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सीएपीएफ में कांस्टेबल के पदों के लिए हिंदी, अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में होगी परीक्षा

नयी दिल्ली.  गृह मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) पदों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित कराए जाने को मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह ऐतिहासिक निर्णय सीएपीएफ में स्थानीय युवाओं की संख्या बढ़ाने और क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने की गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस फैसले की सराहना की । उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘एक ऐतिहासिक निर्णय, जो हमारे युवाओं की आकांक्षाओं को पंख देगा! यह हमारे विभिन्न प्रयासों का एक हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भाषा किसी के सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बनेगी।'' सीएपीएफ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (एनएसजी) शामिल हैं। बयान में कहा गया है, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए सीएपीएफ में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) पदों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित कराए जाने को मंजूरी दे दी है।'' हिंदी और अंग्रेजी के अलावा प्रश्नपत्र 13 क्षेत्रीय भाषाओं-असमिया, बांग्ला, गुजराती, मराठी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, ओड़िया, उर्दू, पंजाबी, मणिपुरी और कोंकणी में मुहैया कराया जाएगा। इस घोषणा से कुछ ही दिन पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शाह को पत्र लिखकर सीआरपीएफ कर्मियों की भर्ती के लिए तमिल को भी लिखित परीक्षा की भाषा के रूप में शामिल करने का अनुरोध किया था। गृह मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले के बाद लाखों परीक्षार्थी अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा दे पाएंगे, जिससे उनके चयन की संभावना बढ़ेगी। बयान में कहा गया कि गृह मंत्रालय और कर्मचारी चयन आयोग कई भारतीय भाषाओं में परीक्षा कराने के लिए मौजूदा समझौता ज्ञापन से संबंधित एक परिशिष्ट पर हस्ताक्षर करेंगे। कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) की परीक्षा आयोग द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाओं में से एक है और इसमें देश भर से लाखों परीक्षार्थी भाग लेते हैं। हिन्दी और अंग्रेज़ी के अतिरिक्त 13 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा का आयोजन एक जनवरी, 2024 से होगा।
बयान में उम्मीद जताई गई है कि अब राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारें व्यापक अभियान चलाकर स्थानीय युवाओं को अपनी मातृभाषा में परीक्षा देने के इस अवसर का उपयोग करने और देश की सेवा में करियर बनाने के वास्ते बड़ी संख्या में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग और विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कटिबद्ध है।

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