विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर नगर निगम दुर्ग के सभागार में कार्यक्रम का हुआ आयोजन
-कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री अरूण साव मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल, विभाजन के समय प्राण गंवाने वाले लाखों भारतवासियों को दी श्रद्धांजलि
-उप मुख्यमंत्री श्री साव ने 'विभाजन विभीषिका' और 'वंदे मातरम्' पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का किया अवलोकन
दुर्ग / स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त 2026 को नगर निगम दुर्ग के भव्य सभागार में ’विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय को याद करना और विभाजन में अपने प्राण गंवाने वाले लाखों भारतवासियों को श्रद्धांजलि देना था। राष्ट्रीय महत्व के इस संवेदनशील कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ सभागार में जनसंपर्क विभाग द्वारा लगाई गई 'विभाजन विभीषिका' तथा 'वंदे मातरम्' गीत के गौरवशाली इतिहास पर आधारित विशेष छायाचित्र (फोटो) प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। जिसमें छायाचित्रों के माध्यम से विभाजन के समय देशवासियों द्वारा सहे गए असीम दर्द, संघर्ष और विस्थापन की त्रासदी के साथ-साथ 'वंदे मातरम्' की उस अमर चेतना को दर्शाया गया था, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूरे राष्ट्र में देशभक्ति का अलख जगाया था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने भारत की महान सांस्कृतिक परंपरा और उसके ऐतिहासिक दर्द को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी नींव ’वसुधैव कुटुंबकम्’ और ’सर्वधर्म समभाव’ के कालजयी विचारों पर टिकी है। हमारी यह पावन भूमि अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रही है, जिसका वर्णन वेदों और पुराणों में भी मिलता है। इतिहास गवाह है कि मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक कई विदेशी आक्रांताओं ने इस भूमि पर शासन किया, लेकिन वे हमारी सनातन संस्कृति, महान परंपराओं और एकता की भावना को कभी मिटा नहीं सके। उपमुख्यमंत्री श्री साव ने विभाजन के कड़वे सच पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आखिर इतनी मजबूत संस्कृति वाले देश में विभाजन की नौबत क्यों आई। उन्होंने विभाजन के मूल कारणों को स्मरण करते हुए बताया कि किस प्रकार अंग्रेजों ने भारत पर लंबे समय तक राज करने के लिए ’फूट डालो और शासन करो’ का षड्यंत्र रचा। जिसके तहत भारतीय नागरिकों के बीच वैमनस्यता का बीज बोया गया और देश के अनेक बुद्धिजीवियों और प्रबुद्धजनों द्वारा विभाजन को रोकने के हर संभव प्रयास किए जाने के बावजूद इस त्रासदी को टाला न जा सका। विभाजन की भयानक पीड़ा और दुष्परिणामों को याद दिलाते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक भूल के कारण कई निर्दाेष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसी संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की पंक्तियों को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि ’भारत केवल भूमि का कोई बेजान टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है।’ जब ऐसे राष्ट्रपुरुष का विभाजन हुआ, तो देश के जन-मन ने जो वेदना और संताप सहा, वह अकथनीय है। उन्होंने कहा कि आज के दिन इस त्रासदी को याद करने का उद्देश्य किसी पुरानी कड़वाहट को बढ़ाना नहीं, बल्कि उस असीम पीड़ा से सीख लेते हुए देश की एकता व अखंडता की रक्षा का संकल्प लेना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दुर्ग ग्रामीण विधायक व छ.ग.राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष श्री ललित चंद्राकर ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत एक स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ, किंतु स्वतंत्रता की इस प्राप्ति के ठीक एक दिन पूर्व का इतिहास अत्यंत कारुणिक रहा है। इसी कड़वे सच और बलिदानों को रेखांकित करने के लिए वर्ष 2021 से प्रतिवर्ष 14 अगस्त को ’विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन का मूल ध्येय यह है कि समस्त देशवासी और युवा पीढ़ी यह भली-भांति जान सके कि आज हम जिस स्वतंत्रता की पावन हवा में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे लाखों परिवारों का असीम त्याग, बेघर होने का दर्द और अमूल्य बलिदान छिपा हुआ है। अपने संबोधन के दौरान विधायक श्री चंद्राकर ने वर्तमान में संचालित ’हर घर तिरंगा’ अभियान का उल्लेख करते हुए नागरिकों व छात्र-छात्राओं से राष्ट्रीय ध्वज के प्रति आदर बनाए रखने की अपील की।
इसी क्रम में, महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और बच्चों को स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज 14 अगस्त का यह दिन इतिहास के एक अत्यंत दर्दनाक दौर की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, इसलिए उस समय की भयावहता और संघर्ष का अंदाज़ा लगाना हमारे लिए आसान नहीं है। किताबों में भले ही हम इसे पढ़ते हैं, लेकिन इसे प्रत्यक्ष भोगने वाले सिंधी समाज के भाई-बहनों का अनुभव ही इस त्रासदी की असल सच्चाई बयान करता है। महापौर श्रीमती बाघमार ने कहा कि आज युवाओं को समझना होगा कि सच्ची स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी या उच्छृंखलता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति ज़िम्मेदारी है। अपने राष्ट्र और परिवेश का सम्मान करना ही हमारा पहला धर्म है, इसलिए स्वतंत्र नागरिक होने के नाते सड़कों या नालियों में कचरा न फेंककर स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है।
सभागार में कार्यक्रम के दौरान विभाजन की त्रासदी पर आधारित एक मर्मस्पर्शी लघु चित्र (डॉक्यूमेंट्री/शॉर्ट फिल्म) का भी प्रदर्शन किया गया। इस लघु चित्र के माध्यम से विभाजन के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले मतुआ समुदाय की पीड़ादायी स्थिति और उनके ऐतिहासिक संघर्ष को सजीव रूप में दर्शाया गया। मतुआ समुदाय, जो मुख्य रूप से बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बसा हुआ था, उन्होंने विभाजन के समय अमानवीय यातनाएं और विस्थापन का भीषण दंश झेला। लघु चित्र में यह प्रेरणादायक गाथा दिखाई गई कि इतने गहरे आघात और उत्पीड़न के बावजूद मतुआ समुदाय ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों (जैसे सितार आदि) की मधुर तानों को पुनः जीवित किया, अपनी लुप्त होती लोक-संस्कृति, विशिष्ट पारंपरिक व्यंजनों, धरोहरों व सांस्कृतिक प्रतीकों को सहेजकर पुनः स्थापित किया। शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानते हुए उन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी पठन-पाठन की परंपरा को जीवित रखा। लघु चित्र द्वारा बताया गया कि विभाजन भले ही हमारी सभ्यता पर एक आघात था, किंतु हमारी सांस्कृतिक जीवंतता ने उस दमन के विरुद्ध विजय प्राप्त की और अपनी समृद्ध परंपराओं को पुनः संजोया। इस दौरान विभाजन से पीड़ित व आहात होने वाले नागरिकों को स्मरण किया गया तथा अपने प्राण गंवाने वाले लाखों भारतवासियों को श्रद्धांजलि देने हेतु मौन भी रखा गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू, श्री सुरेंद्र कौशिक, श्री जितेंद्र वर्मा, श्री दिलीप साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे, धमधा नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्वेता अग्रवाल, नगर के गणमान्य नागरिक तथा शासन-प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।



.jpeg)









Leave A Comment