राष्ट्रपति, प्रधान न्यायाधीश ने मध्यस्थता को बढ़ावा देने की हिमायत की
केवडिया (गुजरात)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और अन्य वक्ताओं ने शनिवार को यहां एक सम्मेलन में कहा कि मध्यस्थता सहित वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र भारतीय कानूनी परिदृश्य को बदल सकता है, लेकिन कुछ अड़चनों के कारण उन्हें अभी तक व्यापक स्वीकृति नहीं मिली है। कोविंद और प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण समेत अन्य वक्ता गुजरात के नर्मदा जिले के केवडिया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के पास आयोजित मध्यस्थता और सूचना प्रौद्योगिकी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने कहा, सच कहा जाए तो मध्यस्थता में हर कोई विजेता होता है। ऐसा कहने के बाद यह भी स्वीकार करना होगा कि इस अवधारणा को अभी तक देश भर में व्यापक स्वीकृति नहीं मिली है। कुछ स्थानों पर पर्याप्त प्रशिक्षित मध्यस्थ उपलब्ध नहीं हैं। कई मध्यस्थता केंद्रों पर ढांचागत सुविधाओं को बेहतर करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन ‘‘अड़चनों'' का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए ताकि व्यापक आबादी को इस प्रभावी उपकरण से लाभ मिल सके। इस संबंध में प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, इसके अलावा, यदि हम वांछित परिणाम प्राप्त करना चाहते हैं तो सभी हितधारकों को मध्यस्थता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित करना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान की अवधारणा में लाखों लोगों को अपनी शिकायतों को निपटाने के लिए एक मंच प्रदान करके भारतीय कानूनी परिदृश्य को बदलने की क्षमता है।


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