बैटरी चलित ट्रायसाइकिल बनी सोमारू नेताम की नई उड़ान
नारायणपुर । जिले के ग्राम गुडरीपारा निवासी 47 वर्षीय श्री सोमारू नेताम का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब सही व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सुविधा ही नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदत्त बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसाइकिल ने उनके जीवन में ऐसा सकारात्मक बदलाव लाया है, जिसने उनकी दिनचर्या और सोच, दोनों को नई दिशा दी है।
श्री सोमारू नेताम 75 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांग हैं। लंबे समय तक दिव्यांगता के कारण उन्हें अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। घर से बाहर निकलना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। बाजार जाना हो, अस्पताल पहुंचना हो या किसी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होना हो, हर बार उन्हें परिवार या आसपास के लोगों की सहायता की आवश्यकता पड़ती थी। इस कारण उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता था और वे कई बार आवश्यक कार्य भी समय पर नहीं कर पाते थे।
उनकी इस कठिन परिस्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मोटराइज्ड ट्रायसाइकिल (बैटरी चलित) प्रदाय योजना के अंतर्गत 17 अप्रैल 2026 को उन्हें बैटरी चलित ट्रायसाइकिल उपलब्ध कराई गई। यह सहायता उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। ट्रायसाइकिल मिलने के बाद उन्होंने स्वयं अपने कार्य करना शुरू किया और धीरे-धीरे उनकी दूसरों पर निर्भरता कम होने लगी।
अब सोमारू नेताम बिना किसी की मदद के अपने घर से बाजार, अस्पताल, बैंक तथा अन्य आवश्यक स्थानों तक आसानी से आ-जा रहे हैं। पहले जहां छोटी-सी दूरी तय करना भी कठिन था, वहीं अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने सभी जरूरी कार्य समय पर पूरा कर रहे हैं। इससे न केवल उनका समय बचता है, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का नया अनुभव भी मिला है।
बैटरी चलित ट्रायसाइकिल ने उनके सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन लाया है। अब वे परिवार और समाज के विभिन्न कार्यक्रमों में अधिक सक्रियता से भाग लेते हैं। लोगों से मिलना-जुलना आसान हुआ है और वे पहले की तुलना में अधिक आत्मसम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। परिवार के सदस्यों को भी राहत मिली है, क्योंकि अब सोमारू अपने अधिकांश कार्य स्वयं करने में सक्षम हो गए हैं।
सोमारू नेताम का कहना है कि यह ट्रायसाइकिल उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत है। इससे उन्हें अपने जीवन को अपनी शर्तों पर जीने का अवसर मिला है। उन्होंने इस अमूल्य सहयोग के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा समाज कल्याण विभाग के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है।
सोमारू नेताम की कहानी इस बात का प्रेरक संदेश देती है कि शासन की योजनाओं का प्रभाव तभी सार्थक होता है, जब उनका लाभ सही पात्र तक पहुंचे। एक बैटरी चलित ट्रायसाइकिल ने उनके जीवन में केवल गतिशीलता ही नहीं लाई, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और नई उम्मीद भी दी। यह सफलता की कहानी समाज के लिए प्रेरणा है कि उचित सहयोग और अवसर मिलने पर दिव्यांगजन भी आत्मनिर्भर बनकर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकते हैं।













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