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नई दिल्ली। मरम्मत कार्य के लिए केदारनाथ हेलीपैड से गौचर हवाई पट्टी तक रक्षा बलों के MI-19 हेलीकॉप्टर के द्वारा लाया जा रहा एक अन्य खराब हेलीकॉप्टर बीच हवा में रस्सी टूटने के कारण शनिवार सुबह केदारनाथ के पास पहाड़ियों में जा गिरा। घटना में अभी किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
इस दुर्घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। हेलिकॉप्टर का संचालन एक निजी कंपनी द्वारा किया जाता था। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने कहा कि इलाके में टीमें तैनात कर दी गई हैं और फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है।खराब हेलीकॉप्टर के वजन और हवा के बहाव के कारण MI-17 का संतुलन बिगड़ाजिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे के मुताबिक, खराब हेलीकॉप्टर के वजन और हवा के बहाव के कारण MI-17 हेलिकॉप्टर का संतुलन बिगड़ने लगा था। राहुल चौबे ने कहा, “शनिवार को हेलीकॉप्टर को मरम्मत के लिए MI-17 हेलीकॉप्टर की मदद से गौचर हवाई पट्टी पर ले जाने की योजना थी। जैसे ही हेलीकॉप्टर ने थोड़ी दूरी तय की, खराब हेलीकॉप्टर के वजन और हवा के बहाव के कारण MI-17 संतुलन खोने लगा। जिसके कारण हेलीकॉप्टर को थारू शिविर के पास उतारना पड़ा, हेलीकॉप्टर पर कोई यात्री या सामान नहीं था। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंच गया।”SDRF के अनुसार, “आज SDFR बचाव दल को पुलिस चौकी लिनचोली के माध्यम से सूचना मिली कि एक निजी कंपनी का खराब हेलीकॉप्टर, जिसे श्री केदारनाथ हेलीपैड से दूसरे हेलीकॉप्टर द्वारा खींचकर गोचर हेलीपैड ले जाया जा रहा था। थारू कैंप के पास लिनचोली में नदी में गिर गया है। SDRF टीम मौके पर पहुंच गई है और राहत कार्य जारी है। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में त्वरित न्याय की आवश्यकता पर जोर देते हुए शनिवार को कहा कि इससे महिलाओं में अपनी सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ेगा। मोदी ने कहा कि न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक माना जाता है और उच्चतम न्यायालय एवं न्यायपालिका ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।उन्होंने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की उपस्थिति में जिला न्यायपालिका के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के लोगों ने उच्चतम न्यायालय या न्यायपालिका के प्रति कभी कोई अविश्वास नहीं दिखाया। प्रधानमंत्री ने आपातकाल लागू किए जाने को एक ‘‘काला’’ दौर बताते हुए कहा कि न्यायपालिका ने मौलिक अधिकारों को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर कहा कि न्यायपालिका ने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा की है। कोलकाता में एक महिला चिकित्सक से बलात्कार एवं उसकी हत्या और ठाणे के एक स्कूल में दो बच्चियों के यौन उत्पीड़न के मामलों की पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और बच्चों की सुरक्षा समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों में जितनी तेजी से न्याय मिलेगा, आधी आबादी को अपनी सुरक्षा को लेकर उतना ही अधिक भरोसा होगा।’’ मोदी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए कई कड़े कानून हैं और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। -
मुंबई। मुंबई पुलिस की एक महिला कांस्टेबल की यहां एक निजी अस्पताल में कान की ‘सर्जरी' लिए ‘एनेस्थीसिया' दिए जाने के बाद उत्पन्न दिक्कतों के चलते मौत हो गई। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि कांस्टेबल गौरी सुभाष पाटिल (28) को अंधेरी के पश्चिमी उपनगर लोखंडवाला के एक्सिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि पाटिल को कान की ‘सर्जरी' से पहले ‘एनेस्थीसिया' दिया गया जिसके बाद उन्हें दिक्कत उत्पन्न हो गईं और बृहस्पतिवार रात उनकी मृत्यु हो गई। अधिकारी ने बताया कि मौत की सूचना पुलिस को रात करीब 10:45 बजे मिली। अधिकारी के अनुसार मौत का कारण पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि अंबोली पुलिस थाने में दुर्घटनावश मौत का एक मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है। पाटिल अंधेरी के मरोल में मुंबई पुलिस के स्थानीय शस्त्र प्रभाग में तैनात थीं।
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नयी दिल्ली । गत कुछ महीनों से बिना अध्यक्ष कार्य कर रहे 22वें विधि आयोग का कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो रहा है। लेकिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर आयोग द्वारा अहम रिपोर्ट तैयार करने का कार्य जारी है। आयोग की कार्य प्रणाली की जानकारी रखने वाले व्यक्तियों ने बताया कि देश में एक साथ चुनाव कराने के संबंध में विधि आयोग की रिपोर्ट तैयार है और इसे विधि मंत्रालय को सौंपा जाना है। उन्होंने बताया कि आयोग का अध्यक्ष नहीं होने की वजह से रिपोर्ट सौंपी नहीं जा सकती। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रितु राज अवस्थी 22वें विधि आयोग के अध्यक्ष थे जिन्हें कुछ महीने पहले भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था लोकपाल का सदस्य नियुक्त किया गया था। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने मार्च में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर एक रिपोर्ट सौंपी थी। निवर्तमान आयोग ने पिछले वर्ष समान नागरिक संहिता पर नए सिरे से विचार-विमर्श शुरू किया था। समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव प्राप्त करने के बाद, जब रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया जा रहा था, तभी न्यायमूर्ति अवस्थी को लोकपाल नियुक्त कर दिया गया। इसी महीने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से दिए भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समान नागरिक संहिता के लिए नए सिरे से जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के लिए ‘‘धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता'' समय की मांग है। प्रधानमंत्री ने मौजूदा कानूनों को ‘‘सांप्रदायिक नागरिक संहिता'' करार देते हुए उन्हें भेदभावपूर्ण बताया था। मोदी ने कहा था कि ऐसे कानून जो देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटते हैं और असमानता का कारण बनते हैं, उनके लिए आधुनिक समाज में कोई जगह नहीं है। राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। समान नागरिक संहिता भाजपा के चुनावी घोषणापत्रों में प्रमुख मुद्दा रहा है।
सरकार ने 22वें विधि आयोग का गठन 21 फरवरी, 2020 को तीन वर्ष की अवधि के लिए किया था और न्यायमूर्ति अवस्थी ने नौ नवंबर, 2022 को अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2023 में 22वें विधि आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया था। -
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत स्तर पर विभिन्न कदम उठा रही है। मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में 31 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ है। ‘एंजल टैक्स' को समाप्त करना भी इस क्षेत्र की वृद्धि की दिशा में एक कदम है। उन्होंने नियामकों से साइबर धोखाधड़ी की जांच के लिए अतिरिक्त उपाय करने को कहा, जिसका स्टार्टअप पर बुरा असर हो सकता है। एंजल कर (30 प्रतिशत से अधिक की दर से आयकर) का मतलब वह आयकर है जो सरकार गैर-सूचीबद्ध कंपनियों या स्टार्टअप द्वारा जुटाई गई धनराशि पर लगाती है...यदि उनका मूल्यांकन कंपनी के उचित बाजार मूल्य से अधिक है। प्रधानमंत्री पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2024 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नियामकों से साइबर धोखाधड़ी रोकने तथा लोगों की डिजिटल समझ बढ़ाने के लिए और कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘ वित्तीय सेवाओं के लोकतंत्रीकरण में वित्तीय प्रौद्योगिकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।'' मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि इससे भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीयों द्वारा वित्तीय प्रौद्योगिकी को जितनी तेजी से तथा जिस व्यापक स्तर पर अपनाया गया है...दुनिया में कहीं ऐसा देखने को नहीं मिला। मोदी ने कहा कि भारत में वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र द्वारा लाया गया बदलाव केवल प्रौद्योगिकी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक प्रभाव दूरगामी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वित्तीय प्रौद्योगिकी ने समानांतर अर्थव्यवस्था को चोट दी और यह वित्तीय सेवाओं के मोर्चे पर गांवों तथा शहरों के बीच की खाई को पाट रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने 31 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया है और ‘फिनटेक' स्टार्टअप में 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार फिनटेक क्षेत्र की सहायता के लिए नीतिगत स्तर पर सभी आवश्यक बदलाव कर रही है और उन्होंने एंजल टैक्स को खत्म करने, देश में शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये आवंटित करने और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम को लागू करने का उदाहरण दिया। मोटे तौर पर, फिनटेक का मतलब वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने वाली संस्थाओं से है। साइबर धोखाधड़ी को समाप्त करने की आवश्यकता व्यक्त करते हुए उन्होंने नियामकों से डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल करने का आग्रह किया। मोदी ने कहा कि यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि साइबर धोखाधड़ी देश में फिनटेक और स्टार्टअप के विकास के रास्ते में न आए। अपने भाषण में, प्रधानमंत्री ने दुनिया के लिए समानांतर अर्थव्यवस्था के खतरों के बारे में भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि फिनटेक ने ऐसी प्रणाली को खत्म करने में एक प्रभावशाली भूमिका निभाई है और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में त्योहारों का मौसम है, अर्थव्यवस्था तथा बाजारों में भी उत्सव का माहौल है।
उनका स्पष्ट इशारा मजबूत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि तथा पूंजी बाजार के नई ऊंचाइयों पर पहुंचने की ओर था। मोदी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बताया कि ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना' के तहत 27 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए गए हैं। ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना' विश्व की सबसे बड़ी लघु वित्त योजना है। मोदी ने आगे कहा कि जन धन, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति ने 'नकदी ही राजा है' की मानसिकता को तोड़ दिया है और दुनिया में होने वाले लगभग आधे डिजिटल लेन-देन भारत में होने का रास्ता बना दिया है। उन्होंने कहा, ''भारत का यूपीआई दुनिया में फिनटेक का एक प्रमुख उदाहरण बन गया है।''
उन्होंने कहा कि इसने हर मौसम में हर गांव और शहर में बैंकिंग सेवाओं को सक्षम किया है।
उन्होंने कहा कि फिनटेक ने ऋण तक पहुंच को आसान और समावेशी बना दिया है। मोदी ने पीएम स्वनिधि योजना का उदाहरण दिया, जिसने स्ट्रीट वेंडरों को गिरवी मुक्त ऋण पाने और डिजिटल लेनदेन की मदद से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस कार्यक्रम में कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकियां वित्तीय समावेश का विस्तार करने, दक्षता में सुधार लाने और देश भर में वास्तविक समय में सेवाएं सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण रही हैं। दास ने कहा, ‘‘ आज भारत डिजिटल भुगतान में वैश्विक नेता के रूप में खड़ा है, यह उपलब्धि सक्रिय नीति निर्माण को नवाचार तथा प्रौद्योगिकी प्रगति के साथ जोड़कर हासिल की गई है। नीति निर्माताओं, नियामकों और नवप्रवर्तकों के बीच सहयोग भारत की वित्तीय प्रौद्योगिकी यात्रा को परिभाषित करता है। -
नासिक। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के सिंधुदुर्ग जिले में राजकोट किले में ढही प्रतिमा के स्थान पर छत्रपति शिवाजी महाराज की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।सिंधुदुर्ग जिले की मालवण तहसील में राजकोट किले में 17वीं सदी के मराठा योद्धा की प्रतिमा 26 अगस्त को ढह गयी थी।
विपक्ष ने इस घटना की तीखी आलोचना की थी और दावा किया था कि इस घटना से महाराष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंची है। शिंदे ने कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज एक 'युगपुरुष' हैं। वह राज्य और राष्ट्र के गौरव हैं। राजकोट किले की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। महाराष्ट्र सरकार और नौसेना द्वारा जल्द ही वहां फिर से एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जायेगी।"वह यहां नंदगांव में विकसित की जा रही 'शिवसृष्टि' परियोजना के प्रथम चरण का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस परियोजना को नंदगांव शहर के विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि उनकी सरकार नगर परिषद की नयी इमारत के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये देगी। -
पालघर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र के तटीय सिंधुदुर्ग जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढहने को लेकर भारत के इस वीर सपूत के साथ ही, इस घटना से आहत लोगों से भी शुक्रवार को माफी मांगी।महाराष्ट्र के पालघर जिले में 76,000 करोड़ रुपये की लागत वाली वधावन बंदरगाह परियोजना की आधारशिला रखने के बाद मोदी ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज... मेरे लिए सिर्फ नाम नहीं हैं, हमारे लिए छत्रपति शिवाजी महाराज आराध्य देव हैं। पिछले दिनों सिंधुदुर्ग में जो हुआ, आज मैं सिर झुकाकर मेरे आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज जी के चरणों में मस्तक रखकर माफी मांगता हूं।”उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संस्कार अलग हैं। हम वह लोग नहीं हैं जो आए दिन भारत मां के महान सपूत, इसी धरती के लाल वीर सावरकर को अनाप-शनाप गालियां देते रहते हैं, अपमानित करते रहते हैं, देशभक्तों की भावनाओं को कुचलते हैं।’’उन्होंने कहा कि वे लोग वीर सावरकर को गालियां देने के बाद भी माफी मांगने को तैयार नहीं हैं और ना ही उनको कोई पश्चाताप होता है।
विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र की जनता उनके संस्कार को अब जान गई है।’’उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही मैं यहां उतरा, मैंने सबसे पहले शिवाजी से प्रतिमा गिरने की घटना के लिए माफी मांगी। मैं उन लोगों से भी माफी मांगता हूं जो इससे आहत हुए हैं।’’
मोदी ने पिछले साल दिसंबर में सिंधुदुर्ग जिले में नौसेना दिवस समारोह के दौरान प्रतिमा का अनावरण किया था। प्रतिमा का उद्देश्य समुद्री रक्षा के प्रति छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का सम्मान करना था।राज्य सरकार ने घोषणा की है कि राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों वाली नौसेना की अध्यक्षता में एक संयुक्त तकनीकी समिति सोमवार को मूर्ति गिरने के कारणों की जांच करेगी।मोदी ने कहा कि विकसित महाराष्ट्र, विकसित भारत के संकल्प का एक अनिवार्य हिस्सा है।उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए पिछले 10 वर्षों में हमने महाराष्ट्र की प्रगति के लिए लगातार बड़े फैसले लिए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य और पूरे देश को महाराष्ट्र की क्षमताओं का लाभ मिले, वधावन बंदरगाह की आधारशिला आज रखी गई है।’’मोदी ने कहा कि जब उन्हें भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया तो वह शिवाजी के तत्कालीन राज्य की राजधानी रायगढ़ गए और मराठा सम्राट की समाधि के सामने उन्होंने ध्यान लगाया था।सिंधुदुर्ग जिले की मालवण तहसील में राजकोट किले में स्थापित मराठा योद्धा की प्रतिमा गिरने के बाद मोदी की यह पहली टिप्पणी है।
प्रतिमा गिरने की घटना पर राज्य भर के लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया है। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए उस पर शिवाजी महाराज का अपमान करने का आरोप लगाया।मोदी ने कहा कि उनकी सरकार तटीय गांवों के विकास पर अधिक ध्यान दे रही है।उन्होंने कहा कि क्षमता बढ़ाने के लिए मछुआरा सहकारी समितियों को भी मजबूत किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकारों ने पिछड़े वर्गों के कल्याण और वंचितों के सशक्तीकरण के लिए पूरे समर्पण और ईमानदारी से काम किया है।प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने और निरंतर प्रयासों के माध्यम से राष्ट्र में समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मछली उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है।’’उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से हमने हजारों महिलाओं को सशक्त बनाया है, जिससे वे इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।’’मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है।उन्होंने कहा कि 2014 में, देश का मछली उत्पादन केवल 80 लाख टन था, लेकिन अब भारत लगभग 170 लाख टन मछली का उत्पादन करता है।
मोदी ने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि केवल 10 वर्षों में, हमने मछली उत्पादन को दोगुना कर दिया है।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने वधावन परियोजना के लिए 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह देश का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह होगा।’’मोदी ने 1,560 करोड़ रुपये की 218 मत्स्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।मोदी ने कहा कि तटों की वजह से महाराष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय व्यापार से सदियों पुराना संबंध है।उन्होंने कहा, ‘‘प्रगति की दिशा में भारत की यात्रा में आज एक ऐतिहासिक दिन है। 'नया भारत' अपनी ताकत जानता है और गुलामी की बेड़ियों को पीछे छोड़ चुका है।’’
इस परियोजना का उद्देश्य एक विश्व स्तरीय समुद्री प्रवेश द्वार स्थापित करना है, जो बड़े कंटेनर जहाजों की ज़रूरतों को पूरा करते हुए, समुद्र के तटीय तल को गहरा बनाकर तथा अति विशाल मालवाहक जहाजों को समायोजित करके देश के व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।पालघर जिले के दहानू शहर के पास स्थित वधावन बंदरगाह भारत के सबसे बड़े गहरे पानी के बंदरगाहों में से एक होगा। यह अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों को सीधा संपर्क प्रदान करेगा, जिससे पारगमन समय और लागत कम होगी।एक बार चालू होने के बाद, यह बंदरगाह भारत की समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा और वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लगभग 360 करोड़ रुपये की लागत से पोत संचार और सहायता प्रणाली के नेशनल रोल आउट की शुरुआत भी की। इस परियोजना के तहत, 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मशीनीकृत और मोटर चालित मछली पकड़ने वाले जहाजों पर चरणबद्ध तरीके से एक लाख ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे। -
रांची। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को रांची में एक पार्टी समारोह में झारंखड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का भाजपा में स्वागत किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि टाइगर जिंदा है।
चंपई को 'कोल्हान का टाइगर' के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने झारखंड आंदोलन के दौरान झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन के साथ सक्रिय रूप से योगदान दिया था। झामुमो के पूर्व नेता ने शुक्रवार को भाजपा का दामन थाम लिया। दो दिन पहले उन्होंने झामुमो से इस्तीफा दिया था। जिसमें उन्होंने पार्टी की मौजूदा कार्यशैली पर असंतोष जताया था।
चौहान ने कहा, चंपई सोरेन ने झारखंड के निर्माण के लिए बहुत कठिन लड़ाई लड़ी थी और उनके प्रयासों की वजह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्य का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि चंपई ने झामुमो को एक माली की तरह संभाला। लेकिन उन्हें सौतेले व्यवहार का सामना करना पड़ा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, जब चंपई झारखंड के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बिचौलियों के खिलाफ कड़े फैसले लिए। इससे झामुमो नाराज हो गाया और उन्होंने उनका अपमान करना शुरू कर दिया। चंपई झारखंड को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा और चंपई ने यह संकल्प लिया है कि झारखंड और इसके लोगों का अपमान नहीं होने देंगे।
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि चंपई सोरने को उनके ही राज्य की सरकार ने छह महीने तक निगरानी में रखा। सरमा ने कहा कि झामु-गठबंधन को दो महीने में एक कड़ा जवाब मिलेगा। झारखंड विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के सह-प्रभारी सरमा ने कहा, चंपई सोरने को झारखंड पुलिस ने छह महीने तक निगरानी में रखा। मैंने कभी किसी मुख्यमंत्री के बारे में ऐसा नहीं सुना। मैं चेतावनी देता हूं (मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन), हम दो महीने एक कड़ी प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट हेमंत सोरेन सरकार ने चंपई सोरेन जैसे बड़े नेता को भी नहीं बख्शा, जो झामुमो प्रमुख शिभू सोरेन के करीबी सहयोग थे। सरमा ने कहा, 1937 में जब मुस्लिम लीग असम में शासन कर रही थी और सर सैयद सादुल्ला मुख्यमंत्री थे, उन्होने हर शुक्रवार को जुम्मा की नमाज के लिए दो घंटे का ब्रेक तय किया था। आज हमारे विधायकों ने फैसला लिया है कि हमें विधानसभा में काम करने के लिए आना है। इसलिए हम दो घंटे का ब्रेक नहीं चाहते। हमारे विधानसभा नियम समिति में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य भी हैं, इसलिए यह फैसला सबने मिलकर लिया है। यह मेरा व्यक्तिगत फैसला नहीं है, यह विधानसभा का निर्णय है। - नयी दिल्ली. परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल से लैस पनडुब्बी 'आईएनएस अरिघात' को बृहस्पतिवार को विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में नौसेना में शामिल किया गया। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि इससे देश की परमाणु क्षमता को और मजबूती मिलेगी तथा परमाणु प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘अरिघात' भूमि, जल और वायु ‘प्लेटफॉर्म' पर परमाणु हथियारों संबंधी भारत की सैन्य रणनीति को और मजबूत करेगा, परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा, क्षेत्र में सामरिक संतुलन और शांति स्थापित करने में मदद करेगा तथा देश की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। आईएनएस अरिघात के जलावतरण को भारत की नौसैनिक शक्ति और परमाणु प्रतिरोध क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। भारत की पहली स्वदेश निर्मित परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत की परियोजना जुलाई 2009 में शुरू की गयी थी।
- नयी दिल्ली । किसान आंदोलन पर विवादास्पद टिप्पणी के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से हिदायत मिलने के कुछ दिनों बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद कंगना रनौत ने गुरुवार को यहां राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की। अपनी टिप्पणी को लेकर विवाद होने के बाद यह यह दूसरा मौका है जब रनौत ने भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात की। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के साथ विवाद खड़ा कर दिया था। कंगना ने एक साक्षात्कार में कथित तौर पर कहा था कि पंजाब में किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रवी हिंसा फैला रहे थे और वहां बलात्कार तथा हत्याएं हो रही थीं। इस साक्षात्कार की एक क्लिप ‘एक्स' पर भी उन्होंने साझा किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि अगर देश का नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो भारत में भी ‘बांग्लादेश जैसी स्थिति' पैदा हो सकती थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसानों के प्रदर्शन के दौरान ‘‘लाशें लटकी थी और दुष्कर्म की घटनाएं हो रही थीं।'' उन्होंने ‘‘षड्यंत्र'' में चीन और अमेरिका के शामिल होने का आरोप लगाया। उनकी इस टिप्पणी पर विवाद होने के बाद भाजपा ने रनौत के बयान से असहमति जताते हुए किनारा कर लिया था। पार्टी ने मंडी की सांसद को हिदायत भी दी कि वह इस प्रकार के कोई बयान भविष्य में न दें। इसके बाद, कांग्रेस ने हमलावर रुख अख्तियार करते हुए सत्तारूढ़ पार्टी से कहा था कि यदि वह वास्तव में रनौत के विचारों से असहमत है तो उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए।
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नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी और महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में 29 अगस्त का दिन हर साल राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘राष्ट्रीय खेल दिवस पर बधाइयां। आज के दिन हम मेजर ध्यानचंद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह उन सभी को बधाई देने का अवसर है जो खेलों के प्रति जुनूनी हैं और जिन्होंने भारत के लिए खेला है। हमारी सरकार खेलों का समर्थन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि अधिक से अधिक युवा खेलने और चमकने में सक्षम हों।
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नयी दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का निदेशक मंडल पांच सितंबर को 1:1 ‘बोनस शेयर' जारी करने पर विचार करेगा। कंपनी ने गुरुवार को शेयर बाजार को यह जानकारी दी। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस ने आखिरी बार सितंबर 2017 में ‘बोनस शेयर' जारी किए थे। कंपनी सूचना के अनुसार, ‘‘ कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक गुरुवार को पांच सितंबर 2024 को होनी है, जिसमें शेयरधारकों को उनके अनुमोदन के लिए विचार करने तथा सिफारिश करने, ‘रिजर्व' के पूंजीकरण द्वारा कंपनी के शेयरधारकों को 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने की सिफारिश की जाएगी। '' रिलायंस ने इससे पहले 2017 और 2009 में 1:1 के अनुमात से बोनस शेयर जारी किए हैं।
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नयी दिल्ली। खेलमंत्री मनसुख मांडविया और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान जफर इकबाल ने गुरुवार को राष्ट्रीय खेल दिवस पर यहां मेजर ध्यान चंद को श्रृद्धांजलि दी । स्वतंत्रता पूर्व लगातार तीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद का जन्मदिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है । मांडविया ने यहां नेशनल स्टेडियम पर ध्यान चंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये ।उन्होंने कहा ,‘‘ राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर हम मेजर ध्यान चंद को उनकी जयंती पर श्रृद्धा सुमन अर्पित करते हैं । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा है कि जो खेलेगा, वह खिलेगा ।'' उन्होंने कहा ,‘‘ देश के नागरिकों को फिट और स्वस्थ रहना है ताकि स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें । ऐसा समाज राष्ट्र निर्माण में मदद करता है । हमें 2047 तक विकसित भारत बनाना है जिसमें सभी नागरिक स्वस्थ हों ।'' उन्होंने कहा ,‘‘ स्वस्थ रहने के लिये खेलना जरूरी है । हर किसी को एक घंटे अपनी पसंद का खेल खेलना चाहिये । मैं भी अपना पसंदीदा खेल फुटबॉल खेलूंगा ।'' जफर इकबाल ने पेरिस ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन पर प्रसन्नता जताते हुए कहा ,‘‘ हमें खेलों के उत्थान के लिये काफी मेहनत करनी है । पेरिस ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है ।'' उन्होंने कहा ,‘‘ हम बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं । देश में खेल संस्कृति पैदा हो रही है जो बड़ी उपलब्धि है । सरकार खेलों पर काफी पैसा खर्च कर रही है । मुझे उम्मीद है कि भविष्य में प्रदर्शन और अच्छा होगा ।'' उन्होंने लगातार दूसरे ओलंपिक में कांस्य जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम की तारीफ करते हुए कहा ,‘‘ यह हमारे लिये स्वर्ण पदक की तरह है । इससे युवाओं को हॉकी खेलने की प्रेरणा मिलेगी ।अब पी आर श्रीजेश टीम में नहीं है लेकिन हमें उनके जैसा गोलकीपर तैयार करना होगा ।
- नयी दिल्ली. भारत में छात्र आत्महत्या की घटनाएं चिंताजनक वार्षिक दर से बढ़ी हैं, जो जनसंख्या वृद्धि दर और समग्र आत्महत्या प्रवृत्तियों से भी अधिक है। एक नयी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर, “छात्र आत्महत्या: भारत में फैलती महामारी” रिपोर्ट बुधवार को वार्षिक आईसी3 सम्मेलन और एक्सपो 2024 में जारी की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां आत्महत्या की घटनाओं की संख्या में प्रतिवर्ष दो प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि छात्र आत्महत्या के मामलों की “कम रिपोर्टिंग” होने की संभावना है। आईसी3 इंस्टीट्यूट द्वारा संकलित रिपोर्ट में कहा गया, “पिछले दो दशकों में, छात्र आत्महत्या की घटनाओं में चार प्रतिशत की खतरनाक वार्षिक दर से वृद्धि हुई है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। 2022 में, कुल छात्र आत्महत्या के मामलों में 53 प्रतिशत पुरुष छात्रों ने खुदकुशी की। 2021 और 2022 के बीच, छात्रों की आत्महत्या में छह प्रतिशत की कमी आई जबकि छात्राओं की आत्महत्या में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई।” इसमें कहा गया, “छात्र आत्महत्या की घटनाएं जनसंख्या वृद्धि दर और समग्र आत्महत्या प्रवृत्तियों दोनों को पार करती जा रही हैं। पिछले दशक में, जबकि 0-24 वर्ष की आयुवर्ग आबादी 58.2 करोड़ से घटकर 58.1 करोड़ हो गई, वहीं छात्र आत्महत्याओं की संख्या 6,654 से बढ़कर 13,044 हो गई।” आईसी3 संस्थान एक स्वयंसेवी आधारित संगठन है जो दुनिया भर के उच्च विद्यालयों को उनके प्रशासकों, शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण संसाधनों के माध्यम से सहायता प्रदान करता है ताकि मजबूत करियर और कॉलेज परामर्श विभागों की स्थापना और रखरखाव में मदद मिल सके। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश को सबसे अधिक छात्र आत्महत्या वाले राज्यों के रूप में पहचाना गया है, जो कुल मिलाकर राष्ट्रीय स्तर का एक तिहाई है। दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामूहिक रूप से ऐसे मामलों की संख्या 29 प्रतिशत है, जबकि अपने उच्च शैक्षणिक वातावरण के लिए जाना जाने वाला राजस्थान 10वें स्थान पर है, जो कोटा जैसे कोचिंग केंद्रों से जुड़े गहन दबाव को दर्शाता है। ‘आईसी3 मूवमेंट' के संस्थापक गणेश कोहली ने कहा कि यह रिपोर्ट हमारे शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
- भावनगर. गुजरात के अमरेली जिले में बुधवार तड़के एक मालगाड़ी के लोको पायलट ने समय रहते आपातकालीन ब्रेक लगाकर पांच शेरों की जान बचाई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पश्चिमी रेलवे के भावनगर मंडल ने एक विज्ञप्ति में बताया कि यह घटना तड़के करीब साढ़े चार बजे गिर वन के पीपावाव-राजुला खंड पर हुई। विज्ञप्ति में कहा गया है कि लोको पायलट भूपेंद्र मीणा को पटरी पर पांच एशियाई शेरों की मौजूदगी होने के बारे में वन विभाग के कर्मियों ने टॉर्च से संकेत देकर सतर्क किया। विज्ञप्ति के अनुसार, लोको पायलट ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर मालगाड़ी रोक दी। शेरों के पटरी से हटने के बाद मालगाड़ी अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गई।
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पटना. बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने बुधवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 14 अधिकारियों का तबादला कर दिया । बिहार सरकार की ओर से बुधवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार 11 आईएएस अधिकारियों को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) में पदस्थापन की प्रतिक्षा में सूची में डाला गया है। बिहार में स्थानांतरित किए गए अधिकांश आईएएस अधिकारी 2019 और 2020 बैच के अधिकारी हैं।
जीएडी द्वारा जारी बुधवार की शाम जारी उक्त अधिसूचना के अनुसार सुमित कुमार (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में सारण के नगर आयुक्त का प्रभार संभाल रहे हैं, को बेतिया का नया उप विकास आयुक्त (डीडीसी) नियुक्त किया गया है। प्रीति (2019 बैच की आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में डीडीसी (खगड़िया) के पद पर तैनात हैं, को भागलपुर का नया नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है जबकि नवीन कुमार (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर के पद पर तैनात हैं को गया का नया डीडीसी नियुक्त किया गया है। अधिसूचना के अनुसार यतेंद्र कुमार पाल (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में नगर आयुक्त रोहतास के पद पर तैनात हैं, को डीडीसी, सारण नियुक्त किया गया है। विक्रम वीरकर (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) डीडीसी, आरा को मुजफ्फरपुर का नया नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसी तरह प्रियंका रानी (2019 बैच की आईएएस अधिकारी) जो कि वर्तमान में डीडीसी, सारण के पद पर तैनात थीं, को नवादा का नया डीडीसी नियुक्त किया गया है। दीपक कुमार मिश्रा (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) जो वर्तमान में डीडीसी, नवादा के पद पर कार्यरत हैं, को नगर आयुक्त, नालंदा नियुक्त किया गया है। श्रेष्ठ अनुपम (2020 बैच के आईएएस अधिकारी) को मुजफ्फरपुर का नया डीडीसी नियुक्त किया गया है।ग्यारह आईएएस अधिकारी, जिन्हें उनके प्रभार से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया है, नई तैनाती का इंतजार करेंगे। - -भारत जल्द ही स्वर्णिम चतुर्भुज के आधार पर औद्योगिक स्मार्ट शहरों की एक भव्य श्रृंखला स्थापित करेगा-सरकार ने भारत के औद्योगिक परिदृश्य में क्रांति लाने के लिए 28,602 करोड़ रुपये की 12 परियोजनाओं को हरी झंडी दी-'प्लग-एन-प्ले' और 'वॉक-टू-वर्क' अवधारणाओं के साथ मांग से पहले विश्व स्तरीय ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों का निर्माण किया जाएगा-निवेश और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए मजबूत, टिकाऊ बुनियादी ढांचा-विकसित भारत के विजन के अनुरूप, ये परियोजनाएं निवेशकों के लिए उपलब्ध भूमि के साथ वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करेंगीनई दिल्ली। भारत जल्द ही औद्योगिक स्मार्ट शहरों की एक भव्य श्रृंखला स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय में, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के तहत 28,602 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 12 नए परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। यह कदम देश के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार है, जिससे औद्योगिक नोड्स और शहरों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार होगा जो आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा।10 राज्यों में फैले और रणनीतिक रूप से नियोजित 6 प्रमुख गलियारों के साथ ये परियोजनाएं भारत की विनिर्माण क्षमताओं और आर्थिक विकास को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग लगाएंगी। ये औद्योगिक क्षेत्र उत्तराखंड में खुरपिया, पंजाब में राजपुरा-पटियाला, महाराष्ट्र में दिघी, केरल में पलक्कड़, उत्तर प्रदेश में आगरा और प्रयागराज, बिहार में गया, तेलंगाना में जहीराबाद, आंध्र प्रदेश में ओरवाकल और कोप्पर्थी और राजस्थान में जोधपुर-पाली में स्थित हैं।मुख्य विशेषताएं:रणनीतिक निवेश: एनआईसीडीपी को बड़े एंकर उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) दोनों से निवेश की सुविधा प्रदान करके एक जीवंत औद्योगिक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। ये औद्योगिक नोड 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेंगे, जो सरकार के आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भारत के विजन को दर्शाता है।स्मार्ट शहर और आधुनिक बुनियादी ढांचा: नए औद्योगिक शहरों को वैश्विक मानकों के ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिन्हें 'प्लग-एन-प्ले' और 'वॉक-टू-वर्क' अवधारणाओं पर "मांग से पहले" बनाया जाएगा। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि शहर उन्नत बुनियादी ढांचे से लैस हों जो टिकाऊ और कुशल औद्योगिक कार्यों का समर्थन करते हैं।पीएम गतिशक्ति पर क्षेत्रीय दृष्टिकोण: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप परियोजनाओं में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचा होगा, जो लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा। औद्योगिक शहरों को पूरे क्षेत्र के परिवर्तन के लिए विकास केन्द्र बनाने की परिकल्पना की गई है।एक 'विकसित भारत' का विजन:इन परियोजनाओं की मंजूरी 'विकसित भारत' - एक विकसित भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक कदम है। वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (जीवीसी) में भारत को एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करके, एनआईसीडीपी आवंटन के लिए तत्काल उपलब्ध उन्नत विकसित भूमि प्रदान करेगा, जिससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करना आसान हो जाएगा। यह एक 'आत्मनिर्भर भारत' या स्वालंबी भारत बनाने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है, जो बढ़े हुए औद्योगिक उत्पादन और रोजगार के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।आर्थिक प्रभाव और रोजगार सृजन:एनआईसीडीपी से महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिसमें अनुमानित 1 मिलियन प्रत्यक्ष नौकरियां और नियोजित औद्योगीकरण के माध्यम से 3 मिलियन तक अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इससे न केवल आजीविका के अवसर उपलब्ध होंगे, बल्कि उन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में भी योगदान मिलेगा जहां ये परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।स्थायी विकास के प्रति प्रतिबद्धता:एनआईसीडीपी के तहत परियोजनाओं को स्थायित्व पर ध्यान केन्द्रित करते हुए तैयार किया गया है, जिसमें पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए आईसीटी-सक्षम उपयोगिताओं और हरित प्रौद्योगिकियों को शामिल किया गया है। गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और टिकाऊ बुनियादी ढांचा प्रदान करके, सरकार का लक्ष्य ऐसे औद्योगिक शहर बनाना है जो न केवल आर्थिक गतिविधि के केंद्र हों, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के मॉडल भी हों।एनआईसीडीपी के तहत 12 नए औद्योगिक नोड्स की स्वीकृति भारत की वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एकीकृत विकास, टिकाऊ बुनियादी ढाँचे और निर्बाध कनेक्टिविटी पर रणनीतिक ध्यान देने के साथ, ये परियोजनाएं भारत के औद्योगिक परिदृश्य को फिर से परिभाषित करने और आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए तैयार हैं।इन नई मंजूरियों के अलावा, एनआईसीडीपी ने पहले ही चार परियोजनाओं को पूरा होते देखा है, और चार अन्य वर्तमान में कार्यान्वयन के अधीन हैं। यह निरंतर प्रगति भारत के औद्योगिक क्षेत्र को बदलने और एक जीवंत, टिकाऊ और समावेशी आर्थिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- -परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग 6,456 करोड़ रुपये है और इसे 2028-29 तक पूरा किया जाएगा-इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान लगभग 114 (एक सौ चौदह) लाख मानव दिवसों का रोजगार पैदा होगानई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने रेल मंत्रालय की लगभग 6,456 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।कैबिनेट ने झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के 7 जिलों को कवर करने वाली रेल मंत्रालय की 3 परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत 6,456 करोड़ रुपये है।इन परियोजनाओं से दूर-दराज़ के इलाकों को आपस में जोड़कर लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार लाने, मौजूदा लाइन क्षमता बढ़ाने और परिवहन नेटवर्क का विस्तार करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा जिससे तेजी से आर्थिक विकास होगा।नई लाइन के प्रस्तावों से सीधी कनेक्टिविटी बनेगी और आवागमन में सुधार होगा, तथा भारतीय रेलवे की दक्षता और सेवा संबंधी विश्वसनीयता बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को आसान बनाएगा और भीड़भाड़ को कम करेगा, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त खंडों पर बेहद जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की नए भारत की परिकल्पना के अनुरूप हैं, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विकास होगा और लोगों को "आत्मनिर्भर" बनाया जा सकेगा और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का परिणाम हैं, जो एकीकृत योजना तैयार किए जाने से संभव हुआ है और यह लोगों, वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे 4 राज्यों के 7 जिलों में लागू की जाने वाली तीन परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 300 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी।इन परियोजनाओं के साथ 14 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे दो आकांक्षी जिलों (नुआपाड़ा और पूर्वी सिंहभूम) को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। नई लाइन परियोजनाओं से लगभग 1,300 गांवों और लगभग 11 लाख लोगों को कनेक्टिविटी मिलेगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 1,300 गांवों और लगभग 19 लाख लोगों को कनेक्टिविटी मिलेगी।ये मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 45 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल एवं ऊर्जा कुशल परिवहन साधन है और इससे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने, तेल आयात (10 करोड़ लीटर) को कम करने और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (240 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद मिलेगी, जो 9.7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘कृषि अवसंरचना कोष’ के अंतर्गत वित्तपोषण सुविधा की केंद्रीय योजना के क्रमिक विस्तार को मंजूरी दी है ताकि इसे और अधिक आकर्षक, प्रभावी एवं समावेशी बनाया जा सके।
देश में कृषि अवसंरचना को बढ़ाने, सुदृढ़ करने और कृषक समुदाय को मदद देने वाले एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना के दायरे का विस्तार करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इन पहलों का उद्देश्य पात्र परियोजनाओं के दायरे का विस्तार करना और एक सुदृढ़ कृषि अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त सहायक उपायों को जोड़ना है।व्यवहार्य कृषि परिसंपत्तियां: योजना के सभी पात्र लाभार्थियों को ‘सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए व्यवहार्य परियोजनाओं’ के अंतर्गत आने वाले बुनियादी ढांचा को बनाने की अनुमति देना। इस कदम से व्यवहार्य परियोजनाओं का विकास सुगम होने की उम्मीद है। ये सामुदायिक कृषि क्षमताओं को बढ़ाएंगी जिससे इस क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता में सुधार होगा।एकीकृत प्रसंस्करण परियोजनाएं: कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के अंतर्गत पात्र गतिविधियों की सूची में एकीकृत प्राथमिक द्वितीयक प्रसंस्करण परियोजनाओं को शामिल करना। हालांकि, सिर्फ द्वितीयक परियोजनाएं पात्र नहीं होंगी और उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की योजनाओं के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।पीएम कुसुम घटक-ए: किसान/किसानों के समूह/किसान उत्पादक संगठनों/सहकारी समितियों/पंचायतों के लिए पीएम-कुसुम के घटक-ए को एआईएफ के साथ मिलाने की अनुमति देना। इन पहलों के मेल का उद्देश्य कृषि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देना है।एनएबी संरक्षण: सीजीटीएमएसई के अलावा, एनएबी संरक्षण ट्रस्टी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए एफपीओ के एआईएफ क्रेडिट गारंटी कवरेज का विस्तार करने का प्रस्ताव है। क्रेडिट गारंटी विकल्पों के इस विस्तार का उद्देश्य एफपीओ की वित्तीय सुरक्षा और ऋण-योग्यता को बढ़ाना है, जिससे कृषि अवसंरचना परियोजनाओं में अधिक निवेश को बढ़ावा मिले।2020 में प्रधानमंत्री द्वारा शुभारंभ किए जाने के बाद से ही एआईएफ 6623 गोदामों, 688 कोल्ड स्टोर और 21 साइलो परियोजनाओं के निर्माण का समर्थन करने में मददगार रहा है, जिसके चलते देश में लगभग 500 एलएमटी की अतिरिक्त भंडारण क्षमता प्राप्त हुई है। इसमें 465 एलएमटी शुष्क भंडारण और 35 एलएमटी कोल्ड स्टोरेज क्षमता शामिल है। इस अतिरिक्त भंडारण क्षमता से सालाना 18.6 एलएमटी खाद्यान्न और 3.44 एलएमटी बागवानी उपज की बचत की जा सकती है। एआईएफ के अंतर्गत अब तक 74,508 परियोजनाओं के लिए 47,575 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन स्वीकृत परियोजनाओं ने कृषि क्षेत्र में 78,596 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है, जिसमें से 78,433 करोड़ रुपये निजी संस्थाओं से जुटाए गए हैं।इसके अलावा, एआईएफ के अंतर्गत स्वीकृत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने कृषि क्षेत्र में 8.19 लाख से अधिक ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद की है। एआईएफ योजना के दायरे में विस्तार से विकास को गति मिलेगी, उत्पादकता में सुधार होगा, कृषि आय बढ़ेगी और देश में कृषि की समग्र स्थिरता में योगदान मिलेगा। ये उपाय देश में कृषि अवसंरचना के समग्र विकास के जरिए कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी दिखलाते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य संस्थाओं और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच संयुक्त उद्यम (जेवी) सहयोग के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए उनकी इक्विटी भागीदारी के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की राज्य सरकारों को केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान करने के विद्युत मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस योजना का परिव्यय 4136 करोड़ रुपये है, जिसे वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2031-32 तक क्रियान्वित किया जाना है। इस योजना के तहत लगभग 15,000 मेगावाट की कुल जल विद्युत क्षमता को सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना को विद्युत मंत्रालय के कुल परिव्यय से पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए 10 प्रतिशत सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा।विद्युत मंत्रालय द्वारा तैयार की गई योजना में राज्य सरकार के साथ केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम की सभी परियोजनाओं के लिए एक संयुक्त उद्यम (जेवी) कंपनी के गठन का प्रावधान है।पूर्वोत्तर क्षेत्र की राज्य सरकार के इक्विटी हिस्से के लिए अनुदान कुल परियोजना इक्विटी के 24 प्रतिशत पर सीमित होगा, जो प्रति परियोजना अधिकतम 750 करोड़ रुपये होगा। प्रत्येक परियोजना के लिए 750 करोड़ रुपये की सीमा पर, यदि आवश्यक हो, तो मामला-दर-मामला आधार पर पुनर्विचार किया जाएगा। अनुदान के वितरण के समय संयुक्त उद्यम में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसयू) और राज्य सरकार की इक्विटी का अनुपात बनाए रखा जाएगा।केंद्रीय वित्तीय सहायता केवल व्यवहार्य जल विद्युत परियोजनाओं तक ही सीमित होगी। राज्यों को परियोजना को व्यवहार्य बनाने के लिए मुफ्त बिजली/स्टैगर फ्री बिजली और /या एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति करनी होगी।इस योजना की शुरुआत के साथ, जलविद्युत विकास में राज्य सरकारों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा और जोखिम तथा जिम्मेदारियों को अधिक न्यायसंगत तरीके से साझा किया जाएगा। राज्य सरकारों के हितधारक बनने से भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन तथा स्थानीय कानून एवं व्यवस्था जैसी समस्याएं कम हो जाएंगी। इससे परियोजनाओं में लगने वाले समय और लागत दोनों की बचत होगी।यह योजना पूर्वोत्तर की जल विद्युत क्षमता का पूरा उपयोग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्याप्त निवेश आएगा। इतना ही नहीं, परिवहन, पर्यटन, लघु-स्तरीय व्यवसाय के माध्यम से स्थानीय लोगों को बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार/उद्यमिता के अवसर भी मिलेंगे। जल विद्युत परियोजनाओं का विकास 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) को साकार करने में भी योगदान देगा और ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण में मदद करेगा, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड की सशक्तता, सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ेगी।भारत सरकार जल विद्युत विकास में बाधा डालने वाले मुद्दों के समाधान के लिए कई नीतिगत पहल कर रही है। जल विद्युत क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा इसे और अधिक व्यवहार्य बनाने के लिए, मंत्रिमंडल ने 7 मार्च, 2019 को कई उपायों जैसे कि बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत घोषित करना, जल विद्युत खरीद दायित्व (एचपीओ), टैरिफ में वृद्धि के माध्यम से टैरिफ युक्तिकरण उपाय, भंडारण एचईपी में बाढ़ नियंत्रण के लिए बजटीय सहायता और सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर (यानी सड़कों और पुलों का निर्माण) की लागत के लिए बजटीय सहायता को मंजूरी दी। -

-छत्तीसगढ़ में जगदलपुर, अंबिकापुर और कोरबा में 3 एफएम रेडियो केंद्र को मंजूरी मिली
नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निजी एफएम रेडियो चरण-3 नीति के तहत 234 नए शहरों में 730 चैनलों के लिए आरोही ई-नीलामी के तीसरे समूह के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके लिये अनुमानित आरक्षित मूल्य 784.87 करोड़ रुपये आंका गया है। छत्तीसगढ़ में जगदलपुर, अंबिकापुर और कोरबा में 3 FM radio केंद्र को मंजूरी मिली है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां बताया कि मंत्रिमंडल ने एफएम चैनलों के लिए वार्षिक लाइसेंस शुल्क (एएलएफ) जीएसटी को छोड़कर सकल राजस्व का चार प्रतिशत वसूलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह 234 नये शहरों/कस्बों पर लागू होगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 234 नए शहरों और कस्बों में निजी एफएम रेडियो की शुरुआत से इन क्षेत्रों में एफएम रेडियो की अपूर्ण मांग पूरी होगी, जो अब भी निजी एफएम रेडियो प्रसारण से अछूते हैं और इससे मातृभाषा में नयी और स्थानीय सामग्री उपलब्ध होगी। इसमें रेखांकित किया गया कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, स्थानीय बोली और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा तथा ‘वोकल फॉर लोकल' पहल को बढ़ावा मिलेगा। स्वीकृत किये गये कई शहर आकांक्षी जिलों और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हैं। बयान में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में निजी एफएम रेडियो की स्थापना से वहां सरकारी पहुंच और मजबूत होगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत में युद्ध, आतंकवाद और नक्सलवाद से भी अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है। गडकरी ने उद्योग मंडल फिक्की के ‘सड़क सुरक्षा पुरस्कार और संगोष्ठी-2024' के छठे संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क परियोजनाओं की खराब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के कारण ‘ब्लैकस्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “युद्ध, आतंकवाद और नक्सलवाद से भी अधिक लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है।”
गडकरी के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.5 लाख लोगों की मृत्यु होती है, जबकि तीन लाख लोग घायल होते हैं। उन्होंने कहा, “इससे देश को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन प्रतिशत का नुकसान होता है। ‘बलि के बकरे' की तरह हर दुर्घटना के लिए चालक को दोषी ठहराया जाता है। मैं आपको बता दूं, और मैंने बारीकी से देखा है कि ज्यादातर दुर्घटनाएं सड़क इंजीनियरिंग में खामी की वजह से होती हैं।” मंत्री ने सभी राजमार्गों के सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की संख्या कम करने के लिए, “हमें लेन अनुशासन का पालन करने की जरूरत है।”
गडकरी ने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय एम्बुलेंस और उसके चालकों के लिए कोड तैयार कर रहा है, ताकि उन्हें सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को शीघ्र बचाने के लिए कटर जैसी अत्याधुनिक मशीनों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा सके। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना' के 10 वर्ष पूरे होने पर बुधवार को कहा कि यह योजना सम्मान, सशक्तीकरण और राष्ट्र के आर्थिक जीवन में भागीदारी के अवसर का प्रतीक है। मोदी ने जन धन योजना को सफल बनाने के लिए काम करने वालों की भी सराहना की और कहा कि यह योजना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर अपने आधिकारिक खाते पर लिखा, ‘‘आज एक ऐतिहासिक दिन है... जन धन योजना के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं और इस योजना को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक करने वाले सभी लोगों को भी बहुत-बहुत बधाई।'' उन्होंने कहा कि जन धन योजना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और करोड़ों लोगों खासकर महिलाओं, युवाओं तथा वंचित समुदायों को सम्मान देने में सबसे आगे रही है। प्रधानमंत्री ने पेशेवर मंच ‘लिंक्डइन' पर बाद में लिखा आज प्रधानमंत्री जन धन योजना को शुरू हुए एक दशक हो गया है और यह पहल महज एक नीति नहीं है। यह एक ऐसे भारत के निर्माण का प्रयास है, जहां हर नागरिक, चाहे उसकी आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, उसकी औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच हो। मोदी ने कहा, ‘‘ आप में से कई लोग, खासकर युवा सोच रहे होंगे..यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आखिरकार, इस युग में बैंक खाता होना बेहद ही बुनियादी बात है और इसे सामान्य बात भी माना जाता है। हालांकि, जब हमने 2014 में सत्ता संभाली, तो स्थिति बहुत अलग थी। आजादी के करीब 65 साल हो चुके थे, लेकिन हमारे लगभग आधे परिवारों के लिए बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच दूर का सपना थी।'' उन्होंने कहा कि उनकी दुनिया ऐसी थी जहां बचत घर पर रखी जाती थी, जिसके खोने तथा चोरी होने का खतरा बना रहता था। मोदी ने कहा, ‘‘ कर्ज तक पहुंच ‘साहूकारों' की दया पर निर्भर थी। वित्तीय सुरक्षा के अभाव से कई सपने पूरे नहीं हो पाते थे।'' उन्होंने कहा, ‘‘ जब जन-धन योजना शुरू की गई तो मुझे याद है कि इसे लेकर भी संशय की स्थिति थी। कुछ लोगों ने पूछा था - क्या इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग प्रणाली में लाना वास्तव में संभव है? क्या इस प्रयास से कोई ठोस बदलाव आएगा? हां। चुनौतियां काफी व्यापक थीं लेकिन इसे हकीकत बनाने के लिए भारत के लोगों का दृढ़ संकल्प भी उतना ही बड़ा था।'' मोदी ने कहा कि जन धन योजना की सफलता के दो पहलू हैं। एक पहलू यह है कि 53 करोड़ से अधिक लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे बैंकिंग प्रणाली से जुड़ पाएंगे लेकिन अब उनके पास बैंक खाते हैं। उन्होंने कहा कि इन खातों में 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 65 प्रतिशत से अधिक खाते ग्रामीण या अर्द्धशहरी क्षेत्रों में हैं, जिससे वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया महानगरों तक सीमित नहीं रही। करीब 39 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष हस्तांतरण हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन, दूसरा पहलू प्रभावशाली आंकड़ों से कहीं आगे है। जहां तक महिला सशक्तीकरण का सवाल है, जन धन योजना परिवर्तनकारी साबित हुई है। करीब 30 करोड़ महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली में लाया गया है।'' मोदी ने कहा कि इसी तरह, इस योजना के लाभ व बैंक खाते के जरिये मिलने वाले अन्य लाभों ने करोड़ों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग परिवारों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन, ‘जेएएम' त्रिमूर्ति - जनधन, आधार और मोबाइल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। वर्ष 2014 में आज के दिन शुरू की गयी प्रधानमंत्री जन धन योजना वित्तीय समावेशन पर एक राष्ट्रीय मिशन है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक बुनियादी बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षरता, ऋण, बीमा और पेंशन सुविधा तक पहुंच के साथ बैंकिंग सुविधाओं को लेकर पहुंच सुनिश्चित करना है। -
इंदौर. देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में बुधवार को सफाई कर्मियों के अवकाश के दौरान स्थानीय जन प्रतिनिधियों और सरकारी अफसरों समेत समाज के अलग-अलग तबकों के लोगों ने प्रमुख स्थानों पर झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। अधिकारियों ने बताया कि गोगा नवमी के अगले दिन शहर के सफाई कर्मियों को हर साल सरकारी अवकाश दिया जाता है। शहर के हृदय स्थल राजबाड़ा चौराहे पर झाड़ू लगाने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘स्वच्छता इंदौर के लोगों की आदत बन चुकी है। सफाई कर्मियों के अवकाश के दौरान हमारी जिम्मेदारी है कि हम शहर को स्वच्छ बनाए रखें।'' अधिकारियों ने बताया कि शहर के प्रमुख स्थलों पर चलाए गए सफाई अभियान में सरकारी अधिकारियों के साथ ही स्थानीय विधायक और पार्षद भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने की इस मुहिम में सामाजिक संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों ने भी भाग लिया। इंदौर, राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार सात बार अव्वल रहा है।
- अहमदाबाद। गुजरात में बारिश से संबंधित घटनाओं में नौ और लोगों की मौत हो गई, जिससे ऐसी घटनाओं में दो दिन में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी ।अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कुछ हिस्सों में बुधवार को लगातार चौथे दिन भी बारिश जारी है। वहीं, बाढ़ प्रभावित इलाकों में से 8500 लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया और इस संकट में केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।अधिकारी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के साथ मिलकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य संचालित कर रहे हैं।एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश के कारण दीवारें ढह जाने और पानी में डूबने जैसी घटनाओं में कुल नौ लोगों की मौत हो गई।इसमें बताया गया कि गुजरात के विभिन्न हिस्सों में सोमवार इस तरह की घटनाओं में सात लोग मारे गए थे।विज्ञप्ति में बताया गया कि आणंद जिले में मंगलवार को दीवार ढहने से तीन लोगों की मौत हो गई। महिसागर जिले में दो और खेड़ा तथा अहमदाबाद में दीवार ढह जाने की घटनाओं में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई। जूनागढ़ और भरूच जिले में बारिश के कारण भरे पानी में डूबने से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई।अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को कुल 169 लोगों को बचाया गया, जिनमें से अधिकतर खेड़ा और मोरबी जिले के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि 8460 अन्य लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इनमें नवसारी से लगभग 3,000 तथा वडोदरा और खेड़ा से लगभग एक-एक हजार लोग शामिल हैं। इसी के साथ सोमवार और मंगलवार को दो दिन में 15,000 से अधिक लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।अधिकारियों ने बताया कि गुजरात में पिछले दो दिन में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है।मुख्यमंत्री पटेल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात में भारी बारिश की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुझसे फोन पर बात की और राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली।’’उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मनुष्यों और जीव जंतुओं की सुरक्षा के संबंध में बात की तथा केंद्र सरकार की ओर से सभी आवश्यक मदद देने का आश्वासन दिया।पटेल ने कहा, ”प्रधानमंत्री गुजरात में बाढ़ की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। गुजरात के लोगों के प्रति उनके दिल में गहरा स्नेह है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान और जब भी आवश्यकता होती है, वह हमेशा गुजरात और राज्य के लोगों के साथ खड़े रहते हैं।”राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सौराष्ट्र क्षेत्र के कई जिलों खासतौर पर देवभूमि द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और राजकोट में बुधवार सुबह छह बजे समाप्त हुई 24 घंटे की अवधि मे बहुत भारी बारिश हुई। इसमें बताया गया कि देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया तालुका में 454 मिलीमीटर (मिमी) वर्षा हुई, इसके बाद जामनगर में 387 मिमी और जामनगर की जामजोधपुर तालुका में 329 मिमी बारिश हुई।एसईओसी के मुताबिक, इस अवधि के दौरान राज्य की 251 तालुकाओं में से 13 में 200 मिमी से अधिक तथा 39 में 100 मिमी से अधिक बारिश हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया तथा निचले इलाकों में जलभराव हो गया।वैसे तो वडोदरा में बारिश रुक गई है, लेकिन विश्वामित्री नदी में बाढ़ आने से शहर के कई निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। हालांकि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों का राहत-बचाव अभियान जारी है।अधिकारियों ने बताया कि मोरबी, आणंद, देवभूमि द्वारका, राजकोट और वडोदरा में राहत एवं बचाव अभियान के लिए सेना की पांच-पांच टुकड़ियों को तैनात किया गया है।आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य में 137 जलाशय, झीलें तथा 24 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है।पश्चिम रेलवे ने बताया कि बारिश के कारण सड़कें और रेलवे लाइन जलमग्न हो गईं जिससे यातायात और रेलगाड़ियों की आवाजाही भी बाधित हुई। मुंबई जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस समेत आठ ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 10 अन्य ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द कर दी गईं।एसईओसी ने बताया कि गुजरात में अब तक औसत वार्षिक वर्षा की 105 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, जिसमें बनासकांठा में सभी 33 जिलों में सबसे कम बारिश हुई है। बनासकांठा में औसत वार्षिक वर्षा की 73 प्रतिशत बारिश हुई है।









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