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नाले के पानी को भी बनाया जा सकता है सिंचाई के लायक

- सीएसआईआर ने विकसित की किफायती तकनीक

नई दिल्ली। सीएसआईआर ने सिंचाई के लिए नाले के गंदे पानी को साफ करने की किफायती तकनीक एक्वा रेजुव विकसित की है। इस संयंत्र की लागत महज साढ़े छह लाख रुपये है। यह प्रतिदिन 24 हजार लीटर गंदे पानी को साफ कर सकता है। इतने पानी से चार एकड़ जमीन की सिंचाई की जा सकती है।
सीएसआईआर की दुर्गापुर स्थित प्रयोगशाला सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमईआरआई) के निदेशक डॉ. हरीश हिरानी ने बताया कि यह संयंत्र नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। एनजीटी ने हाल में कहा था कि नाले के गंदे पानी को सीधे सिंचाई के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाए। ऐसे पानी से उगाए गए अनाज और फल-सब्जियों से बीमारियां हो सकती हैं। कई अध्ययनों में भी बाकायदा इस बात की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि यह उपकरण नाले के पानी को छह चरणों में साफ करता है तथा उसे पूर्ण रूप से सिंचाई के योग्य बनाता है। इसमें कई फिल्टर लगाए गए हैं जिनमें नाले की गाद जमा हो जाती है जिसे अलग से प्रोसेस करके खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। शोधन के बाद पानी पूरी तरह से रंग एवं गंधहीन हो जाता है।
संयंत्र को स्थापित करने के लिए थोड़ी ही जगह की जरूरत पड़ती है। उपकरण को हाल में पश्चिम बंगाल के पश्चिम वर्धमान जिले में परीक्षण के तौर पर स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी कीमत और स्थापित करने की लागत महज 6.5 लाख रुपये के करीब आती है। जो मौजूदा सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की तुलना में बेदह कम है। इसके अलावा इसे स्थापित करने के लिए बेहद कम जगह की जरूरत पड़ती है।
 

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