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- -41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत-14.5 लाख परिवारों को अब भी मिल रही मुफ्त बिजली-सिंचाई पम्प धारी कृषकों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं--सब्सिडी, सौर ऊर्जा एवं राहत योजनाओं से अधिकांश उपभोक्ताओं को संरक्षणरायपुर /छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत अर्थात लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा।गौरतलब है कि विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। आयोग विद्युत कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता, उत्पादन लागत, कोयला, ट्रांसमिशन तथा वितरण व्यय सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर दरों का निर्धारण करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण प्रदेश के अधिकांश परिवारों पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता, जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इन राहतों के कारण लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा।किसानों पर अतिरिक्त व्यय भार नहींराज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किए जाने के कारण किसानों पर इसका अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों के स्थायी प्रभार को भी यथावत रखा गया है।सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ शून्यऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक लगभग 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में लगभग 89 हजार घरों में सौर संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे बिजली उपभोग की लागत में कमी आएगी।बिजली बिल समाधान योजना से मिली बड़ी राहतमुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में विशेष राहत प्रदान की जा रही है।बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तथा संपूर्ण सरचार्ज में छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही शेष राशि को अधिकतम 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू तथा 33 हजार कृषि उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को दी गई है।उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर भी जोरराज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर पर मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को पूर्ववत जारी रखा गया है। इससे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहतबस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर विशेष राहत प्रदान की गई है। इससे इन संस्थानों के संचालन व्यय में कमी आएगी।कम बिजली खर्च करने का नया अवसर10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। वहीं पीक आवर्स में 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा।ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूत करने बड़ा निवेशराज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। वर्तमान में 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए विद्युत संयंत्र की योजना पर भी कार्य चल रहा है।आगामी वर्षों में 400/132 केवी के 4, 220/132 केवी के 17 तथा 132/33 केवी के 34 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। वहीं वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 106 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण जारी है तथा लगभग 300 अतिरिक्त उपकेंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है।उपभोक्ता हित और व्यवस्था दोनों का संतुलनऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन एवं वितरण लागत, पूर्व वर्षों के वित्तीय दायित्वों तथा विद्युत अधोसंरचना विस्तार की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया यह संशोधन सीमित दायरे का है। राज्य सरकार ने सब्सिडी, राहत योजनाओं और सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।
- रायपुर / राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में जगदलपुर के ट्री मैन श्री संपत झा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर श्री झा ने राज्यपाल कोे दुनिया की सबसे मंहगी आम प्रजातियों में शामिल मियाजाकी आम भेंट की। राज्यपाल ने मियाजाकी आम की खेती को बस्तर क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने मे सहायक सिद्ध हो सकती है बल्कि छत्तीसगढ़ को अंतरर्राष्ट्रीय फल बाजार में नई पहचान भी दिला सकती है। उन्होंने इस विशेष प्रजाति की खेती को बढ़ावा देने, इसकी पैदावार मे वृद्धि करने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी मार्केटिंग के प्रयास करने हेतु प्रोत्साहित किया।
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-समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया राज्यपाल ने
रायपुर /राज्यपाल श्री रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए।राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए।राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले बने।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मश्री श्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है।इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया। इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया गु्रप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे। - -पशुपालकों से जिम्मेदारी निभाने की अपीलरायपुर. ।माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में बिलासपुर जिला प्रशासन, नगर निगम एवं पशु चिकित्सा विभाग द्वारा सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित एवं आवारा मवेशियों के नियंत्रण के लिए अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी पशुपालकों, डेयरी संचालकों एवं किसानों से अपने पशुओं को घर या निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों सहित सार्वजनिक सड़कों पर न छोड़ने की अपील की है।बिलासपुर नगर निगम द्वारा शहर की सड़कों एवं राजमार्गों से पकड़े गए मवेशियों को मोपका स्थित पशु आश्रय केंद्र में रखा जाता है। यहां से चयनित पशुओं को गौ-इकाई अथवा बैल-जोड़ी इकाई के रूप में पशुपालन विभाग के माध्यम से स्थायी पालन हेतु उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद यह देखा गया है कि कुछ पशुपालक निगम के नियमों के तहत अपने पशुओं को वापस लेकर पुनः सड़कों पर छोड़ देते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है।जिला प्रशासन ने इसे ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई गौवंशीय अथवा भैंसवंशीय पशु सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों अथवा राज्य मार्गों पर विचरण करते हुए पाया जाता है, तो उसे स्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। जब्त सांडों को बैगा-बिरहोर एवं जरूरतमंद किसानों को बैल-जोड़ी के रूप में तथा जब्त गायों को गौ-इकाई के रूप में स्थायी पालन हेतु वितरित किया जाएगा। आवश्यकता अनुसार उन्हें गौशालाओं एवं गौठानों में भी स्थायी रूप से विस्थापित किया जाएगा।बिलासपुर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर छोड़े गए पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात की सुरक्षा तथा पशुओं के बेहतर संरक्षण के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। पशुपालकों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए प्रशासन ने सभी से अपने पशुओं की समुचित देखभाल एवं जिम्मेदारी से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब्त पशुओं के संबंध में की गई कार्रवाई पर किसी प्रकार की दावा-आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि यह व्यवस्था माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लागू की जा रही है।
- -सुशासन तिहार में किए गए वादे हो रहे पूरे, पंचायत भवन, पीडीएस भवन और मुक्तिधाम निर्माण को मिली मंजूरीरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं को शीघ्रता से पूरा करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर की गई घोषणाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर अमल में लाया गया है।उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा विभिन्न विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं।मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम सिलमा में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन, डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की लागत से नवीन पीडीएस भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार ग्राम कुनकुरीकला में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की घोषणाओं पर त्वरित अमल के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। उनका कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर न केवल समस्याएं सुन रहा है, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित कर रहा है। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त मांगों और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंच रहा है और सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार हो रही है।
- -आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से बढ़ी पैदावार, लागत में आई कमीरायपुर, / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कचंदा निवासी किसान श्री मनोहर यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से उन्होंने अपनी खेती की लागत कम करने के साथ-साथ उत्पादन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है।लगभग दो एकड़ भूमि पर खेती करने वाले श्री यादव पहले बढ़ती कृषि लागत और उत्पादन की अनिश्चितता से चिंतित रहते थे। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन तथा राज्य शासन की किसान हितैषी पहलों से प्रेरित होकर उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और अपनी फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का प्रयोग शुरू किया।नई तकनीक के परिणाम शीघ्र ही सामने आने लगे। नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों को संतुलित पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही उर्वरकों पर होने वाला खर्च भी कम हुआ, जिससे खेती की लागत नियंत्रित करने में मदद मिली। कम मात्रा में अधिक प्रभावी साबित होने वाले नैनो उर्वरकों ने उनकी खेती को पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बना दिया है।श्री मनोहर यादव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों का परिवहन और उपयोग बेहद सरल है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है। बेहतर गुणवत्ता वाली फसल और बढ़ी हुई पैदावार का सीधा लाभ उनकी आय में वृद्धि के रूप में मिला है।उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ नवाचार आधारित खेती ही समृद्धि का मार्ग है। उनका मानना है कि नई तकनीकों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का लाभ उठाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकते हैं।
- -भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय-स्कूली शिक्षा में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का संत समाज ने किया स्वागत-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विभिन्न संत-महात्माओं ने की सौजन्य भेंट, आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्णय पर जताया आभाररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर श्री स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के श्री महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से श्री उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के श्री देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है। संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- -मुख्य सचिव ने दिए नई बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के निर्देशरायपुर / छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और सुगम बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए। कोई भी सड़क बनाने से पहले उसका जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे किया जाए। सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) से जुड़े सभी कानूनी व प्रशासनिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कारण जो ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनका सुधार और मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने को कहा गया है।बैठक का सबसे अहम फैसला आगामी चरणों को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पीएमजीएसवाय फेस-4 के अंतर्गत राज्य की ऐसी सभी बसाहटों को चिन्हित किया जाए जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं। एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इन सभी बसाहटों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने अब तक की वित्तीय और भौतिक प्रगति का ब्योरा पेश किया कि राज्य में पीएमजीएसवाय फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8 हजार 358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 अपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा फेस-3 के तहत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी पूरा हुआ।भारत सरकार द्वारा निर्धारित 1,372 किलोमीटर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 1,517 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PGVT) की 872 बसाहटों के लिए स्वीकृत 807 सड़कों में से 366 सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 429 सड़कों पर काम तेजी से चल रहा है।इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज सचिव श्री पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सचिव श्री अब्दुल कैसर अब्दुल हक और छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सीईओ श्री भीम सिंह सहित वन, परिवहन, लोक निर्माण, वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -खेत में बैल चराते समय दर्ज कराई शिकायत, प्रशासन ने घर पहुंचकर खुलवाया बैंक खाता और बनवाया किसान क्रेडिट कार्डरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सराईटीकरा निवासी किसान श्री राजनाथ राजवाड़े का अनुभव इसका सशक्त उदाहरण है, जहां एक फोन कॉल पर प्रशासन ने महज 24 घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान कर दिया।श्री राजनाथ राजवाड़े आगामी खरीफ फसल के लिए खाद की व्यवस्था को लेकर चिंतित थे। खेत में बैल चराने के दौरान उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपनी समस्या दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और मात्र दो घंटे के भीतर कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली तथा सीधे उनके घर पहुंच गए।जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि शासकीय व्यवस्था के माध्यम से खाद-बीज प्राप्त करने के लिए किसान का सहकारी बैंक में खाता और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) होना आवश्यक है। अधिकारियों ने स्वयं पहल करते हुए किसान को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग दिया। बैंक का समय समाप्त हो जाने के कारण अगले दिन सहकारी बैंक में उनका खाता खुलवाया गया, पासबुक जारी की गई और आवश्यक दस्तावेज जमा कराए गए।इसके बाद अल्प समय में ही किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया गया। केसीसी बनने के साथ ही श्री राजवाड़े को आवश्यक खाद और बीज उपलब्ध करा दिए गए तथा भविष्य में कृषि कार्यों के लिए ऋण एवं नकद सहायता प्राप्त करने का रास्ता भी आसान हो गया।बिना किसी कार्यालय के चक्कर लगाए समस्या का समाधान मिलने से किसान ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के 24 घंटे के भीतर ही उनका पूरा काम हो गया। उन्हें खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा और कृषि विभाग के अधिकारियों ने घर पहुंचकर हर संभव सहायता प्रदान की। श्री राजनाथ राजवाड़े ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की सराहना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था किसानों और आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने किसानों के हित में किए जा रहे संवेदनशील और जनहितकारी प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अपने एक दिवसीय प्रवास पर भाटापारा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शहर को एक बड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सौगात देते हुए छत्तीसगढ़ महतारी और देश के वीर सपूत शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। शहीद को नमन करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों और युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बनेगी। देश उनके सर्वाेच्च बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।इस गरिमामय समारोह में राज्य के राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस संवेदनशील अवसर पर विधानसभाध्यक्ष डॉ. सिंह ने शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के परिजनों (पुत्री प्रिया खोण्डे और भाई प्रभाकर खोण्डे) से बेहद आत्मीयता के साथ मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना।अपने प्रवास के दौरान डॉ. रमन सिंह सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने नवनिर्मित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात विधानसभा अध्यक्ष भाटापारा स्थित शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर फ्लाइट लेफ्टिनेंट शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण किया। इस ऐतिहासिक गरिमामय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री केदारनाथ गुप्ता, पूर्व विधायक श्री शिवरतन शर्मा और डॉ. सनम जांगड़े उपस्थित थे। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, जनप्रतिनिधिगणों के साथ-साथ बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा और भारी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।
- बिलासपुर / अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून 2026 को बिलासपुर के बी.आर. यादव स्मृति राज्य स्तरीय खेल परिसर, बहतराई इंडोर स्टेडियम में जिला स्तरीय योग कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष का विषय “योगा फॉर हेल्दी एजिंग” रखा गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 7 बजे से सामूहिक योगाभ्यास एवं विभिन्न योग आसनों का प्रदर्शन किया जाएगा।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में कार्यक्रम की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। आयोजन की व्यापकता को देखते हुए विभिन्न विभागों को आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, उद्यानिकी विभाग, खाद्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा आयुष विभाग सहित अन्य विभाग समन्वित रूप से आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।जिले के सभी जनपद पंचायतों, नगरीय निकायों तथा शैक्षणिक संस्थानों में भी योग दिवस के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। योग दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पौधरोपण, बीज वितरण, स्वच्छता अभियान एवं पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों, स्काउट-गाइड, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) तथा अन्य सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।आयोजन स्थल पर प्रतिभागियों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों एवं चिकित्सा दलों की तैनाती की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता प्रदान की जा सके।योग दिवस की तैयारियों की समीक्षा के लिए 16 जून को कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं जिले में योग के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।जिला प्रशासन ने नागरिकों से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।
- - प्रजनन काल में मछलियों के संरक्षण हेतु बंद ऋतु घोषितदुर्ग / वर्षा ऋतु में मछलियों की वंश वृद्धि (प्रजनन) को दृष्टिगत रखते हुये उन्हें संरक्षण देने हेतु राज्य में छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम-1972 की धारा-3 उपधारा-2 (दो) के तहत् 16 जून से 15 अगस्त तक की अवधि को ’’बंद ऋतु (क्लोज सीजन)’’ के रूप में घोषित किया गया है।उप संचालक मत्स्य सुश्री सीमा चन्द्रवंशी से मिली जानकारी अनुसार जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों में जिनका संबंध नदी नालों से नहीं है, के अतिरिक्त जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर को छोड़कर, सभी प्रकार के जल संसाधनों में 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक मत्स्याखेट कार्य पूर्णतः निषिद्ध रहेगा। इन नियमों का उल्लंघन करने पर छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के नियम-3 (5) के अंतर्गत अपराध सिद्ध होने पर एक वर्ष का कारावास अथवा 10,000 रूपये का जुर्माना अथवा दोनो एक साथ होने का प्रावधान है। उक्त नियम केवल छोटे तालाब या अन्य जल स्त्रोत जिनका संबंध किसी नदी नाले से नहीं है, के अतिरिक्त जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर में लागू नहीं होगें।
- दुर्ग / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 12 वर्ष के सफल और गौरवशाली कार्यकाल के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण प्रदेश के साथ-साथ जिले में भी ’विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, आम जनता को सरकार की नीतियों, विकास कार्यों और उपलब्धियों से रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से राजेन्द्र पार्क दुर्ग में भव्य तीन दिवसीय छायाचित्र (फोटो) प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी 18 जून 2026 से 20 जून 2026 तक प्रतिदिन पूर्वाह्न 10.00 बजे से लेकर रात्रि 10.00 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। इस विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी में सरकार द्वारा विगत वर्षों में देश व प्रदेश के विकास और समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए चलाई जा रही प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को आकर्षक चित्रों व जीवंत वृत्तांतों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में मुख्य रूप से आयुष्मान भारत, आयुष्मान वय वंदना योजना, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी मील का पत्थर साबित होने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके सफल हितग्राहियों की प्रेरक कहानियों को रेखांकित किया जाएगा। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना और विगत 12 वर्षों में हुए उल्लेखनीय व ऐतिहासिक कार्यों की झलक दिखाना है। जिले के सभी नागरिकों, प्रबुद्धजनों और छात्र-छात्राओं से इस तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन करने और शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है।
- - कार्यक्रम अंतर्गत जिले में 18 जून से तीन दिवसीय शिविरों में होगा योजनाओं का पंजीयन और त्वरित निराकरणदुर्ग / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 12 वर्ष के सफल कार्यकाल के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण प्रदेश में ’विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में, आम जनता को केन्द्र एवं राज्य सरकार की समस्त जनकल्याणकारी एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिले के प्रत्येक राजस्व अनुविभाग स्तर पर तीन दिवसीय वृहद पंजीकरण शिविरों का आयोजन 18 जून 2026 से 20 जून 2026 तक किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इसके सफल क्रियान्वयन हेतु कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने शिविरों के माध्यम से मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं के लिए नए पंजीकरण, त्रुटि सुधार और आम जनता की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निवारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। शिविरों के सुचारू संचालन और सफल क्रियान्वयन के लिए उन्होंने जिले के चारों राजस्व अनुविभागों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। जिसके अनुसार, दुर्ग अनुविभाग के लिए एसडीएम श्री हरवंश सिंह मिरी, धमधा के लिए एसडीएम श्री सोनाल डेविड, पाटन के लिए एसडीएम श्री लवकेश ध्रुव तथा भिलाई-3 अनुविभाग के लिए एसडीएम श्री महेश सिंह राजपूत को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साथ ही सभी नोडल अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शिविरों के आयोजन से पूर्व ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराएं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, आयुष्मान वय वंदना, पीएम सूर्यघर, पीएम स्वनिधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जलजीवन मिशन, पीएम कौशल विकास योजना और विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत नए हितग्राहियों का मौके पर ही पंजीयन किया जाएगा तथा उन्हें सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा। नोडल अधिकारियों को अपने अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले संबंधित विभागों की ड्यूटी आदेश जारी करने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस संबंध में अनिवार्य रूप से सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर स्थलों पर टेंट, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी नगर पालिक निगमों के आयुक्तों, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और नगर पालिका/नगर पंचायत के मुख्य अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।
- -जल संसाधन विभाग ने जारी किया अलर्टबिलासपुर /आगामी वर्षाकाल के दौरान आवश्यकता होने पर मिनीमाता बांगो बांध माचाडोली एवं हसदेव बराज दर्री से नदी में जल प्रवाहित किया जाएगा। सर्वसाधारण एवं कार्य एजेंसियों को सूचित किया जाता है कि बांध से नीचे, हसदेव नदी के किनारे, बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल संपत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जावें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान, ठेकेदार, औद्योगिक इकाईयों, संस्थानों आदि को भी सूचित किया जाता है कि वह अपनी परिसंपत्तियों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर कर लेवें। अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग उत्तरदायी नहीं होगा।बाढ़ क्षेत्रों में आने वाले संभावित ग्रामों में बांगो, लेपरा, नुनिया, कछार, कोनकोना, पोड़ीउपरोड़ा, चर्रा, पाराघाट, छिनमेर, सिरकीकला, केरा, पाथा, सिलियारीपारा, तिलसाभाटा, हथमार, छिर्रापारा, डग्गुपारा, करमीपारा, जुनापारा, लोरीडांड, टुंगमुड़ा, तिलाईडांड, नवागांव, झोरा, कौराघाट, पोड़ीखोहा, डोंगाघाट, धनगांव, लोटलोटा, नर्मदा, औराकछार, झाबू, सोनगुड़ा, नवागांव, स्याहीमुड़ी, जेलगांव, चारपारा, खैराभावना, बलरामपुर, भलपहरी, जोगीपाली, कोहड़िया, राताखार, गेवराघाट, इमलीडुग्गू, कुदुरमाल, बरीडीह, मोहरा, देवरी, चिचोली, कटबितला, झीका, ढिठोली, सहित अन्य गांव शामिल हैं।
- बिलासपुर /कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय एवं कृषि विभाग बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में 17 जून को सवेरे 11 बजे से एक दिवसीय जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन कृषि महाविद्यालय बिलासपुर के ऑडिटोरियम में किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव एवं दूसरे सत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। कार्यक्रम में जिले के लगभग 400 किसान कार्यशाला में शामिल होंगे।
- बिलासपुर /शासकीय नवीन पिछड़ा वर्ग बालक क्रीड़ा परिसर में वर्ष 2026-27 में प्रवेश के लिए खिलाड़ियों के चयन हेतु प्रवेश परीक्षा 24 जून 2026 को सवेरे 8 बजे से स्व. बीआर यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में आयोजित की जाएगी। चयन सूची 27 जून 2026 को जारी करने के पश्चात प्रवेश की कार्यवाही की जाएगी। खेल परिसर में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी एवं स्विमिंग विधाओं में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस वर्ष कुल 35 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा।प्रवेश के लिए आवेदक की आयु 31 दिसंबर 2026 की स्थिति में 14 वर्ष से कम हो वे सब जूनियर वर्ग में एवं 18 वर्ष से कम आयु के आवेदक वरिष्ठ वर्ग से क्रीड़ा परिसर की चयन परीक्षा में शामिल हो सकते है। इच्छुक अभ्यर्थियों को विभिन्न शारीरिक दक्षता एवं खेल परीक्षणों से गुजरना होगा। चयन प्रक्रिया में 50 मीटर एवं 100 मीटर दौड़, ऊँची कूद, शटल रेस (4×10 मी.), स्टैंडिंग ब्राड जंप, गतिशील स्फूर्ति परीक्षण, अपर बॉडी बेंडिंग, पुश अप, लेग रेसिंग, सिट-अप एवं 400 मीटर एवं 800 मीटर दौड़ शामिल हैं।चयनित खिलाड़ियों के लिए नवीन पिछड़ा वर्ग बालक खेल परिसर, बिलासपुर में निःशुल्क आवास, भोजन, खेल प्रशिक्षण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बहतराई स्थित मैदान, जिला खेल परिसर स्थित मैदान एवं स्विमिंग पूल का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आवासीय व्यवस्था, खेल किट, ट्रैक सूट, मोजे, जूते, भोजन तथा विभिन्न खेल सामग्री भी निःशुल्क प्रदान की जाएगी।
- - दुर्ग जिले के पांच गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम प्रारंभदुर्ग / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा), नई दिल्ली द्वारा जारी “मुकदमे-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में सामुदायिक मध्यस्थता” मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के पांच ग्रामों घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन किया गया है।इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि एवं अन्य सामुदायिक विवादों का न्यायालय पहुंचने से पूर्व ही आपसी संवाद, सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में निराकरण सुनिश्चित करना है। सामुदायिक मध्यस्थता की इस व्यवस्था से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में सहायता मिलेगी, बल्कि गांवों में सामाजिक समरसता, भाईचारा एवं आपसी विश्वास को भी मजबूती प्राप्त होगी।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा चिन्हांकित इन ग्रामों में सामुदायिक मध्यस्थता तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएं एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अंतर्गत स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, पैरामलीगल वालंटियर्स, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीण नागरिकों को मध्यस्थता की प्रक्रिया एवं उसके लाभों से अवगत कराया जाएगा।सामुदायिक मध्यस्थता एक ऐसी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली है, जिसमें पक्षकारों की स्वैच्छिक सहभागिता एवं आपसी सहमति के आधार पर विवादों का समाधान किया जाता है। यह प्रक्रिया सरल, त्वरित, कम खर्चीली तथा संबंधों को बनाए रखने वाली व्यवस्था के रूप में ग्रामीण समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने जिले के नागरिकों से अपील की गई है कि वे विवादों के समाधान हेतु संवाद एवं मध्यस्थता की संस्कृति को अपनाएं तथा ग्राम स्तर पर शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाएं। यह पहल वाद-मुक्त ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीण समाज में स्थायी शांति एवं सामाजिक एकता को बढ़ावा देगी।
- दुर्ग ।बाल सक्षम नीति 2022 के अंतर्गत 1 जून से 30 जून 2026 तक सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों के स्थायी रेस्क्यू एवं पुनर्वास के उद्देश्य से जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों में अभियान चलाकर सड़क पर रहने, घूमने तथा भिक्षावृत्ति, बाल श्रम में संलग्न बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में आज जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री राजकुमार जांबुलकर एवं जिला महिला बाल विकास अधिकारी अजय कुमार साहू (महिला एवं बाल विकास विभाग) के नेतृत्व में आईसीपीएस एवं चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम द्वारा बाल सक्षम नीति 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मार्केट और आस-पास के स्थानों पर बाल सक्षम नीति 2022 के विषय में सभी नागरिकों को जागरूक किया गया। साथ ही किसी प्रकार के आपात समय मे बालक /बालिका की सुरक्षा व सुरक्षित रेस्क्यू सहायता हेतु टोल फ्री नंबर 1098/112 मे कॉल करने की जानकारी प्रदान की गई।
- दुर्ग / दुर्ग संभाग में खेत बचाओ अभियान अंतर्गत ग्राम खैरझिटी में विगत दिनों आयोजित कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य जाँच कराने, नील हरित शैवाल, हरी खाद, जैव उर्वरक, जीवामृत आदि जैविक खादों तथा जैविक कीटनाशकों के उपयोग से टिकाउ खेती करने की सलाह दी गई। डी.ए.पी. उर्वरक के स्थान पर एस.एस.पी. व टी.एस.पी. नैनो डी.ए.पी. के उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन लेने की समझाइश दी गई।संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गबेल से प्राप्त जानकारी अनुसार विगत खरीफ में धान फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्हांेने आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पर पंजीयन के पश्चात् डिजिटल क्रॉप सर्वे के रकबे में पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राज्य शासन द्वारा किसान के खाते में नगद 15 हजार रुपए प्रति एकड़ आदान सहायता राशि दिए जाने के निर्णय एवं खरीफ वर्ष 2026 में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषको को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पर पंजीयन के पश्चात् डिजिटल क्रॉप सर्वे के रकबे में पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राज्य शासन द्वारा किसान के खाते में नगद 10 हजार रूपए प्रति एकड़ आदान सहायता राशि से किसानों को अवगत कराते हुए, उन्हें उच्चहन धनहा खेतों के मेड़ पार को समतल कर दलहन, तिलहन, मक्का फसल लगाने हेतु अपील की गई। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान योजना के तहत सरकार द्वारा खरीफ 2026 में भी दलहन व तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। इसकी जानकारी भी किसानो को दी गई। साथ ही समस्त मैदानी अमलों की जिला मुख्यालय में बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई। तथा खरीफ 2026 हेतु किसानो की मांग अनुरूप गुणवत्ता युक्त खाद-बीज एवं अन्य कृषि आदानो की समय में उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सहकारी समितियों मे पर्याप्त मात्रा में भंडारण एवं निर्धारित मूल्य पर त्वरित वितरण करने के निर्देश दिये गये।विभागीय योजना अंतर्गत उन्नत कृषि तकनीकी से संबंधित फसल प्रदर्शनो के आयोजन हेतु समय-सीमा में उपयुक्त किसानो और प्रदर्शन प्रक्षेत्र का चयन करने तथा गुणवत्तापूर्ण आदान सामग्री की व्यवस्था करने निर्देशित किया गया। योजना के प्रावधान अनुसार फसल प्रदर्शनो का आयोजन नहीं किये जाने संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधितो के विरूद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही के लिये तैयार रहने संचेत किया गया। श्रीमती गबेल द्वारा सभी जिले के उपसंचालक कृषि और प्रक्रिया प्रभारी (बीज निगम) को किसानों की मांग अनुसार दलहन, तिलहन के बीज उपलब्ध कराने निर्देशित किया गया है।इस वर्ष अलनीनो प्रभाव के कारण वर्षा में कमी को देखते हुए वैकल्पिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश सभी जिला उपसंचालक कृषि को दिए गए। अल्प वर्षा के दृष्टिगत शीघ्र और मध्यम अवधि के धान के किस्मो को बढ़ावा देने, धान के नमक घोल से बीज शोधन कर पुष्ट बीज का चयन करने, बीज को फफूंदनाशी और जैव उर्वरको से बीजोपचार करके बुआई करने, नैनो डी.ए.पी. से बीज उपचार या रोपा के जड़ का उपचार, धान फसलो की कतार विधि से सीधी बोनी, दलहन-तिलहन के रिज-फरो विधि से बोनी को बढ़ावा देने के निर्देश समस्त मैदानी अमलो को दिया गया। सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुये विभिन्न तकनीको के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण ओर भू-जल संवर्धन हेतु जागरूता लाने निर्देशित किया गया। खेत के मेंडो पर अरहर, तिल और कडुवे पत्तो वाले पेड़-पौधो को लगाकर वानस्पतिक अवरोध तैयार कराने की समझास दी गई ताकि एक खेत से दूसरे खेत में कीट व्याधि के प्रसार को कम किया जा सके।
- दुर्ग / आगामी मानसून 2026 को देखते हुए बाढ़ आदि नैसर्गिक विपत्तियों से निपटने हेतु छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के परिपालन में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जिला, अनुभाग व तहसील स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की हैं। साथ ही जिला कार्यालय दुर्ग के कक्ष क्रमांक 30 में बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है, जिसका दूरभाष नं. 0788-2320601 है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला स्तर पर अपर कलेक्टर श्री वीरेन्द्र सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अनुविभाग स्तर पर दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री हरवंश मिरी, धमधा के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री सोनल डेविड, भिलाई-03 के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री महेश सिंह राजपूत और पाटन के अनुविभागीय अधिकारी (रा.) श्री लवकेश ध्रुव को जिम्मेदारी दी गई है। इसी क्रम में तहसील स्तर पर तहसीलदार दुर्ग श्री प्रफुल्ल कुमार गुप्ता, तहसीलदार धमधा श्रीमती मीना साहू, तहसीलदार पाटन श्री पवन ठाकुर, तहसीलदार अहिवारा श्री राधेश्याम वर्मा, तहसीलदार बोरी श्री टी.एस. खरे और तहसीलदार भिलाई-03 श्री रवि विश्वकर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- -सीएम हेल्पलाइन, सुशासन तिहार तथा समय-सीमा के प्रकरणों की हुई विभागवार समीक्षाबालोद। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि विभिन्न विभागों में आमजनों से प्राप्त हो रहे आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। जिससे कि जिलेवासियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने सोमवार को संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए हैं। बैठक में आमजनों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने हेतु शुरू किए गए सीएम हेल्पलाइन के जिले में बेहतर क्रियान्वयन हेतु सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ ही सीएम हेल्पलाइन के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक एवं श्री अजय किशोर लकरा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष, डिप्टी कलेक्टर श्री आशीष पेंद्रो सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।बैठक में बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं का निर्धारित समयावधि में लाभ उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का गुणवत्तायुक्त ढंग से निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। सीएम हेल्पलाइन सेंटर सप्ताह के सातों दिन एवं 24 घण्टा संचालित रहेगा। इसके माध्यम से प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 एवं 18002333300 के अलावा वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप जैसे आधुनिक माध्यमों में से किसी भी एक माध्यम से किसी भी समय आसानी से अपना शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सीएम पोर्टल में शिकायत दर्ज होने के साथ ही उन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलेगी। जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता को उनके शिकायत से संबंधित विभाग, अधिकारी के पास लंबित होने की जानकारी तथा कार्यवाही की प्रक्रिया के अलावा समाधान में लगने वाले समय आदि से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाएगी। समय-सीमा की बैठक में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों के निराकरण की विभागवार समीक्षा की गई तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में समय-सीमा के लंबित प्रकरणों, सीएम जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन, पीजीएन अंतर्गत लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई।
- कलेक्टर ने आमजनों को सीड बाल प्रदान कर अभियान का किया शुभारंभबालोद ।बालोद को हरा-भरा बनाने जिला प्रशासन की अनूठी पहल मिशन अंकुर की शुरूआत सोमवार को संयुक्त जिला कार्यालय के जनदर्शन कक्ष में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने की। उन्होंने जनदर्शन में पहुॅचे लोगों से मुलाकात कर उन्हें सीड बाल प्रदान कर खाली जगहों में सीड बाल फेंकने प्रोत्साहित भी किया। शुभारंभ अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल, दुर्ग वनमंडल के वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल, जिला पंचायत के सीईओ श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, श्री अजय किशोर लकरा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।सीड बॉल मिट्टी, खाद और विभिन्न उपयोगी वृक्षों के बीजों को मिलाकर बनाई गई एक छोटी सी गेंद होती है। इसे रोपने के लिए गड्ढा खोदने की आवश्यकता नहीं होती। इसे हाई ट्रेंच, जंगल, खाली जमीनों, पहाड़ियों या बंजर इलाकों में फेंक दिया जाता है। मानसून की बारिश पड़ते ही यह अंकुरित होकर एक पौधे का रूप ले लेती है।मिशन अंकुर के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रजातियां (जैसे- नीम, पीपल, बरगद, मुनगा, करंज, कटहल, इमली आदि) के बीजो का उपयोग कर सीड बाॅल का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत स्व-सहायता समूह के सदस्यों के द्वारा 02 लाख 50 हजार नग एवं वन विभाग के द्वारा 01 लाख नग कुल 03 लाख 50 हजार नग सीड बाॅल बनाया गया है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने पानी के महत्व की जानकारी दी तथा पानी का सदुपयोग करने प्रेरित किया तथा पानी के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु सोखता गढ्ढा, रैन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष सभी के सहयोग से जिले में 03 लाख 50 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इस वर्ष भी जिले को हरभरा बनाने की सोंच को आगे बढ़ाते हुए 02 लाख 25 हजार से अधिक टेंªच का निर्माण किया गया है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि हमारे पास विभिन्न फलों जैसे- नीम, पीपल, बरगद, मुनगा, करंज, कटहल, इमली आदि के बीज रहते हैं, उसे हमें सुखाना है और मिट्टी से लपेट कर एक सीड बाल का रूप देना है, तथा खाली स्थानों पर उसे फेंकना है। जिससे वह बाल बारिश के पानी को सोखकर अंकुरित हो सकेगा और पौधे का रूप ले पाएगा। उन्होंने स्वसहायता समूह की दीदीयों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग से सीड बाल तैयार किया गया है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जनदर्शन में पहुंचे लोगों को सीड बाल प्रदान कर उन्हें जिले को हरभरा बनाने मंे अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने प्रोत्साहित भी किया।शुभारंभ कार्यक्रम को पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल और दुर्ग वनमंडल के वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल ने भी संबोधित कर लोगों को पेड़ का महत्व बताते हुए सीड बाल के माध्यम से जिले को हराभरा बनाने प्रोत्साहित किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि हम दो तरह से पेड़ उगा सकते हैं। जिसमें एक तरीका है पौधे लगाना, तो वहीं दुसरा तरीका है फलों के बीज को सीड बाल बनाकर रोपना, जिससे वह बारिश के पानी में अंकुरित होकर पौधे और पेड़ का रूप ले लेता है। इस अवसर पर बिहान दीदी और जनदर्शन में पहुंचे लोग मौजूद थे।
- भिलाईनगर। शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर जोन-1 स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वार्ड क्रमांक 10 लक्ष्मी नगर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया।प्लास्टिक मुक्त अभियान के दौरान फल ठेलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अनुज्ञप्ति लाइसेंस की जांच की गई तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर चालानी कार्रवाई की गई। निरीक्षण में कुल 15 प्रतिष्ठान/ठेलों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, जिन पर जुर्माना लगाया गया। कई फल ठेलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक पाए जाने पर 50 से 100 रुपए तक का जुर्माना लगाया गया। कुल 11 फल/सब्जी ठेलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग के लिए चालान किया गया। एक जूते वाले एवं एक रेडीमेड दुकान पर अनुज्ञप्ति लाइसेंस न होने/नियम उल्लंघन के कारण 500- 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया। सोनू चौहान, किशन, राहुल सोनकर, विक्की, छोटू सोनकर, सुजीत, सुनील, जोगिंदर, उमेश साह, लगन देवी, अजय, गणेश सहित अन्य दुकानदारों पर कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान कुल 2120 रुपए की राशि चालानी कार्रवाई के रूप में वसूली गई। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिक निगम भिलाई की टीम ने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद कर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
- एमसीबी/ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) द्वारा शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 19 जून 2026 (दिन- शुक्रवार) को रोजगार मेला/प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन प्रातः 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक जिला रोजगार कार्यालय, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित होगा। रोजगार मेले में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा भर्ती की जाएगी। इसमें Parisharam Human Resources Pvt. Ltd. द्वारा मीटर इंस्टॉलेशन पद हेतु 100 रिक्तियां (वेतन 15,000 से 20,000 रुपये), LIC अंबिकापुर द्वारा इंश्योरेंस एडवाइजर पद हेतु 50 रिक्तियां (कमीशन आधारित), Little Millennium Pre School मनेन्द्रगढ़ द्वारा टीचर पद हेतु 3 रिक्तियां (वेतन 5,000 से 6,000 रुपये) तथाAlekh Public School सिरौली द्वारा सिक्योरिटी गार्ड पद हेतु 1 रिक्ति उपलब्ध है।प्लेसमेंट कैंप पूर्णतः निःशुल्क है। इच्छुक अभ्यर्थियों को https://erojgar.cg.gov.in अथवा CG Rojgar Panjiyan App के माध्यम से पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अभ्यर्थियों को अपने साथ शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा पासपोर्ट साइज फोटो लेकर निर्धारित तिथि एवं स्थान पर उपस्थित होना होगा।




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