अनिकेत की भावनाओं से स्तब्ध रह गए दर्शक
- बालाघाट के नूतन कला निकेतन में महाराष्ट्र मंडल के नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ का प्रभावशाली मंचन
रायपुर। जख्मी जला हुआ चेहरा और नम आंखों के बीच ‘मैं अनिकेत हूं..... मैं अनिकेत हूं.... और मैं अनिकेत ही हूं…’ की चीखभरी संवाद अदायगी के बाद अनिकेत का संवेदशील अभिनय देखकर रंगप्रेमी दर्शक स्तब्ध रह गए। बालाघाट में नूतन कला निकेतन में हिंदी नाटक ‘मै अनिकेत हूं’ का मंचन प्रभावशाली रहा। इससे पहले महाराष्ट्र मंडल के इसी नाटक का मंचन संत ज्ञानेश्वर सभागृह और एम्स रायपुर के सभागृह में किया जा चुका है। बताते चले कि ‘मैं अनिकेत का हूं’ का चौथा मंचन 11 जनवरी को भिलाई के सिविल सेंटर स्थित महात्मा गांधी कला मंदिर में होगा।
वरिष्ठ रंगसाधक शशि वरवंडकर ने ‘मैं अनिकेत हूं’ में न केवल केंद्रीय भूमिका अनिकेत को जीवंत किया, बल्कि इससे उन्होंने निर्देशन के रूप में भी प्रभावित किया। अनिकेत की पत्नी मीनाक्षी शर्मा के रोल में डॉ. अनुराधा दुबे प्रभावशाली रहीं। लगभग 90 मिनट के नाटक में अनिकेत के साथ बराबरी से टक्कर लेते हुए एड्वोकेट भारद्वाज के रूप में चेतन गोविंद दंडवते आकर्षक लगे।
वरिष्ठ रंगसाधक प्रकाश खांडेकर, दिलीप लांबे, रंजन मोड़क, डा. प्रीता लाल, रविंद्र ठेंगड़ी अपनी- अपनी भूमिकाओें में जमे हैं। समीर टल्लू, भारती पलसोदकर, विनोद राखुंडे, पंकज सराफ, श्याम सुंदर खंगन, डा. अभया जोगलेकर भी अपनी- अपनी भूमिकाओं में जमे हैं। अजय पोतदार व प्रकाश गुरव की सेट डिजाइन पूरे नाटक में कोर्ट रूम का एहसास कराती रही। अजय पोतदार और रंजन मोडक की रूप सज्जा को लेकर की गई मेहनत मंच पर दिखती है।
नूतन कला निकेतन के अध्यक्ष रूप कुमार बनवाले ने बताया कि नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ का अनुभव बालाघाट के रंगप्रेमियों के लिए चौंकाने वाला रहा। रायपुर की नाट्य टीम ने शशि वरवंडकर के नेतृत्व में नाटक की कमाल की प्रस्तुति दी। इस तरह हमारे चार दिवसीय सांस्कृतिक पर्व का आगाज ही जबर्दस्त रहा। आगामी दिनों में औरंगाबाद, नासिक से लेकर मुंबई की टीमों की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी।










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