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विलुप्त जलाशयों को बचाने का अंतिम प्रयास

नयी दिल्ली.  दिल्ली सरकार बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और वर्षों की अनदेखी के कारण विलुप्त जलाशयों को बचाने के लिए एक आखिरी प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय राजधानी में कुल 1,043 जल निकाय हैं जिन्हें विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित की गई है। इनमें से 1014 को भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस प्लेटफॉर्म) पर अंकित भी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 2019 में गठित दिल्ली आर्द्रभूमि प्राधिकरण (दिल्ली वेटलैंड अथॉरिटी) अब अगले साल जनवरी तक आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत उनमें से कम से कम 20 को अधिसूचित करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। इनमें संजय झील, हौज खास झील, भलस्वा झील, टीकरी खुर्द झील, वेलकम झील, दरियापुर कलां और सरदार सरोवर झील शामिल हैं। अधिसूचित होने के बाद, जल निकायों को अतिक्रमण, कूड़ा-करकट फेंकने, अनुपचारित अपशिष्ट जल और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों, और उद्योगों की स्थापना और विस्तार आदि के खिलाफ संरक्षित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, 62 जलाशयों के स्थान पर निजी भवन बन गए हैं, 52 अब सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं, 37 का पता नहीं चल पा रहा है, 14 जलाशयों का शिक्षण संस्थानों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है, 11 जलाशयों को पार्क और मनोरंजन केंद्र में बदल दिया गया है, 6 जलाशय वाणिज्यिक सेवाओं के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं और पांच जलाशयों पर अनधिकृत कॉलोनियां बन गईं हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक तकनीकी समिति के सदस्य ने बताया कि ''जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए फील्ड टीमों का गठन किया गया है। ये महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करेंगे जैसे कि इन जल निकायों का ऐतिहासिक प्रसार, उनकी क्षमता, वे कैसे विलुप्त हुए, कौन जिम्मेदार था, उनके स्थान पर क्या बन गया है, आदि। 

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