रियान्वित किया जाना है। इस योजना के तहत लगभग 15,000 मेगावाट की कुल जल विद्युत क्षमता को सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना को विद्युत मंत्रालय के कुल परिव्यय से पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए 10 प्रतिशत सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा।विद्युत मंत्रालय द्वारा तैयार की गई योजना में राज्य सरकार के साथ केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम की सभी परियोजनाओं के लिए एक संयुक्त उद्यम (जेवी) कंपनी के गठन का प्रावधान है।पूर्वोत्तर क्षेत्र की राज्य सरकार के इक्विटी हिस्से के लिए अनुदान कुल परियोजना इक्विटी के 24 प्रतिशत पर सीमित होगा, जो प्रति परियोजना अधिकतम 750 करोड़ रुपये होगा। प्रत्येक परियोजना के लिए 750 करोड़ रुपये की सीमा पर, यदि आवश्यक हो, तो मामला-दर-मामला आधार पर पुनर्विचार किया जाएगा। अनुदान के वितरण के समय संयुक्त उद्यम में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसयू) और राज्य सरकार की इक्विटी का अनुपात बनाए रखा जाएगा।केंद्रीय वित्तीय सहायता केवल व्यवहार्य जल विद्युत परियोजनाओं तक ही सीमित होगी। राज्यों को परियोजना को व्यवहार्य बनाने के लिए मुफ्त बिजली/स्टैगर फ्री बिजली और /या एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति करनी होगी।इस योजना की शुरुआत के साथ, जलविद्युत विकास में राज्य सरकारों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा और जोखिम तथा जिम्मेदारियों को अधिक न्यायसंगत तरीके से साझा किया जाएगा। राज्य सरकारों के हितधारक बनने से भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन तथा स्थानीय कानून एवं व्यवस्था जैसी समस्याएं कम हो जाएंगी। इससे परियोजनाओं में लगने वाले समय और लागत दोनों की बचत होगी।यह योजना पूर्वोत्तर की जल विद्युत क्षमता का पूरा उपयोग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्याप्त निवेश आएगा। इतना ही नहीं, परिवहन, पर्यटन, लघु-स्तरीय व्यवसाय के माध्यम से स्थानीय लोगों को बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार/उद्यमिता के अवसर भी मिलेंगे। जल विद्युत परियोजनाओं का विकास 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) को साकार करने में भी योगदान देगा और ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण में मदद करेगा, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड की सशक्तता, सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ेगी।भारत सरकार जल विद्युत विकास में बाधा डालने वाले मुद्दों के समाधान के लिए कई नीतिगत पहल कर रही है। जल विद्युत क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा इसे और अधिक व्यवहार्य बनाने के लिए, मंत्रिमंडल ने 7 मार्च, 2019 को कई उपायों जैसे कि बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत घोषित करना, जल विद्युत खरीद दायित्व (एचपीओ), टैरिफ में वृद्धि के माध्यम से टैरिफ युक्तिकरण उपाय, भंडारण एचईपी में बाढ़ नियंत्रण के लिए बजटीय सहायता और सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर (यानी सड़कों और पुलों का निर्माण) की लागत के लिए बजटीय सहायता को मंजूरी दी। -

-छत्तीसगढ़ में जगदलपुर, अंबिकापुर और कोरबा में 3 एफएम रेडियो केंद्र को मंजूरी मिली
नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निजी एफएम रेडियो चरण-3 नीति के तहत 234 नए शहरों में 730 चैनलों के लिए आरोही ई-नीलामी के तीसरे समूह के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके लिये अनुमानित आरक्षित मूल्य 784.87 करोड़ रुपये आंका गया है। छत्तीसगढ़ में जगदलपुर, अंबिकापुर और कोरबा में 3 FM radio केंद्र को मंजूरी मिली है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां बताया कि मंत्रिमंडल ने एफएम चैनलों के लिए वार्षिक लाइसेंस शुल्क (एएलएफ) जीएसटी को छोड़कर सकल राजस्व का चार प्रतिशत वसूलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह 234 नये शहरों/कस्बों पर लागू होगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 234 नए शहरों और कस्बों में निजी एफएम रेडियो की शुरुआत से इन क्षेत्रों में एफएम रेडियो की अपूर्ण मांग पूरी होगी, जो अब भी निजी एफएम रेडियो प्रसारण से अछूते हैं और इससे मातृभाषा में नयी और स्थानीय सामग्री उपलब्ध होगी। इसमें रेखांकित किया गया कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, स्थानीय बोली और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा तथा ‘वोकल फॉर लोकल' पहल को बढ़ावा मिलेगा। स्वीकृत किये गये कई शहर आकांक्षी जिलों और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हैं। बयान में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में निजी एफएम रेडियो की स्थापना से वहां सरकारी पहुंच और मजबूत होगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत में युद्ध, आतंकवाद और नक्सलवाद से भी अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है। गडकरी ने उद्योग मंडल फिक्की के ‘सड़क सुरक्षा पुरस्कार और संगोष्ठी-2024' के छठे संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क परियोजनाओं की खराब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के कारण ‘ब्लैकस्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “युद्ध, आतंकवाद और नक्सलवाद से भी अधिक लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है।”
गडकरी के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.5 लाख लोगों की मृत्यु होती है, जबकि तीन लाख लोग घायल होते हैं। उन्होंने कहा, “इससे देश को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन प्रतिशत का नुकसान होता है। ‘बलि के बकरे' की तरह हर दुर्घटना के लिए चालक को दोषी ठहराया जाता है। मैं आपको बता दूं, और मैंने बारीकी से देखा है कि ज्यादातर दुर्घटनाएं सड़क इंजीनियरिंग में खामी की वजह से होती हैं।” मंत्री ने सभी राजमार्गों के सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की संख्या कम करने के लिए, “हमें लेन अनुशासन का पालन करने की जरूरत है।”
गडकरी ने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय एम्बुलेंस और उसके चालकों के लिए कोड तैयार कर रहा है, ताकि उन्हें सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को शीघ्र बचाने के लिए कटर जैसी अत्याधुनिक मशीनों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा सके। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना' के 10 वर्ष पूरे होने पर बुधवार को कहा कि यह योजना सम्मान, सशक्तीकरण और राष्ट्र के आर्थिक जीवन में भागीदारी के अवसर का प्रतीक है। मोदी ने जन धन योजना को सफल बनाने के लिए काम करने वालों की भी सराहना की और कहा कि यह योजना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर अपने आधिकारिक खाते पर लिखा, ‘‘आज एक ऐतिहासिक दिन है... जन धन योजना के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं और इस योजना को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक करने वाले सभी लोगों को भी बहुत-बहुत बधाई।'' उन्होंने कहा कि जन धन योजना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और करोड़ों लोगों खासकर महिलाओं, युवाओं तथा वंचित समुदायों को सम्मान देने में सबसे आगे रही है। प्रधानमंत्री ने पेशेवर मंच ‘लिंक्डइन' पर बाद में लिखा आज प्रधानमंत्री जन धन योजना को शुरू हुए एक दशक हो गया है और यह पहल महज एक नीति नहीं है। यह एक ऐसे भारत के निर्माण का प्रयास है, जहां हर नागरिक, चाहे उसकी आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, उसकी औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच हो। मोदी ने कहा, ‘‘ आप में से कई लोग, खासकर युवा सोच रहे होंगे..यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आखिरकार, इस युग में बैंक खाता होना बेहद ही बुनियादी बात है और इसे सामान्य बात भी माना जाता है। हालांकि, जब हमने 2014 में सत्ता संभाली, तो स्थिति बहुत अलग थी। आजादी के करीब 65 साल हो चुके थे, लेकिन हमारे लगभग आधे परिवारों के लिए बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच दूर का सपना थी।'' उन्होंने कहा कि उनकी दुनिया ऐसी थी जहां बचत घर पर रखी जाती थी, जिसके खोने तथा चोरी होने का खतरा बना रहता था। मोदी ने कहा, ‘‘ कर्ज तक पहुंच ‘साहूकारों' की दया पर निर्भर थी। वित्तीय सुरक्षा के अभाव से कई सपने पूरे नहीं हो पाते थे।'' उन्होंने कहा, ‘‘ जब जन-धन योजना शुरू की गई तो मुझे याद है कि इसे लेकर भी संशय की स्थिति थी। कुछ लोगों ने पूछा था - क्या इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग प्रणाली में लाना वास्तव में संभव है? क्या इस प्रयास से कोई ठोस बदलाव आएगा? हां। चुनौतियां काफी व्यापक थीं लेकिन इसे हकीकत बनाने के लिए भारत के लोगों का दृढ़ संकल्प भी उतना ही बड़ा था।'' मोदी ने कहा कि जन धन योजना की सफलता के दो पहलू हैं। एक पहलू यह है कि 53 करोड़ से अधिक लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे बैंकिंग प्रणाली से जुड़ पाएंगे लेकिन अब उनके पास बैंक खाते हैं। उन्होंने कहा कि इन खातों में 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 65 प्रतिशत से अधिक खाते ग्रामीण या अर्द्धशहरी क्षेत्रों में हैं, जिससे वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया महानगरों तक सीमित नहीं रही। करीब 39 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष हस्तांतरण हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन, दूसरा पहलू प्रभावशाली आंकड़ों से कहीं आगे है। जहां तक महिला सशक्तीकरण का सवाल है, जन धन योजना परिवर्तनकारी साबित हुई है। करीब 30 करोड़ महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली में लाया गया है।'' मोदी ने कहा कि इसी तरह, इस योजना के लाभ व बैंक खाते के जरिये मिलने वाले अन्य लाभों ने करोड़ों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग परिवारों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन, ‘जेएएम' त्रिमूर्ति - जनधन, आधार और मोबाइल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। वर्ष 2014 में आज के दिन शुरू की गयी प्रधानमंत्री जन धन योजना वित्तीय समावेशन पर एक राष्ट्रीय मिशन है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक बुनियादी बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षरता, ऋण, बीमा और पेंशन सुविधा तक पहुंच के साथ बैंकिंग सुविधाओं को लेकर पहुंच सुनिश्चित करना है। -
इंदौर. देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में बुधवार को सफाई कर्मियों के अवकाश के दौरान स्थानीय जन प्रतिनिधियों और सरकारी अफसरों समेत समाज के अलग-अलग तबकों के लोगों ने प्रमुख स्थानों पर झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। अधिकारियों ने बताया कि गोगा नवमी के अगले दिन शहर के सफाई कर्मियों को हर साल सरकारी अवकाश दिया जाता है। शहर के हृदय स्थल राजबाड़ा चौराहे पर झाड़ू लगाने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘स्वच्छता इंदौर के लोगों की आदत बन चुकी है। सफाई कर्मियों के अवकाश के दौरान हमारी जिम्मेदारी है कि हम शहर को स्वच्छ बनाए रखें।'' अधिकारियों ने बताया कि शहर के प्रमुख स्थलों पर चलाए गए सफाई अभियान में सरकारी अधिकारियों के साथ ही स्थानीय विधायक और पार्षद भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने की इस मुहिम में सामाजिक संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों ने भी भाग लिया। इंदौर, राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार सात बार अव्वल रहा है।
- अहमदाबाद। गुजरात में बारिश से संबंधित घटनाओं में नौ और लोगों की मौत हो गई, जिससे ऐसी घटनाओं में दो दिन में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी ।अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कुछ हिस्सों में बुधवार को लगातार चौथे दिन भी बारिश जारी है। वहीं, बाढ़ प्रभावित इलाकों में से 8500 लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया और इस संकट में केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।अधिकारी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के साथ मिलकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य संचालित कर रहे हैं।एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश के कारण दीवारें ढह जाने और पानी में डूबने जैसी घटनाओं में कुल नौ लोगों की मौत हो गई।इसमें बताया गया कि गुजरात के विभिन्न हिस्सों में सोमवार इस तरह की घटनाओं में सात लोग मारे गए थे।विज्ञप्ति में बताया गया कि आणंद जिले में मंगलवार को दीवार ढहने से तीन लोगों की मौत हो गई। महिसागर जिले में दो और खेड़ा तथा अहमदाबाद में दीवार ढह जाने की घटनाओं में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई। जूनागढ़ और भरूच जिले में बारिश के कारण भरे पानी में डूबने से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई।अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को कुल 169 लोगों को बचाया गया, जिनमें से अधिकतर खेड़ा और मोरबी जिले के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि 8460 अन्य लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इनमें नवसारी से लगभग 3,000 तथा वडोदरा और खेड़ा से लगभग एक-एक हजार लोग शामिल हैं। इसी के साथ सोमवार और मंगलवार को दो दिन में 15,000 से अधिक लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।अधिकारियों ने बताया कि गुजरात में पिछले दो दिन में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है।मुख्यमंत्री पटेल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात में भारी बारिश की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुझसे फोन पर बात की और राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली।’’उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मनुष्यों और जीव जंतुओं की सुरक्षा के संबंध में बात की तथा केंद्र सरकार की ओर से सभी आवश्यक मदद देने का आश्वासन दिया।पटेल ने कहा, ”प्रधानमंत्री गुजरात में बाढ़ की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। गुजरात के लोगों के प्रति उनके दिल में गहरा स्नेह है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान और जब भी आवश्यकता होती है, वह हमेशा गुजरात और राज्य के लोगों के साथ खड़े रहते हैं।”राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सौराष्ट्र क्षेत्र के कई जिलों खासतौर पर देवभूमि द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और राजकोट में बुधवार सुबह छह बजे समाप्त हुई 24 घंटे की अवधि मे बहुत भारी बारिश हुई। इसमें बताया गया कि देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया तालुका में 454 मिलीमीटर (मिमी) वर्षा हुई, इसके बाद जामनगर में 387 मिमी और जामनगर की जामजोधपुर तालुका में 329 मिमी बारिश हुई।एसईओसी के मुताबिक, इस अवधि के दौरान राज्य की 251 तालुकाओं में से 13 में 200 मिमी से अधिक तथा 39 में 100 मिमी से अधिक बारिश हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया तथा निचले इलाकों में जलभराव हो गया।वैसे तो वडोदरा में बारिश रुक गई है, लेकिन विश्वामित्री नदी में बाढ़ आने से शहर के कई निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। हालांकि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों का राहत-बचाव अभियान जारी है।अधिकारियों ने बताया कि मोरबी, आणंद, देवभूमि द्वारका, राजकोट और वडोदरा में राहत एवं बचाव अभियान के लिए सेना की पांच-पांच टुकड़ियों को तैनात किया गया है।आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य में 137 जलाशय, झीलें तथा 24 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है।पश्चिम रेलवे ने बताया कि बारिश के कारण सड़कें और रेलवे लाइन जलमग्न हो गईं जिससे यातायात और रेलगाड़ियों की आवाजाही भी बाधित हुई। मुंबई जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस समेत आठ ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 10 अन्य ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द कर दी गईं।एसईओसी ने बताया कि गुजरात में अब तक औसत वार्षिक वर्षा की 105 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, जिसमें बनासकांठा में सभी 33 जिलों में सबसे कम बारिश हुई है। बनासकांठा में औसत वार्षिक वर्षा की 73 प्रतिशत बारिश हुई है।
- मुंबई। मुंबई में एक दिन पहले ‘दही हांडी’ उत्सव के तहत मानव पिरामिड बनाने में शामिल कुल 245 ‘गोविंदा’ घायल हो गए। स्थानीय निकाय के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन घायलों में से 32 विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 213 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। जन्माष्टमी के तहत दही हांडी उत्सव में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में यह त्योहार पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया।उत्सव के तहत दही हांडी के प्रतिभागी बहु-स्तरीय मानव पिरामिड बनाते हैं और हवा में लटकी दही हांडी को तोड़ते हैं।एक अधिकारी ने बताया कि उत्सव के दौरान घायल हुए 11 गोविंदा को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित केईएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, राजावाडी और सायन अस्पताल में चार-चार तथा जे जे अस्पताल में एक गोविंदा को भर्ती कराया गया।उन्होंने बताया कि अन्य घायल गोविंदाओं को दक्षिण मुंबई में सरकारी सेंट जॉर्ज अस्पताल, जोगेश्वरी में सरकारी ट्रॉमा केयर अस्पताल तथा अन्य चिकित्सा संस्थानों में भर्ती कराया गया। उत्सव के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर में 11,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जन धन योजना को सफल बनाने के लिए काम करने वाले लोगों की बुधवार को प्रशंसा की और कहा कि यह योजना वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने में सर्वोपरि रही है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज एक ऐतिहासिक दिन है – जन धन योजना के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं और इस योजना को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक करने वाले सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई।’’उन्होंने कहा कि जन धन योजना वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने और करोड़ों लोगों खासकर महिलाओं, युवाओं तथा वंचित समुदायों को सम्मान देने में सर्वोपरि रही है। वर्ष 2014 में आज के दिन शुरू की गयी प्रधानमंत्री जन धन योजना वित्तीय समावेश पर एक राष्ट्रीय मिशन है जिसमें देश के सभी परिवारों के व्यापक वित्तीय समावेश के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक बुनियादी बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षरता, ऋण, बीमा और पेंशन सुविधा तक पहुंच के साथ बैंकिंग सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना है। - नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ग्रेटर नोएडा और धोलेरा की तर्ज पर विभिन्न राज्यों में 12 नए औद्योगिक शहरों की स्थापना के प्रस्ताव को इस सप्ताह मंजूरी दे सकता है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित 12 औद्योगिक शहरों में से दो आंध्र प्रदेश और एक बिहार में बन रहे हैं।वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में 100 शहरों में या उसके आसपास 'प्लग एंड प्ले' औद्योगिक पार्क विकसित करने की घोषणा की गई है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव राजेश कुमार सिंह ने पहले बताया था कि ऐसे आठ शहर पहले से ही कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। चार शहरों - धोलेरा (गुजरात), ऑरिक (महाराष्ट्र), विक्रम उद्योगपुरी (मध्य प्रदेश) और कृष्णपट्टनम (आंध्र प्रदेश) में शुरुआती काम हो चुका है और उद्योग के लिए भूमि आवंटन का काम चल रहा है। इसी तरह, अन्य चार शहरों में सरकार का विशेष उद्देश्य वाहन सड़क संपर्क, पानी और बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया में है। आठ औद्योगिक शहर पहले से ही विकास के चरण में हैं और बजट में 12 नए शहरों की घोषणा के साथ, देश में इन शहरों की कुल संख्या 20 तक पहुंच जाएगी। इस कदम से देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ाने और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने जन शिकायत निवारण की समय सीमा मौजूदा 30 दिन से घटाकर 21 दिन कर दिया है। संशोधित दिशा-निर्देशों से जुड़े आदेश में शिकायतों के निपटारे के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है, साथ ही ‘सरकार के समग्र दृष्टिकोण' पर भी जोर दिया गया है। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, ‘‘इसका अर्थ यह है कि शिकायत को किसी भी मामले में यह कहकर बंद किया जाएगा कि ‘इस मंत्रालय/विभाग/कार्यालय से संबंधित नहीं है' या इस तरह की अन्य भाषा के आधार पर इसे नहीं बंद किया जाएगा। यदि शिकायत का विषय प्राप्त करने वाले मंत्रालय से संबंधित नहीं है, तो इसे सही प्राधिकारी को हस्तांतरित करने का प्रयास किया जाएगा।'' इसमें कहा गया कि जिन मंत्रालयों/विभागों में बड़ी संख्या में जन शिकायतें प्राप्त होती हैं, वहां स्वतंत्र प्रभार के साथ पर्याप्त पद पर एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करने की सलाह दी जाती है, ताकि जन शिकायतों का समय पर और गुणवत्तापूर्ण निपटान सुनिश्चित किया जा सके। संशोधित दिशा-निर्देशों का उल्लेख करने वाला यह आदेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून को भारत सरकार के सचिवों के साथ बातचीत के दौरान दिए गए निर्देशों के बाद जारी किया गया। निर्देशों के अनुपालन में, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने केन्द्रीयकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) को ‘‘नागरिकों के लिए अधिक संवेदनशील, सुलभ और सार्थक'' बनाने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा की। यह एक ऑनलाइन पोर्टल है, जो लोगों को सरकारी विभागों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। विभाग द्वारा 23 अगस्त, 2024 जारी आदेश में कहा गया, ‘‘सीपीजीआरएएमएस में शुरू किए गए 10 चरणों के सुधारों ने औसत समाधान समय को काफी कम कर दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए, सीपीजीआरएएमएस में मामलों के लिए डीएआरपीजी द्वारा सुझाए गए अधिकतम निवारण समय को और घटाकर 21 दिन कर दिया गया है।'' आदेश में कहा गया कि जिन मामलों में निवारण में अधिक समय लगता है, वहां कारण बताते हुए अंतरिम उत्तर दिया जा सकता है तथा शिकायत के समाधान की अपेक्षित समयसीमा भी बताई जा सकती है।
- देहरादून. दिल्ली में केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति के निर्माण की योजना रदद कर दी गई है । प्रतिकृति निर्माण को लेकर हाल में खासा विवाद हुआ था । दिल्ली के बुराड़ी में मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए थे । मंदिर के निर्माण से जुड़े केदारनाथ धाम दिल्ली ट्रस्ट की अध्यक्ष सुमन मित्तल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “उत्तराखंड के कुछ लोगों द्वारा मंदिर निर्माण को लेकर आपत्ति जताए जाने के कारण हमने मंदिर को न बनाने का निर्णय लिया है और हमने सोचा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत होंगी।” उन्होंने कहा, “हम अब उस नाम से कोई मंदिर नहीं बना रहे हैं।”मित्तल ने बताया कि ट्रस्ट ने मंदिर के निर्माण के लिए क्यूआर कोड के जरिए ऑनलाइन दान लेना भी बंद कर दिया है । उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित हिमालयी धाम के पुजारियों ने राष्ट्रीय राजधानी के बुराड़ी में मंदिर बनाए जाने का यह कहते हुए विरोध किया था कि केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी कहीं और प्रतिकृति बनाना सदियों पुराने मंदिर का अपमान होगा । इस मंदिर के निर्माण के विरोध में विपक्षी कांग्रेस ने हरिद्वार में हर की पौड़ी से पदयात्रा भी निकाली थी।
- नयी दिल्ली. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को घोषणा की कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भाजपा में शामिल होंगे। शर्मा ने कहा कि सोरेन 30 अगस्त को रांची में पार्टी में शामिल होंगे। उन्होंने यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सोरेन की मुलाकात की एक तस्वीर पोस्ट की। झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के सह-प्रभारी शर्मा भी बैठक में शामिल थे।शर्मा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, “झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हमारे देश के दिग्गज आदिवासी नेता चंपई सोरेन जी ने कुछ समय पहले माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी से मुलाकात की। वह 30 अगस्त को रांची में आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल होंगे।” झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता सोरेन ने पार्टी नेतृत्व पर उनका अपमान करने का आरोप लगाया था और घोषणा की थी कि वह जल्द ही अपने अगले राजनीतिक कदम के बारे में फैसला करेंगे। यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
- नयी दिल्ली. एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) से सरकारी खजाने पर प्रति वर्ष 6,250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इस योजना के तहत 23 लाख पात्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को सुनिश्चित पेंशन दी जाएगी।यूपीएस एक अप्रैल, 2025 से प्रभावी होने पर सरकार के योगदान को मौजूदा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत करने का इरादा रखती है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकारी योगदान में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि से सरकार को 6,250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। सरकार यूपीएस के तहत अपना योगदान बढ़ा रही है, लेकिन कर्मचारियों का योगदान मूल वेतन के 10 प्रतिशत पर बरकरार रहेगा। इसके अलावा, 31 मार्च, 2025 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत 800 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान किया जाना है। ये सेवानिवृत्त कर्मचारी यदि यूपीएस का विकल्प चुनते हैं, तो उन्हें बकाया राशि मिलेगी। एनपीएस एक अंशदायी योजना है, जबकि इससे पहले की पेंशन योजना में सरकार ने अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान करने का वादा किया था। एनपीएस एक जनवरी, 2004 से लागू हुई थी। दूसरी ओर यूपीएस सेवा अवधि के आधार पर सुनिश्चित पेंशन देने करने की परिकल्पना करती है।केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा शनिवार को स्वीकृत योजना के जरिए हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों से पहले सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा किया गया है। एनपीएस के तहत आने वाले कर्मचारी यूपीएस का विकल्प चुन सकते हैं। एक बार विकल्प चुनने के बाद वापस इसे बदलने का विकल्प नहीं होगा। यूपीएस का विकल्प चुनने वाले कर्मचारी न्यूनतम 25 वर्ष की सेवा पूरी करने पर सेवानिवृत्ति से पहले अंतिम 12 महीनों में मिले औसत मूल वेतन के 50 प्रतिशत की सुनिश्चित पेंशन के लिए पात्र होंगे। दूसरी ओर 25 वर्ष से कम सेवा अवधि वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा अवधि तक आनुपातिक रूप से तय होगी।
- इंदौर . केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने सोमवार को कहा कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि पारंपरिक ज्ञान पर आधारित आयुर्वेदिक दवाओं को किस तरह उचित मान्यता दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि आयुष दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए देश की हर तहसील में विशेष मेडिकल स्टोर खोलने की कोशिश भी की जा रही है। जाधव ने इंदौर में कहा,‘‘ प्राचीन काल से लेकर अब तक देश में आयुर्वेद का पारंपरिक ज्ञान लोगों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी सफर करता आ रहा है। आयुर्वेद में बहुत अच्छी दवाएं हैं, लेकिन उन्हें कोई मान्यता नहीं मिली हुई है। हम सोच रहे हैं कि इन दवाओं को कैसे मान्यता दी जा सकती है?'' उन्होंने कहा कि आमतौर पर मेडिकल स्टोर में आयुष की गिनी-चुनी दवाएं ही मिलती हैं जिससे मरीजों के साथ ही ये औषधियां सुझाने वाले चिकित्सकों को भी दिक्कत होती है। आयुष मंत्री ने कहा,‘‘सरकार चाहती है कि अनुसंधान के बाद आयुष की औषधियां ज्यादा से ज्यादा बाजार में आएं और ये दवाएं हर जगह मिलें। इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं कि देश की हर तहसील में आयुष दवाओं का कम से कम एक विशेष मेडिकल स्टोर खोला जाए।' जाधव ने बताया कि देश में तहसील स्तर तक आयुष चिकित्सालय भी खोले जा रहे हैं।अधिकारियों ने बताया कि आयुष मंत्री ने इंदौर, देवास और उज्जैन में अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों का दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
- भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने बर्ड फ्लू के एच5एन1 वायरस के पाए जाने के बाद पुरी जिले के पिपिली में 11,700 मुर्गियों को मारा है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि पिपिली में एक स्थानीय मुर्गीपालन केंद्र में बड़े पैमाने पर मुर्गियों की सामूहिक मौत के बाद, शनिवार को मुर्गियों को मारने का काम शुरू हुआ और सोमवार शाम को यह संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि घरों और आस-पास के गांवों में अतिरिक्त मुर्गियों को मारने का काम मंगलवार को किया जाएगा। रोग नियंत्रण के अतिरिक्त निदेशक जगन्नाथ नंदा ने कहा कि 13 त्वरित कार्रवाई दल मुर्गियों को मारने का काम रहे हैं जबकि कुछ मुर्गी पालन केंद्रों के मालिक भी अपने स्तर पर मुर्गियों को मार रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कहीं और मुर्गियों की असामान्य मौत की कोई खबर नहीं है। बर्ड फ्लू के मद्देनजर राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और अलर्ट जारी किया है।स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक बिजय महापात्र ने बताया कि बर्ड फ्लू ओडिशा के लिए नयी बात नहीं है, लेकिन विभाग स्थिति से निपटने के लिए पक्षकारों के साथ काम कर रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं और पॉल्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों से स्वच्छता बनाए रखने और मास्क पहनने का आग्रह किया।
- नयी दिल्ली. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में सोमवार तड़के एक कैंटर ट्रक ने फुटपाथ पर सो रहे पांच लोगों को कथित तौर पर कुचल दिया जिनमें से तीन व्यक्तियों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी और कहा कि दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि कथित घटना शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन के पास तरबूज बाजार में सुबह करीब साढ़े चार बजे हुई। उन्होंने बताया कि ये सभी लोग बेघर थे और फुटपाथ पर सो रहे थे। एक अधिकारी ने बताया कि एक मालवाहक वाहन सीलमपुर से आयरन ब्रिज की ओर आ रहा था, जो पुल पर बीच में ‘डिवाइडर' पर चढ़ गया और उसने फुटपाथ पर सो रहे पांच लोगों को कुचल दिया। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों को जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया जहां तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। उनमें से एक की पहचान बिहार के कटिहार के मोहम्मद जाकिर (35) के रूप में हुई जो यहां श्रमिक के रूप में काम करता था। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, वह अक्सर उसी फुटपाथ पर सोता था। अन्य दो मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है। अधिकारी ने बताया कि दो घायल मुश्ताक (35) और कमलेश (36) को जीटीबी अस्पताल ले जाया गया।पास की झोपड़ी में सो रहे जैनूल ने कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद वह घटनास्थल पर पहुंचा। उसने कहा, ‘‘मैं मौके पर पहुंचा तो मुस्तफा दर्द से जोर-जोर से कराह रहा था। पुलिस आधे घंटे बाद पहुंची और एम्बुलेंस बाद में आई। मैंने घायलों को उठाने और उन्हें अस्पताल ले जाने में पुलिस की मदद की। कोई और मदद के लिए आगे नहीं आया।'' मृतकों में से एक का जिक्र करते हुए स्थानीय निवासी सनी ने कहा, ‘‘मैं उसका नाम नहीं जानता, लेकिन हम उसे बहादुर कहते थे। वह सड़क किनारे किराने का सामान और सिगरेट की दुकान चलाता था।'' पुलिस उपायुक्त (पूर्वोत्तर) जॉय टिर्की ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 (लापरवाही पूर्वक वाहन चलाना), 125ए (दूसरों की निजी सुरक्षा को खतरे में डालना) और 106 (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि ट्रक चालक को पकड़ने के लिए टीमें गठित की गई हैं और दो अन्य मृतकों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में पांच नए जिले बनाने की घोषणा की। स्थानीय लोगों ने कुल जिलों की संख्या सात करने के कदम का स्वागत किया और कहा कि नये जिले बनने से उनकी लंबे समय से लंबित मांग पूरी हुई है। हालांकि, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के साथ मिलकर राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के विस्तार सहित अपनी चार प्रमुख मांगों के लिए लड़ रहे लेह के शीर्ष निकाय ने कहा कि वे अपना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि एक विकसित और समृद्ध लद्दाख बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पांच नए जिले बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, ‘‘ये नए जिले जांस्कर, द्रास, शाम, नुबरा और चांगथांग होंगे जो लद्दाख के हर हिस्से में शासन को मजबूत करके लोगों के लिए फायदों को उनके दरवाजे तक पहुंचाएंगे।'' शाह ने कहा कि मोदी सरकार लद्दाख की जनता के वास्ते अपार अवसर सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि नये जिलों के निर्माण से सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाएं लोगों तक आसानी से पहुंचेंगी और अधिक से अधिक लोग इनसे लाभान्वित हो सकेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लद्दाख में पांच नए जिलों के गठन की सराहना करते हुए इसे बेहतर शासन और समृद्धि की दिशा में एक कदम बताया। उन्होंने कहा कि जांस्कर, द्रास, शाम, नुबरा और चांगथांग पर अब अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे सेवाओं और अवसरों को लोगों के और करीब लाया जा सकेगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर कहा, ‘‘लद्दाख में पांच नए जिलों का निर्माण बेहतर शासन और समृद्धि की दिशा में एक कदम है।'' इन पांच जिलों के गठन के बाद अब लद्दाख में लेह और करगिल को मिलाकर कुल सात जिले हो जायेंगे।गृह मंत्रालय के मुताबिक, अत्यंत कठिन और दुर्गम होने के कारण वर्तमान में जिला प्रशासन को जमीनी स्तर तक पहुंचने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मंत्रालय के मुताबिक, इन जिलों के गठन के बाद अब केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन की सभी जनहित योजनाएं लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगी और अधिक से अधिक लोग उनका लाभ उठा सकेंगे। मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पांच नए जिलों के गठन की ‘‘सैद्धांतिक स्वीकृति'' देने के साथ ही गृह मंत्रालय ने लद्दाख प्रशासन को नए जिलों के गठन से संबंधित विभिन्न पहलुओं जैसे मुख्यालय, सीमाएं, संरचना और पदों के सृजन आदि के आंकलन के लिए एक समिति बनाने और उसे तीन महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को पांच अगस्त, 2019 को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था। एक केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख और दूसरा जम्मू कश्मीर है। केंद्रशासित प्रदेश होने के नाते लद्दाख केंद्रीय गृह मंत्रालय के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में आता है।पूर्व भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नांग्याल ने केंद्र की घोषणा को लद्दाख के लोगों के लिए ‘जन्माष्टमी का उपहार' करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘2018 में भाजपा ने लद्दाख को एक अलग मंडल दिया और अगले साल केंद्र शासित प्रदेश की मांग को भी पूरा किया और बजट को बढ़ाकर 6,000 करोड़ रुपये कर दिया। हम इस फैसले (नये जिले गठित करने) का स्वागत करते हैं जो लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप है।'' जलवायु कार्यकर्ता एवं लेह शीर्ष निकाय के सदस्य सोनम वांगचुक ने कहा, ‘‘मैं लद्दाख के लोगों की ओर से गृह मंत्री और मोदी सरकार को पांच नए जिलों की घोषणा करने के लिए धन्यवाद देता हूं। यह लोगों, विशेष रूप से जांस्कर क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांग थी।'' वांगचुक ने भाजपा को क्षेत्र में संविधान की छठी अनुसूची लागू करने के उसके वादे की याद दिलाई और कहा कि सरकार को जनता की प्राथमिक मांगों को पूरा करना चाहिए अन्यथा स्थानीय लोगों का संघर्ष जारी रहेगा। कांग्रेस के लद्दाख अध्यक्ष नवांग रिग्जिन जोरा ने भी केंद्र के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि सिर्फ प्रशासनिक जिले बनाने से लद्दाख के लोगों का पर्यावरण, संस्कृति और पहचान नहीं बचेगी, जिसके लिए वे पिछले चार साल से सड़कों पर हैं।
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी....मंदिरों में विशेष पूजानयी दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर उत्तर प्रदेश के मथुरा से लेकर गुजरात के द्वारका तक मंदिरों में विशेष पूजा की जा रही है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के कार्यक्रम मंगला आरती से शुरू हो चुके हैं। मंदिरों में देर रात से दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।भगवान कृष्ण, द्वापर युग में भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष में अष्टमी की रात प्रकट हुए थे। इस साल द्वापर युग की तरह ही नक्षत्रों का योग बन रहा है। श्रीकृष्ण रात में अवतरित हुए, इस वजह से जन्माष्टमी रात में मनाने की परंपरा है।बात मंदिरों की करें तो श्रीकृष्ण के लीला स्थान मथुरा-वृंदावन के अलावा देश भर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है।मथुरा में रात 12 बजे जन्मभूमि के बिड़ला मंदिर में बालकृष्ण का पंचामृत अभिषेक होगा। वहीं, गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर के पट आज रात 2.30 बजे तक खुले रहेंगे।
- जयपुर. राजस्थान के चूरू जिले के सालासर थाना क्षेत्र में बीती रात लकड़ियों से भरा ट्रक बाइक पर पलट गया जिससे बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गयी । पुलिस ने इसकी जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि पार्वतीसर पुलिया के पास एक ट्रक अनियंत्रित होकर बाइक के ऊपर पलट गया जिससे बाइक सवार शाहरुख खान (22), सोयल (20), और सद्दाम (18) की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि शाहरुख खान और सद्दाम की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि सोयल ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद ट्रक चालक फरार हो गया। ट्रक को जब्त कर फरार चालक की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिये गये।
- प्रतापगढ़ . उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के चिलबिला स्टेशन के प्लेटफार्म के निकट रविवार की सुबह ट्रेन से कटा हुआ एक युवक-युवती का शव बरामद किया गया, जो प्रेमी-प्रेमिका बताये गए हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी। नगर पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) शिव नारायण वैस ने रविवार को बताया कि चिलबिला रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म के निकट रविवार की सुबह ट्रेन से कटा हुआ युवक एवं युवती का शव बरामद किया गया, जिनकी पहचान राजेंद्र सरोज (28) निवासी बड़ागांव थाना संग्रामपुर जिला अमेठी व ममता सरोज (22) निवासी पिचूरा थाना सांगीपुर जिला प्रतापगढ़ के रूप में की गयी। सीओ ने पुलिस छानबीन के आधार पर बताया कि दोनों प्रेमी प्रेमिका थे, जिन्होंने ट्रेन से कटकर आत्महत्या की है l ममता दर्शन करने और राजेंद्र पुलिस में भर्ती के बहाने घर से निकले थे, स्टेशन पर लोगों ने दोनों को घूमते देखा भी था l उन्होंने बताया कि जीआरपी ने दोनों शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की छानबीन की जा रही है।

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