- Home
- छत्तीसगढ़
- -प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा : व्यापम का विस्थापन और नए चयन मंडल का आगमन छत्तीसगढ़ में रोजगार के नए और साफ-सुथरे युग की शुरुआतरायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने विष्णुदेव साय सरकार द्वारा व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) को भंग कर 'कर्मचारी चयन मंडल' के गठन के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के युवाओं के हित में एक "ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम" बताया है। श्री ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने सत्ता संभालते ही युवाओं से किया अपना वादा निभाया है। व्यापम की पुरानी व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए यह बड़ा प्रशासनिक सुधार किया गया है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठाकुर ने कहा कि भ्रष्टाचारमुक्त पारदर्शी व्यवस्था कायम कर प्रदेश की भाजपा सरकार ने अब भृत्य से लेकर बाबू, सिपाही और राजपत्रित अधिकारियों तक की सभी भर्तियाँ एक ही छत के नीचे 'कर्मचारी चयन मंडल' द्वारा करने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। इससे भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता और शुचिता आएगी। कई राज्यों के मॉडलों का अध्ययन करने के बाद इस उत्कृष्ट बोर्ड का गठन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं का समयबद्ध आयोजन और परिणामों की त्वरित घोषणा सुनिश्चित करना है, ताकि युवाओं का कीमती समय बर्बाद न हो। श्री ठाकुर ने कहा कि यह युवाओं को बड़ी सौगात है। पिछली सरकार के समय परीक्षाओं में जो अनिश्चितता और अव्यवस्था का माहौल था, उसे साय सरकार ने जड़ से खत्म करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय प्रदेश के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए एक बड़ी सौगात है। उत्कृष्ट चयन मंडल का गठन प्रदेश में सुशासन और 'मोदी की गारंटी' को जमीन पर उतारने की दिशा में एक सशक्त कदम है। श्री ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के लिए प्रतिबद्ध है। व्यापम का विस्थापन और नए चयन मंडल का आगमन छत्तीसगढ़ में रोजगार के नए और साफ-सुथरे युग की शुरुआत है।
- -कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग ने की कार्यवाही-350 से अधिक गैस सिलेंडर जब्तरायपुर । कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार खाद्य विभाग रायपुर के संयुक्त जांच दल द्वारा जिले में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग, कालाबाजारी एवं अवैध रिफिलिंग के विरुद्ध विशेष अभियान चलाते हुए विभिन्न विकासखंडों में जांच कर कार्रवाई की गई।जांच के दौरान धरसींवा विकासखंड के सेजबहार क्षेत्र में स्थित कमल होटल में घरेलू एलपीजी गैस का व्यावसायिक उपयोग करते पाए जाने पर 14.2 किलोग्राम क्षमता के 8 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए। इसी क्षेत्र में बाबूलाल चिकन सेंटर में भी घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग पाया गया, जहां से 14.2 किलोग्राम क्षमता के 3 घरेलू सिलेंडर जब्त किए गए।इसी प्रकार अभनपुर-नवापारा क्षेत्र में स्थित रवि ग्लास एंड प्लाइवुड में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी करते पाए जाने पर 14.2 किलोग्राम क्षमता के 26 घरेलू सिलेंडर, 19 किलोग्राम क्षमता के 2 व्यावसायिक सिलेंडर तथा 5 किलोग्राम क्षमता के 4 सिलेंडर जब्त किए गए।इसके अतिरिक्त आज 12 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम द्वारा कोरासी इंडेन ग्रामीण वितरक गैस एजेंसी की भी जांच की गई। भौतिक सत्यापन के दौरान एजेंसी के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया गया। जांच में 14.2 किलोग्राम क्षमता के 101 भरे और 64 खाली घरेलू सिलेंडर, तथा 19 किलोग्राम क्षमता के 23 खाली व्यावसायिक सिलेंडर का अंतर सामने आया।इस अनियमितता के चलते एजेंसी के गोदाम में उपलब्ध कुल 355 घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों को जब्त कर एजेंसी की सुपुर्दगी में दिया गया।जांच में उक्त कृत्य द्रविकृत पेट्रोलियम गैस (वितरण एवं विनियमन) आदेश 2000 की विभिन्न कंडिकाओं का उल्लंघन पाया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग, कालाबाजारी और अवैध भंडारण के विरुद्ध जिले में आगे भी इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
- - डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने होली थीम पर की बैठकरायपुर। रंगों का त्योहार होली और गाठी (शक्कर माला) से हर किसी के बचपन की याद जुड़ी होती है। ऐसे में अपने बचपन को याद ताजा करने के हर एक पल को जीने वाले महाराष्ट्र मंडल के डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने उत्साह के साथ एक- दूसरे को गाठी की माला पहनाई। इसी बहाने सभी ने अपने- अपने बचपन के दिनों को याद किया। वहीं रंगबिरंगी टोपियों ने उनके उत्साह को दोगुना कर दिया।सखी निवास प्रभारी नमिता शेष ने बताया कि डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने मासिक बैठक होली की थीम होली पर रखी। बैठक में शनिवार को महाराष्ट्र मंडल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर केंद्र के सदस्यों की उपस्थिति और कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर चर्चा हुई। इस बीच बहुत से मनोरंजक गेम खेलकर होली मिलन भी मनाया गया।नमिता शेष ने बताया कि निर्धारित एक मिनट में जिसने सबसे ज्यादा लोगों को गाठी पहनाई, उसे विजेता घोषित किया गया। इस खेल में विजेता सोनल फड़नवीस और उप विजेता अर्चना टेंबे रहीं। बैठक में सौम्या इंगले, अर्चना टेंबे, अनुभा जाऊलकर, अंजलि काले, दिव्या पात्रीकर, विजया भाले, वर्षा नारखेड़कर, ज्योति डोलस, प्रिया जोगलेकर, दीपांजलि भालेराव, अर्चना कुलकर्णी, जया भावे, प्रियंका राजपूत, प्रीति रणदिवे, शैला गायधनी, रश्मि डांगे, माधवी गिरहे, श्रद्धा देशमुख, सरोजनी पराड़, शुभांगी रुद्रजवार, सृष्टि दंडवते, माधुरी इंचुलकर, संध्या अनिल, मीनाक्षी तारे सहित अनेक महिला सभासद उपस्थित थीं।
-
- पंडरी कपड़ा बाजार की 19 दुकानों की नियमानुसार सील खोलने के दिए निर्देश .
-व्यापारियों को पार्किंग व्यवस्था स्वतः करनी होंगी और नगर निगम रायपुर, रायपुर विकास प्राधिकरण, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के नियमानुसार व्यवस्था अंतर्गत प्रबंधन सुचारु बनाये रखना होगारायपुर - दिशा समिति की बैठक में रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा के साथ विगत दिनों नगर निगम रायपुर के अधिकारियों की उपस्थिति में पंडरी कपड़ा बाजार की 19 सीलबन्द की गयी दुकानों के संचालकों की हुई बैठक में बनी सहमति पर आज रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने रायपुर नगर निगम मुख्यालय भवन के महापौर कक्ष में पहुंचकर रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे और आयुक्त श्री विश्वदीप सहित नगर निगम रायपुर के अपर आयुक्त श्री पंकज के. शर्मा, नगर निवेशक श्री आभाष मिश्रा, कार्यपालन अभियंता श्री आशुतोष सिंह, पंडरी कपड़ा बाजार की सीलबन्द दुकानों के संचालकों की बैठक ली. बैठक में विगत दिनों सीलबंद की गयी 19 दुकानों की सील खोलने पर सहमति बनी.इस दौरान चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री सतीश थोरानो, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष श्री अमर पारवानी की भी उपस्थिति रही.यहां यह उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में पूर्व में पंडरी कपड़ा बाजार के व्यापारियों की मांग पर रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा द्वारा पंडरी कपड़ा बाजार की सीलबंद दुकानों की सील खोलने की अनुशंसा रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप को पत्र लिखकर की गयी थी.जानकारी दी गयी कि विगत दिनों दिशा समिति की बैठक में पंडरी कपड़ा बाजार के 19 दुकानदारों द्वारा अवैध तरीके से अपनी दुकान के दोनों ओर आगे और पीछे की ओर से शटर लगाए जाने पर नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए. इस पर नगर निगम मुख्यालय नगर निवेश उड़न दस्ता और जोन 2 नगर निवेश विभाग की टीम ने वहाँ पहुंचकर सम्बंधित 19 दुकानों को नियमानुसार सीलबन्द करने की कार्यवाही की. इस पर सीलबंद 19 दुकानों के सम्बंधित संचालकों ने रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा से मुलाकात की और उनसे सीलबंद दुकाने खोले जाने निर्देश देने अनुरोध किया. दिशा समिति की अगली बैठक में निर्णय लिया गया कि सम्बंधित दुकानदारों को स्वतः अपनी पार्किंग की व्यवस्था अपने ग्राहकों के लिए नियमानुसार करनी होंगी और रायपुर नगर निगम, रायपुर विकास प्राधिकरण, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की व्यवस्था अंतर्गत प्रबंधन सुचारु बनाये रखने नियमों का पालन करना होगा.आज रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने नगर निगम में सम्बंधित व्यापारियों की बैठक रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे और आयुक्त श्री विश्वदीप सहित ली, जिसमें रायपुर नगर निगम द्वारा रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा के साथ पूर्व में हुई नगर निगम अधिकारियों की बैठक में बनी सहमति पर नियमानुसार सीलबंद 19 दुकानों के सील को खोलने पर सहमति व्यक्त की गयी. -
-राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रूपए से अधिक निवेश प्रस्ताव
-भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया-जिससे राजस्व 20 प्रतिशत बढ़ा*-श्रमिक आवास एवं ई-रिक्शा की राशि 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए कर दी गई-अगले वर्ष से श्रमिकों के 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला हेतु अभिनव पहलरायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वाणिज्य एवं उद्योग विभाग तथा श्रम विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 01 हजार 823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 01 हजार 567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रूपए, श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रूपए शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश मंे नई औद्यागिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।उद्योग विभागउद्योेग मंत्री श्री देवांगन नेे कहा कि इस बजट में सरकार द्वारा राज्य के औद्योगिक विकास हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग को बजट में रुपए 1750 करोड़ आबंटित किया गया है। इसमें रूपए 652 करोड़ उद्योगों को अनुदान हेतु तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-अर्जन, भूमि विकास तथा औद्योगिक अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रूपए 700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि औद्योगिक भूमि आबंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि राजस्व में भी 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है।इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य द्वारा 140 से अधिक निवेशकों को इन्विटेशन टू इन्वेस्ट जारी किया गया है। राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल्स, आईटी, बीपीओ तथा क्लीन एनर्जी जैसे विविध और उभरते हुए क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।मंत्री श्री देवांगन नेे कहा कि विगत एक वर्ष में 951 उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके द्वारा रु 8000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया एवं हमारी सरकार आने के बाद लगभग 45000 से अधिक रोजगार उत्पन्न हुए। राज्य में बस्तर से सरगुजा तक 23 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों एवं पार्कों का निर्माण किया जा रहा है जिनमें से 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना है। राज्य शासन सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस दिशा में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उनके जीवन को सरल करने की दृष्टि से बिलासपुर जिले में 2 कामकाजी महिला हॉस्टल निर्माणाधीन है, जिसके लिए बजट में रुपए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। निजी भूमि पर औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित करने की दृष्टि से अधोसंरचना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान औद्योगिक विकास नीति में किया गया है। इससे राज्य केन औद्योगिक अधोसंरचना विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री के पहल पर स्टार्ट-अप मिशन के लिए रूपए 100 करोड़ का प्रावधान बजट के अंतर्गत किया है।श्रम विभागमंत्री श्री देवांगन सदन में कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में श्रम विभाग छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 प्रवर्ग के असंगठित श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिये वर्ष 2026-27 के बजट में कुल रुपये 128 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष से लगभग 3 करोड़ अधिक है। श्रमिक बच्चों को उत्कृष्ट स्कूल में शिक्षा की अभिनव पहल करते हुए प्रदेश में 96 श्रमिकों के बच्चों को 6वीं क्लास में डी.पी.एस. राजकुुमार कॉलेज, कांगेर वैली एकेडमी में निःशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला देने की घोषणा की थी, इस पर अमल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा उपकर के माध्यम से संकलित राशि से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के लिये उपलब्ध निधि से 60 प्रवर्ग में पंजीकृत 32.58 लाख निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं के क्रियान्वयन में वर्ष 2025 में लगभग रूपये 387 करोड़ से अधिक राशि कल्याणकारी योजनाओं में व्यय किया गया है। वर्ष 2026-27 में पंजीकृत 02.01 लाख संगठित श्रमिकों के लिये 14 योजनाओं हेतु बजट में राज्य शासन के अनुदान हेतु रुपये 06 करोड़ प्रावधान किया गया है। श्रम मंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के मुख्य दायित्व विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत श्रमिकों के हित संरक्षण किया जाना है, जिसके पालन हेतु श्रमायुक्त संगठन में रुपये 30 करोड़ 63 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 10 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। संचालनालय द्वारा कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखानों का लायसेंस नवीनीकरण, आनसाइट आपात योजना एवं कारखाना भवनों के नक्शे आदि का निराकरण भी आनलाईन ही किया जा रहा है। इंडस्ट्रियल हाईजिन लैब हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 05 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026-27 हेतु कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए रुपये 76 करोड़ 38 लाख का प्रावधान किया गया है।वाणिज्यक कर (आबकारी) विभागमंत्री श्री देवांगन नेे कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने हमने इस वित्तीय वर्ष में 10 जिला अधिकारी, 85 आबकारी उपनिरीक्षक की भर्ती की है तथा 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। वर्ष 2024-25 हेतु निर्धारित किये गये 10500 करोड़ (दस हजार पांच सौ करोड़) आबकारी राजस्व लक्ष्य के विरूद्ध 10145 करोड़ (दस हजार एक सौ पैतालीस करोड़) का आबकारी राजस्व अर्जित किया गया जो कि इससे पूर्व के वित्तीय वर्ष 2023-24 में अर्जित आबकारी राजस्व 8430 करोड़ (आठ हजार चार सौ तीस करोड़) की तुलना में 20.35 प्रतिशत अधिक है तथा राज्य के कुल कर राजस्व प्राप्ति का लगभग 11 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त नीति एवं विभागीय कार्ययोजना से आबकारी राजस्व में सुनिश्चित वृद्धि परिलक्षित हुई है। अतः आबकारी विभाग के लिये वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 12000 करोड़ (बारह हजार करोड़) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके विरूद्ध 28 फरवरी, 2026 तक रूपये 9660.00 करोड़ (नौ हजार छः सौ साठ करोड़) का राजस्व प्राप्त हो चुका है, जो कि कुल राजस्व लक्ष्य का 80.50 प्रतिशत है।मंत्री श्री देवांगन नेे कहा कि वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग में प्रशासनिक सुविधा एवं दक्षता हेतु नवा रायपुर में पृथक कम्पोजिट कार्यालय भवन का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। कम्पोजिट कार्यालय भवन में आबकारी मुख्यालय के साथ-साथ छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट ब्रेवरेज कारपोरेशन लिमिटेड, राज्य स्तरीय उड़नदस्ता कार्यालय, राज्य आबकारी प्रशिक्षण संस्थान, रासायनिक प्रयोगशाला एवं समान प्रांगण में प्रशिक्षु कर्मचारियों हेतु छात्रावास एवं प्रशिक्षण स्थल का निर्माण प्रस्तावित है। आबकारी विभाग के कम्पोजिट कार्यालय भवन निर्माण हेतु बजट में 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है। - - धनंजय राठौर सयुक्त संचालक, जनसंपर्क- लोकेश्वर सिंह सहायक जनसंपर्क अधिकारीरायपुर / स्वयं सहायता समूहों को कम ब्याज दर पर ऋण और कौशल विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे महिलाएं छोटी-छोटी आजीविका गतिविधियां (जैसे- खेती, पशुपालन, सिलाई, आधार से जुड़ी सेवाएं ) शुरू कर सकें। इस मिशन के अंतर्गत महिलाएं सशक्त बनकर न केवल परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर होकर सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जब महिलाओं को सही अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन में बदलाव लाती हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिला मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम दुधाशी की निवासी श्रीमती संगीता सिंह की कहानी भी महिला सशक्तिकरण की ऐसी ही प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने अपने परिश्रम और आत्मविश्वास से एक नई पहचान बनाई है।संगीता सिंह ने वर्ष 2021 में बीसी सखी के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। उनके माध्यम से गांव के लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलने लगा। पहले जहां ग्रामीणों को पैसे निकालने या बैंक से जुड़े कार्यों के लिए दूर शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाना पड़ता था, वहीं अब यह सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध होने लगीं। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बचने लगा और गांव के लोगों को बड़ी सुविधा मिली।संगीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने बिहान योजना के अंतर्गत अपने स्वयं सहायता समूह से 68 हजार रुपये का ऋण लिया था। इसी आर्थिक सहयोग से उन्होंने बीसी सखी के रूप में अपना कार्य शुरू किया। शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और सेवा भावना से उन्होंने धीरे-धीरे गांव के लोगों का विश्वास जीत लिया। आज गांव के लोग उन्हें भरोसे के साथ अपनी बैंकिंग सेवाओं के लिए संपर्क करते हैं।संगीता सिंह के समर्पण और उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन को देखते हुए मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर के जिला प्रशासन ने उन्हें नई जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया। आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में आधार सेवाओं के विस्तार के उद्देश्य से जिले में पांच नए आधार केंद्र खोले जा रहे हैं। इसी पहल के तहत संगीता सिंह को लैपटॉप सहित आधार किट प्रदान की गई। जिला प्रशासन की ओर से ईडीएम श्री नारायण केवर्त ने उन्हें यह आधार किट सौंपा।आधार किट मिलने के बाद संगीता सिंह अब अपने गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी। इनमें नया आधार पंजीयन, आधार अपडेट तथा अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने गांव के पास ही सुविधाएं मिल सकेंगी।संगीता सिंह की सफलता की कहानी पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को अवसर और सहयोग मिले तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उनकी उपलब्धि यह भी साबित करती है कि महिलाएं केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।जिला प्रशासन की यह पहल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत कर रही है। संगीता सिंह जैसी महिलाएं आज ग्रामीण भारत में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सही अवसर मिल जाए तो कोई भी महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है। बिहान योजना का उद्देश्य गरीबों, विशेष रूप से महिलाओं के लिए मजबूत संस्थाएं बनाकर और उन्हें वित्तीय और आजीविका सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच प्रदान करके गरीबी कम करने को बढ़ावा देना है।
- -समाज के अंतिम व्यक्ति तक के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध : श्रीमती राजवाड़े-महतारी वंदन योजना से राज्य की 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित-समाज कल्याण का बजट पिछले 5 वर्षों की तुलना में 59 प्रतिशत अधिक-प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी को पूरा करने बेटियों के भविष्य के लिए रानी दुर्गावती योजना होगी शुरू-नशा मुक्ति के लिए सामाजिक सहयोग से चलेगा अभियान, वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल के लिए “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर की होगी स्थापनारायपुर/ छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए 11 हजार 762 करोड़ 53 लाख रूपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं है। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 10,162 करोड़ 53 लाख रूपए तथा समाज कल्याण विभाग के लिए 1600 करोड़ रूपए से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है।महिला एवं बाल विकास विभागमंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है।श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक है। यह योजना राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हुई है। इसके तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। अब तक 25 किश्तों में 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इससे महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती के साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है और उनके जीवन में स्वावलंबन लाने का काम किया है।श्रीमती राजवाड़े ने सदन में कहा कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य योजना के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये तथा पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है।श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए ’किशोरी बालिका योजना’ के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छात्राओं की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ’शुचिता योजना’ के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोेदी जी के गारंटी को पूरा करने राज्य सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए ’रानी दुर्गावती योजना’ प्रारंभ करने जा रही है। इस योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हेें 1.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए इस वर्ष के बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पोषण अभियान के संचालन के लिए 125 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं की सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर, सखी निवास और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी योजनाओं के संचालन के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।समाज कल्याण विभागसदन को जानकारी देते हुए श्रीमती राजवाड़े ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत अधिक है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत प्रदेश में लगभग 21 लाख 76 हजार हितग्राहियों को पेंशन का लाभ डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है। इसके लिए 1402 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वृद्धाश्रमों के संचालन के लिए 6 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के लिए 20 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए विशेष विद्यालयों के संचालन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण तथा पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही उभयलिंगी कल्याण बोर्ड की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और सुरक्षा पहुंचाना है। इन्हीं बातों को ध्येय में रखकर हमारी सरकार सेवा, संवेदना और संकल्प के साथ समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।
- -प्रधानमंत्री-नरेन्द्र मोदी डीबीटी के जरिए छत्तीसगढ़ के 24.71 लाख से अधिक किसानों को अंतरित करेंगे 498.83 करोड़ रूपए-प्रदेश के 2.92 लाख वन पट्टाधारी और 37,400 विशेष पिछड़ी जनजाति किसानों को मिल रहा योजना का लाभ-पीएम नरेन्द्र मोदी गुवाहाटी से देश के 9.32 करोड़ किसानों के खाते में राशि अंतरित करेंगेरायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 13 मार्च को असम राज्य के गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के करीब 9.32 करोड़ किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22 वीं किस्त की राशि 18 हज़ार 650 करोड़ रुपये का अंतरण करेंगे। इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम से छत्तीसगढ राज्य के 24 लाख 71 हजार 498 किसानों के खाते में 498.83 करोड़ रूपए की राशि भेजी जाएगी। इस योजना के तहत छत्तीसगढ राज्य के 2 लाख 92 हजार वन पट्टाधारी और 37 हजार 400 विशेष पिछड़ी जनजाति किसानों को भी लाभान्वित किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के लाखों किसान सहित जनप्रतिनिधिगण राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद, कृषि महाविद्यालय जोरा रायपुर से जुड़ेंगे।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पी एम किसान उत्सव के तहत विभिन्न ग्राम पंचायतों में किसान बैठकों का आयोजन किया जाएगा और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी कराया जाएगा, ताकि किसान सीधे इस कार्यक्रम से जुड़ सकें।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी, जिसके अंतर्गत ’’पहली किश्त फरवरी 2019 में किसानों के खातों में जारी की गई थी’’। योजना प्रारंभ होने से लेकर अब तक प्रदेश के किसानों को ’’कुल 11 हजार 283 करोड़ 09 लाख रुपये’’ की राशि प्रदान की जा चुकी है, जिससे लाखों किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य शासन द्वारा ’’2 लाख 92 हजार वन पट्टाधारी किसानों’’ तथा ’’37 हजार 400 विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) के किसानों’’ को भी योजना में पंजीयन कर लाभान्वित किया जा रहा है।विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के किसानों को योजना का लाभ प्रदान करने के लिए ’’कृषि भूमि की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है’’। योजनांतर्गत सभी ’’एकल एवं संयुक्त खाता धारक किसान परिवार’’, जिनके नाम भू- अभिलेख के रिकार्ड में दर्ज हैं, योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि देश के कृषक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना ’’दिसम्बर 2018 से लागू की गई है’’। यह योजना ’’भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित’’ है। इसके अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को ’’प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता राशि’’ प्रदान की जाती है, जिसे ’’2-2 हजार रुपये की तीन समान किश्तों में प्रत्येक चार माह के अंतराल पर डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाता है’’। योजना का लाभ सभी वर्ग एवं श्रेणी के उन किसानों को दिया जाता है जिनका नाम भू- अभिलेख में दर्ज है। योजनांतर्गत ’’सभी एकल एवं संयुक्त खाता धारक किसान परिवार’’, जिनके नाम भू-अभिलेख में दर्ज हैं, ’’वन अधिकार पट्टाधारी किसान’’ तथा ’’विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के किसान’’ लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं।
- -मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय कलाकार होंगे शामिल-सजेगा आदि रंग, आदिवासी परिधान और हाटरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर 13 और 14 मार्च 2026 को नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में ’परम्परा से पहचान तक’ - आदि परब - 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से ‘आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस दो दिवसीय आयोजन में छत्तीसगढ़ की 43 जनजातियों के साथ-साथ मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय समुदाय भी शामिल होंगे। इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा पारंपरिक ज्ञान के संवर्धन को बढ़ावा देना है। इस आयोजन में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के जनजातीय कलाकारों शिल्पकारों तथा जनजातीय समुदायों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम के माध्यम से जनजातीय कला, परंपराओं, हस्तशिल्प, लोक जीवन एवं सांस्कृतिक विविधता को एक साझा मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि-परिधान जनजातीय अटायर शो” का आयोजन 13 मार्च को सुबह 10.30 बजे से शाम 8 बजे तक और 14 मार्च को शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा।इस आयोजन में राज्य की 43 जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक विशेषताओं को पहली बार एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। आदि परब के तहत “आदि रंग - जनजातीय चित्रकला महोत्सव” भी आयोजित होगा। इसी तरह “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन होगा।
- -स्व-सहायता समूह की ताकत से बदली जिंदगीरायपुर । मजबूत हौसले और सही मार्गदर्शन से साधारण परिस्थितियों में भी सफलता की नई राह बनाई जा सकती है। छत्तीसगढ राज्य के मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के संकुल केल्हारी अंतर्गत ग्राम चरवाही की निवासी श्रीमती सीता बाई ने अपने प्रयासों और स्व-सहायता समूह की शक्ति से यही कर दिखाया है। कभी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने वाली साधारण गृहिणी आज बिहान – छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एन आर एल एम )के सहयोग से आत्मनिर्भर बनकर गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम चरवाही में शिव शंकर महिला स्व-सहायता समूह का गठन 23 जनवरी 2018 को बिहान योजना के अंतर्गत किया गया था, जिसमें 10 महिलाएं सदस्य के रूप में जुड़ीं। विकासखंड मिशन प्रबंधन इकाई के मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के माध्यम से समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया। इसी दौरान सीता बाई भी समूह से जुड़ीं और प्रारंभ में समूह की अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।समूह को प्राप्त आरएफ और सीआईएफ राशि में से लगभग 60 हजार रुपये की सहायता लेकर सीता बाई ने अपने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। धीरे-धीरे दुकान अच्छी तरह चलने लगी और यह उनके लिए स्थायी आय का साधन बन गई। दुकान से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की आय होने लगी, जिसमें करीब 6 हजार रुपये शुद्ध लाभ मिलता है।श्रीमती सीता बाई ने इसके साथ ही मुर्गी पालन और सेंट्रिंग प्लेट का कार्य भी शुरू किया। इन गतिविधियों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय होने लगी। इस प्रकार अपनी मेहनत और लगन से सीता बाई ने आजीविका के कई स्रोत विकसित कर लिए।शिव शंकर महिला स्व-सहायता समूह को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 15 हजार रुपये की आरएफ राशि, 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि तथा 3 लाख रुपये का बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इसी सहयोग से समूह की महिलाओं ने अपने-अपने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ीं। सीता बाई ने भी अपने व्यवसाय में लगभग 80 हजार रुपये का निवेश कर मजबूत आजीविका आधार तैयार किया।आज सीता बाई अपनी किराना की दुकान, मुर्गी पालन और सेंट्रिंग प्लेट के माध्यम से लगभग 1.60 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। कभी साधारण गृहिणी के रूप में जीवन बिताने वाली सीता बाई आज गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। सीता बाई का कहना है कि उन्होंने अपने परिवार के लिए जो सपना देखा था, वह मेहनत, आत्मविश्वास और समूह के सहयोग से साकार हुआ है।“बिहान” योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान से भरा नया जीवन भी दिया। सीता बाई की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और सामूहिक सहयोग मिले तो वे न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।
- -बिहान से जुड़कर बनीं कार और ट्रेक्टर की मालकिनरायपुर। राजकुमारी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से गरीबी की बेड़ियों को तोड़कर स्वावलंबन का एक नया इतिहास रचा है। बस्तर के विकासखंड दरभा अंतर्गत ग्राम लेंड्रा की निवासी राजकुमारी कश्यप की जीवन यात्रा संघर्ष और आत्मविश्वास का एक जीवंत उदाहरण है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले राजकुमारी का जीवन अनिश्चितताओं से भरा था। उनके पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था और वे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खेतों में मजदूरी करने या जंगलों से प्राप्त वनोपज एवं अन्य संसाधनों पर निर्भर थीं। उस दौर में वे न केवल गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं।राजकुमारी के जीवन में बदलाव की शुरुआत बिहान योजना के माध्यम से हुई, जब वे वर्ष 2015 में सूरजमुखी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से मिलने वाले प्रशिक्षणों ने न केवल उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा जगाई, बल्कि उन्हें अपनी समस्याओं के खिलाफ मुखर होना भी सिखाया। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने पशुपालन, चूजा ब्रुडिंग इकाई तथा राशन दुकान के संचालन जैसे विविध व्यवसायों को अपनी आजीविका के रूप में अपनाया। आज वे एक कुशल पशुपालन उद्यमी के रूप में न केवल अपने ब्लॉक, बल्कि अन्य विकासखंडों में भी चूजों की सप्लाई और पशुओं के टीकाकरण का कार्य सफलतापूर्वक कर रही हैं।राजकुमारी दीदी की यह उद्यमशीलता उनके जीवन में एक बड़ी क्रांति लेकर आई है। कभी दूसरों के घर मजदूरी करने वाली राजकुमारी की आय 11 वर्षों के भीतर साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपए तक पहुँच गई है, जिससे उनके परिवार का जीवन स्तर पूरी तरह बदल गया है। कभी मिट्टी के घर में रहने वाली राजकुमारी दीदी ने अब अपना पक्का घर बना लिया है और उनके पास खेती के लिए ट्रैक्टर, दो मोटरसाइकिल तथा एक चार पहिया कार भी है। आर्थिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ उन्होंने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई और अपनी सामाजिक पहचान भी बनाई। वर्तमान में वे संकुल संगठन की अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। अब उनका लक्ष्य अपनी खुद की हैचरी (मदर यूनिट) स्थापित करना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तार दे सकें।
- -राज्य में हाथ से मैला उठाने की प्रथा (मैनुअल स्केवेंजर्स) का हुआ उन्मूलनरायपुर ।आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ शासन के अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति की बैठक मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित हुई।बैठक में भारसाधक सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग श्री बसव राजू, आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग डॉ. सारांश मित्तर, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्री वी.पी. तिर्की, संयुक्त सचिव श्री अनुपम त्रिवेदी, अपर संचालक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग श्री एन. बुलीवाल, द.पू.म.रे. से मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक श्री रणजीत सुमन, सहायक निदेशक, जनगणना निदेशालय श्री एम.के. महलांगे, एनजीओ से श्रीमती सुनिता कुर्रे, समुदाय की महिला एवं पुरूष प्रतिनिधि क्रमशः श्रीमती उत्तरा प्रहरे एवं श्री राजपाल कसेर सहित विभाग के अपर संचालक श्री जितेन्द्र गुप्ता, उपायुक्त श्री विश्वनाथ रेडडी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कहा कि शासन द्वारा राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है उन्होंने बताया कि माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। इस जानकारी को भारत सरकार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, नई दिल्ली को प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जबरन/दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों हेतु दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है।उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों/संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की।बैठक में वर्ष 2019 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन के प्रतिषेध और उनके पुनर्वास नियम, 2013 के अंतर्गत नगर पालिकाओं एवं अन्य विभागों से प्राप्त जिलों की पुनर्सर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं भारत सरकार को रिपोर्ट प्रेषित किए जाने हेतु अनुमोदन किया गया।बैठक में उपस्थित सदस्यों से प्राप्त सुझावों के आधार पर उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र एवं टाउनशिप में कार्य करने वाले मजदूर वर्ग हेतु स्वच्छ शौचालय बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा प्रत्येक जनपद पंचायत क्षेत्र में सीवरेज डंपिंग के लिए एक से दो गाडि़यों की उपलब्धता पर बल दिया। साथ ही ऐसे क्षेत्र जहां पर अभी तक स्वच्छ शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है वहां तत्काल गैप फिलिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छता की दिशा में बेहतरीन कार्य हेतु मेघालय एवं उत्तर पूर्व राज्यों के कुछ ग्रामों का भी उल्लेख किया।
- -मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से बदली हेमलता की किस्मतरायपुर। बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम माड़पाल की रहने वाली हेमलता कश्यप की कहानी आज उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को दम तोड़ने देते हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटे से गांव में रहने वाली हेमलता के परिवार की आर्थिक स्थिति कभी काफी चुनौतीपूर्ण थी। महज एक एकड़ कृषि भूमि और छह सदस्यों वाले बड़े परिवार की जिम्मेदारी के बीच 12वीं पास हेमलता हमेशा से अपने पिता पाकलु कश्यप का हाथ बंटाना चाहती थीं। उनके मन में कुछ कर गुजरने की सोच तो थी, लेकिन सही दिशा और पूंजी का अभाव आड़े आ रहा था।इसी दौरान हेमलता की नजर अखबार में छपी मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना पर पड़ी। उन्होंने इसे अपनी किस्मत बदलने के अवसर के रूप में देखा और अपने पिता के साथ जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जगदलपुर के कार्यालय पहुंचीं। वहां अधिकारियों से मिली विस्तृत जानकारी ने उनके भीतर किराना दुकान शुरू करने का उत्साह जगा दिया। उनके घर की स्थिति भी व्यापार के अनुकूल थी, क्योंकि उनका मकान मुख्य मार्ग पर स्थित था। सबसे बड़ी बात यह थी कि गांव में किराने की दुकान न होने के कारण ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए 10 किलोमीटर दूर नगरनार जाना पड़ता था। ग्रामीणों की इस असुविधा को दूर करने और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प के साथ हेमलता ने ऋण के लिए आवेदन किया।दिसंबर 2022 में माड़पाल स्थित छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा से उन्हें 2 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें शासन की ओर से 50 हजार रुपये का अनुदान भी मिला। इस राशि से उन्होंने मेसर्स कश्यप किराना स्टोर्स की नींव रखी। व्यवसाय शुरू होते ही उनकी मेहनत रंग लाने लगी और आज उनकी दुकान पर प्रतिदिन हो रही बिक्री के कारण उन्हें हर दिन 500 से 700 रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त होती है।हेमलता ने महज तीन वर्षों के भीतर अपने ऋण की पूरी राशि का भुगतान कर दिया है और अब उनका वार्षिक टर्नओवर 2 से 3 लाख रुपये के बीच है। आज हेमलता न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि अपनी सफलता से बेहद खुश और संतुष्ट भी हैं। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास आज एक सशक्त स्वरोजगार मॉडल बन चुका है, जो यह संदेश देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन से ग्रामीण अंचलों में भी खुशहाली के नए द्वार खोले जा सकते हैं।
- -छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक सम्पन्नरायपुर। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक का आयोजन 12 मार्च को बोर्ड कार्यालय के सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने की।बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बैठक में निर्देश दिए कि बोर्ड और शासन की योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने स्थानीय वैद्यों के स्थायी पंजीकरण के लिए भी आवश्यक प्रयास करने को कहा।बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने बैठक में कहा कि औषधीय पौधों का क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा है। उन्होंने कहा कि हमारा सपना है कि बस्तर औषधीय पौधों के माध्यम से दुनिया के समृद्ध क्षेत्रों में शामिल हो।बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं और गतिविधियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें वन क्षेत्रों में औषधीय पौधों का रोपण, औषधीय पौधों की खेती (कृषिकरण) तथा विभिन्न नवाचार कार्यों की जानकारी दी गई।मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने आश्वस्त किया कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्देशानुसार जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर बस्तर क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का कार्य शुरू किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में बस्तर क्षेत्र में पहले से लगाए गए पाम और नीलगिरी के प्लांटेशन में औषधीय पौधों की मल्टी- क्रॉपिंग के माध्यम से कार्य किया जाएगा।बैठक में नारायण संकल्प फाउंडेशन रायपुर की श्रीमती सीमा गुप्ता, एन.डी. मेमोरियल फाउंडेशन दुर्ग के श्री शालीभद्र मुथा, क्रिस्टल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसायटी की श्रीमती रीनू छाबड़ा सहित बोर्ड की योजनाओं से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा बोर्ड के तकनीकी सलाहकार और कर्मचारी भी बैठक में शामिल हुए।
- -SANKALP पर आधारित होंगी राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं, इस प्रदेश का हर जन स्वस्थ रहे, यही है सरकार का उद्देश्य: स्वास्थ्य मंत्री-राज्य में शासकीय कर्मचारियों को कैशलेस इलाज सुविधा के लिए बजट मेें 100 करोड़ रूपए का प्रावधान-स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के विभागों के लिए 6 हजार 976 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित-रायपुर में बनेगा मध्य भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, बजट में 95 करोड़ रूपए का प्रावधान-शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में छात्रावास निर्माण के लिए 83 करोड़ रूपए से अधिक का प्रावधान-नवीन पांच शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए 1,240 पद तथा संबंधित चिकित्सालयों के लिए 500 पदों का प्रावधान-मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना के अंतर्गत पिछड़ा के विद्यार्थियों को मिलेगी निःशुल्क आवासीय सुविधाएं, बिलासपुर में खुलेगा 500 सीटर कन्या प्रयास आवासीय विद्यालयरायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 6976 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित हो गई है।अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए विभागीय मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं SANKALP पर आधारित होंगीं। इसमें S-Strengthened Institutions (सशक्त संस्थान), A-Academic Excellence (उत्कृष्ट अकादमिक गुणवत्ता), N-Next Generation Research (नवोन्मेषी अनुसंधान), K-Knowledge & Clinical Competency (कौशल एवं क्लीनिकल दक्षता), A-Advance Medical Facilities (आधुनिक चिकित्सा सुविधा), L-Life Saving Infrasturcture (जीवन रक्षक अधोसंरचना) तथा P-Professional & Transparent Governance (पारदर्शी प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी) शामिल हैं।स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के सभी शासकीय अधिकारियोें- कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की योजना शुरू करने की बात कही। इसके लिए बजट में 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि इस प्रदेश का हर जन स्वस्थ रहे। प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें। उन्होंने बताया कि गंभीर बीमारियों के उपचार को सुलभ बनाने के लिए प्रदेश में 25 नए डायलिसिस केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही आम नागरिकों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए 50 जन औषधि केंद्रों का विस्तार किया जाएगा।मंत्री ने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रायपुर में प्रदेश का पहला होम्योपैथी कॉलेज स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा बिलासपुर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी, जिससे कैंसर मरीजों को अत्याधुनिक उपचार सुविधा प्रदेश में ही उपलब्ध हो सकेगी।मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि रायपुर में मध्य भारत का अत्याधुनिक कार्डियक इंस्टीट्यूट स्थापित करने की योजना है। यह संस्थान प्रदेश के नागरिकों को उच्च स्तरीय हृदय उपचार की सुविधा प्रदान करेेगा। वहीं सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में अधोसंरचना विकास के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे बाल हृदय उपचार सेवाओं को और अधिक मजबूत एवं व्यापक बनाया जा सकेगा।स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अंबिकापुर और धमतरी में जिला अस्पतालों के नए भवन बनाए जाएंगे। इसके अलावा रायपुर के कालीबाड़ी क्षेत्र में 200 बिस्तरों वाला मातृ एवं शिशु चिकित्सालय तथा चिरमिरी में नया जिला अस्पताल बनाया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने के उद्देश्य से दुर्ग, कोंडागांव, जशपुर और रायपुर में जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।मंत्री ने बताया कि रायपुर में मध्य भारत के सबसे आधुनिक इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला के लिए 95 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रयोगशाला के शुरू होने से राज्य को दिल्ली जैसे महानगरों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी एवं छत्तीसगढ़ के साथ अन्य सीमावर्ती राज्यों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं मिल सकेेंगी।चर्चा के दौरान श्री जायसवाल ने कहा कि राज्य में शीघ्र ही एम्बुलेंस की कमी दूर होगी। राज्य के सभी जिलों के लिए 300 नए एम्बुलेंस के लिए टेण्डर प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त वेंटीलेटर युक्त 70 अत्याधुनिक एम्बुलेंस तथा नवजात शिशुओं के लिए सर्वसुविधाजनक 10 अन्य एम्बुलेंस क्रय करने की प्रक्रिया भी शीघ्र ही पूर्ण कर ली जाएगी।चिकित्सा शिक्षा विभागचिकित्सा शिक्षा मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लिए संचालनालय चिकित्सा शिक्षा हेतु 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है। नवीन पांच शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों (दंतेवाड़ा, मनेन्द्रगढ़, जशपुर, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम) के लिए 1,240 पद तथा संबंधित चिकित्सालयों के लिए 500 पदों का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर के ट्रामा सेंटर भवन निर्माण केे लिए भी बजट का प्रावधान किया गया है। चिकित्सा महाविद्यालयों और संबद्ध अस्पतालों में उपकरणों की खरीदी के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।स्वास्थ्य मंत्री ने चर्चा में कहा कि राज्य के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में छात्रावास निर्माण के लिए बजट में 83 करोड़ रूपए से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, अम्बिकापुर तथा जगदलपुर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में छात्रावास का निर्माण किया जाएगा।आयुष विभागमंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आयुष विभाग के तहत 544 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। औषधियों के लिए 25.73 करोड़ रुपये तथा उपकरणों के लिए 4.16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जनभागीदारी के माध्यम से 7 आयुर्वेद चिकित्सालय, 13 आयुष पॉलीक्लिनिक और 692 आयुष औषधालयों के उन्नयन के लिए भी बजट रखा गया है। रायपुर स्थित शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय परिसर में छात्रावास और सेमीनार हॉल का निर्माण किया जाएगा।अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभागमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस विभाग के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के लिए मांग संख्या 66 के तहत कुल 251 करोड़ 68 लाख 38 हजार रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।चर्चा का जवाब देते हुए श्री जायसवाल ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना शुरू करने की बात कही। इस योजना के अंतर्गत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को निःशुल्क शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बिलासपुर में 500 सीटर कन्या प्रयास आवासीय विद्यालय, रायपुर में 200 सीटर पोेस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास, रायगढ़ में 100 सीटर पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास, मनेन्द्रगढ़ में 100 सीटर पोेस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास एवं जशपुर में 50 सीटर प्री-मैट्रिक बालक एवं बालिका छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए बजट में 20 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।चर्चा के दौरान श्री जायसवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान देने के लिए सीजी असिस्टेंस फॉर कम्पेटेटिव एक्जामिनेशन (CG-ACE) योजना के अंतर्गत उड़ान, शिखर तथा मंजिल योजना की शुरूआत की जाएगी। बजट में इसके लिए 9 करोड़ 63 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।बजट चर्चा में नेता प्रतिपक्षडॉ. चरण दास महंत,विधायक सर्वश्री धर्मजीत सिंह, दलेश्वर साहू, ईश्वर साहू, प्रणव मरपच्ची, आशाराम नेताम, प्रमोद मिंज, अनुज शर्मा, पुन्नूलाल मोहले, राघवेन्द्र कुमार सिंह, कुंवर सिंह निषाद, लखेश्वर बघेल, भोलाराम साहू, दिपेश साहू, प्रेमचंद पटेल, विनायक गोयल, रोहित साहू, रामकुमार यादव, व्यास कश्यप, सुशांत शुक्ला, श्रीमती संगीता सिन्हा, श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा, श्रीमती सावित्री मंडावी, श्रीमती उत्तरी जांगड़े, श्रीमती अंबिका मरकाम सहित श्रीमती यशोदा वर्मा शामिल रहे।
- -5 मई को निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन किया जाएगारायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आगामी आम एवं उप निर्वाचन 2026 के लिए निर्वाचक नामावली तैयार एवं पुनरीक्षित किए जाने हेतु कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली दिनांक 01 अप्रैल 2026 की स्थिति के आधार पर तैयार की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम संबंधित स्थानीय निकाय के क्षेत्र, वार्ड अथवा पंचायत से संबंधित भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में दर्ज होंगे, वही मतदाता स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज कराने के पात्र होंगे।जारी कार्यक्रम के अनुसार दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तिथि 23 अप्रैल 2026 तक जिन मतदाताओं के नाम भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा निर्वाचक नामावली में दर्ज होंगे, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रारूप क-1 में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर स्थानीय निकाय की निर्वाचक नामावली में अपना नाम दर्ज करा सकेंगे।नगरीय निकाय उप निर्वाचन के अंतर्गत अध्यक्ष के कुल 02 पद, क्रमशः नगरपालिका परिषद सारंगढ़ (जिला-सारंगढ़-बिलाईगढ़) तथा नगरपालिका परिषद शिवपुर-चरचा (जिला-कोरिया) में रिक्त हैं, साथ ही पार्षदों के 15 पद भी रिक्त हैं। इसके अतिरिक्त नवगठित चार निकायों—नगर पंचायत घुमका (जिला-राजनांदगांव), नगर पंचायत बम्हनीडीह (जिला-जांजगीर-चांपा), नगर पंचायत शिवनंदनपुर (जिला-सूरजपुर) तथा नगर पंचायत पलारी (जिला-बलौद)—में अध्यक्ष के 04 पद तथा पार्षदों के कुल 60 पद रिक्त हैं।इसी प्रकार त्रिस्तरीय पंचायतों में जनपद पंचायत सदस्य के 08 पद, सरपंच के 78 पद तथा पंच के 1056 पद रिक्त हैं। इस प्रकार प्रदेश के 33 जिलों में कुल 1142 पद रिक्त हैं, जिनका निर्वाचन कराया जाना है।निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु जारी कार्यक्रम के अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा प्राधिकृत अधिकारियों का प्रशिक्षण 24 मार्च 2026 तक कराया जाएगा तथा निर्वाचक नामावली का मुद्रण 09 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा, जिसके बाद दावे-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावे-आपत्तियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जबकि प्रारूप क-1 में दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल 2026 होगी। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा दावे-आपत्तियों के निराकरण के आदेश के विरुद्ध अपील ऐसा आदेश पारित होने के 05 दिवस के भीतर सक्षम अधिकारी के समक्ष की जा सकेगी। निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा।
- -सभी कलेक्टरों को सर्वे कर 15 दिवस में प्रमाण पत्र सहित रिपोर्ट देने के निर्देशरायपुर । देश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।
- अफवाहों से बचें....जागरूक नागरिक बनेंबालोद/ जिले में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। कृपया अनावश्यक रूप से गैस की बुकिंग न करें।संयुक्त जिला कार्यालय में आज जिले के सभी घरेलू एलपीजी गैस एजेंसी संचालकों की बैठक आयोजित कर, उपलब्ध स्टॉक एवं वितरण के संबंध में जानकारी ली गई। बैठक में अपर कलेक्टर श्री अजय किशोर लकरा, जिला खाद्य अधिकारी श्री तुलसी ठाकुर सहित जिले के सभी गैस एजेंसी संचालक मौजूद थे।आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 पर संपर्क करें।
- संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान जरूरी: आदिवासी समाज और मातृशक्ति का अपमान देश कभी स्वीकार नहीं करेगा : मुख्यमंत्रीरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी को कड़ा पत्र लिखकर भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के साथ हाल ही में हुए व्यवहार पर गहरी आपत्ति जताई है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि जनजातीय समाज से आने वाली देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति के साथ किया गया यह व्यवहार केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था, आदिवासी समाज और मातृशक्ति का अपमान है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में कहा है कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं और शिष्टाचार पूरी दुनिया में सम्मानित रहे हैं। मतभेद को कभी भी मनभेद में न बदलने की हमारी संस्कृति रही है, लेकिन राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन न किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले एक जनजातीय समाज से आने वाली महिला राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं में लापरवाही और उनका अपमान किया जाना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह घटना देश के करोड़ों आदिवासियों, पिछड़ों, दलितों और मातृशक्ति की भावनाओं को गहराई से आहत करने वाली है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यह पहली बार हुआ है जब किसी राज्य सरकार के व्यवहार को लेकर स्वयं राष्ट्रपति जी को अपनी पीड़ा सार्वजनिक करनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक इतिहास में अत्यंत चिंताजनक है और इससे पश्चिम बंगाल जैसे प्रतिष्ठित राज्य की छवि को भी ठेस पहुंची है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में संदेशखाली की घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी जनजातीय समाज की महिलाओं के साथ हुई घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा कि वंचित और जनजातीय समाज के साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुश्री ममता बनर्जी से आग्रह किया है कि वे इस विषय पर देश और समाज से क्षमा मांगते हुए अपनी भूल स्वीकार करें तथा भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए देश को आश्वस्त करें।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में राष्ट्रपति देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था का प्रतीक हैं और उनके सम्मान से ही लोकतंत्र की गरिमा जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर संवैधानिक पदों का सम्मान किया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट कहा कि जनजातीय समाज से आने वाली राष्ट्रपति के सम्मान से जुड़ा यह विषय पूरे देश की अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है, इसलिए देश और समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रकरण में जिम्मेदारी के साथ कदम उठाए जाना आवश्यक है।
- छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकातरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने सौजन्य मुलाकात की।मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण और सशक्त स्तंभ है। आने वाले समय में आप सभी के कंधों पर समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आप सभी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए इन जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि न्यायपालिका आमजन के अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सांवत, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक श्रीमती निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
- रायपुर/ जाने-माने उद्योगपति श्री नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनीजिन्दल स्टील लिमिटेडने अपनी विकास यात्रा में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। राष्ट्र निर्माण को समर्पितजिन्दल स्टील को ओडिशा के क्योंझर जिले में दो प्रमुख लौह अयस्क ब्लॉकों के लिए'पसंदीदा बोलीदाता'घोषित किया गया है।ओडिशा सरकार ने दिसंबर 2025 में अधिसूचित 12 खनिज ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी के सफल समापन के बाद यह घोषणा की है।जिन्दल स्टील को पहले ठाकुरानी-ए-1 लौह अयस्क ब्लॉक कापसंदीदा बोलीदाता घोषित किया गया। यह ब्लॉक लगभग 202हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इसमें जी-3 स्तर के लौह अयस्क की पुष्टि हुई है। इस ब्लॉक में लगभग50 मिलियन टनलौह अयस्क का भंडार है।कंपनी ने इसके लिए सरकार को101.20 प्रतिशतप्रीमियम देने का वचन दिया है।दूसरा ब्लॉक रेंगालाबेरहा उत्तर-पूर्व विस्तार और नुआगांव पश्चिम ब्लॉक है, जोलगभग 84हेक्टेयर में फैला हुआ है।इसमें जी-2स्तर तक के लौह अयस्क की पुष्टि हुई है। यहां अनुमानित38 मिलियन टनलौह अयस्क का भंडार है।इस ब्लॉक के लिए जिन्दल स्टील ने 111.15 प्रतिशतप्रीमियम देने का वचन दिया है।जिन्दल स्टील के बारे मेंजिन्दल स्टील लिमिटेडभारत की सबसे बड़ी और अग्रणी स्टील कंपनियों में से एक है।श्री नवीन जिन्दल के नेतृत्व और मार्गदर्शन में यह कंपनी अपनी कार्यकुशलता और बेहतरीन क्वालिटी के लिए जानी जाती है। यह कंपनी एक बेहतरीन'माइन-टू-मेटल'मॉडल पर काम करती है।यह खुद के संसाधनों, उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और वैश्विक वितरण नेटवर्क का उपयोग कर उच्च-क्षमताएवं प्रदर्शन करने वाले स्टील उत्पाद उपलब्ध कराती है। 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश के साथ, जिन्दल स्टील के पास अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में अत्याधुनिक फैक्ट्रियां हैं।कंपनी का व्यवसाय भारत के साथ-साथ अफ्रीका में भी है। देश और दुनिया के बेहतरीन भविष्य के उद्देश्य से जिन्दल स्टील के उत्पादों की श्रृंखला बुनियादी ढांचे, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों को नई ताकत प्रदान कर रही है।
- आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए होगा मामलों का निपटारारायपुर/ आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए मामलों का निपटारा करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के तत्वावधान में शनिवार 14 मार्च 2026 को देशव्यापी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) बिलासपुर द्वारा प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों एवं व्यवहार न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित किए जाएंगे। यह कैलेण्डर वर्ष 2026 की पहली लोक अदालत होगी। लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है।नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे।इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा।
- महतारी वंदन योजना और बिहान से मिली नई पहचानरायपुर। राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का प्रभाव अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा हैराष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं।जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम पोड़ीदल्हा की निवासी श्रीमती पुष्पलता साहू इसका प्रेरक उदाहरण हैं। पहले उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था।श्रीमती साहू बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर माह मिलने वाली सहायता राशि से परिवार की आर्थिक स्थिति में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है। इस राशि से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिली। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में शामिल हुईं। समूह की ताकत और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपनी आय में लगातार वृद्धि की और आज वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।श्रीमती पुष्पलता साहू न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आजीविका गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और उन्हें मार्गदर्शन भी देती हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं ने महिलाओं को गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला है।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी, छत्तीसगढ़ के मुखपत्र ‘दीपकमल’ के केंद्रीय बजट 2026-27 पर आधारित विशेषांक का नवा रायपुर स्थित विधानसभा भवन कार्यालय में विमोचन किया। इस विशेषांक में केंद्रीय बजट के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ प्रवास को भी विस्तृत रूप से समाहित किया गया है, जो प्रदेश के विकास और जनकल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रकाशन की सफलता की शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ‘दीपकमल’ का यह विशेषांक प्रदेशवासियों तक केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर प्रदेश प्रकाशन विभाग के संयोजक और ‘दीपकमल’ के संपादक पंकज झा, पत्रिका के प्रबंध संपादक हेमंत पाणिग्रही समेत पार्टी मीडिया विभाग के सदस्यगण भी उपस्थित रहे।
- 0- प्रदेश के विकास और नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक दौर में पहुंचे अभियान की आवाज बुलंद करने का किया आग्रह0- मीडिया विभाग ने ऐतिहासिक बजट के लिए मुख्यमंत्री श्री साय का अभिनंदन किया।रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को विधानसभा परिसर स्थित कक्ष में भाजपा मीडिया विभाग के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की प्रगति, जनहितकारी योजनाओं और विशेष रूप से राज्य की सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। श्री साय ने अपने प्रबोधन में मीडिया विभाग की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने और धरातल की समस्याओं को शासन तक लाने में मीडिया विभाग के सभी सदस्यों की सक्रियता सराहनीय है। विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के लिए मीडिया विभाग एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सलवाद के मुद्दे पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। इसलिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलावों और सरकार की पुनर्वास नीतियों को प्राथमिकता देना समय की मांग है। सुरक्षा बलों के मनोबल और बस्तर के अंदरूनी इलाकों में पहुँच रही बुनियादी सुविधाओं को भी प्रमुखता से साझा किया जाए। भ्रामक सूचनाओं के बजाय तथ्यों पर आधारित विमर्श को बढ़ावा दें, ताकि नक्सलवाद के विरुद्ध चल रही इस निर्णायक लड़ाई में जनमत सुदृढ़ हो सके। श्री साय ने विश्वास दिलाया कि उनकी सरकार पारदर्शिता और सुशासन के प्रति प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल बुनियादी ढाँचा खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली पहुँचाना है। इस यात्रा में मीडिया विभाग का सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर निखारने में सहायक होगा। बैठक में उपस्थित मीडिया विभाग के प्रतिनिधियों ने भी प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। बैठक में मीडिया विभाग ने एक शानदार और ऐतिहासिक बजट के लिए मुख्यमंत्री जी का अभिनंदन किया। बैठक के दौरान प्रदेश मीडिया संयोजक हेमंत पाणिग्रही ने विभाग की गतिविधियों से मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया। आभार प्रदर्शन पूर्व मीडिया प्रभारी एवं प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने किया। इस अवसर पर विभाग के सदस्यगण, प्रवक्ता-पैनलिस्ट उपस्थित थे।.





.jpg)

.jpg)
.jpg)
.jpg)







.jpg)



-2.jpg.jpeg)





