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- -हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास दिलाना हमारा संकल्प - उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव-छत्तीसगढ़ के लिए 263 परियोजनाएं स्वीकृत, 36 माह में पूरे होंगे काम-रतनपुर में डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट, आधुनिक और उन्नत तकनीकों से बीएमटीपीसी बनाएगी 40 आवासरायपुर। छत्तीसगढ़ में शहरी गरीबों के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की राह खुल गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने राज्य की 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के आवासों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। हाल ही में 23 फरवरी को केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (Central Sanction & Monitoring Committee) की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। इससे राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना मिल सकेगा।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने देशभर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शहरी गरीबों को किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने सक्रियता से काम किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव नियमित समीक्षा कर आवासों के आबंटन और इनके निर्माण में तेजी व पारदर्शिता सुनिश्चित करने विभागीय अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं।केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 211 लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाएं (Beneficiary-led Construction) और 52 किफायती आवास साझेदारी परियोजनाएं (Affordable Housing Projects) शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेशभर के नगरीय निकायों में कुल 28 हजार 461 आवासों का निर्माण किया जाएगा।लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के तहत 13 हजार 058 आवासों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें पात्र हितग्राही अपनी स्वयं की भूमि पर पक्का घर बना सकेंगे। प्रथम बैच में 52 परियोजनाओं के माध्यम से 3844 आवासों को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 57 करोड़ 66 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। वहीं द्वितीय बैच में 159 परियोजनाओं के अंतर्गत 9214 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 138 करोड़ 21 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन आवासों की प्रति इकाई परियोजना लागत लगभग 3 लाख 89 हजार रुपए निर्धारित की गई है।किफायती आवास साझेदारी घटक के तहत 15 हजार 363 आवासों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत शासकीय भूमि पर सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर विकसित किए जाएंगे, जिनमें स्लम पुनर्विकास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध होंगे। इस घटक के प्रथम बैच में 24 परियोजनाओं के जरिए 6996 आवासों को मंजूरी दी गई है, जबकि दूसरे बैच में 28 परियोजनाओं के माध्यम से 8367 आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन आवासों की प्रति इकाई लागत 5 लाख 75 हजार रुपए तय की गई है। ये सभी परियोजनाएं 36 महीनों में पूर्ण की जाएंगी।भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक 50 हजार आवासों के प्रस्ताव प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया था। छत्तीसगढ़ ने 52 हजार 588 आवासों के प्रस्ताव भेजकर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में राज्य की इस सक्रियता और तत्परता की सराहना भी की गई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भू-अभिलेख, लाभार्थी सूची और यूनिफाइड वेब पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। सभी पात्र हितग्राहियों को केंद्रीय सहायता आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी। यूनिफाइड वेब पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में बिलासपुर जिले के रतनपुर में एक अभिनव डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट (Demonstration Housing Project) को भी मंजूरी मिली है। यह परियोजना भारत सरकार की नवाचार आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे देश के चुनिंदा राज्यों में ही स्वीकृत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर 40 आवास बनाए जाएंगे। इनका निर्माण भवन निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (Building Materials & Technology Promotion Council) द्वारा किया जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) इन आवासों को पात्र लोगों को किराये पर उपलब्ध कराएगा। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल रतनपुर में आकार लेने वाली यह परियोजना सामाजिक उपयोग के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देने में सहायक होगी। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की विशेष कोशिशों से रतनपुर को यह परियोजना मिली है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य में 28,461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार होगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 263 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और अगले 36 महीनों में इन आवासों का निर्माण किया जाएगा। बिलासपुर जिले के रतनपुर में आधुनिक तकनीक से 40 आवासों का एक विशेष प्रोजेक्ट भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके।उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शहरी गरीबों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। नगरीय निकायों के सहयोग से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को पक्के आवास दिए जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही 435 करोड़ रुपए की सहायता से आवास निर्माण में और तेजी आएगी।
- बलौदाबाजार / वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देशानुसार शनिवार को वन परिक्षेत्र देवपुर अंतर्गत वन अग्नि से सुरक्षा एवं सावधानी के संबंध में व्यापक जनजागरूकता के उद्देश्य से बाइक रैली का आयोजन किया गया।बाइक रैली के माध्यम से परिवृत्त देवपुर के अंतर्गत ग्राम देवपुर, तेंदुचुवा, धमलपुरा, कोसमसरा, पकरीद, गिधपुरी, मेटकुला, कुरकुटी एवं नवाडीह में ग्रामीणों एवं स्कूली विद्यार्थियों को वन अग्नि से बचाव के संबंध में जागरूक किया गया। इस दौरान बैनर एवं पोस्टर के माध्यम से लोगों को जंगलों में आग न लगाने, जंगल से लगे खेतों में पराली न जलाने, महुआ संग्रहण के समय आग न लगाकर झाड़ू से साफ कर महुआ बिनने, ज्वलनशील वस्तुएं लेकर जंगल में प्रवेश न करने तथा जंगल में आग की घटना होने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही वन अग्नि से पर्यावरण, वन्यजीवों एवं वन संपदा को होने वाली क्षति के बारे में भी बताया गया।इस जनजागरूकता रैली में परिक्षेत्र अधिकारी देवपुर संतोष कुमार पैकरा,चंद्रहास ठाकुर, रामेश्वर साहू सहित समस्त फायर वाचर, समिति सुरक्षा श्रमिक, वन प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से आए छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
- बलौदाबाजार / ज़िला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 8 मार्च रविवार को राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के मुख्य आतिथ्य में महतारी वंदन सम्मेलन का आयोजन किया गया जा रहा है। यह कार्यक्रम जिला ऑडिटोरियम. बलौदाबाजार में सुबह 11से आयोजित होगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नारी शक्ति उपस्थित रहेंगे। file photo
- रायपुर । बृहस्पति धुर्वे बताती है कि यदि स्वयं की मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी कोई महिला सफलता और आत्मनिर्भरता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली पेन्ड्रा-गौरेला-मरवाही जिला के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे आज पूरे क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से बृहस्पति धुर्वे ने अपने जीवन की दिशा बदल दी और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर बृहस्पति धुर्वे ने महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने की शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर था, लेकिन मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उनका उत्पादन बढ़ता गया। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ उन्होंने सब्जी-भाजी की खेती भी शुरू की, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से 2 लाख रुपए तक हो जाती है। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वह आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं और अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।बृहस्पति धुर्वे बताती हैं कि शासन की अनेक योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान तथा पीडीएस योजना से 35 किलो निःशुल्क चावल की सुविधा भी प्राप्त हो रही है। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है। आज बृहस्पति धुर्वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वह अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करती हैं। समूह के माध्यम से ऋण लेकर उन्होंने अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक दुकान भी बनवाई है, जहाँ भविष्य में मशरूम और अन्य उत्पाद बेचकर अपनी आय को और बढ़ाने की योजना है।
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विशेष आलेख : धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
तारा शंकर सिन्हा , सहायक संचालक जनसंपर्करायुपर। श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। श्रीमती तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण श्रीमती सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं। फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।लखपति दीदी श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं। - -वनांचल क्षेत्र में आय के नए स्रोत- मखाना खेती से सशक्त होंगे महिला समूह-नगरी क्षेत्र की जलवायु बनी उपयुक्त, मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय-महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया आयाम, मखाना उत्पादन से जुड़ेंगे किसानरायपुर /मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाबों, दलदलों और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल निकायों में उगाया जाता है। इसका प्रसार बीजों द्वारा होता है और अंकुरण के लिए पूर्णतः परिपक्व बीजों की आवश्यकता होती है। मखाना की खेती में न्यूनतम खर्च आता है क्योंकि पिछले फसल से बचे हुए बीजों से नए पौधे आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने और नकदी फसल के रूप में किसानों की आय को दोगुना करने की अपार क्षमता को देखते मिलता है। मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी । छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान जिले को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन द्वारा मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक नई पहल के तहत मखाना खेती की तैयारी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रारंभ की गई है। जिले में कुल 100 एकड़ भूमि मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित की गई है। प्रारंभिक चरण में संकरा क्षेत्र में 25 एकड़ रकबे में मखाना की खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।विशेषज्ञों के अनुसार नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल उपलब्धता एवं प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल है। इससे स्थानीय किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे। इस पहल से वनांचल क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।कलेक्टर धमतरी बीते दिनों संकरा पहुंचकर मखाना खेती की तैयारियों का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “मखाना खेती नगरी वनांचल क्षेत्र के लिए आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बन सकती है। स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हमारा प्रयास है कि धमतरी जिला प्रदेश में मखाना उत्पादन का मॉडल विकसित करे।”कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा। जिला प्रशासन की इस पहल से नगरी वनांचल क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार होती दिखाई दे रही हैं।
- बलौदाबाजार-भाटापारा /बलौदाबाजार -भाटापारा जिले के ग्राम बम्हनमुड़ी निवासी मीनाक्षी जोशी के लिए प्रदेश सरकार की 'महतारी वंदन योजना' संबल बनकर उभरी है। हर माह उनके खाते में आने वाली एक हजार रुपए की सहायता राशि ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि परिवार की छोटी-छोटी दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी चिंता के पूरा करने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।मीनाक्षी के पति श्री भूपेंद्र जोशी एक ऑटो पार्ट्स की दुकान में कार्य करते हैं, जिनसे होने वाली सीमित आय में दो छोटे बच्चों—तीन वर्षीय पुत्री और एक वर्षीय पुत्र—के साथ परिवार का भरण-पोषण करना एक बड़ी चुनौती थी। घर की आर्थिक स्थिति बेहतर न होने के कारण छोटी-बड़ी घरेलू जरूरतों के लिए अक्सर समझौता करना पड़ता था, लेकिन इस योजना ने उनकी राह आसान कर दी है।मीनाक्षी बताती हैं कि इस योजना के लाभ से मिनाक्षी के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव आया है। उनका मानना है कि महतारी वंदन योजना केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में उन्हें सम्मान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब खुद को पहले से अधिक आर्थिक रूप से सशक्त महसूस कर रही हैं। मीनाक्षी ने महिलाओं के हितों का ध्यान रखने और उन्हें यह मजबूती प्रदान करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह योजना उनके जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिसने घर की खुशहाली में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- -नेट की परीक्षा में 33 वाँ रैंक हासिल कर सूरजपुर की बेटी निधि गुप्ता ने रोशन किया जिले का नामरायपुर। महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, मेहनत और समर्पण के साथ करते हुए प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों को नई दिशा देने आगे आ रही हैं। यह स्थिति न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, बल्कि समाज में उनके प्रति बदलती सोच का भी स्पष्ट संकेत है। निधि गुप्ता ने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है, बशर्ते इरादा पक्का हो। निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जब हम उन महिलाओं की बात करते हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखा, तो सूरजपुर जिले की बेटी निधि गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। शासकीय विद्यालय की पढ़ाई से लेकर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में शीर्ष रैंक तक उनका सफर संघर्ष, संकल्प और सफलता की एक अनूठी मिसाल है। निधि की प्रारंभिक शिक्षा सूरजपुर जिले के शासकीय कन्या विद्यालय में हुई। संसाधनों की कमी एक वास्तविकता थी, पढ़ाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी आए लेकिन निधि ने कभी हौसला नहीं खोया। उनके मज़बूत इरादों के आगे हर बाधा बौनी साबित होती रही।स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए उन्होंने शासकीय रेवती रमण मिश्र महाविद्यालय, सूरजपुर में प्रवेश लिया, जहाँ के प्रोफेसरों ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। रसायन विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. विकेश कुमार झा का मार्गदर्शन उनके जीवन का अहम मोड़ बना। उनकी प्रेरणा और दिशा-निर्देशन से निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया। निधि के शब्दों में उनकी पूरी यात्रा का सार समाया है -’’महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन सपनों को जीने का दिन है, जो हमने खुली आँखों से देखे हैं।’’ निधि गुप्ता की यह सफलता जिले की उन तमाम बेटियों के लिए एक प्रकाश-स्तंभ ह,ै जो सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को पालती हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है कि बशर्ते इरादा पक्का हो।
- - मजदूरी छोड़ लखपति दीदी बनीं दशमीरायपुर। असाधारण मेहनत, अटूट आत्मविश्वास और त्याग से बुनी गई एक ऐसी सच्ची यात्रा है, जो दिखाती है कि सीमित संसाधनों और विकट परिस्थितियों के बावजूद सफलता संभव है। यह साधारण शुरुआत से असाधारण ऊंचाइयों तक पहुँचने की कहानी है, मोंगरा फूल महिला स्वयं सहायता समूह से जुडे़ दशमी नाग की, जिसमें संघर्ष, लगन और हार न मानने का जज्बा शामिल होता है। आज दशमी नाग अपनी मेहनत एवं लगन के बूते धान, मक्का, सब्जी उत्पादन सहित मुर्गी पालन और बकरीपालन जैसी विविध गतिविधियों के माध्यम से सालाना लगभग दो लाख रुपए से ज्यादा की आय अर्जित कर रही हैं। यह उनके पुराने जीवन की तुलना में एक बड़ी उपलब्धि है। आर्थिक लाभ के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व में भी एक अदभुत परिवर्तन आया है।बस्तर के सुदूर अंचलों में महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी जा रही है, जिसका जीता-जागता उदाहरण बस्तर जिला के ग्राम पंचायत मामड़पाल मुनगा की रहने वाली दशमी नाग हैं। कभी मजदूरी के भरोसे अपना जीवन बसर करने वाली दशमी आज लखपति दीदी के रूप में अपनी एक नई पहचान बना चुकी हैं। मोंगरा फूल महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद दशमी के जीवन में जो बदलाव आया, वह आज पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरक बन गया है। समूह से जुड़ने से पूर्व दशमी नाग की आर्थिक स्थिति अत्यंत सामान्य थी। वे खेती और पशुपालन तो करती थीं, लेकिन तकनीकी मार्गदर्शन और पूंजी के अभाव में उनकी आय कम ही हो पाती थी। धान, मक्का और सब्जी बाड़ी से होने वाली सीमित कमाई के साथ-साथ उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन महिला संगठन मुनगा और तीरथधारा महिला संगठन संकुल छिंदावाड़ा के साथ जुड़ने के बाद उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई।ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद समूह के माध्यम से मिली कुल 41 हजार 500 रुपए की वित्तीय सहायता जिसमें डेढ़ हजार रूपए रिवॉल्विंग फंड, 15 हजार रूपए सीआईएफ और 25 हजार रूपए का बैंक लिंकेज शामिल था। यह सहायता दशमी के लिए एक मजबूत आधार साबित हुई। इस राशि का सही नियोजन करते हुए उन्होंने खेती और पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से विस्तार दिया। परिणाम यह हुआ कि जिस धान की खेती से वे पहले 50 हजार रुपए कमाती थीं, वह बढ़कर 65 हजार रूपए हो गया। इसी तरह बकरी पालन में उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अपनी आय को 25 हजार रुपए से बढ़ाकर सीधे 55 हजार रूपए तक पहुँचाया।जो दशमी पहले मजदूरी के लिए संघर्ष करती थीं, आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, यही नहीं समाज में लोगों के साथ खुलकर आत्मविश्वास के साथ संवाद करती हैं। उनकी यह सफलता की कहानी साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और मंच मिले, तो वे अपनी तकदीर खुद बदल सकती हैं। वह कहती है कि मेहनत के बल पर सफलता के शिखर हासिल किया जा सकता है।
- - वर्ष 2025 में 820 विदेशी पर्यटकों ने की छत्तीसगढ़ की यात्रा-छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा विकसित की जा रही आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर दिला रही नई पहचानरायपुर। प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, घने वन, झरनों की कलकल ध्वनि और ऐतिहासिक धरोहरों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। वर्ष 2025 के दौरान कुल 820 विदेशी पर्यटकों ने छत्तीसगढ़ की यात्रा की, जो यह संकेत देता है कि राज्य की अनछुई प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विविधता विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा विकसित की जा रही आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ तथा बेहतर होती सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावनाओं को और मजबूत कर रही है।छत्तीसगढ़ को “पर्यटकों का स्वर्ग” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे भव्य जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता, सिरपुर और रतनपुर जैसे ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल, बस्तर की अद्वितीय जनजातीय परंपराएँ और लोकनृत्य, सरगुजा के पर्वतीय क्षेत्र तथा जशपुर की शांत और हरित वादियाँ विदेशी सैलानियों को एक अलग अनुभव प्रदान करती हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ उन पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है, जो प्रकृति के करीब रहकर स्थानीय संस्कृति को समझना चाहते हैं।राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थापना, होटल और होम-स्टे सुविधाओं का विस्तार, पर्यटक मार्गदर्शकों का प्रशिक्षण, डिजिटल प्रचार-प्रसार तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास जैसे प्रयासों से पर्यटकों को अधिक सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल रहा है। इसके साथ ही राज्य में ग्रामीण पर्यटन, ईको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।बस्तर क्षेत्र विदेशी सैलानियों के लिए अत्यंत संभावनाशील पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। यहाँ के प्राकृतिक जलप्रपात, घने वन, राष्ट्रीय उद्यान, आदिवासी जीवन शैली और प्रसिद्ध बस्तर दशहरा जैसे सांस्कृतिक आयोजन विश्वभर के पर्यटकों के लिए अनूठा अनुभव प्रस्तुत करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता, चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता और तीरथगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता बस्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान देते हैं। चित्रकोट फॉल्स के पास तीर्था गांव में प्रीमियम लक्जरी टेंट सिटी प्रस्तावित है। चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट नामक एक व्यापक प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य चित्रकोट को एक वैश्विक स्तर की प्रकृति और संस्कृति गंतव्य के रूप में पुनर्विकसित करना है। राज्य सरकार की इन योजनाओं से बस्तर आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केन्द्र होगा।बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव भी पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। बस्तर अब नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और क्षेत्र में शांति एवं विकास का नया वातावरण निर्मित हो रहा है। बेहतर सुरक्षा, सड़क संपर्क और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से न केवल देशी बल्कि विदेशी पर्यटकों का विश्वास भी बढ़ रहा है। इससे आने वाले समय में बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मेंटर एवं हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन की बस्तर की छह दिवसीय यात्रा ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय समुदायों की जीवन शैली की सराहना करते हुए इसे विश्व के लिए एक अनूठा पर्यटन अनुभव बताया। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय यात्राएँ और सकारात्मक अनुभव विदेशों में छत्तीसगढ़ की छवि को और मजबूत करेंगे तथा भविष्य में अधिक विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने में सहायक होंगे।सरगुजा और जशपुर क्षेत्र भी विदेशी सैलानियों के लिए अपार संभावनाएँ समेटे हुए हैं। सरगुजा के पर्वतीय वन क्षेत्र, मैनपाट का शांत और मनोहारी वातावरण, जशपुर की हरित घाटियाँ तथा वहाँ की प्राकृतिक जैव विविधता प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। इन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाएँ भी तेजी से विकसित हो रही हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों के लिए नए अनुभवों के द्वार खुल रहे हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार, पर्यटन मेलों में भागीदारी, डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रचार तथा पर्यटन अवसंरचना के विकास जैसे कई कदम उठा रही है। साथ ही, स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और पारंपरिक उत्सवों को पर्यटन से जोड़कर छत्तीसगढ़ को एक विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ विदेशी सैलानियों के लिए एक नया और आकर्षक पर्यटन केंद्र बनेगा। प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता, बेहतर होती सुविधाएँ और सुरक्षित वातावरण मिलकर राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
- रायपुर। मेहनत, दृढ़ संकल्प और अटूट लगन से अभावों को अवसरों में बदलकर अपने विकास की कहानी लिखना संभव है। यह यात्रा चुनौतियों का सामना मुस्कुराकर करते हुए, निरंतर प्रयास और अदम्य साहस से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की है। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बिहान (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का नया सवेरा लेकर आ रही है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत मेंड्राकला की रहने वाली श्रीमती हरमनिया देवी राजवाड़े कभी आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए जद्दोजहद करने वाली आज न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि अपने बच्चों को बड़े शहरों में उच्च शिक्षा भी दिला रही हैं।हरमनिया देवी बताती हैं कि बिहान से जुड़ने से पहले उनकी माली हालत दयनीय थी। घर चलाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन आकांक्षा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष बनने के बाद उनके जीवन ने नई करवट ली। उन्होंने समूह के माध्यम से पहला ऋण लिया और गाँव में ही एक छोटी सी किराना और श्रृंगार दुकान की शुरुआत की।मेहनत और लगन से जब किराना व्यवसाय सफल हुआ, तो उन्होंने ईमानदारी से ऋण चुकता किया। स्व-रोजगार की दिशा में कदम आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोबारा ऋण लिया और अब वे कपड़े का व्यवसाय भी सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं। हरमनिया बतातीं हैं कि, बिहान ने हमें सिखाया कि कैसे छोटे-छोटे कदमों से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा प्रभाव उनके बच्चों के भविष्य पर पड़ा है। हरमनिया देवी गर्व से बताती हैं कि एक समय था जब मैं बच्चों को सामान्य शिक्षा दिलाने में भी असमर्थ थी, लेकिन आज मेरी आमदनी इतनी अच्छी है कि मेरे बच्चे बिलासपुर जैसे बड़े शहर में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मैं बिना किसी परेशानी के उनकी फीस समय पर भर पा रही हूँ।हरमनिया देवी ने अपनी सफलता का श्रेय प्रदेश और केंद्र सरकार की नीतियों को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि इस योजना ने ग्रामीण महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर लखपति दीदी बनने और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने का कार्य किया है।शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं से आज हरमानिया जैसी हजारों महिलाएँ बिहान के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में भी शामिल होकर लखपति दीदी बन रही हैं।
- -ग्राम पंचायत बुड़ार में स्वच्छता की अलख जगाकर बनीं प्रेरणा स्रोतरायपुर । महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, एकता हो और समाज के लिए कुछ करने की भावना हो, तो सकारात्मक परिवर्तन अवश्य लाया जा सकता है। आज कोरिया जिले के अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल अपने गाँव में स्वच्छता की एक मिसाल बन चुकी हैं और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इनका यह कार्य स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी मेहनत यह संदेश देती है कि संकल्प, सहयोग और निरंतर प्रयास से गाँव को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है।कोरिया जिले में जनपद बैकुंठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बुडार की चार महिलाएँ अपने अथक समर्पण, मेहनत और एकजुटता के कारण पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। ग्राम पंचायत में रहने वाली श्रीमती अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल ने ग्राम पंचायत में प्रेरणा का एक नया माहौल बनाया है। ये महिलाएँ पिछले लगभग तीन वर्षों से स्वच्छता दीदी के रूप में लगातार कार्य कर रही हैं और गाँव को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।स्वच्छता दीदी बनकर ये महिलाएँ सप्ताह में दो दिन बुधवार और शनिवार को गाँव के घर-घर जाकर कचरा संग्रहण का कार्य करती हैं तथा ग्रामीणों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करती हैं। वे लोगों को समझाती हैं कि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने से गाँव स्वच्छ रहता है और कचरे का सही प्रबंधन संभव होता है।कार्य के प्रारंभिक दिनों में इन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गाँव के बहुत से लोग कचरा अलग-अलग देने के लिए तैयार नहीं थे और स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी कम थी। लेकिन इन महिलाओं ने धैर्य, मेहनत और निरंतर प्रयास से घर-घर जाकर लोगों को समझाया। धीरे-धीरे ग्रामीणों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया और अब गाँव के प्रत्येक रहवासी नियमित रूप से कचरा देने लगे हैं। जिससे गांव में स्वच्छता का माहौल बना है। श्रीमती अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से उन्हें कबाड़ी का काम करने वाले व्यवसायी से भी जोड़ा गया, जिससे वे सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक, कागज और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं। इस कार्य से प्रत्येक महिला को लगभग 2 से 3 हजार रुपए प्रति माह की आय प्राप्त होती है। अब तक ये चारों महिलाएँ मिलकर लगभग 2.5 लाख से अधिक की आय अर्जित कर चुकी हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उनमें आत्मनिर्भरता की भावना भी बढ़ी है। इन महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी आपसी एकता और संगठन है, जिसके कारण वे मिल-जुलकर अपने कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं।इनके लगातार प्रयासों और उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को एक ई-रिक्शा भी प्रदान किया गया है, जिससे उन्हें कचरा संग्रहण के कार्य में काफी सुविधा मिल रही है। इस ई-रिक्शा के माध्यम से अब वे आसानी से घर-घर से कचरा एकत्र कर पाती हैं और अपने कार्य को और अधिक प्रभावी तरीके से कर रही हैं। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सुशासन से हम महिलाएं सशक्त हुई हैं।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों से वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद कर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दौरान खरसिया (रायगढ़) निवासी श्री रौनक अग्रवाल, रायपुर निवासी श्री संजय डहरिया, धमतरी जिले के परसवानी निवासी श्री डायमंड सिंह ध्रुव तथा एमसीबी जिले के जनकपुर निवासी सुश्री दर्शना सिंह से बातचीत की।मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके परिवारजनों से भी संवाद करते हुए इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आप सभी युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और धैर्य के बल पर प्रतिष्ठित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। आपकी यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह संदेश देती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ से युवाओं का सिविल सेवा में चयन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। इससे यह सिद्ध होता है कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और हमारे युवा अपने परिश्रम के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
- -कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं : मुख्यमंत्री विष्णु देव सायरायपुर । संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सुश्री वैभवी अग्रवाल ने आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सुश्री वैभवी को मिठाई खिलाकर उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुश्री वैभवी अग्रवाल ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैभवी की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह संदेश देती हैं कि लक्ष्य के प्रति समर्पण,अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सुश्री वैभवी अग्रवाल भविष्य में प्रशासनिक सेवा में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी दायित्वों के लिए शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर सुश्री वैभवी अग्रवाल के पिता श्री शीतल अग्रवाल और भाई श्री विनायक अग्रवाल उपस्थित थे।
- रायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के आदेशानुसार और नगर निगम जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल के निर्देशानुसार रायपुर नगर निगम जोन क्रमांक 8 क्षेत्र अंतर्गत वीर सावरकर नगर वार्ड क्रमांक 1 क्षेत्र अंतर्गत जरवाय क्षेत्र में लगभग 1 एकड़ निजी भूमि पर की जा रही अवैध प्लाटिंग पर अज्ञात अवैध प्लाटिंगकर्त्ताओं द्वारा निर्मित अवैध मुरूम रोड को जेसीबी मशीन की सहायता से काटकर और वहाँ लगभग 12 प्लीन्थ लेवल तक किये गए अवैध निर्माणों को तोड़कर तत्काल कारगर रोक लगाने की कार्यवाही स्थल पर नगर निगम जोन 8 उपअभियंता श्री अबरार खान एवं नगर निगम जोन 8 नगर निवेश विभाग के अन्य सम्बंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में की.
- युवा शक्ति को नई उड़ान देगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026’ - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए आवश्यक निर्देशबिलासपुर/ प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और जनजातीय अंचलों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का आयोजन 25 मार्च से 06 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन रायपुर, सरगुजा और बस्तर के खेल मैदानों में होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक लेकर इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल सहित हर क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 न केवल वनांचल के खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को पहचान देने का मंच बनेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध होगा।बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना, प्रदेश में खेल अधोसंरचनाओं की स्वीकृति एवं निर्माण, खेलो इंडिया की केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, खेल अकादमियों की गतिविधियों, खेल अलंकरण, युवा महोत्सव और आगामी कार्ययोजना की भी समीक्षा की। उन्होंने विगत वर्षों में स्वीकृत वृहद एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अधोसंरचना परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी छत्तीसगढ़ को प्रदान की गई है। इस आयोजन में कुल 7 प्रतिस्पर्धात्मक और 2 प्रदर्शनात्मक खेल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, स्वीमिंग और कबड्डी (डेमो), सरगुजा में कुश्ती एवं मलखम्ब (डेमो) तथा बस्तर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस प्रतियोगिता में देश के लगभग 30 राज्यों से करीब 2500 खिलाड़ी और अधिकारी भाग लेंगे।मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही मलखम्ब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी तथा अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखम्ब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में एक लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनजातीय अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक स्तर के खेल आयोजनों के माध्यम से राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती तनूजा सलाम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- सरकारी योजनाओं से मिल रहा संबलबिलासपुर/अपने हौसलों और आत्मविश्वास की बदौलत आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है, अब न केवल शहरी महिलाएं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की नई राह मिली है जिससे वे अपना जीवन संवार रही है और अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बन रही है। आज ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की महिलाएं आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इन योजनाओं की बदौलत अब महिलाएं न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।जिले के कोटा विकासखंड के विचारपुर पंचायत के आश्रित ग्राम जुरेली की सुशीला बाई की जिंदगी में भी सरकारी योजना ने नई उम्मीद जगाई है। पहले सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल होता था, लेकिन स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्हें न केवल आजीविका के साधन मिले हैं साथ ही आत्मविश्वास का भी संचार हुआ है। महतारी वंदन योजना से हर माह मिलने वाली 1000 रुपए की राशि ने भी उन्हें बड़ी राहत दी है। अब वे घर के जरूरी खर्चों के साथ बच्चों की जरूरतों को भी आसानी से पूरा कर पा रही हैं। इसी तरह ग्राम सिलपहरी की उर्वशी भानू भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। वे बताती हैं कि यह राशि उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं है और इससे बच्चों की पढ़ाई और घर के छोटे-मोटे खर्च पूरे करने में मदद मिलती है, साथ ही वे स्व सहायता समूह से जुड़कर टेंट का व्यवसाय भी कर रही हैं जिससे उनकी अपमदनी बढ़ी है।महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रमतला की विजेता रामसनेही उर्फ अन्नू कोरी की है। उन्होंने रेशम और कोसा बीज उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। रमतला रेशम अनुसंधान एवं विकास केंद्र से प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने मात्र एक माह में 12 हजार कोसा बीज तैयार कर एक मिसाल कायम की। उनकी इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा सम्मानित भी किया गया। इस कार्य से उन्हें लगभग 40 हजार रुपए की आय हुई, जिससे उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक संबल दिया और बच्चों की शिक्षा व बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाए। विजेता कोरी को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का घर मिला, महतारी वंदन योजना से हर माह आर्थिक सहायता मिल रही है और बच्चों को छात्रवृत्ति योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना से जुड़े स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने मछली पालन का कार्य भी शुरू किया है, जिससे उनकी आय के नए स्रोत बने हैं।इसी तरह मस्तूरी विकासखंड के ग्राम कर्रा में महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बिहान योजना के माध्यम से “बर्तन बैंक” की अनूठी पहल शुरू की है। गायत्री महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष गौरी यादव ने बताया कि पहले गांव में शादी-ब्याह और अन्य कार्यक्रमों में प्लास्टिक और थर्माकोल के डिस्पोजल का अधिक उपयोग होता था, जिससे गंदगी और पर्यावरण प्रदूषण काफी होता था , इसे देखते हुए महिलाओं ने सामूहिक रूप से स्टील के बर्तन खरीदकर बर्तन बैंक की शुरुआत की। अब गांव में होने वाले कार्यक्रमों के लिए ये बर्तन किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे न केवल गांव में डिस्पोजल का उपयोग लगभग बंद हो गया है, बल्कि गांव का वातावरण भी स्वच्छ बना हुआ है। साथ ही बर्तन किराए से होने वाली आय से स्व सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।महिलाओं के हौसलों और सरकारी योजनाओं से मिले संबल से अब ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदल रहा है और इस बदलाव से न केवल उनका जीवन संवर रह है बल्कि इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव परिवार समाज और देश पर भी पड़ रहा है, अब सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचकर महिलाओं का जीवन बेहतर बना रही हैं। महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना जैसी पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है सरकारी योजनाओं के सहयोग और अपनी मेहनत ,हौसलों के दम पर ग्रामीण महिलाएं सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। इन योजनाओं से लाभान्वित महिलाएं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की इन योजनाओं ने उन्हें सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।
- अब तक 23 हजार से अधिक घरों का हुआ सर्वेभिलाई नगर।नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्रांतर्गत मच्छर जनित रोगों जैसे डेंगू और मलेरिया से बचाव एवं मच्छर उन्मूलन हेतु जन जागरूकता अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। निगम आयुक्त राजीव कुमार पांडेय के कड़े निर्देशों के परिपालन में स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली के मार्गदर्शन में निगम के विशेष दस्ते और जिला मलेरिया विभाग की संयुक्त टीम द्वारा रोस्टर अनुसार घर-घर जाकर गहन सर्वेलेंस और सर्वेक्षण कार्य किया जा रहा है।वरिष्ठ स्वच्छता निरीक्षक के.के.सिंह के नेतृत्व में निगम की टीम ने 01 अप्रैल 2025 से 06 मार्च 2026 तक की अवधि में व्यापक कार्रवाई की है ।23,935 घरों का निरीक्षण किया गया। कुल 10,874 मच्छर प्रजनन स्रोतों (कूलर-3945, टंकी-2973, ड्रम/कंटेनर-3924 एवं अन्य-32) की जांच कर पुराने जमा पानी को खाली कराया गया। 20,073 घरों के 26,478 कूलरों में वयस्क मच्छरों के नियंत्रण हेतु एवं 9472 कूलरों में लार्वा नष्ट करने हेतु 'एक्यूगार्ड' का छिड़काव किया गया।सर्वे के दौरान नागरिकों को मच्छरों से बचाव और स्वच्छता बनाए रखने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य शिक्षा भी प्रदान की जा रही है। कूलर के पानी को सप्ताह में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से खाली कर और सुखाकर ही नया पानी भरें।मच्छरों को वयस्क अवस्था में पहुंचने से पहले लार्वा स्तर पर ही नष्ट करने में सहयोग दें।घर के आसपास नालियों में पानी जमा होने पर उसमें जला हुआ मोबिल ऑयल डालें।पक्षियों और मवेशियों के पीने के पानी के बर्तन (नांद) को भी सप्ताह में एक बार अवश्य साफ करें।नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनसहयोग से ही शहर को डेंगू और मलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है। निगम की टीमें आने वाले दिनों में और भी मुस्तैदी के साथ चिन्हित क्षेत्रों में अभियान चलाएंगी।
- -टाटीबंध तालाब की सफाई करवाकर कचरा उठवाकर सफाई जनजागरण अभियान चलाने के दिए निर्देशरायपुर/नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे के निर्देश पर नगर निगम स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सुनील चंद्राकर ने नगर निगम जोन 8 क्षेत्र अंतर्गत टाटीबंध तालाब और बस्ती क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण नगर निगम जोन 8 जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री गोपीचंद देवांगन और स्वच्छता निरीक्षक श्री रितेश झा की उपस्थिति में किया और सफाई व्यवस्था की स्थल समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए.नगर निगम स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सुनील चंद्राकर ने टाटीबंध तालाब का सौंदर्य कायम रखने तालाब क्षेत्र को स्वच्छ और सुन्दर बनाये रखने स्वच्छता अभियान चलाने और कचरा उठवाने सहित स्थानीय रहवासियों के मध्य क्षेत्र की स्वच्छता को लेकर नगर निगम जोन 8 स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से सघन जनजागरण अभियान शीघ्र चलाये जाने के निर्देश जोन स्वास्थ्य अधिकारी और स्वच्छता निरीक्षक को स्थल पर दिए.
- 15 मार्च तक चलेगी प्रदर्शनी, प्रदेश के विभिन्न जिलों के बुनकर करेंगे आकर्षक वस्त्रों का प्रदर्शन एवं विक्रयबिलासपुर/ राज्य शासन के ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत संचालक हथकरघा के सौजन्य से जिला हथकरघा कार्यालय बिलासपुर द्वारा राज्य स्तरीय कोसा एवं कॉटन ऑफ छत्तीसगढ़ हथकरघा वस्त्र प्रदर्शनी सह विक्रय का आयोजन 8 मार्च से 15 मार्च 2026 तक राघवेंद्र राव सभा भवन, कंपनी गार्डन के पास बिलासपुर में किया जा रहा है। प्रदर्शनी का शुभारंभ 8 मार्च को शाम 4 बजे नगर निगम बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया जाएगा।प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा वस्त्रों की उत्कृष्ट कारीगरी और विविध उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हथकरघा बुनकरों को उनके उत्पादों के विपणन के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना तथा आम नागरिकों को पारंपरिक हथकरघा वस्त्रों से सीधे जोड़ना है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं के सुझावों के आधार पर नए डिजाइनों के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही बुनकरों के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी तथा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।प्रदर्शनी में रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, चंद्रपुर, धुरी, सिवनी, रामटेला, लोफंदी, बिलाईगढ़ और सोमाडिह जैसे कोसा एवं सूती उत्पादक क्षेत्रों के बुनकर समितियों और प्रतिनिधियों द्वारा भाग लिया जाएगा। प्रदर्शनी में उत्कृष्ट कोसा साड़ियां, कोसा मलमल, कोसा ड्रेस मटेरियल, कोसा सलवार सूट, कोसा बाफ्टा, सूती साड़ियां, कॉटन सूटिंग-शर्टिंग, दुपट्टे, बेडशीट, बेड कवर, पिलो कवर, टॉवेल, नेपकिन और गमछा सहित विभिन्न आकर्षक वस्त्र उत्पाद उपलब्ध रहेंगे।प्रदर्शनी के नोडल अधिकारी एवं उपसंचालक हथकरघा बिलासपुर श्री डी धकाते ने बताया कि यह प्रदर्शनी 8 मार्च से 15 मार्च 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी। उन्होंने नागरिकों से प्रदर्शनी में पहुंचकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बुनाई कला और हस्तनिर्मित वस्त्रों का अवलोकन कर बुनकरों को प्रोत्साहित करने की अपील की है।
- -32 विद्यालयों में बालक बालिका शौचालय, 21 विद्यालयों में कीचन शेड सहित 3.08 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन संपन्नरायपुर। शासकीय स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रहे कोरबा नगर विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने आज शुक्रवार को 32 विद्यालयों में बालक बालिका शौचालय निर्माण और 21 विद्यालयों में किचन शेड निर्माण कार्य समेत 3.08 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।कोरबा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दर्री जोन के शासकीय स्कूल अगारखार के पास आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम में मंत्री श्री लखन लाल देवांगन और महापौर श्रींमती संजू देवी राजपूत समेत अन्य अतिथि गणों ने विधिवत भूमिपुजन एवं शिलान्यास किया।भूमि पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, कैबिनेट मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के सुशासन में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और सुसज्जित करने की दिशा में निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक की शैक्षणिक संस्थाओं में अधोसंरचना को उन्नत करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। जिला खनिज न्यास मद से शासकीय स्कूलों के नवीन भवन निर्माण, बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, किचन शेड, सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवॉल का निर्माण तेजी से कराए जा रहे हैं।इसी तरह इसी तरह कोसाबाड़ी जोन अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम में मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि सुशासन की सरकार में आज कोरबा नगर समेत जिले का सर्वांगीण विकास हो रहा है। जनता की अपेक्षा में खरा उतारते हुए उनकी हर मांग और जरूर को ध्यान में रखते हुए कार्य किए जा रहे हैं।सरस्वती शिशु मंदिर, बच्चों के अंदर भारत और भारतीयता के प्रति, एक नागरिक के रूप में उन कर्तव्यों का बोध कराने, सुयोग्य नागरिक बनाने हेतु अपने राष्ट्रीय दायित्व का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन कर रहा है।यहां से निकले हुए छात्र आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समाज को नेतृत्व देकर 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ जुड़कर पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपना योगदान दे रहे हैं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे विकास कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है।इस अवसर पर मध्य क्षेत्र विद्या भारती के उपाध्यक्ष श्री जुडावान सिंह ठाकुर, श्री अशोक तिवारी, श्री कैलाश नाहक, नगर श्री मृगेश यादव, श्री अमृतलाल, श्री नागेंद्र सिंह, श्री धीरेंद्र सिंह, स्कूल के व्यवस्थापक श्री जोगेश लांबा, पार्षद श्री अशोक चावलानी, श्री पंकज देवांगन, श्री नरेंद्र देवांगन, श्री हीतानंद अग्रवाल, श्री राकेश वर्मा, श्री चंद्रलोक सिंह, श्रीमती ममता यादव, श्री राम कुमार साहू, स्कूल के प्राचार्य श्री राजकुमार देवांगन, अध्यक्ष श्री नानजी भाई पटेल, सभापति श्री नूतन सिंह ठाकुर, पार्षद श्री विन्रम तिवारी, श्री मुकुंद सिंह कंवर, श्री सरोज शांडिल्य , श्री फिरत साहू, श्री रतन कंवर, श्री अजय चंद्रा, सहित गणमान्य नागरिक मौजूद थे.इस अवसर पर महापौर श्रींमती संजू देवी राजपूत ने कहा कि विष्णुदेव सरकार आज विकास के हर पैमाने पर 100 फीसदी खरा उतरते हुए कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के कुशल नेतृत्व और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के मार्गदर्शन में मूलभूत सुविधाओं सीसी रोड, नाली, पेयजल, सफाई, स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन के निर्माण तेजी से हो रहे हैं। शहर के 10 नालों को जोड़कर एसटीपी प्लांट से पानी को ट्रीटमेंट करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।भूमि पूजन कार्यक्रम में स्थाईजनों ने भी विष्णुदेव सरकार एवं मंत्री श्री देवांगन के इस पहल को लेकर आभार व्यक्त किया और सरकार के प्रयासों की सराहना की। नागरिकों ने कहा कि शौचालय नहीं होने से स्कूली बच्चों को बहुत परेशानी हो रही थी।लोगों ने शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की योजनाओं को लेकर सरकार के प्रयासों की सराहना की। क्षेत्र के बच्चों को सर्व सुविधा स्कूलों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त होगी, जिससे उनका भविष्य उज्जवल होगा।नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रांतर्गत दर्री जोन के 32 शासकीय विद्यालयों में बालक-बालिका शौचालय निर्माण (लागत 1 करोड़ 60 लाख रुपए) तथा दर्री जोन अंतर्गत 21 शासकीय स्कूलों में किचन शेड निर्माण कार्य (लागत 73 लाख रुपए), कोसाबाड़ी जोन अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य वार्ड क्रमांक 19 में सीएसईबी के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में अथिति स्वरूप भवन निर्माण कार्य (लगभग 25 लाख रुपए), वार्ड क्रमांक 22 में रोड निर्माण एवं शेड निर्माण कार्य ( 10 लाख रुपए), वार्ड क्रमांक 24 नेहरू नगर के मुख्य मार्ग में ग्रीनवेल्ट निर्माण कार्य ( 30 लाख रुपए) तथा वार्ड क्रमांक 21 (पूर्व वार्ड क्रमांक 19) गायत्री यज्ञपीठ सीएसईबी कॉलोनी कोरबा में अतिरिक्त भवन निर्माण एवं जीर्णोंद्धार कार्य (लगभग 10 लाख रुपए) शामिल है।
- -बिरगांव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेशवासियों को दी होली की शुभकामनाएंरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज शाम नगर निगम बिरगांव में आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों को रंगों के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष होली का उत्साह प्रदेश में और भी अधिक है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों के खातों में धान उपार्जन के अंतर की राशि अंतरित की गई है। इससे किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल है और त्यौहार की रौनक दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य की समृद्धि का आधार है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। यह त्योहार समाज में एकता, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है तथा लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाने का अवसर प्रदान करता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की मंशानुरूप प्रदेश में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अंचल में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हो रहा है। राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, विकास और खुशहाली के लिए निरंतर कार्य कर रही है।समारोह के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली द्वारा प्रस्तुत मनमोहक फाग गीत का आनंद लिया। साथ ही विधायक श्री अनुज शर्मा की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने भी खूब उत्साह दिखाया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने पिचकारी चलाकर रंगों की बौछार की और लोगों के साथ होली की खुशियां साझा कीं।इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री योगेश साहू, निशक्तजन आयोग के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया, सीआईडीसी अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शंशाक शर्मा, पूर्व विधायक एवं आरडीए अध्यक्ष श्री नंदे साहू, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष श्री मिर्जा एजाज बेग, श्री रमेश ठाकुर, श्री भागीरथी यादव, श्री मनोज जोशी सहित बिरगांव नगर निगम के पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
- - अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष- श्रीमती निर्मला ने अपनी बिटिया के नाम से सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खुलवाया खाता- महतारी वंदन योजना से निर्मला की बिटिया के भविष्य को मिला सुरक्षित आधारराजनांदगांव । जिले के छुरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुमरदा निवासी श्रीमती निर्मला कोलियारे के जीवन में महतारी वंदन योजना से सकारात्मक बदलाव आया है। श्रीमती निर्मला ने बताया कि राज्य शासन द्वारा शुरू की गई महतारी वंदन योजना से उन्हें आर्थिक संबल मिला है, जिससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस योजना की शुरूआत की गई, तब उन्होंने भी इसका लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। महतारी वंदन योजना के तहत 10 मार्च 2024 से उन्हें प्रतिमाह 1000 रूपए की सहायता राशि प्राप्त हो रही है। इस राशि ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने इस राशि का उपयोग अपनी बिटिया के उज्जवल भविष्य के लिए करने का निर्णय लिया। श्रीमती निर्मला ने बताया कि अपनी बिटिया के नाम से उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता खुलवाया। पहले आर्थिक तंगी के कारण वे वर्ष में केवल 1 हजार रूपए ही जमा कर पाती थी, लेकिन अब महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से वे प्रतिमाह 500 रूपए कुल प्रतिवर्ष 6000 हजार रूपए जमा कर पा रही है। इससे उन्हें अपनी बेटी की शिक्षा और भविष्य को लेकर अब काफी भरोसा मिला है। इसके साथ ही अब वे अपने परिवार के लिए पौष्टिक फल और सब्जियां भी खरीद पा रही है, जिससे परिवार के स्वास्थ्य में सुधार आया है। श्रीमती निर्मला कोलियारे ने बताया कि महतारी वंदन योजना उनके जैसी अनेक महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफलता प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के सभी अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल कर पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने वैभवी अग्रवाल, दर्शना सिंह बघेल, डायमंड सिंह ध्रुव, रौनक अग्रवाल और संजय डहरिया को उनकी उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इन होनहार बेटे-बेटियों की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और यह दिखाती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन युवाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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बिलासपुर /खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2026 को एक दिवसीय महिला खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम स्व. बी.आर. यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र, बहतराई, बिलासपुर में प्रातः 10 बजे से आयोजित होगा।
प्रतियोगिता के अंतर्गत कबड्डी, आर्चरी, बास्केटबॉल और वॉलीबॉल सहित चार विभिन्न खेलों का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता में 12 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की प्रतिभागी भाग ले सकेंगी। कार्यक्रम के समापन पर विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने सभी इच्छुक प्रतिभागियों से समय पर कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित होकर प्रतियोगिता में भाग लेने का आग्रह किया है।कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य और खेलों के प्रति जागरूक करना, उनमें स्वस्थ जीवनशैली के प्रति रुचि विकसित करना तथा खेल एवं शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व को भी रेखांकित किया जाएगा।















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