एमएसएमई को समय पर मिलेगा भुगतान, सरकार ने लागू किया नया नियम
नई दिल्ली। देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समय पर भुगतान दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के बिलों का भुगतान टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के जरिए करना होगा।एमएसएमई मंत्रालय ने 30 जून 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। यह फैसला केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के तहत लिया गया है।नई व्यवस्था के तहत सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मंजूर टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से एमएसएमई के बिलों का निपटारा करना होगा।इस कदम से छोटे कारोबारियों को लंबे समय तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें बिना गारंटी के आसानी से कार्यशील पूंजी मिल सकेगी।
सरकार के अनुसार, एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 8.70 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीकृत हैं, जो 38 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।हालांकि, भुगतान में देरी लंबे समय से एमएसएमई क्षेत्र की बड़ी समस्या रही है। इससे कारोबारियों की पूंजी फंस जाती है और उनके विकास पर असर पड़ता है।
नई व्यवस्था में एमएसएमई अपने मंजूर बिलों को तय समय से पहले ही नकदी में बदल सकेंगे। बैंक और वित्तीय संस्थान इन बिलों पर प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्त उपलब्ध कराएंगे।टीआरईडीएस भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 2017 में हुई थी। इसके जरिए एमएसएमई को कंपनियों, सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों से मिलने वाले भुगतान के लिए वित्तीय सहायता मिलती है।वर्तमान में आरएक्सआईएल, एम1एक्सचेंज, इनवॉयसमार्ट, सी2टीआरईडीएस और डीटीएक्स जैसे पांच प्लेटफॉर्म काम कर रहे हैं।सरकार के मुताबिक, टीआरईडीएस के जरिए बिल छूट की राशि वित्त वर्ष 2021-22 में 40 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। नई व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।









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