प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं से आपातकाल के भयावह दौर को हमेशा याद रखने का आह्वान किया
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया है। आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में श्री मोदी ने कहा कि आने वाली पीढि़यों को आपातकाल के दौरान चलाए गए जन आंदोलन को कभी नहीं भूलना चाहिए। देश में 25 जून, 1975 को भयावह आपातकाल लगाया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि तब देश के नागरिकों के सभी अधिकार छीन लिए गए थे। उनमें से एक अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सभी नागरिकों को उपलब्ध जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार भी था। उन्होंने कहा कि देश के न्यायालय, संवैधानिक संस्थाएं और प्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उस समय प्रतिबंध की ऐसी स्थिति थी कि स्वीकृति के बिना कोई कुछ भी प्रकाशित नहीं कर सकता था। श्री मोदी ने याद दिलाया कि जब प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार ने सरकार की सराहना करने से इंकार कर दिया तो उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। रेडियो पर भी उनके गानों पर रोक लगा दी गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अनेक प्रयासों, हजारों की गिफ्तारी और लाखों लोगों पर अत्याचार के बावजूद लोकतंत्र में भारत के लोगों की आस्था नहीं डिगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक भावना सदियों से भारत के लोगों के संस्कार में चली आ रही है और आखिरकार उसकी जीत हुई। भारत के लोगों को आपातकाल से छुटकारा मिला और लोकतांत्रिक ढंग से लोकतंत्र की पुन: स्थापना हुई। श्री मोदी ने स्वीकार किया कि तानाशाही सोच और तानाशाही प्रवृति को लोकतांत्रिक ढंग से परास्त करने का ऐसा उदाहरण विश्व में तलाश करना मुश्किल है। श्री मोदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान सौभाग्य से वे भी इस संघर्ष के साक्षी बने और साझीदार रहे। उन्होंने कहा कि आज जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष का उत्सव मना रहा है तो भारत को आपातकाल के उस भयावह दौर को कभी नहीं भूलना चाहिए।









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