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बंधुआ मजदूरी के मुद्दे पर अमेरिका का भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव

वाशिंगटन/नयी दिल्ली। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लागू न करने के आरोप में भारत सहित 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उन जांच के बाद सामने आया है, जो अमेरिका ने 60 देशों के खिलाफ इस आधार पर शुरू की थी कि वे बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के अधिकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए नयी दिल्ली में तीन दिन की वार्ता कर रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत मार्च में शुरू की गई जांच के बाद यह प्रस्ताव रखा है। यह जांच बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दों को लेकर 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ शुरू की गई थी। हालांकि, यूएसटीआर ने स्पष्ट किया है कि यह अभी केवल एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इच्छुक पक्ष 22 जून तक सुनवाई में शामिल होने का अनुरोध और अपने पक्ष का सार प्रस्तुत कर सकते हैं। सुनवाई सात जुलाई को होगी। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, '' भारत धारा-301 कार्यवाही के मामले में अमेरिका के साथ संपर्क में है। साथ ही भारत दो फरवरी, 2026 को घोषित समझौते के ढांचे और सात फरवरी, 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप अमेरिका के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी बातचीत कर रहा है।'' यूएसटीआर ने अधिकांश वस्तुओं पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। हालांकि, वस्त्र और परिधान उत्पादों के लिए एक विशेष व्यवस्था का भी प्रस्ताव है, जिसके तहत कुछ देशों से सीमित मात्रा में आयात को कम शुल्क पर अनुमति दी जा सकती है। जिन 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित है, उनमें भारत, चीन, जापान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इजराइल, मलेशिया, न्यूजीलैंड, ओमान, कतर, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाइलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और वियतनाम सहित अन्य देश शामिल हैं। यूएसटीआर ने कनाडा, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान और इक्वाडोर पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का भी प्रस्ताव किया है। यूएसटीआर ने कहा कि इन देशों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगाने से अमेरिकी व्यापार प्रभावित हो रहा है और इसलिए यह कार्रवाई धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा, ''हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहना अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।'' भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांच को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए। यूएसटीआर का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए नयी दिल्ली में तीन दिवसीय वार्ता हो रही है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे हैं। दोनों देशों ने सात फरवरी को अंतरिम व्यापार समझौते या बीटीए के पहले चरण की रूपरेखा को अंतिम रूप देने संबंधी संयुक्त बयान जारी किया था। आर्थिक शोध संस्थान 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (जीटीआरआई) ने कहा कि अमेरिका द्वारा धारा-301 जांच के तहत भारत पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क प्रावधान के दायरे से बाहर है और भारत को इसे चुनौती देनी चाहिए। जीटीआरआई के अनुसार, 12.5 प्रतिशत का यह शुल्क अमेरिका की विश्व व्यापार संगठन प्रतिबद्धताओं से अधिक है। जीटीआरआई ने कहा, '' वर्तमान जांच धारा-301 के दायरे से बाहर है, जो जांच के दायरे में आ रहे देश के आयात व उनके स्रोत से नहीं बल्कि अमेरिकी कंपनियों के सामने आने वाली बाजार पहुंच बाधाओं से संबंधित है।'' आर्थिक शोध संस्थान के अनुसार, यह जांच इस आरोप पर आधारित नहीं है कि निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पाद बंधुआ मजदूरी से तैयार किए जाते हैं, बल्कि यूएसटीआर की कार्रवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या देश तीसरे देशों में बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाते हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को यह तर्क देना चाहिए कि अमेरिका एकतरफा व्यापार उपायों के जरिये अपने पसंदीदा आयात-नियंत्रण ढांचे को अन्य देशों पर थोपने की कोशिश कर रहा है, जो धारा-301 के दायरे से बाहर है।

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