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- -4 भाइयों को मिला किसान पुस्तिका एवं कोमल को मिला ड्राईविंग लाइसेंसमहासमुंद / सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम लोहारडीह में आयोजित समाधान शिविर में लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया। इसी क्रम में ग्राम बिरकोनी के 24 वर्षीय कोमल साहू को शिविर में आवेदन करने के महज एक घंटे के भीतर लर्निंग लाइसेंस प्रदान किया गया।कोमल साहू ने बताया कि उन्होंने हाल ही में नई गाड़ी खरीदी है, जिसके लिए उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस की आवश्यकता थी। समाधान शिविर में पहुंचकर उन्होंने आवेदन किया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें शीघ्र ही लर्निंग लाइसेंस मिल गया। उन्होंने कहा कि शिविर में बिना किसी परेशानी के त्वरित सेवा मिलने से उन्हें काफी सुविधा हुई। कोमल साहू ने शासन-प्रशासन द्वारा लगाए गए समाधान शिविर की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।इसी तरह ग्राम सोरिद के चार भाइयों विनोद चंद्राकर, राजेंद्र चंद्राकर, ललित चंद्राकर और डोमेंद्र चंद्राकर को समाधान शिविर में अलग-अलग किसान पुस्तिका प्रदान की गई। विनोद चंद्राकर ने बताया कि चारों भाइयों के बीच हाल ही में भूमि का बंटवारा हुआ है, जिसके बाद अलग-अलग किसान पुस्तिका की आवश्यकता थी। समीपस्थ ग्राम लोहारडीह में आयोजित समाधान शिविर में उन्होंने आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल किसान पुस्तिका उपलब्ध करा दी गई।किसानों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि समाधान शिविर वास्तव में लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहा है। खरीफ फसल की तैयारी के लिए किसान पुस्तिका की आवश्यकता थी और सही समय पर इसका मिलना उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन और त्वरित समाधान के लिए शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
- -पीएम जनमन योजना से बदल रही वनांचल की तस्वीर-सुगम हुआ आवागमन, पर्यटन को मिल रहा बढ़ावारायपुर। कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्र में बसे ग्राम मंडलाकोना के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत निर्मित नई सड़क अब केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि जनजीवन में बदलाव का आधार बन रही है। सरोधा बांध के पीछे स्थित इस गांव तक पहले पहुंचना कठिन था। बरसात के दिनों में कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते ग्रामीणों को मुख्य मार्ग से लगभग काट देते थे। स्कूल जाने वाले बच्चों, इलाज के लिए जाने वाले मरीजों और दैनिक जरूरतों के लिए आने-जाने वाले लोगों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ती थी।लेकिन अब तस्वीर बदली हुई है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) विभाग द्वारा लगभग 2 करोड़ 17 लाख रुपए की लागत से सरोधा मेन रोड से मंडलाकोना तक 4 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण किया गया है। इस निर्माण से वनांचल क्षेत्र को बारहमासी सुगम संपर्क उपलब्ध हुआ है।प्रधानमंत्री जनमन योजना विशेष रूप से दूरस्थ, पहाड़ी और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों वाले क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने पर केंद्रित है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण का सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक पहुंच पर पड़ता है। मंडलाकोना में भी इसका प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों को अब बाजार, अस्पताल और शासकीय सेवाओं तक पहुंचने में कम समय लग रहा है।सड़क बनने से स्कूली बच्चों की नियमित उपस्थिति में सुविधा होगी। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में अब पहले जैसी दिक्कत नहीं होगी। किसानों को अपनी उपज परिवहन करने के लिए बेहतर मार्ग मिला है, जिससे लागत और समय दोनों में कमी आएगी। दैनिक उपयोग की वस्तुओं की उपलब्धता भी अब अधिक सुगम हुई है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रयासों से कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का कार्य लगातार जारी है। जनमन योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने का काम तेज हुआ है, जिससे विकास योजनाओं की पहुंच भी बेहतर हुई है।मंडलाकोना तक बनी यह सड़क पर्यटन गतिविधियों के लिए भी नई संभावनाएं लेकर आई है। सरोधा बांध के पीछे का प्राकृतिक क्षेत्र तक सुगमता से पहुंचा जा सकेगा। गांव के निवासी श्री खेलावन ने बताया कि पहले खराब रास्तों के कारण गांव तक पहुंचने में काफी समय लगता था। बरसात में स्थिति और कठिन हो जाती थी। अब पक्की सड़क बनने से आवागमन आसान हुआ है और लोगों को राहत मिली है।पीएमजीएसवाई विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री एस.के. ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत वनांचल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। मंडलाकोना सड़क निर्माण से ग्रामीणों को बेहतर संपर्क सुविधा मिली है और यह मार्ग पर्यटन की दृष्टि से भी उपयोगी साबित हो रहा है।
- -75 क्षेत्रों में कार्य पूर्ण, जिले में जनगणना कार्य तेजी से जारीमहासमुंद / भारत सरकार गृह मंत्रालय, जनगणना कार्य निदेशालय छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार भारत की डिजिटल जनगणना 2027 का कार्य जिले में दो चरणों में संपादित किया जा रहा है। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले के विभिन्न विकासखंडों एवं नगरीय क्षेत्रों में जनगणना कार्य प्रगति पर है। जिले में कुल 1992 मकान सूचीकरण क्षेत्रों में से 1917 क्षेत्रों में जनगणना कार्य जारी है, जबकि 75 क्षेत्रों में कार्य पूर्ण किया जा चुका है।जनगणना कार्य के दौरान अब तक कुल 2 लाख 12 हजार 935 मकानों का सर्वे किया गया है। इनमें 1 लाख 74 हजार 71 आवासीय मकान, 3 हजार 839 आंशिक रूप से आवासीय मकान, 7 हजार 550 रिक्त मकान तथा 3 हजार 292 बंद मकानों की जानकारी दर्ज की गई है। इसके साथ ही जिले में अब तक 1 लाख 88 हजार 311 परिवारों का सर्वे पूर्ण कर लिया गया है तथा 7 लाख 250 लोगों की जनसंख्या का आंकड़ा संकलित किया गया है। जनगणना के दौरान कुल 876 मकान मालिकों द्वारा स्वगणना पहचान संख्या साझा किया गया।तहसीलवार प्रगति के अंतर्गत पिथौरा तहसील में सर्वाधिक 48 हजार 814 मकानों का सर्वे किया गया है। इसके अलावा महासमुंद तहसील में 40 हजार 486, बसना में 31 हजार 799, सरायपाली में 29 हजार 594, बागबाहरा में 18 हजार 806 तथा कोमाखान तहसील में 18 हजार 52 मकानों का सर्वे कार्य पूरा किया गया है। इसी तरह नगरीय क्षेत्रों में नगर पालिका महासमुंद में 10 हजार 418 मकानों का सर्वे किया गया है। वहीं सरायपाली में 4 हजार 10, बागबाहरा में 3 हजार 597, पिथौरा नगर पंचायत में 2 हजार 864, बसना में 2 हजार 460 तथा तुमगांव नगर पंचायत में 2 हजार 35 मकानों का सर्वे कार्य पूर्ण किया गया है।कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को निर्धारित समय-सीमा में शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े शासन की विभिन्न योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शुद्धता सुनिश्चित करते हुए जिम्मेदारीपूर्वक कार्य किया जाए।
- -105 जोड़ों ने थामा जीवनभर का साथरायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 8 मई को प्रदेशव्यापी आयोजन के क्रम में सुकमा जिले में शुक्रवार को हड़मा स्टेडियम में विधिवत पूजा अर्चना के साथ भव्य सामूहिक विवाह समारोह संपन्न हुआ। कलेक्टर सुकमा श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में 105 से अधिक जोड़ों ने अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह कर जीवन की नई शुरुआत की। इस अवसर पर जिलेभर से बड़ी संख्या में परिजन और नागरिक उपस्थित रहे, जिससे आयोजन उत्सव का रूप लेता नजर आयाइस सामूहिक विवाह समारोह में हिंदू, ईसाई सहित विभिन्न धर्मों एवं समुदायों तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़ों की सहभागिता ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता को मजबूत संदेश दिया। महिला आयोग की सदस्य सुश्री दीपिका सोरी ने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटियों का विवाह पहले चिंता का कारण होता था, लेकिन यह योजना अब भरोसा और गरिमा का आधार बन चुकी है।योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, जिससे उन्हें गृहस्थ जीवन की शुरुआत में सहारा मिल सके। आयोजन को व्यवस्थित और गरिमामय बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। एसडीएम और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री शिवदास नेताम के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने हर व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से पूरा कर समारोह को सफल बनाया।कार्यक्रम में शामिल नवविवाहित जोड़ों और परिजनों ने शासन-प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। बड़ेसेट्टी पंचायत के नवविवाहित जोड़े श्रीमती भावना अट्टी एवं श्री नागुल विनोद कुमार ने कहा कि उन्हें प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं अत्यंत अच्छी लगीं और विवाह पूरी गरिमा के साथ संपन्न हुआ। वहीं झापरा निवासी श्री रामकृष्ण सोड़ी ने बताया कि इस योजना से गरीब परिवारों को आर्थिक संबल मिलता है और बेटियों के विवाह में सम्मान के साथ सहयोग प्राप्त होता है। समारोह में हर चेहरे पर खुशी और संतोष दिखाई दिया, जिसने योजना के मानवीय उद्देश्य को साकार कर दिया। इस अवसर पर हितग्राहियों को 35 हजार का सांकेतिक चेक और प्रमाण पत्र वितरित किया गया।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मंगम्मा सोयम, उपाध्यक्ष श्री महेश कुंजाम, जिला पंचायत सदस्य श्री कोरसा सन्नू, श्रीमती माड़े बारसे, जनपद सदस्य श्री मड़कम भीमा सहित जनप्रतिनिधि, जिलास्तरीय अधिकारी और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- महासमुंद / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप प्रदेश के घरेलू, बीपीएल, कृषि एवं निम्नदाब उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 के तहत विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल रही है। योजना के माध्यम से बकाया बिजली बिल, अधिभार एवं सरचार्ज में विशेष छूट प्रदान की जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों को लाभ मिल रहा है।महासमुंद जिले में 04 मई 2026 तक की स्थिति में योजना के अंतर्गत महासमंुद, पिथौरा एवं सरायपाली के कुल 40 हजार 693 सक्रिय उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। इनमें सक्रिय बीपीएल श्रेणी के 31 हजार 217 उपभोक्ता, घरेलू श्रेणी के 6 हजार 82 उपभोक्ता तथा कृषि श्रेणी के 3 हजार 394 उपभोक्ता शामिल हैं। योजना के तहत अब तक कुल 3 करोड़ 10 लाख 57 हजार 299 रुपए की राशि जमा की जा चुकी है। जिसमें बीपीएल श्रेणी के अंतर्गत एक करोड़ 32 लाख 91 हजार 964 रुपए, घरेलू श्रेणी के अंतर्गत एक करोड़ 41 लाख 88 हजार 575 रुपए एवं कृषि श्रेणी के अंतर्गत 35 लाख 76 हजार 760 रुपए की राशि जमा किया गया है।इसी तरह योजना के अंतर्गत महासमुंद, पिथौरा एवं सरायपाली संभाग के कुल 279 निष्क्रिय उपभोक्ता है। इनमें निष्क्रिय बीपीएल श्रेणी के 89 उपभोक्ता, घरेलू श्रेणी के 83 उपभोक्ता तथा कृषि श्रेणी के 107 उपभोक्ता हैं। योजना के तहत अब तक कुल 16 लाख 27 हजार 303 रुपए की राशि जमा की जा चुकी है। जिसमें बीपीएल श्रेणी के अंतर्गत 4 लाख 43 हजार 762 रुपए, घरेलू श्रेणी के अंतर्गत 9 लाख 36 हजार 331 रुपए एवं कृषि श्रेणी के अंतर्गत 2 लाख 47 हजार 210 रुपए की राशि जमा किया गया है तथा उपभोक्ताओं के कुल बकाया राशि से 3 करोड़ 57 लाख 49 हजार 208 रुपए की राशि माफ की गई है। महासमुंद के उपभोक्ता श्री हरनाम दास ने बताया कि उनका बिजली बिल 3 हजार 160 रुपए आया है और उन्होंने इस योजना के तहत पंजीयन कराया है।योजना के तहत उपभोक्ताओं को अधिभार एवं सरचार्ज में 100 प्रतिशत तक की छूट तथा मूल बकाया राशि में भी विशेष राहत प्रदान की जा रही है। इससे 31 मार्च 2023 से पूर्व के लंबित बिजली बिलों का निराकरण आसान हुआ है तथा उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र उपभोक्ताओं को 30 जून 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य है। पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना आवश्यक है।जिला प्रशासन एवं विद्युत वितरण कंपनी ने सभी पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे योजना की अंतिम तिथि 30 जून 2026 से पूर्व पंजीयन कराकर शासन की इस जनहितकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
- -एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस, ड्रग एब्यूज एवं नशा मुक्ति विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजितमहासमुंद / छत्तीसगढ़ शासन के अभियान सही दवा शुद्ध आहार यही छत्तीसगढ़ का आधार थीम के प्रभावी एवं परिणामोन्मुख क्रियान्वयन हेतु कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले में खाद्य प्रकोष्ठ एवं औषधि प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। डॉ. आई. नागेश्वर राव, उपसंचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मार्गदर्शन में विभिन्न क्षेत्रों में जन जागरूकता एवं प्रवर्तन कार्रवाई लगातार संचालित की जा रही है।औषधि प्रकोष्ठ के अंतर्गत गठित संयुक्त दल की नोडल अधिकारी श्रीमती तृप्ति जैन सहायक औषधि नियंत्रक के नेतृत्व में निर्धारित कार्ययोजना के तृतीय चरण के तहत विगत दो दिवस 06 एवं 07 मई 2026 को बागबाहरा विकासखंड एवं महासमुंद ग्रामीण क्षेत्र में कोटपा एक्ट 2003 (सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम) के तहत विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान औषधि निरीक्षक श्री अवधेश भारद्वाज एवं श्री अखिलेश पाण्डेय द्वारा शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज दायरे में स्थित दुकानों एवं सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर रोक तथा शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित करने संबंधी प्रावधानों के उल्लंघन पर 30 चालान काटे गए। संयुक्त दल द्वारा दुकानदारों एवं संचालकों को धूम्रपान निषेध एवं नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद नहीं बेचने संबंधी सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर माचिस, लाइटर, ऐश ट्रे जैसी धूम्रपान को बढ़ावा देने वाली वस्तुएं उपलब्ध नहीं कराने की समझाइश भी दी गई। शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रखने तथा नाबालिगों को किसी भी परिस्थिति में तंबाकू उत्पाद नहीं बेचने के सख्त निर्देश दिए गए। आम नागरिकों को भी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान नहीं करने के प्रति जागरूक किया गया।इसी क्रम में 08 मई 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय महासमुंद के सभागार में एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस, ड्रग एब्यूज एवं नशा मुक्ति विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में औषधि निरीक्षक श्री अवधेश भारद्वाज, श्री अखिलेश पाण्डेय तथा स्वास्थ्य विभाग के डॉ. छत्रपाल चन्द्रकार, नोडल एनटीसीपी एवं नर्सिंग होम एक्ट शाखा द्वारा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों एवं आमजन को जागरूक किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बिना चिकित्सकीय सलाह दवाओं का सेवन नहीं करने, स्वयं दवाओं में बदलाव नहीं करने तथा एंटीबायोटिक कोर्स अधूरा नहीं छोड़ने की समझाइश दी। कार्यक्रम में जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यशाला के सफल आयोजन में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का विशेष सहयोग रहा।
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राजनांदगांव । खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के राशनकार्डधारी परिवारों को माह अप्रैल से जून 2026 तक आबंटित खाद्यान्न के एकमुश्त वितरण की समय-सीमा में वृद्धि की गई है। जारी आदेश के अनुसार अब राशनकार्डधारी हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरण की अंतिम तिथि 15 मई 2026 निर्धारित की गई है। पूर्व निर्धारित समय-सीमा में खाद्यान्न प्राप्त नहीं कर पाने वाले हितग्राही अब बढ़ी हुई अवधि में अपना खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। खाद्य विभाग ने जिले के सभी उचित मूल्य दुकानदारों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी पात्र राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी हितग्राही शासन की इस महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित न रहे। जिला प्रशासन ने राशनकार्डधारी परिवारों से अपील की है कि वे समय रहते अपने नजदीकी उचित मूल्य दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर लें।
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- सरकार को कहा थैंक्स
- शिविर में पौष्टिक आहार की दी गई जानकारी
राजनांदगांव । सुशासन तिहार का जिले में कारगर असर दिखाई दे रहा है। दूरस्थ अंचलों तक शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए नागरिकों में जागरूकता दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम आसरा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में गर्भवती माताओं एवं बच्चों को पौष्टिक आहार के लिए प्रेरित किया गया। शिविर में पहुंची ग्राम आसरा की श्रीमती महेश्वरी साहू को उपहार स्वरूप सुपोषण किट दिया गया। उन्होंने गोद भराई के अवसर पर प्राप्त इस सुपोषण किट के लिए सरकार को थैंक्स कहा। उन्होंने कहा कि माँ और बच्चों के सुपोषण के लिए यह किट मिला है। जिससे माता एवं शिशु दोनों स्वस्थ रहेंगे।
जिले में पोठ्ट लईका अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें विशेष तौर पर पालक चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें गर्भवती माताओं एवं शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार के संबंध में जानकारी दी जा रही है। ग्राम आसरा की श्रीमती पुष्पलता साहू ने पोषण किट मिलने पर खुशी जाहिर की तथा सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। सुशासन तिहार अंतर्गत आयोजित शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में जनमानस को पौष्टिक आहार, तिरंगा भोजन एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों से बनाएं जाने वाले स्वादिष्ट व्यंजनों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। इसके लिए सुपोषण कलश एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मुनगा, लाल भाजी, पालक भाजी, मेथी, अन्य भाजी सहित विभिन्न तरह की दाल, प्रोटीन एवं खनिज से भरपूर पौष्टिक आहार लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है। - राजनांदगांव । विश्व रेडक्रास दिवस पर रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, महिलाओं के लिए कैंसर जांच शिविर का आयोजन किया गया। जिले के ब्लड बैंक में आयोजित रक्तदान शिविर में नागरिकों द्वारा कुल 56 यूनिट रक्तदान किया गया। जिसके अंतर्गत मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक में 17 यूनिट, जिला अस्पताल ब्लड बैंक में 13 यूनिट, नांदगांव ब्लड बैंक में 13 यूनिट, बालाजी ब्लड बैंक में 5 यूनिट, बिलासा ब्लड बैंक में 3 यूनिट, लाइफ लाइन ब्लड बैंक में 5 यूनिट रक्तदान किया गया। इसके साथ ही जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज अस्पताल, ब्लॉक स्तर पर सीएचसी केन्द्रों पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। शिविर में सिकलिंग, थैलेसिमिया, एनीमिया (खून की कमी) की जांच, रक्तचाप और मधुमेह का परीक्षण किया गया। महिलाओं की अन्य शारीरिक समस्याओं एवं प्रजनन स्वास्थ्य से संबंधित विशेषज्ञों द्वारा परामर्श दिया गया। जिला स्तर पर महिलाओं के लिए आयोजित कैंसर जांच शिविर में कैंसर स्क्रीनिंग ब्रेस्ट कैंसर एवं सर्वाइकल कैंसर की प्रारंभिक जांच की गई।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं सचिव भारतीय रेडक्र्रास सोयायटी राजनांदगांव डॉ. नेतराम नवरतन ने इंडियन रेडक्रास सोयायटी द्वारा दी जा रही सेवाओं के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1918 एवं 1920 में स्पेनिश फ्लू महामारी की अवधि में सोयायटी को मान्यता प्राप्त हुई। इस अवसर पर उन्होंने रेडक्रास के संस्थापक हेन्ड्री डुनेंट को याद किया। सह सचिव रेडक्रास श्री सुशील जैन एवं श्री हेमंत तिवारी ने सभी रक्त दाताओं को प्रोत्साहित किया तथा सेवा कार्यों के लिए प्रेरित किया। दिग्विजय महाविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री पघनिया ने 26वीं बार रेडक्रास डे में रक्तदान किया। इस अवसर पर उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रबंधक सह जिला संगठक श्री प्रदीप शर्मा ने रेडक्रास डे पर रक्तदान शिविर तथा ब्लड बैंक के संबंध में जानकारी प्रदान की। इस दौरान श्री उत्तम चंद जैन, श्री राजेश जैन, परंपरा ग्रुप के श्री दिव्यांशु गोलछा, श्री मनोज सिंह, रेडक्रास सोसायटी के पदाधिकारी, सदस्य, वालेंटियर, अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।
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राजनांदगांव । मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत सामूहिक विवाह कार्यक्रम तहत जिले में 46 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। जिसमें 44 जोड़ों का विवाह हिन्दू रीति एवं 2 जोड़ों का विवाह बौद्ध रीति से संपन्न हुआ। राजनांदगांव विकासखंड अंतर्गत राजनांदगांव शहर के सतनाम भवन में 25 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ। जिसमें 23 जोड़ों का विवाह हिन्दू रीति एवं 2 जोड़ों का विवाह बौद्ध रीति से संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में महापौर श्री मधुसूदन यादव शामिल हुए। उन्होंने वर-वधु को आशीर्वाद प्रदान कर दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर अध्यक्ष जनपद पंचायत राजनांदगांव श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत राजनांदगांव श्री अनीता सिन्हा सहित जनपद सदस्य, पार्षद, जनप्रतिनिधि, नागरिक, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
इस तरह मुख्यमंत्री कन्या विवाह सामूहिक कार्यक्रम अंतर्गत बधेरा नवागांव में 15 जोड़ों का विवाह जोड़ों का विवाह हिन्दू रीति से संपन्न कराया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सभापति श्रीमती शीला राकेश सिन्हा एवं श्रीमती किरण विनोद बारले, जनपद सदस्य श्रीमती तुलसी साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। छुरिया में 6 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव एवं अध्यक्ष जनपद पंचायत छुरिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। -
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा जिले में खनिज का अवैध उत्खनन एवं परिवहन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में खनिज विभाग द्वारा कुमरदा एवं डोंगरगांव अंतर्गत आने वाले शिवनाथ नदी किनारे स्थित ग्राम मोतीपुर, नांदिया, धनगांव का निरीक्षण कर ग्रामीणों की उपस्थिति में जांच की गई। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम मोतीपुर स्थित शिवनाथ नदी से रेत खनन कर लगभग 500 मीटर दूरी पर पानी टंकी के पास लगभग 18 ट्रिप माजदा में खनिज रेत का अवैध भण्डारण पाया गया। क्षेत्र में अवैध भण्डारण से रेत का परिवहन करने पर 2 माजदा जप्त कर थाना डोंगरगांव को सुपुर्द किया गया।
खनि अधिकारी ने बताया कि मोतीपुर कुमरदा निवासी लोकेश निर्मलकर के स्वामित्व के माजदा सीजी 04 आरएल 7909 से वाहन चालक रेखचंद एवं मोतीपुर कुमरदा निवासी शंकर देवांगन के स्वामित्व के माजदा सीजी 09 जेसी 0764 से वाहन चालक सोमेश नायक द्वारा रेत का अवैध भण्डारण से परिवहन करने पर कार्रवाई की गई। प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण की रोकथाम के लिए लगातार गस्त व निगरानी की जा रही है। -
- आमगांव कु. में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में 882 आवेदन प्राप्त
- हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ
राजनांदगांव । राज्य शासन की मंशानुसार जनसामान्य की समस्याओं के त्वरित निराकरण एवं शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आज छुरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत आमगांव कु. में जनसमस्या निवारण शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली तथा विभिन्न विभागों द्वारा मौके पर ही समस्याओं के समाधान की पहल की गई।
क्लस्टर आमगांव कु शिविर में 13 ग्राम पंचायत अछोली, आमगांव, चिरचारीकला, चिरचारीखुर्द, घुपसाल, हालाडुला, केरेगांव, खुर्सीटिकुल, कुमरदा, मुंजालकला, मुंजालपथरी, सागर एवं सोमाझीटीया के ग्रामीण शामिल हुए। शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों से प्राप्त मांग एवं शिकायत संबंधी आवेदनों का त्वरित, प्रभावी एवं पारदर्शी निराकरण करना था। शिविर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, महिला एवं बाल विकास, राजस्व, खाद्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत, वन, श्रम तथा पशुपालन सहित विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर शासकीय योजनाओं की जानकारी दी। शिविर में कुल 882 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें सभी आवेदन मांग संबंधी थे। विभागीय अधिकारियों द्वारा तत्काल निराकरण योग्य आवेदनों का मौके पर ही समाधान किया गया।
शिविर के दौरान शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित भी किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत आवास पूर्ण करने वाले हितग्राहियों को अभिनंदन प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। वहीं बिहान महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु 12 लाख रूपए के ऋण स्वीकृति चेक वितरित किए गए। इसके अलावा नवीन राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वीकृति पत्र, स्वच्छता किट एवं मेधावी विद्यार्थियों को सम्मान पत्र भी प्रदान किए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित गोद भराई कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई तथा पोषण किट का वितरण किया गया। शिविर में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री संजय सिन्हा, जिला पंचायत सदस्य श्री गोपाल सिंह भूआर्य, श्रीमती अनीता मंडावी एवं श्रीमती बीरम मंडावी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता घासी साहू, जनपद पंचायत सदस्य श्री एकांत चंद्राकर, श्रीमती लक्ष्मी मंडावी, श्रीमती भेष बाई, श्रीमती भारती देवांगन, डॉ. ओम प्रकाश चंद्रवंशी, श्रीमती पिंकी देवपंद्रो, जनपद पंचायत सीईओ श्री होरीलाल साहू, तहसीलदार श्री विजय कोठारी सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंच एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। -
शिविर के सफल आयोजन हेतु सभी तैयारी पूर्ण, हितग्राहियों को किया जाएगा शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित
बालोद/राज्य शासन द्वारा जन शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने तथा आम जनता को सुगम, पारदर्शी एवं त्वरित सेवाओं का उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत नगर पालिका बालोद स्थित सरदार पटेल मैदान एवं गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम पंचायत परिसर माहुद अ में 12 मई 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 03 बजे तक जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जाएगा। नगर पालिका परिषद बालोद में आयोजित शिविर के सफल आयोजन हेतु मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री खिरोद भोई (मो. 9340722292) को नोडल अधिकारी एवं उप अभियंता श्री विजय मेहतरा को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। माहुद अ में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्राम देवरी द, गोड़ेला, खुरसुनी, चिरचार, जेवरतला, बोड़ेना, सिब्दी, भरदाकला, मोहंदीपाट, बघेली, बघेली, खुरसूल, गब्दी, माहुद (अ), अर्जुनी, टिकरी, बोरगहन, डुड़िया, मटिया (अ), देवगहन, ओड़ारसकरी, चीचा, भिलाई और तिलखैरी के ग्रामीण शामिल होंगे। ग्राम पंचायत परिसर माहुद अ में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के सफल आयोजन हेतु उप संचालक पंचायत श्रीमती काव्या जैन (मो. 8827173295) को नोडल अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गुंडरदेही उमेश रात्रे और अनुविभागीय अधिकारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग श्री विशाल नेताम को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि नगर पालिका बालोद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशानुसार राजस्व पखवाड़ा शिविर का आयोजन भी किया जाएगा। जिसके अंतर्गत तहसीलदार श्री आशुतोष शर्मा (मो. 9340851053) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसी तरह ग्राम माहुद में आयोजित राजस्व पखवाड़ा शिविर के लिए तहसीलदार श्री चंद्रशेखर चंद्राकर (मो. 9406253971) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। -
स्वापक एवं मनः प्रभावी औषधियों के संबंध में दवा दुकानों की गई जांच
बालोद/छत्तीसगढ़ शासन एवं नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन के निर्देशानुसार कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा द्वारा गठित औषधि विभाग की टीम के द्वारा दिनांक 06 एवं 07 मई 2026 को बालोद जिले के विभिन्न दुकान संचालकों के विरूद्ध चालानी कार्रवाई की गई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नोडल अधिकारी ने बताया कि इस दौरान झलमला चैक, रेलवे फाटक, दल्लीराजहरा प्रेस स्टैण्ड, डौण्डी एवं विभिन्न क्षेत्रों में संचालित दुकानों में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) 2003 के तहत 41 चालानी कार्रवाई की गई है। साथ ही दुकानों का तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पाद के रखरखाव एवं धूम्रपान निषेध का बोर्ड प्रदर्शित करने एवं नाबालिगों को तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पाद विक्रय नहीं करने संबंधी दिशा-निर्देश दिया गया। स्थापक एवं मनः प्रभावी औषधियों (नशीली दवाओं) के संबंध में बालोद जिले में संचालित विभिन्न दवा दुकानों में औचक निरीक्षण किया गया। दवा दुकानों में निरीक्षण के दौरान खरीदी-बिकी रिकार्ड की जांच की गई। दवा दुकान संचालकों को स्वापक औषधियों के खरीदी-बिकी रिकार्ड नियमानुसार रखने एवं डाक्टरों के वैध पर्ची पर ही स्वापक औषधियों की बिकी करने हेतु निर्देशित किया गया है। अभियान के तहत आगामी दिवस में भी जिले के अन्य क्षेत्रों में भी कोटपा एक्ट 2003 के तहत चालानी कार्यवाही एवं स्थापक एवं मनः प्रभावी औषधियों (नशीली दवाओं) के संबंध में जांच की जाएगी।उल्लेखनीय है कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा प्रदेशव्यापी 15 दिवसीय विशेष अभियान ’सही दवा, शुद्ध आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार’ बालोद जिले में विधिवत आरंभ किया गया है। यह अभियान 27 अप्रैल 2026 से 11 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आमजन को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों तथा औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। -
- अधिकारी से लाइनमेन तक हों एआई तकनीक से लैस
रायपुर/ छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष श्री सुबोध कुमार सिंह ने डंगनिया स्थित मुख्यालय में जनरेशन, ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बिजली हर व्यक्ति के जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है और उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना पावर कंपनीज़ की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।श्री सिंह ने अधिकारियों से कहा कि विद्युत व्यवस्था को आधुनिक, तेज एवं उपभोक्ता केंद्रित बनाने के लिये नवीन टेक्नोलॉजी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने डाटा बेस्ड डिसिजन मेकिंग पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक एआई तकनीक का उपयोग कर विद्युत आपूर्ति, फॉल्ट मॉनिटरिंग, लोड प्रबंधन, उपभोक्ता शिकायत निवारण एवं सिस्टम मॉनिटरिंग को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।श्री सिंह ने कहा कि पावर कंपनीज़ में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नई तकनीकों एवं आधुनिक कार्यप्रणाली से लैस किया जाना चाहिए, ताकि कार्य क्षमता, मॉनिटरिंग सिस्टम और उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार किया जा सके।उन्होंने तीनों कंपनियों के अधिकारियों की अलग-अलग बैठक लेकर विभिन्न योजनाओं एवं कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।बैठक में नए भवन निर्माण कार्यों में तेजी लाने, लंबित परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने तथा उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।अध्यक्ष श्री सिंह ने टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1912 को और अधिक दक्ष बनाने तथा शिकायतों के निराकरण के रिस्पांस टाइम में तेजी लाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना पावर कंपनीज़ की प्राथमिक जिम्मेदारी है।बैठक में जनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री एसके कटियार, ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीमसिंह कंवर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। -
- कलेक्टर-एसपी ने किया कटघोरा-चोटिया एनएच-130 में ब्लैक स्पॉट का निरीक्षण
-मोड़ पर रंबल स्ट्रिप, अंधेरे क्षेत्रों में सोलर स्टड, रेडियम और रिफ्लेक्टर लगाने के दिए निर्देश
कोरबा कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक श्री सिद्धार्थ तिवारी ने आज कटघोरा-चोटिया नेशनल हाइवेज-130 पर संभावित ब्लैक स्पॉट का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राम बंजारी, मड़ई मोड़, लमना से लेकर चोटिया तक सड़क मार्ग की स्थितियों का आकलन करते हुए विशेषकर मोड़ों और अंधे मोड़ों पर सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया।
उन्होंने दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए मोड़ से 25 से 50 मीटर पहले रंबल स्ट्रिप लगाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने मड़ई मोड़, चोटिया मार्ग के घाट एवं अंधे मोड़ों पर रोड सेफ्टी उपायों की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रकाश व्यवस्था को बेहतर करने के निर्देश दिए। कलेक्टर-एसपी ने एसडीएम पोड़ी उपरोड़ा को पुलिस, नेशनल हाईवे, परिवहन विभाग और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम बनाकर रात्रि में निरीक्षण करने और संभावित दुर्घटना-जन्य स्थलों को चिन्हित करने को कहा। उन्होंने अंधेरे वाले मोड़ों पर सोलर स्टड और कैट आई लगाने, घाट एवं मोड़ क्षेत्रों में रोड स्टड, रिफ्लेक्टर और रेडियम लगाने तथा ग्रामीण सड़कों के मुख्य मार्ग से मिलने वाले स्थानों पर उचित स्पीड ब्रेकर स्थापित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए वाहनों की गति नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है, जिसके लिए मोड़ों पर रंबल स्ट्रिप अनिवार्य रूप से लगाए जाएँ। निरीक्षण के दौरान कटघोरा एसडीएम श्री तन्मय खन्ना, पोड़ी उपरोड़ा एसडीएम श्री मनोज कुमार, तहसीलदार श्रीमती सुमन मानिकपुरी, थाना प्रभारी, परिवहन विभाग के अधिकारी तथा नेशनल हाईवे प्राधिकरण के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
- - 5 वर्षों में रोपे गए 27 लाख से अधिक पौधे, 951 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हरित आवरण-अरपा नदी के संरक्षण के लिए विशेष अभियान शुरूरायपुर / पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार सतत भविष्य के लिए अनिवार्य है। इसमें वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और जन जागरूकता प्रमुख हैं। शहरी क्षेत्रों में मियावाकी पद्धति से पौधारोपण, प्लास्टिक प्रतिबंध और जल प्रदूषण कम किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। वनों की रक्षा, बंजर भूमि का पुनरुद्धार और सामुदायिक उद्यान विकसित करना है। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के बिलासपुर जिले के (कोटा परियोजना मंडल) पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विगत पांच वर्षों (2021 से 2025-26) के दौरान निगम ने जिले के विभिन्न अंचलों में योजनाबद्ध तरीके से 27 लाख 14 हजार 350 पौधों का रोपण कर 951.980 हेक्टेयर क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया है। 852 हेक्टेयर के 66 कक्षों में 21.30 लाख पौधे लगाए गए, जिनमें मुख्य रूप से बेशकीमती सागौन का रोपण किया गया। सघन और त्वरित वृद्धि के लिए नीलगिरी और सागौन के उन्नत क्लोनल पौधों का रोपण किया गया। विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में 3.16 लाख से अधिक पौधे लगाकर ग्रीन कवर बढ़ाया गया। नदी पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने के लिए वर्ष 2025-26 में अरपा नदी के तटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत कम जगह में घने जंगल विकसित करने के लिए अरपा किनारे 3.620 हेक्टेयर में 20,300 पौधे रोपे जाएंगे। नदी के किनारों पर सघन ब्लॉक वृक्षारोपण और रामसेतु क्षेत्र में विशेष हरियाली विकसित की जाएगी, जिससे भू-क्षरण रुकेगा। वन विकास निगम के ये सतत प्रयास न केवल बिलासपुर के स्थानीय जलवायु संतुलन को बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं, बल्कि इससे भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण का एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है। निगम का यह अभियान प्रदेश की हरित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
- -मानवता की सेवा में रेडक्रॉस की भूमिका सराहनीय- मुख्यमंत्री श्री सायरायपुर, / विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ शाखा के चेयरमेन श्री तोमन साहू जी चेयरमेन एवं अन्य पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को रेडक्रॉस का बैज पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर विश्व रेडक्रॉस दिवस की शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों को इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मानवता की सेवा के साथ ही आपदा के समय में रेडक्रॉस संस्था की भूमिका सराहनीय है। इस अवसर पर वाइस चेयरमेन श्री रुपेश पाणिग्रही,कोषाध्यक्ष श्री संजय पटेल,राज्य प्रबंध समिति सदस्य श्री प्रदीप साहू, संरक्षक सदस्य श्री दिनेश तापड़िया उपस्थित थे।
- रायपुर / राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कार्यभार में फेरबदल करते हुए नई नियुक्तियां जारी की हैं। इस आदेश के तहत शिक्षा और जिला स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। वर्ष 2012 बैच की आईएएस अधिकारी सुश्री पुष्पा साहू को सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल के पद पर नियुक्त किया गया है। ज्ञातव्य है कि 6 मई 2026 को जारी आदेश के तहत सुश्री पुष्पा साहू को कलेक्टर जिला-कोरिया पदस्थ किया गया था, जिसमें जिसमें आंशिक संशोधन करते हुए सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल के पद पर पदस्थ किया गया है।वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी श्रीमती रोक्तिमा यादव को जिला-कोरिया का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वे आगामी आदेश तक अस्थाई रूप से इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगी। 6 मई 2026 को जारी आदेश के तहत श्रीमती रोक्तिमा यादव, द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा के पद पर पदस्थ किया गया था, जिसमें आंशिक संशोधित करते हुए कलेक्टर जिला-कोरिया पदस्थ किया गया है।वर्ष 2019 बैच की आईएएस अधिकारी श्रीमती रीता यादव को आयुक्त, उच्च शिक्षा के पद पर पदस्थ किया गया है। इसके साथ ही उन्हें प्रबंध संचालक, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उनके पदभार संभालते ही इस पद को वरिष्ठ वेतनमान के संवर्गीय पद के समकक्ष माना जाएगा।
- -संवेदनशील पुलिसिंग की मिसाल-पांच वर्षों में 87 हजार से अधिक गुम इंसानों की हुई बरामदगीरायपुर / छत्तीसगढ़ में गुमशुदा लोगों की तलाश अब केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशील पुलिसिंग और मानवीय जिम्मेदारी की मजबूत पहल बन गयी है। राज्य में वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक कुल 1 लाख 3 हजार 766 गुम इंसानों की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें से 87 हजार 35 लोगों को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर उनके परिवारों तक पहुंचाया है।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुलिस महकमे के आला अधिकारियों को राज्य में गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए प्रभावी अभियान संचालित करने के निर्देश दिए थे। छत्तीसगढ़ में पुलिस प्रशासन द्वारा संचालित ऑपरेशन तलाश और ऑपरेशन मुस्कान के जरिए बरामद लोगों में 2 हजार 785 बालक, 16 हजार 472 बालिकाएं, 18 हजार 671 पुरुष और 49 हजार 107 महिलाएं शामिल हैं। इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस लगातार संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता के साथ गुमशुदा लोगों की तलाश में सक्रिय है।राजधानी रायपुर सहित अविभाजित जिले में भी पुलिस की सक्रियता प्रभावी रही। यहां गुम नाबालिगों, महिलाओं और पुरुषों से संबंधित 15 हजार 632 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 12 हजार 456 लोगों को खोज निकाला गया। लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है और जिला स्तर पर विशेष टीमों की तैनाती के साथ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।महत्वपूर्ण बात यह रही कि इन मामलों में अब तक मानव तस्करी जैसे किसी बड़े संगठित अपराध की जानकारी सामने नहीं आई है। बरामद लोगों ने अपने कथनों में बताया कि अधिकांश लोग प्रेम संबंध, रोजगार की तलाश, परिजनों की डांट या घूमने जाने जैसी वजहों से घर छोड़कर चले गए थे। इनमें से कई लोग बाद में स्वयं भी वापस लौट आए।अप्रैल में चला ऑपरेशन तलाश 4056 लोगों की हुई बरामदगीगुमशुदा लोगों की तलाश को तेज गति देने के लिए अप्रैल 2026 में राज्यभर में “ऑपरेशन तलाश” अभियान चलाया गया। इस अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस को उल्लेखनीय सफलता मिली और केवल एक माह में 4 हजार 56 गुमशुदा लोगों को खोज निकाला गया। इनमें 545 बच्चे तथा 3511 महिला और पुरुष शामिल रहे। बरामद लोगों में 75 बालक, 470 बालिकाएं, 972 पुरुष और 2539 महिलाएं शामिल हैं। सभी को विधिवत उनके परिवारों से मिलाया गया।अभियान के दौरान पुलिस ने अंतर्राज्यीय समन्वय का भी प्रभावी उपयोग किया। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों से 182 गुमशुदा लोगों को खोजकर वापस लाया गया। इनमें 3 बालक, 63 बालिकाएं, 13 पुरुष और 103 महिलाएं शामिल हैं।जिलों की सक्रिय भूमिका से मिली बड़ी सफलताऑपरेशन तलाश में जिला पुलिस इकाइयों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। बरामदगी के मामले में दुर्ग जिला सबसे आगे रहा, जहां 683 लोगों की पतासाजी की गई। इसके बाद बिलासपुर में 648, रायपुर में 426, राजनांदगांव में 280, रायगढ़ में 251 और महासमुंद में 183 गुम इंसानों को खोजा गया।इसी तरह बलौदाबाजार में 136, जांजगीर-चांपा में 134, सरगुजा में 114 और बालोद जिले में 106 लोगों को बरामद कर अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।अभिव्यक्ति अभियान से बढ़ रही जागरूकतामहिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्य में “अभिव्यक्ति” जागरूकता अभियान भी लगातार चलाया जा रहा है। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, छात्रावासों और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में पुलिस टीमें पहुंचकर लोगों को मानव तस्करी, साइबर अपराध, पॉक्सो एक्ट, नए कानूनों और आत्मरक्षा के बारे में जानकारी दे रही हैं।इसके साथ ही गुम बच्चों की खोज के लिए “ऑपरेशन मुस्कान” और गुम इंसानों की तलाश के लिए “ऑपरेशन तलाश” जैसे अभियान समय-समय पर संचालित किए जा रहे हैं। पुलिस तकनीकी संसाधनों, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और ईश्तहारों के माध्यम से भी लगातार निगरानी और खोजबीन कर रही है।हर बरामद व्यक्ति किसी परिवार की खुशीछत्तीसगढ़ पुलिस का मानना है कि हर गुमशुदा बच्चे, महिला या व्यक्ति की बरामदगी किसी परिवार की चिंता और पीड़ा का अंत होती है। यही कारण है कि पुलिस इसे केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय दायित्व मानकर काम कर रही है।संवेदनशील पुलिसिंग, तकनीकी सहयोग, मजबूत सूचना तंत्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के चलते हजारों परिवारों के चेहरे पर फिर मुस्कान लौट सकी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी व्यक्ति, खासकर नाबालिग, महिला या बुजुर्ग के गुम होने की सूचना तुरंत नजदीकी थाना, डायल 112 या पुलिस नियंत्रण कक्ष को दें, ताकि समय रहते उनकी सुरक्षित तलाश सुनिश्चित की जा सके।
- -युवा उद्यमी विशाल हालदार का कमाल कचरे से कंचन बनाने के नवाचार को मुख्यमंत्री ने भी सराहारायपुर / छिंद, खजूर, पाम के बीज, के वेस्ट बीजों से अब स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट हर्बल कॉफी बनाई जा रही है। यह नवाचार न केवल बेकार बीजों का सदुपयोग करता है, बल्कि एक स्वास्थ्यवर्धक कैफीन.मुक्त पेय भी प्रदान करता है। यह कॉफी कैफीन मुक्त है, जो इसे अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और एसिडिटी के मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाती है। यह नवाचार न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।बस्तर का नैसर्गिक सौंदर्य अब केवल अपनी हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि एक सुगंधित क्रांति के लिए भी जाना जाएगा। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा नवाचारी विशाल हालदार ने अपनी जड़ों से जुड़कर एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को बहुमूल्य बना दिया है। विशाल ने छिंद (खजूर की स्थानीय प्रजाति) के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार कर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है।बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई करने वाले विशाल ने करीब दो साल के गहन शोध के बाद इस हर्बल कॉफी को विकसित किया है। बस्तर के जंगलों में प्रचुरता से मिलने वाले छिंद के बीज, जो अब तक व्यर्थ फेंक दिए जाते थे। यह कॉफी पूरी तरह कैफीन मुक्त है, जिससे स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसे साधारण कॉफी से अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं।विशाल के इस अभिनव प्रयोग को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विशाल को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी सहित प्रबुद्ध वर्ग ने भी इस कॉफी के स्वाद और सुगंध की जमकर सराहना की है।विशाल हालदार का लक्ष्य केवल उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं को स्वावलंबी बनाना है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से वे स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से गांवों और जंगलों से छिंद के बीज इकट्ठा करने वाले ग्रामीणों को आय का एक नया जरिया मिलेगा। स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग कर बस्तर के नाम को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना। यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। यह हर्बल कॉफी आने वाले समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए बस्तर का अनूठा उपहार साबित होगी।खजूर के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे फेनोलिक यौगिक और ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हैं। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट टेस्टिंग और विकास के अंतिम चरणों में है। जल्द ही इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की जाएगी, जिसके बाद बस्तर की यह हर्बल कॉफी बाजारों में अपनी खुशबू बिखेरने के लिए तैयार होगी।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले ने स्वच्छता और नवाचार की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है। जिले के दुलदुला जनपद पंचायत के समीप विकसित किया गया "इको पार्क" आज न केवल स्थानीय पर्यटन का केंद्र बना हुआ है, बल्कि "वेस्ट टू बेस्ट" (कबाड़ से जुगाड़) की अवधारणा को धरातल पर उतारने वाला एक उत्कृष्ट मॉडल भी बन गया है। अनुपयोगी और बेकार समझी जाने वाली सामग्रियों से सजी इस सुंदर संरचना ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई सोच जागृत की है। इस पार्क की सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण है। यहाँ फेंके गए पुराने टायरों, लोहे के कबाड़ और अन्य बेकार वस्तुओं का इस्तेमाल कर अत्यंत आकर्षक कलाकृतियां बनाई गई हैं। लोहे के बेकार पार्ट्स से घोड़ा, मयूर और तितली जैसी सजीव आकृतियां गढ़ी गई हैं। इसी तरह पुराने टायरों को रंग-बिरंगे झूलों में तब्दील कर दिया गया है, जो बच्चों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।इको पार्क को केवल सजावट तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक संपूर्ण सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए आधुनिक ओपन जिम की सुविधा दी गई है। इसी तरह बच्चों के लिए झूलों और विभिन्न खेल सामग्रियों का प्रबंधन किया गया है। यह स्थान परिवारों के लिए शाम बिताने और मनोरंजन का पसंदीदा स्पॉट बनकर उभरा है।हाल ही में जिला प्रशासन ने पार्क का बारीकी से निरीक्षण किया। कबाड़ के इस रचनात्मक उपयोग की प्रशंसा करते हुए परिसर में व्यापक पौधरोपण कर इसे और अधिक हरित बनाने का निर्णय लिया गया। नियमित साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आमजन के लिए सुविधाओं में निरंतर विस्तार करने के साथ यह पार्क समाज को स्वच्छता, पुनर्चक्रण (Recycling) और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देता है। स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का मानना है कि दुलदुला का यह इको पार्क राज्य के अन्य विकासखंडों के लिए एक पथप्रदर्शक का कार्य करेगा। यह साबित करता है कि कम लागत और रचनात्मक सोच के साथ हम पर्यावरण संरक्षण और जन-सुविधाओं का बेहतर समन्वय कैसे कर सकते हैं।
- - विश्वविद्यालय के गुणात्मक विकास और समस्याओं पर हुई चर्चारायपुर । कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान कुलपति ने मंत्री जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के भविष्य, शैक्षणिक सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई।मुलाकात के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विश्वविद्यालय में संख्यात्मक विस्तार के साथ-साथ गुणात्मक विकास शिक्षा के स्तर में सुधार) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय को और अधिक उन्नत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश साझा किए। इस अवसर पर उपस्थित कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की लंबे समय से लंबित समस्याओं को मंत्री जी के समक्ष रखा, जिस पर सकारात्मक चर्चा हुई। विश्वविद्यालय वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल उद्देश्यों—गुणवत्ता, समानता, पहुँच और वहनीयता—को ध्यान में रखकर अपने पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहा है। यहाँ के मीडिया पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को रटने की पद्धति से दूर कर उनमें-आलोचनात्मक सोच,रचनात्मकता बहुविषयक शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों का सामना कर सकें।कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने आगामी परीक्षाओं और छात्रों की पढ़ाई के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए उन्होंने लाइब्रेरी में 'एयरकूल्ड रीडिंग रूम' की व्यवस्था करने को कहा है, ताकि छात्र-छात्राएं बिना किसी परेशानी के सुचारु रूप से अपना अध्ययन जारी रख सके।
- -आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल बना गायत्री महिला स्व-सहायता समूहरायपुर /आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से जुड़कर अपने भाग्य को बदलने वाली ग्रामीण महिलाएं हैं। महिलाओं की संघर्ष यह दर्शाती है कि आत्मनिर्भरता से न केवल आर्थिक स्थिति सुधरती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और निर्णय लेने का अधिकार भी मिलता है। जहाँ महिलाएं घर से निकलकर उद्यमी बन रही हैं, आत्मनिर्भर भारत का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र स्थित ग्राम कर्रा (हि.) की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर न केवल आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त किया है, बल्कि समाज के सामने सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण भी पेश किया है। ये मिसालें साबित करती हैं कि कौशल विकास, आत्मविश्वास, और वित्तीय स्वतंत्रता जैसे मुद्रा ऋण से महिलाएं न केवल अपने परिवार को बल्कि समाज को भी मजबूत कर रही हैं।श्रीमती गौरी यादव (अध्यक्ष) और श्रीमती पांचो श्रीवास (सचिव) के कुशल नेतृत्व में संचालित इस 12 सदस्यीय समूह को शासन की योजनाओं से संबल मिला । बिहान योजना से 6 लाख रुपये का ऋण और एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग से 4 लाख रुपये का ऋण। कुल निवेश 10 लाख रुपये की राशि से महिलाओं ने “श्री राम टेंट हाउस” के नाम से अपने उद्यम की शुरुआत की।वर्ष 2025 में रामनवमी के अवसर पर शुरू हुआ यह व्यवसाय आज एक विशाल रूप ले चुका है। वर्तमान में समूह के पास निम्नलिखित संसाधन उपलब्ध हैं। 30×30 फीट का मंच, 60×120 फीट का विशाल पंडाल, 60 टेबल, 500 कुर्सियां और 10 जम्बो कूलर है। वैवाहिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन, शोक सभा और शासकीय शिविरों (जैसे- श्सुशासन तिहारश् और जनसमस्या निवारण शिविर) में टेंट व बर्तन आपूर्ति।समूह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहा है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक कार्यों हेतु बर्तन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। ग्रामीणों के लिए बर्तन बैंक का संचालन किया जा रहा है, जहाँ बेहद कम दरों पर सामग्री उपलब्ध है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के माध्यम से टेंट हाउस की सेवा गाँव.गाँव पहुँचाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा है।बेहतर प्रबंधन और कड़ी मेहनत का परिणाम यह है कि समूह की वार्षिक आय अब 10 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है। स्थानीय प्रशासन के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी ने इनकी आय और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि की है। समूह की महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण की इस राह को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि जिले में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।
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- बस्तर का वेस्ट-अब बनेगा बेस्ट
- अब बनेगी बस्तर की नई पहचानरायपुर / बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के बीच अब एक नई और सुगंधित क्रांति आकार ले रही है, जिसका श्रेय दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार को जाता है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त करने वाले विशाल ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने और कुछ नया करने की चाह में छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में पूरी तरह व्यर्थ समझा जाता था। इस अभिनव प्रयोग के पीछे विशाल का उद्देश्य न केवल बेकार पड़े प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करना है, बल्कि कॉफी के उन शौकीनों को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करना है जो स्वाद तो चाहते हैं लेकिन कैफीन के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं। विशाल का यह सफर करीब दो वर्षों के गहन शोध और प्रयोगों का परिणाम है, जिसमें उन्होंने इंटरनेट की मदद और स्थानीय समझ का बखूबी तालमेल बिठाया है। विशाल की इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला, जिसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा सम्मानित किया गया।इस हर्बल कॉफी की सबसे प्रभावशाली विशेषता इसका पूरी तरह से कैफीन मुक्त होना है, जबकि इसमें छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। विशाल का मानना है कि अधिकांश लोग केवल मानसिक सक्रियता के लिए ही नहीं, बल्कि कॉफी के अनूठे स्वाद और उसकी आदत के कारण इसका सेवन करते हैं, और उनकी यह खोज इसी वर्ग को ध्यान में रखकर की गई है। इस नवाचार को तब बड़ी पहचान मिली जब विशाल ने शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में अपना स्टॉल लगाया। वहाँ प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चैधरी सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और आम जनता ने इस कॉफी का स्वाद चखा और इसकी खूब सराहना की। विशाल केवल एक उत्पाद बनाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनके इस आइडिया से बस्तर के ग्रामीणों को रोजगार मिले और गांवों और जंगल से मिलने वाले छिंद के बीजों से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी भी टेस्टिंग और विकास के दौर में है और इसका आधिकारिक लॉन्च होना बाकी है, लेकिन विशाल के इस अटूट प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। आने वाले समय में यह हर्बल कॉफी न केवल बस्तर की पहचान बन सकती है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए एक अनूठा उपहार भी साबित हो सकती है।















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