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 इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 2030 तक पूरी तरह से शून्य कार्बन उत्सर्जन हवाई अड्डा बन जाएगा

नई दिल्ली। दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 2030 तक पूरी तरह से शून्य कार्बन उत्सर्जन हवाई अड्डा बन जाएगा। जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल के 2050 तक निर्धारित समयसीमा से पहले ही यह लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड-डीआईएएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विदेह कुमार जयपुरियार ने सीओपी-26 के दौरान एक कार्यक्रम में एक वीडियो संदेश में इसकी घोषणा की थी। दिल्ली एयरपोर्ट एसीआई के हवाई अड्डा कार्बन प्रमाणन के अंतर्गत प्रमाणन हासिल करने वाला एशिया प्रशांत क्षेत्र का पहला हवाई अड्डा है। डी आई ए एल ने हवाई अड्डे पर अक्षय ऊर्जा के उपयोग, हरित हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे का विकास, कई यात्री कनेक्टिविटी नेटवर्क, ऊर्जा संरक्षण और दक्षता में सुधार तथा हितधारक भागीदारी कार्यक्रमों जैसे विभिन्न कार्यक्रमों को लागू किया है। इसके अलावा, डी आई ए एल ने तकनीकी रूप से उन्नत इलेक्ट्रिक वाहनों और टैक्सीबॉट जैसे कई उपाय भी किए हैं। टैक्सीबॉट, एक अर्ध-रोबोटिक वाहन है, और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों को हवाई पट्टी तक ले जाने के साधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इस तरह की पहल करने वाला यह दुनिया का पहला हवाई अड्डा है। इससे ग्राउंड मूवमेंट के लिए विमानों द्वारा ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आई है।

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