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 समृद्ध और आत्मनिर्भर गांवों के बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता : चौहान

नयी दिल्ली. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि गांवों के समृद्ध और आत्मनिर्भर बने बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। चौहान ने राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया। यह दो दिवसीय सम्मेलन 'ग्रामोदय से राष्ट्रोदय' विषय पर यहां पूसा परिसर में आयोजित किया गया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इसमें प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित ग्राम-विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने की रणनीतियों पर चर्चा हुई। 
सम्मेलन के दूसरे दिन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि गांव केवल मिट्टी, खेत और चौपालों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे भारत की शक्ति, चेतना और देश की आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, ''ग्रामीण भारत की प्रगति के बिना राष्ट्रीय प्रगति संभव नहीं है,'' और देश के विकास में गांवों की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। सम्मेलन में 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। चौहान ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब गांव आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, रोजगार के अवसर बढ़ें और वहां गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा तथा आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने घोषणा की कि 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (वीबी-जी राम-जी) योजना एक जुलाई से पूरे देश में लागू की जाएगी। यह योजना वर्तमान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का स्थान लेगी। मंत्री ने कहा कि नयी योजना के क्रियान्वयन के लिए 95,682 करोड़ रुपये की अंतरिम मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने राज्यों से सभी प्रक्रियागत औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया, ताकि योजना का सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। सम्मेलन में 'लखपति दीदी डैशबोर्ड' का शुभारंभ किया गया। साथ ही स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए डिजिटल मंच 'एसएचई एलईएपीएस (सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर-लाइवलीहुड्स एंड एंटरप्राइज एप्लीकेशन फॉर प्रॉस्पेरिटी एंड सस्टेनेबिलिटी)' यानी 'स्वयं सहायता उद्यमी – समृद्धि और सतत विकास के लिए आजीविका एवं उद्यम अनुप्रयोग' भी शुरू किया गया। 
चौहान ने कहा कि 'लखपति दीदी' बनाने का लक्ष्य तीन करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ महिलाओं का कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अगले पांच वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के बैंक ऋण से जोड़ने का रोडमैप तैयार किया गया है। ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपनी वित्तीय हिस्सेदारी समय पर जारी करें, ताकि परियोजनाओं और भुगतान में देरी न हो। उन्होंने ग्रामीण विकास से संबंधित रिक्त पदों को जल्द भरने और अधिकारियों के बार-बार तबादले से बचने की भी आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले अधिकारियों को सामान्यतः दो से तीन वर्ष तक एक ही स्थान पर कार्य करना चाहिए। चौहान ने सरकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार, सामाजिक अंकेक्षण को मजबूत करने तथा पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली के अधिक उपयोग पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि जहां कुछ राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, वहीं अन्य राज्यों को कार्यान्वयन में तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीण आवास योजना के पात्र भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि उपलब्ध कराने और लंबित आवास मामलों का शीघ्र समाधान करने पर जोर दिया। झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की बहु-चैनल विपणन व्यवस्था, सामुदायिक उद्यम और परिवार आधारित आजीविका ऋण योजनाओं जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि इन सफल मॉडलों का दस्तावेजीकरण कर अन्य राज्यों के साथ साझा किया जाएगा। उन्होंने राज्यों को आश्वासन दिया कि यदि मौजूदा नियमों या प्रक्रियाओं में व्यावहारिक कठिनाइयां आती हैं तो ग्रामीण विकास मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर आवश्यक संशोधन करेगा। 
सामान्य से कम वर्षा की आशंका पर चिंता जताते हुए चौहान ने 14 राज्यों से सतर्क रहने और किसी भी प्रतिकूल स्थिति से निपटने की तैयारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यों को जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत करने तथा आवश्यकता पड़ने पर ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित करने की तैयारी करने के निर्देश दिए। केंद्र और राज्यों के बीच साझेदारी का आह्वान करते हुए चौहान ने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहयोग का समय है। उन्होंने कहा कि केंद्र को नीति निर्माण, राज्यों को क्रियान्वयन, पंचायतों को जमीनी नेतृत्व और नागरिकों को विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी पर ध्यान देना चाहिए। सम्मेलन का समापन वीबी-जी राम-जी पहल के तहत आयोजित लोगो डिजाइन, प्रश्नोत्तरी और डिजिटल सामग्री प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करने के साथ हुआ। इस अवसर पर ग्रामीण विकास से जुड़े नए विचारों, नवाचारों और उभरते मॉडलों पर आधारित कई प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।
 

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