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 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की 'पीएम आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन' की शुरुआत

 वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से 'पीएम आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ योजना की शुरुआत करते हुए इसे पूरे देश में स्वास्थ्य के मूलभूत ढांचे को ताकत देने और भविष्य में महामारियों से बचाव की उच्चस्तरीय तैयारी का हिस्सा करार दिया।  प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी के मेहंदीगंज में एक जनसभा के दौरान इस मिशन की शुरुआत की। इसके अलावा उन्होंने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए 5,189 करोड़ रुपये से अधिक की 28 विभिन्न विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।
 प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को ताकत देने और भविष्य में महामारियों से बचाव के लिए हमारी तैयारी उच्च स्तर की हो, गांव और ब्लॉक स्तर तक हमारे हेल्थ सिस्टम में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता आए, इसके लिए आज काशी से मुझे 64000 करोड़ रुपए के आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन राष्ट्र को समर्पित करने का सौभाग्य मिला। भविष्य में किसी भी महामारी से निपटने के लिए हम तैयार हों, इसके लिए अपनी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को आज तैयार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि आज काशी के मूलभूत ढांचे से जुड़ी करीब 5000 करोड़ रुपए रुपये की परियोजनाओं का भी लोकार्पण किया गया है। इसमें सड़कों से लेकर घाटों की सुंदरता तक, गंगा और वरुणा की साफ सफाई, पुलों, पार्किंग स्थलों, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अनेक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारों के इस मौसम में जीवन को सुगम, स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए काशी में हो रहा यह विकास पर्व एक प्रकार से पूरे देश को नई ऊर्जा, नई शक्ति और नया विश्वास देने वाला है।
 प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारे यहां हर कर्म का मूल आधार आरोग्य को माना गया है लेकिन आजादी के बाद के लंबे कालखंड में आरोग्य और स्वास्थ्य सुविधाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितनी देश को जरूरत थी। देश में जिनकी लंबे समय तक सरकारें रहीं, उन्होंने देश के हेल्थ केयर सिस्टम के संपूर्ण विकास के बजाय उसे सुविधाओं से वंचित रखा। गांव में या तो अस्पताल नहीं थे, अस्पताल थे तो इलाज करने वाला नहीं था। हमारे हेल्थ केयर सिस्टम में व्याप्त कमियों ने गरीबों और मध्यम वर्ग में इलाज को लेकर हमेशा बनी रहने वाली चिंता पैदा की। आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन देश के हेल्थ केयर सिस्टम में इसी कमी को दूर करने का एक समाधान है।” उन्होंने कहा कि इस मिशन के तहत लक्ष्य यह है कि आने वाले चार-पांच सालों में देश के गांव से लेकर ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर तक ‘क्रिटिकल हेल्थ केयर नेटवर्क’ को सशक्त किया जाए। खास तौर पर पहाड़ी और पूर्वोत्तर के राज्यों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है जहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।
  प्रधानमंत्री  ने कहा कि आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तीन बड़े पहलू हैं। पहला, बीमारी का पता लगाने और उसके इलाज के लिए विस्तृत सुविधाओं के निर्माण से जुड़ा है। इसके तहत गांवों और शहरों में ‘हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर’ खोले जा रहे हैं, जहां बीमारियों की शुरुआत में ही पता लगाने की सुविधा होगी। दूसरा पहलू, रोगों की जांच के लिए टेस्टिंग नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। तीसरा पहलू देश में मौजूद लैब्स को और बेहतर बनाने से जुड़ा है। महामारियों के दौरान जांच के लिये बायोसेफ्टी लेवल—तीन की लैब चाहिए। ऐसी 15 नई लैब को क्रियाशील किया जाएगा। आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के माध्यम से देश के कोने-कोने में इलाज से लेकर क्रिटिकल रिसर्च तक एक पूरा इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है।
 प्रधानमंत्री ने कहा कि जब ऐसा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है तो उससे रोजगार का भी एक पूरा वातावरण विकसित होता है। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, लैब, फार्मेसी, साफ-सफाई, कार्यालय, ट्रैवल ट्रांसपोर्ट जैसे अनेक प्रकार के रोजगार उत्पन्न होंगे। हम से पहले वर्षों तक जो सरकार में रहे, उनके लिए स्वास्थ्य सेवा पैसा कमाने और घोटालों का जरिया रही है। गरीबों की परेशानी देखकर भी वे से दूर भागते रहे हैं। आज केंद्र और राज्य में वह सरकार है जो दलित गरीब शोषित वंचित पिछड़े मध्यम वर्ग सभी का दर्द समझती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में ज्यादा सीटें बढ़ने पर अब गरीब का बच्चा भी डॉक्टर बनने का सपना न सिर्फ देख सकेगा बल्कि उसे पूरा भी कर सकेगा। जब ज्यादा डॉक्टर होंगे तो देश के कोने-कोने में गांव-गांव में उतनी ही आसानी से डॉक्टर उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी का जिक्र करते हुए कहा, “अतीत में जिस प्रकार काम हुआ, अगर वह सही तरीके से होता, तो आज काशी की स्थिति क्या होती। दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी को इन्होंने अपने हाल पर छोड़ रखा था। लटकते बिजली के तार, उबड़—खाबड़ सड़कें, घाटों और गंगा मैया की दुर्दशा, जाम, प्रदूषण और अव्यवस्था... यही सब कुछ चलता रहता था। आज काशी का हृदय वही है, मन वही है लेकिन काया को सुधारने का ईमानदारी से प्रयास हो रहा है। जितना काम वाराणसी में पिछले सात सालों में हुआ है, उतना पिछले कई दशकों में नहीं हुआ।” गौरतलब है कि पांच साल तक चलने वाली 'पीएम आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन योजना' के लिए बजट में 64,180 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसकी घोषणा 2021-2022 के केंद्रीय बजट में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य देश के सुदूर हिस्सों में प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की क्षमता विकसित करना है। साथ ही देश में ही अनुसंधान, परीक्षण और उपचार के लिये एक आधुनिक व्यवस्थित तंत्र विकसित करना भी है।
इस योजना में 17,788 ग्रामीण तथा 11,024 शहरी स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के विकास के लिये समर्थन प्रदान करने तथा सभी ज़िलों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की स्थापना एवं 11 राज्यों में 3,382 ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों की स्थापना करने के लक्ष्य शामिल हैं।इसके अलावा 602 ज़िलों और 12 केंद्रीय संस्थानों में ‘क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक’ स्थापित करने में सहायता करना, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र तथा इसकी पांच क्षेत्रीय शाखाओं एवं 20 महानगरीय स्वास्थ्य निगरानी इकाइयों को मज़बूत करना भी इस योजना का लक्ष्य है। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने राज्य के सिद्धार्थनगर जिले में स्थानीय मेडिकल कॉलेज तथा आठ अन्य मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण किया।
 

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