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- दुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में 06 जून 2026, शनिवार को अपरान्ह 5.00 बजे से कलेक्टर कार्यालय दुर्ग के सभाकक्ष में जिला स्तरीय सलाहकार समिति (डीसीसी) तथा जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीएलआरसी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में जिले के अंतर्गत आने वाले सभी बैंकों के जिला समन्वयकों, शाखाओं और संबंधित शासकीय विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। पिछली डीसीसी बैठक में सदस्यों की अनुपस्थिति और अधूरी जानकारी को कलेक्टर श्री सिंह एवं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अत्यंत गंभीरता से लिया गया है, तथा अनुपस्थित सदस्य बैंकों व विभागों के नाम आवश्यक कार्यवाही हेतु उनके नियंत्रक कार्यालयों को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इस बैठक में सभी सदस्यों की उपस्थिति अति आवश्यक है। समस्त जिला समन्वयक एवं संबंधित अधिकारियों को पिछले बैठक की कार्यवाही की रिपोर्ट, अपनी अधीनस्थ शाखाओं द्वारा शासकीय योजनाओं के अंतर्गत किए गए ऋण स्वीकृति एवं वितरण की अद्यतन जानकारी के साथ निर्धारित समय पर बैठक में उपस्थिति सुनिश्चित करने कहा गया है।
- दुर्ग. दुर्ग जिले में एक नये ट्रैवलर की ट्रेसिंग की गयी जो सुडान से आया है। कोई लक्षण नहीं, संपर्क का कोई इतिहास नहीं होने के कारण होम आइसोलेशन में है, वर्तमान में आज दिनांक तक कुल 04 अंतर्राष्ट्रीय यात्री आये हैं। जिसमें से 01 कांगो से दुर्ग 31 मई 2026 आयी हैं तथा 02 अंतर्राष्ट्रीय यात्री भिलाई में 02 जून 2026 को आये हैं, जिनमें से 01 इथोपिया से एवं 01 युगांडा से आये हैं। 04 जून 2026 को 01 ट्रैवलर सुडान से आया है।सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि चारों अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को होम आइसोलेशन में 21 दिन के लिए रखा गया हैं। जिनका प्रतिदिवस सुबह एवं शाम टेलीफोन के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ली जा रही हैं। वर्तमान में चारों यात्री स्पर्शाेन्मुख एवं पूर्णतः स्वस्थ हैं। उन्हंे किसी प्रकार की तकलीफ होने से ट्रेसिंग टीम / स्वास्थ्य विभाग / कंट्रोल रूम एवं कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, दुर्ग को जानकारी देने हेतु बताया जा रहा है।इबोला-वायरसलक्षण - बुखार, उल्टी, पेट दर्द, जोड़ो में दर्द, अत्यधिक थकान, सिर दर्द अधिक वाटरी डायरिया के लक्षण पाये जाते हैं।कैसे फैलते हैं - संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से एवं बॉडी फ्लूइड से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता हैं।जॉच - इसके लिए जॉच के लिए मुख्य रूप से आरटीपीसीआर जॉच किया जाता हैं।विशेषकर अफ्रीकी देशों में वर्तमान में इबोला-बायरस पाया गया हैं। जो कि 05 मई 2026 को मिला एवं 15 मई 2026 को पहचान किया गया एवं 17 मई 2026 को डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित किया गया।आइसोलेशन -अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों (विशेषकर अफ्रीकी देश) की एयरपोर्ट पर क्लीनिकल स्क्रीनिंग किया जा रहा हैं। जिसमें रिस्क कैटेगरी के आधार पर कैटेगरी 01 से 03 में चिन्हांकित किया जा रहा हैं। इबोला वायरस से प्रभावित देशो (विशेषकर अफ्रीकी देश) से अंतर्राष्ट्रीय यात्रा कर दुर्ग आये कैटेगरी 01 अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को 21 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रखा जाना हैं एवं 21 दिन तक प्रतिदिवस स्वास्थ्य निगरानी एवं स्वास्थ्य सलाह दिया जायेगा।
- 0- खुले में कचरा फेंकना और जलाना होगा पूर्ण प्रतिबंधित0- कचरे का संग्रहण चार पृथक श्रेणियों में होगादुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जिले को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से स्वच्छता अभियान की शुरुआत की गई है। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील में पारित कड़े आदेशों और विगत 5 मई 2026 को जारी गाइडलाइंस के परिपालन में जिले के ग्रामीण इलाकों में ’ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ को पूरी कड़ाई से लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत अब जिले में खुले में कचरा फेंकने, डंप करने, उसे जलाने या दबाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। नियमों की चौबीसों घंटे सख्त निगरानी करने और पर्यावरणीय मानकों को बनाए रखने के लिए जिला स्तर पर एक ’विशेष टास्क फोर्स’ (समिति) का भी गठन किया गया है, जो कचरा प्रबंधन से जुड़े हर मोर्चे पर पैनी नजर रखेगी। आज कलेक्टोरेट सभा कक्ष में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के अध्यक्षता में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जिला प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। उन्होंने इस अभियान के तहत कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि विगत दिवस अभियान अंतर्गत एक दिवसीय हाई-टेक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस कार्यशाला में जनपद पंचायत दुर्ग, धमधा एवं पाटन की समस्त 300 ग्राम पंचायतों के सरपंचों, सचिवों समेत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) व स्वच्छ भारत मिशन के 300 से अधिक मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों (बीपीएम, एरिया कोऑर्डिनेटर, पीआरपी, एफएल सीआरपी, कृषि, पशु व पोषण सखियों) को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इससे पूर्व विकासखण्ड स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों को इस अधिनियम के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है।सीईओ श्री दुबे ने अवगत कराया कि नए नियमों के मुताबिक, जिले की तस्वीर बदलने के लिए 5 बड़े मोर्चों पर कड़ाई से काम किया जाएगा, जिसमें स्रोत से ही कचरे का पृथक्कीकरण, शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कलेक्शन, वैज्ञानिक डिस्पोजल, पुराने डंपिंग यार्डों (लिगेसी वेस्ट) का खात्मा और स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाना शामिल है। आम नागरिकों के लिए अब अपने घरों से निकलने वाले कचरे को 4 श्रेणियों (गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट) में बांटकर देना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों या जल स्रोतों पर कचरा फेंकने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, अब बिना स्थानीय निकाय की पूर्व अनुमति के 100 से अधिक व्यक्तियों का कोई भी आयोजन नहीं किया जा सकेगा, और बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों (बल्क वेस्ट जनरेटर्स) को ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण कराकर अपने गीले कचरे के निपटान के लिए स्वयं कंपोस्टिंग या बायोमीथनेशन प्लांट लगाने होंगे। सीईओ श्री दुबे ने पावर पाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के मुख्य बिन्दु, महत्वपूर्ण कार्य, किन पर लागू होंगे, जिला कलेक्टर की भूमिका, जिला पंचायत की भूमिका, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी, मुख्य दायित्व, ग्राम पंचायत की भूमिका, बल्क वेस्ट जनरेटर्स, अपशिष्ट उत्पादक की जिम्मेदारी, लक्ष्य एवं समय-सीमा, गतिविधि तथा जिला द्वारा की गई कार्यवाही पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। बैठक में एडीएम श्री वीरेन्द्र सिंह, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण सहित सभी जनपद सीईओ एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
- 0- रेडियोलाॅजिस्ट की नियुक्ति के पश्चात मरीजों को मिलने लगेगी सोनोग्राफी सेवाओं का लाभबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिला चिकित्सालय बालोद में शीघ्र ही रेडियोलाॅजिस्ट की पदस्थापना हेतु प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जिला चिकित्सालय बालोद के मुख्य अस्पताल अधीक्षक डाॅ. आरके श्रीमाली ने बताया कि जिला चिकित्सालय में रेडियोलाॅजिस्ट की पदस्थापना हेतु संचालक स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ शासन को पत्र प्रेषित कर दी गई है। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय बालोद में रेडियोलाॅजिस्ट की अस्थाई संविदा नियुक्ति हेतु जनसंपर्क विभाग छत्तीसगढ़ शासन को बालोद जिले के वेबसाईट के माध्यम से विज्ञापन जारी करने हेतु पत्र भी प्रेषित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि रेडियोलाॅजिस्ट की नियुक्ति होने के पश्चात जिला चिकित्सालय बालोद में भर्ती मरीजों को सोनोग्राफी की बेहतर सुविधाएं मिलने लगेगी।
- बालोद. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के परिपालन में एसडब्ल्यूएम नियम-2026 के क्रियान्वयन एवं जागरूकता हेतु श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के मागदर्शन में ग्रामों में एसडब्ल्यूएम नियम-2026 के प्रचार-प्रसार हेतु डस्टबिन के माध्यम से घरों से निकलने वाले कचरे को गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक एवं स्वच्छता अपशिष्ट के रूप में अलग-अलग करने, कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, नियमित संग्रहण एवं प्लास्टिक का कम उपयोग करने तथा पुनर्चक्रण को बढ़ावा देंने ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि अभियान के अंतर्गत ग्रामीणों को गांवों में गीले एवं सूखे कचरे का पृथक संग्रहण सुनिश्चित करने तथा प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के संबंध में जानकारी दी जा रही है।उन्होंने बताया कि कचरे का उचित प्रबंधन केवल स्वच्छता का विषय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का एक प्रभावी माध्यम भी है। इसके साथ ही महिलाओं को प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, पुनर्चक्रण एवं उससे आय सृजन की संभावनाओं के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खुले में कचरा फेंकने एवं प्लास्टिक अपशिष्ट के अनियंत्रित उपयोग से पर्यावरण, जल स्रोतों तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह कचरे का पृथक्करण कर निर्धारित स्थानों पर ही उसका निपटान करने को कहा। इससे गांवों एवं शहरों को स्वच्छ रखने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के उद्देश्यों की प्राप्ति एवं स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ पर्यावरण के निर्माण के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
- 0- 16 जून से 17 जुलाई 2026 तक किया जाएगा दिव्यांग बच्चों का सर्वेक्षणबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष की अध्यक्षता में एक दिवसीय जिला स्तरीय दिव्यांग बच्चों के सर्वेक्षण की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा के दिशा-निर्देशों के तहत जिले में 0 से 18 वर्ष के दिव्यांग बच्चों के व्यापक सर्वेक्षण के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यशाला में बताया गया कि दिव्यांग बच्चों का सर्वेक्षण 16 जून से 17 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस पूरे कार्यक्रम को सुचारू रूप से लागू करने के लिए चार चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसके तहत आज विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के चिन्हांकन के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।इस कार्यशाला में शिक्षा, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के जिला व विकासखंड स्तर के अधिकारियों को दिव्यांगता के विभिन्न प्रकारों, लक्षणों, उनकी सही पहचान और सर्वेक्षण की बारीकियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी श्री जे.एल. उइके, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा श्री अवन कुमार जांगड़े, महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री समीर पाण्डेय और उपसंचालक समाज कल्याण विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
- बालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतो के अमृत सरोवर स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण एवं जल स्रोतों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता एवं संरक्षण संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान अमृत सरोवर के आसपास सफाई एवं रखरखाव अभियान चलाया गया। इसके साथ ही जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति जनसामान्य को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।गुरूर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत कपरमेटा में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता तथा ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन के महत्व पर भी जानकारी दी गई। इस दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि अधिनियम के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूल विकास तथा टिकाऊ ग्रामीण अवसंरचना निर्माण से जुड़े कार्यों को विशेष प्राथमिकता प्रदान की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।जिसके अंतर्गत आज ग्राम पंचायत कपरमेटा के मनरेगा कार्य स्थल पर चल रहे ट्रेन्च निर्माण कार्य में पौध रोपण एवं सीड बाल का रोपण किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने का संदेश दिया। पर्यावरण और सरोवरों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया गया। इसी तरह गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम डुडिया में अमृत सरोवर स्थल पर पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए उसके आसपास के क्षेत्रों में, सफाई एवं रखरखाव अभियान, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा जल एवं पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस का अभियान नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सतत् प्रयास और जनभागीदारी से वर्षा जल संचयन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण किया जा सकता की जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारीरियों सहित ग्रामीणजन उपस्थित थे।
- 0- मुख्य सचिव ने कलेक्टर, एसपी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल बैठक लेकर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश0- केन्द्र सरकार एवं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए परीक्षा के सफल आयोजन हेतु सभी तैयारियां सुनिश्चित करने निर्देशबालोद. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट यूजी परीक्षा का पुनः आयोजन 21 जून को किया जाएगा। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज महानदी भवन मंत्रालय नवा रायपुर से प्रदेश के सभी कलेक्टर, एसपी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल बैठक लेकर परीक्षा के आयोजन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों एवं अन्य सभी वरिष्ठ अधिकारियों को केन्द्र सरकार एवं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का शत प्रतिशत पालन करते हुए परीक्षा के सफल आयोजन हेतु सभी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर संयुक्त जिला कार्यालय के एनआईसी कक्ष में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।बैठक में मुख्य सचिव श्री विकासशील ने 21 जून को आयोजित नीट यूजी परीक्षा के सफल आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के संबंध में जानकारी दी। मुख्य सचिव ने कहा कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी है। जिसे ध्यान में रखते हुए परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित करें। जिससे की परीक्षा संचालन में कही कोई दिक्कत न हो। श्री शील ने कहा कि परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा केन्द्र में आने-जाने के लिए व्यवस्थाएं समुचित हो। इसके साथ ही अधिकारियों को इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा कि योगा दिवस से संबंधित गतिविधियों के कारण किसी भी परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा संचालन प्रभावित न हो। उन्होंने सभी अधिकारियों को यह भी ध्यान रखने को कहा कि नीट यूजी परीक्षा देने जा रहे परीक्षार्थियों में परीक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की घबराहट न हो। हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि सभी परीक्षार्थी अच्छे से परीक्षा दे पाएं। इसके लिए उन्होंने सभी कलेक्टरों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी की संयुक्त टीम के द्वारा बच्चों के काउंसलिंग की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने कलेक्टरों एवं अधिकारियों को 21 जून को आयोजित नीट यूजी परीक्षा के सफल आयोजन सुनिश्चित करने परीक्षा के एक दिन पूर्व 20 जून को परीक्षा संचालन के व्यवस्थाओं के संबंध में माॅकड्रिल भी कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने माॅकड्रिल हेतु पूर्व तैयारी करने को कहा। उन्होंने सभी परीक्षा केन्द्रों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा के प्रश्न पत्र एवं ओएमआर शीट एयरफोर्स के माध्यम से मूव होंगे। उन्होंने सभी कलेक्टर, एसपी को प्रश्न पत्रों को पूरी सुरक्षा के साथ रखने हेतु समुचित तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्री शील ने प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष की स्थापना कर परीक्षा के दिन पूरे समय कंट्रोल रूम को सक्रिय रखने को कहा। जिससे कि परीक्षा संचालन का प्रभावी नियंत्रण की जा सके।वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए समीक्षा बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में नीट परीक्षा 2026 का पुनः आयोजन प्रदेश के 19 शहरों में होगी। उन्होेंने बताया कि परीक्षा के सफल संचालन हेतु प्रदेश में कुल 127 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक ने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने एवं आपसी सहयोग एवं समन्वय के साथ कार्य करने का अनुरोध किया।--
- बालोद. शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था बालोद में अप्रेंटिस मेला का आयोजन 08 जून को आयोजित किया जाएगा। शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था बालोद के प्राचार्य ने बताया कि भारत सरकार की शिक्षुता प्रशिक्षण अधिनियम 1961 के अंतर्गत नेशनल अप्रेंटिसशीप प्रमोशन स्कीम के तहत् 08 जून को सुबह 10 बजे से अप्रेंटिसशीप मेला का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि समस्त शासकीय, निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं से आईटीआई उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थी अपने समस्त शैक्षणिक तथा आवश्यक प्रमाण-पत्र के साथ उक्त अप्रेंटिसशीप मेला में शामिल होकर अवसर का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
- बालोद. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले के सभी ग्राम पंचायतों में ’ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन नियम’ 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि विशेष ग्राम सभा ’स्वच्छ गाँव, सुरक्षित जलवायु’ अभियान के मुख्य घटक के रूप में आयोजित की गई। जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ’सम्पूर्ण स्वच्छता’ हासिल कर जन-भागीदारी को मजबूत करना है। इस दौरान ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के संबंध में कचरे को 04 श्रेणियों (गीला, सूखा, सेनेटरी और हानिकारक) अलग-अलग रखे जाने, घरेलू और संस्थागत स्तर पर जैविक कचरे से खाद बनाने को बढ़ावा देने पर चर्चा किया गया। इसके साथ ही सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से कम करने हेतु संकल्प लिया गया। साथ ही जल संरक्षण एवं जल निकायों का संरक्षण हेतु ग्रामसभा में निर्णय लिया गया। ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा स्वच्छता एवं स्वच्छता नियम 2026 एवं ग्राम पंचायत जिम्मेदारियों की जानकारी ग्राम दी गई तथा ग्राम सभा में उपस्थित सदस्यों को सामूहिक पर्यावरण शपथ भी दिलाया गया।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी के निर्देशानुसार उपसंचालक पंचायत श्रीमती काव्या जैन एवं जिला समन्वयक श्री लोकेश सिन्हा ने ग्राम पंचायत तरौद में आयोजित ग्रामसभा में ’ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन नियम’ 2026 के संबंध में जानकारी दी गई। ग्रामसभा में सचिव श्रीमती सीमा सेन द्वारा ग्रामसभा के सभी विषयों के संबंध में जानकारी दी गई। इसके साथ ही सरपंच श्री धर्मेन्द्र कुमार रामटेके ने ग्रामीणजनों को जलसंरक्षण के संबंध में जानकारी दी। ग्राम सभा में जनपद सदस्य श्रीमती महेश्वरी ठाकुर के द्वारा उपस्थित सभी सदस्यों को सामूहिक पर्यावरण शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान उपसरपंच श्री जगतराम पटेल, सभी पंचगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- -कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देशरायपुर । उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर बहुप्रतीक्षित केशकाल घाट फोरलेन बायपास रुट का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के साथ बायपास के दोनों छोरों का निरीक्षण कर बायपास के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। श्री साव ने अधिकारियों से कहा कि बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए यह बायपास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका तेजी से निर्माण कर आवाजाही शुरू करना सरकार की प्राथमिकता में है। लोक निर्माण विभाग द्वारा 308 करोड़ रुपए की लागत से 11.38 किमी लंबे केशकाल घाट बायपास का निर्माण किया जा रहा है। इस बायपास में दो वृहद और दो मध्यम पुल भी बनाए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कोंडागांव जिले के केशकाल शहर में केशकाल से सलना तक सड़क मजबूतीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण एजेंसी को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए। श्री साव नजदीक के बेड़मा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल अर्पण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। विधायक श्री नीलकंठ टेकाम और कलेक्टर श्रीमती नुपुर राशि पन्ना भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।
- - खेती-किसानी कार्य का रास्ता होगा आसानराजनांदगांव । सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत छुरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत बेलरगोंदी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ने एक किसान परिवार की समस्या का समाधान हुआ। ग्राम भोलापुर निवासी श्रीमती तिजकुंवर को शिविर में उनकी भूमि का तत्काल ऋण पुस्तिका प्रदान की गई। श्रीमती तिजकुंवर के पति श्री राम चरण ने बताया कि उनकी पत्नी के स्वामित्व की भूमि ग्राम मातेखेड़ा में स्थित है। खाता विभाजन होने के बाद भी उन्हें ऋण पुस्तिका प्राप्त नहीं हुई थी। ऋण पुस्तिका के अभाव में खाद, बीज एवं कृषि दवाइयों की खरीदी, कृषि ऋण प्राप्त करने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।सुशासन तिहार के दौरान आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उन्होंने अपनी समस्या से प्रशासन को अवगत कराते हुए ऋण पुस्तिका बनवाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन प्राप्त होते ही राजस्व विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर त्वरित कार्रवाई की गई और शिविर में ही उन्हें ऋण पुस्तिका उपलब्ध करा दी गई। ऋण पुस्तिका प्राप्त होने के बाद अब श्रीमती तिजकुंवर को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। वे कृषि ऋण, खाद-बीज वितरण तथा अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ सुगमता से प्राप्त कर सकेंगी। इससे उनके खेती-किसानी के कार्यों को नई गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों में संबल मिलेगा। उन्होंने ने शासन एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है तथा अब वे बिना किसी परेशानी के कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगी।
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राजनांदगांव । शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था राजनांदगांव में 16 जून 2026 को सुबह 9.30 बजे से विजन इंडिया सर्विस प्राईवेट लिमिटेड द्वारा मारूति सुजुकी मोटर इंडिया लिमिटेड हंसलपुर गुजरात प्लांट के लिए प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया गया है। आईटीआई संस्थानों से वर्ष 2018 से 2024 तक उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थी एवं प्रशिक्षण सत्र 2023-2025, सत्र 2024-2025, सत्र 2025-2026 व सत्र 2024-2026 के व्यवसाय फिटर, डीजल मैकेनिक, मोटर मैकेनिक, टर्नर, मशीनिष्ट, वेल्डर, विद्युतकार, टूल एण्ड डाई मेकर, सीओई (आटोमोबाईल), ट्रेक्टर मेकेनिक, पेंटर जनरल में प्रशिक्षणरत 18 वर्ष से 26 वर्ष आयु वर्ग के केवल पुरूष प्रशिक्षणार्थी अपने समस्त शैक्षणिक तथा आवश्यक प्रमाण 10वीं, आईटीआई, आधार कार्ड, पेन कार्ड, दो पासपोर्ट साईज फोटोग्राफ के साथ प्लेसमेंट कैम्प में शामिल हो सकते है।
- राजनांदगांव । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय, राजनांदगांव में जनभागीदारी समिति एवं महाविद्यालय परिवार के संयुक्त तत्वावधान में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से समाजसेवी कोमल सिंह राजपूत, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रवि सिन्हा, प्राचार्य डॉ. निर्मला उमरे, जनभागीदारी समिति सदस्य नमिताब जैन, पंकज कुरंजेकर, आशीष सुरे, राजेश यादव सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।इस अवसर पर समाजसेवी कोमल सिंह राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण प्रकृति का संतुलन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने जीवन में कम से कम एक पौधे का रोपण कर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रवि सिन्हा ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को शुद्ध नहीं करते, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थाओं की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। वृक्षारोपण के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने एवं उनकी नियमित देखभाल करने का आग्रह किया।महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निर्मला उमरे ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता विकसित करना शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देते हैं। संगोष्ठी सभा का सफल संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के अधिकारी एस आर कन्नौजे ने किया।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों दादूराम सोनकर, रितेश देवांगन, अजय श्रीवास्तव, रमेश सोनवानी,रघुवीर वाधवा सहित सभी पर्यावरण मित्रो ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया
- -फिट इंडिया साइकिलिंग अभियान का हिस्सा बनने नागरिकों से जुड़ने की अपीलमहासमुंद / खेल एवं युवा कल्याण महासमुंद द्वारा संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण रायपुर के निर्देशानुसार विश्व सायकल दिवस के उपलक्ष्य में 07 जून रविवार को सायकल रैली, योगा, जुम्बा, आत्मरक्षा जैसे गतिविधियों का आयोजन मिनी स्टेडियम महासमुंद से प्रातः 07 बजे से प्रारंभ किया जायेगा। साइकिल रैली मिनी स्टेडियम से सुबह 8 बजे प्रारंभ होकर बरोंडा चौक, शास्त्री चौक, गांधी चौक होकर मिनी स्टेडियम महासमुंद में समापन किया जाएगा। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किए गए फिट इंडिया आंदोलन का उद्देश्य सभी नागरिकों के दैनिक जीवन में फिटनेस को अभिन्न अंग बनाना है। इस अभियान को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 'मन की बात' के 117वें और 128वें एपिसोड में भी सम्मानित किया गया है, जो नियमित शारीरिक गतिविधि के माध्यम से स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को बढ़ावा देने में इसके महत्व को रेखांकित करता है। खेल अधिकारी खेल एवं युवा कल्याण महासमुंद ने जनप्रतिनिधि, अधिकारी/कर्मचारियों, खेल संघों के खिलाड़ियों, गणमान्य नागरिक, मेरा युवा भारत, एन सी सी, भारत स्काउट एंड गाइड, रेड क्रॉस, पत्रकार, छात्रावास, साईकिल स्पोर्ट्स, विभिन्न संगठन एवं संस्था, खेल प्रेमी, महाविद्यालय एवं विद्यालय के विद्यार्थियों से अपील किया हैं कि अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी करें। विश्व साइकिल दिवस 2026 समारोह में सुचारू भागीदारी और रिकॉर्ड रखने के लिए, सभी व्यक्तियों और समूहों से अनुरोध है कि वे आधिकारिक पोर्टल: https://fitindia.gov.in/world-bicycle-day पर पंजीकरण करें।
- -शपथ ग्रहण एवं छात्र-छात्राओं की विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गयामहासमुंद / विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामान्य वन मंडल महासमुंद अंतर्गत वन परिक्षेत्र महासमुंद द्वारा वन विद्यालय महासमुंद में वृहद स्तर पर पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष श्री ऐतराम साहू, पूर्व विधायक श्री विमल चोपड़ा तथा अन्य जनप्रतिनिधिगण भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण से हुई. जिसमें अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही विद्यार्थियों के लिए निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।मुख्य अतिथि विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने उपस्थित जनसमुदाय को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई तथा एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए वृक्षारोपण आवश्यक है। श्री ऐतराम साहू ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण स्वस्थ जीवन का आधार है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी महासमुंद, सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी महासमुंद, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन विद्यालय महासमुंद के प्रशिक्षु, वनकर्मी, सुरक्षा श्रमिक एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- -पशुपालकों से प्रतिदिन 17 हजार लीटर क्रय किया जा रहा है-वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित तथा 30 नई समितियां प्रारंभ किया जाएगामहासमुंद / जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख साधन है। 21वीं पशुगणना के अनुसार जिले में 1,78,533 गौवंशीय एवं 12,776 भैंसवंशीय सहित कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है। जिले में वर्तमान में दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय लगातार प्रगति पर है तथा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का क्रय-विक्रय किया जा रहा है।विभागीय जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बेहतर दर एवं समय पर भुगतान कर बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों में हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा प्रतिदिन 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा प्रतिदिन 1000 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इस प्रकार निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है। देवभोग दुग्ध महासंघ एवं निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष की तुलना में अधिक है।जिले में दुग्ध विपणन का कार्य दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। पिछले वर्ष जहां 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित थीं, वहीं शासन की "सहकारिता से समृद्धि" की मंशानुरूप 25 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालकों को उन्नत हरा चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है। हरा चारा एवं साईलेज पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु साईलेज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म, सेमरिया जिला रायपुर का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पशुपालकों को नेपियर, बरसीम, अजोला आदि हरे चारे के उपयोग हेतु कृषक संगोष्ठियों के माध्यम से लगातार प्रेरित किया जा रहा है।जिले में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने हेतु सेक्स सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है। इस तकनीक से अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा पशुपालकों को उन्नत नस्ल की दुधारू गायें प्राप्त होंगी।महासमुंद जिले में महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। नीति आयोग के सहयोग से महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है तथा उन्हें स्वरोजगार का अवसर प्राप्त हो रहा है। इसी प्रकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा महासमुंद जिले के 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है।हालांकि दाना एवं पशु आहार की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से पशुपालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा उनके द्वारा लगातार दूध की कीमतों में वृद्धि की मांग की जाती रही है। इसके बावजूद जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।
- - ग्राम में संचालित विकास कार्यों की समीक्षा की- विश्व पर्यावरण दिवस एवं एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के तहत ग्राम मुड़पार में विशेष ग्रामसभा आयोजित- ग्रामसभा में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने के संबंध में की गई चर्चाराजनांदगांव । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजनांदगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़पार में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रभारी सचिव श्री अविनाश चम्पावत, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, राज्य सलाहकार (एसबीएम-जी) श्रीमती अभिलाषा आनंद शामिल हुए। विशेष ग्राम सभा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया। ग्रामसभा में पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण तथा सतत ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रभारी सचिव श्री अविनाश चम्पावत ने ग्रामीणों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।प्रभारी सचिव श्री अविनाश चम्पावत ने ग्राम में संचालित विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए ग्रामीणों से सुझाव प्राप्त किए। उन्होंने गांव में अधिक पौधरोपण, नालियों पर सुरक्षा जाल अथवा ढक्कन लगाने तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित ग्राम वातावरण निर्माण करने कहा। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा अपनाकर परिवार बिजली व्यय में कमी ला सकते हैं तथा पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने ग्राम मुड़पार के ग्रामीणों को अधिक से अधिक योजना से लाभान्वित के लिए प्रोत्साहित किया। जिससे बिजली बिल शून्य होगा और अधिक बिजली का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं आगामी कार्यों की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। राज्य सलाहकार श्रीमती अभिलाषा आनंद ने स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, पुर्नचक्रण एवं उसके पर्यावरणीय तथा आर्थिक लाभों पर प्रकाश डालते हुए स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। ग्रामसभा में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, स्वच्छता एवं सतत ग्रामीण विकास के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने कहा गया। ग्रामीणों ने ग्राम को स्वच्छ, हरित एवं आदर्श ग्राम बनाने का संकल्प लिया। ग्राम सभा में जनपद पंचायत सीईओ श्री मनीष साहू ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सहायक कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) श्री फैज मेमन ने जल रक्षा मिशन एवं जिला समन्वयक डॉ. छोटेलाल साहू ने स्वच्छता के संबंध में ग्रामीणों को जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।
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राजनांदगांव। दीनदयाल भूमिहीन मजदूर कल्याण योजना अंतर्गत खातों में संशोधन की कार्रवाई पोर्टल के माध्यम से 10 जून 2026 तक की जा रही है। ऐसे हितग्राही जिनकी राशि विभिन्न कारणों से अंतरण नहीं हो पाई है, उनके खातों के संशोधन निर्धारित तिथि तक पोर्टल के माध्यम से करा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 196 तथा नगरीय क्षेत्र के 31 हितग्राहियों को खाता संशोधन निर्धारित अवधि तक कराने की अपील की गई है।
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-उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की
रायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कोण्डागांव जिला मुख्यालय में लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जिले के तीनों नगरीय निकायों कोंडागांव , केशकाल और फरसगांव में वर्षा ऋतु के पहले आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने, नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने तथा स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही सड़क, पुल एवं पुलिया निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने पर जोर दिया।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में कहा कि कोण्डागांव जिला विकास की असीम संभावनाओं से परिपूर्ण है। केशकाल घाट बायपास के निर्माण से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी, इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों से समय के साथ प्रभावी कार्यशैली अपनाने, नई तकनीकों का उपयोग करने तथा समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।श्री साव ने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र लंबे समय तक विकास की प्रतीक्षा करता रहा है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारी पूरी ऊर्जा, क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए टीम भावना के साथ कार्य करना आवश्यक है।उप मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को वर्षा ऋतु से पूर्व नालियों की सफाई पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने तथा अधिकारियों को अनिवार्यतः प्रातः भ्रमण करने के निर्देश दिए। द्वारा नियमित मॉर्निंग विजिट करने पर भी बल दिया। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों को मिशन मोड में पूर्ण करने तथा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों को स्वच्छ, सुंदर एवं सुविधायुक्त बनाने पर विशेष जोर दिया।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन के कार्यों में अपेक्षित प्रगति लाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सभी निर्माण एवं पेयजल योजनाओं का नियमित फील्ड निरीक्षण करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन सड़कों, पुलों एवं भवनों के निर्माण कार्यों की प्रगति का आकलन करते हुए कार्यों में तेजी लाने तथा उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने खेल विभाग की समीक्षा के दौरान खेल गतिविधियों के समन्वित एवं प्रभावी आयोजन सुनिश्चित करने को कहा।बैठक में जल प्रदाय परियोजनाओं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), आकांक्षी शौचालय निर्माण, राजस्व वसूली, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं सहित विभिन्न विभागीय योजनाओं एवं कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। कोंडागांव की कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक श्री पंकज चन्द्रा, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी और चारों विभागों के विभागाध्यक्ष कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। - -नए सोलर पंपों की स्थापना से हजारों ग्रामीणों को मिली राहत, जनजातीय क्षेत्रों में बहाल हुई जल आपूर्तिरायपुर । प्रदेश के दूरस्थ, पहाड़ी एवं जनजातीय अंचलों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों और निर्देशों से महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। मंत्री के मार्गदर्शन में सूरजपुर जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा बंद पड़े सोलर पेयजल पंपों की मरम्मत तथा नए पंपों की स्थापना कर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को पुनः सुचारु किया गया है।सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड सहित विभिन्न दूरस्थ ग्रामों में तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया गया। ग्राम करौटी-ए (परसापारा), कोलुहा भाटपारा एवं बैजानपाठ में नए मोटर पंप स्थापित कर सोलर पंपों को पुनः कार्यशील बनाया गया, जिससे ग्रामीणों को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने लगा है।इसके अलावा भैयाथान विकासखंड के दतिमा आमापारा इंद्रावास, कसकेला औरापारा तथा सूरजपुर विकासखंड के लटोरी कुशवाहापारा एवं मंजीरा फुलवारपारा में भी खराब सोलर पंपों की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति बहाल की गई। वहीं चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के भाटपारा गांव में नया मोटर पंप स्थापित कर लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का समाधान किया गया, जिससे विशेष रूप से पंडो समुदाय के परिवारों को बड़ी राहत मिली है।मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि प्रदेश के अंतिम छोर तक मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई की जा रही है, ताकि किसी भी ग्रामीण को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था बहाल होने पर राज्य सरकार, मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें घर के समीप ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। यह पहल ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने, महिलाओं एवं बच्चों के श्रम की बचत करने तथा जनजातीय अंचलों में जीवन स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
- रायपुर ।दुर्ग जिले में एक नये ट्रैवलर की ट्रेसिंग की गयी जो सुडान से आया है। कोई लक्षण नहीं, संपर्क का कोई इतिहास नहीं होने के कारण होम आइसोलेशन में है, वर्तमान में आज दिनांक तक कुल 04 अंतर्राष्ट्रीय यात्री आये हैं। जिसमें से 01 कांगो से दुर्ग 31 मई 2026 आयी हैं तथा 02 अंतर्राष्ट्रीय यात्री भिलाई में 02 जून 2026 को आये हैं, जिनमें से 01 इथोपिया से एवं 01 युगांडा से आये हैं। 04 जून 2026 को 01 ट्रैवलर सुडान से आया है। सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि चारों अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को होम आइसोलेशन में 21 दिन के लिए रखा गया हैं। जिनका प्रतिदिवस सुबह एवं शाम टेलीफोन के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ली जा रही हैं। वर्तमान में चारों यात्री स्पर्शाेन्मुख एवं पूर्णतः स्वस्थ हैं। उन्हंे किसी प्रकार की तकलीफ होने से ट्रेसिंग टीम / स्वास्थ्य विभाग / कंट्रोल रूम एवं कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, दुर्ग को जानकारी देने हेतु बताया जा रहा है।इबोला-वायरसलक्षण - बुखार, उल्टी, पेट दर्द, जोड़ो में दर्द, अत्यधिक थकान, सिर दर्द अधिक वाटरी डायरिया के लक्षण पाये जाते हैं।कैसे फैलते हैं - संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से एवं बॉडी फ्लूइड से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता हैं।जॉच - इसके लिए जॉच के लिए मुख्य रूप से आरटीपीसीआर जॉच किया जाता हैं।विशेषकर अफ्रीकी देशों में वर्तमान में इबोला-बायरस पाया गया हैं। जो कि 05 मई 2026 को मिला एवं 15 मई 2026 को पहचान किया गया एवं 17 मई 2026 को डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित किया गया।आइसोलेशन -अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों (विशेषकर अफ्रीकी देश) की एयरपोर्ट पर क्लीनिकल स्क्रीनिंग किया जा रहा हैं। जिसमें रिस्क कैटेगरी के आधार पर कैटेगरी 01 से 03 में चिन्हांकित किया जा रहा हैं। इबोला वायरस से प्रभावित देशो (विशेषकर अफ्रीकी देश) से अंतर्राष्ट्रीय यात्रा कर दुर्ग आये कैटेगरी 01 अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को 21 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रखा जाना हैं एवं 21 दिन तक प्रतिदिवस स्वास्थ्य निगरानी एवं स्वास्थ्य सलाह दिया जायेगा।
- -अनोखी स्थापत्य कला और इंटरलॉकिंग निर्माण शैली से पर्यटकों व शोधकर्ताओं को कर रहा आकर्षित-मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का झुका हुआ प्राचीन मंदिर, जो सदियों से प्राकृतिक चुनौतियों को दे रहा मातरायपुर । छत्तीसगढ़ की धरती प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है। इन्हीं अनमोल धरोहरों में शामिल है मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर क्षेत्र के समीप स्थित घाघरा मंदिर। यह प्राचीन मंदिर अपनी अद्भुत निर्माण शैली और रहस्यमयी अस्तित्व के कारण वर्षों से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। बिना किसी गारा, चूना या सीमेंट के, केवल पत्थरों को आपस में संतुलित (इंटरपिनिंग/इंटरलॉकिंग) कर निर्मित यह मंदिर भारतीय स्थापत्य कला और प्राचीन इंजीनियरिंग कौशल का अद्वितीय उदाहरण है।जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित घाघरा मंदिर को देखकर पहली नज़र में ही आश्चर्य होता है। सदियों पुरानी यह संरचना समय, मौसम और कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हुए आज भी मजबूती से खड़ी है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में भारी-भरकम पत्थरों को इस प्रकार संतुलित किया गया है कि उन्हें जोड़ने के लिए किसी अन्य बाहरी सामग्री की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। यही खूबी इसे देश की अनूठी पुरातात्विक धरोहरों की श्रेणी में खड़ा करती है।घाघरा मंदिर का एक ओर झुका हुआ होना इसकी सबसे रोमांचक विशेषताओं में से एक है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि किसी समय भूगर्भीय हलचल अथवा तीव्र भूकंप के कारण इसका संतुलन प्रभावित हुआ होगा। इसके बावजूद, आश्चर्यजनक रूप से यह संरचना आज भी पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है, जो प्राचीन शिल्पकारों की अद्वितीय दक्षता को प्रमाणित करती है।मंदिर के निर्माण काल को लेकर इतिहासकारों के बीच विभिन्न मत हैं। कुछ विद्वान इसे 10वीं शताब्दी की कलाकृति मानते हैं, तो कुछ इसे बौद्धकालीन स्थापत्य से जोड़कर देखते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह एक प्राचीन शिव मंदिर है, जहां श्रद्धालु विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। हालांकि, मंदिर के गर्भगृह के भीतर किसी प्रतिमा का न होना इसके रहस्य को और भी गहरा बना देता है, जो शोधकर्ताओं के लिए आज भी एक पहेली है। घाघरा मंदिर केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान का जीवंत प्रतीक है। जनकपुर से इसकी सुगम पहुंच और मार्ग में चारों ओर बिखरी प्राकृतिक सुंदरता यहां की यात्रा को और भी यादगार बना देती है। प्रकृति और इतिहास के इस अनूठे संगम को निहारने के लिए प्रदेश और देश भर से पर्यटक एवं इतिहासप्रेमी लगातार यहां पहुंच रहे हैं।
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-सफलता की कहानी
-श्री अन्न की खेती बन रही लाभ का नया माध्यमरायपुर / छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं और उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं । कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है।केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है। ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं।ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला का मानना है कि कृषक उन्नति योजना मोटे अनाज उत्पादक किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। योजना के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन मिलने से श्री अन्न की खेती का रकबा बढ़ रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन मुक्त होने के कारण आसानी से पच जाते हैं तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।पारंपरिक फसलों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं और मेहनत के साथ श्री अन्न की खेती ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है। - रायपुर / विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने शुकवार को नवा रायपुर के सेक्टर-19 स्थित छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल की केंद्रीय प्रयोगशाला परिसर में मौलश्री पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव आर. शंगीता, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के सदस्य सचिव राजु अगसिमनि सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।












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