बारिश की बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी पूंजी है: मोदी
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को लोगों से वर्षा जल का संरक्षण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज बारिश की बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी पूंजी है। मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय के 'कैच द रेन' अभियान में जनता की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।
'कैच द रेन' जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के लिए भारत सरकार का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि चार जुलाई से जारी इस अभियान में गांवों, शहरों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के लोगों की भारी भागीदारी देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई है। मोदी ने कहा कि 'मन की बात' के पिछले संस्करण में उन्होंने 'कैच द रेन' अभियान की चर्चा की थी और लोगों से इसे जन-आंदोलन बनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा, '' 'कैच द रेन' का संदेश बहुत सरल है-जहां और जब भी बारिश हो, वहीं वर्षा जल का संरक्षण करें। इस पहल के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जलाशयों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण को नयी गति दी जा रही है। मुझे बहुत खुशी है कि गांव हों या शहर, पंचायतें हों या सामाजिक संस्थाएं हर जगह लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की है।'' देशभर में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कहीं पुराने तालाबों से गाद निकाली जा रही है, तो कहीं कुओं और बावड़ियों को फिर से जीवन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो बोरवेल अब उपयोग में नहीं हैं, उनका भूजल पुनर्भरण के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''मध्यप्रदेश के सीधी जिले में लगभग डेढ़ हजार तालाब बनाए गए हैं। नरसिंहपुर में 'अमृत सरोवरों' को संवारा गया है। महाराष्ट्र के नासिक में बड़ी मात्रा में पानी सहेजने की क्षमता विकसित हुई है।'' मोदी ने कहा, ''आंध्र-प्रदेश के नंद्याल में सभी ग्राम पंचायतें इस अभियान से जुड़ी हैं और पुराने तालाबों को फिर से उपयोगी बनाया गया है। हमारे शहर भी पीछे नहीं हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में इस अभियान के उत्साहजनक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''आइए, हम भी अपने आसपास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लें - पानी की हर बूंद बचाएं। आज बचाई गई हर बूंद, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।'' भाषा देवेंद्र नेत्रपाल









.jpg)
Leave A Comment