भारत-ग्रीस के बीच आर्थिक साझेदारी को नई गति, पीयूष गोयल ने की अहम बैठक
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ग्रीस के विकास मंत्री टाकिस थियोडोरिकाकोस के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें भारत और ग्रीस के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि बैठक में व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग, मजबूत सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ, ताकि दोनों देशों की साझा समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों देशों ने मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप्स और उभरती तकनीकों में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और ग्रीस के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए औद्योगिक सहयोग और सुदृढ़ सप्लाई चेन विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री इस समय एक उच्चस्तरीय भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ ग्रीस के दौरे पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ रणनीतिक आर्थिक सहयोग को नई गति देना है। दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल एथेंस स्टार्टअप बिजनेस इन्क्यूबेटर (टीएचईए) में आयोजित प्रेजेंटेशन और स्टार्टअप पिच कार्यक्रम में भी हिस्सा लेगा, जहां नवाचार आधारित साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। प्रतिनिधिमंडल एथेंस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसीसीआई) में भारतीय और ग्रीस के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विशेष गोलमेज बैठक करेगा। इन बैठकों में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटलीकरण, रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
ग्रीस दौरे से पहले पीयूष गोयल ने ब्रिटेन का तीन दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने लंदन में आयोजित ‘इंडिया-यूके: पार्टनर्स इन प्रोग्रेस बिजनेस प्लेनरी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) का समर्थन किया गया और इसे दोनों देशों के व्यापार एवं निवेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
आधिकारिक बयान के अनुसार, ब्रिटेन के बाद ग्रीस का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करना, नवाचार आधारित विकास को प्रोत्साहित करना और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की व्यापार एवं निवेश कूटनीति को नई मजबूती देना लक्ष्य है।





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