नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के समापन अवसर पर पायोनरिंग-स्काउटिंग की आत्मा और जीवन-कौशल का जीवंत पाठ
प्रदर्शनी देखने उमड़ी भीड़, ओड़िसा व राजस्थान के ब्रिज एवं टावर मॉडल्स बना आकर्षण का केन्द्र
सांध्यकालीन बेला पर विभिन्न राज्यों के रोवर रेंजरों द्वारा नैनाभिराम एवं सुमधुर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की दी गई प्रस्तुति, सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग
बालोद/बालोद जिले के ग्राम दुधली में प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के समापन अवसर पर आज पायोनरिंग स्काउटिंग आदि गतिविधियां खासा आकर्षण का केन्द्र रहा। इसके अलावा आज जंबूरी के समापन दिवस के सांस्कृतिक संध्या के बेला पर विभिन्न राज्यों के रोवर रेंजरों द्वारा नैनाभिराम एवं सुमधुर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से उपस्थित जन समुदाय को भाव विभोर कर दिया। आज सांस्कृतिक संध्या के अवसर पर विभिन्न राज्यों के रोवर रेंजरो द्वारा प्रस्तुति की जाने वाली रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन करने हेतु बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। इस दौरान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के अलावा संबलपुरी, राजस्थानी लोक कलाओं के अलावा कार्यक्रम में उपस्थित रोवर रेंजरो ने अपने-अपने राज्यों के लोक कला एवं लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुति दी।
उल्लेखनीय है कि स्काउटिंग केवल गतिविधियों का समूह नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, अनुशासन और सेवा का जीवन-दर्शन है। इस दर्शन की आत्मा यदि किसी एक कला में साकार होती है, तो वह है पायोनरिंग। स्काउटिंग में पायोनरिंग का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह सीख को केवल सैद्धांतिक नहीं रहने देती, बल्कि हाथों से गढ़े गए अनुभव में बदल देती है। कैंपों के दौरान पायोनरिंग का प्रदर्शन स्काउटिंग की रचनात्मकता और तकनीकी दक्षता का प्रतीक होता है। रोवर्स, स्काउट्स, रेंजर्स एवं गाइड्स को गठानों और बंधनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। ये गठानें केवल रस्सी बांधने की कला नहीं, बल्कि आपात परिस्थितियों से निपटने का मजबूत आधार हैं। प्राकृतिक आपदाएं हों, जंगल कैंप हों या सीमित संसाधनों में जीवनयापन-पायोनरिंग हर स्थिति में स्काउट्स को समाधान तलाशना सिखाती है। पायोनरिंग स्काउट्स को यह भी सिखाती है कि कम से कम साधनों में अधिक से अधिक कैसे किया जाए। जंगल कैंप में उपलब्ध बांस, रस्सी और सही गठानों के सहारे जीवन की सुविधाएं खड़ी कर देनाकृयह कला आत्मविश्वास, धैर्य और टीमवर्क का अद्भुत संगम है। दुधली में आयोजित नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के अंतर्गत पायोनरिंग प्रोजेक्ट की विशेष प्रदर्शनी इस कला का जीवंत उदाहरण बनी हुई है। ओड़िसा व राजस्थान के रोवर्स एवं रेंजर्स द्वारा बांस, स्काउट रस्सी और विविध गठान-बंधन तकनीकों से निर्मित ब्रिज, वॉच टावर और रोप ब्रिज दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन अद्वितीय मॉडल्स को देखने के लिए प्रदर्शनी स्थल पर लगातार बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इन संरचनाओं को देखकर दर्शकों की आंखों में कौतूहल और प्रशंसा साफ झलकती है, वहीं युवा स्काउट्स के लिए यह प्रदर्शनी प्रेरणा का सशक्त माध्यम बन रही है।




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