पहले खुद से प्यार करो
- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
सुंदर महल बनाना हो तो, सुदृढ़ प्रथम आधार करो।
रक्षा कर निज स्वाभिमान की, पहले खुद से प्यार करो।।
कठिन परिश्रम सतत प्रयासित, एकलव्य को ज्ञान मिला।
धूप-ताप नित सह-सहकर ही, सरवर में जलजात खिला।
श्रम संयम ताने-बाने से, रूप नवल साकार करो।।
विनम्रता व्यक्तित्व सजाए, रसना मीठे बोल कहे।
ज्ञानवान गुणवान बनो पर, द्वेष-दंभ किंचित न रहे।
धीरज के आभूषण पहनो, शुचिता से शृंगार करो ।।
पर-हितकारी जन को मिलता, लोगों से सम्मान सदा।
सहज-सरल बनकर सहयोगी, वंचित को दो दान सदा।
मानव तन पाया है सुंदर, ईश्वर का आभार करो ।।
दीप ज्ञान का जला हृदय में, कपट-कलुष तम दूर भगा।
प्रेम दया से धोकर कटुता, मन में साहस-शौर्य जगा।
अच्छाई से रहे सुवासित, सुंदर यह संसार करो।।







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