संसद ने दिल्ली के तीन नगर निगमों को एक करने का विधेयक पारित किया
नई दिल्ली। संसद ने दिल्ली नगर-निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित कर दिया है। मंगलवार को राज्य सभा ने विधेयक को मंजूरी प्रदान की, जिसे लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। विधेयक के बारे में विपक्ष द्वारा रखे गए संशोधन सदन ने नामंजूर कर दिए। विधेयक में दिल्ली निगर-निगम अधिनियम 1957 में फिर से संशोधन करने का प्रावधान है और मौजूदा तीन दिल्ली नगर-निगमों को जोड कर एक दिल्ली नगर-निगम बनाने का प्रस्ताव है। इसमें पार्षदों की संख्या 272 से घटाकर अधिकतम 250 करने की भी व्यवस्था है।
विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि विधेयक सभी संवैधानिक मानदंड का अनुपालन करते हुए लाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली संघराज्य क्षेत्र है, जहां अलग प्रावधान हैं और संसद को राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली के बारे में कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि नया विधेयक किसी भी तरह से दिल्ली के संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है। श्री शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पांचवें दिल्ली वित्त आयोग कि सिफारिशों के अनुसार नगर-निकायों को 40 हजार पांच सौ 61 करोड रुपये वितरित नहीं किए। उन्होंने कहा कि तीन निगमों के एकीकरण से प्रशासनिक खर्च में कमी आयेगी।
इससे पहले सदन में विधेयक पेश करते हुए गृह मंत्री ने कहा था कि दिल्ली नगर-निगम राष्ट्रीय राजधानी के समूचे क्षेत्र में 95 प्रतिशत नागरिक सेवाए प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है और तीन नगर-निगमों में लगभग एक लाख बीस कर्मचारी काम करते हैं। गृहमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, उच्चतम न्यायालय और विभिन्न देशों के दूतावास जैसे महत्वपूर्ण स्थान दिल्ली में स्थित हैं, इसलिए यह जरूरी है कि तीनों नगर-निगम नागरिक सेवाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी लें। उन्होंने कहा कि इससे पहले दिल्ली में एक नगर-निगम था लेकिन दिल्ली सरकार ने संशोधन के माध्मम से इसके तीन नगर-निगम बना दिए थे।
विधेयक पर बहस शुरू करते हुए कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने विधेयक का विरोध किया। उनका कहना था कि यह विधेयक संवैधानिक रूप से संदिग्ध और कानूनी रूप से अक्षम्य है।
विधेयक के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी के सुधांशु त्रिवेद्वी ने कहा कि यह विधेयक संवैधानिक मानदंड के अनुरूप है और कानूनी दृष्टि से उपयुक्त है।
टीएमसी सदस्य जवाहर सरकार ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह शहर में नगर-निगम चुनावों को टालने का षड्यंत्र है। बहस में अन्य राजनीतिक दलों के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया। बाद में सदन ने विधेयक पारित कर दिया।


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