नगर विकास योजना से कचना, लामांडी और सड्डू को मिलेगा सुनियोजित विकास का नया स्वरूप
-भूस्वामियों को सड़क, जलापूर्ति, सीवर और बिजली जैसी सुविधाओं से युक्त सुनियोजित एवं अधिक उपयोगी अंतिम भूखंड देने का प्रस्ताव
-किसी भी भूमिस्वामी को नहीं किया जाएगा भूमिहीन, 100 वर्गमीटर से कम मूल भूखंड वालों के लिए भी अंतिम भूखंड का प्रावधान
-खुले क्षेत्र, नगरीय वन और सामाजिक अधोसंरचना के लिए भूमि आरक्षित, विद्यालय से लेकर स्वास्थ्य केंद्र तक विकसित होंगी सुविधाएं
-अंतिम भूखंडों का आवंटन अभी प्रस्तावित, 10 अक्टूबर 2026 तक आमंत्रित किए गए हैं दावे एवं आपत्तियां
रायपुर / राजधानी रायपुर के सुनियोजित विस्तार और नागरिकों को बेहतर शहरी अधोसंरचना उपलब्ध कराने की दिशा में रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ग्राम कचना, लामांडी एवं सड्डू में नगर विकास योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 49 एवं 50 के प्रावधानों के अंतर्गत तैयार इस योजना का उद्देश्य क्षेत्र का व्यवस्थित विकास करते हुए भूस्वामियों को सड़क की पहुंच, जलापूर्ति, सीवर, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं से युक्त सुनियोजित अंतिम भूखंड उपलब्ध कराना है।योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें किसी भी भूमिस्वामी को भूमिहीन नहीं किया गया है। मूल भूखंड स्वामियों को उनकी भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा मिश्रित भू-उपयोग के अंतर्गत अंतिम भूखंड के रूप में आवंटित करने का प्रस्ताव है। वहीं 100 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल के मूल भूखंड वाले भूमिस्वामियों के लिए भी नेबरहुड शॉपिंग क्षेत्र में अंतिम भूखंड प्रस्तावित किए गए हैं।
नगर विकास योजना से ऐसे भूस्वामियों को विशेष लाभ होगा, जिनकी भूमि अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है अथवा मौजूदा स्वरूप में उसका समुचित विकास कठिन है। खंडित स्वामित्व वाली भूमियों को बसरा नंबर के आधार पर एकीकृत कर पूर्ण रकबे के अनुरूप एक अंतिम भूखंड का आवंटन प्रस्तावित किया गया है। इससे भूमि का व्यवस्थित उपयोग संभव होगा और भूस्वामियों को बेहतर आकार तथा नियोजित क्षेत्र में विकास का अवसर मिलेगा।योजना के अंतर्गत नियमानुसार आकार के अंतिम भूखंड उसी ग्राम में प्रस्तावित किए गए हैं, जिस ग्राम में संबंधित भूमिस्वामी के मूल भूखंड स्थित हैं। इस व्यवस्था से विकास के साथ स्थानीय भू-स्वामित्व के हितों का भी ध्यान रखा गया है।
नगर विकास योजना तैयार करते समय भौतिक सर्वेक्षण के आधार पर मौजूदा और प्रस्तावित मार्गों का संरेखण किया गया है। विकास योजना में प्रस्तावित 45 मीटर, 30 मीटर, 24 मीटर और 18 मीटर चौड़े मार्गों के अतिरिक्त योजना स्तर पर 18 मीटर एवं 12 मीटर चौड़े मार्गों का भी प्रावधान किया गया है।नियोजन में भूखंडों के आकार और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है। अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों को 45 मीटर, 30 मीटर और 24 मीटर चौड़े मार्गों पर तथा अपेक्षाकृत कम क्षेत्रफल वाले भूखंडों को 18 मीटर एवं 12 मीटर चौड़े मार्गों पर आवंटित करने का प्रस्ताव है। बड़े भूखंडों पर भविष्य में अधिक आबादी एवं गतिविधियों की संभावना को देखते हुए उन्हें चौड़े मार्गों से जोड़ने की योजना बनाई गई है, ताकि आवागमन, प्रवेश-निकास और यातायात प्रबंधन बेहतर हो सके।
योजना में केवल आवासीय एवं व्यावसायिक विकास ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। योजना क्षेत्र की कुल 7.29 प्रतिशत भूमि खुले स्थान एवं नगरीय वन के लिए आरक्षित की गई है। इससे योजना क्षेत्र के निवासियों को लगभग 6.7 एकड़ खुला क्षेत्र उपलब्ध होगा, जबकि करीब 4.8 एकड़ भूमि पर नगरीय वन विकसित करने का प्रावधान है।
यह व्यवस्था तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और नागरिकों को बेहतर जीवन परिवेश उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी।
नगर विकास योजना में सामाजिक अधोसंरचना के विकास के लिए कुल 7.94 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है। यहां विद्युत सब-स्टेशन, पुलिस चौकी, आंगनबाड़ी, विद्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी आवश्यक नागरिक सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव है। इससे भविष्य में विकसित होने वाली बसाहट को बुनियादी सेवाओं के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।योजना में निम्न आयवर्ग के परिवारों के लिए भी भूमि आरक्षित की गई है। इसका उद्देश्य समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
कचना, लामांडी एवं सड्डू नगर विकास योजना के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल से 10 सितम्बर 2025 को सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हुई थी। इसके बाद योजना के आशय की घोषणा का प्रकाशन 5 दिसम्बर 2025 को राजपत्र में किया गया। प्राप्त आवेदनों एवं आपत्तियों की सुनवाई के लिए गठित अंतर्विभागीय समिति ने 12 फरवरी 2026 को सुनवाई की कार्यवाही की।इसके पश्चात प्रारूप नगर विकास योजना को 10 सितम्बर 2026 को संचालक मंडल से स्वीकृति मिली और 11 सितम्बर 2026 को इसका प्रकाशन किया गया।
रायपुर विकास प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नगर विकास योजना में दर्शाया गया अंतिम भूखंड आवंटन अभी प्रस्तावित है। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 50(3) के अंतर्गत संबंधित पक्षों से 30 दिवस की अवधि में दावे एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। दावे एवं आपत्तियां 10 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तुत की जा सकती हैं।
इस प्रकार नगर विकास योजना में भूस्वामियों के हितों की सुरक्षा के साथ सड़क, हरित क्षेत्र, सामाजिक अधोसंरचना और आवश्यक नागरिक सुविधाओं को एकीकृत करते हुए कचना, लामांडी एवं सड्डू क्षेत्र के व्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास की रूपरेखा तैयार की गई है।

.jpg)







.jpeg)

.jpg)
Leave A Comment