प्रख्यात जीवविज्ञानी प्रोफेसर एम विजयन का निधन
नयी दिल्ली. भारत में प्रोटीन क्रिस्टैलोग्राफी की नींव रखने वाले प्रमुख संरचनात्मक जीवविज्ञानी एम विजयन का रविवार को निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के पूर्व अध्यक्ष विजयन ने बेंगलुरु में अंतिम सांस ली।
भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में मॉलिक्यूलर बायोफिजिक्स यूनिट ने रविवार को घोषणा की, ‘‘गंभीर दुख के साथ हम सूचना देते हैं कि 24 अप्रैल 2022 की सुबह प्रो. एम विजयन का निधन हो गया है।'' वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक शेखर मांडे ने ट्वीट किया, ‘‘प्रोफेसर विजयन डोरोथी हॉजकिन और उनके दिग्गज समूह के साथ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में इंसुलिन संरचना के निर्धारण में शामिल थे।'' कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष जयराम रमेश ने कहा, ‘‘विजयन एक बहुत ही प्रतिष्ठित आणविक बायोफिजिसिस्ट थे और उन्होंने डोरोथी हॉजकिन की टीम के हिस्से के रूप में इंसुलिन की संरचना को उजागर करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। जॉर्जीना फेरी हॉजकिन के जीवनी लेखक ने उनकी भूमिका को बहुत अच्छी तरह से वर्णित किया है।'' 16 अक्टूबर 1941 को जन्मे विजयन ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी। विजयन ने 260 से अधिक सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक पत्र प्रकाशित किए थे और 38 शोध छात्रों और 20 पोस्ट-डॉक्टरल फेलो छात्रों का मार्गदर्शन किया था। विजयन को 1985 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और 2004 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।


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